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ईरान-अमेरिका ने डील पर कर दिए दस्तखत, डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल को क्या नसीहत दी?


तमाम तरह के टकरावों और ऊहापोह के बावजूद आखिरकार अमेरिका और ईरान के बीच समझौते हो गया है। अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने समझौते पर दस्तखत करके युद्ध खत्म करने का एलान किया है। अच्छी बात है कि इस बार दोनों देशों ने इसकी पुष्टि भी कर दी है। 14 मुद्दों वाले इस मेमोरैंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) का मकसद दोनों देशों के बीच अशांति को खत्म करना, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत जारी रखना शामिल है। इससे पहले इजरायल ने कहा था कि वह इस समझौते को नहीं मानेगा। यही वजह है कि अब डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल को नसीहत दी है कि उसे और बेहतर काम करना चाहिए।

 

G7 सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते पर फ्रांस से ही दस्तखत कर दिए। सामने आए वीडियो में देखा जा सकता है कि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की ओर से आयोजित डिनर कार्यक्रम की टेबल पर ही डोनाल्ड ट्रंप इस समझौते पर दस्तखत कर रहे हैं। इस दौरान मैक्रों भी उसी टेबल पर मौजूद थे और दस्तखत होने के बाद सबने ताली बजाकर इसका स्वागत किया। इसी कार्यक्रम के बाद जब वह निकले तो मीडिया के सामने चिल्लाकर कहा, ‘It’s Signed’ यानी अब समझौते पर दस्तखत हो गए हैं।

 

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इजरायल पर क्या बोले डोनाल्ड ट्रंप?

इस समझौते और इजरायल के मामले पर अपनी बात रखते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, ‘हमने समझौता जारी कर दिया है और इसकी एक कॉपी इजरायल को भी भेजी है। वह एक अच्छा साथी रहा है। मेरा मानना है कि इजरायल हिज्बुल्ला के मामले में और बेहतर कर सकते हैं। मैं यह नहीं कर रहा हूं कि उनकी रक्षा करने के लिए कोई अभियान शुरू कर दो लेकिन अगर दो ड्रोन रेगिस्तान में गिरते हैं और कहीं कोई नुकसान नहीं होता है तो आपको बेरुत में इमारतें तबाह नहीं करनी चाहिए।’

 

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उन्होंने आगे कहा, ‘वे अच्छा बर्ताव कर सकते हैं और अच्छा काम कर सकते हैं। मैं एक साथी के रूप में उन्हें बहुत पसंद करता हूं, वे शानदार हैं लेकिन वे हिज्बुल्लाह के मामले में अच्छा काम कर सकते हैं। मुझे लगता है कि अभी वे अच्छा काम नहीं कर रहे हैं।’

US-ईरान की डील में क्या है?

  • सभी तरह की सैन्य कार्रवाई तुरंत बंद होगी, लेबनान भी इसमें शामिल है
  • दोनों देशों की सहमति से 60 दिन के भीतर एक अंतिम समझौता किया जाएगा
  • अमेरिकी नेवी की ओर से की गई घेराबंदी हटेगी और प्रतिबंध भी हटाए जाएंगे
  • शुरुआती 60 दिनों तक सभी कमर्शियल शिप स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित और निशुल्क गुजरेंगे
  • ईरान की जब्त संपत्तियों को भी एक-एक करके लौटाया जाएगा
  • ईरान में अमेरिका की मदद से मरम्मत का काम किया जाएगा और अमेरिका इसके लिए 300 बिलियन डॉलर देगा
  • सूत्रों के मुताबिक, ईरान किसी भी तरह का परमाणु हथियार ना रखने और ना बनाने पर भी सहमत हो गया है

