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आशूरा मनाने से पहले जान लीजिए इमाम हुसैन की शहादत और बलिदान की पूरी कहानी


मुस्लिम धर्म में मोहर्रम का महीना बेहद खास माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह महीना त्याग और बलिदान का प्रतीक है। इसी महीने में मोहम्मद पैगंबर के पोते इमाम हुसैन कर्बला के युद्ध में शहीद हुए थे, जिनकी याद में कई लोग मातम और शोक मनाते हैं। साथ ही इमाम हुसैन के बलिदान को याद करते हैं। इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार 17 जून से मोहर्रम का पाक महीना शुरू हो चुका है। इस साल लगभग 26 या 27 जून को आशूरा मनाया जाएगा। माना जाता है कि आशूरा के दिन ही इमाम हुसैन शहीद हुए थे।

 

धार्मिक मान्यता के मुताबिक, मोहर्रम महीने के शुरुआती 10 दिनों तक लोगों को अल्लाह की इबादत करनी चाहिए। माना जाता है कि इस महीने नमाज पढ़ने से अल्लाह लोगों की गलतियों को माफ करते हैं। अब सवाल उठता है कि कर्बला का युद्ध क्यों हुआ था। साथ ही यह भी सवाल है कि युद्ध में किन परिस्थितियों में इमाम हुसैन शहीद हुए थे, जिसका शोक आज भी लोग मनाते हैं। आइए कर्बला के युद्ध की कहानी जानते हैं।

 

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किस वजह से हुआ कर्बला का युद्ध?

कर्बला का युद्ध इमाम हुसैन के जमीर की वजह से हुआ था, उन्होंने एक क्रूर खलीफा के सामने झुकने से इनकार कर दिया था। इमाम हुसैन लोगों की रक्षा और अन्याय को खत्म करने के युद्ध के मैदान में आए थे। हालांकि, कर्बला के युद्ध में जो हुआ, उस दिन को याद करके आज भी लोगों की आंखें भर जाती हैं।

अन्याय के खात्मे के लिए शुरू हुआ युद्ध

आज से लगभग 1346 साल पहले इस्लाम में कोई भी व्यक्ति सबकी सहमति के बाद खलीफा बनता था जबकि मुआविया नाम के शासक ने इस परंपरा को अपने षड्यंत्र से बदल दिया और अपने बेटे यजीद को नया खलीफा बना दिया। यजीद के विचार और व्यवहार बिल्कुल अलग थे। वह धर्म की सीख और शिक्षाओं पर नहीं चलता था। वह लोगों के साथ अच्छा व्यवहार भी नहीं करता था, साथ ही लोगों को डरा-धमकाकर अपनी बात मनवाता था।

 

 खलीफा बनने के बाद यजीद सही और गलत में फर्क करना भूल गया था। वह अपने आसपास के लोगों को गुलाम समझता था। वह अपनी ताकत के बल पर इमाम हुसैन से अपने नियम-कानून मानने के लिए दबाव बनाना चाहता था, जबकि इमाम हुसैन ने बहादुरी दिखाई और यजीद के नियम मानने से इनकार कर दिया। जिसके बाद इमाम इराक छोड़कर दूसरे स्थान पर रहने चले गए।

 

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इमाम को दिया गया धोखा

जब इमाम हुसैन दूसरे शहर जा चुके थे, तब उन्हें इराक के कूफा शहर से कुछ लोगों ने पत्र भेजा। पत्र के जरिए कूफा के लोगों ने यजीद के अत्याचार से बचाने के लिए उन्हें बुलाया था। इसके बाद इमाम अपने 72 साथियों के साथ इराक के कूफा शहर की ओर जा रहे थे। तभी कर्बला में यजीद की फौज ने इमाम के परिवार और मासूम बच्चों के लिए फरात नदी का पानी बंद कर दिया। जिस वजह से कर्बला के रेगिस्तान में लोग प्यास से तड़पने लगे। इसके बाद इमाम हुसैन के 72 साथियों ने यजीद की विशाल सेना के सामने युद्ध लड़ा। इस युद्ध के 10वें दिन इमाम हुसैन समेत 72 लोग शहीद हो गए।

 

नोट- यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं के आधार पर दी गई है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।

‘ये बकवास है’, जब भारत पर टैरिफ को लेकर अपने मंत्री से भिड़े ट्रंप


डोनाल्ड ट्रंप भारत पर भारी भरकर टैरिफ लगाने के हमेशा पक्षधर थे। वह कई बार सार्वजनिक मंच से भारत को ‘टैरिफ किंग’ तक कह चुके हैं। उनका मानना था कि भारत ने अमेरिकी सामान पर बहुत अधिक टैरिफ लगा रखा है। जब अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने ट्रंप के सामने आंकड़े रखे तो वह न केवल हैरान हुए, बल्कि वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक से तीखी बहस भी की। ट्रंप को लगता था कि यह आंकड़े उनकी सोच से कम हैं। 

 

न्यूयॉर्क टाइम्स के पत्रकार मैगी हैबरमैन और जोनाथन स्वान की किताब ‘रेजिम चेंज: इनसाइड द इंपीरियल प्रेसिडेंसी ऑफ डोनाल्ड ट्रंप’ में लुटनिक और ट्रंप के बीच टकराव का जिक्र है। किताब में ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के 14 महीनों का लेखा-जोखा है। इसमें सरकार में शामिल लोगों के इंटरव्यू हैं। पिछले साल अप्रैल में ट्रंप प्रशासन ने दुनियाभर के देशों पर टैरिफ लगाने का ऐलान किया था। टैरिफ की तैयारी के दौरान ही ट्रंप प्रशासन में मतभेद उभर कर सामने आए थे। 

 

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जब ट्रंप ने मांगें टैरिफ के आंकड़े

ट्रंप को यकीन था कि भारत ने अमेरिकी सामानों पर कम से कम 175 फीसद या उससे अधिक टैरिफ लगाया है। ट्रंप ने आंकड़ों की मांग की और कहा, ‘किसी ने भी मुझे कोई आंकड़े नहीं दिए हैं। चीन हम पर कितना टैरिफ लगाता है, भारत हम पर कितना टैरिफ लगाता है, इसके ठोस तथ्य नहीं है। तुम मुझे बकवास आंकड़े दे रहे हो।’

