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बचपन में फ्रूट जूस और शुगर ड्रिंक्स पीने से हाई BP का खतरा, स्टडी में दावा


एक ग्लास जूस को हमेशा से हेल्दी ऑप्शन माना जाता है। लोगों का मानना है कि सॉफ्ट ड्रिंक से ज्यादा हेल्दी फलों का जूस होता है। हालांकि सर्कुलेशन में एक स्टडी पब्लिश हुई है जिसमें बताया गया है कि अगर बच्चा अधिक मात्रा में फ्रूट जूस या शुगर वाली ड्रिंक्स पीता है तो बड़े होने पर उनमें हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ जाता है। 

 

इस स्टडी में पाया गया कि जो बच्चे और टीएनजर्स रोजाना चीनी वाली ड्रिंक्स की दो या उससे ज्यादा सर्विंग लेते थे। उनमें बाद में हाइपरटेंशन होने का खतरा 52% से ज्यादा था उनके मुकाबले जो हफ्ते में तीन बार स्वीट ड्रिंक पीते थे। वहीं, जो फ्रूट जूस 1.5 या उससे ज्यादा की सर्विंग लेते थे। उनमें  35% ज्यादा खतरा पाया गया, उनके मुकाबले जिन्होंने कभी कोई फ्रूट जूस नहीं पिया। 

 

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स्टडी में क्या पाया गया?

इस स्टडी में पाया गया कि अगर आप फल खा रहे हैं तो कोई नुकसान नहीं है। इस स्टडी में न्यूट्रिशन प्रिंसिपल के सिद्धांत को बताया गया है जिसके मुताबिक चीनी की मात्रा के साथ-साथ उसका सोर्स भी मायने रखता है। साबुत फल में मिलने वाली चीनी का शरीर पर बहुत ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ता है। रोजाना चीनी वाली ड्रिंक्स की जगह पर एक साबुत फल खाते हैं तो हाइपरटेंशन का खतरा 22% कम हो गया। वहीं अगर आप फलों के जगह पर साबुत फल लेते हैं तो खतरा 19% तक कम हो जाता है।

चीनी से क्यों बढ़ता है बीपी?

साबुत फल में फाइबर होता है जो पाचन को बेहतर करता है और चीनी धीरे एब्जॉर्ब होता है जिससे ब्लड में ग्लूकोज और इंसुलिन का स्तर धीरे-धीरे बढ़ता है। इस दौरान एकदम से शुगर का लेवल नहीं बढ़ता है। जबकि फलों का जूस बनाने से उसका फाइबर काफी हद तक निकल जाता है और शरीर में शुगर एकदम से एब्जॉर्ब होता है। ब्लड में लगातार ग्लूकोज और इंसुलिन का लेवल बढ़ने से इंसुलिन रजिस्टेंट बढ़ता है। इससे सिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम एक्टिव होता है जो ब्लड प्रेशर को बढ़ाने का काम करता है।

 

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शुगर वाली ड्रिंक्स में फ्रुक्टोज की मात्रा अधिक होती जो मुख्य रूप से लिवर में मेटाबोलाइज होती है। जब लिवर के आसपास फैट जमने लगता है तो फैटी लिवर की समस्या हो सकती है, ट्राइग्लिसराइडस और पेट के आसपास फैट जमा होने लगता है। जब शुगर की मात्रा अधिक होती है तो नाइट्रिक ऑक्साइड का स्तर कम हो जाता है जिससे ब्लड वेसल्स ठीक से फैल नहीं पाती है और ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। इसके अलावा फ्रक्टोज के टूटने से यूरिक एसिड बनता है। यूरिक एसिड का लेवल बढ़ने से ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचता है, साथ ही नाइट्रिक ऑक्साइड का लेवल भी कम हो सकता है। इससे ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ जाता है।


वहीं, साबुत फल में पोटैशियम, फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और पॉलीफेनॉल होता है। ये सभी चीजें ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद करती है। इस वजह से साबुत फल में मौजूद फाइबर हृदय के लिए नुकसानदायक नहीं होता है। यह स्टडी भारत के लिए भी जरूरी है। भारत में पैकेज्ड फ्रूट जूस, चीनी वाली ड्रिंक्स का मार्केट बढ़ रहा है। पेरेंट्स अपने बच्चों को पैकेट वाली जूस पीने के लिए देते हैं जिसमें पोषक तत्व न के बराबर होते हैं। आप बच्चों को जूस की जगह पर साबुत फल खाने को दें।

सावन का महीना क्यों है खास? इन धार्मिक घटनाओं ने बढ़ाया इस महीने का महत्व


हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक सावन का महीना बेहद खास है क्योंकि यह भगवान शिव का प्रिय महीना है। इसी वजह से कई भक्त भगवान शिव की आराधना करते हैं। साथ ही कई भक्त कांवड़ यात्रा में भी शामिल होते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस महीने देवताओं से जुड़े कई प्रसंग हुए थे, जिस वजह से इस महीने का महत्व और बढ़ जाता है। इसी महीने भगवान शिव ने माता पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। इसके अलावा भगवान राम के पुत्र लव और कुश का भी इसी महीने जन्म हुआ था।


इस साल सावन 30 जुलाई से शुरू होकर 29 अगस्त को समाप्त होगा। हिन्दी पंचांग के अनुसार इस महीने में चंद्रमा श्रवण नक्षत्र में होता है, इसलिए इसे श्रावण मास भी कहा जाता है। हिन्दू धर्म के कई जानकारों का मानना है कि जो व्यक्ति इस महीने में हर दिन सच्चे श्रद्धा भाव से शिवलिंग पर जल चढ़ाता है, उस पर भगवान शिव की हमेशा कृपा दृष्टि बनी रहती है।

 

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सावन महीना क्यों है शुभ?

