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पीएम मोदी आज इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कान्क्लेव का करेंगे उद्घाटन, 12 विषयों पर होगी चर्चा

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मंगलवार को को राष्ट्रीय राजधानी में इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कान्क्लेव (ईएसटीआईसी) का उद्घाटन करेंगे। सम्मेलन में देश-विदेश के विज्ञानी, उद्योग जगत के विशेषज्ञ, नीति निर्माता और स्टार्टअप के प्रतिनिधि जुटेंगे और उभरती प्रौद्योगिकियों तथा भारत की विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार संबंधी प्राथमिकताओं पर मंथन करेंगे।

27 से 29 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले इस सम्मेलन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), जैव प्रौद्योगिकी, विनिर्माण, स्वास्थ्य, ऊर्जा, जलवायु और समुद्र विज्ञान सहित 12 विषयों पर चर्चा होगी। इसका उद्देश्य नई तकनीकों के विकास और वैज्ञानिक उपलब्धियों को व्यावहारिक उपयोगों में बदलने के तरीकों पर विचार करना है ताकि वैज्ञानिक उपलब्धियों का लाभ आम लोगों तक पहुंचे।

सम्मेलन में भारत की स्वदेशी तकनीकों और वैज्ञानिक उपलब्धियों को प्रदर्शित करने के लिए प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। अत्याधुनिक तकनीक पर काम करने वाले करीब 150 स्टार्टअप अपने उत्पाद प्रदर्शित करेंगे। प्रदर्शनी दूसरे दिन से आम लोगों के लिए भी खुली रहेगी।

इसके साथ ही नई पहल ग्लोबल कनेक्ट नेटवर्किंग इवेंट में भारत और विदेश के 300 से अधिक प्रतिभागी शामिल होंगे। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय शोध सहयोग और उद्योगों तथा शिक्षण संस्थानों के बीच साझेदारी को बढ़ावा देना है।

भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय के मार्गदर्शन में वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) इस सम्मेलन का आयोजन कर रही है। इसका उद्देश्य भारत के विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार तंत्र को मजबूत करना तथा ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को आगे बढ़ाना है। इसमें नोबेल पुरस्कार विजेता तीन विज्ञानी वैज्ञानिक जोआखिम फ्रैंक, रिचर्ड जे. राबर्ट्स और कोस्त्या नोवोसेलोव भी भाग लेंगे।

राजस्थान में अवैध खनन की होगी सीबीआई जांच, सुप्रीम कोर्ट दे सकता है आदेश

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को चेतावनी दी कि वह राजस्थान की जोजारी-लूनी-बांडी नदी प्रणाली के आसपास कथित अवैध खनन और खनन पट्टों (लीज) को नियमित किए जाने के मामले में सीबीआई जांच का आदेश दे सकता है। कोर्ट ने राज्य के अधिकारियों पर आरोप लगाया कि अदालतों के बार-बार निर्देश देने के बावजूद वे नदियों की रक्षा करने में विफल रहे हैं।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सवाल किया कि जिन खनन क्षेत्रों में अवैध गतिविधियां पाई गई थीं, उन्हें बाद में पट्टों के जरिये नियमित (रेगुलराइज) कैसे कर दिया गया।

जस्टिस मेहता ने राजस्थान की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सालिसिटर जनरल एसवी राजू से कहा-अगर आप अपनी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं लाते हैं, तो हमें सीबीआइ जांच का आदेश देना पड़ेगा।

शीर्ष अदालत ने राज्य के अधिकारियों को उसके पहले के निर्देशों को गलत तरीके से पेश करने के लिए भी फटकार लगाई। ये निर्देश ‘हाई फ्लड लाइन’ तय करते समय नदी गलियारों को संकरा करने से जुड़े थे।

रिकार्ड में बालोतरा के पास लूनी नदी के बहाव की चौड़ाई करीब आठ मीटर दिखाई गई है, जबकि वहां बना पुल लगभग 1782 मीटर लंबा है। इस पर जस्टिस मेहता ने स्थिति को बेतुकेपन की पराकाष्ठा बताया।

यह भी पढ़ें: अयोध्या जमीन अधिग्रहण विवाद: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी, अब तक क्या-क्या हुआ?

एक और एनकाउंटर: बंगाल में आधी रात क्राइम सीन रीक्रिएशन के दौरान मुठभेड़, नाबालिग से दुष्कर्म और हत्या का आरोपी ढेर

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राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के गायघाटा इलाके में मंगलवार तड़के पुलिस एनकाउंटर में किशोरी से दुष्कर्म और नृशंस हत्या के मुख्य आरोपी प्रह्लाद दास की मौत हो गई। बारूईपुर में घटी ऐसी ही घटना के महज साढ़े तीन महीने के भीतर राज्य में पुलिस मुठभेड़ की यह दूसरी घटना है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, बांग्लादेश सीमा से महज चार किलोमीटर दूर स्थित वारदात स्थल पर तड़के पुलिस आरोपित प्रह्लाद को लेकर अपराध का री-क्रिएशन (घटना का पुनर्निर्माण) कराने पहुंची थी। इसी दौरान आरोपित ने अचानक पुलिसकर्मी की सरकारी पिस्तौल छीन ली और फायरिंग कर दी।

इस अप्रत्याशित हमले में एक पुलिसकर्मी घायल हो गया। पुलिस का दावा है कि आत्मरक्षा में चलाई गई जवाबी गोली से आरोपित गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तुरंत चांदपाड़ा ग्रामीण अस्पताल ले जाया गया, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

क्या है पूरा मामला?

बताते चलें कि गत शनिवार रात 17 वर्षीया किशोरी अपने गांव में आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम (जलसा) में गई थी। देर रात 11:30 बजे एक संदिग्ध फोन आने के बाद वह अचानक गायब हो गई।

अगली सुबह पड़ोसी के घर के पीछे से उसका नग्न और लहुलुहान शव बरामद हुआ था। परिजनों के आरोपों के आधार पर पुलिस ने रिश्ते में संबंधी लगने वाले आरोपित प्रह्लाद दास को रविवार को ही गिरफ्तार कर लिया था।

‘ओबीसी उम्मीदवार ने लिया उम्र में छूट का फायदा, तो ज्यादा नंबर लाकर भी नहीं मिलेगा जनरल कोटा’; SC में बोली केंद्र सरकार

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। आरक्षण से होने वाले चयन को लेकर एक और मामला सामने आया है। जहां एक वक्त शख्स आरक्षण का लाभ लेता है और परीक्षा में शामिल हो जाता है। वहीं परीक्षा के बाद आरक्षण की वजह से ही उसका सेलेक्शन रुक जाता है।

त्रिपुरा के एक OBC उम्मीदवार ने, जिसने आरक्षण के तहत भर्ती परीक्षा में शामिल होने के लिए  ‘उम्र में छूट’ का लाभ उठाया था। लेकिन चयन के वक्त सामान्य कैटेगरी वाले अभ्यर्थी से ज्यादा अंक लाने के बाद भी उसका सेलेक्शन नहीं हो सका।

