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दूनागिरी, अग्रय और संशोधक, 3 युद्धपोत जो बढ़ाएंगे नौसेना की ताकत, खूबियां समझिए


भारतीय नौसेना जल्द ही अपने बेड़े में तीन नए स्वदेशी युद्धपोत शामिल करने जा रही है। इनमें डुनागिरी, अग्रय और संशोधक नाम के जहाज शामिल हैं। इन तीनों की खास  बात यह है कि इन्हें पूरी तरह भारत में डिजाइन और तैयार किया गया है। इन युद्धपोतों के शामिल होने से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री ताकत और मजबूत होगी और इन तीनों को अलग-अलग कामों के लिए बनाया गया है। 

 

खास बात यह है कि इन जहाजों का निर्माण कोलकाता की सरकारी कंपनी ‘गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स’ ने किया है। यह कंपनी पिछले कुछ सालों में भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता का बड़ा केंद्र बनकर उभरी है। चीन की बढ़ती समुद्री गतिविधियों और हिंद महासागर में उसके प्रभाव को देखते हुए भारत लगातार अपने नौसैनिक बेड़े को आधुनिक बना रहा है और इसी रणनीति के तहत इन जहाजों को शामिल किया जा रहा है। 

 

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क्या है इन जहाजों की खासियत?

इन तीनों जहाजों की खासियत अलग अलग है और इन्हें अलग सैन्य जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। डुनागिरी एक आधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट है, जो दुश्मन की रडार प्रणाली से बचते हुए लंबी दूरी तक हमला करने में सक्षम है। वहीं अग्रय को समुद्र के उथले इलाकों में पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। संशोधक एक बड़ा सर्वे जहाज है, जिसका इस्तेमाल समुद्री नक्शे तैयार करने, गहराई मापने और नौसेना के लिए जरूरी समुद्री जानकारी जुटाने में होगा। इन तीनों जहाजों का एक साथ शामिल होना भारत की आत्मनिर्भर रक्षा नीति के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। 

डुनागिरी पर तैनात रह सकते हैं 225 सैनिक

डुनागिरी को प्रोजेक्ट 17ए के तहत बनाया गया है, जिसे भारतीय नौसेना का सबसे आधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट प्रोग्राम माना जाता है। करीब 45 हजार करोड़ रुपये की इस परियोजना के तहत कई अत्याधुनिक युद्धपोत बनाए जा रहे हैं। डुनागिरी इस सीरीज का पांचवां जहाज है। इसकी लंबाई लगभग 149 मीटर है और इसका वजन करीब 6670 टन है। यह जहाज ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल, बराक 8 एयर डिफेंस सिस्टम और आधुनिक रडार तकनीक से लैस है। यह समुद्र में 28 नॉट की रफ्तार से चल सकता है और इसमें करीब 225 नौसैनिक तैनात रह सकते हैं। युद्ध के दौरान यह जहाज दुश्मन के विमान, मिसाइल और पनडुब्बियों से मुकाबला करने में सक्षम होगा। 

 

भारतीय नौसेना के लिए यह स्टील्थ फ्रिगेट इसलिए भी अहम है क्योंकि इसमें करीब 75 प्रतिशत स्वदेशी उपकरण और तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसका मतलब यह है कि भारत अब युद्धपोत निर्माण में विदेशी तकनीक पर कम निर्भर होता जा रहा है। नौसेना के लिए यह बदलाव रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे न केवल रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी बल्कि भारतीय कंपनियों और इंजीनियरों को भी बड़े स्तर पर अवसर मिलेंगे। हाल के वर्षों में भारत ने युद्धपोत, मिसाइल और रक्षा तकनीक के क्षेत्र में तेजी से प्रगति की है और डुनागिरी उसी दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है। 

अग्रय में क्या खास है?

अग्रय की बात करें तो यह एक एंटी सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट है। इसे खास तौर पर समुद्र के उथले हिस्सों में पनडुब्बियों का पता लगाने और उन पर हमला करने के लिए तैयार किया गया है। यह जहाज करीब 77 मीटर लंबा है और इसमें आधुनिक सोनार सिस्टम, हल्के टॉरपीडो और रॉकेट लॉन्चर लगाए गए हैं। भारत के लिए ऐसे जहाजों की जरूरत इसलिए बढ़ी है क्योंकि हिंद महासागर में चीन की पनडुब्बियों की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में अग्रय जैसे जहाज भारत की समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगे। 

 

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समुद्री सर्वे में मदद करेगा संसोधक