‘ये बकवास आंकड़े हैं’

जब वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के आंकड़े ट्रंप के सामने रखे तो उन्होंने इन आंकड़ों को खारिज कर दिया। ट्रंप ने कहा, ‘ये बकवास आंकड़े हैं।’ ट्रंप को तथ्य को समझाने की कोशिश की गई, लेकिन वह अपनी धारणा को बदलने को तैयार नहीं थे। उन्होंने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय पर गलत जानकारी देने का आरोप लगाया।

 

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ट्रंप ने भारत पर लगाया था 50% टैरिफ

ट्रंप प्रशासन के आंकड़े में दावा किया गया कि भारत ने ऑटोमोबाइल पर 100% और 37% से अधिक टैरिफ लगा रखी थी। अप्रैल में अमेरिका ने भारत पर 25% रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया। अगस्त महीने में रूसी तेल खरीदने पर 25 फीसद अधिरिक्त टैरिफ का ऐलान किया है। कुल मिलाकर भारत पर 50%टैरिफ लागू किया। हालांकि अदालत अमेरिका के इन टैरिफों को अवैध घोषित कर चुका है।

सगाई से मर्डर तक, केतन अग्रवाल केस में क्या-क्या हुआ? 10 प्वाइंट्स में समझिए


महाराष्ट्र के पुणे में इंदौर के राजा रघुवंशी केस जैसा ही मामला सामने आया है जहां एक युवक को उसकी मंगेतर ने कथित तौर पर धक्का देकर मार दिया। इस मामले की चर्चा अब पूरे देश में है। 19 जून को पुणे के मशहूर लोहागढ़ किले से गिरने के बाद केतन विशाल अग्रवाल नाम के व्यक्ति की मौत हो गई थी। दावा किया गया कि वह फोटो लेने के चक्कर में 350 फीट गहरी खाई में गिर गया लेकिन अब इस मामले में खुलासा हुआ है कि उसकी मंगेतर की साजिश के तहत यह सब हुआ है। केतन के परिवार ने भी कई बड़े खुलासे किए हैं। 

 

सोशल मीडिया पर अब केतन और उसकी मंगेतर के वीडियो भी वायरल हो रहे हैं। वीडियो में दोनों काफी खुश दिख रहे हैं और केतन अपनी मंगेतर का जन्मदिन मना रहे हैं। उन्हें सरप्राइज दे रहे हैं और फूल दे रहे हैं। लोगों के मन में एक ही सवाल है कि आखिर क्यों उसकी मंगेतर ने इतना बड़ा कदम उठाया और पुलिस को सच्चाई कैसे पता चली?

 

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शुरुआत में माना हादसा

19 जून को पुणे के रहने वाले केतन अग्रवाल की मौत लोहागढ़ किले के पास गहरी खाई में गिरने के बाद हुई। शुरुआती जानकारी में इसे ट्रेकिंग के दौरान हुआ हादसा बताया गया और उसी आधार पर शुरुआती कार्रवाई हुई। बताया गया कि फोटो लेने के चक्कर में वह फिसल कर गिर गया। 

परिवार ने हादसे पर सवाल उठाए

केतन के परिवार ने शुरुआती कहानी पर भरोसा नहीं किया। परिवार का कहना था कि केतन ट्रेकिंग का अनुभव रखते थे और ऐसी परिस्थितियों में सामान्य फिसलन से गिरने की संभावना पर उन्हें शक हुआ। परिवार के लगातार सवालों के बाद मामले की जांच की दिशा बदली।

जांच में ट्रिप को लेकर खुलासा

जांच एजेंसियों के मुताबिक जिस आउटिंग को सामान्य ट्रेक और जन्मदिन से जोड़कर देखा गया। परिवार वालों को केतन और उसकी मंगेतर ने यही बताया था। केतन के पिता ने बताया कि वह कुछ दिन पहले ही उस जगह पर गए थे लेकिन केतन की मंगेतर सिया गोयल फिर से उसी जगह पर जाने की जिद्द करने लगी थी।  इसके बाद पुलिस ने इसी दिशा में जांच शुरू कर दी कि सिया बार-बार उस जगह जाने की जिद्द क्यों कर रही थी। 

मंगेतर और उसके प्रेमी का नाम आया सामने

जांच आगे बढ़ने पर केतन की मंगेतर और उसके प्रेमी का नाम मामले में सामने आया। पुलिस का कहना है कि केतन की मौत कोई हादसा नहीं थी बल्कि एक प्री प्लान साजिश थी। साजिश के तहत ही उसे उस जगह पर ले जाया गया था। पुलिस की जांच में इसका अब खुलासा भी हो चुका है। 

हादसा दिखाने की कोशिश

जांच अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती बयान और घटनाक्रम को ऐसे किया गया जिससे यह एक सामान्य दुर्घटना लगे। बाद में केतन के परिवार के बयान और पिछले दिनों हुई कुछ घटनाओं के कारण यह मामला संदिग्ध हो गया। इसके बाद पुलिस ने उसी दिशा में जांच शुरू की। परिवार के बयानों के बाद मामला साफ हो गया था।

 

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बहन को हुआ शक

परिवार के लोगों को शक था लेकिन उन्होंने भी शुरुआत में इसे एक हादसा माना था। केतन के अंतिम संस्कार के चार दिन बाद उसकी बहन सिया से मिलने उसके घर गई। उसने सिया से कुछ सवाल किए। इसके बाद उसे दाल में कुछ काला नजर आया। उसने इसकी पूरी जानकारी पुलिस को दी और इसके बाद पुलिस ने इसी दिशा में जांच शुरू कर दी।