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में बताई सेलेक्शन न होने की वजह

त्रिपुरा के OBC उम्मीदवार जयंत देबनाथ की उम्र जनरल कैटेगरी के लोगों के लिए तय उम्र लिमिट की तुलना में ज्यादा थी। वहीं OBC कैटेगरी के लोगों के लिए उम्र की सीमा ज्यादा थी, इसलिए उसने आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों को मिलने वाली ‘उम्र में छूट’ (age-relaxation) का लाभ उठाया।

OBC आरक्षण की वजह से उम्र की सीमा बढ़ने के साथ ही वह CAPFs, NIA, सचिवालय सुरक्षा बल और असम राइफल्स में कांस्टेबल/राइफलमैन की भर्ती परीक्षा देने के योग्य हो गया।

जयंत देबनाथ के लिए परीक्षा देने तक सबकुछ सही था, लेकिन जब परीक्षा का परिणाम आया, तब उनके अंक सामान्य श्रेणी के एक चयनित उम्मीदवार की तुलना में ज्यादा आए, लेकिन फिर भी उनका सेलेक्शन नहीं हुआ।

आखिर क्यों नहीं हुआ सेलेक्शन?

OBC उम्मीदवारों के लिए कट-ऑफ अंक 60 थे, जो सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के कट-ऑफ से अधिक थे। केंद्र सरकार का कहना है कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि OBC श्रेणी में रिक्तियों (vacancies) की संख्या सीमित थी।

केंद्र ने यह भी कहा कि एक बार जब कोई OBC उम्मीदवार उम्र में छूट का लाभ लेकर परीक्षा के योग्य बनता है, तो वह आरक्षित श्रेणी से सामान्य श्रेणी में नहीं जा सकता।

इसका नतीजा यह हुआ कि 2018 की भर्ती परीक्षा में 55.1 अंक लाने के बावजूद OBC उम्मीदवार जयंत देबनाथ का चयन नहीं हुआ, जबकि सामान्य श्रेणी के कैंडिडेट सागर देबनाथ का 46.26 अंकों के साथ चयन हो गया।

हाई कोर्ट के फैसले पर केंद्र सरकार की अपील

त्रिपुरा हाई कोर्ट की सिंगल-जज बेंच और डिवीजन बेंच, दोनों ने ही यह फैसला सुनाया कि जयंत देबनाथ को कांस्टेबल के पद पर चयन के लिए विचार किया जाना चाहिए।

केंद्र सरकार ने हाई कोर्ट के इन फैसलों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की। केंद्र की तरफ से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की बेंच CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची तथा जस्टिस वी. मोहना के सामने अपनी बात रखी।

सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने सुप्रीम कोर्ट की बेंच को बताया कि भर्ती नियमों में स्पष्ट रूप से लिखा है कि यदि कोई उम्मीदवार आरक्षित श्रेणी का होने के नाते उम्र में छूट का लाभ लेता है, तो उसे आरक्षित श्रेणी से सामान्य श्रेणी में जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

पुलिस अधीक्षक बलरामपुर द्वारा जनपद में अपराधों की रोकथाम एवं अपराधियों की गिरफ्तारी कर त्वरित कार्यवाही करने आदि के दृष्टिगत रिजर्व पुलिस लाइन सभागार में मासिक समीक्षा गोष्ठी एवं सैनिक सम्मेलन का आयोजन किया गया*

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* गोष्ठी में समस्त पुलिस राजपत्रित अधिकारी, थाना प्रभारी, शाखा प्रभारी रहे उपस्थित।*

 

*कानून/शांति व्यवस्था प्रभावित करने वाले अराजक तत्वों के विरुद्ध की जाएगी सख्त वैधानिक कार्यवाही ।*

 

*आगामी त्योहार के दौरान जनपद में शान्ति सुरक्षा कानून व्यवस्था बनाए रखने के दिए गये दिशा निर्देश।*

 

*सैनिक सम्मेलन मे आए पुलिसकर्मियों से संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं को सुनकर उनके निराकरण हेतु संबंधित को निर्देश दिए गए*

*पुलिस अधीक्षक बलरामपुर श्री मार्तण्ड प्रकाश सिंह* द्वारा जनपद में अपराधों की रोकथाम के दृष्टिगत रिजर्व पुलिस लाइन सभागार कक्ष में मासिक सैनिक सम्मेलन एवं अपराध गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जनपद के विभिन्न थाना एवं शाखा से आए पुलिसकर्मियों से संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं को सुनने और उनके निराकरण के निर्देश दिए गए।

 

इस गोष्ठी में विभिन्न बिन्दुओं जैसे- आपराधिक एवं असामाजिक तत्वों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई, अवैध मादक पदार्थ एवं शराब तस्करी पर रोकथाम, अवैध हथियारों की तस्करी की निगरानी तथा इंडो-नेपाल बॉर्डर पर संयुक्त कॉम्बिंग, पेट्रोलिंग एवं सघन चेकिंग अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। जनपद की सीमाओं पर नाकाबंदी कर संदिग्ध व्यक्तियों, वाहनों एवं वस्तुओं की गहन जांच करने पर विशेष निर्देश दिए गये ।

 

विगत वर्षों में पंजीकृत नकबजनी, वाहन चोरी, झपटमारी एवं अन्य चोरी की घटनाओं की थाना, चौकी एवं विवेचकवार समीक्षा करते हुए लंबित मामलों के शीघ्र अनावरण हेतु विशेष टीम गठित करने, सीसीटीवी फुटेज, सर्विलांस एवं मुखबिर तंत्र का प्रभावी उपयोग कर सीसीटीएनएस पोर्टल पर लंबित विवेचनाओं एवं पार्ट पीआई प्रकरणों की समीक्षा करते हुए समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने हेतु निर्देश दिए गए साथ ही अपहरण संबंधी मामलों में पीड़िता की शीघ्र बरामदगी हेतु सभी थाना प्रभारियों को संवेदनशीलता एवं तत्परता से कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

 

गोष्ठी में वांछित अपराधियों की गिरफ्तारी हेतु विशेष अभियान चलाने, हिस्ट्रीशीटरों एवं सक्रिय अपराधियों की सतत निगरानी रखने तथा आवश्यक निरोधात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया साथ ही सीसीटीएनएस के अंतर्गत चिन्हित प्रमुख अपराधियों की गतिविधियों की समीक्षा भी की गई।

 

यक्ष ऐप एवं आईजीआरएस पोर्टल के माध्यम से प्राप्त शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निस्तारण, डेटा अपडेट एवं शिकायतकर्ताओं से फीडबैक लेने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए गए।

मिशन शक्ति अभियान के तहत महिला बीट प्रणाली को सुदृढ़ बनाने, मिशन शक्ति टीम/ एण्टीरोमियो टीम को नियमित रूप से क्षेत्र में भ्रमणशील रहने, एवं महिलाओं व बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