‘देश में एजुकेशन नहीं, एक्सटॉर्शन सिस्टम’, राहुल गांधी की रैली की 5 बड़ी बातें


राजस्थान के कोटा में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने ‘छात्रों की गूंज’ महारैली में देश की शिक्षा व्यवस्था पर कई सवाल दागे। उन्होंने आरोप लगाया कि आज शिक्षा व्यवस्था के कारण ही छात्रों को आत्महत्या करनी पड़ रही है। देश की शिक्षा व्यवस्था बच्चों पर दबाव डालती है। उन्हें तनाव देती है। दबाती और कुचलती है। यह देश की खातिर सही नहीं है।

 

इस दौरान राहुल गांधी ने पांच छात्र-छात्राओं से मंच पर बातचीत भी की। अपने संबोधन में राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि कोटा में आयोजित महारैली कोई सियासी कार्यक्रम नहीं है। यह कार्यक्रम युवाओं के विषय में है। उन्होंने यह कहा कि आज शाम हम बीजेपी-कांग्रेस, चुनाव और सियासत की बात नहीं करेंगे। सिर्फ युवाओं के बारे में और उनकी चुनौतियों पर बात होगी।

 

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राहुल गांधी ने कहा, ‘यहां आकर और आप लोगों व कोटा के सामने खड़े होकर मुझे बहुत खुशी और सम्मानित महसूस हो रहा है। मेरे यहां आने का मकसद यह साफ करना है कि यह कोई राजनीतिक बैठक नहीं है। यह बैठक आपके बारे में है, उन युवाओं के बारे में है जो अपना भविष्य बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।’

1- बीजेपी-कांग्रेस की बात नहीं करूंगा

उन्होंने आगे कहा, ‘मैं बीजेपी, कांग्रेस, राजनीति या चुनाव जैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं करूंगा। आज शाम मेरे मुंह से ये शब्द नहीं निकलेंगे। आज की शाम आपके लिए है। यह इस बारे में है कि आप किन हालात का सामना कर रहे हैं और रोजाना किन चुनौतियों से जूझ रहे हैं।’

 

 

 

 

राहुल गांधी ने अपनी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ का भी जिक्र किया और कहा, ‘कुछ समय पहले मैंने कन्याकुमारी से कश्मीर तक 4 हजार किलोमीटर की पदयात्रा की। रास्ते में मुझे आप जैसे लाखों युवा मिले। मैंने हजारों युवाओं से बात की। मेरा एक ही सवाल होता था कि आप क्या करना चाहते हो? मुझे पांच जवाब मिलते थे, छठा जवाब नहीं मिलता था। इंजीनियर, डॉक्टर, वकील, आईएएस और फोर्स। मुझे बस यही पांच जवाब मिलते थे… मेरे दिमाग में पहला सवाल उठा कि देश के युवा, देश के भविष्य होते हैं, हमारा शिक्षा सिस्टम हमारे युवाओं को सिर्फ पांच विकल्प क्यों देता है?’

 

राहुल गांधी ने कहा कि यात्रा के बाद मैंने शिक्षा व्यवस्था के बारे में थोड़ा और सोचना शुरू किया। मन में सवाल उठे। पब्लिक सेक्टर की शिक्षा व्यवस्था क्यों खत्म हो गई, प्राइवेट सेक्टर की शिक्षा व्यवस्था इतनी महंगी क्यों है?

 

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2-  ‘बच्चों पर दबाव डालती है शिक्षा व्यवस्था’

उन्होंने आरोप लगाया कि भारत की शिक्षा व्यवस्था अपने बच्चों पर दबाव डालती है, उन्हें तनाव देती है, दबाती है और कुचल देती है और यह देश के लिए सही नहीं है। मैं चाहता हूं कि हम सब मिलकर काम करें, ताकि यह पक्का किया जा सके कि इस भीड़ में, इस देश में किसी भी छात्र को… कभी खुदकुशी करने का ख्याल न आए। यह बैठक इसी बारे में है। यह कोई राजनीतिक बैठक नहीं है। यह बैठक भारत की शिक्षा व्यवस्था पर चर्चा करने के लिए है। भारत की शिक्षा व्यवस्था में क्या गलत है और उसमें क्या सुधार करने की जरूरत है। 