प्रेमी का नाम आया सामने

इसके बाद पुलिस को जांच में कई अहम सबूत मिले। पुलिस को पता लगा कि सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी के बीच 1 जनवरी से जून के बीच 2004 फोन कॉल हुए थे। जनवरी में सिया और केतन की शादी तय हुई थी और जून में उसकी हत्या कर दी गई। 25 नवंबर को दोनों की शादी होनी थी। इन छह महीनों में सिया और उसके प्रेमी के बीच 238 घंटे बातचीत हुई। पुलिस का शक यहीं से गहरा गया। 

पुलिस को मिले अहम सबूत

जांच हुई तो पता चला कि 18 जून यानी घटना वाले दिन चेतन के फोन से इंटरनेट नहीं चला। सुबह साढ़े 10 बजे के आसपास ये घटना हुई थी औरचेतन के फोन का इंटरनेट सुबह 7 बजे से लेकर शाम को 5.40 तक बंद रहा। इसके बाद पुलिस का शक और ज्यादा बढ़ गया। इसके बाद पुलिस ने सिया से पूछताछ की और केस का पूरा एंगल ही बदल गया। 

 

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प्लान करके किया मर्डर

जांच से पता चला कि 18 जून को केतन और सिया लोहागढ़ किले पर गए थे  सुबह साढ़े 10 बजे के आसपास सिया ने चेतन को बुलाया और फिर दोनों ने मिलकर केतन को धक्का देकर घाटी में गिरा दिया। इससे केतन की मौत हो गई और सिया ने इसे एक हादसा दिखाने की पूरी कोशिश की। 

 

दोनों गिरफ्तार

जांच के आधार पर पुलिस ने सिया और उसके प्रेमी चेतन को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की जांच के आधार पर केतन की मौत हादसा नहीं था। यह एक मर्डर था। केतन के पापा और मां ने अब सिया को दोषी माना है। उन्होंने कई ऐसी घटनाएं बताई जिनसे पुलिस का शक और ज्यादा बढ़ गया है। 

घर और गार्डन में नहीं पैदा होगा एक भी मच्छर, अपनाएं ये तरीके


मानसून के आते ही लोगों को इस चिलचिलाती गर्मी में राहत तो बहुत मिलती है लेकिन यह मौसम अपने साथ कई प्रकार की बीमारियां भी लेकर आता है। मानसून में सबसे ज्यादा आतंक मच्छर मचाते हैं। घर हो या फिर बगीचा मच्छरों का हमला हर जगह होता है। मच्छरों के काटने से न कवेल खुजली, रैशेज की दिक्कत होती है बल्कि मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया जैसी बीमारियां होने का खतरा भी बना रहता है। मानसून में मच्छरों से बचने के लिए ऐसे कई सारे उपाय हैं जिनकी मदद से आप मच्छरों से राहत पा सकते हैं।

 

बारिश के आते ही जगह-जगह पानी इकट्ठा होने लगता है जिसकी वजह से मच्छर उस गंदे पानी में पनपने लगते हैं। हर साल दुनिया भर में मच्छरों की वजह से लाखों लोग बीमार होते हैं। कई बार यह बीमारी जानलेवा भी बन जाती है। हालांकि, मच्छरों से और इन बीमारियों से निजात पाने के लिए हम कुछ बेहतरीन उपाय लेकर आए हैं। 

 

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1. मानसून में घर को मच्छर-मुक्त रखने के तरीके

मानसून के मौसम में घर के अंदर मच्छरों की संख्या तेजी से बढ़ जाती है। घर में मौजूद छोटी-छोटी जगहों पर जमा पानी मच्छरों के प्रजनन का कारण बन सकता है। इसलिए घर की साफ-सफाई और कुछ जरूरी सावधानियां अपनाना बेहद जरूरी है।

  • पानी जमा न होने दें

        मच्छर रुके हुए पानी में अंडे देते हैं। इसलिए कूलर, बाल्टी, टंकी, फूलदान और अन्य बर्तनों में पानी जमा न होने दें। कूलर का पानी नियमित रूप से बदलें और उसकी हफ्ते में एक बार सफाई जरूर करें।

  • खिड़कियों और दरवाजों पर जाली लगाएं

        घर में मच्छरों के प्रवेश को रोकने के लिए खिड़कियों और दरवाजों पर जाली लगाना एक प्रभावी उपाय है। इससे ताजी हवा भी आती रहती है और मच्छर भी अंदर नहीं आते।

  • नियमित सफाई करें

        मच्छर हमेशा गंदी जगह पर पनपने लगते हैं। इसलिए घर के कोनों, बिस्तरों के नीचे और स्टोर रूम जैसी जगहों की नियमित सफाई करें। गंदगी और नमी मच्छरों को जल्दी आकर्षित करती है।

  • मच्छर भगाने वाले उत्पादों का उपयोग करें

         मच्छर भगाने वाली मशीन, कॉइल, स्प्रे या इलेक्ट्रिक रैकेट का इस्तेमाल किया जा सकता है। सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग भी फायदेमंद होता है। 

  • प्राकृतिक उपाय अपनाएं

         नीम का तेल, कपूर, लौंग और लेमनग्रास ऑयल जैसी प्राकृतिक चीजें मच्छरों को दूर रखने में मदद कर सकती हैं। शाम के समय कपूर जलाने से भी मच्छर कम होते हैं।

  • घर में पर्याप्त रोशनी और हवा रखें

        अंधेरी और नम जगहों पर मच्छर ज्यादा पनपते हैं। इसलिए घर में हवा और धूप का उचित प्रबंध रखें।

 

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2. मानसून में बगीचे को मच्छर-मुक्त रखने के तरीके

मानसून के दौरान बगीचे में नमी और हरियाली बढ़ जाती है जिससे मच्छरों के पनपने की संभावना भी बढ़ जाती है। अगर बगीचे की सही देखभाल की जाए तो मच्छरों की संख्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। बगीचों में नमी और कुछ जंगली घासें होती है जिसकी वजह से मच्छरों का प्राकोप ज्यादा देखने को मिलता है।

  • गमलों और ट्रे में पानी जमा न होने दें

    पौधों के गमलों के नीचे रखी ट्रे में अक्सर पानी जमा हो जाता है। यह मच्छरों के लिए पनपने का स्थल बन सकता है। इसलिए अतिरिक्त पानी को नियमित रूप से निकालते रहें।
  • घास और झाड़ियों की कटाई करें