संशोधक एक बड़ा सर्वे जहाज है, जो समुद्री सर्वेक्षण और हाइड्रोग्राफिक मिशनों के लिए इस्तेमाल होगा। इसकी लंबाई करीब 110 मीटर है और यह गहरे समुद्र से लेकर बंदरगाहों तक का सर्वे करने में सक्षम है। इस जहाज में हेलीकॉप्टर संचालन की सुविधा भी दी गई है। जरूरत पड़ने पर इसे राहत और बचाव अभियान, अस्पताल जहाज और मानवीय सहायता मिशनों में भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। नौसेना के लिए समुद्री नक्शे और गहराई की सटीक जानकारी बेहद जरूरी होती है और संशोधक इसी काम को और बेहतर बनाएगा। 

गर्मी में कम हो गया है त्वचा का ग्लो? इन तरीकों से लौटेगा चेहरा का नूर


गर्मी के मौसम में धूप, प्रदूषण और घंटों स्क्रीन देखने की वजह से त्वचा बेजान और रूखी नजर आती है। इन चीजों की वजह से त्वचा पर मुंहासे, फाइन लाइंस की समस्या होने का खतरा भी बढ़ जाता है। इस मौसम में टेनिंग की समस्या होना आम बात है। कुछ लोग इन समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए घरेलू नुस्खें का इस्तेमाल करते हैं। कुछ लोग केमिकल बेस्ड प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं। हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है। इस वजह से किसी भी तरह के प्रोडक्ट के इस्तेमाल से पहले पैच टेस्ट जरूर करवाएं। 

 

अगर गर्मी में आपकी त्वचा भी डल और बेजान नजर आती हैं तो हम आपको कुछ टिप्स बता रहे हैं जिसकी मदद से त्वचा ग्लोइंग और चमकदार लगेगी। आपको अपने स्किन केयर रूटीन में इन टिप्स को शामिल करना है।

 

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गर्मी में त्वचा का कैसे रखें ख्याल

स्क्रब लगाना छोड़ें

 

अक्सर लोग त्वचा की डेड स्किन को हटाने के लिए स्क्रब करते हैं। स्क्रब करने से त्वचा में जमी गंदगी हट जाती है और चेहरा साफ हो जाता है लेकिन इससे रेडनेस की समस्या भी हो सकती है। आप त्वचा की चमक को बढ़ाने के लिए एएचए (AHA) और बीएचए (BHA) वाले केमिकल प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करें। ये चीजें त्वचा को हाइड्रेट रखती हैं। साथ ही ड्राइनेस की समस्या नहीं होती है। आप एचए और बीएचए टोनर या सीरम का इस्तेमाल कर सकते हैं।

 

एंटी ऑक्सीडेंट का इस्तेमाल करें

 

त्वचा की चमक को बढ़ाने के लिए एंटी ऑक्सीडेंट का इस्तेमाल करें। एंटी ऑक्सीडेंट वाले प्रोडक्ट में विटामिन सी की मात्रा ज्यादा होता है जो काले धब्बे को हटाने में मदद करता है। रोजाना चेहरे पर विटामिन सी वाला सीरम लगा सकते हैं।

 

पर्याप्त नींद लें

 

अगर आप पर्याप्त मात्रा में नींद नहीं लेते हैं तो चेहरे थका हुआ नजर आता है। पर्याप्त नींद लेने से त्वचा फ्रेश और ग्लोइंग नजर आता है। नींद लेने के दौरान शरीर खुद को रिपेयर मोड में डालता है। हर व्यक्ति को रोजाना 7 से 8 घंटे की नींद लेनी चाहिए।

 

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सनस्क्रीन लगाना न भूलें

 

सनस्क्रीन लगाना बेहद जरूरी है। सूरज की हानिकारक किरणें त्वचा में कोलेजन को कमजोर करती है और हाइपरपिगमेंटशन की समस्या को बढ़ाती है। आप त्वचा संबंधी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए एसपीएफ 30 या 50 युक्त सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें।

17 मई से 15 जून अधिकमास रहेगा, विष्णु का यह महीना खास क्यों है?


हिन्दू पंचांग के मुताबिक, 17 मई से 15 जून तक अधिकमास रहने वाला है। इस महीने को पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, ज्येष्ठ मास 30 दिनों की बजाय 60 दिनों तक रहने वाला है, इसी वजह से इस महीने को अधिक मास कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, अधिकमास धार्मिक कार्यों को करने के लिए बेहद शुभ माना जाता है। यानी भगवान विष्णु का जाप और तप करना चाहिए ताकि भक्तों को इन कर्मों का दोगुना फल मिले।

 

अधिक मास का पूरा महीना भगवान विष्णु का महीना माना जाता है। इस महीने भगवान विष्णु का सिर्फ नाम लेने से ही भक्तों को दोगुना लाभ मिलता है। अब सवाल उठता है कि इस महीने भक्तों को क्या करना चाहिए, साथ ही सवाल उठता है कि इस महीने से जुड़ी पौराणिक मान्यता क्या है?