 

पुलिस अधीक्षक महोदय द्वारा आगामी त्योहारों के दृष्टिगत शांति, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने के लिए सभी थाना प्रभारियों और पुलिस चौकियों को अपने-अपने क्षेत्रों में पूरी तरह सतर्क रहने और रात्रि गश्त बढ़ाने, संदिग्ध व्यक्तियों एवं वाहनों की सघन चेकिंग तथा जनसहभागिता बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए।

 

महोदय द्वारा साइबर अपराध की रोकथाम व नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक साइबर जागरूकता अभियान चलाने के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए,सभी थाना प्रभारियों और साइबर सेल को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के स्कूलों, कॉलेजों, बैंक परिसरों और सार्वजनिक स्थानों पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम (अवेयरनेस कैंप) आयोजित करें।

 

इस अवसर पर *अपर पुलिस अधीक्षक बलरामपुर श्री विशाल पाण्डेय, क्षेत्राधिकारी नगर श्री अभिषेक सिंह, क्षेत्राधिकारी ललिया श्री डी0 के0 श्रीवास्तव,क्षेत्राधिकारी तुलसीपुर श्री अभय प्रताप मल्ल,क्षेत्राधिकारी उतरौला/लाइंस डॉ0 जितेन्द्र कुमार,पुलिस उपाधीक्षक श्री अशोक कुमार सिंह* एवं समस्त थाना प्रभारी, प्रतिसार निरीक्षक व शाखा प्रभारी सहित अन्य अधिकारी/ कर्मचारीगण उपस्थित रहे।

 

 

क्या है माइक्रोसॉफ्ट का VEO ऑफर, भारतीय कर्मचारियों पर कितना असर; 60 हजार लोगों को नौकरी छोड़ने पर क्या मिलेगा?

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। माइक्रोसॉफ्ट ने चार देशों के कर्मचारियों के लिए एक विशेष ऑफर निकाला है। इस ऑफर के तहत करीब 60,000 कर्मचारी अपनी मर्जी से नौकरी छोड़ सकते हैं। ये संख्या माइक्रोसॉफ्ट के वैश्विक कर्मचारियों की एक चौथाई से भी ज्यादा है।

माइक्रोसॉफ्ट एक टेक्नोलॉजी कंपनी है। कंपनी का यह कदम लागत कम करने और AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) में किए जा रहे भारी निवेश के लिए फंड जुटाने की कोशिशों का हिस्सा है।

क्या है माइक्रोसॉफ्ट का ‘वॉलंटरी एग्जिट ऑफर’ (VEO)?

माइक्रोसॉफ्ट ने ‘वॉलंटरी एग्जिट ऑफर’ (VEO) को सोमवार को अपने कर्मचारियों को भेजा। पात्र कर्मचारियों को कुछ ही घंटों में ईमेल के जरिए पूरी जानकारी मिल गई।

चीफ पीपल ऑफिसर एमी कोलमैन ने कर्मचारियों को भेजे एक मेमो में कहा कि जो लोग माइक्रोसॉफ्ट के बाहर अपना भविष्य देख रहे हैं, उनके लिए यह एक अच्छा मौका है कि वे अभी जरूरी मदद के साथ कंपनी छोड़ सकें।

कंपनी के इस ऑफर के तहत पात्र कर्मचारी वित्तीय सहायता और करियर-प्लानिंग संसाधनों के साथ स्वेच्छा से कंपनी छोड़ सकते हैं।

भारत समेत चार देशों के लिए ये ऑफर

माइक्रोसॉफ्ट का कंपनी छोड़ने वाला यह ऑफर चार देशों में उपलब्ध है- भारत, कनाडा, यूके और अमेरिका। इस देशों में शामिल टीमों के लेवल 70 और उससे नीचे के स्तर के कर्मचारी इसके लिए आवेदन कर सकते हैं।

हालांकि माइक्रोसॉफ्ट ने यह नहीं बताया है कि भारत में कितने कर्मचारी इसके लिए पात्र हैं। यह ऑफर अलग-अलग टीमों पर निर्भर करता है।

ऑफर में कौन शामिल और कौन नहीं?

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने बताया कि पात्र कर्मचारियों में वे लोग शामिल हो सकते हैं जो AI एक्सपीरियंस, कोपायलट (Copilot), फाइनेंस, ह्यूमन रिसोर्स, एक्सबॉक्स (Xbox) और विंडोज + डिवाइसेस (Windows + Devices) जैसे विभागों में काम कर रहे हैं।

सूत्र ने एजेंसी को बताया कि मार्केटिंग, कमर्शियल बिजनेस और सिक्योरिटी यूनिट्स इस ऑफर का हिस्सा नहीं होंगे।

कंपनी छोड़ने पर मिलेंगे कितने पैसे?

माइक्रोसॉफ्ट ने VEO के तहत कंपनी छोड़ने पर कर्मचारियों को दी जाने वाली वाली राशि का खुलासा नहीं किया है। लेकिन देखा जाए तो इस साल की शुरुआत में भी अमेरिका में कर्मचारियों के लिए ‘वॉलंटरी रिटायरमेंट प्रोग्राम’ लाया गया था।

इस प्रोग्राम के तहत पात्र कर्मचारियों को उनके पद (लेवल) और काम की अवधि के आधार पर 8 से 39 सप्ताह की बेसिक सैलरी दी गई थी। यह अभी स्पष्ट नहीं है कि नए ऑफर में भी यही फॉर्मूला अपनाया जाएगा या भारत में कर्मचारियों के लिए क्या शर्तें लागू होंगी।

AI के लिए लोगों को कंपनी छोड़ने का ऑफर

इस साल की शुरुआत में, कंपनी ने अमेरिका में अपने लगभग 7% कर्मचारियों (करीब 9,000 लोगों) को स्वेच्छा से नौकरी छोड़ने का ऑफर दिया था।

जुलाई में, कंपनी ने 4,800 नौकरियों में कटौती की घोषणा की, जो उसके वैश्विक कार्यबल का लगभग 2.1% है। इस दौरान कंपनी ने अपने एक्सबॉक्स (Xbox) गेमिंग कारोबार में बड़े बदलाव किए और पांच स्टूडियो तक को बेच दिया।

माइक्रोसॉफ्ट के शेयरों में, जो इस साल अब तक लगभग 10% की बढ़त दिखा चुके हैं, सोमवार को करीब 1% की तेजी आई।

यह भी पढ़ें- माइक्रोसॉफ्ट के 60 हजार कर्मचारियों की जाएगी नौकरी? कंपनी ने की पेशकश, AI में भारी निवेश का टारगेट

साइक्लोन ‘अर्नब’ का खतरा: आंध्र-ओडिशा में 60 से अधिक ट्रेनें रद, 140 KM की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

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 डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत के मौसम विभाग ने बताया कि चक्रवात अर्नब पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान में बदल गया है। यह विशाखापत्तनम से लगभग 300 किमी दूर स्थित है।