    लंबी घास और घनी झाड़ियां मच्छरों के छिपने की पसंदीदा जगह होती हैं। समय-समय पर घास और पौधों की छंटाई करनी जरूरी है।
  • मच्छर भगाने वाले पौधे लगाएं

    तुलसी, लेमनग्रास, लैवेंडर, पुदीना और गेंदा जैसे पौधे अपनी खुशबू के कारण मच्छरों को दूर रखने में मदद करते हैं। इन्हें बगीचे में लगाने से प्राकृतिक रूप से मच्छरों की संख्या कम हो सकती है।
  • पानी के स्रोतों की नियमित सफाई करें

    यदि बगीचे में फव्वारा, तालाब या बर्ड बाथ है तो उसका पानी समय-समय पर बदलते रहें। रुका हुआ पानी मच्छरों के पनपने का सबसे बड़ा कारण होता है।
  • सूखे पत्तों और कचरे को हटाएं

    बगीचे में पड़े सूखे पत्ते, टूटे गमले और अन्य कचरा नमी बनाए रखते हैं, जिससे मच्छरों को पनपने का मौका मिलता है। इसलिए नियमित सफाई जरूरी है।
  • शाम के समय विशेष सावधानी बरतें

    मच्छर सुबह और शाम के समय अधिक सक्रिय होते हैं। ऐसे में बगीचे में बैठते समय मच्छर भगाने वाला स्प्रे या क्रीम का इस्तेमाल करें।

 

 

बलिया में 11 साल के शौर्य बने महंत, कौन हैं नन्हे मठाधीश?


उत्तर प्रदेश के बलिया जिले का मझौवा मठ चर्चा का केंद्र बन गया है, जहां 11 साल के शौर्य तिवारी को मठ के महंत की गद्दी दी गई। महंत बनाए जाने के बाद शौर्य तिवारी को नया नाम दिया गया, साथ ही उनका वैदिक रीति-रिवाजों से अभिषेक किया गया। शौर्य तिवारी के गुरु के अनुसार, महंत बनने के बावजूद शौर्य को धर्म की शिक्षा दी जाएगी। अभिषेक समारोह का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

 

बलिया के रेवती बस स्टैंड के पास स्थित मझौवा मठ एवं लक्ष्मी नारायण मंदिर में रविवार को शौर्य तिवारी का अभिषेक हुआ, जिसके बाद संतों ने उनका नाम बदलकर श्याम नारायण रामानुज वैष्णवोदास रखा। जानकारी के लिए बता दें कि 25 जून को मठ के पुराने महंत मकसुदनाचार्य का निधन हो गया था, तब से ही महंत की गद्दी खाली थी। अब सवाल उठता है कि क्या अब से शौर्य तिवारी ही मठ से जुड़े अहम फैसले लेंगे।

 

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क्या मठ की जिम्मेदारी संभालेंगे शौर्य?

मझौवा मठ के अभिषेक कार्यक्रम में कई लोग मौजूद थे, जहां कई रिपोर्टर्स भी शामिल हुए थे। रिपोर्टर्स ने जब शौर्य से सवाल किया कि क्या वह मठ की जिम्मेदारी संभाल पाएंगे, तो इसके जवाब में शौर्य ने कहा, ‘जरूर, मैं संभाल पाऊंगा।’ इसके बाद रिपोर्टर्स ने शौर्य से पूछा कि क्या वह जीवन में शादी नहीं करना चाहेंगे, तो शौर्य ने बेबाकी से जवाब दिया कि वह कभी शादी नहीं करना चाहेंगे।

 

शौर्य का यह जवाब वहां मौजूद लोगों को रोचक लगा। हालांकि, उनके गुरु बालक दास ने रिपोर्टर्स के सामने कहा कि शौर्य अभी बच्चे हैं। जब वह धर्म, संस्कृति और परंपराओं को पूरी तरह समझ लेंगे, तब वह मठ की पूरी जिम्मेदारी उठाएंगे। फिलहाल मठ संरक्षक मंडल मठ से जुड़े फैसले लेगा।

 

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महंत बनने के बाद जारी रहेगी शिक्षा

 

शौर्य तिवारी के गुरु नारायण दास ने बताया कि शौर्य अभी कम उम्र के हैं, इस वजह से उन्हें धर्म और अध्यात्म की शिक्षा दी जाएगी, ताकि वह धर्म, परंपरा और संस्कृति को अच्छी तरह समझ सकें। शौर्य फिलहाल चौथी कक्षा में पढ़ते हैं।

 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब अभिषेक हो रहा था तो शौर्य को पहले स्नान कराया गया। तब उन्होंने मासूम आवाज में कहा, “ठंडा पानी है, इसलिए अच्छा लग रहा है।” इसके बाद उन्होंने अपने परिवार से फोन पर पूछा कि घर कब जाएंगे।

10 साल में 6 PM, कोई गुमनाम, कोई सक्रिय, ब्रिटेन के रिटायर PM करते क्या हैं?

भारत में साल 2014 से एक प्रधानमंत्री हैं, नरेंद्र मोदी। 3 संसदीय चुनाव हुए हैं, हर बार एनडीए की ही सरकार बनी है। कभी भारत पर शासन कर चुके ब्रिटेन का संवैधानिक संकट कुछ ऐसा है कि हर साल, 2 साल बाद कुछ न कुछ ऐसी खलबली मचती है कि जो भी प्रधानमंत्री चुना जाता है, उसे इस्तीफा देना पड़ता है। 
साल 2014 से अब तक देखें तो ब्रिटेन में 6 प्रधानमंत्री बदल चुके हैं। 

बदले गए प्रधानमंत्रियों की लिस्ट में डेविड कैमरून से लेकर कीर स्टार्मर तक का नाम है। इसी लिस्ट में भारतीय मूल के ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक भी शामिल रहे हैं, जिनके प्रधानमंत्री बनने पर भारत में भी उत्सव जैसा माहौल रहा है। कभी ब्रिटिश प्रधानमंत्री वित्त विभाग संभालने में फेल होते हैं, इसलिए इस्तीफा देते हैं, कभी उनके खिलाफ पार्टी में बगावत होती है, इसलिए।

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2010 से 2026 तक, रिटायर हुए प्रधानमंत्री कर क्या रहे हैं?

