अमेरिका और ईरान के बीच शनिवार को इस्लामाबाद में होने वाली अहम शांति वार्ता शुरू होने से कुछ घंटे पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ चेतावनी दे दी है। उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान में बातचीत असफल रही तो अमेरिकी युद्धपोतों को दुनिया के सबसे बेहतरीन हथियारों और गोला-बारूद से लोड किया जा रहा है।
न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए गए फोन इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, ‘हम रीसेट कर रहे हैं। हम जहाजों को सबसे अच्छे गोला-बारूद और हथियारों से भर रहे हैं, जो पहले से भी ज्यादा बेहतर हैं। पिछली बार हमने उन्हें पूरी तरह तोड़ दिया था, इस बार और बेहतर तैयारी है।’
ट्रंप ने यह बयान तब दिया जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस्लामाबाद के लिए रवाना हो चुके थे। दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण बातचीत शनिवार को शुरू होनी है। ट्रंप से जब पूछा गया कि क्या ये वार्ता सफल होगी, तो उन्होंने जवाब दिया, ‘हम लगभग 24 घंटे में यह जान लेंगे। बहुत जल्दी पता चल जाएगा।’
उन्होंने साफ कहा कि अगर बातचीत फेल हो गई तो अमेरिका अपने जहाजों को ‘सबसे बेहतरीन हथियारों से लोड करेगा और उन्हें बहुत प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करेगा।’ ट्रंप ने आगे कहा, ‘हम जहाजों को लोड कर रहे हैं। हम उन्हें पहले से भी ज्यादा स्तर पर हथियारों से भर रहे हैं ताकि पूरी तरह से विनाश किया जा सके।’
परमाणु कार्यक्रम पर की बात
ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी बात की। उन्होंने दावा किया कि ईरान अपने परमाणु हथियार हटा रहा है। ट्रंप ने कहा, ‘हमारे सामने तो वे कह रहे हैं कि सारे परमाणु हथियार और सब कुछ खत्म हो गया है लेकिन प्रेस में जाकर वे कहते हैं कि हमें यूरेनियम संवर्धन (enrichment) करना है।’
यह बैठक दुनिया भर में काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कई सालों से चला आ रहा है। अमेरिका का कहना है कि वह ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना चाहता है, जबकि ईरान अपना कार्यक्रम शांतिपूर्ण बताता है। अगर इस्लामाबाद में बातचीत नाकाम रही तो स्थिति और बिगड़ सकती है।
एक कपल पिछले 16 साल से अलग रह रहा है। अभी तक दोनों का तलाक भी नहीं हुआ है। यही मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने तलाक की याचिका दायर करने वाले शख्स को कहा है कि वह अपनी पत्नी को हर महीने 15 हजार रुपये की तय रकम देता रहे और शांत रहे। रोचक बात है कि महिला का कहना है कि वह अपने पति के घर लौटने और उसके साथ रहने को तैयार है। महिला का कहना है कि वह अपने पति के सामने भी यही प्रस्ताव कई बार रख चुकी है लेकिन वह इसके लिए राजी नहीं हो रहा है।
याचिका दायर करने वाले शख्स के वकील ने कोर्ट को बताया कि यह कपल पिछले 16 साल से अलग-अलग रह रहा है। इतना ही नहीं, पिछले 16 साल से यह शख्स अपनी पत्नी को हर महीने 15 हजार रुपये का मेंटेनेंस भी दे रहा है। इस शख्स का तर्क है कि दोनों के बीच में गहरे मतभेद हैं और दोनों एक-दूसरे के लिए ठीक नहीं हैं इसलिए अब तलाक की अनुमति दे दी जानी चाहिए।
वहीं, महिला इस तरह की बातों से इनकार कर रही है। उनका मानना है कि अभी भी इस रिश्ते को बचाने की गुंजाइश बाकी है। उनका कहना है कि वह अभी भी अपने पति के घर लौटने और उनके साथ रहने को तैयार हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सलाह भी दी कि उन्हें अपनी पत्नी को अपने साथ रखना चाहिए और समझौते की संभावना को इस तरह नहीं खत्म करना चाहिए।