तूफान के 28 अक्टूबर की सुबह यनम के पास आंध्र प्रदेश के तट से टकराने की आशंका है। आपदा प्रबंधन विभाग ने पूरे आंध्र प्रदेश में 27 और 28 अक्टूबर को भारी बारिश की आशंका जताई है। इस दौरान 115 से 125 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की भी आशंका व्यक्त की गई है।

28 अक्टूबर की सुबह यनम के तट से टकराने का अनुमान

IMD के मुताबिक, तूफान के 27 अक्टूबर की शाम तक पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते रहने की बहुत अधिक संभावना है। इसके बाद अर्नब के उत्तर पश्चिम दिशा की ओर मुड़ने की संभावना है।

मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक 28 अक्टूबर को यह तूफान बापटला और विशाखापत्तनम के बीच यानम के नजदीक आंध्र प्रदेश और यानम के तटों को पार कर सकता है। इस दौरान तूफान के अति प्रचंड श्रेणी में बने रहने का अनुमान है।

140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती है हवाएं

चक्रवात के तट से टकराने के दौरान अधिकतम निरंतर हवा की गति 115 से 125 किलोमीटर प्रति घंटे रहने की संभावना है। वहीं तेज झोंकों के साथ हवाओं की रफ्तार 140 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। मौसम विभाग ने आंध्र प्रदेश और उससे सटे दक्षिण ओडिशा के तटीय इलाकों के लिए चक्रवात को लेकर रेड अलर्ट जारी किया है।

ओडिशा के छह जिलों में अलर्ट जारी

ओडिशा सरकार ने चक्रवाती तूफान के चलते राज्य के छह जिलों में अलर्ट जारी किया है। इनमें गंजाम, गजपति, रायगड़ा, मलकानगिरी, कोरापुट और नबरंगपुर शामिल हैं। सीएम ने तैयारियों की निगरानी के लिए 8 मंत्रियों को जिम्मेदारी सौंपी है।

संवेदनशील इलाकों में एनडीआरएफ, ओडिशा डिजास्टर रैपिड एक्शन फोर्स (ODRAF), अग्निशमन विभाग और पुलिस के जवानों को तैनात किया गया है।

ओडिशा में NDRF और 225 फायर सर्विस टीमें तैनात

किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए ओडिशा में 225 दमकल सेवा टीमों और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल की टुकड़ियों को संवेदनशील जिलों में तैनात कर दिया गया है।

गंजाम जिला प्रशासन ने चक्रवात के खतरे को देखते हुए 27 से 29 अक्टूबर तक सभी आंगनवाड़ी केंद्रों में अवकाश घोषित कर दिया है। बच्चों और गर्भवती महिलाओं के पोषण के लिए घर-घर सूखा राशन पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।

राज्य परिवहन प्राधिकरण ने तटीय मार्गों पर सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं। 28 और 29 अक्टूबर को भारी बारिश का दौर जारी रहेगा, जबकि 30 अक्टूबर से इसमें कमी आने की संभावना है।

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मध्यप्रदेश, यूपी और बिहार समेत कई राज्यों पर असर

चक्रवाती तूफान ‘ऑर्नब’ का असर केवल तटीय राज्यों तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। मौसम विभाग ने पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश समेत कई इलाकों में बारिश का अनुमान जताया है।

पश्चिम बंगाल में 28 से 30 अक्टूबर के बीच कई जिलों में भारी बारिश हो सकती है। इनमें दक्षिण 24 परगना, पूर्वी और पश्चिमी मेदिनीपुर, झाड़ग्राम, बांकुड़ा और पुरुलिया शामिल हैं।

मौसम विभाग के मुताबिक मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के भी कुछ इलाकों में भारी बारिश के आसार हैं। वहीं चक्रवाती तूफान के शक्तिशाली होने के बाद तमिलनाडु और पुडुचेरी के नौ बंदरगाहों पर भी अलर्ट जारी किया गया है।

तूफान के चलते 60 से ज्यादा ट्रेनें रद

चक्रवाती तूफान के संभावित खतरे को देखते हुए 4 नवंबर तक रेलवे ने करीब 60 से ज्यादा ट्रेनें कैंसिल कर दीं हैं और दूसरी ट्रेनों के ऑपरेशन में बदलाव किया है।

27 और 28 अक्टूबर को 53 ट्रेनें रद कर दी हैं। रेलवे की ओर से जारी सूची के अनुसार, राजमुंदरी से विजयवाड़ा के बीच चलने वाली ट्रेन संख्या 67261 को 27 और 28 अक्टूबर को रद किया गया है। इसी तरह विजयवाड़ा से मछलीपट्टनम के बीच चलने वाली ट्रेन संख्या 67263 और 67265 भी दोनों दिन रद रहेंगी।

मछलीपट्टनम से विजयवाड़ा जाने वाली ट्रेन संख्या 67264 और 67256 को भी 27 और 28 अक्टूबर को रद किया गया है। मछलीपट्टनम और गुडीवाड़ा के बीच चलने वाली ट्रेन संख्या 67271, 67272, 67252, 67253, 67254 और 67255 भी दोनों दिन नहीं चलेंगी।

साथ ही काकीनाडा पोर्ट से विशाखापत्तनम जाने वाली ट्रेन संख्या 17267 और विशाखापत्तनम से काकीनाडा पोर्ट आने वाली ट्रेन संख्या 17268 को 27 और 28 अक्टूबर के लिए रद किया गया है। पार्वतीपुरम से विशाखापत्तनम के बीच चलने वाली ट्रेन संख्या 07267 और वापसी की ट्रेन संख्या 07268 भी दोनों दिन रद रहेंगी।

27 अक्टूबर को ये ट्रेनें भी रद

27 अक्टूबर को विजयवाड़ा से नरसापुर जाने वाली ट्रेन संख्या 67258, 17269 और 67257 को रद किया गया है। नरसापुर से राजमुंदरी जाने वाली ट्रेन संख्या 67246, नरसापुर से भीमावरम जंक्शन जाने वाली ट्रेन संख्या 17264 और विजयवाड़ा से काकीनाडा पोर्ट जाने वाली ट्रेन संख्या 17257 भी नहीं चलेंगी।

इसके अलावा विजयवाड़ा से राजमुंदरी की ट्रेन संख्या 67202, विजयवाड़ा से मछलीपट्टनम की ट्रेन संख्या 67267, नरसापुर से गुंटूर जंक्शन की ट्रेन संख्या 67247 और नरसापुर से विजयवाड़ा की ट्रेन संख्या 67276 को भी रद किया गया है।

28 अक्टूबर को भी कई ट्रेनों का परिचालन बाधित

28 अक्टूबर को विजयवाड़ा से भीमावरम जंक्शन जाने वाली ट्रेन संख्या 67275 और 67281, भीमावरम से निदादावोलु जंक्शन जाने वाली ट्रेन संख्या 67277 और 67283 तथा वापसी की ट्रेन संख्या 67278 और 67284 रद रहेंगी।

विजयवाड़ा से गुंटूर जंक्शन जाने वाली ट्रेन संख्या 67229, गुंटूर से रेपल्ले की ट्रेन संख्या 67223, रेपल्ले से तेनाली की ट्रेन संख्या 67224 और तेनाली से विजयवाड़ा जाने वाली ट्रेन संख्या 67222 को भी रद किया गया है.