डेविड कैमरन, पूर्व प्रधानमंत्री, यूनाइटेड किंगडम
  • डेविड कैमरन: साल 2010 में डेविड कैमरन प्रधानमंत्री बने थे। साल 2010 से लेकर 2016 तक वह प्रधानमंत्री रहे। डेविड कैमरन ब्रेक्सिट के खिलाफ थे। वह चाहते थे कि यूरोपियन यूनियन में उनका देश बना रहे। 52 फीसदी लोगों ने जनमत संग्रह में उनके खिलाफ मतदान किया। उन्होंने हार की नैतिक जिम्मेदारी ली और अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
    अब क्या करते हैं?
    डेविड कैमरन रिटायर होने के बाद के बाद भी सरकार से जुड़े रहे। ऋषि सुनक के कार्यकाल में 2023 से 2024 तक विदेश सचिव ही रहे। वह राजनीतिक तौर पर सक्रिय हैं। हाउस ऑफ लॉर्ड्स में 2024 तक रहे।
टेरेसा मे, पूर्व प्रधानमंत्री, यूनाइटेड किंगडम
  • टेरेसा मे: साल 2016 में जब डेविड कैमरन ने इस्तीफा दिया, खराब और बिखरी हुई अर्थव्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी टेरेसा में को मिली। टेरेसा में को कंजर्वेटिव पार्टी के नेता के पद से 7 जून 2019 को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। वह ब्रेक्सिट को संसद से पारित कराने में असफल रहीं थीं। 3 साल में न ब्रिटेन की इस्तीफा सुधरी, न ही ब्रिटेन के हालात बेहतर हुए। 
    अब क्या करती हैं?
    हाउस ऑफ लॉर्ड्स की सदस्य हैं। किताबें लिखती हैं। अब कम चर्चा में रहती हैं। अपने परिवार के साथ वक्त बिता रही हैं। उनके पति फिलिप मे इन्वेस्टर हैं।

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बोरिस जॉनसन, टेरेसा मे, पूर्व प्रधानमंत्री, यूनाइटेड किंगडम

 

  • बोरिस जॉनसन: साल 2022 में गिरती पड़ती अर्थव्यवस्था को संभालने की जिम्मेदारी बोरिस जॉनसन को मिली। साल 2019 से 2022 तक करीब 4 साल वह प्रधानमंत्री बने रहे। बोरिस जॉनसन की अगुवाई में 1987 के बाद पहली बार कंजर्वेटिव पार्टी बहुमत से जीती थी। उनके सांसद ही उनके खिलाफ हो गए थे। क्रिस पिंचर, पार्टी गेट, महंगाई, टैक्स और लापरवाही जैसे कई मुद्दे थे जिन्होंने उनकी राह मुश्किल की। 
    अब क्या करते हैं?
    उनकी राजनीति आलोचनाओं के केंद्र में रही। अब राजनीति से दूर हैं, सार्वजनिक फोरम में स्पीच देते हैं, किताबें लिखते हैं और व्यापार संभालते हैं। उनकी 3 शादियां हुई हैं। एलेग्रा मोस्टेन से 1993 में और मरीना व्हीलर से 2020 में तलाक हुआ। तलाक के अगले साल ही उन्होंने कैरी सायमंड से शादी रचा ली। बोरिस जॉनसन के 5 बच्चे हैं। परिवार के साथ वक्त बिताते हैं।
लिज ट्रस, पूर्व प्रधानमंत्री, यूनाइटेड किंगडम
  • लिज ट्रस: बोरिस के इस्तीफे के बाद लिज ट्रस ने सत्ता संभाली। उनका कार्यकाल 60 दिनों से भी कम का रहा। 6 सितंबर को उन्होंने पद संभाला, 20 अक्तूबर को इस्तीफा दे बैठीं। वह पहले से खराब अर्थव्यवस्था संभाल नहीं पाईं। बोरिस जॉनसन ने कर थोपे, इन्होंने करों में छूट दी, अर्थव्यवस्था पर असर आया। अराजकता की स्थिति रही, उन्होंने पद छोड़ने का मन बना लिया। 
    अब क्या करती हैं?
    संसद सदस्य नहीं हैं। कंजर्वेटिव पार्टी की नेता हैं, किताबें लिखती हैं, सार्वजनिक समारोहों में नजर आती हैं।
अक्षता मूर्ति और ऋषि सुनक। 
  • ऋषि सुनक: लिज ट्रस के बाद उनके वित्त मंत्री ऋषि सुनक ने प्रधानमंत्री पद की कमान संभाली। वह भारतीय मूल के थे, उनकी पत्नी नारायण और सुधा मूर्ति की बेटी अक्षता मूर्ति हैं। 14 साल के शासन में कंजर्वेटिव पार्टी की हार हुई थी। 2024 में देश में लेबर पार्टी की लहर थी, ऋषि सुनकर की कंजर्वेटिव पार्टी से लोगों का मोह भंग हुआ, उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। उनका कार्यकाल 2 साल का रहा।
    अब क्या करते हैं?
    कंजर्वेटिव पार्टी के सक्रिय नेता हैं। उद्योगपति हैं। खूब राजनीतिक और व्यक्तिगत दौरे करते हैं। उनके पास अभी लंबा सियासी भविष्य है। साल 2025 में उन्होंने एक बार फिर गोल्डमैन सेक्स में वरिष्ठ सलाहकार की भूमिका स्वीकारी थी।

