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मेष का रहेगा दिन अच्छा, कन्या को करना पड़ेगा चुनौतियों का सामना


आज का दिन कई लोगों के जीवन में नए अवसर और बदलाव लेकर आ रहा है। जहां एक तरफ वृषभ और मेष राशि के जातकों को ऑफिस में सीनियर्स की तारीफ मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ कन्या राशि के लोगों को ऑफिस में कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा मकर राशि के लोगों का दिन खास अच्छा नहीं रहेगा क्योंकि उन्हें मेहनत के अनुसार फल नहीं मिलेगा। आज का मूलांक 1 है, जो सूर्य के प्रभाव को दर्शाता है और लीडरशिप तथा नई शुरुआत का प्रतीक है। नक्षत्रों की बात करें तो आज मघा नक्षत्र का प्रभाव रहेगा, जो जीवन में अनुशासन और मान-सम्मान को बढ़ाता है।

 

ग्रहों की स्थिति पर नज़र डालें तो चंद्रमा आज सिंह राशि में गोचर कर रहे हैं, जहां वे सूर्य के साथ एक मजबूत और ऊर्जावान संबंध बना रहे हैं। इसके साथ ही शुक्र और बुध की स्थिति आज कला, बिजनेस और संवाद के क्षेत्र से जुड़े लोगों को लाभ पहुंचाएगी। आज की ऊर्जा बेहद उत्साहजनक, रचनात्मक और पराक्रम को बढ़ाने वाली है। कई लोगों के करियर में आ रही बाधाएं दूर होंगी और पारिवारिक जीवन में तालमेल बना रहेगा।

 

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राशिफल

 

मेष राशि

 

आज आपकी लीडरशिप क्वालिटी की तारीफ होगी। साथ ही ऑफिस में नए प्रोजेक्ट्स मिल सकते हैं। धन लाभ के योग हैं। लाइफ पार्टनर का सहयोग मिलेगा। पारिवारिक जीवन सुखद रहेगा। शाम का समय परिवार के साथ अच्छा गुजरेगा।

आज क्या करें: सुबह-सुबह सूर्य को जल अर्पित करें।
आज क्या न करें: ऑफिस में किसी भी व्यक्ति के साथ बहस में न उलझें।

 

वृषभ राशि

 

नौकरी करने वाले लोगों को अपने सीनियर्स की मदद मिलेगी। आज के दिन रुपयों का खर्च सोच-समझकर करें क्योंकि अचानक किसी जरूरी काम पर पैसा खर्च हो सकता है। परिवार के किसी बड़े सदस्य की सलाह काम आएगी।

आज क्या करें: सफेद रंग के कपड़े पहनें या रुमाल पास रखें।
आज क्या न करें: आज के दिन किसी को बड़ा कर्ज न दें।

 

मिथुन राशि

 

आज आपकी नौकरी में बदलाव के अच्छे अवसर हैं। आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। रुका हुआ धन वापस मिल सकता है। पारिवारिक जीवन में भाई-बहनों के साथ रिश्ते मजबूत होंगे। पार्टनर के साथ लॉन्ग ड्राइव पर जा सकते हैं।

आज क्या करें: किसी जरूरतमंद को हरी मूंग की दाल दान करें।
आज क्या न करें: अपनी बातें किसी व्यक्ति से शेयर न करें।

 

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कर्क राशि

 

ऑफिस में काम का दबाव बढ़ सकता है। बिजनेस में नई नीतियों को लागू करने के लिए दिन अच्छा है। धन कमाने के नए स्रोत बनेंगे। घर में किसी मांगलिक कार्य की प्लानिंग होगी। पार्टनर के साथ तालमेल अच्छा रहेगा।

आज क्या करें: भगवान शिव का जलाभिषेक करें।
आज क्या न करें: नकारात्मक बातों को खुद पर हावी न होने दें।

 

सिंह राशि

 

चंद्रमा आपकी ही राशि में हैं, जिससे आपका आत्मविश्वास चरम पर रहेगा। सरकारी अटके काम पूरे होंगे। धन लाभ के बेहतरीन अवसर मिलेंगे। संपत्ति से जुड़ा विवाद सुलझ सकता है। जीवनसाथी के साथ रिश्ते में नजदीकियां आएंगी।

आज क्या करें: गायत्री मंत्र का 11 बार जाप करें।
आज क्या न करें:  क्रोध से दूर रहें, वरना काम बिगड़ सकते हैं।

 

कन्या राशि

 

ऑफिस में खुद के खिलाफ परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। कोई भी बड़ा फैसला सोच-समझकर लें। रुपयों के लेन-देन के मामलों में सावधानी बरतें। जीवनसाथी के साथ किसी बात को लेकर गलतफहमी हो सकती है।

आज क्या करें: पक्षियों के लिए दाना-पानी रखें।
आज क्या न करें: आज के दिन किसी भी यात्रा की शुरुआत करने से बचें।

 

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तुला राशि

 

जो लोग मीडिया या ग्लैमर इंडस्ट्री से जुड़े हैं, उन्हें बड़ी सफलता मिलेगी। आर्थिक लाभ की स्थिति मजबूत है। रुपयों के निवेश से अच्छा रिटर्न मिलने की उम्मीद है। प्रेमियों के लिए दिन रोमांस से भरपूर रहेगा।

आज क्या करें: छोटी कन्याओं को कुछ मीठा खिलाएं।
आज क्या न करें: दिखावे के चक्कर में फिजूलखर्ची करने से बचें।

 

वृश्चिक राशि

 

नौकरी में प्रमोशन या इन्क्रीमेंट की खुशखबरी मिल सकती है। पैतृक संपत्ति से लाभ होने के योग हैं। नई जमीन खरीदने की योजना बन सकती है। माता-पिता का आशीर्वाद मिलेगा। घर का माहौल शांतिपूर्ण और खुशनुमा रहेगा।

आज क्या करें: हनुमान चालीसा का पाठ करें।
आज क्या न करें: किसी की पीठ पीछे बुराई न करें।

 

धनु राशि

 

उच्च शिक्षा या विदेश से जुड़े काम करने वालों को अच्छी खबर मिलेगी। आज आपको भाग्य का साथ मिलेगा। आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी। धार्मिक कार्यों में धन खर्च हो सकता है। जीवनसाथी के साथ तालमेल बढ़ेगा।

आज क्या करें: माथे पर चंदन का तिलक लगाएं।
आज क्या न करें: आज किसी भी काम को कल पर न टालें।

 

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मकर राशि

 

आज मेहनत अधिक और परिणाम कम मिल सकते हैं। नौकरी में थोड़ा संभलकर चलने का समय है। अचानक धन हानि के संकेत हैं। परिवार में ससुराल पक्ष से कुछ अनबन हो सकती है। अपने गुस्से पर नियंत्रण रखें।

आज क्या करें: शिवलिंग पर काले तिल अर्पित करें।
आज क्या न करें: अनजान लोगों पर बहुत जल्दी भरोसा न करें।

 

कुंभ राशि

 

बिजनेस में टीमवर्क से कठिन काम भी आसानी से पूरे होंगे। धन कमाने के नए साधन बढ़ेंगे। रुका हुआ पैसा मिलने से पुरानी चिंताएँ दूर होंगी। अविवाहित लोगों के लिए शादी के प्रस्ताव आ सकते हैं। 

आज क्या करें: शनि चालीसा का पाठ करें।
आज क्या न करें: आज आलस को खुद पर हावी न होने दें।

 

मीन राशि

 

आज आपको कोर्ट-कचहरी के मामलों में सफलता मिलेगी। दुश्मन चाहकर भी आपका कुछ नहीं बिगाड़ पाएंगे। पैसों के मामले में दिन संतुलित है। परिवार में छोटी-मोटी बातें हो सकती हैं, उन्हें नजरअंदाज करें। पार्टनर की भावनाओं की कद्र करें।

आज क्या करें: केले के पेड़ की पूजा करें।
आज क्या न करें: अपनी योजनाओं को समय से पहले दूसरों के सामने उजागर न करें।

 

नोट: यह राशिफल ज्योतिषीय मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।

यूक्रेन से ईरान तक, NPT कैसे त्रासदी की वजह बनी? कहानी इकतरफा परमाणु नीतियों की


अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एलान किया है कि ईरान के साथ शांति वार्ता अपने अंतिम दौर में है। हैरान करने वाली बात यह है कि शांति की बात कहकर डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध का राग भी छेड़ दिया है। उन्होंने फिर दोहराया है कि अगर ईरान अमेरिका के साथ अंतिम परमाणु समझौता नहीं करेगा तो तेहरान उनके निशाने पर होगा, अमेरिकी सेना शांति वार्ता तोड़ेगी और हमले शुरू हो जाएंगे। 

डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी कहा है कि हमले के बदले में अमेरिका, मध्य पूर्व का ‘गार्जियन’ बनेगा और क्षेत्र की 20 फीसदी कमाई, ‘डकार’ जाएगा। डोनाल्ड ट्रंप हर इंटरव्यू में और सोशल मीडिया पोस्ट में शांति और युद्ध की बात एक साथ कर रहे हैं। ट्रंप को यकीन है कि साल 2026 का यह समझौता, 2015 के उस समझौते से बेहतर है, जिसमें ईरान ने बराक ओबामा से परमाणु हथियार न बनाने का वादा किया है। 

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डोनाल्ड ट्रंप किस समझौते पर जोर दे रहे हैं?

  • न परमाणु हथियार बनाएगा, न खरीदेगा
  • स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान कोई टैक्स नहीं लेगा
  • संवर्धित यूरेनियम अमेरिका को सौंपेगा

अमेरिका-ईरान के पास परमाणु बम, ईरान के पास क्यों नहीं?