इसके अलावा नरसापुर से विजयवाड़ा जाने वाली ट्रेन संख्या 17270 और काकीनाडा पोर्ट से विजयवाड़ा जाने वाली ट्रेन संख्या 17258 भी 28 अक्टूबर को नहीं चलेंगी।

कुछ ट्रेनों के बदले गए रूट

चक्रवाती तूफान अर्नब को देखते हुए कई ट्रेनों के रूट में बदलाव किया गया है। भुवनेश्वर से जगदलपुर जाने वाली हीराखंड एक्सप्रेस (18447) 27 अक्टूबर से 30 अक्टूबर तक रायगढ़ से शॉर्ट टर्मिनेट होगी। इसकी वापसी सर्विस जगदलपुर-भुवनेश्वर हीराखंड एक्सप्रेस (18448), 28 अक्टूबर से 31 अक्तूबर के बीच कोरापुट के बजाय रायगढ़ से शुरू होगी।

रेलवे ने 24 घंटे के कंट्रोल रूम बनाए

साउथ कोस्ट रेलवे ने चौबीसों घंटे कंट्रोल रूम और स्टेशन हेल्प डेस्क बनाए हैं। जहां रिफंड, खाना, बैकअप पावर और मेडिकल मदद का इंतजाम है।

रेलवे ने जोनल और मंडल मुख्यालयों में 24 घंटे काम करने वाले वॉर रूम बनाए हैं। इनका उद्देश्य तूफान के कारण रेल परिचालन में किसी तरह की बाधा आने पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

यात्रियों से रेलवे की अपील

रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति की जानकारी जरूर लें। रेलवे ने यात्रियों को आधिकारिक रेलवे पूछताछ माध्यम से जानकारी लेने की सलाह दी है और उसी के अनुसार यात्रा की योजना बनाने को कहा है। रेलवे ने ट्रेन सेवाएं रद्द होने से यात्रियों को होने वाली असुविधा के लिए खेद भी जताया है

सोशल मीडिया और मीडिया के लिए एडवाइजरी जारी

ओडिशा सरकार ने प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए एक विशेष एडवाइजरी जारी की है। सरकार ने स्पष्ट हिदायत दी है कि चक्रवात के संबंध में केवल IMD, विशेष राहत आयुक्त और अधिकृत जिला प्रशासन से जारी आधिकारिक जानकारी ही प्रसारित की जाए। किसी भी प्रकार के असत्यापित पूर्वानुमान, काल्पनिक ट्रैक मॉडल या दहशत फैलाने वाली खबरों के प्रसारण पर सख्त रोक लगाई गई है। 

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तमिलनाडु के जेल में पुलिसकर्मियों पर हमला कर 17 कैदी फरार, चार को दबोचा गया; सर्च ऑपरेशन जारी

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डिजिटल डेस्क, चेन्नई। तमिलनाडु के थेनी जिले की थेक्कम्पट्टी उप-जेल से सोमवार देर रात एक नाटक के तहत सुरक्षाकर्मियों पर हमला कर 17 कैदी फरार हो गए। पुलिस ने कॉम्बिंग ऑपरेशन के दौरान जेल से भागे चार कैदियों को गिरफ्तार कर लिया है।

दक्षिण क्षेत्र के इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (आईजीपी) विजयेंद्र बिदारी के अनुसार, इनमें से 4 कैदियों को दोबारा पकड़ लिया गया है। बाकी की तलाश के लिए 17 विशेष टीमें गठित कर कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

बीमारी का नाटक कर रची भागने की साजिश

पुलिस के अनुसार, सभी 17 कैदी एक ही बैरक में बंद थे। योजना के तहत कैदियों ने जेल कर्मियों को सूचना दी कि एक कैदी की तबीयत खराब हो गई है और उसे मिर्गी का अटैक आया है। जैसे ही जेलकर्मी मदद के लिए बैरक के अंदर पहुंचे, कैदियों ने अचानक पर हमला बोल दिया और मौके से भाग निकले।

कैदियों के इस अचानक हमले में थेनी जिला जेल के ग्रेड-II पुलिसकर्मी थंगापांडी के सिर में गंभीर चोट आई। उन्हें तुरंत जी. विलाक्कु के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। इसके अलावा, ड्यूटी पर मौजूद दो अन्य जेलकर्मियों को भी हल्की चोटें आई हैं।

सीमावर्ती जिलों में हाई अलर्ट और वाहनों की चेकिंग

घटना के बाद मदुरै, डिंडीगुल और पड़ोसी राज्य केरल के इडुक्की जिले की पुलिस को अलर्ट पर रखा गया है। डिंडीगुल के पुलिस अधीक्षक (एसपी) एस. जयकुमार ने बताया कि सुरक्षा के मद्देनजर जिले में 16 जगहों पर चेकपोस्ट बनाए गए हैं।

डिंडीगुल-थेनी हाईवे पर वाहनों की कड़ी जांच की जा रही है। सभी फरार कैदियों की तस्वीरें आसपास के पुलिस थानों में भेज दी गई हैं और पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच कर रही है।

इस जेल ब्रेक की घटना पर डीएमके के राज्यसभा सांसद पी. विल्सन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस घटना को बेहद शर्मनाक बताया और राज्य की कानून व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाए। विल्सन ने राज्य में कानून व्यवस्था बिगड़ने का हवाला देते हुए नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की मांग की।

दिल्ली की धूल के खिलाफ युद्ध… शहर के प्रदूषण हॉटस्पॉट क्यों बने हुए हैं एक चुनौती

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सड़क की धूल, निर्माण कार्यों से जुड़े नियमों का उल्लंघन, मशीनों से सड़क की सफाई और यह सवाल कि क्या दिल्ली की नागरिक एजेंसियां प्रदूषण के स्रोतों पर काम कर रही हैं या फिर प्रदूषण दिखने के बाद बस उसे दबाने की कोशिश कर रही हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पानी का छिड़काव, एंटी-स्मॉग गन, मशीनों से सड़कों की सफाई और बड़े पैमाने पर सफाई अभियान। दिल्ली में वायु प्रदूषण के खिलाफ हर साल होने वाली लड़ाई के तहत सड़कों पर कुछ जाने-पहचाने उपाय अपनाए जाते हैं।

क्या है चुनौती?