रोचक बात है कि इस शख्स की उम्र अब 54 साल हो चुकी है। कोर्ट ने उनसे कहा, ’15 हजार रुपये आज के समय में कोई बहुत बड़ी रमक है। आप पैसे देते रहिए और खुश रहिए।’ इस पर याचिकाकर्ता ने कहा, ‘मेरे पास पैसे नहीं हैं। मेरी सैलरी 65 हजार रुपये है और अब मैं 54 साल का हो गया हूं। मुझे कोई पेंशन भी नहीं मिलने वाली है।’ हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने तलाक की अनुमति देने से इनकार कर दिया और कहा कि मौजूदा स्थिति ही बरकरार रखी जाए।
कोर्ट ने यह भी पूछा कि अगर तलाक होगा तो एलिमनी के रूप में कितने पैसे दिए जाने चाहिए? इस पर याचिकाकर्ता शख्स ने कहा कि उनके पास इतने पैसे नहीं हैं कि वह मौजदा रकम को बढ़ा सकें।
खराब लाइफस्टाइल का असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है। खासतौर से युवाओं में किडनी स्टोन (पथरी) के मामले तेजी से बढ़े हैं। नेशनल किडनी फाउंडेशन के अनुसार हर 10 में से 1 व्यक्ति किडनी स्टोन की बीमारी से पीड़ित है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि किडनी स्टोन किन कारणों से होता और इससे बचने का क्या तरीका है? इस बारे में हमने मोहाली के शैल्बी अस्पताल की कंसल्टेंट यूरोलॉजिस्ट और ट्रांसप्लांट फिजिशियन डॉक्टर सुखवीर कौर गिल से बात की।
डॉक्टर सुखवीर कौर गिल ने बताया, ‘किडनी स्टोन का मुख्य कारण सीडेंटरी लाइफस्टाइल, ओबेसिटी और डिहाइड्रेशन है।’ इस गंभीर बीमारी से बचने के लिए शरीर को हाइड्रेट रखना बहुत जरूरी है।
डिहाइड्रेशन की समस्या- पानी की कमी की वजह से पथरी होने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। अगर आप पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पी रहे हैं तो धीरे-धीरे यह समस्या गंभीर हो सकती है।
सेडेंटरी लाइफस्टाइल – पथरी होने का दूसरा मुख्य कारण सेडेंटरी लाइफस्टाइल है। यह एक जीवनशैली है जिसमें हम घंटों एक ही जगह पर बैठकर काम कर रहे हैं। वहीं पर बैठकर खा रहे हैं और फिजिकल एक्टिविटी ना के बराबर कर रहे हैं।
क्या एसी में बैठने से पथरी होती है?
एसी से सीधे तौर पर किडनी स्टोन होने का खतरा नहीं होता है लेकिन जैसे हम ऑफिस या वर्क फ्रॉम होम में एसी में बैठकर घंटों काम कर रहे हैं। उसके साथ नमक वाले चिप्स खा रहे हैं, कुकीज खा रहे हैं और पानी नहीं पी रहे हैं। ये चीजें शरीर में डिहाइड्रेशन की समस्या को बढ़ा देती है। इस वजह से पथरी होने का खतरा बढ़ सकता है
पथरी के लक्षण
पीठ, पेट के निचले हिस्से, या कमर में अचानक से तेज दर्द होना
बार-बार पेशाब आना
पेशाब आते समय जलन महसूस होना
पेशाब में खून आना
क्या होती है पथरी?
पानी नहीं पीने की वजह से यूरिन गाढ़ा हो जाता है। गाढ़ा होने के बाद यूरिन में जो मिनरल्स होते हैं वे क्रिस्टल बनकर किडनी में जमा होने लगते हैं। किडनी स्टोन के 80% से ज्यादा मामले में कैल्शियम ऑक्सालेट के होते है। दूसरे नंबर पर कैल्शियम फॉस्फेट रहता है। इसके अलावा यूरिक एसिड से भी स्टोन बनता है।
स्ट्रुवाइट स्टोन (Struvite Stones) किडनी में बनने वाली एक विशेष प्रकार की पथरी है जो मुख्य रूप से लंबे समय तक रहने वाले मूत्र मार्ग संक्रमण (UTI) के कारण बनती है। ये मैग्नीशियम, अमोनियम और फॉस्फेट से बनी होती हैं।
मरीज को सलाह दी जाती है कि अगर आपके यूरिन से स्टोन पास हो रहा है तो उसका टेस्ट करवाया ताकि पता चल जाएगा कौन सा स्टोन है? आज कल इस तरह के टेस्ट उपलब्ध है जिससे स्टोन के टाइप के बारे में पता चल सकता है। अगर हमें स्टोन पता लग जाएगा तो हम उन्हें उसके हिसाब से दवाएं देंगे।
जब स्टोन के बारे में नहीं पता है तो उन्हें कैल्शियम से जुड़ी सारी गाइडलाइन के बारे में बताते हैं।
पथरी के मरीज को रोजाना 2 से 3 लीटर पानी पीना चाहिए।
एक्स्ट्रा सॉल्ट न खाएं, जैसे कि आचार, फलों पर नमक न लगाकर न खाएं आदि।