इसी महीने धर्म से जुड़ी ऐसी कई घटनाएं हुई थीं, जो इस महीने को बेहद खास बनाती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी महीने भगवान शिव ने अपने भक्त मार्कण्डेय पर कृपा बरसाई थी। उनकी जान बचाने के लिए यमराज को भस्म कर दिया था। यह महीना इसलिए भी खास माना जाता है क्योंकि इसी महीने भगवान शिव ने माता पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। इसके अलावा इस महीने कुछ देवताओं का जन्म भी हुआ था।

 

पार्वती मां को स्वीकारा – पौराणिक कथाओं के मुताबिक इसी महीने माता पार्वती ने कठोर व्रत और तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें प्रेमपूर्वक पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। साथ ही इसी महीने भगवान शिव माता पार्वती के साथ पृथ्वी लोक आए थे। इसी वजह से सावन महीने में सभी भक्त भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं। जिस दिन भगवान शिव ने माता पार्वती को स्वीकार किया था, उसी दिन हरियाली तीज मनाई जाती है।

 

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शिव जी बने थे नीलकंठ – सावन महीने में ही समुद्र मंथन हुआ था। उस दौरान भगवान शिव ने मंथन से निकला विष पी लिया था, ताकि सृष्टि के प्राणियों की रक्षा हो सके। भगवान शिव के विषपान के बाद ही उन्हें नीलकंठ कहा जाने लगा। विष के प्रभाव को कम करने के लिए भक्त हर दिन जलाभिषेक करते हैं। भगवान शिव से जुड़ी इन्हीं विशेष घटनाओं की वजह से सावन महीने को अत्यंत शुभ और पवित्र माना जाता है।

 

नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।

न न करते कैसे जंग में कूदा सऊदी अरब? कूटनीति और पाकिस्तान… कुछ भी नहीं आया काम


अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग में खाड़ी देशों की कोशिश बचने की रही है। सऊदी अरब ने पाकिस्तान के साथ कूटनीति का सहारा लिया। पिछले साल एक रक्षा समझौता भी किया, ताकि तेहरान पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया जा सके। तमाम कोशिशों की बावजूद सऊदी अरब की जंग में एंट्री हो चुकी है। हालांकि यह तेहरान और रियाद के बीच कोई प्रत्यक्ष जंग नहीं है। ईरान के प्रॉक्सी ने रियाद के खिलाफ नया मोर्चा खोला तो जवाब में सऊदी अरब ने भी बमबारी की। लेकिन दुनियाभर के विशेषज्ञों को अब युद्ध के अन्य क्षेत्रों में फैलने का खतरा सताने लगा है।

 

सऊदी अरब और ईरान के बीच नहीं बनती है। यह सबको पता है। जंग शुरू होने से पहले ही ईरान ने सभी खाड़ी देशों को चेतावनी दी थी कि अगर उन्होंने अपनी जमीन को ईरान के खिलाफ हमला करने में अमेरिका को इस्तेमाल करने की अनुमति दी तो तेहरान उन पर भी हमला करेगा। नतीजा यह हुआ कि अधिकांश खाड़ी देशों ने अमेरिका को ईरान पर हमला करने की अनुमति नहीं दी। लंबे समय तक कूटनीतिक रास्ता अपनाने का दबाव बनाया। अमेरिका ने इन देशों की जमीन का इस्तेमाल सिर्फ रक्षात्मक उपायों में किया।

 

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कूटनीति से बचता रहा सऊदी अरब

युद्ध के पहले और दूसरे चरण में ईरान ने सऊदी अरब, कुवैत, कतर, बहरीन, ओमान, जॉर्डन और संयुक्त अरब अमीरात पर हमला किया। अधिकांश हमले अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए थे। अन्य देशों की अपेक्षा सऊदी अरब पर हमले सीमित थे। कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। 

 

रिपोर्ट में दावा किया जाता है कि पाकिस्तान सेना प्रमुख ने इसी साल मार्च महीने में ईरान और सऊदी अरब के बीच एक गुप्त समझौता करवाया था। इसके तहत आईआरजीसी के मुखिया को पाकिस्तान के रास्ते अवैध ईरानी तेल के कारोबार की अनुमति मिली। आसिम मुनीर से जुड़ी एक कंपनी को पूरा काम सौंपा गया। दोनों देशों के जनरलों ने खूब मुनाफा कमाया। बदले में सऊदी अरब पर कोई हमला नहीं करने पर सहमति बनी।

 

जुलाई महीने में ईरान ने पहली बार सऊदी अरब पर मिसाइल दागी। इस पर पाकिस्तान ने नाराजगी जताई और समझौते को खतरे में डालने की धमकी दी। इसके बाद ईरान ने सऊदी अरब के प्रति संयम बरता।

अमेरिका पर बनाया बातचीत का दबाव

युद्ध शुरू होने के बाद से ही सऊदी अरब ने भी संयम का परिचय दिया। उसने अमेरिका पर बातचीत करने का दबाव बनाया। युद्ध की जगह वार्ता को महत्व देने पर जोर दिया। सऊदी अरब ने कई मौकों पर कहा कि जंग में उसे नहीं घसीटा जाना चाहिए। रियाद के रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह जंग उनकी नहीं है। अगर उलझे तो उनका ही नुकसान होगा। यही कारण है कि सऊदी अरब ने अमेरिका पर कूटनीतिक हल निकालने का खूब दबाव बनाया।

कहां से बिगड़ी सऊदी अरब की बात?