 

 

 

3-  ’22 लाख छात्रों के परिवार शिक्षा बजट के बराबर खर्च करते हैं’

राहुल गांधी ने कहा कि नीट में 22 लाख स्टूडेंट के परिवारों से हर साल 1.32 लाख करोड़ रुपए वसूले जाते हैं। इतना ही पैसा सरकार देश के एजुकेशन बजट में डालती है, जो 1.4 लाख करोड़ रुपये है। मतलब 22 लाख लोग एक परीक्षा के लिए उतना पैसे देते हैं, जितना हिंदुस्तान की सरकार अपने एजुकेशन बजट में डालती है।

 

उन्होंने कहा कि पांच सबसे बड़ी परीक्षाएं SSC, UPSC, JEE, RRB, NEET पर परिवारों से 3.5 लाख करोड़ रुपए वसूले जाते हैं। सरकार इतना ही बजट एजुकेशन, हेल्थ, लेबर, साइंस, महिला और बाल विकास मंत्रालय को देती है।

3- ‘शिक्षा का नहीं, उगाही का सिस्टम है’

राहुल गांधी ने एक उदाहरण से समझाया, ‘अगर 1,000 बच्चे इस सिस्टम में जाते हैं तो सिर्फ 12 बच्चों को ही वेतनभोगी रोजगार पाएंगे। करीब 300 लोग बेरोजगार रहेंगे। उनके पास कर्ज और नशे वाली लाइन है। करीब 700 लोग गिग वर्कर बनेंगे, कुली बनेंगे, मनरेगा से जुड़ेंगे या फिर इनफॉर्मल सेक्टर में काम करेंगे। मतलब देश के युवाओं से सरासर झूठ बोला जा रहा है, क्योंकि ये शिक्षा का नहीं, बल्कि उगाही का सिस्टम है।

 

 

 

‘हिंदुस्तान में रिजेक्शन सिस्टम’

5- राहुल गांधी ने कहा कि मीटिंग में आज यहां 3,000 स्टूडेंट्स हैं। इनमें से सिर्फ 1 आईएएस बनेगा। 30 छात्र आईआईटी जाएंगे। 180 डॉक्टर बनेंगे। हिंदुस्तान में ‘सिलेक्शन सिस्टम’ नहीं, ‘रिजेक्शन सिस्टम’ है।

सनस्क्रीन से जुड़ी इन 5 बातों पर आप भी करते हैं यकीन, जानिए सच


जब भी स्किनकेयर की बात होती है तो सनस्क्रीन को हमेशा विकल्प माना जाता है। सोशल मीडिया की वजह से लोग स्किन केयर के प्रति जागरूक हुए हैं लेकिन सनस्क्रीन से जुड़े मिथ्स को लोग सच मानते हैं। खासतौर से पुरुषों को लगता है कि सनस्क्रीन लगाने का कोई फायदा नहीं होता है। 

 

लोगों का मानना है कि जिन लोगों का रंग काला है उन्हें सनस्क्रीन लगाने की जरूरत नहीं है। इसके अलावा ठंडे मौसम में भी सनस्क्रीन को लगाने का कोई फायदा नहीं है। आपको बता दें कि ये सभी बातें भ्रम है। इन बातों में कोई सच्चाई नहीं है।

 

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सनस्क्रीन से जुड़े मिथ्स के बारे में जानें

मिथ 1- सनस्क्रीन सिर्फ धूप में लगाना चाहिए

 

सनस्क्रीन धूप में सूरज की हानिकारक किरणों से बचाने का काम करता है। लोगों को लगता है कि बारिश और ठंड के मौसम में सनस्क्रीन लगाने की जरूरत नहीं होती है लेकिन यह सच नहीं है। ठंडे मौसम में सूरज की हानिकारक किरणे त्वचा के लिए नुकसानदायक है।