फिर भी इन उपायों के बावजूद सड़कों के किनारे धूल जमा होती रहती है, निर्माण सामग्री एक समस्या बनी हुई है और नियमों को लागू करने को लेकर नागरिक एजेंसियों पर सवाल उठ रहे हैं। चुनौती सिर्फ सड़कों से धूल हटाने की नहीं है, बल्कि इसे हवा में उड़ने से रोकने की है। हाल की रिपोर्टों से पता चलता है कि दिल्ली में धूल को नियंत्रित करने के प्रयासों और जमीनी स्तर पर बनी हुई समस्याओं के बीच एक बड़ा अंतर है।

हालांकि सरकारी एजेंसियां अपने उपकरणों का दायरा बढ़ा रही हैं और प्रदूषण के पहचाने गए हॉटस्पॉट (प्रदूषण के मुख्य केंद्र) पर ध्यान दे रही हैं, लेकिन अध्ययनों और निरीक्षणों से पता चलता है कि खराब सड़कें, मशीनों से अपर्याप्त सफाई, बिना ढका निर्माण सामग्री और अवैध रूप से कचरा फेंकना अभी भी प्रदूषण के लगातार स्रोत बने हुए हैं।

मुख्य सवाल यह है कि क्या राजधानी धूल को केवल ऊपर-ऊपर से दबाने के बजाय धूल पैदा करने वाले स्रोतों को स्थायी रूप से नियंत्रित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

धूल कहां से आती है?

दिल्ली के प्रदूषण हॉटस्पॉट पर किसी एक स्रोत का ही असर हो ऐसा जरूरी नहीं है। सड़क की धूल, निर्माण कार्य, वाहनों की आवाजाही, कचरा फेंकना और खुली मिट्टी ये सब मिलकर स्थानीय हवा की गुणवत्ता को और खराब कर सकते हैं।

पिछले हॉटस्पॉट असेसमेंट में पहचाने गए इलाकों में आनंद विहार, बवाना, मुंडका, वजीरपुर, रोहिणी, आरके पुरम, ओखला, जहांगीरपुरी, पंजाबी बाग, अशोक विहार और द्वारका शामिल हैं। अक्टूबर 2026 में पीडब्ल्यूडी ने 47 प्रदूषण हॉटस्पॉट के 3 किमी. के दायरे में धूल के स्रोतों की पहचान करने और उनसे निपटने के लिए एक रणनीति पेश की।

इस दृष्टिकोण में यह माना गया है कि किसी खास सड़क की सफाई करना या किसी एक जगह पर धूल कम करने वाले उपकरण लगाना काफी नहीं होगा अगर आस-पास की खुली मिट्टी, बिना ढका निर्माण सामग्री या खुदाई के काम से हवा में धूल के कण लगातार मिलते रहें।

कौन-कौन से हैं हॉटस्पॉट

चिह्नित किए गए हॉटस्पॉट में आनंद विहार, आईटीओ, डीटीयू, द्वारका, बवाना, पूसा, आईजीआई एयरपोर्ट, आईआईटी दिल्ली, जेएनयू के आस-पास के इलाके, बुराड़ी क्रॉसिंग, नॉर्थ कैंपस और अलीपुर शामिल हैं।

विभाग ने धूल को नियंत्रित करने के उपायों के तहत लगभग 200 एंटी-स्मॉग गन लगाने की भी योजना बनाई है। यह व्यापक दृष्टिकोण इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रदूषण किसी तय हॉटस्पॉट की सीमाओं तक ही सीमित नहीं रहता। आस-पास के इलाकों में निर्माण कार्य, ट्रैफिक या खुली सतहों से उड़ने वाली धूल उन सड़कों और रिहायशी इलाकों तक पहुंच सकती है, जहां धूल को रोकने के उपाय पहले से ही लागू हैं।

इस चुनौती का पैमाना कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) की हॉटस्पॉट से जुड़ी कवायद में भी दिखाई देता है। सितंबर 2026 की एक रिपोर्ट के अनुसार, पहले किए गए आकलन में 13 हॉटस्पॉट में प्रदूषण के 65 प्रमुख स्रोत पाए गए थे।

16 समस्याओं का किया गया समाधान

इनमें से 16 समस्याओं का समाधान कर लिया गया, जबकि 43 अभी भी निगरानी में हैं और 6 पर काम होना बाकी है। अधिकारियों ने प्रदूषण के 4,555 छोटे स्रोत भी पहचाने थे, जिनमें सड़क की धूल, कचरा और निर्माण-कार्य का मलबा फेंकना, गड्ढे, कच्ची सड़कें, ट्रैफिक जाम और खुले में कचरा जलाना शामिल हैं।

समीक्षा के समय तक, इन छोटी समस्याओं में से लगभग आधी का समाधान किया जा चुका था। ये आंकड़े बताते हैं कि यह काम कितना बड़ा है। प्रदूषण के स्रोतों की पहचान करना तो बस पहला कदम है। यह रणनीति कितनी कारगर होगी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि समस्याओं को कितनी जल्दी सुलझाया जाता है और क्या ये समाधान लंबे समय तक टिके रहते हैं।

मशीनों की तैनाती और उनके कवरेज के बीच का अंतर

सड़क पर जमा धूल को हवा में उड़ने से रोकने के लिए मशीनों से सड़क की सफाई करना सबसे प्रभावी तरीकों में से एक है। हालांकि, इन मशीनों का कवरेज अभी भी एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है।

23 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित एक रिपोर्ट में CAQM के आकलन का हवाला देते हुए बताया गया कि दिल्ली की बड़ी और मध्यम आकार की सड़कों पर मैकेनिकल रोड स्वीपर (सड़क साफ करने वाली मशीनें) हर दूसरे दिन केवल 35-40% हिस्से की ही सफाई कर पा रही थीं, जबकि पूरे सड़क नेटवर्क को कवर करने का नियम है।

दिल्ली में लगभग 100 मशीनें थीं, जबकि जरूरत 172 मशीनों की थी। आकलन में यह भी पाया गया कि एक मशीन दिन भर में 30 किमी तक की सफाई कर पाती थी, जबकि लक्ष्य 40 किमी का था। अतिक्रमण या अवैध रूप से खड़ी गाड़ियों के कारण सड़कों पर रुकावटें आना एक और बड़ी चुनौती थी।

इस बीच दिल्ली के सड़क नेटवर्क का लगभग 70% हिस्सा ऐसी सड़कों से बना है जिनकी चौड़ाई 10 मीटर से कम है और इनकी सफाई अभी भी हाथों से की जाती है। यह शहर की धूल-नियंत्रण रणनीति की एक बुनियादी कमजोरी को उजागर करता है। सिर्फ मशीनें तैनात कर देने का मतलब यह नहीं है कि हर उस जगह की ठीक से सफाई हो रही है जहां इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है।

कब बना रहता है प्रदूषण का स्रोत

अगर सड़कों के किनारों और मीडियन (सड़क के बीच के हिस्से) पर धूल जमा होती रहती है या सफाई के दौरान हटाई गई धूल-मिट्टी को वहां से हटाया नहीं जाता तो प्रदूषण का स्रोत बना रहता है। यह समस्या 2023 में दिल्ली के तत्कालीन उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना द्वारा किए गए एक निरीक्षण के दौरान सामने आई थी।