13 जुलाई को सना एयरपोर्ट पर हमला एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ। हूती विद्रोहियों का आरोप है कि यह हमला सऊदी अरब के कहने पर यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार ने किया। जवाबी कार्रवाई में हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के आभा एयरपोर्ट हमला किया। तेल संयंत्र को निशाना बनाया और 20 जुलाई को लाल सागर पर सऊदी अरब की नाकेबंदी की घोषणा की। जवाब में सऊदी अरब ने हूती विद्रोहियों के सैन्य ठिकानों पर बमबारी की। यहीं से ईरान के प्रॉक्सी और सऊदी अरब के बीच बात बिगड़ गई।

 

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सऊदी के हमलों से बढ़ा युद्ध का खतरा

हूती विद्रोहियों के साथ एकजुटता दिखाने के उद्देश्य से इराक में मौजूद ईरान समर्थित मिलिशिया ने भी सऊदी अरब के तेल सुविधा पर हमला बोल दिया। जवाब में सऊदी अरब ने अमेरिका के साथ मिलकर ‘पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज’ के ठिकानों पर भीषण बमबारी की। यह तीसरी बार था जब इराक से सऊदी अरब पर हमला किया गया। मगर सबसे हैरान की बात यह रही कि सऊदी अरब ने पहली बार सैन्य प्रतिक्रिया दी। 

क्या ईरान से सीधा भिड़ेगा सऊदी अरब?

इराक में भीषण बमबारी के बाद जंग के लाल सागर में हूती और बगदाद में ईरान समर्थित प्रॉक्सी तक फैलने का खतरा बढ़ गया है। विश्लेशकों का मानना है आज सऊदी अरब भले ही तेहरान के प्रॉक्सी से लड़ रहा है, लेकिन आने वाले दिनों में उसे प्रत्यक्ष तौर पर ईरान से भी लड़ना पड़ सकता है, क्योंकि इन समूहों को सैन्य साजो-सामान तेहरान से ही भेजा जाता है।

 

सऊदी अरब के साथ तनाव बढ़ने की आशंका इस वजह से भी है कि ईरान की अर्ध-सरकारी न्यूज एजेंसी मेहर के मुताबिक सऊदी अरब और अमेरिका के हमलों में आईआरजीसी के चार सदस्यों की जान गई है। बदले में ईरान जवाबी कार्रवाई कर सकता है।

क्या युद्ध का केंद्र बनेगा लाल सागर?

सऊदी अरब को पूर्व में हूती विद्रोहियों ने घेर रखा है। उत्तर-पश्चिम में इराकी मिलिशिया ने। खास बात यह है कि ईरान के ये प्रॉक्सी सऊदी अरब के तेल केंद्रों को निशाना बना रहे हैं, जो रियाद के लिए बेहद संवेदनशील है, क्योंकि उसकी पूरी अर्थव्यवस्था तेल पर टिकी है। तेल केंद्रों पर हमलों को रियाद किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा। उधर, नाकेबंदी के अलावा हूती विद्रोहियों ने लाल सागर पर टोल लगाने पर भी विचार करना शुरू कर दिया है। अगर ऐसा हुआ तो सऊदी अरब के साथ तनाव बढ़ना बिल्कुल तय है, क्योंकि होर्मुज के ठप होने के बाद से सऊदी अरब अपना अधिकांश तेल लाल सागर के रास्ते निर्यात करता है।

निधन के बाद मनमोहन सिंह को मिली क्लीन चिट, कोयला घोटाला में SC ने रद्द किया समन


पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह को उनके निधन के बाद सुप्रीम कोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में वर्ष 2015 में केंद्रीय जांच ब्यूरो ( CBI ) की विशेष अदालत द्वारा जारी समन आदेश को रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि जांच के बाद CBI पहले ही डॉ मनमोहन सिंह को क्लीन चिट दे चुका था, ऐसे में विशेष अदालत के पास उन्हें आरोपी के रूप में तलब करने का कोई उचित आधार नहीं था।

 

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी मोहन की पीठ ने डॉ मनमोहन सिंह की ओर से दायर अपील स्वीकार करते हुए CBI की क्लोजर रिपोर्ट को मान्य ठहराया और उनसे जुड़ी पूरी कार्यवाही समाप्त कर दी। हालांकि दिसंबर 2024 में डॉ मनमोहन सिंह का निधन हो चुका है लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विशेष अदालत की दिप्पणियां उनके खिलाफ थीं, इसलिए उनके आदेश की वैधता की जांत करना जरूरी था।

 

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निधन के बाद भी अदालत ने सुनी अपील

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि कानूनी तौर पर डॉ मनमोहन सिंह के निधन के बाद यह अपील अपने आप खत्म मानी जा सकती थी। उन्होंने मांग की कि CBI की विशेष अदालत ने जो प्रतिकूल टिप्पणियां की थीं, उन्हें रिकॉर्ड से हटाया जाए। सिब्बल ने कहा कि उन टिप्पणियों से पूर्व प्रधानमंत्री की छवि और सम्मान पर असर पड़ता है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी दलील से सहमति जताई और मामले की समीक्षा करने के बाद कहा कि विशेष अदालत का वह आदेश सही नहीं था।