 

मिथ 2- दिन में एक बार लगाना काफी है

 

लोगों को लगता है कि दिन में एक बार सनस्क्रीन लगाना काफी होती है और आप सूरज की हानिकारक किरणों से बच सकते है। पसीने, प्रदूषण की वजह से सन स्क्रीन कुछ समय के बाद प्रभाव नहीं रहता है। त्वचा विशेषज्ञों के मुताबिक आपको दिन में दो से तीन बार सनस्क्रीन लगाना जरूरी है।

 

मिथ 3- अधिक एसपीएफ क्रीम ज्यादा फायदेमंद है

 

लोगों को लगता है कि अधिक एसपीएफ वाली क्रीम त्वचा के लिए ज्यादा फायदेमंद है। ऐसा बिल्कुल नहीं है। अधिक एसपीएफ का यह मतलब नहीं है कि आप सूरज की यूवी ए और यूवी बी किरणों से पूरी तरह से सुरक्षित है।

 

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मिथ 4- सिर्फ सनस्क्रीन लगाना काफी है

 

ऐसा सोचना आपकी सबसे बड़ी गलती है। सनस्क्रीन आपको सूरज की हानिकारक किरणों से बचाने का काम करता हैं लेकिन अन्य समस्याओं से छुटकारा नहीं दिलाता है।

 

मिथ 5- डार्क लोगों को सनस्क्रीन की जरूरत नहीं

 

त्वचा में मेलनिन की मात्रा अधिक होने से प्राकृतिक रूप से यूवी रे से सुरक्षा मिलती है लेकिन ये दाग-धब्बे, एजिंग और स्किन कैंसर के खतरे को कम नहीं करता है। सनस्क्रीन हर स्किन टोन के व्यक्ति के लिए जरूरी है।

 

17 या 18 जून कब है प्रद्युम्न चतुर्थी? सही तारीख से लेकर पूजा की विधि जानिए


सनातन धर्म में प्रद्युम्न चतुर्थी पर्व का एक खास महत्व है। इस पर्व में हर भक्त भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करता है। साथ ही इस पर्व में कई लोग व्रत भी रखते हैं, जिससे भक्तों पर भगवान गणेश की कृपा बरसती है। धार्मिक जानकारों के मुताबिक, प्रद्युम्न चतुर्थी के दिन जो भक्त व्रत रखते हैं, उन्हें न केवल जीवन में सुख-शांति मिलती है, बल्कि जीवन के कई विघ्न यानी कष्ट भी दूर हो जाते हैं। इस साल का प्रद्युम्न चतुर्थी पर्व शुभ और फलदायी माना जा रहा है। इस वजह से सभी भक्तों को व्रत रखना चाहिए।

 

इस साल प्रद्युम्न चतुर्थी पर्व 17 जून की रात से शुरू होगा। 18 जून की शाम को यह पर्व समाप्त होगा। ऐसे में कई भक्तों के मन में दुविधा है कि प्रद्युम्न चतुर्थी की सही तारीख क्या है। साथ ही सवाल उठता है कि इस साल प्रद्युम्न चतुर्थी का व्रत किस दिन रखा जाए। आइए इस सवाल का जवाब जानते हैं।

 

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क्या है प्रद्युम्न चतुर्थी की सही तारीख?

हिंदू पंचांग के मुताबिक, 17 जून की रात 9 बजकर 38 मिनट पर चतुर्थी तिथि शुरू होगी। इसके बाद यह तिथि 18 जून को शाम 6 बजकर 58 मिनट पर समाप्त होगी। हिंदू धर्म में उदया तिथि के हिसाब से व्रत और पर्व मनाए जाते हैं। इसी आधार पर 18 जून को प्रद्युम्न चतुर्थी की उदया तिथि पड़ रही है, इसलिए 18 जून को ही व्रत रखना चाहिए।

प्रद्युम्न चतुर्थी के दिन शुभ मुहूर्त

प्रद्युम्न चतुर्थी पर शुभ ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:03 बजे से शुरू होगा, जो 4:43 बजे तक रहेगा। सुबह की पूजा का शुभ मुहूर्त 10:58 बजे से लेकर 1:46 बजे तक रहेगा। इसके अलावा इस दिन का विजय मुहूर्त दोपहर 11:54 बजे से लेकर 12:50 बजे तक रहेगा।

 

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किस तरह करें पूजा?