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कीर स्टार्मर, प्रधानमंत्री, यूनाइटेड किंगडम
  • कीर स्टार्मर: लेबर पार्टी को करीब डेढ़ दशक बात जीत मिली। 2024 से 2026, सिर्फ 2 साल में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। उनके सामने कई ऐसे मुद्दे थे, जिनसे पार्टी के लोग ही खफा थे। कीर स्टार्मर के मंत्रियों ने इस्तीफा दिया, उन्होंने ग्रीन इन्वेस्टमेंट, इनहेरिटेंस टैक्स में बदलाव किया, जिससे लोग खुश नहीं थे। ब्रिटेन में अवैध घुसपैठ, जेफरी एपस्टीन के दोस्त लॉर्ड मेंडलसन को प्रतिनिधि नियुक्त करने जैसे मुद्दों पर उनकी खूब किरकिरी हुई। पार्टी के भीतर ही बगावत हुई और अब उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।
    अब क्या करेंगे?
    कीर स्टार्मर सांसद हैं, लेबर पार्टी के नेता हैं। अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं लेकिन नए प्रधानमंत्री के पद संभालने तक पद पर वह बने रहेंगे। उन्होंने इस्तीफे के बाद कहा है कि वह अपनी पत्नी विक के अच्छे पति बनना चाहते हैं, बच्चों के लिए अच्छे पता बनना चाहते हैं। उनकी पत्नी का नाम विक्टोरिया एलेक्जेंडर है। उनके 2 बच्चे हैं। 

कहीं लू के थपेड़े, कहीं तेज बारिश, कहां अटक गया है मानसून?


देश के ज्यादातर राज्यों में लोग बारिश का इंतजार कर रहे हैं लेकिन लू के थपेड़े बरस रहे हैं। कई राज्यों में अभी लू के हालात बने रहेंगे। दक्षिण-पश्चिम मानसून आज मध्य अरब सागर, महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक के बाकी हिस्सों, छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड और बिहार के कुछ और इलाकों में आगे बढ़ गया है। 

अगले 48 घंटों में यह महाराष्ट्र, तेलंगाना, ओडिशा के बाकी हिस्सों और छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार के कुछ और क्षेत्रों में आगे बढ़ने की अच्छी संभावना है। उत्तर भारत को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। दिल्ली-NCR के लोगों को भी कोई राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। 

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किन राज्यों में हीटवेव का खतरा है?

विदर्भ, पूर्वी उत्तर प्रदेश और पूर्वी मध्य प्रदेश में अगले 4-5 दिनों तक लू चलने की संभावना है। विदर्भ में भीषण लू और गर्म रातें रहने की चेतावनी है। छत्तीसगढ़, तेलंगाना और बिहार के कुछ इलाकों में भी लू पड़ेगी। यूपी का बांदा सबसे गर्म शहर रहा, जहां 42.6°C तापमान दर्ज किया गया है।

दिल्ली-NCR में कैसा मौसम रहेगा?

दिल्ली में अगले 4 दिन आसमान में आंशिक बादल छाए रहेंगे। 22 जून को दोपहर और शाम में आंधी, बिजली और तेज हवाओं के साथ हल्की बारिश की संभावना है। अधिकतम तापमान 38 से 41 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहेगा।

कहां बारिश होगी?

इस हफ्ते उत्तर भारत, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। बारिश 7 से 20 सेंटीमटर तक हो सकती है। मेघालय में कहीं-कहीं 20 सेंटीमीटर से ज्यादा बारिश हो सकती है। पिछले 24 घंटों में पश्चिम बंगाल और मेघालय के पहाड़ी इलाकों में भीषण बारिश हुई है। 

पूर्वोत्तर भारत में कैसा रहेगा मौसम?

23 से 28 जून तक अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में व्यापक बारिश होने की संभावना है। कई दिनों में भारी से बहुत भारी बारिश और आंधी-बिजली गिरने की चेतावनी जारी की गई है।

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दक्षिण भारत में कैसा रहेगा मौसम?

केरल, तटीय कर्नाटक, तेलंगाना, तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा और तमिलनाडु में अगले कई दिनों तक अच्छी बारिश होगी। कुछ जगहों पर भारी बारिश के साथ आंधी-तूफान और तेज हवाएं (40-60 किमी/घंटा) चल सकती हैं।

मौसम विभाग की चेतावनी क्या है?

बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के कई हिस्सों में 22 से 27 जून तक समुद्र में तेज हवाएं और खराब मौसम रहने की संभावना है। मछुआरों को इन इलाकों में न जाने की सलाह दी गई है। 

 

फ्रिज से आ रही है बदबू? अपनाएं आसान घरेलू उपाय, मिनटों में मिलेगी राहत


घरों में फ्रिज का इस्तेमाल करने वाले ज्यादातर लोग इस समस्या से जूझते हैं कि कभी-कभी फ्रिज से तेज बदबू आने लगती है। कई बार यह दुर्गंध इतनी तेज होती है कि पूरा किचन महकने लगता है, लेकिन लोगों को अक्सर इसका सही कारण भी पता नहीं होता। विशेषज्ञों के अनुसार, फ्रिज में बदबू आने के पीछे मुख्य वजह हमारी लापरवाही ही होती है।

खाना बहुत लंबे समय तक फ्रिज में रखे रहना, खाना गिरकर साफ न करना, बिना ढके खाद्य पदार्थ रखना और लंबे समय तक फ्रिज की सफाई न करना जैसे कारणों से दुर्गंध पैदा होती है। कई उपभोक्ता इसे फ्रिज की खराब क्वालिटी से जोड़कर देखते हैं, लेकिन विशेषज्ञ साफ तौर पर कहते हैं कि ज्यादातर मामलों में यह समस्या मशीन की नहीं बल्कि इस्तेमाल करने वाले की होती है।

दिलचस्प बात यह है कि बिना किसी अतिरिक्त खर्च के फ्रिज को तरोताजा और बदबू-मुक्त रखा जा सकता है। नियमित सफाई, खाने को सही तरीके से ढककर रखना, समय-समय पर एक्सपायर्ड आइटम्स निकालना और फ्रिज के अंदरूनी हिस्सों को साफ रखने जैसी छोटी-छोटी आदतें इस समस्या का स्थायी समाधान बन सकती हैं। 

खतरा जिनसे अनजान हैं लोग

स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी चेताते हैं कि फ्रिज में जमी बदबू सिर्फ असुविधा नहीं बल्कि बैक्टीरिया और फंगस के फैलने का संकेत भी हो सकती है, जो खाने की सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है। इसलिए समय पर फ्रिज की देखभाल करना जरूरी है।