 

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अधिक मास से जुड़ी पौराणिक कथा

 

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, बहुत पहले इस महीने का कोई स्वामी नहीं था। इसी वजह से पहले लोग इस महीने कोई भी शुभ कार्य करने से बचते थे। जिस वजह से इस महीने को मलमास कहा जाता था, जिसका अर्थ नीरस होता है। हर महीने की तुलना में इस महीने को सबसे ज्यादा नकारात्मक माना जाता था।

 

जिसे देखकर मलमास बेहद दुखी था। उसने अपनी समस्या विष्णु जी को सुनाई, तो भगवान विष्णु ने उन्हें आशीर्वाद दिया। भगवान विष्णु ने कहा कि आगे से इस महीने को मलमास नहीं बल्कि पुरुषोत्तम मास कहा जाएगा। जो भी भक्त इस महीने सच्चे मन से पूजा-पाठ करेगा, उसे दोगुना फल मिलेगा।

 

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अधिकमास में क्या करें?


विधिवत पूजा – इस महीने भगवान विष्णु जी की विधि-विधान के अनुसार पूजा-पाठ करना चाहिए।
व्रत रखें – इस महीने भगवान विष्णु की खास कृपा सभी लोगों पर पड़ती है। इसी वजह से इस महीने सभी लोगों को एकादशी का व्रत रखना चाहिए।
मंत्रों का जाप – हिन्दू धर्म में मंत्रों का जाप बेहद शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इस महीने मंत्रों का जाप करने से भक्तों के पाप मिट जाते हैं।
हर रोज दीपदान – इस महीने हर रोज सुबह-शाम अपने मंदिर में घी के दीपक जलाएं।
धार्मिक ग्रंथों का पाठ – धार्मिक ग्रंथों को पढ़ने से व्यक्ति का धार्मिक ज्ञान बढ़ता है।
दान दें – गरीबों और जरूरतमंद लोगों को दान देना चाहिए।


इस महीने क्या न करें?

अधिकमास आध्यात्म के लिए शुभ माना जाता है। फिर भी इस महीने कुछ कार्यों को करने से बचना चाहिए।
मांगलिक कार्य न करें – इस महीने मुंडन, गृह प्रवेश, शादी या नया घर खरीदने से बचना चाहिए।
मांस-मदिरा का सेवन वर्जित – इस महीने लोगों को मांसाहारी भोजन से बचना चाहिए। साथ ही जो लोग शराब पीते हैं, उन्हें इस पवित्र महीने में शराब का सेवन नहीं करना चाहिए।


डिस्क्लेमर – यह खबर सामान्य जानकारी पर आधारित है। इसकी पुष्टि खबरगांव नहीं करता है।

‘कुंवारी लड़की चुप तो शादी के लिए हां है…’, तालिबान का नया फरमान


अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने एक नया कानून पास किया है। इस 31 आर्टिकल वाले कानून में सबसे बड़ी बात यह है कि अगर कोई ‘वर्जिन’ लड़की, प्यूबर्टी पर पहुंचने के बाद शादी के फैसले पर चुप रहती है तो उसकी इस खामोशी को ही उसकी सहमति यानी हां मान लिया जाएगा। तालिबान के सुप्रीम लीडर हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने इस कानून को मंजूरी दी है। इसे मई के महीने के बीच में सरकारी गजट में छापा गया है। इस कानून का नाम ‘प्रिंसिपल्स ऑफ सेपरेशन बिटवीन स्पौसेस’ जिसका मतलब है कि पति-पत्नी के अलग होने के नियम में रखा गया है।

 

‘आमू टीवी’ के मुताबिक, चुप्पी को ‘हां’ मानने का यह नियम सिर्फ कुंवारी लड़कियों पर ही लागू होगा। अगर कोई लड़का शादी के प्रस्ताव पर चुप रहता है या फिर कोई ऐसी महिला चुप रहती है जिसकी पहले शादी हो चुकी हो तो उनकी चुप्पी को सहमति नहीं मानी जाएगा। इस कानून में ‘खियार अल-बुलूग’ नियम का भी जिक्र है। इसके तहत अगर किसी बच्चे की शादी बचपन में हुई थी तो वह बड़ा होने पर उसे खारिज करने की मांग कर सकता है लेकिन इसके लिए उसे तालिबान की अदालत से आदेश लेना होगा।

 

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रिश्तेदारों के अधिकार क्या हैं?