 

प्रद्युम्न चतुर्थी के दिन भक्तों को सुबह स्नान करना चाहिए। इसके बाद साफ कपड़े पहन लें। फिर अपने घर के मंदिर में पीला कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद भगवान गणेश को फूलों की माला पहनाएं और फूल अर्पित करें। फिर चंदन का तिलक लगाएं। सबसे खास बात यह है कि प्रद्युम्न चतुर्थी की पूजा के दौरान भगवान गणेश को दूर्वा घास जरूर चढ़ाएं।

 

प्रद्युम्न चतुर्थी की पूजा में मोदक या लड्डू का भोग अवश्य लगाएं क्योंकि यह भगवान गणेश की प्रिय मिठाई मानी जाती है। पूजा के बाद गणेश चालीसा का पाठ करें। इसके बाद पूर्ण श्रद्धा भाव से ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जाप करें।

 

नोट: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।

खाने की कमी पूरी करने के लिए छोड़े थे खरगोश, ऐसी तबाई मचाई कि सबके होश उड़ गए


ज्यादातर लोगों के लिए खरगोश नुकसान न पहुंचाने वाले जानवर होते हैं, जिन्हें बगीचों, पालतू जानवरों और बच्चों की कहानियों से जोड़ा जाता है। बचपन से ही बच्चों को खरगोश की कहानी भी पढ़ाई जाती है और इसे एक प्यारे जानवर के रूप में दिखाया जाता है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया में स्थित मैक्वेरी द्वीप पर खरगोश सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाली बाहरी प्रजातियों में बदल गए। खास बात यह है कि इन खरगोशों को जानबूझकर इस द्वीप पर छोड़ा गया था और अब यह इस पूरे द्वीप के लिए खतरा बन गए। इसके पीछे की कहानी भी बड़ी रोचक है। 

 

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इन खरगोशों को साल 1878 में जानबूझकर वहां छोड़ा गया था ताकि इस दूरस्थ द्वीप पर आने वाले नाविकों और शिकार करने वालों को खाने का भरोसेमंद साधन मिल सके। यह फैसला उस समय सही लगा और बाद में पर्यावरण के लिए बड़ी तबाही बन गया।

 

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मैक्वेरी द्वीप पर खरगोश क्यों छोड़े गए?

मैक्वेरी द्वीप ऑस्ट्रेलिया का एक दूरस्थ इलाका है, जो तस्मानिया और अंटार्कटिका के बीच स्थित है। उन्नीसवीं सदी में नाविक और शिकारी अक्सर इस द्वीप पर आते थे और कई दिनों तक वहां रुकते थे। भविष्य में आने वाले लोगों को ताजा मांस मिल सके, इसलिए साल 1878 में वहां जानबूझकर खरगोश छोड़े गए। उस समय यह फैसला समझदारी भरा लगा क्योंकि द्वीप पर आने वाले लोगों के लिए खाने का इंतजाम हो गया था। ऐसी व्यवस्था दूसरी जगहों पर भी अपनाई गई थी, जहां दूरस्थ द्वीपों पर जानवर छोड़कर उन्हें भोजन के भंडार की तरह इस्तेमाल किया जाता था।