SC ने CBI की क्लोजर रिपोर्ट को माना सही

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि CBI ने जांच पूरी होने के बाद हो क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थीं, जिनमें डॉ मनमोहन सिंह को किसी भी तरह के भ्रष्टाचार या आपराधिक भूमिका से मुक्त बताया गया था। इसके बावजूद विशेष CBI अदालत ने क्लोजर रिपोर्ट खारिज कर दी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत उनके सहित छह लोगों के खिलाफ संज्ञान ले लिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी की क्लोजर रिपोर्ट पर निर्णय लेते समय तय कानूनी सिद्धांतों का पालन नहीं किया गया, इसलिए विशेष अदालत का आदेश टिक नहीं सकता।

 

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मामला पूरी तरह बंद

सुप्रीम कोर्ट ने विशेष अदालत के 2015 के समन आदेश को निरस्त करते हुए CBI की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली और डॉ मनमोहन सिंह से जुड़ी पूरी कार्यवाही समाप्त कर दी। यह फैसला कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान आया। सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने कहा, ‘उस समय देश का माहौल अलग था, आज परिस्थितियां बदल चुकी हैं।’ सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के सम्मान और कानूनी प्रतिष्ठा की बहाली के रूप में देखा जा रहा है।

बाल झड़ने की समस्या से हैं परेशान? डाइट में इन 4 चीजों को खाने से करें परहेज


लोगों को लगता है कि बाल झड़ने की समस्या तनाव, प्रदूषण, खराब पानी और केमिकल वाले शैंपू को लगाने की वजह से होता है लेकिन डाइट भी उतनी जरूरी है। हमारे शरीर में हेयर फॉलिकल्स के टिशू सबसे ज्यादा ऐक्टिव है क्योंकि उसे सबसे ज्यादा पोषण की जरूरत होती है। डाइट में अधिक मात्रा में शुगर, अनहेल्दी फैट और बाहर का जंक फूड खाने से सूजन, स्ट्रेस हार्मोन, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस, पोषक तत्वों की कमी आपके बालों की ग्रोथ में रुकावट डालने का काम करते हैं।

 

किसी एक चीज को खाने से सीधा बाल झड़ने की समस्या नहीं होती है लेकिन कुछ चीजों का अधिक सेवन करते हैं तो बाल पतले होते हैं और झड़ने की समस्या बढ़ सकती है। आइए जानते हैं किन चीजों को खाने से परहेज करना चाहिए?

 

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इन चीजों को खाने से परहेज करें

मीठी चीजें

 

हमारे घरों में चाय के समय में लोग मीठा और नमकीन खाना पसंद करते हैं। अधिक मात्रा में शुगर खाने से ब्लड में शुगर और इंसुलिन का लेवल बढ़ता है। इंसुलिन की अधिक मात्रा होने से मेल हार्मोन का उत्पादन बढ़ता है जिसकी वजह से हेयर थिनिंग की समस्या होती है। अधिक मात्रा में शुगर खाने से सूजन की समस्या बढ़ती है. साथ ही कोलेजन को नुकसान पहुंचता है जिससे स्कैल्प को नुकसान पहुंचता है।

 

आप ताजे फल, कम मात्रा में खजूर और घर की बनी मिठाइयां खा सकते हैं। MDPI की स्टडी के मुताबिक अधिक मात्रा में शुगर वाली चीजें खाने से खासतौर से पुरुषों में बाल झड़ने की समस्या बढ़ जाती है।

 

डीप फ्राई स्नैक्स

 

समोसा, पकौड़ा, भुजिया, नमकीन और कचौड़ी खाने में स्वादिष्ट लगता है लेकिन अधिक मात्रा में खाने से अनहेल्दी फैट और कैलोरी जमा होती है। कई तली-भूनी चीजों को एक ही तेल में बार-बार पका देते हैं जिसकी वजह से शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ता है। इस वजह से अंदरुनी सूजन की समस्या बढ़ती है।

 

रिफाइंड कार्ब्स

 

रिफाइंड कार्ब्स में सफेद ब्रेड, बिस्कुट , मैदा वाले नान, इंस्टेट नूडल्स और अन्य पैकेट वाली चीजें। इन चीजों को अधिक मात्रा में खाने से शरीर में ब्लड शुगर का लेवल  बढ़ता है। जिन चीजों में ग्लाइसेमिक इंडेक्स ज्यादा होता है उनमें एक्ने की समस्या बढ़ जाती है। नई स्टडी के मुताबिक जिन चीजों का ग्लाइसेमिक इंडेक्स होता है उन चीजों को अधिक मात्रा में खाने से हेयर लॉस की समस्या बढ़ जाती है।

 

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शुगर वाली ड्रिंक्स

 

सॉफ्ट ड्रिंक, बोतल जूस, चाय, फ्लेवर वाले दूध में शुगर की मात्रा ज्यादा होती है। इन चीजों में पोषक तत्व ना के बराबर होते हैं। जब आप इन चीजों को रोजाना खाते हैं तो शुगर की मात्रा ज्यादा हो जाती है जो सूजन को बढ़ाने का काम करता है। पानी की जगह इन चीजों को पीने से डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है और इसका प्रभाव आपके स्कैल्प पर भी पड़ता है।

गुरु पूर्णिमा पर बृहस्पति जी के आशीर्वाद से काम बनेगा?