अमेरिका के पास घोषित तौर पर परमाणु बम है। इजरायल के पास परमाणु हथियार हैं, इसका न तो खंडन किया गया है, न ही इसे माना गया है। इजरायल को ईरान के परमाणु कार्यक्रम से फिर भी दिक्कत है, जबकि ईरान ने बार-बार कहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम, शांतिपूर्ण इस्तेमाल के लिए है, न ही तबाही के लिए। परमाणु हथियारों के शक में ईरान पर बार-बार हमले करता रहा है। जून 13 जून 2025 को अचानक इजरायल ने ईरान पर हमला बोल दिया। 24 दिनों तक यह जंग चली, इजरायल ने नतान्ज परमाणु साइट पर हमला बोल दिया था। 

28 फरवरी 2026 को एक बार फिर अमेरिका और इजरायल ने मिलकर धावा बोल दिया। ईरान का पूरा शीर्ष नेतृत्व खत्म हुआ, आयतुल्ला अली खामेनेई मारे गए, मोजतबा खामेनेई घायल हैं, इस्लामिक रिवल्यूशनरी गॉर्ड्स कॉर्प्स (IRGC) की पूरी टॉप लीडरशिप बदल चुकी है। यह सब सिर्फ इसलिए शुरू हुआ कि ईरान परमाणु हथियार न बना सके।  

परमाणु हथियारों को खत्म करने की कवायद क्यों?

हिरोशिमा और नागासाकी, जापान के दो शहरों में अमेरिका ने ऐसा आतंक मचाया था, जिसे दुनिया आजतक नहीं भूल पाई है। परमाणु हथियारों को खत्म करने की कवायद भी यहीं से शुरू हुई। ताकतवर देश चाहते थे कि छोटे राष्ट्र, अपने परमाणु हथियार रद्द करें। 24 जनवरी 1946 को संयुक्त राष्ट्र महासभा का पहला प्रस्ताव अपनाया गया, जिसमें परमाणु हथियारों के पूर्ण उन्मूलन की मांग की गई और एटमिक एनर्जी कमीशन (AEC) का गठन किया गया। उम्मीद थी कि एक ऐसा बंधन हो कि कोई देश, परमाणु हमला न कर सके।
 
निखिल गुप्ता, इंटरनेशनल लॉ पढ़ाते हैं और वह दीवान लॉ कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। उन्होंने कहा, ‘अमेरिका ने साल 1946 में बारूक प्लान के तहत संयुक्त राष्ट्र के सामने प्रस्ताव रखा कि दुनिया के सभी परमाणु हथियार और तकनीक का नियंत्रण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक संस्था के अधीन हो। तब सोवियत संघ (USSR) ने अमेरिका की यह चालाकी भांप ली थी कि यह देश, किसी भी देश को दगा दे सकता है, जापान हमले को अमेरिका ने सबक की तरह लिया। यह योजना, धरी की धरी रह गई क्योंकि दुनिया तब भी अमेरिका के रुख से अनिश्चित ही थी।’

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कैसे परमाणु हथियारों के खिलाफ आम जनता हुई?

साल 1950 के दशक में परमाणु हथियारों के खिलाफ सबसे ज्यादा आक्रोश पैदा हुआ। अमेरका और सोवियत संघ का शीत युद्ध खत्म नहीं हुआ था। दोनों देशों ने चुपके-चुपके हाइड्रोजन बम तैयार कराया। दोनों ने एलान किया। 1955 तक, मशहूर वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन और दार्शनिक बर्ट्रेंड रसेल ने एक घोषणापत्र जारी किया। उन्होंने दुनिया के नेताओं से परमाणु हथियारों को खत्म करने की अपील की। साल 1958 तक यह जन आंदोलन बन गया था। 

साल 1960 तक, दुनिया क्यूबा संकट के मुहाने पर खड़ी हो गई। शीतयुद्ध ऐसा था कि क्यूबा में अमेरिकी सीमा से सिर्फ 150 किलोमीटर दूर, रूस ने परमाणु मिसाइलों का जखीरा बिछा दिया था। अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ कैनिडी को भनक तक नहीं लगी। रूस कम्युनिस्ट पार्टी के सुप्रीम लीडर निकिता ख्रुश्चेव और क्यूबा के नेता फिदे कास्त्रो की जोड़ी, अमेरिका को ऐसा जख्म देने वाली थी, जिसे वह कभी भूल नहीं पाते। अंतराष्ट्रीय स्तर पर कवायदें हुईं, किसी तरह  संभावित सैन्य टकराव खत्म हुआ। दुनिया एक और परमाणु तबाही देखने से बच गई। रूस ने अपने हथियार तो हटा लिए लेकिन अमेरिका से वादा लिया कि क्यूबा को तबाह नहीं किया जाएगा।  

क्यूबा संकट के बाद क्या बदला?

पार्शियल टेस्ट बैन ट्रिटी 1963 अस्तित्व में आई। तय हुआ कि जमीन के ऊपर, अंतरिक्ष में और पानी के भीतर परमाणु परीक्षण नहीं किए जा सकेंगे। साल 1968 तक दुनिया परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के बारे में जान गई थी। यह इतिहास की सबसे बड़ी संधि है, जिसका मकसद, परमाणु हथियारों को रोकना और उन्हें पूरी तरह खत्म कर देना है। साल 1980 से 90 के दशक तक, जब शीतयुद्ध का अंत हुआ तो इस संधि पर दुनिया के दो सबसे ताकवर देशों ने हस्ताक्षर किए।

रूस और अमेरिका पहली बार एक मंच पर आए। अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन और सोवियत नेता मिखाइल गोर्बाचेव ने 8 दिसंबर 1987 को इंडटमीडिए रेंज न्यूक्लियर फोर्सेज (INF) पर हस्ताक्षर किए। 1991 में एक और संधि हुई। स्ट्रेटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रिटी।  31 जुलाई, 1991 को दोनों नेताओं ने इस पर हस्ताक्षर किए। साल 1994 तक यह लागू हुआ। दोनों देशों ने परमाणु क्षमता कम करने की कवायद की। दोनों की गंभीरता कितनी थी, आज भी संदेह के घेरे में है।

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अमेरिका के पास परमाणु हथियार, दूसरे रखें तो दिक्कत क्यों?

परमाणु हथियार बनाने पर 5 देशों का एकाधिकार है। अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन। ये देश, कभी नहीं चाहते कि दुनिया के दूसरे देश, परमाणु हथियार बनाएं। 5 मार्च 1970 को इस संधि पर सदस्य देशों ने हस्ताक्षर किए। मार्च 1970 में लागू हुई यह संधि परमाणु हथियारों के फैलाव को रोकने के लिए बनी थी। इसमें 190 देश शामिल हैं। संधि में दो तरह के देश हैं। पहले परमाणु हथियार वाले 5 देश। दूसरे बाकी गैर-परमाणु हथियार वाले देश। इनकी कुछ शर्तें ऐसी हैं, जिन्हें एक बड़ा हिस्सा, भेदभावपूर्ण बताता है- 

  • परमाणु हथियारों के प्रसार पर पूरी तरह से रोक
  • निरस्त्रीकरण की दिशा में सभी देश आगे बढें
  • केवल शांतिपूर्ण काम के लिए परमाणु तकनीक मुहैया हो
  • गैर परमाणु देश, परमाणु हथियार बनाने की कोशिश न करें
  • परमाणु देश अपनी परमाणु क्षमता कम करें

आलोचना क्या है?

प्रोफेसर निखिल गुप्ता बताते हैं, ‘जिन देशों के पास परमाणु हथियार हैं, वे अपना परमाणु हथियार सीमित नहीं करते लेकिन ऐसे देश जो परमाणु हथियार बनाते हैं उन पर कभी जंग थोपते हैं, कभी प्रतिबंध। दुनिया उत्तर कोरिया और ईरान का हश्र देख रही है। अमेरिका तय करता है कि कौन हथियार रखेगा, कौन नहीं। इजरायल परमाणु नीति तय करने वाले 5 देशों में शामिल नहीं है, फिर भी ईरान पर आत्मरक्षा का तर्क देकर हमला कर देता है, जबकि ईरान, शांतिपूर्ण मकसदों के लिए यूरेनियम संवर्धन कर रहा था। इसमें ताकवर देशों की तानाशाही चलती है, छोटे देश पिसते हैं। चीन और फ्रांस ने इस संधि का अरसे तक विरोध किया लेकिन साल 1992 तक, दोनों देश इस संधि का हिस्सा बन गए। अमेरिका और रूस दोनों दावा करते हैं कि उन्होंने अपने परमाणु हथियार घटाए हैं लेकिन ऐसा हुआ नहीं है।’

भारत इस रेस में कहा खड़ा है?