कानून के आर्टिकल 5 में लिखा है कि अगर पिता या दादा को छोड़कर परिवार का कोई दूसरा रिश्तेदार किसी नाबालिग बच्चे की शादी कराता है तो वह शादी तभी मानी जाएगी जब लड़का-लड़की का स्टेटस यानी दर्जा एक जैसा हो और शादी की रकम बिल्कुल सही तय हुई हो। अगर स्टेटस बराबर नहीं है या शादी की रकम में कोई गड़बड़ी है तो वह शादी कैंसल मानी जाएगी।

 

पिता और दादा को शादी कराने के बड़े अधिकार हैं लेकिन अगर ये गार्जियन बच्चों के साथ बुरा बर्ताव करते हैं दिमागी रूप से बीमार हैं या उनका खुद का कैरेक्टर ठीक नहीं है, तो उनके जरिए तय की गई शादी को कोर्ट रद्द कर सकता है।

कोर्ट के नियम क्या हैं?

यह कानून तालिबान के जजों को पति-पत्नी के पर्सनल मामलों में दखल देने के बड़े अधिकार देता है। अगर कोई इस्लाम छोड़ता है या कोई पति लंबे समय तक गायब रहता है तो जज उनके अलग होने का फैसला सुना सकते हैं। इसके अलावा अवैध संबंध के आरोपों और जिहार यानी पत्नी की तुलना मां-बहन से करने की प्रथा जैसे मामलों में भी जजों को फैसला सुनाने और सजा देने का पूरा हक है।

 

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दुनिया क्या कह रही है?

अगस्त 2021 में सत्ता में आने के बाद से तालिबान ने लड़कियों की पढ़ाई यानी छठी क्लास से आगे और महिलाओं के नौकरी करने या अकेले बाहर घूमने पर पहले से ही रोक लगा रखी है। अंतरराष्ट्रीय संगठन इसे जैंडर अपार्थाइड कह रहे है यानी कानून और नियमों के जरिए महिलाओं को उनके हकों से पूरी तरह अलग कर देना।

 

गर्ल्स नॉट ब्राइड्स के मुताबिक अफगानिस्तान में करीब वन-थर्ड लड़कियों की शादी 18 साल से कम उम्र में होती है। पॉलिटिकल कमेंटेर फहीमा मोहम्मद ने न्यूज कॉर्प से कहा कि बच्चे सही फैसला नहीं ले सकते इसलिए बच्चों की शादी गलत है और लड़की की चुप्पी को हां समझना उनकी आवाज को दबाना है। उन्होंने यह भी कहा कि कुराण महिलाओं के साथ ऐसी जबरदस्ती की इजाजत नहीं देता इसलिए इस्लामी कानून को नहीं मानना चाहिए।

6 राज्य, कई रेड, गिरफ्तारी, NEET पेपर लीक में NTA नेटवर्क का पर्दाफाश कैसे हुआ?


NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI ने NTA की पेपर सेटिंग कमिटी की दूसरी सदस्य को गिरफ्तार कर लिया है। पुणे की सीनियर बॉटनी टीचर मनीषा गुरुनाथ मांढरे को गिरफ्तार किया गया है। CBI के अनुसार, NTA नेमनीषा मंधारे को एक्सपर्ट के रूप में नियुक्त किया था। उनके पास बॉटनी और जूलॉजी के सवालों की पूरी जानकारी थी। 

अप्रैल महीने में उन्होंने अपने पुणे स्थित घर पर कोचिंग क्लासेस चलाई। को-आरोपी मनीषा वाघमारे की मदद से छात्रों को इकट्ठा किया और परीक्षा के सवाल उन्हें बता दिए। CBI ने कहा कि क्लास में जो सवाल पढ़ाए गए, उनमें से ज्यादातर असली NEET पेपर में आए।

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किसने लीक किया NTA का पेपर?

रिटायर्ड केमिस्ट्री लेक्चरर पीवी कुलकर्णी को गिरफ्तार किया गया था, अब उन्हें 10 दिनों की रिमांड पर भेजा गया है। मनीषा मंधारे ने भी उसी तरीके का इस्तेमाल किया। अब तक की जांच में पता चला है कि केमिस्ट्री का पेपर कुलकर्णी ने लीक किया और बॉटनी-जूलॉजी का पेपर मंधारे ने। दोनों NTA के आंतरिक समिति के ही लोग थे।

CBI ने अब तक क्या किया है?