हिंदू पंचांग के हिसाब से आज का दिन बेहद शुभ है क्योंकि आज गुरु पूर्णिमा है। बुधवार का दिन ग्रह-नक्षत्रों के विशेष संयोग के साथ सभी 12 राशियों के लिए नए अवसर और संभावनाएं लेकर आया है। आज के इस पावन संयोग से लोगों की न सिर्फ बुद्धि बढ़ेगी, बल्कि व्यापार में भी लाभ मिलेगा। आज की तिथि का मूलांक 2 है, जिसका स्वामी चंद्रमा है। चंद्रमा का यह प्रभाव आपके मन में संवेदनशीलता, रचनात्मकता और रिश्तों में नया अपनापन लाने में सहायक सिद्ध होगा।

 

ग्रहों की स्थिति यह संकेत देती है कि आज के दिन करियर में धैर्य और संयम से लिए गए निर्णय बेहद लाभदायक रहेंगे। जहां कुछ राशियों के लिए करियर और आर्थिक मामलों में सकारात्मक परिणाम मिलने के योग हैं। इसके अलावा आज कुछ लोगों को सेहत और लेन-देन में थोड़ी सावधानी बरतनी होगी। कुल मिलाकर, आज की ऊर्जा सकारात्मक रहेगी। आज का दिन लोगों को अपनी क्षमताओं पर भरोसा रखकर आगे बढ़ने का संदेश देता है। आइए जानते हैं मेष से लेकर मीन तक सभी 12 राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन।

 

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राशिफल 

 

मेष राशि

 

आज ऑफिस में आपकी ऊर्जा सकारात्मक रहेगी। नौकरीपेशा लोगों को नए प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी मिल सकती है। व्यापार में अटका हुआ पैसा वापस मिलने के योग हैं। जीवनसाथी के साथ सामंजस्य बेहतरीन रहेगा।

आज क्या करें: गणेश जी को दूर्वा अर्पित करें।

आज क्या न करें: जल्दबाजी में कोई भी वित्तीय निवेश न करें।

 

वृषभ राशि

 

नौकरी में बदलाव का विचार बना रहे हैं तो थोड़ा धैर्य रखें। सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा। आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी। प्रेम जीवन में थोड़ी गलतफहमियां आ सकती हैं।

आज क्या करें: मंदिर में हरी मूंग की दाल दान करें।

आज क्या न करें: किसी भी व्यक्ति के साथ बहस  करने से बचें।

 

मिथुन राशि

 

बुध ग्रह का प्रभाव आपको व्यापार में बड़ा मुनाफा दिला सकता है। धन लाभ के नए स्रोत बनेंगे। पार्टनर के साथ रोमांटिक समय बिताने का मौका मिलेगा। अविवाहितों के लिए विवाह के अच्छे प्रस्ताव आ सकते हैं।

आज क्या करें: ‘ॐ बुं बुधाय नमः’ मंत्र का जाप करें।

आज क्या न करें: काम को टालने की आदत से आज बचें।

 

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कर्क राशि

 

आज का मूलांक 2 है, जिसके प्रभाव से आपकी रचनात्मक क्षमता बढ़ेगी। कला, साहित्य और मीडिया से जुड़े लोगों को मान-सम्मान मिलेगा। आर्थिक मामलों में किए गए प्रयास सफल होंगे।

आज क्या करें: शिवलिंग पर कच्चा दूध और जल अर्पित करें।

आज क्या न करें: भावुक होकर कोई निर्णय न लें।

 

सिंह राशि

 

दफ्तर में अधिकारियों से तारीफ मिलेगी काम थोड़ा बढ़ सकता है। व्यापारिक मामलों में रुकावटें दूर होंगी। आय के नए साधन बनने से मन प्रसन्न रहेगा। जीवन में मधुरता बनी रहेगी। दोस्तों के साथ शाम का समय मनोरंजक रहेगा।

आज क्या करें: सूर्य देव को तांबे के लोटे से जल अर्पित करें।

आज क्या न करें: अपनी योजनाओं का बखान हर किसी के सामने न करें।

 

कन्या राशि

 

आज आपकी बौद्धिक क्षमता आपको विरोधियों से आगे रखेगी। कोर्ट-कचहरी या पुराने विवादों का निपटारा आपके पक्ष में हो सकता है। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। जीवनसाथी के साथ भविष्य की योजनाओं पर चर्चा होगी।

आज क्या करें: गाय को हरा चारा खिलाएं।

आज क्या न करें: किसी से भी कड़वे शब्द न बोलें।

 

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तुला राशि

 

दफ्तर में सहकर्मियों से तालमेल बनाकर रखें। काम का दबाव महसूस हो सकता है। बजट का ध्यान रखकर ही खरीदारी करें। पार्टनर की भावनाओं का सम्मान करें। परिवार में किसी की सेहत को लेकर थोड़ी चिंता रह सकती है।

आज क्या करें: मां लक्ष्मी की पूजा करें और सफेद पुष्प चढ़ाएं।

आज क्या न करें: पैसों के मामले में किसी अनजान व्यक्ति पर भरोसा न करें।

 

वृश्चिक राशि

 