भारत परमाणु शक्ति संपन्न देश है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की रिपोर्ट बताती है कि भारत दुनिया का 6वां सबसे ताकवर परमाणु शक्ति संपन्न देश है। भारत के परमाणु परीक्षण पर भी अमेरिका और दुनिया के विकसित देशों को उतना ही ऐतराज था, जितना ईरान से है। 1974 में भारत ने परमाणु परीक्षण किया, जिससे दुनिया चौंक गई। 

भारत ने 18 मई 1974 को भूमिगत परमाणु परीक्षण किया था। पोखरण में हुए इस परीक्षण के बारे में दुनिया को खबर तक नहीं हुई। भारत इकलौता ऐसा देश था जो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) का स्थाई सदस्य नहीं था लेकिन परमाणु परीक्षण किया। 

भारत यहीं नहीं रुका। 1974 के ‘स्माइलिंग बुद्धा’ से आगे बढ़कर भारत ने अपनी परमाणु क्षमताओं को और विकसित किया। 11 मई और 13 मई को 1998 में पोखरण में भारत ने एक और सफल भूमिगत परीक्षण किया। भारत ने खुद को परमाणु शक्ति संपन्न देश घोषित किया। अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने भारत पर कई कड़े प्रतिबंध लगाए। विदेशी मदद रोकी, सैन्य सौदों पर प्रतिबंध लगाए, कर्ज तक रोका गया। भारत की अर्थव्यवस्था को तबाह करने की पूरी कोशिश की गई लेकिनन भारत ने अपना रुख नहीं बदला। भारत पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों की वजह से खुद अमेरिका का नुकसान होने लगा। अक्तूबर 2001 तक, अमेरिका ने सारे प्रतिबंध हटा लिए थे। 

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जिन देशों ने परमाणु हथियार छोड़ा, उनका क्या हुआ? देशों के हाल से समझिए 

दक्षिण अफ्रीका, हथियार तबाह किए, हासिल ज्यादा हुआ

 द न्यूक्लियर थ्रेट इनीशिएटिव (NTI) की रिपोर्ट बताती है कि दक्षिण अफ्रीका ने अपने दम पर परमाणु हथियारों को विकसित किया था। ये बम 50-60 किलोग्राम से ज्यादा संवर्धित यूरेनियम से बने थे और इनकी विस्फोटक क्षमता 10 से 18 किलोटन के बीच थी। 1989 में सरकार ने इस पूरे परमाणु कार्यक्रम को रोक दिया। 1990 में राष्ट्रपति फ्रेडरिक विलेम डी क्लर्क के आदेश पर सभी 6 तैयार बमों और एक अधूरे डिवाइस को नष्ट कर दिया गया। 1993 में राष्ट्रपति डी क्लर्क ने संसद में इस कार्यक्रम के बारे में सार्वजनिक रूप से बताया और कहा कि दक्षिण अफ्रीका ने परमाणु हथियार बनाने का रास्ता हमेशा के लिए छोड़ दिया है। परमाणु निरीक्षण और वर्तमान स्थितिअंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने 1993 में जांच की और पुष्टि की कि दक्षिण अफ्रीका ने अपने सभी परमाणु हथियार और उत्पादन उपकरण पूरी तरह नष्ट कर दिए हैं। देश के पास अभी भी नागरिक उपयोग के लिए HEU है, जो IAEA की सुरक्षा व्यवस्था के अधीन है। दक्षिण अफ्रीका 1991 में नॉन-प्रोलिफरेशन ट्रीटी (NPT) में शामिल हुआ और खुद को नॉन-न्यूक्लियर वेपन स्टेट घोषित किया। 

असर क्या हुआ?

कंप्रिहेंसिव न्यूक्लियर टेस्ट बैन ट्रिटी (CTBT) और ट्रिटी ऑन प्रोहिबिशन ऑफ न्यूक्लियर वेपन (TPNW) जैसी संधियों पर हस्ताक्षर किए हैं। दक्षिण अफ्रीका चाहता है कि पूरी दुनिया परमाणु हथियारों से मुक्त हो। दक्षिण अफ्रीका में तब श्वेत अल्पसंख्यकों जिन्हें अपारथाइड कहते थे, उनकी सरकार थी। उनकी नीतियां भेदभाव और अलगावपूर्ण थीं। 1978 में सोवियत संघ के डर की वजह से अपने परमाणु कार्यक्रमों को शुरू किया लेकिन बाद में अंगोला से क्यूबा की सेना का पलायन हुआ, नमीबिया जैसी जगहें आजाद हुईं और सोवियत संघ कमजोर पड़ गया। अमेरिकी देशों ने प्रतिबंध लगाए थे। परमाणु हथियार रखने से ज्यादा दक्षिण अफ्रीका को राहत, न रखने में मिली। अब NPT में नॉन-न्यूक्लियर स्टेट के रूप में शामिल हुआ। सोने, हीरे, प्लेटिनम की खान के तौर पर मशहूर यह देश, अब तमाम आर्थिक असमानताओं के बाद भी प्रगति कर रहा है। अमेरिका, चीन से लेकर भारत तक, निवेश कर रहा है।  

बेलारूस, परमाणु हथियार छोड़ने का सिला क्या मिला?

 26 दिसंबर 1991 को USSR का विघटन हुआ। अविभाजित रूस, अब 15 अलग-अलग स्वतंत्र देशों में बंट गया। बेलारूस के पास खुद का हथियार नहीं था। हथियार विरासत में मिले थे और इसे तैयार करने वाला देश रूस था। बेलारूल ने तय किया कि 1996 तक सारे हथियारों को रूस को सौंप देगा। बेलारूस, दुनिया का आठवां परमाणु भंडार वाला देश था। बेलारूस चाहता था कि उसकी छवि एक ऐसे देश की बने जो संप्रभु हो लेकिन प्रतिबंधों से मुक्त हो। Congress.Gov की रिपोर्ट बताती है कि रूस अपने परमाणु हथियरों के रखरखाव पर $8.1 अरब डॉलर रुपये खर्च करता है। बेलारूस के लिए यह बोझ उठा पाना मुश्किल था। 

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परमाणु हथियार छोड़ने से क्या मिला?

अमेरिका, ब्रिटेन और रूस जैसी महाशक्तियों ने उसकी संप्रभुता को मान्यता दी। सीमित सीमाओं के सम्मान का वादा किया और सुरक्षा गारंटी दी। अंतराष्ट्रीय स्तर पर इन देशों ने बेलारूस की मदद की। 5 दिसंबर 1994 को बुडापेस्ट मेमोरेंडम के तहत अमेरिका, ब्रिटेन और रूस ने बेलारूस को यह भरोसा दिया कि उसकी सीमाओं पर हमले नहीं होंगे। वह NPT संधि का हिस्सा गैर परमाणु राज्य के तौर पर बना। रूस और बेलारूस बेहद करीब हैं, यह देश, रूस का सहयोगी है, यूरोप के कड़े प्रतिबंध झेल रहा है। रूस के साथ बेलारूस ‘यूनियन स्टेट’ समझौता है। 

कजाकिस्तान ने हथियार क्यों छोड़े?

 USSR के विघटन से जो 15 देश बने थे, उनमें कजाकिस्तान भी एक देश था। तब कजाकिस्तान के पास 1410 से ज्यादा परमाणु हथियार थे। अप्रैल 1995 तक, कजाकिस्तान ने सारे परमणु हथियार रूस को सौंप दिए थे। रूस और चीन जैसे देशों को यह मंजूर नहीं था कि कजाकिस्तान परमाणु हथियार रखे। कजाकिस्तान भी NPT का हिस्सा बना और खुद को एक गैर परमाणु शक्ति राज्य के तौर पर मान्यता दी। कजाकिस्तान इस बात से वाकिफ था कि परमाणु हथियार रखने का खामियाजा उसे भुगतना पड़ेगा। रूस ने सेमिपालाटिंस्क टेस्ट साइट या ‘द पॉलीगॉन’  पर 450 से ज्यादा परमाणु परीक्षण किए थे। काजाकिस्तान इसे और बढ़ाना नहीं चाहता था। 

कजाकिस्तान को क्या मिला?

साल 1994 में हुए बुडाबेस्ट मेमोरेंडम के तहत रूस, अमेरिका और ब्रिटेन ने वादा किया कि इस देश पर हमले नहीं किए जाएंगे। क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होगा। वित्तीय मदद की जाएगी। कजाकिस्तान को भारी कर्ज मिला। कजाकिस्तान उत्तर में रूस से घिरा है, पूरब में चीन से, दक्षिण में किर्गिजस्तान, उज्बेकिस्तान और तुर्केनिस्तान से घिरा है, पशिम में कैस्पियन सागर है। इस भौगोलिक सीमाओं के दायरे में उसके पास परमाणु हथियार छोड़ने से बेहतर रास्ता कुछ भी नहीं था। 

यूक्रेन ने क्यों परमाणु हथियार छोड़े, बदले में क्या मिला?

बेलारूस और कजाकिस्तान ने जिस वजह से अपने परमाणु हथियार रूस को सौंपे, वही वजह यूक्रेन के साथ भी रही। साल 1994 में जब यूक्रेन ‘बुडापेस्ट मेमोरेंडम’ पर हस्ताक्षर कर रहा था तो उसे रत्ती भर भी आशंका नहीं थी कि रूस उसे 24 फरवरी 2022 को तबाह करने की कसम लेगा और इस हद तक तबाह कर देगा कि उसे उभरने में दशक लग जाएंगे।

साल 1991 में सोवियत संघ से यूक्रेन भी अलग हुआ था। यूक्रेन के पास 1900 परमाणु हथियार थे, यह देश, दुनिया की तीसरा सबसे ताकतवर परमाणु शक्ति संपन्न देश था। यह देश, भारत से कहीं ज्यादा परमाणु क्षमता में ताकतवर देश था। बस एक कमी यह थी कि इन हथियारों का सोर्स कोड, यूक्रेन के पास कभी था ही नहीं। यूक्रेन के लिए ये खाली पड़े डब्बे से ज्यादा नहीं थे। यूक्रेन न तो इनके रख-रखाव पर $8.1 अरब डॉलर खर्च कर सकता था, न ही उसकी हैसियत थी।

यूक्रेन को बदले में क्या मिला?