CBI की टीम अब पूरी पेपर सेटिंग कमिटी और NTA के सीनियर अधिकारियों की जांच कर रही है। अगले कुछ दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। मनीषा वाघमारे, पुणे की ब्यूटी पार्लर चलाती है, छात्रों को कोचिंग के लिए भर्ती करती थीं। 

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6 राज्यों तक फैला पेपर लीक

पेपर लीक 27 अप्रैल से पहले हो चुका था, जबकि परीक्षा 3 मई को हुई। लीक हुए पेपर हैंडरिटेन और टाइप्ड दोनों रूपों में बाहर आए। इसके बाद यह मध्यस्थों के जरिए 6 राज्यों तक फैला। 

लाखों रुपये देकर हासिल किए सवाल

छात्रों ने लाखों रुपये देकर ये सवाल हासिल किए। अब तक 9 लोगों को पांच राज्यों से गिरफ्तार किया जा चुका है। CBI ने कहा है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से चल रही है। इस लीक के कारण 22 लाख से ज्यादा छात्रों को परीक्षा दोबारा देनी पड़ सकती है।

हर 2 घंटे पर खाने की आदत, सेहत के लिए नुकसानदायक है समझिए कैसे?


हमने अक्सर सुना है कि हर व्यक्ति को हर 2 से 3 घंटे पर थोड़ा-थोड़ा खाना चाहिए। ऐसा करने से आपका पेट भी लंबे समय तक भरा रहता है और दिन भर एनर्जी भी महसूस होती है। ऑफिस जाने वाले स्नैक बॉक्स लेकर जाते हैं, जिम जाने वाले अपने पास प्रोटीन बार रखते हैं ताकि शरीर में दिन भर एनर्जी रहे। साथ ही मेटाबॉलिज्म भी बूस्ट होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं हर कुछ देर पर खाने की आदत सेहत के लिए नुकसानदायक है। 

 

विशेषज्ञों के मुताबिक ज्यादातर लोगों को नहीं पता है कि वे कितनी मात्रा में क्या खा रहे हैं? बार-बार खाने से शरीर में शुगर का लेवल बढ़ता है, पेट संबंधी समस्या बढ़ती है और वजन घटाने में भी दिक्कत महसूस होता है। 

 

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हर 2 घंटे पर खाना कितना फायदेमंद?

ज्यादातर लोगों को लगता है कि हर 2 घंटे पर खान से ओवरईटिंग की समस्या नहीं होती है, एनर्जी बनी रहती है और आपको बार-बार भूख नहीं लगती है। ऐसा करने से मेटाबॉलिज्म भी बूस्ट होता है। US National Institutes of Health के मुताबिक हम कितनी कैलोरी ले रहे हैं और किस तरह का खाना खा रहे हैं। ये चीजें ज्यादा प्रभावित करती है। कई रिसर्च में इस बात की पुष्टि हुई है कि बार-बार खाना ज्यादातर लोगों के लिए फायदेमंद नहीं होता है। आपको अपनी डाइट में नट्स, फ्रूट्स, घर का बना खाना शामिल करना चाहिए। जबकि ज्यादातर लोग पैकेट वाले स्नैक्स, शुगर वाली ड्रिंक्स, बिस्किट और प्रोसेस्ड फूड को शामिल करते हैं। ये चीजें सेहत के लिए नुकसानदायक है।

बार-बार खाने से कैलोरी बढ़ती है

अगर आप बार-बार खाना खाते हैं तो शरीर में कैलोरी की मात्रा बढ़ती है। इस कैलोरी की वजह से वजन बढ़ाता है। ओवरईटिंग का कारण माइंडलेस ईटिंग है।

इंसुलिन को ब्रेक नहीं मिलने पर क्या होता है

जब भी कार्बोहाइड्रेट और शुगर वाली चीजों  को खाने से शुगर का लेवल बढ़ता है। तब शरीर इंसुलिन की मदद से शुगर को कोशिकाओं में भेजता है। यहां पर इंसुलिन मुद्दा नहीं है लेकिन दिक्कत तब होती है जब आप बार-बार ऐसा करते हैं। 

 

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पाचन तंत्र को भी आराम चाहिए

बार-बार खाने की वजह से पेट फूलना, पेट दर्द की समस्या हो सकती है। हमारे शरीर को खाना खाने के बाद आराम की जरूरत होती है ताकि खाना अच्छे से पच सके। अगर बार-बार खाना खाएंगे तो पेट संबंधी बीमारियां हो सकती हैं।

कोर्ट के फैसले के बाद कैसे हुई ‘भोजशाला’ में पूजा, लोगों ने क्या कहा?


मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला मंदिर में हजारों भक्त दर्शन करने पहुंचे हैं। आज से मंदिर में विधि-विधान से पूजा होगी। यह मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश के बाद संभव हो पाया है। पिछले कई सालों से मंदिर को लेकर विवाद चल रहा था, जहां एक तरफ हिन्दू पक्ष के लोगों का दावा था कि यह मां सरस्वती जी यानी वाग्देवी का प्राचीन मंदिर है, वहीं दूसरी तरफ मुस्लिम पक्ष का दावा था कि यह कमाल मौला मस्जिद है। इसी विवाद को लेकर 15 मई को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया। इस फैसले के तहत भोजशाला परिसर को मां सरस्वती जी का मंदिर माना गया है। वहीं मुस्लिम पक्ष को दूसरी जमीन दिए जाने की बात कही गई है।

 

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले के मुताबिक अब भोजशाला मंदिर में केवल पूजा की जाएगी। जानकारी के लिए बता दें कि साल 2003 में एएसआई (Archaeological Survey of India) ने फैसला लिया था कि इस परिसर में पूजा और नमाज दोनों होंगी। इससे दोनों पक्षों के बीच विवाद की स्थिति बनी रहती थी। इसी वजह से अब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एएसआई के उस फैसले को रद्द कर दिया।

 

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भोजशाला मंदिर को लेकर विवाद

 

साल 2000 में एएसआई (Archaeological Survey of India) ने मंदिर परिसर की खुदाई की थी ताकि इसके इतिहास का पता लगाया जा सके। एएसआई (ASI) को खुदाई में मूर्तियां, संस्कृत और प्राकृत शिलालेख, साथ ही अरबी-फारसी अभिलेख मिले थे। इसके बाद साल 2003 में एएसआई ने फैसला लिया था कि मंगलवार के दिन हिन्दू पक्ष पूजा कर सकेगा, जबकि शुक्रवार के दिन मुस्लिम पक्ष नमाज अदा कर सकेगा।

 

इसके बाद साल 2022 में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस और भोज उत्सव समिति ने कोर्ट में याचिका दायर की। इस याचिका में मांग की गई थी कि एएसआई (ASI) की वैज्ञानिक जांच दोबारा कराई जाए। इसके बाद 2024 में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एएसआई (ASI) सर्वे का आदेश दिया। इसी सर्वे के आधार पर कोर्ट ने भोजशाला परिसर को मंदिर माना है।

 

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कोर्ट के फैसले पर लोगों की प्रतिक्रिया


इस फैसले के बाद हिन्दू और मुस्लिम पक्ष की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। एक तरफ हिन्दू भक्त मंदिर परिसर में बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे हैं। साथ ही कई महिलाएं मंदिर में पूजा-अर्चना कर रही हैं।

 

दूसरी तरफ कई मुस्लिम लोग कोर्ट के फैसले से खुश नहीं हैं। एक व्यक्ति ने कहा, ‘हम लोग कोर्ट के इस फैसले से सहमत नहीं हैं। कोर्ट ने एएसआई की जांच के आधार पर फैसला सुनाया है, जबकि हमें पहले से ही उस जांच पर भरोसा नहीं था।’

कौन था ISIS का दूसरा बड़ा कमांडर अबू मिनुकी, जिसको मारने का दावा कर रहे ट्रंप?


अमेरिका और नाइजीरिया की संयुक्त कार्रवाई में आईएसआईएस को बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि आतंकी संगठन आईएसआईएस का पूरी दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा कमांडर अबू बिलाल अल मिनुकी मारा गया है। ट्रंप के मुताबिक यह ऑपरेशन अमेरिकी सुरक्षा बलों और नाइजीरिया की सेना ने मिलकर चलाया था जिसमें उन्हें सफलता मिली है। ट्रंप ने कहा कि यह ऑपरेशन बहुत ही प्लानिंग के साथ और बेहद मुश्किल तरीके से किा गया है। 

 

अबू बिलाल अल मिनुकी लंबे समय से अफ्रीका में छिपकर आईएसआईएस की गतिविधियों को आगे बढ़ा रहा था। अमेरिकी एजेंसियां उसके मूवमेंट पर नजर रख रही थीं और उसे अफ्रीका में ही निशाना बनाया गया। ट्रंप ने कहा कि अबू बिलाल अल मिनुकी को लगता था कि वह अफ्रीका में छिपकर सुरक्षित रह सकता है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों के पास उसकी गतिविधियों की लगातार जानकारी पहुंच रही थी। इसी खुफिया जानकारी के आधार पर ऑपरेशन की योजना बनाई गई और फिर उसे मैदान से हटा दिया गया।

 

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कौन था अल मिनुकी?