नौकरी में आपके काम की सराहना होगी। पैसों का लेन-देन करते समय लिखापढ़ी जरूर करें। शेयर बाजार से सतर्क रहें। पार्टनर के साथ अच्छा तालमेल आपको मानसिक तनाव से दूर रखेगा।

आज क्या करें: हनुमान चालीसा का पाठ करें।

आज क्या न करें: गुस्से और आवेश में आकर कोई फैसला न लें।

 

धनु राशि

 

विदेश या दूर स्थान से नौकरी या व्यापार के बेहतरीन अवसर मिल सकते हैं। विद्यार्थियों के लिए दिन शानदार रहेगा। आर्थिक निवेश भविष्य में बड़ा फायदा देगा। पारिवारिक माहौल सुखद रहेगा। 

आज क्या करें: माथे पर हल्दी का तिलक लगाएं।

आज क्या न करें: अपने लक्ष्यों से ध्यान भटकने न दें।

 

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मकर राशि

 

ऑफिस में कड़ी मेहनत के बाद ही परिणाम मिलेंगे। सहकर्मियों के साथ तालमेल बनाए रखना जरूरी है। नए काम की शुरुआत के लिए थोड़ा इंतजार करना बेहतर रहेगा। जीवनसाथी के साथ किसी बात को लेकर मतभेद हो सकता है।

आज क्या करें: शनिदेव के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं।

आज क्या न करें: नकारात्मक विचारों को अपने ऊपर हावी न होने दें।

 

कुंभ राशि

 

तकनीकी और अनुसंधान से जुड़े लोगों के लिए आज का दिन शानदार रहेगा। व्यापार में रुकी हुई डील पक्की हो सकती है। अचानक धन लाभ की संभावना है। दोस्तों का सहयोग मिलेगा।

आज क्या करें: जरूरतमंदों को फल या भोजन दान करें।

आज क्या न करें: ओवरकॉन्फिडेंस में आकर काम न बिगाड़ें।

 

मीन राशि

 

चंद्रमा की कृपा से आज आपकी बुद्धि तेज होगी, जिससे आप अपने काम पूरे कर पाएंगे। करियर में नई ऊंचाइयों को छूने का अवसर है। धन आगमन के योग मजबूत हैं। परिवार में खुशी का माहौल रहेगा। 

आज क्या करें: भगवान विष्णु को तुलसी पत्र और पीली मिठाई अर्पित करें।

आज क्या न करें: सेहत के प्रति लापरवाही बिल्कुल न बरतें।

 

नोट: यह राशिफल ज्योतिषीय मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।

जापान में 7.1 तीव्रता का भूकंप, 1 मीटर ऊंची समुद्री लहरें उठने की आशंका


जापान के क्यूशू द्वीप के कुमामोटो में मंगलवार दोपहर 7.1 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप की तीव्रता इतनी तेज है कि इसके बाद सुनामी की चेतावनी जारी की गई है। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) ने बताया है कि दक्षिणी जापान में एक मीटर तक समुद्री लहरें उठने की संभावना है।

 

जापान मौसम विभाग ने बताया कि भूकंप समुद्र की सतह से 10 किलोमीटर की गहराई में आया। अधिकारियों ने बताया कि इस भूकंप में किसी के भी हताहत होने या किसी नुकसान की सूचना नहीं है। हालांकि, तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की गई है।

 

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इन प्रान्तों में भूकंप की चेतावनी

 

जापान सरकार ने कुमामोतो के अलावा नागासाकी, कागोशिमा, फुकुओका, सागा, ओइता और मियाजाकी प्रान्तों में आपातकालीन भूकंप चेतावनी जारी की है। ये सभी इलाके क्यूशू नाम के द्वीप पर मौजूद हैं।

 

 

 

 

प्रशासन कर रहा भूकंप का आकलन 

 

स्थानीय प्रशासन भूकंप से हुए असर का आकलन कर रहा है और साथ ही सुनामी के खतरे पर भी लगातार नजर बनाए हुए है। इमरजेंसी टीमें अलर्ट मोड पर हैं और स्थिति पर करीब से नजर रखी जा रही है।

 

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जापान में आते हैं सबसे ज्यादा भूकंप

 

बता दें कि जापान दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां भूकंप सबसे ज्यादा आते हैं। इसी वजह से यहां भूकंप और सुनामी की चेतावनी देने वाला सिस्टम दुनिया के सबसे बेहतर सिस्टम्स में गिना जाता है।

10-12 लाख में बिका NEET का पेपर! CBI ने 13 आरोपियों के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट


NEET -UG 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो ( CBI ) ने बड़ा कदम उठाते हुए 13 आरोपियों के खिलाफ दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है। यह चार्जशीट CBI की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की ओर से दाखिल की गई है। मामले की सुनवाई के लिए गठित विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में बुधवार को इस पर सुनवाई हो सकती है।

 

CBI ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम अधिनियम, 2024 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। जांच एजेंसी का कहना है कि पेपर लीक मामले में एक संगठित नेटवर्क के जरिए प्रश्नपत्र को कई लोगों तक पहुंचाया गया।

 

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13 आरोपी चार्जशीट में शामिल

CBI की चार्जशीट में यश यादव, मंगीलाल बीवाल, दिनेश बीवाल, विकास बीवाल, शुभम खैरनार, धनंजय लोखंडे, प्रह्लाद कुलकर्णी, तेजस हर्षद कुमार, डॉ मनोज शिरुरे, शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर, मनीषा वाघमारे, मनीषा मंधारे और मनीषा संजय हवालदार को आरोपी बनाया गया है। सभी आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। जांच एजेंसी ने बताया कि मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है। CBI अब राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। इससे पहले मामले से जुड़े 47 NTA अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है।