यूक्रेन भी चाहता था कि उसकी गिनती यूरोपीय देशों में हो, वहां की आर्थिक छूट का लाभ मिले और व्यापारिक तौर पर मजबूत हो जाए। यूक्रेन ने हथियार त्यागे तो अमेरिका, ब्रिटेन और रूस ने उसकी संप्रभुता की लिखित गारंटी भी थी। अमेरिका, ब्रिटेन और इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने यूक्रेन को सिस्टमैटिक ट्रांसफॉर्मेशन फैसिलिटी (STF) के तहत लगभग 763.1 मिलियन अमेरिकी डॉलर का कर्ज भी दिया। 1995 तक, इन देशों की हालत देखकर दक्षिण अफ्रीका भी परमाणु हथियार छोड़ने के लिए तैयार हो गया। |

यूक्रेन कुछ दशक तक आर्थिक प्रगति के शीर्ष पर पहुंचा लेकिन नॉर्थ अटलांटिक ट्रिटी ऑर्गेनाइजेशन (NATO) में शामिल होने की जिद ने तबाह कर दिया। यूक्रेन के डोनेट्स्क और लुहान्स्क में रूसी भाषियों की एक बड़ी आबादी रहती है। क्रीमिया में भी रूस के समर्थक थे। रूस का आरोप था कि यहां यूक्रेन दमन कर रहा है। 2014 में भी रूस ने कुछ इलाकों में कब्जे की कोशिशें की, नियंत्रण स्थापित किया। यूक्रेन का पश्चिमी देशों की ओर झुकाव, यूक्रेन को तबाह कर बैठा। 

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बुडापेस्ट समझौता क्या है?

प्रोफेसर निखिल गुप्ता:-
दिसंबर 1994 में हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में एक समझौता हुआ। तीन पूर्व-सोवियत गणराज्य, यूक्रेन, बेलारूस और कजाकिस्तान ने अपने सभी परमाणु हथियार रूस को सौंपने का वादा किया। बदले में दुनिया की तीन परमाणु शक्तियों, अमेरिका, ब्रिटेन और रूस ने इन तीनों देशों को एक लिखित सुरक्षा गारंटी दी थी, जिसके तहत उन्होंने इन देशों की स्वतंत्रता, संप्रभुता और मौजूदा भौगोलिक सीमाओं का सम्मान करने का वादा किया गया। उन पर हमला न करने, आर्थिक दबाव न बनाने का वादा किया गया था।


रूस ने समझौते की धज्जियां उड़ा दीं। यूक्रेन की तबाही, रूस ने ही लिखी, समझौते के बाद भी। 

उत्तर कोरिया, प्रतिबंधों के साए में भी जिस देश ने हथियार बनाए 

उत्तर कोरिया ने 2003 में NPT संधि से किनारा कर लिया और परमाणु हथियार बनाए। तब उत्तर कोरिया की कमान किम जोंग उन के पिता किम जोंग इल गद्दी पर बैठे थे। वह किम इल सुंग के बेटे थे और चाहते थे कि अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान जैसे देश उन्हें आंख न दिखा सकें। वह साल 2011 तक शासक रहे और अमेरिका की आंखों की किरकिरी बने रहे। अमेरिका की धमकियां, आर्थिक प्रतिबंध उन पर बेअसर रहे, वह एक के बाद एक परमाणु परीक्षण करते गए, आर्थिक प्रतिबंध झेलते रहे। किम जोंग जब-तब परमाणु परीक्षण करते रहते हैं, परमाणु मिसाइलें बनाते हैं, दुनिया देखती है, खीझती है, कर कुछ नहीं पाती है। दुनिया को अपनी जेब में रखने का दावा करने वाले डोनाल्ड ट्रंप भी किम जोंग से बात करना चाहते हैं, उनके परमाणु कार्यक्रमों को रोकने की हिमाकत के बारे में सोचते भी नहीं हैं। 

क्यों कुछ बिगाड़ नहीं पाता है अमेरिका या दुनिया?

उत्तर कोरिया, वैश्विक तौर पर सबसे उपेक्षित राष्ट्र है। वैश्विक बैंकिंग प्रणाली से बाहर है। कोयला, खनिज, हथियार और वहां के सी फूड तक को कोई देश खरीद नहीं सकता है। साल 2006 में ही यह देश परमाणु शक्ति संपन्न देश बन गया था। दक्षिण कोरिया, जापान और अमेरिका चिंता तो करते हैं लेकिन हिम्मत नहीं कर पाते हैं कि यहां हमला बोलें। अगर किसी ने हमला बोला तो तबाही को न्योता देना होगा। किम जोंग उन किसी की परवाह नहीं करते, किसी की सुनते नहीं। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से उनकी दोस्ती है।

उत्तर कोरिया चीन और रूस के ‘बफर जोन’ के तौर पर काम करता है। रूस को यूक्रेन के खिलाफ सैन्य मदद भी चोरी-छिपे दे चुका है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में ये दोनों वीटो-पावर देश अमेरिका को उत्तर कोरिया के खिलाफ कोई भी निर्णायक या दंडात्मक कदम उठाने नहीं देते। उत्तर कोरिया पर आर्थिक प्रतिबंधों का दबाव शून्य है। 

ईरान को ऐसी सजा क्यों मिली?

ईरान पर हमेशा आरोप लगते थे कि यह देश चोरी-छिपे परमाणु हथियार बना रहा है। जुलाई 2015 में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, चीन और जर्मनी के साथ ईरान का जॉइंट कंप्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (JCPOA) हुआ, जिसका मकसद ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना था। मकसद था ईरान परमाणु कार्यक्रम पर कड़े प्रतिबंधों का एलान करना, जिससे यह देश परमाणु हथियार न बना सके। 

ईरान पर शर्तें थोपी गईं कि अपने संवर्धित यूरेनियम को ईरान 3 प्रतिशत तक सीमित करे, जिसका मकसद बिजली या शांतिपूर्ण कामों के लिए ही हो। ईरान को निर्देश मिले कि अपने सेंट्रीफ्यूज यानी यूरेनियम साफ करने वाली मशीनें की संख्या कम कर दे। इंटरनेशन एटमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) इनकी निगरानी करे। 

ईरान को क्या मिला?

अमेरिका, यूरोपीय संघ (EU) और संयुक्त राष्ट्र (UN) ने ईरान पर लगे व्यापार, बैंकिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े बेहद कड़े प्रतिबंध हटाए। ईरान को वैश्विक बाजार में लौटने का मौका मिला। साल 1980 के बाद ईरान ने यूरेनियम संवर्धन तेज कर दिया था। इस्लामिक क्रांति के बाद ईरान को लेकर दुनिया के ज्यादातर देशों को अविश्वास हुआ, साल 2002 में ईरान के गुप्त परमाणु कार्यक्रमों की जानकारी पूरी दुनिया को हुई। यह संकट बढ़ा, इजरायल हमेशा आशंकित रहा कि अगर परमाणु क्षमता से संपन्न देश, उसके आसपास है तो उसकी तबाही तय है। 

यह समझौता कैसे टूटा?

मई 2018 में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका को इस समझौते से बाहर कर दिया। उन्हें ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई से दिक्कत थी। उनका कहना था कि यह समझौता कमजोर है, ईरान के मिसाइल कार्यक्रम पर रोक नहीं लगी, ईरान पर कड़े प्रतिबंध थोपे, ईरान ने भी समझौते की शर्तें माननी बंद कर दी। ईरान ने 60 से 70 प्रतिशत तक यूरेनियम संवर्धन कर लिया। ईरान परमाणु हथियार बनाने के बेहद करीब पहुंच गया। 

अब किस हाल में है ईरान का परमाणु कार्यक्रम?

ईरान पर दुनिया के दो सबसे ताकतवर देशों ने परमाणु हमला किया है, इजरायल और अमेरिका। साल 2025 में भी ईरान ने अपने दो यूरेनियम संवर्धन केद्र, इसफहान और नतान्ज पर हमले झेले। ईरान करीब 60 फीसदी पर यूरेनियम संवर्धित कर चुका था, परमाणु बम बनाने से कुछ कदम दूर था। 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल दोनों ने मिलकर हमला कर दिया। महीनों की जंग के बाद अब ऐसा लग रहा है कि इस संकट का हल निकलेगा। ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम रोकेगा। IAEA की शर्तों को ईरान कितना मानता है, यह अभी अनिश्चितता के घेरे में है। 

NPT को कितना मान रहे हैं दुनिया के देश?

असिस्टेंट प्रोफेसर निखिल गुप्ता बताते हैं, ‘साल 2022 में NPT की 10वीं समीक्षा बैठक हुई। रूस और यूक्रेन जंग लड़ रहे हैं, नई बैठक अनिश्चित है। 2021 में परमाणु हथियारों पर प्रतिबंध से जुड़ी एक नई संधि ‘ट्रिटी ऑन द प्रोहिबिशन ऑफ न्यूक्लियर वेपन’ लागू हुआ। यह परमाणु हथियारों के पूर्ण प्रतिबंध की बात करता है। 7 जुलाई 2017 को संयुक्त राष्ट्र में इसे अपनाया गया, 22 जनवरी 2021 को लागू हुआ। यह समझौता परमाणु हथियारों को विकसित करने, परीक्षण करने, उत्पादन करने, रखने, स्टॉक करने, उपयोग करने, धमकी देने, स्थानांतरित करने या किसी भी तरह सहायता देने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाती है। इसका लक्ष्य परमाणु हथियारों का पूर्ण उन्मूलन है। दिलचस्प बात यह है कि इसे दुनिया के परमाणु शक्ति संपन्न देश मानने के लिए तैयार नहीं हैं।’

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क्या NPT की कवायद कामयाब है?