अल मिनुकी को आतंकी संगठन आईएसआईएस के सबसे सक्रिय आतंकियों में गिना जा रहा था। माना जाता है कि वह पूरी दुनिया में आईएसआईएस का दूसरा सबसे बड़ा आतंकी थी। उस पर अफ्रीका में आतंकी नेटवर्क को मजबूत करने, हमलों की योजना बनाने और अमेरिका से जुड़ी जगहों को निशाना बनाने की साजिशों में शामिल होने का आरोप था। 

उसकी मौत को आईएसआईएस के वैश्विक ढांचे के लिए बड़ा नुकसान माना जा रहा है, क्योंकि वह संगठन के उन नेताओं में शामिल था जो अलग अलग क्षेत्रों में फैले मॉड्यूल्स के बीच तालमेल बनाने में भूमिका निभा रहे थे।

अफ्रीका में बढ़ रहा आतंकी नेटवर्क

नाइजीरिया पिछले कई सालों से चरमपंथी हिंसा से जूझ रहा है। बोको हराम और इस्लामिक स्टेट वेस्ट अफ्रीका प्रोविंस जैसे संगठन देश के उत्तरी हिस्सों में लगातार सक्रिय रहे हैं। ऐसे में अबू बिलाल अल मिनुकी जैसे बड़े कमांडर का मारा जाना न सिर्फ नाइजीरिया बल्कि पूरे पश्चिम अफ्रीका की सुरक्षा के लिहाज से अहम माना जा रहा है। अफ्रीका में आईएसआईएस ने हाल के सालों में अपनी पकड़ बढ़ाने की कोशिश की है और कई स्थानीय आतंकी समूहों के साथ जुड़कर अपना नेटवर्क फैलाया है।

 

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ट्रंप ने नाइजीरिया को कहा थैंक यू

ट्रंप ने इस कार्रवाई में अमेरिका का साथ देने के लिए नाइजीरिया सरकार का धन्यवाद किया और कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग से यह मिशन सफल हो सका। उन्होंने दावा किया कि अल मिनुकी के खत्म होने से आईएसआईएस की वैश्विक क्षमता कमजोर हुई है। हालांक,  ऑपरेशन की सटीक जगह और कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। 

 

अबू बिलाल अल मिनुकी का नाम पहले भी अंतरराष्ट्रीय आतंकी निगरानी सूचियों में शामिल रहा था। उसकी मौत के बाद आईएसआईएस को नेतृत्व और संचालन दोनों स्तरों पर झटका लग सकता है। यह कार्रवाई अमेरिका की उस रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है, जिसमें वह अफ्रीका में बढ़ते आतंकी प्रभाव को रोकने के लिए स्थानीय सरकारों के साथ मिलकर काम कर रहा है। नाइजीरिया के लिए भी यह ऑपरेशन सुरक्षा मोर्चे पर एक महत्वपूर्ण सफलता के तौर पर देखा जा रहा है

9 राज्यों में बारिश और 17 में आंधी तूफान का अलर्ट, अगले 5 दिन कैसा रहेगा मौसम?


भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 16 मई यानी शनिवार को 9 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया। वहीं 17 राज्यों में आंधी-तूफान की चेतावनी भी दी है। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, झारखंड और महाराष्ट्र के विदर्भ में लू चलने की संभावना है। गोवा में मौसम गर्म और उमस भरा रहेगा। मौसम विभाग ने हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में आंधी-तूफान की चेतावनी दी है। 

 

आईएमडी ने मौसम पूर्वानुमान में बताया कि शनिवार को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, केरल, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, तमिलनाडु और पुडुचेरी के अलग-अलग स्थानों पर भारी वर्षा की संभावना है।

 

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यहां आंधी-तूफान का अलर्ट: आईएमडी ने बताया कि बिहार के कुछ स्थानों पर शनिवार को 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी और गरज-चमक के साथ बूंदाबांदी हो सकती है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, पूर्वी राजस्थान, आंतरिक कर्नाटक, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, झारखंड, केरल, गोवा, लक्षद्वीप, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और सिक्किम की कुछ जगहों में आंधी तूफान के अलावा बिजली गरजने की संभावना है।

 

इन प्रदेशों में लू चलने का अलर्ट

  • 21 मई तक पश्चिमी राजस्थान के कुछ जिलों में लू का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं इसी अवधि में कुछ इलाकों में भीषण लू चल सकती है। 
  • 16 मई यानी शनिवार से 21 मई तक उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों लू चलने की चेतावनी। 19 मई तक कई स्थानों पर भीषण लू का अलर्ट। 
  • पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में 17 से 21 मई के बीच लू की चेतावनी दी गई है।
  • 16 से 21 मई तक पूर्वी राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के विदर्भ में लू चलने की संभावना।
  • 16 से 18 मई तक झारखंड और 21 मई तक छत्तीसगढ़ में लू का अलर्ट जारी किया गया है। 