 

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फ्रिज की बदबू दूर करने के घरेलू उपाय

1. बेकिंग सोडा का इस्तेमाल करें

बेकिंग सोडा बदबू सोखने के लिए जाना जाता है। एक छोटी कटोरी में बेकिंग सोडा भरकर फ्रिज के किसी कोने में रख दें। यह फ्रिज के अंदर की दुर्गंध को कम करने में मदद करता है।

2. नींबू का करें उपयोग

नींबू को दो हिस्सों में काटकर फ्रिज में रख दें। इसकी ताजगी भरी खुशबू बदबू को कम करने में मदद करती है। चाहें तो नींबू के रस में थोड़ा नमक मिलाकर भी रख सकते हैं।

3. कॉफी पाउडर रख सकते हैं

एक कटोरी में थोड़ा कॉफी पाउडर रखकर फ्रिज में रखने से दुर्गंध कम हो सकती है। कॉफी की तेज खुशबू बदबू को सोखने में मदद करती है।

4. नियमित सफाई जरूरी

फ्रिज की ट्रे, रैक और ड्रॉअर को समय-समय पर निकालकर साफ करें। कई बार खाने के छोटे कण और तरल पदार्थ जमा होकर बदबू का कारण बनते हैं।

5. खराब खाद्य पदार्थ तुरंत हटाएं

खराब हो चुके फल, सब्जियां या बचा हुआ खाना फ्रिज में न रखें। ये बदबू फैलाने के साथ-साथ अन्य खाद्य पदार्थों को भी प्रभावित कर सकते हैं।

6. सिरके से सफाई करें

पानी और सफेद सिरके को बराबर मात्रा में मिलाकर फ्रिज की अंदरूनी सतह साफ करें। इससे दाग और दुर्गंध दोनों को कम करने में मदद मिलती है।

7. खाने को ढककर रखें

खुले बर्तनों में रखा खाना जल्दी बदबू फैला सकता है। इसलिए भोजन को एयरटाइट कंटेनर में स्टोर करना बेहतर माना जाता है।

नया ट्रेंड: फ्रिज डिओडोराइज़र

फ्रिज डिओडोराइज़र एक ऐसा उपकरण या उत्पाद है जो रेफ्रिजरेटर के अंदर से सड़े हुए खाने, प्याज, लहसुन या अन्य चीजों की दुर्गंध को सोखता है या खत्म करता है। यह फ्रिज की हवा को ताजा रखता है जिससे एक खाने की महक दूसरे खाने में नहीं जाती और खाने के स्वाद भी पहले जैसा बरकरार रहता है। बाजार में अब ऐसे फ्रिज की मांग तेजी से बढ़ गई है। आजकल लोगों का ऐसा ही रेफ्रिजरेटर चाहिए होता है जिसमें गंध को सोखने वाला फिल्टर पहले से ही मौजूद हो। 

 

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कौन सी चीजें सबसे ज्यादा बदबू फैलाती हैं?

  • कटे हुए प्याज
  • मछली और मांस
  • खराब फल और सब्जियां
  • लंबे समय तक रखा हुआ खाना
  • अदरक लहसुन का पेस्ट

कितने दिनों में करनी चाहिए फ्रिज की सफाई?

विशेषज्ञों के अनुसार फ्रिज की हल्की सफाई हर सप्ताह करनी चाहिए। इस दौरान पुराने या खराब हो चुके खाने को निकाल देना चाहिए और रैक पर गिरे हुए दाग-धब्बों को साफ कर लेना चाहिए। वहीं महीने में कम से कम एक बार फ्रिज की गहरी सफाई करना बेहतर माना जाता है। इसके लिए फ्रिज को खाली करके सभी ट्रे, रैक और ड्रॉअर निकालकर अच्छी तरह धोने चाहिए। साथ ही फ्रिज की अंदर की दीवारों और कोनों को भी साफ करना चाहिए क्योंकि यहां अक्सर गंदगी और बैक्टीरिया जमा हो सकते हैं। नियमित सफाई करने से न केवल फ्रिज साफ रहता है बल्कि इससे खाना भी एकदम फ्रैश रहता है।

रक्षाबंधन पर पड़ जाए चंद्रग्रहण की छाया तो राखी बांधे या नहीं? समझिए


सनातन धर्म में रक्षाबंधन को बेहद पावन त्योहार माना जाता है। यह त्योहार भाई-बहन के अटूट प्रेम और भरोसे का प्रतीक है। इस साल 28 अगस्त को रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाएगा। संयोग से इसी दिन चंद्रग्रहण भी लगने वाला है, जो इस साल का आखिरी चंद्रग्रहण होगा। चंद्रग्रहण की वजह से त्योहार पर प्रभाव पड़ेगा। इसी वजह से एक तरफ कई लोग उस दिन अपने भाई को राखी नहीं बांधेंगे, जबकि दूसरी तरफ कई लोग उस दिन रक्षाबंधन की सारी परंपराएं निभाएंगे।

 

इस साल रक्षाबंधन का त्योहार मनाने को लेकर कई लोग दुविधा में हैं। जहां कुछ लोगों का मानना है कि चंद्रग्रहण की वजह से रक्षाबंधन का पर्व नहीं मनाना चाहिए, वहीं दूसरी तरफ चंद्रग्रहण के दिन कई महिलाएं अपने भाई को राखी बांधेंगी। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या चंद्रग्रहण के दिन राखी बांधने से कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा? इस सवाल का जवाब आइए जानते हैं।

 

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कब लगेगा चंद्रग्रहण?

ज्योतिषीय जानकारों के मुताबिक 28 अगस्त को चंद्रग्रहण सुबह 6 बजकर 53 मिनट से शुरू होगा, जो दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। यानी ग्रहण कुल 5 घंटे 39 मिनट तक रहने वाला है। इस ग्रहण को ब्लड मून भी कहा जाता है।

 

धार्मिक मान्यता के अनुसार चंद्रग्रहण के 9 घंटे पहले तक शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। कई लोगों का मानना है कि चंद्रग्रहण लगने से सूतक काल शुरू हो जाता है और उस दौरान शुभ कार्य नहीं करने चाहिए। अब सवाल उठता है कि रक्षाबंधन उस दिन मना सकते हैं या नहीं।

 

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क्या रक्षाबंधन मनाना चाहिए?