निखिल गुप्ता, असिस्टेंट प्रोफेसर, दीवान लॉ कॉलेज:-
परमाणु हथियार जिन देशों के पास हैं, उनसे भिड़ने का जोखिम कोई नहीं लेता। अगर यूक्रेन परमाणु क्षमता से संपन्न होता तो रूस की कभी हिम्मत नहीं पड़ती कि उस पर हमला करे। परमाणु युद्ध से बचाता है, न कि किसी देश को युद्ध में झोंकता है। सोचकर देखिए कि क्या किसी देश ने उत्तर कोरिया, चीन, पाकिस्तान या फ्रांस जैसे देशों पर हमला किया है? NPT भेदभावपूर्ण नीति है, जिसमें ताकतवर देशों को परमाणु हथियारों पर एकाधिकार दे दिया गया है। 


निखिल गुप्ता ने कहा, ‘NPT ने परमाणु हथियारों के फैलाव को रोका है। सिर्फ 9 देशों के पास परमाणु हथियार हैं। 1960 के दशक तक ऐसा डर था कि आधी दुनिया परमाणु हथियार बना लेगी। इस संधि की सबसे बड़ी आलोचना यह है कि यह पक्षपाती है। अगर परमाणु हथियार हैं तो अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, रूस और फ्रांस जैसे देशों का एकाधिकार क्यों हो। परमाणु हथियार से सबसे ज्यादा तबाही अमेरिका ने मचाई है, सबसे पहले उस पर प्रतिबंध लगना चाहिए। ईरान ने पहला हमला किसी देश पर नहीं बोला, ईरान से किसी देश को खतरा नहीं है, जितना अमेरिका से। अमेरिका ने कई देशों पर पहले ही हमला बोला। वेनेजुएला जैसे देश के राष्ट्रपति का अपहरण करता है, कनाडा को अस्थिर करने की बात करता है। दुनिया को परमाणु हथियार से बचाने की कवायद में इजरायल और अमेरिका ने दुनिया को तबाही में झोंक दिया है, जिसका असर भारत जैसे देशों को भुगतना पड़ रहा है।’

 

टेलीग्राम का कैसे हुआ गलत इस्तेमाल? केंद्र ने हलफनामा में बताया


नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल कर बड़ा खुलासा किया है। सरकार ने कहा है कि मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम का कथित तौर पर लीक प्रश्नपत्र और परीक्षा से जुड़ी सामग्री फैलाने के लिए इस्तेमाल किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र ने अदालत को बताया कि इस संबंध में उसे कई शिकायतें मिली थीं और पूरे मामले की जांच की जा रही है।

 

हलफनामे के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को टेलीग्राम के दुरुपयोग को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। आरोप था कि कुछ लोग टेलीग्राम के जरिए नीट-यूजी परीक्षा की लीक कंटेंट शेयर कर रहे थे और इससे जुड़ी धोखाधड़ी को बढ़ावा दे रहे थे। सरकार ने कहा कि इस मामले में संतुलित और जिम्मेदार तरीके से कार्रवाई की गई है।

 

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NTA ने कई चैनल और बॉट की पहचान की

केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने टेलीग्राम पर कई ऐसे चैनल, ग्रुप और बॉट्स की पहचान की है, जिनका इस्तेमाल लीक प्रश्नपत्र और परीक्षा कंटेंट फैलाने के लिए किया जा रहा था। इन माध्यमों के जरिए बड़ी संख्या में छात्रों तक संदिग्ध सामग्री पहुंचाई जा रही थी, जिससे परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए।

 

हलफनामे में कहा गया है कि सरकार ने टेलीग्राम पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की बजाय कम से कम हस्तक्षेप की नीति अपनाई। इसी के तहत 3 जून 2026 को सरकारी अधिकारियों और टेलीग्राम के प्रतिनिधियों के बीच बैठक हुई। इस दौरान अधिकारियों ने प्लेटफॉर्म पर चल रहे संदिग्ध चैनलों को समय रहते रोकने में कंपनी की नाकामी पर चिंता जताई।

 

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टेलीग्राम ने मानी तकनीकी चुनौतियां

सरकार के अनुसार, टेलीग्राम ने स्वीकार किया कि किसी संदिग्ध सामग्री या चैनल की पहले से पहचान करना उसके लिए तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण है। कंपनी ने यह भी कहा कि उसके मॉडरेटर उन चैनलों और ग्रुप्स पर कार्रवाई कर रहे हैं, जिनकी जानकारी यूजर्स या सरकारी एजेंसियों की ओर से दी जाती है।

 

इस बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नीट-यूजी री-एग्जाम की तैयारियों का जायजा लेने के लिए एक हाई-लेवल बैठक की। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि परीक्षा कराने में पूरी ईमानदारी, पारदर्शिता और बेहतर व्यवस्था का खास ध्यान रखा जाए और री-एग्जाम से जुड़ी सभी तैयारियां समय रहते पूरी कर ली जाएं।

बारिश में खुजली, रेडनेस और पिंप्लस से हैं परेशान, फॉलो करें ये स्किन केयर रूटीन


बारिश के मौसम में त्वचा संबंधी परेशानियां बढ़ जाती हैं। इस मौसम में त्वचा चिपचिपी हो जाती है। इसके अलावा जिन लोगों की त्वचा ऑयली है। उन्हें ज्यादा परेशानी होती है। मॉनसून में रेडनेस, खुजली और मुंहासे की समस्या बढ़ जाती है। भले ही इस मौसम में आपको गर्मी से राहत मिलती है लेकिन उमस बढ़ने से पसीना अधिक आता है, त्वचा के रूम छिद्रों में गंदगी जम जाती है जिसकी वजह से फंगल इंफेक्शन और बैक्टीरिया के पनपने का खतरा बढ़ जाता है। 

 

मॉनसून के मौसम में त्वचा को क्लींज करें। साथ ही हाइड्रेट रखें और सूरज की हानिकारक किरणों से बचाए रखना चाहिए। इस मौसम में आपको त्वचा क खास ख्याल रखने की जरूरत होती है ताकि त्वचा दमकती और खूबसूरत नजर आए।

 

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मॉनसून में त्वचा का रखें खास ख्याल

क्लींजिंग करें

 

जिन लोगों की ऑयली त्वचा होती है। उन्हें क्लीजिंग जरूर करना चाहिए। कुछ लोग बारिश के मौसम में बार-बार अपने चेहरे को धोते हैं। आप इस तरह की गलती न करें। ऐसा करने से आपकी आपकी त्वचा का नेचुरल ऑयल कम होने लगता है। इसके अलावा इरिटेशन की समस्या बढ़ जाती है।

  • हफ्ते में दो बार क्लींज करें।
  • अधिक केमिकल वाले साबुन का इस्तेमाल न करें।
  • अधिक पसीना आने पर त्वचा को क्लींज करें।

मॉश्चराइजर जरूर लगाएं

 

उमस की वजह से लगता है कि त्वचा हाइड्रेटेड है। कई लोग मॉनसून में मॉश्चराइजर नही लगते हैं ताकि त्वचा चिपचिपी न लगे। आप इस तरह की गलती न करें। त्वचा को डिहाइड्रेट होने से बचाने के लिए रोजाना मॉश्चराइजर लगाएं।

  • जेल बेस्ड मॉश्चराइजर लगाएं।
  • जिन लोगों की ड्राई स्किन है उन्हें क्रीम वाला मॉश्चराइजर इस्तेमाल करना चाहिए।

सनस्क्रीन जरूर लगाएं

 

कई लोगों को लगता है कि बारिश के मौसम में सनस्क्रीन की क्या जरूरत है? क्योंकि धूप नहीं है तो सूरज की हानिकारक किरणों से कोई नुकसान नहीं होगा। यह सच नहीं है। बारिश के मौसम में सूरज की हानिकारक किरणें त्वचा के लिए नुकसानदायक है। साथ ही सनस्क्रीन टेनिंग, पिगमेंटेशन को भी कम करने में मदद करता है। आपको एसपीएफ 30 या उससे ज्यादा एसपीएफ वाला सनस्क्रीन लगाना चाहिए। 

 

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मुंहासे वाले लोग इन बातों का रखें ध्यान

अधिक उमस की वजह से पसीना और ऑयल प्रोडक्शन बढ़ता है। इस वजह से मुंहासे की समस्या बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है। इस मौसम में आपको कुछ बातों का खास ध्यान रखने की जरूरत है।

  • बार-बार अपने हाथों से चेहरे को न छूएं।
  • हल्का मेकअप करें।
  • सोने से पहले मेकअ जरूर हटाएं।
  • जरूरत पड़ने पर त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेकर ही प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करें।

प्रद्युम्न चतुर्थी के दिन किन पांच राशियों का अच्छा रहेगा दिन?


18 जून को गुरुवार है। आज कई लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव होगा। हिन्दू पंचांग के अनुसार आज प्रद्युम्न चतुर्थी है। इस वजह से आज कई लोगों पर भगवान गणेश की कृपा बनी रहेगी। आज का मूलांक 9 है, जो उत्साह, ऊर्जा और साहस का प्रतीक माना जाता है। आज चंद्रमा अपनी ही राशि कर्क में संचार करेंगे, जिससे लोगों के भीतर संवेदनशीलता, रचनात्मकता और अपनों के प्रति सुरक्षा की भावना बढ़ेगी। गुरु और सूर्य की अनुकूल स्थिति इस गुरुवार को धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों के लिए विशेष रूप से शुभ बना रही है।

 

आज का दिन योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए उत्तम है। नौकरीपेशा लोगों को अपने कार्यक्षेत्र में सम्मान मिल सकता है, वहीं व्यापारियों के लिए निवेश के नए मार्ग खुलेंगे। पारिवारिक दृष्टिकोण से भी आज का दिन आपसी तालमेल और प्रेम को बढ़ावा देने वाला साबित होगा। आइए जानते हैं कि मेष से लेकर मीन राशि तक के जातकों के लिए आज का दिन कैसा रहने वाला है।

 

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राशिफल

 

1. मेष राशि

 

आज का दिन आपके लिए नई ऊर्जा और उत्साह से भरा रहेगा। व्यापार में नए सौदे लाभदायक सिद्ध होंगे। आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी और अटका हुआ धन वापस मिल सकता है। पारिवारिक जीवन सुखद रहेगा।

आज क्या करें: किसी भूखे व्यक्ति को भोजन कराएं।

आज क्या न करें: आज किसी भी तरह के वाद-विवाद में न पड़ें।

 

2. वृषभ राशि

 