कुछ चीजों में ऑक्सालेट की मात्रा ज्यादा होती है। उन चीजों को खाने से परहेज करने की सलाह दी जाती है जैसे की पालक, चॉकलेट, नट्स आदि।
पथरी के मरीज कैल्शियम को बिल्कुल ही बंद कर देते हैं। ऐसे में हमारी गाइडलाइन होती है कि बाहर से कैल्शियम सप्लीमेंट न लें। नेचुरल कैल्शियम तो शरीर के लिए जरूरी है। उसे लेना बंद नहीं करना है।
2026 के अप्रैल महीने में उत्तराखंड के 4 पवित्र तीर्थस्थलों में चारधाम की यात्रा शुरू होने वाली है। यह यात्रा 19 अप्रैल से शुरू होगी। इस दौरान लाखों की तादाद में लोग मंदिर के दर्शन करने आएंगे। उत्तराखंड के चारधाम यात्रा को बढ़ावा देने में आदि शंकराचार्य ने अहम योगदान दिया है। आदि शंकराचार्य ने हिंदू धर्म के पुनरुत्थान में बेहद अहम योगदान दिया है। उन्होंने पूरे देश में पदयात्रा कर भगवान की उपासना की थी। इसी प्रकार लगभग 8वीं शताब्दी में वह केरल से पदयात्रा करके उत्तराखंड पहुंचे थे, जहां आदि शंकराचार्य जी ने गंगोत्री से लेकर केदारनाथ तक की यात्रा की थी और पूरी दुनिया को चारधाम यात्रा करने के लिए प्रेरित किया था।
उत्तराखंड के चमोली जिला में आदि शंकराचार्य ने अपना पहला मठ जोशीमठ की स्थापना की थी। धार्मिक मान्यता के अनुसार आदि शंकराचार्य ने ही गंगोत्री, केदारनाथ, यमुनोत्री धाम को पुनः स्थापित कर उत्तराखंड की छोटा चारधाम यात्रा करने के लिए लोगों को प्रेरित किया था। अब सवाल उठता है कि आदि शंकराचार्य का चारधाम यात्रा में क्या योगदान है।
माना जाता है कि पूरे देश में आदि शंकराचार्य ने ही चारधाम यात्रा की अवधारणा लाई थी। इसके साथ उन्होंने ही उत्तराखंड के छोटे चारधाम को एक साथ पिरोया था। उत्तराखंड का छोटा चारधाम यानी यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के दर्शन करने के लिए लोगों को प्रेरित किया। आदि शंकराचार्य ने केवल ज्योतिर्मठ की स्थापना ही नहीं की, बल्कि बद्रीनाथ मंदिर की स्थापना के साथ ही केदारनाथ मंदिर में दुबारा से पूजा-पद्धति की शुरुआत भी की थी।
ज्योतिर्मठ की स्थापना
आदि शंकराचार्य ने उत्तराखंड यात्रा के दौरान जोशीमठ की स्थापना की थी, जो कि उनकी यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र था। यहीं उन्होंने अमर कल्पवृक्ष के नीचे तपस्या की थी। इस वजह से वहां ‘ज्योतिर्मठ’ की स्थापना की गई। यह बद्रीनाथ धाम का शीतकालीन निवास और ज्ञान का केंद्र बना।
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक आदि शंकराचार्य ने अलकनंदा नदी से भगवान बद्रीनारायण की मूर्ति को निकाला था। उसके बाद भगवान की मूर्ति को मंदिर में पुनः स्थापित किया था। इसके बाद मंदिर में रीति-रिवाजों के साथ पुजारियों द्वारा पूजा करवाई गई। बद्रीनाथ मंदिर का खास महत्व है। यह भारत के चार धामों में से एक है।
केदारनाथ में अंतिम समय
माना जाता है कि सिर्फ 32 वर्ष की उम्र में ही शंकराचार्य ने अंतिम समाधि ली थी। आदि शंकराचार्य केदारनाथ मंदिर के पास ही अपने जीवन के अंतिम क्षणों में रहे थे। इसी वजह से केदारनाथ मंदिर के ठीक पीछे आदि शंकराचार्य की समाधि है, जहां अक्सर भक्तजन दर्शन करने आते हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि नहीं की जाती है।
इजरायल की घरेलू खुफिया एजेंसी शिन बेट ने पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट की हत्या की साजिश रचने के आरोप में एक युवक को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार 22 वर्षीय युवक की पहचान अमी गैदारोव के रूप में हुई है। वह हाइफा का रहने वाला है। इजरायली पुलिस और शिन बेट के मुताबिक युवक ईरान के संपर्क में था और विस्फोटक तैयार कर रहा था, ताकि पूर्व पीएम नेफ्ताली बेनेट को की हत्या को अंजाम दिया जा सके।