आगे कैसा रहेगा मौसम

16 मई को जम्मू-कश्मीर, लद्दाख,पूर्वी राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान है। कुछ स्थानों पर गरज चमक के साथ 40 से 50 किमी की रफ्तार से हवा चलने की संभावना है। मौसम विभाग ने 17 मई को छत्तीसगढ़ में हल्की बारिश का अनुमान जताया है। वहीं तेज आंधी की भी चेतावनी जारी की है। 

 

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अगर पूर्वोत्तर भारत की बात करें तो 17 मई तक नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में छिटपुट से मध्यम बारिश का अनुमान है। गरज-चमक के साथ तेज हवाएं भी चल सकती हैं। 21 मई तक अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में बारिश की उम्मीद है। 17 मई तक कोंकण और गोवा व 18 मई तक मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में तेज हवा चलने और हल्की से माध्यम बारिश की संभावना है।  

 

19 मई तक उप हिमालयी पश्चिम बंगाल और 16 मई को मैदानी पश्चिम बंगाल में मौसम करवट लेगा। यहां तेज हवाओं के साथ बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। 21 मई तक बिहार और झारखंड में मौसम विभाग ने बिजली कड़कने, आंधी आने और हल्की से मध्यम बारिश की चेतावनी दी है। 19 मई तक ओडिशा में मौसम बदला-बदला रहेगा।

फेफड़ों में खून का जमना कैसे हो सकता है जानलेवा?


13 मई को समाजवादी पार्टी के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव का निधन हो गया। 38 साल की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।  उन्हें पिछले कुछ समय से सांस लेने में परेशानी हो रही थी और पैरों की नसों में खून जमने की समस्या होती है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनकी मौत का कारण पल्मोनरी थ्रॉम्बो एम्बोलिज्म बताया गया। इस स्थिति में बड़ी मात्रा में खून के थक्के जम जाते है जिससे दिल और फेफड़े काम करना बंद कर देते हैं। इस बीमारी में व्यक्ति की अचानक मृत्यु हो जाती है।

 

आइए जानते हैं फेफड़ों में खून के थक्के जमा होना कितना खतरनाक हो सकता है। इस बीमारी का मुख्य कारण क्या है और इससे बचने का तरीका क्या है?

 

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क्या होता है पल्मोनरी थ्रॉम्बो एम्बोलिज्म?

प्रतीक के मौत के बाद खून में थक्के बनने की बीमारी डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT) फिर चर्चा में आ गई। इस बीमारी को जानने से पहले समझते हैं कि शरीर में ब्लड क्लॉट कब बनता है? जब शरीर में कहीं चोट लगती है तो खून के बहाव को रोकने के लिए क्लॉट बनता है। कई बार बिना चोट के भी नसों में खून जमने लगता है। अगर ब्लड क्लॉट बड़ा हो जाए तो ये टूटकर शरीर के अन्य हिस्सों में चला जाता है जिसे मेडिकल की भाषा में डीप वेन थ्रोम्बोसिस कहा जाता है। जब ये खून के थक्के फेफड़ों की नसों में पहुंच जाता है तो उसे पल्मोनरी थ्रॉम्बोएम्बोलिज्म (PTE) कहते हैं। यह स्थिति जानलेवा हो सकती है।

 

इस वजह से फेफड़े सही से काम नहीं कर पाते हैं। इसके अलावा फेफड़ों को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिलता है जिस वजह से कार्डियक अरेस्ट आता है और मौत हो जाती। 

इस बीमारी का कारण क्या है?

  • लंबे समय तक एक ही जगह पर बैठे रहना
  • सर्जरी या चोट लगना
  • खून में थक्के बनने के डिसऑर्डर
  • कैंसर और कुछ बीमारियां

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Cleveland clinic के मुताबिक आमतौर पर पल्मोनरी थ्रॉम्बो के लक्षण अक्सर नजर आते हैं जैसे पैरों में दर्द, सूजन, गर्मी महसूस होना, सीने में तेज दर्द, खांसी, त्वचा का रंग पीला पड़ना, चक्कर आना, बेहोश होना।

कैसे करें बचाव?

इस बीमारी से बचने के लिए एक ही जगह पर बैठने से बचना चाहिए।
काम के दौरान बीच बीच में टहलना।
पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
एक्सरसाइज करें।
बिना डॉक्टर की सलाह कोई दवा न लें।
शरीर में होने वाले बदलावों को नजरअंदाज न करें।
जागरूकता से बचाव संभव है।
सांस फूलने पर डॉक्टर की सलाह लें।