आज आपको अपनी जुबान और व्यवहार पर नियंत्रण रखने की आवश्यकता है। करियर में बदलाव के अवसर मिल सकते हैं, लेकिन जल्दबाजी में कोई निर्णय न लें। व्यापारिक मोर्चे पर आज का दिन सामान्य रहेगा। आर्थिक स्थिति स्थिर रहेगी।

आज क्या करें: माता-पिता का आशीर्वाद लें।

आज क्या न करें: आज किसी को उधार देने से बचें।

 

3. मिथुन राशि

 

आज आपकी रचनात्मकता और बौद्धिक क्षमता चरम पर होगी। नौकरीपेशा जातकों को ऑफिस में कोई बड़ी जिम्मेदारी या प्रमोशन मिल सकता है। आर्थिक मामलों में भाग्य का पूरा साथ मिलेगा। प्रेम जीवन में रोमांस की एंट्री होगी और परिवार का माहौल खुशनुमा रहेगा। 

आज क्या करें: पक्षियों के लिए दाना-पानी रखें।

आज क्या न करें: किसी की पीठ पीछे उसकी बुराई न करें।

 

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4. कर्क राशि

 

चंद्रमा का आपकी ही राशि में होना आज आपको मानसिक रूप से बेहद सक्रिय रखेगा। करियर में आपके काम की तारीफ होगी। व्यापार में मनमुताबिक लाभ होने से मन खुश रहेगा। परिवार के साथ अच्छा समय बीतेगा। 

आज क्या करें: शिवलिंग पर दूध और जल अर्पित करें।

आज क्या न करें: पुरानी बातों को सोचकर समय बर्बाद न करें।

 

5. सिंह राशि

 

आज का दिन आपके लिए थोड़ा चुनौतीपूर्ण रह सकता है। नौकरी में वरिष्ठों से मतभेद की स्थिति बन सकती है, शांत रहें। अनावश्यक खर्चों के कारण बजट बिगड़ सकता है, इसलिए पैसों के लेन-देन में सावधानी बरतें।

आज क्या करें: सूर्य देव को अर्घ्य दें।

आज क्या न करें: आज प्रॉपर्टी खरीदने की जल्दबाजी न करें।

 

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6. कन्या राशि

 

आज का दिन आपके लिए बेहद भाग्यशाली रहने वाला है। करियर में लंबे समय से रुके हुए काम आज पूरे होंगे, जिससे आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा। धन की स्थिति मजबूत होगी और आप बचत करने में सफल रहेंगे। प्रेम संबंधों में गहराई आएगी।

आज क्या करें: मंदिर में हरी मूंग की दाल दान करें।

आज क्या न करें: योजनाओं को किसी व्यक्ति से शेयर न करें।

 

7. तुला राशि

 

तुला राशि वालों के लिए आज का दिन ऑफिस में मान-सम्मान बढ़ाने वाला रहेगा। नौकरी में बॉस आपके काम से बेहद प्रभावित होंगे। आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी। संपत्ति से जुड़े मामलों में लाभ हो सकता है। पारिवारिक जीवन में शांति और आनंद का माहौल रहेगा।

आज क्या करें: गाय को घी लगी हुई रोटी खिलाएं।

आज क्या न करें: काम में टालमटोल की आदत से बचें।

 

8. वृश्चिक राशि

 

आज भाग्य आपके साथ है, जिससे आपके सोचे हुए काम आसानी से पूरे हो जाएंगे। व्यापार में जोखिम उठाना आज फायदेमंद साबित हो सकता है। आर्थिक स्थिति पहले से काफी बेहतर होगी और निवेश के लिए दिन शुभ है। परिवार के साथ किसी धार्मिक यात्रा पर जाने का प्लान बन सकता है।

आज क्या करें: हनुमान चालीसा का पाठ करें।

आज क्या न करें: क्रोध को अपने ऊपर हावी न होने दें।

 

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9. धनु राशि

 

आज आपको हर कदम फूंक-फूंक कर रखने की जरूरत है। आर्थिक मामलों में सावधानी बरतें और कोई भी बड़ा निवेश आज टाल दें। पारिवारिक जीवन में गलतफहमियों के कारण मनमुटाव हो सकता है।

आज क्या करें: माथे पर हल्दी या केसर का तिलक लगाएं।

आज क्या न करें: आज किसी अजनबी पर आंख मूंदकर भरोसा न करें।

 

10. मकर राशि

 

मकर राशि वालों के लिए आज का दिन साझेदारी के कामों में बड़ी सफलता लेकर आएगा। नौकरी में टीम वर्क से आपको अच्छे परिणाम मिलेंगे। धन कमाने के नए मार्ग खुलेंगे। दांपत्य जीवन सुखद रहेगा और आप पार्टनर के साथ यादगार समय बिताएंगे।

आज क्या करें: किसी जरूरतमंद को काले चने का दान करें।

आज क्या न करें: आज किसी भी कानूनी मामले में लापरवाही न बरतें।

 

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11. कुंभ राशि

 

आज का दिन आपके लिए मिले-जुले परिणाम देने वाला रहेगा। करियर के मोर्चे पर आपको अधिक मेहनत करनी होगी। कुछ लोग आपकी छवि बिगाड़ने की कोशिश कर सकते हैं। आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी।

आज क्या करें: जरूरतमंद बच्चों को पढ़ने की सामान दान करें।

आज क्या न करें: आज अपनी क्षमता से अधिक का वादा किसी से न करें।

 

12. मीन राशि

 

मीन राशि के जातकों के लिए आज का दिन खुशियों की सौगात लेकर आया है। नौकरीपेशा लोगों को अपनी प्रतिभा दिखाने के बेहतरीन अवसर मिलेंगे। आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत होगी और पुराना कर्ज चुकाने में सफल रहेंगे।

आज क्या करें: भगवान विष्णु के मंदिर में पीले फूल अर्पित करें।

आज क्या न करें: सुख-सुविधाओं पर फिजूलखर्ची करने से बचें।

 

नोट: यह राशिफल ज्योतिषीय मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।

ईरान-अमेरिका ने डील पर कर दिए दस्तखत, डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल को क्या नसीहत दी?


तमाम तरह के टकरावों और ऊहापोह के बावजूद आखिरकार अमेरिका और ईरान के बीच समझौते हो गया है। अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने समझौते पर दस्तखत करके युद्ध खत्म करने का एलान किया है। अच्छी बात है कि इस बार दोनों देशों ने इसकी पुष्टि भी कर दी है। 14 मुद्दों वाले इस मेमोरैंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) का मकसद दोनों देशों के बीच अशांति को खत्म करना, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत जारी रखना शामिल है। इससे पहले इजरायल ने कहा था कि वह इस समझौते को नहीं मानेगा। यही वजह है कि अब डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल को नसीहत दी है कि उसे और बेहतर काम करना चाहिए।

 

G7 सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते पर फ्रांस से ही दस्तखत कर दिए। सामने आए वीडियो में देखा जा सकता है कि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की ओर से आयोजित डिनर कार्यक्रम की टेबल पर ही डोनाल्ड ट्रंप इस समझौते पर दस्तखत कर रहे हैं। इस दौरान मैक्रों भी उसी टेबल पर मौजूद थे और दस्तखत होने के बाद सबने ताली बजाकर इसका स्वागत किया। इसी कार्यक्रम के बाद जब वह निकले तो मीडिया के सामने चिल्लाकर कहा, ‘It’s Signed’ यानी अब समझौते पर दस्तखत हो गए हैं।

 

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इजरायल पर क्या बोले डोनाल्ड ट्रंप?

इस समझौते और इजरायल के मामले पर अपनी बात रखते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, ‘हमने समझौता जारी कर दिया है और इसकी एक कॉपी इजरायल को भी भेजी है। वह एक अच्छा साथी रहा है। मेरा मानना है कि इजरायल हिज्बुल्ला के मामले में और बेहतर कर सकते हैं। मैं यह नहीं कर रहा हूं कि उनकी रक्षा करने के लिए कोई अभियान शुरू कर दो लेकिन अगर दो ड्रोन रेगिस्तान में गिरते हैं और कहीं कोई नुकसान नहीं होता है तो आपको बेरुत में इमारतें तबाह नहीं करनी चाहिए।’

 

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उन्होंने आगे कहा, ‘वे अच्छा बर्ताव कर सकते हैं और अच्छा काम कर सकते हैं। मैं एक साथी के रूप में उन्हें बहुत पसंद करता हूं, वे शानदार हैं लेकिन वे हिज्बुल्लाह के मामले में अच्छा काम कर सकते हैं। मुझे लगता है कि अभी वे अच्छा काम नहीं कर रहे हैं।’

US-ईरान की डील में क्या है?