इजरायली खुफिया एजेंसी ने बताया कि आरोपी युवक 2025 के अगस्त महीने से ही ईरानी हैंडलर के संपर्क में था। भारी धनराशि के बदले वह कई कार्यों को अंजाम कर चुका था। अबकी बार उसे विस्फोटक सामग्री तैयार करने का निर्देश मिला था।
उसने विशेष संचार उपकरण खरीदे, ताकि अपने हैंडलर और सहयोगियों से सुरक्षित तरीके से बाचती की जा सके। उसने हाइफा में ही एक अपार्टमेंट भी किराये पर लिया। उसने अपनी हर गतिविधि की फोटो और वीडियो बनाए। इन्हें आगे ईरानी हैंडलरों तक भेजा। इससे ईरानी हैंडलर को इससे काम पूरा होने का मैसेज गया। आरोपी ने ईरानी हैंडलर के कहने पर विस्फोटक सामग्री जुटाई और कुछ अन्य लोगों को भी भर्ती किया।
इजरायली पुलिस ने दो अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया है। उन्होंने कच्चा माल हासिल करने, विस्फोटक को छिपाने और टेस्टिंग करने में मदद की। आरोपियों ने इजरायल के अंदर कई स्थानों पर अलग-अलग जगह विस्फोटक का परीक्षण भी किया था।
ईरान पर इजरायली हमले के वक्त गैदारोव को खुफिया जानकारी जुटाने का काम मिला। उसे हाइफा बंदरगाह और मिसाइल से तबाह होने वाली जगह की तस्वीरें लेने को कहा गया था। हालांकि अमी गैदारोव कोई घटना को अंजाम देता, उससे पहले ही मार्च महीने में उसे लाहाव 433 राष्ट्रीय अपराध इकाई और शिन बेट के संयुक्त अभियान में गिरफ्तार कर लिया गया।
देशभर में मौसम का मिजाज बदला है। इस साल अप्रैल महीने में भी तापमान सामान्य से काफी कम है। उत्तर भारत से दक्षिण भारत तक मौसम खराब रहने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, देशभर में अगले कुछ दिनों तक मौसम की मार जारी रह सकती है। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में बारिश और आंधी-तूफान की संभावना है। मौसम विभाग ने बताया है कि एक पश्चिमी विक्षोभ अभी भी सक्रिय और इसका असर अगले कुछ दिनों तक रह सकता है। इससे उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान के साथ-साथ 12 राज्यों में आंधी-बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। लगातार हो रही बारिश के कारण किसान परेशान हैं
दिल्ली में अगले कुछ दिनों तक मौसम साफ रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने 9 अप्रैल से 11 अप्रैल तक मौसम साफ रहने का अनुमान है। कल दिल्ली में भले ही बारिश हुई हो लेकिन अगले कुछ दिनों तक अब मौसम साफ रहने वाला है। बीते करीब एक महीने से मौसम में बदलाव के कारण वायु प्रदूषण से भी लोगों को राहत मिली है। हालांकि, आने वाले 3 से 4 दिनों तक तेज हवाओं का दौर जारी रहने की संभावना है।
देश के सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग ने यूपी के बांदा, फतेहपुर, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, हरदोई फरेखाबाद, कन्नौज, कानपुर देहात, कानपुर नगर, उन्नाव, लखनऊ, बाराबंकी, रायबरेली, अमेठी, सहारनपुर, शामती मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ, गाजियाबाद, हापुड़, गौतम बुद्ध नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा, हाथरस, कासगंज, एटा, आगरा, फिरोजाबाद मैनपुरी, इटावा, औरेया और बिजनौर में बारिश होने की संभावना जताई है। इसके साथ ही आसमानी बिजली गिरने की भी संभावना है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश में कुछ जिलों में ओले गिरने का अलर्ट भी जारी किया गया है। गौतम बुद्ध नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा, कासगंज, एटा, आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा के आसपास के इलाकों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं।
बिहार में कैसा रहेगा मौसम?