 

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10 लाख में हुआ पेपर का सौदा

CBI के मुताबिक, आरोपी मंगीलाल बीवाल ने अपने बेटे विकास बीवाल के लिए NEET का प्रश्नपत्र हासिल करने के लिए शुभम खैरनार से संपर्क किया था। जांच के दौरान मंगीलाल के मोबाइल फोन से कथित तौर पर लीक हुआ प्रश्नपत्र बरामद किया गया। एजेंसी का दावा है कि मंगीलाल ने यश यादव से 10 लाख रुपये में लीक प्रश्नपत्र खरीदा था। पूछताछ में सामने आया कि विकास बीवाल की पहचान यश यादव से राजस्थान के सीकर में कोचिंग के दौरान हुई थी। CBI के अनुसार, शुभम ने सबसे पहले यश यादव को पेपर उपलब्ध कराया, जिसके बाद यह मंगीलाल, विकास और दिनेश बीवाल तक पहुंचा।

अभ्यर्थियों से 12 लाख तक वसूले

CBI का आरोप है कि मंगीलाल बीवाल ने लीक हुए प्रश्नपत्र को आगे कई अभ्यर्थियों तक पहुंचाया और इसके बदले करीब 12 लाख रुपये तक की रकम ली गई। जांच एजेंसी का कहना है कि इस मामले में कई लोगों की भूमिका सामने आई है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां या खुलासे हो सकते हैं।

 

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इस मामले में आरोपी यश यादव को अदालत ने पहले न्यायिक हिरासत में रहते हुए 21 जून को NEET-UG परीक्षा में शामिल होने और 22 जून को अपनी बहन की शादी में शामिल होने की अनुमति दी थी। CBI अब पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

स्किन टाइप के हिसाब से चुनें ब्लश, हर किसी की नजरें आप पर टिकेंगी


महिलाएं मेकअप लगाते समय कई प्रकार के प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करती हैं। उन्हीं में से एक ब्लश भी होता है जिससे त्वचा गुलाबों सी निखरी दिखती है। कई महिलाएं बहुत अधिक ब्लश लगाना पसंद करती हैं। कुछ को कम लगाना पसंद होता है। यह आपके मेकअप को कंप्लीट लुक देता है।

 

ज्यादातर लोगों को लगता है कि सभी ब्लश एक ही जैसा काम करता है। उनमें किसी तरह का अंतर का नहीं होता है लेकिन यह सच नहीं है। हमेशा ब्लश अपने स्किन टाइप के हिसाब से लगाना चाहिए। मार्केट में कई तरह के ब्लश मिलते हैं। आइए स्किन टाइप के हिसाब से जानते हैं किसे कौन सा ब्लश लगाना चाहिए?

 

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पाउडर ब्लश

पाउडर ब्लश सबसे आम और बजट फ्रेंडली होता है। आप इसका आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं। पाउडर ब्लश मैट, सेटिन और शिमर में आता है जो आपको नेचुरल निखार देने के काम करता है। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से ऑयली स्किन वाले लोगों को करना चाहिए। यह ब्लश आपके चेहरे से एक्स्ट्रा ऑयल निकलाने का काम करता है। इस का इस्तेमाल आप ऑफिश, कॉलेज और कैजुअल आउटिंग के लिए कर सकती हैं।

क्रीमी ब्लश

क्रीमी ब्लश की डिमांड मार्केट में तेजी से बढ़ रही है। इसे लगाने से आपको फ्रेश और नेचुरल लुक मिलेगा। इसे गालों पर लगाने से आपकी स्किन हेल्दी और फ्रेश दिखती है। इसे लगाने के लिए आप उंगलियों का, मेकअप स्पंज और ब्रश का इस्तेमाल कर सकती हैं। क्रीमी टेक्सचर उन लोगों के लिए अच्छा है जिनकी स्किन ड्राई है या फिर चेहरे पर फाइन लाइंस है। अगर आपको नो मेकअप लुक चाहिए तो क्रीमी ब्लश आपके लिए सबसे अच्छा ऑप्शन है। 

लिक्विड ब्लश

लिक्विड ब्लश का कलर बहुत अच्छा होता है और इसे त्वचा पर लगाने के बाद लाइट वेट फील होता है। आपको अगर नेचुरल लुक पसंद है तो इसके लिए एक से दो बूंद काफी है। ये ब्लश आसानी से फाउंडेशन और स्किन टिंट के साथ मिल जाते हैं और जल्दी से सूख जाते हैं। अगर आपको चमकदार और निखरी त्वचा चाहिए तो लिक्विड बल्श सबसे बढ़िया है। ये सभी स्किन टाइप के लिए है।

स्टिक ब्लश

जो लोग ट्रैवल करते हैं या फिर मॉर्निंग में बिजी शेड्यूल रहता है उनके लिए स्टिक ब्लश बेस्ट है। आप इसका इस्तेमाल टचअप के लिए भी कर सकती हैं। ज्यादातर स्टिक ब्लश में क्रीमी फॉर्मूला होता है जो त्वचा में आसानी से मिल जाता है। आप इसका इस्तेमाल होंठों, आंखों के ऊपर भी जरूरत पड़ने पर कर सकते हो।