  • सभी तरह की सैन्य कार्रवाई तुरंत बंद होगी, लेबनान भी इसमें शामिल है
  • दोनों देशों की सहमति से 60 दिन के भीतर एक अंतिम समझौता किया जाएगा
  • अमेरिकी नेवी की ओर से की गई घेराबंदी हटेगी और प्रतिबंध भी हटाए जाएंगे
  • शुरुआती 60 दिनों तक सभी कमर्शियल शिप स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित और निशुल्क गुजरेंगे
  • ईरान की जब्त संपत्तियों को भी एक-एक करके लौटाया जाएगा
  • ईरान में अमेरिका की मदद से मरम्मत का काम किया जाएगा और अमेरिका इसके लिए 300 बिलियन डॉलर देगा
  • सूत्रों के मुताबिक, ईरान किसी भी तरह का परमाणु हथियार ना रखने और ना बनाने पर भी सहमत हो गया है

‘देश में एजुकेशन नहीं, एक्सटॉर्शन सिस्टम’, राहुल गांधी की रैली की 5 बड़ी बातें


राजस्थान के कोटा में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने ‘छात्रों की गूंज’ महारैली में देश की शिक्षा व्यवस्था पर कई सवाल दागे। उन्होंने आरोप लगाया कि आज शिक्षा व्यवस्था के कारण ही छात्रों को आत्महत्या करनी पड़ रही है। देश की शिक्षा व्यवस्था बच्चों पर दबाव डालती है। उन्हें तनाव देती है। दबाती और कुचलती है। यह देश की खातिर सही नहीं है।

 

इस दौरान राहुल गांधी ने पांच छात्र-छात्राओं से मंच पर बातचीत भी की। अपने संबोधन में राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि कोटा में आयोजित महारैली कोई सियासी कार्यक्रम नहीं है। यह कार्यक्रम युवाओं के विषय में है। उन्होंने यह कहा कि आज शाम हम बीजेपी-कांग्रेस, चुनाव और सियासत की बात नहीं करेंगे। सिर्फ युवाओं के बारे में और उनकी चुनौतियों पर बात होगी।

 

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राहुल गांधी ने कहा, ‘यहां आकर और आप लोगों व कोटा के सामने खड़े होकर मुझे बहुत खुशी और सम्मानित महसूस हो रहा है। मेरे यहां आने का मकसद यह साफ करना है कि यह कोई राजनीतिक बैठक नहीं है। यह बैठक आपके बारे में है, उन युवाओं के बारे में है जो अपना भविष्य बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।’

1- बीजेपी-कांग्रेस की बात नहीं करूंगा

उन्होंने आगे कहा, ‘मैं बीजेपी, कांग्रेस, राजनीति या चुनाव जैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं करूंगा। आज शाम मेरे मुंह से ये शब्द नहीं निकलेंगे। आज की शाम आपके लिए है। यह इस बारे में है कि आप किन हालात का सामना कर रहे हैं और रोजाना किन चुनौतियों से जूझ रहे हैं।’

 

 

 

 

राहुल गांधी ने अपनी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ का भी जिक्र किया और कहा, ‘कुछ समय पहले मैंने कन्याकुमारी से कश्मीर तक 4 हजार किलोमीटर की पदयात्रा की। रास्ते में मुझे आप जैसे लाखों युवा मिले। मैंने हजारों युवाओं से बात की। मेरा एक ही सवाल होता था कि आप क्या करना चाहते हो? मुझे पांच जवाब मिलते थे, छठा जवाब नहीं मिलता था। इंजीनियर, डॉक्टर, वकील, आईएएस और फोर्स। मुझे बस यही पांच जवाब मिलते थे… मेरे दिमाग में पहला सवाल उठा कि देश के युवा, देश के भविष्य होते हैं, हमारा शिक्षा सिस्टम हमारे युवाओं को सिर्फ पांच विकल्प क्यों देता है?’

 

राहुल गांधी ने कहा कि यात्रा के बाद मैंने शिक्षा व्यवस्था के बारे में थोड़ा और सोचना शुरू किया। मन में सवाल उठे। पब्लिक सेक्टर की शिक्षा व्यवस्था क्यों खत्म हो गई, प्राइवेट सेक्टर की शिक्षा व्यवस्था इतनी महंगी क्यों है?

 

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2-  ‘बच्चों पर दबाव डालती है शिक्षा व्यवस्था’

उन्होंने आरोप लगाया कि भारत की शिक्षा व्यवस्था अपने बच्चों पर दबाव डालती है, उन्हें तनाव देती है, दबाती है और कुचल देती है और यह देश के लिए सही नहीं है। मैं चाहता हूं कि हम सब मिलकर काम करें, ताकि यह पक्का किया जा सके कि इस भीड़ में, इस देश में किसी भी छात्र को… कभी खुदकुशी करने का ख्याल न आए। यह बैठक इसी बारे में है। यह कोई राजनीतिक बैठक नहीं है। यह बैठक भारत की शिक्षा व्यवस्था पर चर्चा करने के लिए है। भारत की शिक्षा व्यवस्था में क्या गलत है और उसमें क्या सुधार करने की जरूरत है। 

 

 

 

3-  ’22 लाख छात्रों के परिवार शिक्षा बजट के बराबर खर्च करते हैं’

राहुल गांधी ने कहा कि नीट में 22 लाख स्टूडेंट के परिवारों से हर साल 1.32 लाख करोड़ रुपए वसूले जाते हैं। इतना ही पैसा सरकार देश के एजुकेशन बजट में डालती है, जो 1.4 लाख करोड़ रुपये है। मतलब 22 लाख लोग एक परीक्षा के लिए उतना पैसे देते हैं, जितना हिंदुस्तान की सरकार अपने एजुकेशन बजट में डालती है।

 

उन्होंने कहा कि पांच सबसे बड़ी परीक्षाएं SSC, UPSC, JEE, RRB, NEET पर परिवारों से 3.5 लाख करोड़ रुपए वसूले जाते हैं। सरकार इतना ही बजट एजुकेशन, हेल्थ, लेबर, साइंस, महिला और बाल विकास मंत्रालय को देती है।

3- ‘शिक्षा का नहीं, उगाही का सिस्टम है’

राहुल गांधी ने एक उदाहरण से समझाया, ‘अगर 1,000 बच्चे इस सिस्टम में जाते हैं तो सिर्फ 12 बच्चों को ही वेतनभोगी रोजगार पाएंगे। करीब 300 लोग बेरोजगार रहेंगे। उनके पास कर्ज और नशे वाली लाइन है। करीब 700 लोग गिग वर्कर बनेंगे, कुली बनेंगे, मनरेगा से जुड़ेंगे या फिर इनफॉर्मल सेक्टर में काम करेंगे। मतलब देश के युवाओं से सरासर झूठ बोला जा रहा है, क्योंकि ये शिक्षा का नहीं, बल्कि उगाही का सिस्टम है।

 

 

 

‘हिंदुस्तान में रिजेक्शन सिस्टम’

5- राहुल गांधी ने कहा कि मीटिंग में आज यहां 3,000 स्टूडेंट्स हैं। इनमें से सिर्फ 1 आईएएस बनेगा। 30 छात्र आईआईटी जाएंगे। 180 डॉक्टर बनेंगे। हिंदुस्तान में ‘सिलेक्शन सिस्टम’ नहीं, ‘रिजेक्शन सिस्टम’ है।

सनस्क्रीन से जुड़ी इन 5 बातों पर आप भी करते हैं यकीन, जानिए सच


जब भी स्किनकेयर की बात होती है तो सनस्क्रीन को हमेशा विकल्प माना जाता है। सोशल मीडिया की वजह से लोग स्किन केयर के प्रति जागरूक हुए हैं लेकिन सनस्क्रीन से जुड़े मिथ्स को लोग सच मानते हैं। खासतौर से पुरुषों को लगता है कि सनस्क्रीन लगाने का कोई फायदा नहीं होता है। 

 

लोगों का मानना है कि जिन लोगों का रंग काला है उन्हें सनस्क्रीन लगाने की जरूरत नहीं है। इसके अलावा ठंडे मौसम में भी सनस्क्रीन को लगाने का कोई फायदा नहीं है। आपको बता दें कि ये सभी बातें भ्रम है। इन बातों में कोई सच्चाई नहीं है।

 

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सनस्क्रीन से जुड़े मिथ्स के बारे में जानें

मिथ 1- सनस्क्रीन सिर्फ धूप में लगाना चाहिए

 

सनस्क्रीन धूप में सूरज की हानिकारक किरणों से बचाने का काम करता है। लोगों को लगता है कि बारिश और ठंड के मौसम में सनस्क्रीन लगाने की जरूरत नहीं होती है लेकिन यह सच नहीं है। ठंडे मौसम में सूरज की हानिकारक किरणे त्वचा के लिए नुकसानदायक है।

 

मिथ 2- दिन में एक बार लगाना काफी है

 

लोगों को लगता है कि दिन में एक बार सनस्क्रीन लगाना काफी होती है और आप सूरज की हानिकारक किरणों से बच सकते है। पसीने, प्रदूषण की वजह से सन स्क्रीन कुछ समय के बाद प्रभाव नहीं रहता है। त्वचा विशेषज्ञों के मुताबिक आपको दिन में दो से तीन बार सनस्क्रीन लगाना जरूरी है।

 

मिथ 3- अधिक एसपीएफ क्रीम ज्यादा फायदेमंद है

 

लोगों को लगता है कि अधिक एसपीएफ वाली क्रीम त्वचा के लिए ज्यादा फायदेमंद है। ऐसा बिल्कुल नहीं है। अधिक एसपीएफ का यह मतलब नहीं है कि आप सूरज की यूवी ए और यूवी बी किरणों से पूरी तरह से सुरक्षित है।

 

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मिथ 4- सिर्फ सनस्क्रीन लगाना काफी है

 

ऐसा सोचना आपकी सबसे बड़ी गलती है। सनस्क्रीन आपको सूरज की हानिकारक किरणों से बचाने का काम करता हैं लेकिन अन्य समस्याओं से छुटकारा नहीं दिलाता है।

 

मिथ 5- डार्क लोगों को सनस्क्रीन की जरूरत नहीं

 

त्वचा में मेलनिन की मात्रा अधिक होने से प्राकृतिक रूप से यूवी रे से सुरक्षा मिलती है लेकिन ये दाग-धब्बे, एजिंग और स्किन कैंसर के खतरे को कम नहीं करता है। सनस्क्रीन हर स्किन टोन के व्यक्ति के लिए जरूरी है।

 

17 या 18 जून कब है प्रद्युम्न चतुर्थी? सही तारीख से लेकर पूजा की विधि जानिए


सनातन धर्म में प्रद्युम्न चतुर्थी पर्व का एक खास महत्व है। इस पर्व में हर भक्त भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करता है। साथ ही इस पर्व में कई लोग व्रत भी रखते हैं, जिससे भक्तों पर भगवान गणेश की कृपा बरसती है। धार्मिक जानकारों के मुताबिक, प्रद्युम्न चतुर्थी के दिन जो भक्त व्रत रखते हैं, उन्हें न केवल जीवन में सुख-शांति मिलती है, बल्कि जीवन के कई विघ्न यानी कष्ट भी दूर हो जाते हैं। इस साल का प्रद्युम्न चतुर्थी पर्व शुभ और फलदायी माना जा रहा है। इस वजह से सभी भक्तों को व्रत रखना चाहिए।

 

इस साल प्रद्युम्न चतुर्थी पर्व 17 जून की रात से शुरू होगा। 18 जून की शाम को यह पर्व समाप्त होगा। ऐसे में कई भक्तों के मन में दुविधा है कि प्रद्युम्न चतुर्थी की सही तारीख क्या है। साथ ही सवाल उठता है कि इस साल प्रद्युम्न चतुर्थी का व्रत किस दिन रखा जाए। आइए इस सवाल का जवाब जानते हैं।

 

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क्या है प्रद्युम्न चतुर्थी की सही तारीख?