बिहार में भी मौसम खराब रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने आंधी बारिश और ठनका गिरने का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, बिहार के दरभंगा, मधुबनी, अररिया, समस्तीपुर, वैशाली, सिवान, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर और किशनगंज समेत आसपास के जिलों में आज हल्की बारिश हो सकती है। कल यानी 10 अप्रैल से मौसम शुष्क रहने की संभावना है और किसी भी हिस्से में बारिश होने की संभावना नहीं है।
राजस्थान और मध्य प्रदेश की बात करें तो इन दोनों राज्यों के मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा। पश्चिमी विक्षोभ का असर राजस्थान में भी देखने को मिलेगा और राज्य के कुछ हिस्सों में बारिश हो सकती है। हालांकि, आज रात से मौसम में कुछ सुधार देखने को मिल सकता है। कल से तापमान में बढ़ोतरी शुरू हो जाएगी और गर्मी का दौर शुरू हो सकता है। हालांकि, आज कुछ जिलों में हल्की बारिश और ओले गिरने की संभावना है। राज्य के 10 से ज्यादा शहरों में अभी तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से नीचे है और अगले 10 दिनों तक मौसम ऐसा ही रहने की संभावना है।
मध्य प्रदेश के 32 जिलों में आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। भोपाल, विदिशा, रायसेन, सिहोर, अशोकनगर, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, श्योपुरकला, सिंगरौली, सीधी, रीवा, मऊगंज, सतना, अनूपपुर, शहडोल, उमरिया, डिंडोरी, कटनी, जबलपुर, सिवनी, मंडला, निवाड़ी, मैहर, बालाघाट, पन्ना, दमोह, सागर, छतरपुर और टीकमगढ़ में बारिश होने की संभावना है। इस राज्य में भी राजस्थान की तरह ही कल से मौसम शुष्क रहने की संभावना है।
पहाड़ी राज्यों में कैसा रहेगा मौसम?
पश्चिमी विक्षोभ का असर देश के पहाड़ी राज्यों में भी देखने को मिल रहा है, जहां मौसम की गतिविधायां जारी हैं। उत्तराखंड के कुछ पर्वतीय हिस्सों में बर्फबारी जारी है। मौसम विभाग के अनुसार, 9 अप्रैल को राज्य में हल्की से मध्यम स्तर की बारिश और बर्फबारी हो सकती है। इस दौरान 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। कल भी मौसम ऐसा ही रहने की संभावना है जिससे तापमान में और ज्यादा गिरावट दर्ज की जाएगी।
हिमाचल की बात करें तो हिमाचल के कई हिस्सों में आज बारिश होने की संभावना है। इसके साथ ही पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी देखने को मिल सकती है। मौसम विभाग के अनुसार, राज्य के कई जिलों में बारिश होने से तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है। इसको देखते हुए मौसम विभाग ने शिमला, कांगड़ा, कसौल, कुफरी समेत कई जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है।
अन्य राज्यों का हाल
मौसम विभाग ने उत्तर-पश्चिम और पूर्वी भारत के करीब 13 राज्यों में आंधी-तूफान, गरज-चमक और अच्छी बारिश होने की संभावना जताई गई है। दक्षिण भारत में केरल, गोवा और तमिलाडु में मौसम खराब रहने की संभावना है। इसके साथ ही ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल में भी मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है। आज असम और मेघालय में भारी बारिश और ओले गिरने की संभावना है, जिसको देखते हुए मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी कर दिया है। इसके अलावा पूर्वोत्तर के ज्यादातर राज्यों में मौसम की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं और यह 11 अप्रैल तक जारी रह सकती हैं।
ग्लोइंग स्किन पाने के लिए लोग महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स का उपयोग करते हैं लेकिन फल और सब्जियों के छिलकों की सहायता से हम ग्लोइंग स्किन पा सकते हैं। जिन्हें हम अक्सर बेकार समझकर कूड़ेदान में फेंक देते हैं, वे वास्तव में स्किन के लिए किसी खजाने से कम नहीं हैं। आलू, केले, पपीते, संतरे और खीरे के छिलकों में विटामिन सी, ए, एंटीऑक्सीडेंट, फाइबर और कई जरूरी मिनरल्स पाए जाते हैं, जो स्किन को अंदर से पोषण देते हैं। ये न सिर्फ डार्क सर्कल, पिग्मेंटेशन और टैनिंग को कम करने में मदद करते हैं बल्कि स्किन को नेचुरल ग्लो बनाए रखने में भी काफी असरदार साबित होते हैं। खास बात यह है कि ये उपाय पूरी तरह से नेचुरल होते हैं, जिससे साइड इफेक्ट्स का खतरा भी बहुत कम होता है।
अगर आप रोजमर्रा की जिंदगी में इन छिलकों का सही तरीके से इस्तेमाल करना सीख जाएं तो बिना ज्यादा खर्च किए आप अपनी स्किन की देखभाल कर सकते हैं। जो चीजें अब तक आपके लिए सिर्फ कचरा थीं, वही अब आपकी स्किन के लिए सबसे सस्ता, आसान और असरदार ब्यूटी सीक्रेट बन सकती हैं। अब सवाल उठता है कि इन छिलकों को अपने चेहरे और स्किन पर कैसे लगाएं, जिससे हमारी स्किन ग्लो करे।
आलू के छिलके हमारी स्किन का ग्लो बढ़ा सकते हैं क्योंकि इनमें विटामिन्स, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जिससे हमारे चेहरे पर न सिर्फ ग्लो आता है बल्कि दाग-धब्बे भी हल्के होने लगते हैं। आलू के छिलकों को चेहरे पर कई तरह से लगाया जा सकता है।
कैसे करें यूज?