एक रिपोर्ट में बताया गया था कि लाल किला, राजघाट, आईटीओ, प्रगति पावर प्लांट, आईपी एस्टेट और मिलेनियम पार्क के आस-पास की सड़कों के किनारे बने फुटपाथों पर धूल और मिट्टी की मोटी परतें जमा हो गई थीं। वहां से गुजरने वाले वाहनों की वजह से धूल उड़ रही थी, जबकि यांत्रिक सफाई मशीनें धूल को पानी से दबाने के बजाय उसे और ज्यादा हवा में उड़ा रही थीं।

अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे सड़कों और फुटपाथों की सफाई करवाएं और पावर प्लांट यार्ड तथा बस डिपो में धूल को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाएं।

इसका मतलब साफ है कि सड़क की सफाई कितनी प्रभावी होगी, यह न केवल मशीनों की संख्या पर निर्भर करता है, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करता है कि उन्हें कैसे चलाया जाता है। क्या वे तय किए गए सभी इलाकों को कवर करती हैं और उनके द्वारा इकट्ठा की गई धूल का आगे क्या होता है।

नियमों का पालन सुनिश्चित करना ही असली चुनौती

निर्माण और तोड़फोड़ के काम एक और चुनौती पेश करते हैं क्योंकि खुली मिट्टी, बिना ढकी सामग्री और कचरे का गलत तरीके से भंडारण आसपास के इलाकों में धूल फैला सकती है।

मार्च 2026 की एक रिपोर्ट में कहा गया कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने दिल्ली में धूल कम करने के उपायों में गंभीर कमियों की ओर इशारा किया है और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। अधिकारियों के बीच हुई चर्चा में सड़कों पर धूल, खराब कचरा प्रबंधन और शिकायतों के समाधान में देरी जैसे मुद्दों पर बात हुई।

दिल्ली नगर निगम ने कहा कि वह सड़कों के किनारे और खाली प्लॉटों से निर्माण और तोड़फोड़ के कचरे को युद्ध स्तर पर हटा रहा है। हालांकि, जिला अधिकारियों ने आवासीय क्षेत्रों में मशीनीकृत सफाई की कमी, तय कॉम्पैक्टर ट्रांसफर स्टेशनों पर कैप्सूल की कमी और तंग गलियों में भारी मशीनरी तैनात करने में आने वाली कठिनाइयों का हवाला दिया।

ये मुश्किलें नई नहीं हैं। नवंबर 2025 की एक बैठक के दौरान, एमसीडी पार्षदों ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के चरण-III के तहत पाबंदियों के बावजूद हो रहे अनधिकृत निर्माण, निर्माण कचरे को अवैध रूप से फेंकने और पत्तियां जलाने के मुद्दों को उठाया।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पानी का छिड़काव और मशीनीकृत सफाई केवल चुनिंदा वार्डों में ही की जा रही है, जबकि अन्य इलाकों को नजरअंदाज किया जा रहा है। समिति के अध्यक्ष ने माना कि पूरे शहर में गड्ढे दिखाई दे रहे हैं और सफाई के बाद भी जमा हुई धूल को ठीक से नहीं हटाया जा रहा है।

नियमों का पालन करने में निरंतरता की कमी

ये चिंताएं नियमों के पालन में निरंतरता को लेकर सवाल खड़े करती हैं। निर्माण सामग्री को ढकने या धूल को नियंत्रित करने के नियम तब तक स्थायी परिणाम नहीं दे सकते, जब तक कि नियमों का उल्लंघन जारी रहे या निरीक्षण के बावजूद नियमों का पालन सुनिश्चित न हो पाए।

अक्टूबर 2026 में एमसीडी ने सभी 125 निर्माण और विध्वंस कचरा स्थलों पर 360-डिग्री कैमरे लगाकर निगरानी बढ़ा दी, जिनका लाइव फीड दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति को भेजा जाने लगा।

इसके अलावा कचरे को ढकने या गीला करने, धूल रोकने के लिए बैरियर लगाने और निर्माण कचरा ले जाने वाले वाहनों को पूरी तरह से ढककर रखने के लिए नए नियम लागू किए गए। धूल प्रदूषण, कचरा अवैध रूप से फेंकने और बायोमास (पत्तियां आदि) जलाने के मामलों पर कार्रवाई करने के लिए संयुक्त प्रवर्तन टीमों को तैनात किया गया।

एंटी-स्मॉग गन और स्प्रिंकलर

दिल्ली में धूल को दबाने के लिए पानी के इस्तेमाल का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। 21 अक्टूबर, 2026 की एक रिपोर्ट के अनुसार, एमसीडी ने सड़कों, सार्वजनिक सुविधाओं और ऊंची इमारतों के पास 167 वॉटर स्प्रिंकलर और 60 एंटी-स्मॉग गन तैनात की थीं।

इसके अलावा, सभी 12 जोनों में धूल से सबसे ज्यादा प्रभावित सड़कों की गहन सफाई (डीप क्लीनिंग) का काम भी शुरू किया गया था। हालांकि, सिर्फ इन उपकरणों के होने भर से प्रदूषण में लगातार कमी आ जाएगी, ऐसा जरूरी नहीं है।

एंटी-स्मॉग गन पर एक रिपोर्ट में पर्यावरण कार्यकर्ता भवरीन मल्होत्रा ने कहा कि ये उपकरण निर्माण स्थलों के आसपास दिखने वाली धूल को तो दबा सकते हैं, लेकिन दिल्ली की हवा की गुणवत्ता पर इनका असर बहुत सीमित है। ऐसा इसलिए है क्योंकि ये सर्दियों में बढ़ने वाले सूक्ष्म कणों (पार्टिकुलेट मैटर) या गैसीय प्रदूषकों को नियंत्रित नहीं कर सकते। उन्होंने यह भी कहा कि इन एंटी-स्मॉग गन को पूरे साल चलाया जाना चाहिए।

यह फर्क समझना जरूरी है

स्प्रिंकलर और एंटी-स्मॉग गन हवा में उड़ने वाली धूल को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं, लेकिन ये खराब सड़कों की मरम्मत, जमा हुई गाद (मिट्टी-कीचड़) को हटाने, निर्माण सामग्री को ढकने या अवैध रूप से कचरा फेंकने को रोकने का विकल्प नहीं हो सकते।

धूल को उसके स्रोत पर ही रोकने का क्या मतलब होगा?