टिंटेड बाम ब्लश

टिंटेड बाम ब्लश का इस्तेमाल स्किनकेयर और मेकअप दोनों में कर सकते हैं। आप ब्लश के साथ शिया बटर, जोजोबा ऑयल और विटामिन ई को मिला सकते हैं। ये आपकी त्वचा को मॉश्चराइज भी करेगा और हल्का पिंक कलर भी देगा। आप इसका इस्तेमाल लिप बाम और गालों पर टिंट की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं।

क्या आत्मा को रास्ता दिखाती थी ‘बुक ऑफ द डेड’? जानिए प्राचीन मिस्र का विश्वास


आज के दौर में हम मानते हैं कि जीवित व्यक्ति कठिन परिस्थितियों या चुनौतियों का सामना करता है, जबकि मिस्र के लोग इसके ठीक विपरीत विचार मानते थे। मिस्र के लोगों का मानना था कि व्यक्ति को मृत्यु के बाद कठिन मार्ग से गुजरना पड़ता है, तभी जाकर उसकी आत्मा को स्वर्ग में स्थान मिलता है। कुछ साल पहले मिस्र में पुरातत्वविदों ने हजारों साल पुरानी कब्रों की खोज की थी। इन कब्रों में एक ग्रंथ मिला था, जिसमें व्यक्ति की आत्मा के लिए मंत्र लिखे थे। इस ग्रंथ को मिस्र के लोग ‘कमिंग फोर्थ बाय डे’ कहते थे, जबकि 1842 में जर्मनी के इतिहासकार कार्ल रिचर्ड लेप्सियस ने इस ग्रंथ को ‘द बुक ऑफ द डेड’ नाम दिया था।

 

बुक ऑफ द डेड ग्रंथ को मिस्र के पुरातत्वविदों ने खोजा था, जिसमें स्वर्ग पहुंचाने वाले लगभग 200 मंत्र, प्रार्थनाएं और कई चमत्कारी श्लोक लिखे थे। मिस्र के लोगों का मानना था कि इन मंत्रों के जरिए आत्मा को मुक्ति मिलती है। अब इस ग्रंथ में मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा के बारे में क्या लिखा था?

 

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लिखे थे 200 जादुई मंत्र 

 

बुक ऑफ द डेड लगभग 2000 ईसा पूर्व का ग्रंथ है, जिसमें लिखे गए मंत्र कई महान पुजारियों ने लिखे थे। मिस्र के प्राचीन धर्म की मान्यता थी कि व्यक्ति को मृत्यु के बाद राक्षसों, मगरमच्छों और सांपों का सामना करना पड़ता था। इसी वजह से व्यक्ति के शव के साथ बुक ऑफ द डेड रखी जाती थी, जिसमें मृत व्यक्ति की आत्मा की रक्षा के लिए लगभग 200 मंत्र लिखे थे। इसमें मृत व्यक्ति की रक्षा के लिए अलग-अलग मंत्र थे। व्यक्ति की आत्मा को परलोक में कोई जीव न काटे, इससे जुड़े मंत्र भी इसमें लिखे गए थे। इसके अलावा मिस्र की लोक मान्यताओं के अनुसार, इस ग्रंथ में कुछ ऐसे मंत्र भी लिखे थे, जिन्हें बोलकर मृत व्यक्ति अपनी मनपसंद चीज हासिल कर सकता था।

 

हजारों साल पहले यह किताब सिर्फ राजाओं की कब्रों में रखी जाती थी। यानी इसका अधिकार केवल अमीर लोगों को मिला था। उस दौरान बुक ऑफ द डेड को भोजपत्र पर लिखकर शवों के पास रखा जाता था। धीरे-धीरे समय बदलने के बाद आम लोगों की कब्रों में भी यह किताब रखी जाने लगी, बस इन किताबों में किसी प्रकार के चित्र नहीं होते थे।

 

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आत्माओं की लगती थी अदालत

 

मिस्र की प्राचीन लोक मान्यताओं के मुताबिक, मृत्यु के बाद व्यक्ति को न सिर्फ स्वर्ग के लिए कठिन मार्ग से गुजरना पड़ता था, बल्कि आत्मा को जीवन की गलतियों की सजा भी मिलती थी। इस लोक मान्यता के मुताबिक, व्यक्ति की आत्मा को परलोक की अदालत में पेश किया जाता था, जहां न्याय करने वाले देवता एनुबिस और होरस थे, जो व्यक्ति के कर्मों का लेखा-जोखा रखते थे। व्यक्ति के हृदय को एक तराजू में रखा जाता था और दूसरी तरफ उसके पापों का लेखा रखा जाता था। अगर पापों का पलड़ा भारी होता, तो व्यक्ति की आत्मा को राक्षस सजा देते थे।

 

हालांकि इतिहासकारों के अनुसार, ‘बुक ऑफ द डेड’ को वास्तव में आत्मा को स्वर्ग पहुंचाने वाली जादुई किताब नहीं माना जा सकता। यह प्राचीन मिस्र की धार्मिक मान्यताओं, अंतिम संस्कार की परंपराओं और मृत्यु के बाद की यात्रा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण धार्मिक ग्रंथ था, जिसे उस समय के लोग आत्मा का मार्गदर्शक मानते थे।

 

नोट: यह लेख लोक मान्यताओं  पर आधारित है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।