आलू के छिलकों का प्रयोग हम अपनी स्किन की समस्या के मुताबिक कर सकते हैं। जैसे, अगर हमारे चेहरे पर दाग-धब्बे हैं, तो आलू के छिलके को चेहरे पर 5 से 10 मिनट रगड़ लें, उसके बाद साफ पानी से चेहरा धो लें। जिन लोगों की आंखों के पास डार्क सर्कल हैं, वे आलू के छिलके का रस निकाल लें, उसमें रुई डुबोकर आंखों के पास रख दें।
केले के छिलकों में पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो चेहरे के पिंपल्स कम करने के लिए फायदेमंद होते हैं। केले के छिलकों का उपयोग न केवल चेहरे बल्कि हाथ-पैर पर रगड़ने से भी स्किन में नमी बनाए रखता है। इसके उपयोग से स्किन को पोषण मिलता है, जिससे ज्यादा उम्र के लोगों की स्किन भी जवान दिख सकती है।
कैसे करें यूज?
केले के छिलकों का स्किन केयर के लिए प्रयोग करना सबसे आसान और सरल है। सबसे पहले केले के छिलकों को साफ पानी से धो लें, उसके बाद उन्हें चेहरे पर हल्के हाथों से रगड़ें। इस प्रक्रिया को हफ्ते में दो बार इस्तेमाल कर सकते हैं।
संतरे के छिलकों में विटामिन सी होता है, जो हमारे चेहरे की चमक बढ़ाने में मदद करता है। इसके अलावा यह चेहरे को फ्रेश बनाए रखने में भी सहायक होता है। इसका उपयोग हम फेस पैक के तौर पर कर सकते हैं।
कैसे करें यूज?
संतरे के छिलकों को सबसे पहले धूप में सुखा लें, उसके बाद उन्हें पीसकर एक जार में रख लें। फिर हफ्ते में दो दिन उस पाउडर को दूध या दही में मिलाकर पेस्ट बना लें और चेहरे पर लगाएं। पेस्ट लगाने के 15 मिनट बाद चेहरा धो लें।
4. पपीते के छिलके
पपीते के छिलकों में विटामिन ए और सी होते हैं, जो हमारे चेहरे की डेड स्किन को हटाकर नई और चमकदार स्किन लाने में मदद करते हैं। इनके उपयोग से चेहरा पहले से ज्यादा जवान और मुलायम बन जाता है, जिससे व्यक्ति की सुंदरता और बढ़ जाती है।
पपीते के छिलकों को सबसे पहले सुखा लें, उसके बाद उन्हें मिक्सर की सहायता से पीस लें और पाउडर को एक डिब्बे में रख लें। फिर इस पाउडर को एलोवेरा जेल में मिलाकर लगा सकते हैं। 2 चम्मच छिलके के पाउडर में 1 चम्मच एलोवेरा जेल मिलाकर पेस्ट बना लें।
5. खीरे के छिलके
खीरे के छिलके हमारे चेहरे के ब्लैकहेड्स और पोर्स की गंदगी दूर करने में मदद करते हैं। इसके अलावा इनके उपयोग से चेहरे के दाग-धब्बे भी कम हो जाते हैं। साथ ही खीरे के छिलकों को चेहरे पर लगाने से स्किन फ्रेश महसूस करती है।
कैसे करें यूज?
खीरे के छिलकों को साफ पानी से धो लें, उसके बाद उन्हें पीस लें। फिर इस पेस्ट को चेहरे पर 10 से 15 मिनट के लिए लगाएं और बाद में धो लें। इस तरह जिन छिलकों को आप अब तक बेकार समझते थे, वही आपकी स्किन के लिए एक असरदार और नेचुरल ब्यूटी सीक्रेट बन सकते हैं।
हिंदू धर्म में वरुथिनी एकादशी व्रत का खास महत्व है। इस व्रत में सभी भक्त भगवान विष्णु की उपासना करते हैं। हिंदू पंचांग के मुताबिक यह व्रत वैशाख महीने के कृष्ण पक्ष में मनाया जाता है, जो इस साल अप्रैल महीने में पड़ रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो व्यक्ति इस व्रत को पूर्ण श्रद्धा और सच्ची भावना से रखता है, उनकी सभी मनोकामनाएं भगवान विष्णु पूरी करते हैं। धार्मिक जानकारों के मुताबिक वरुथिनी एकादशी के व्रत को किसी सन्यांसी के 10 हजार साल की तपस्या के बराबर माना गया है। इस व्रत को रखने से भक्तों के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।
इस साल कई लोगों को कन्फ्यूजन है कि वरुथिनी एकादशी व्रत की सही तारीख क्या है। जहां कुछ लोगों का मानना है कि 13 अप्रैल को व्रत हैं, वहीं कुछ लोगों को लगता है कि यह व्रत 14 अप्रैल को है। ऐसे में सवाल उठता है कि किस दिन व्रत रखना शुभ रहेगा? आइए जानते हैं सही तारीख, पारण का समय और पूजा विधि।
साल 2026 में वरुथिनी एकादशी का व्रत 13 अप्रैल को रखा जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना की जाती है। इस साल यह व्रत सोमवार के दिन पड़ रहा है। एकादशी तिथि 13 अप्रैल की रात 1:16 बजे शुरू होगी और 14 अप्रैल की रात 1:08 बजे समाप्त होगी।
कब करें पारण?