 

ज्योतिष जानकारों के मुताबिक 28 अगस्त को भारत में चंद्रग्रहण की लाल छाया दिखाई नहीं देगी। जब चंद्रग्रहण ही दिखाई नहीं देगा, तो उसके नकारात्मक प्रभाव भी नहीं पड़ेंगे। साथ ही भारत में सूतक काल भी मान्य नहीं माना जाएगा। इस वजह से भारत में सभी भक्तों को रक्षाबंधन का त्योहार उस दिन मनाना चाहिए।

 

इस साल 28 अगस्त को सभी लोग रक्षाबंधन की परंपराएं निभा सकते हैं। इसका मतलब साफ है कि सभी भक्त रक्षाबंधन के दिन पूजा-पाठ कर सकते हैं और अपने भाई को राखी भी बांध सकते हैं।

 

नोट- यह लेख धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।

ब्रिटेन के PM कीर स्टार्मर ने इस्तीफा क्यों दिया, कौन लेगा जगह? हर सवाल का जवाब


ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर एक बयान में प्रधानमंत्री और लेबर पार्टी के नेता पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी है। उन्होंने कहा कि उन्होंने जो भी फैसले लिए, वे हमेशा देश के हित में थे। स्टार्मर ने अपनी पत्नी विक का शुक्रिया अदा करते हुए उन्हें अपना सहारा बताया। 

भावुक होते हुए उन्होंने कहा कि अब वह सबसे अच्छे पति और पिता बनने पर ध्यान देंगे। उन्होंने अपने बच्चों को अपनी खुशी और गर्व बताया। बयान के बाद उन्होंने पत्नी को गले लगाया। कीर स्टार्मर ने कहा कि उन्होंने लेबर पार्टी को राजनीतिक, आर्थिक और नैतिक रूप से दिवालिया हालत से बाहर निकाला। 

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कीर स्टार्मर की उपलब्धियां क्या रहीं?

कीर स्टार्मर ने दावा किया कि उन्होंने पार्टी की यहूदी विरोधी छवि को खत्म किया, अर्थव्यवस्था, रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा पर लोगों का विश्वास बहाल किया। उन्होंने 2024 में डाउनिंग स्ट्रीट में प्रवेश को अपने जीवन का सबसे गर्व का पल बताया। उन्होंने ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय से सोमवार सुबह इस फैसले की जानकारी दी। 

कैसे चुना जाएगा नया नेता?

कीर स्टार्मर ने लेबर पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से कहा है कि 9 जुलाई से नेतृत्व चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो और गर्मियों की छुट्टियों से पहले नया नेता चुना जाए। नया नेता चुने जाने तक वह प्रधानमंत्री बने रहेंगे। उन्होंने अगले प्रधानमंत्री को पूरा सहयोग देने का वादा किया।

कौन संभालेगा कीर स्टार्मर की जगह?

यह काफी चौंकाने वाला है क्योंकि लेबर पार्टी ने 2024 के आम चुनाव में भारी जीत हासिल की थी, मात्र दो साल बाद स्टार्मर को इस्तीफा देना पड़ रहा है। वेस्टमिंस्टर में सोमवार को ही एंडी बर्नहम भी सांसद के रूप में शपथ लेंगे, जिन्हें स्टार्मर का संभावित उत्तराधिकारी माना जा रहा है।

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इस्तीफा क्यों दिया है?

18 जून 2026 को हुए उप-चुनाव में ग्रेटर मैनचेस्टर के पूर्व मेयर एंडी बर्नहम ने भारी अंतर से जीत हासिल की थी। उन्होंने लगभग 55 फीसदी वोट पाए और रिफॉर्म यूके के उम्मीदवार को 9,000 से ज्यादा वोटों से हराया। यह जीत बर्नहम को संसद पहुंचाने वाली थी। 

अब वह लेबर पार्टी की लीडरशिप रेस में हिस्सा ले सकेंगे। उनकी जीत के बाद पार्टी के अंदर स्टार्मर के खिलाफ बगावत तेज हो गई। बर्नहम को कई सांसदों का समर्थन मिला और उन्हें स्टार्मर का संभावित उत्तराधिकारी माना जा रहा है। 

मई 2026 के लोकल चुनावों में लेबर पार्टी को भारी नुकसान हुआ। पार्टी ने करीब 1,500 सीटें गंवाईं। इसके बाद दर्जनों लेबर सांसदों ने स्टार्मर से इस्तीफा मांगा और डिपार्चर टाइमलाइन सेट करने की मांग की। कई मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया, जिसमें पूर्व हेल्थ सेक्रेटरी वेस स्ट्रीटिंग भी शामिल हैं। अब कीर स्टार्मर अगले आम चुनाव में पार्टी का नेतृत्व नहीं करेंगे।

कहां-कहां चूके कीर स्टार्मर?

कीर स्टार्मर पार्टी की प्रवासन नीतियां सवालों के घेरे में रहे। उर्जा नीतियां भी ब्रिटेन के लिए असरदार साबित नहीं हुईं। डोना्ड ट्रंप ने भी इन्हीं बातों को लेकर आशंका जाहिर की थी। डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी कहा था कि वह नॉर्थ सी ड्रिलिंग बढ़ाने की वकालत कर रहे हैं लेकिन उनके देश की हालत ऐसी नहीं है। 

कीर स्टार्मर पर डिफेंस को पर्याप्त फंड न देने के भी आरोप लगे हैं। कई दिग्गज अधिकारियों ने इस्तीफे दिए, जिनकी वजह से उनकी बदनामी हुई। एपस्टीन फाइल्स में नाम और पीटर मंडेलसन को अमेरिका में एंबेसडर नियुक्त करने पर भी विवाद हुआ।