हिंदू पंचांग के मुताबिक, 17 जून की रात 9 बजकर 38 मिनट पर चतुर्थी तिथि शुरू होगी। इसके बाद यह तिथि 18 जून को शाम 6 बजकर 58 मिनट पर समाप्त होगी। हिंदू धर्म में उदया तिथि के हिसाब से व्रत और पर्व मनाए जाते हैं। इसी आधार पर 18 जून को प्रद्युम्न चतुर्थी की उदया तिथि पड़ रही है, इसलिए 18 जून को ही व्रत रखना चाहिए।

प्रद्युम्न चतुर्थी के दिन शुभ मुहूर्त

प्रद्युम्न चतुर्थी पर शुभ ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:03 बजे से शुरू होगा, जो 4:43 बजे तक रहेगा। सुबह की पूजा का शुभ मुहूर्त 10:58 बजे से लेकर 1:46 बजे तक रहेगा। इसके अलावा इस दिन का विजय मुहूर्त दोपहर 11:54 बजे से लेकर 12:50 बजे तक रहेगा।

 

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किस तरह करें पूजा?

 

प्रद्युम्न चतुर्थी के दिन भक्तों को सुबह स्नान करना चाहिए। इसके बाद साफ कपड़े पहन लें। फिर अपने घर के मंदिर में पीला कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद भगवान गणेश को फूलों की माला पहनाएं और फूल अर्पित करें। फिर चंदन का तिलक लगाएं। सबसे खास बात यह है कि प्रद्युम्न चतुर्थी की पूजा के दौरान भगवान गणेश को दूर्वा घास जरूर चढ़ाएं।

 

प्रद्युम्न चतुर्थी की पूजा में मोदक या लड्डू का भोग अवश्य लगाएं क्योंकि यह भगवान गणेश की प्रिय मिठाई मानी जाती है। पूजा के बाद गणेश चालीसा का पाठ करें। इसके बाद पूर्ण श्रद्धा भाव से ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जाप करें।

 

नोट: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।

खाने की कमी पूरी करने के लिए छोड़े थे खरगोश, ऐसी तबाई मचाई कि सबके होश उड़ गए


ज्यादातर लोगों के लिए खरगोश नुकसान न पहुंचाने वाले जानवर होते हैं, जिन्हें बगीचों, पालतू जानवरों और बच्चों की कहानियों से जोड़ा जाता है। बचपन से ही बच्चों को खरगोश की कहानी भी पढ़ाई जाती है और इसे एक प्यारे जानवर के रूप में दिखाया जाता है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया में स्थित मैक्वेरी द्वीप पर खरगोश सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाली बाहरी प्रजातियों में बदल गए। खास बात यह है कि इन खरगोशों को जानबूझकर इस द्वीप पर छोड़ा गया था और अब यह इस पूरे द्वीप के लिए खतरा बन गए। इसके पीछे की कहानी भी बड़ी रोचक है। 

 

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इन खरगोशों को साल 1878 में जानबूझकर वहां छोड़ा गया था ताकि इस दूरस्थ द्वीप पर आने वाले नाविकों और शिकार करने वालों को खाने का भरोसेमंद साधन मिल सके। यह फैसला उस समय सही लगा और बाद में पर्यावरण के लिए बड़ी तबाही बन गया।

 

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मैक्वेरी द्वीप पर खरगोश क्यों छोड़े गए?

मैक्वेरी द्वीप ऑस्ट्रेलिया का एक दूरस्थ इलाका है, जो तस्मानिया और अंटार्कटिका के बीच स्थित है। उन्नीसवीं सदी में नाविक और शिकारी अक्सर इस द्वीप पर आते थे और कई दिनों तक वहां रुकते थे। भविष्य में आने वाले लोगों को ताजा मांस मिल सके, इसलिए साल 1878 में वहां जानबूझकर खरगोश छोड़े गए। उस समय यह फैसला समझदारी भरा लगा क्योंकि द्वीप पर आने वाले लोगों के लिए खाने का इंतजाम हो गया था। ऐसी व्यवस्था दूसरी जगहों पर भी अपनाई गई थी, जहां दूरस्थ द्वीपों पर जानवर छोड़कर उन्हें भोजन के भंडार की तरह इस्तेमाल किया जाता था।

तेजी से बढ़ी खरगोशों की संख्या

जिस समय खरगोश छोड़े गए थे उस समय इसके लंबे समय के पर्यावरणीय असर पर बहुत कम ध्यान दिया गया। यह द्वीप का अपना अलग और अनोखा प्राकृतिक तंत्र था, जो लंबे समय तक बाकी दुनिया से अलग विकसित हुआ था। इसलिए यह तेजी से बढ़ने वाले ऐसे जानवरों के आने का सामना करने के लिए तैयार नहीं था। उस द्वीप पर खरगोशों को शिकार करने के लिए छोड़ा गया लेकिन वहां पर खरगोशों की संख्या कंट्रोल करने वाले शिकारी जानवर नहीं थे और खाने के लिए बहुत ज्यादा वनस्पति मौजूद थी। 

 

एक बार जब खरगोश वहां बस गए, तो उनकी संख्या बहुत तेजी से बढ़ने लगी। मादा खरगोश एक साल में कई बार बच्चे पैदा कर सकती है, जिससे अनुकूल परिस्थितियों में उनकी आबादी बहुत तेजी से बढ़ती है। मैक्वेरी द्वीप पर ऐसे कोई स्थानीय शिकारी जानवर नहीं थे जो उनकी संख्या को कंट्रोल कर सकें।

पौधों के लिए बने खतरा

द्वीप पर घनी वनस्पति थी और खरगोशों को खाने के लिए भरपूर भोजन मिल गया। जैसे-जैसे उनकी संख्या हजारों से बढ़कर एक लाख से ज्यादा हो गई, उन्होंने पौधों को उनकी दोबारा बढ़ने की गति से भी ज्यादा तेजी से खाना शुरू कर दिया। जिन इलाकों में पहले घनी हरियाली थी, वे धीरे-धीरे खाली जमीन में बदल गए।

 

मैक्वेरी द्वीप कई समुद्री पक्षियों के प्रजनन का महत्वपूर्ण स्थान है। यहां कई प्रकार के पक्षी रहते और अंडे देते हैं, जिनमें पेट्रेल, अल्बाट्रॉस और पेंगुइन जैसे पक्षी शामिल हैं। इन पक्षियों में से कई घोंसला बनाने और सुरक्षित रहने के लिए वनस्पति पर निर्भर थे। हालांकि, खरगोशों के कारण वह सब पहले ही खत्म हो चुका था। पौधों की कमी के कारण मिट्टी का कटाव शुरू हो गया जिससे प्रजनन के लिए पक्षियों को सही जगह नहीं मिली। यानी खरगोशों की बढ़ती संख्या ने उन्हें भी नुकसान पहुंचाया।  

द्वीप को बचाने के लिए चला अभियान

20वीं सदी के अतं तक लोगों को समझ आ गया कि खरगोशों के कारण द्वीप को नुकसान पहुंच रहा है और इसे बचाने के लिए कुछ तो करना पड़ेगा। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया ने बाहरी प्रजातियों को हटाने के लिए दुनिया के सबसे बड़े अभियानों में से एक शुरू किया। अभियान के तहत अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल करके खरगोशों और अन्य बाहरी जानवरों को द्वीप से निकाला गया। ऑस्ट्रेलिया को इसके लिए काफी ज्यादा खर्च भी करना पड़ा। साल 2014 तक यह अभियान लगभग पूरा हुआ और द्वीप से खरगोशों को पूरी तरह हटा दिया। 

 

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फिर से द्वीप पर लौटी रौनक

इस अभियान के बाद जो बदलाव दिखाई दिए, उन्होंने वैज्ञानिकों को भी चौंका दिया। स्थानीय पौधे फिर से तेजी से उगने लगे और जिन इलाकों की हरियाली कई दशकों से खत्म हो चुकी थी, वहां दोबारा वनस्पति लौटने लगी। इससे मिट्टी मजबूत हुई और जानवरों के रहने की जगहें फिर से बनने लगीं।

 

वन्यजीवों को भी इसका फायदा मिला। जैसे-जैसे हरियाली लौटी, समुद्री पक्षियों और दूसरी स्थानीय प्रजातियों के लिए प्रजनन की स्थिति बेहतर होने लगी। कुल मिलाकर द्वीप फिर से अपनी पुरानी स्थिति पर पहुंचने लगा। इस मामले ने पूरी दुनिया को सचेत किया कि कैसे प्रकृति के सात छेड़छाड़ उसे तबाह कर सकती है। मैक्वेरी द्वीप पर एक गलत फैसले से दशकों तक संतुलन बिगड़ता रहा। हालांकि, मैक्वेरी द्वीप पर तो अभियान सफल रहा लेकिन कई जगहों पर आज भी मानवीय गलतियों के कारण प्रकृति का संतुलन बिगड़ गया है।