वरुथिनी एकादशी व्रत का पारण 14 अप्रैल की सुबह 6:54 बजे से शुरू होकर 8:31 बजे तक रहेगा। इस समय के बीच पारण करना सबसे शुभ माना जाता है।
पूजा की विधि
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद साफ कपड़े पहनकर घर के पूजा स्थान या मंदिर में जाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें। पूजा के दौरान भगवान को फल, फूल और मिठाई का भोग लगाएं। इसके बाद शुद्ध देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें। भगवान की पूजा के बाद तुलसी जी की पूजा अवश्य करें। इस दिन अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंद लोगों को दान देना चाहिए। दान में कपड़े और अन्न दे सकते हैं। जो लोग व्रत नहीं रखते, उन्हें भी इस दिन चावल खाने से बचना चाहिए।
दिन में न सोएं – व्रत रखने वाले लोगों को दोपहर में सोने से बचना चाहिए। नकारात्मक भाषा का प्रयोग न करें – इस दिन गुस्सा करने और झूठ बोलने से बचें। तामसिक भोजन न करें – लहसुन, प्याज, मांस और शराब से दूर रहें। चावल न खाएं -जो लोग व्रत नहीं रखते, उन्हें भी चावल खाने से बचना चाहिए। तुलसी के पत्ते न तोड़ें – इस दिन तुलसी जी की पूजा की जाती है इसलिए पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि नहीं की जाती है।
28 फरवरी को ईरान के साथ जारी युद्ध के बाद पहली बार इजरायली सेना ने लेबनान में सबसे बड़ा हमला किया है। इजरायली वायुसेना के मुताबिक 10 मिनट में 100 ठिकानों पर 160 से अधिक बमों से हमला किया गया है। दक्षिणी लेबनान, बेका घाटी और राजधानी बेरूत में हिजबुल्लाह के कमांड और अन्य बुनियादी ढांचों को तबाह किया गया है।
इजरायली सेना ने अपने बयान में बताया कि ऑपरेशन रोरिंग लायन के बाद हिजबुल्लाह के खिलाफ यह सबसे बड़ा हमला है। इनमें से कई ठिकानें आबादी के बीचोंबीच मौजूद थे। यह हिजबुल्लाह की वह घिनौनी साजिश है, जिसमें वह लेबनानी नागरिकों को मानव ढाल बनाता है, ताकि वह अपने अभियान को सुरक्षित रख सके। इजरायली सेना ने आगे बताया कि उसने हमलों में रादवान फोर्स, सौनिक यूनिट के बुनियादी ढांचे, रॉकेट, खुफिया मुख्यालय और कार्यालय को निशाना बनाया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इजरायल की ताजा बमबारी में पूरे लेबनान में सैकड़ों नागरिकों की जान गई है। अदलून शहर में तीन लड़कियों की मौत हुई है। वहीं तटीय शहर सैदा में लेबनान के प्रसिद्ध शिक्षाविद और धार्मिक शख्सियत अल-नाबुलसी की मौत की भी खबर है। उधर, बेका घाटी के एक गांव में अंतिम संस्कार हो रहा था। तभी यहां इजरायल ने हमला कर दिया। कम से कम 10 लोगों की मौत की खबर है। रेड क्रॉस का कहना है कि हमले के बाद से 100 एंबुलेंस लोगों को मदद पहुंचा रही हैं।
निहत्थे लोगों को मार रहा इजरायल: लेबनानी पीएम
लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने इजरायल पर घनी आबादी वाले इलाके पर हमला करने और निहत्थे लोगों को मारने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ‘इजरायल युद्ध को रोकने के सभी क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रयासों की पूरी तरह से अनदेखी कर रहा है। वह अंतरराष्ट्रीय कानून और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के सिद्धांतों का भी पूरी तरह से उल्लंघन कर रहा है।’ लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने इजरायली हमलों को बर्बर बताया और कड़ी निंदा की।
युद्धविराम के बाद ईरान ने कहां-कहां किया हमला?
अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम के कुछ घंटे बाद ही लवान द्वीप पर स्थित एक ईरानी तेल रिफाइनरी पर हमले की खबर है। बदले में ईरान ने कुवैत, बहरीन और यूएई पर हमला करके जवाब दिया है। हालांकि इजरायल ने हमले की बाद से इंकार किया है।
संयुक्त अरब अमीरात के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि देश का एयर डिफेंस सिस्टम ईरानी मिसाइलों और ड्रोन का सामना कर रहा है। वहीं बुधवार तड़के अबू धाबी के हबशान गैस परिसर में मलबा गिरने से लगी आग के बाद यहां अस्थायी तौर पर परिचालन निलंबित कर दिया गया है। दो अमीराती और एक भारतीय नागरिक के घायल होने की भी खबर है।
कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने ईरान के शत्रुतापूर्ण हमलों का जवाब दिया है। कुल 28 ड्रोन को मार गिराया है। कुछ ड्रोनों ने बिजली और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया है।
बहरीन की राजधानी मनामा में बुधवार सुबह तेज धमाकों की आवाज सुनी गई। बहरीन के गृह मंत्रालय ने हमलों की पुष्टि की और कहा कि मलबा गिरने से दो नागरिकों को मामूली चोट आई है। कई घरों को नुकसान पहुंचा है। उधर, सऊदी अरब ने भी बताया कि कुछ घंटे में ही नौ ड्रोनों को रोका गया है।
पश्चिम एशिया संकट का असर देश की जीडीपी वृद्धि पर पड़ने का अनुमान है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने चेताया है कि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण वित्त वर्ष 2027 में विकास दर कम रहने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2025-26 में जहां अनुमानित विकास दर 7.6 फीसद थी। वहीं मौजूदा वित्त वर्ष में इसके 6.9 रहने का अनुमान है। बता दें कि ईरान युद्ध के कारण सप्लाई चेन में रुकावट आई है। ईंधन की बढ़ती कीमत का असर अन्य क्षेत्रों पर पड़ रहा है।
आईबीआई ने बुधवार को वित्तवर्ष 2026-27 के लिए पहली द्वि-मासिक मौद्रिक नीति जारी की। आईबीआई की मौद्रिक नीति कमेटी ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया। 5.25% रेपो रेट को बरकरार रखा। वित्तीय वर्ष 2027 में जीडीपी विकास दर 6.9 फीसद रहने का अनुमान है। पहले क्वार्टर में यह अनुमान 6.9% से घटाकर 6.8% कर दिया गया है। वहीं दूसरे क्वार्टर में भी इसे 7% से घटाकर 6.7% कर दिया गया है। तीसरे और चौथे क्वार्टर में अनुमानित विकास दर 7% और 7.2% रहने का अनुमान है।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि प्रमुख शिपिंग मार्गों में व्यवधान और माल ढुलाई व बीमा लागत में इजाफा के कारण माल निर्यात पर बुरा असर पड़ सकता है। दूसरी ओर सेवा क्षेत्र में लगातार बनी गति, जीएसटी युक्तिकरण का बना हुआ असर, विनिर्माण क्षेत्र में बढ़ती क्षमता उपयोगिता और वित्तीय संस्थानों व कॉरपोरेट्स की मजबूत बैलेंस शीट घरेलू मांग को समर्थन देना जारी रखेंगी।
आरबीआई गवर्नर ने आगे कहा कि भारत के व्यापक आर्थिक बुनियादी तत्व मजबूत वृद्धि और कम मुद्रास्फीति के साथ आत्मविश्वास जगाते हैं। मार्च में संघर्ष क्षेत्र के विस्तार और उसके तेज होने के साथ स्थितियां प्रतिकूल हो गईं। उन्होंने चेतावनी दी कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से विकास में बाधा आ सकती है। वहीं आयातित मुद्रास्फीति बढ़ने की संभावना है।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के बुनियादी तत्व मौजूदा समय में पिछले संकटों और कई अन्य अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में अधिक मजबूत स्थिति में हैं। यह इसे झटकों को झेलने की अधिक क्षमता देते हैं। मगर ऊर्जा की बढ़ती कीमतें, अंतरराष्ट्रीय माल ढुलाई व बीमा लागत से जुड़ी अधिक इनपुट लागत, साथ ही सप्लाई चेन में रुकावटें वृद्धि को बाधित करेंगी।
उन्होंने कहा कि मौद्रिक नीति समिति का मानना है कि संघर्ष की तीव्रता और अवधि तथा इसके नतीजे में ऊर्जा और अन्य बुनियादी ढांचों को होने वाला नुकसान मुद्रास्फीति और वृद्धि के लिहाज से जोखिम पैदा करता है।