सबूत एक अधिक व्यापक दृष्टिकोण की ओर इशारा करते हैं। पहला, सड़कों की देखरेख करने वाली एजेंसियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि मैकेनिकल स्वीपर (सफाई मशीनें) जरूरी जगहों, खासकर प्रदूषण की दृष्टि से संवेदनशील इलाकों की सफाई करें और साथ ही संकरी सड़कों तक भी उनकी पहुंच हो।

दूसरा, गड्ढों, कच्ची सतहों और सड़कों के खराब किनारों पर ध्यान देने की जरूरत है, ताकि वहां बार-बार धूल जमा न हो।

तीसरा, निर्माण और तोड़फोड़ से जुड़े नियमों को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए। कचरे को सिर्फ एक जगह से दूसरी जगह हटाने के बजाय उसे पूरी तरह से वहां से हटाना जरूरी है।

दिल्ली की प्रस्तावित रणनीति, जिसमें प्रदूषण के हॉटस्पॉट के 3 किलोमीटर के दायरे में धूल के स्रोतों की जांच करने की बात कही गई है, इस समस्या को केवल एक सड़क तक सीमित न रखकर व्यापक स्तर पर सुलझाने में मदद कर सकती है।

इसके अलावा, कचरा डालने वाली जगहों पर कैमरे लगाने से जवाबदेही तय हो सकती है, बशर्ते नियमों के उल्लंघन का पता चलने पर तुरंत कार्रवाई की जाए। शहर को केवल इस बात पर निर्भर नहीं रहना चाहिए कि कितने स्प्रिंकलर, एंटी-स्मॉग गन या सफाई मशीनें लगाई गई हैं, बल्कि यह देखना चाहिए कि इनके क्या नतीजे निकले हैं।

सिर्फ धूल दबाने के उपाय हवा को साफ क्यों नहीं कर सकते?

दिल्ली धूल को नियंत्रित करने के अपने प्रयासों का दायरा बढ़ा रही है, लेकिन रिपोर्टों से पता चलता है कि सड़कों की ठीक से सफाई न होना, सड़कों की खराब हालत, निर्माण कार्यों में नियमों का उल्लंघन और कचरा प्रबंधन में कमियां इन प्रयासों को नाकाम कर रही हैं।

समस्या यह नहीं है कि पानी का छिड़काव या एंटी-स्मॉग गन का कोई महत्व नहीं है। बल्कि बात यह है कि ये उपाय अकेले लंबे समय तक चलने वाले नतीजे नहीं दे सकते। असली परीक्षा यह है कि क्या दिल्ली धूल को जमा होने और हवा में उड़ने से रोक सकती है, बजाय इसके कि धूल दिखने के बाद उसे बार-बार दबाने की कोशिश की जाए।

जब तक सड़कों के रखरखाव, कचरा हटाने और नियमों के पालन को लेकर निरंतरता नहीं आती, तब तक शहर के सामने यही खतरा बना रहेगा कि वह उस धूल के पीछे भागता रहे, जिसे उसने अभी तक उसके स्रोत पर ही खत्म नहीं किया है।

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लॉरेंस बिश्नोई पर लगी लगाम! साबरमती की हाई-सिक्योरिटी सेल में शिफ्ट हुआ गैंगस्टर

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डिजिटल डेस्क, अहमदाबाद। गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को हाल ही में अहमदाबाद की साबरमती सेंट्रल जेल के एक विशेष हाई-सिक्योरिटी ब्लॉक में शिफ्ट कर दिया गया है। इसे ‘दो सौ खोली’ (Block 200) कहा जाता है। इस ब्लॉक में आतंकवाद और अन्य गंभीर अपराधों के आरोपी 200 खतरनाक कैदी रखे जाते हैं।

कैदियों को पूरी तरह अलग-थलग रखने और एक सेल से दूसरे सेल में जाने से रोकने के लिए इस ब्लॉक को चार हिस्सों में बांटा गया है, जिनमें से प्रत्येक में 50 कैदी रहते हैं। लॉरेंस के सेल का आकार लगभग 7.5×11 फीट है।

गतिविधियों पर लगेगी लगाम

यह कदम लॉरेंस बिश्नोई की गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए बनाई गई एक व्यापक सुरक्षा योजना का हिस्सा है। लॉरेंस को ऐसे ब्लॉक में रखा गया है जहां 2008 के धमाकों के दोषी भी बंद हैं। 2023-2024 से पहले लॉरेंस अक्सर जेल से ही रंगदारी के लिए कॉल करता था, अपना नेटवर्क चलाने के लिए धमकी भरे ऑडियो और वीडियो संदेश भेजता था और यहां तक कि अलग-अलग जेलों से इंटरव्यू भी देता था।

लेकिन जांचकर्ताओं के अनुसार, पिछले दो सालों में उसकी तरफ से कोई भी सीधी कॉल या बातचीत नहीं हुई है। साबरमती जेल के भीतर ब्लॉक 200 एक अत्यधिक सुरक्षा वाला इलाका है। यहां 2008 के सीरियल ब्लास्ट मामले और अन्य गंभीर अपराधों के दोषी कैदी रखे जाते हैं। बीएनएस की धारा 303 के प्रावधानों के तहत, गंभीर अपराधों के लिए दोषी ठहराए गए और जेल से बाहर जाने पर रोक वाले कैदियों को आमतौर पर इसी जोन में रखा जाता है।

दस खोली से 200 खोली में शिफ्ट हुआ लॉरेंस

इससे पहले, लॉरेंस को दस खोली में रखा गया था। ये एक छोटी सी हाई-सिक्योरिटी जगह है, जहां सिर्फ 10 कैदी रह सकते हैं। उससे पहले, वह तिहाड़ जेल और पंजाब की अलग-अलग जेलों में रह चुका था।

इन जेलों में रहने के दौरान लॉरेंस की कॉल सेंटर मालिकों को धमकी देने वाली रिकॉर्डिंग और गैंगस्टर शहजाद भट्टी के साथ कथित बातचीत सामने आई थी। लोगों से मिलने-जुलने और डिजिटल दुनिया तक पहुंच न होने के कारण लॉरेंस अब चौबीसों घंटे कड़ी निगरानी में, अकेले रहता है।

कैसी जिंदगी जी रहा बिश्नोई

बताया जाता है कि वह अपनी कोठरी में एक अनुशासित और तपस्वी जैसा जीवन बिताता है। सुबह का समय ध्यान में लगाता है, नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करता है, व्रत रखता है और शाकाहारी भोजन करता है।

बाहरी दुनिया से उसका संपर्क केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालती सुनवाई में शामिल होने और अपने वकील के साथ कानूनी रणनीति पर चर्चा करने तक ही सीमित है। हालांकि, साबरमती जेल में वह भले ही अलग-थलग है, लेकिन उसका सिंडिकेट एक विकेंद्रीकृत कमांड चेन के जरिए वैश्विक स्तर पर काम करना जारी रखता है।

उसके खास गुर्गों से बनी एक ‘शैडो कैबिनेट’ विदेशों में सुरक्षित ठिकानों से उसके रोजमर्रा के कामकाज को चलाती है। इस मुख्य समूह के अहम सदस्य नए लोगों को भर्ती करने, काम सौंपने और लॉजिस्टिक्स का समन्वय करने के साथ-साथ स्क्रीनशॉट भी साझा करते हैं।

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