तेजी से बढ़ी खरगोशों की संख्या

जिस समय खरगोश छोड़े गए थे उस समय इसके लंबे समय के पर्यावरणीय असर पर बहुत कम ध्यान दिया गया। यह द्वीप का अपना अलग और अनोखा प्राकृतिक तंत्र था, जो लंबे समय तक बाकी दुनिया से अलग विकसित हुआ था। इसलिए यह तेजी से बढ़ने वाले ऐसे जानवरों के आने का सामना करने के लिए तैयार नहीं था। उस द्वीप पर खरगोशों को शिकार करने के लिए छोड़ा गया लेकिन वहां पर खरगोशों की संख्या कंट्रोल करने वाले शिकारी जानवर नहीं थे और खाने के लिए बहुत ज्यादा वनस्पति मौजूद थी। 

 

एक बार जब खरगोश वहां बस गए, तो उनकी संख्या बहुत तेजी से बढ़ने लगी। मादा खरगोश एक साल में कई बार बच्चे पैदा कर सकती है, जिससे अनुकूल परिस्थितियों में उनकी आबादी बहुत तेजी से बढ़ती है। मैक्वेरी द्वीप पर ऐसे कोई स्थानीय शिकारी जानवर नहीं थे जो उनकी संख्या को कंट्रोल कर सकें।

पौधों के लिए बने खतरा

द्वीप पर घनी वनस्पति थी और खरगोशों को खाने के लिए भरपूर भोजन मिल गया। जैसे-जैसे उनकी संख्या हजारों से बढ़कर एक लाख से ज्यादा हो गई, उन्होंने पौधों को उनकी दोबारा बढ़ने की गति से भी ज्यादा तेजी से खाना शुरू कर दिया। जिन इलाकों में पहले घनी हरियाली थी, वे धीरे-धीरे खाली जमीन में बदल गए।

 

मैक्वेरी द्वीप कई समुद्री पक्षियों के प्रजनन का महत्वपूर्ण स्थान है। यहां कई प्रकार के पक्षी रहते और अंडे देते हैं, जिनमें पेट्रेल, अल्बाट्रॉस और पेंगुइन जैसे पक्षी शामिल हैं। इन पक्षियों में से कई घोंसला बनाने और सुरक्षित रहने के लिए वनस्पति पर निर्भर थे। हालांकि, खरगोशों के कारण वह सब पहले ही खत्म हो चुका था। पौधों की कमी के कारण मिट्टी का कटाव शुरू हो गया जिससे प्रजनन के लिए पक्षियों को सही जगह नहीं मिली। यानी खरगोशों की बढ़ती संख्या ने उन्हें भी नुकसान पहुंचाया।  

द्वीप को बचाने के लिए चला अभियान

20वीं सदी के अतं तक लोगों को समझ आ गया कि खरगोशों के कारण द्वीप को नुकसान पहुंच रहा है और इसे बचाने के लिए कुछ तो करना पड़ेगा। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया ने बाहरी प्रजातियों को हटाने के लिए दुनिया के सबसे बड़े अभियानों में से एक शुरू किया। अभियान के तहत अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल करके खरगोशों और अन्य बाहरी जानवरों को द्वीप से निकाला गया। ऑस्ट्रेलिया को इसके लिए काफी ज्यादा खर्च भी करना पड़ा। साल 2014 तक यह अभियान लगभग पूरा हुआ और द्वीप से खरगोशों को पूरी तरह हटा दिया। 

 

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फिर से द्वीप पर लौटी रौनक

इस अभियान के बाद जो बदलाव दिखाई दिए, उन्होंने वैज्ञानिकों को भी चौंका दिया। स्थानीय पौधे फिर से तेजी से उगने लगे और जिन इलाकों की हरियाली कई दशकों से खत्म हो चुकी थी, वहां दोबारा वनस्पति लौटने लगी। इससे मिट्टी मजबूत हुई और जानवरों के रहने की जगहें फिर से बनने लगीं।

 

वन्यजीवों को भी इसका फायदा मिला। जैसे-जैसे हरियाली लौटी, समुद्री पक्षियों और दूसरी स्थानीय प्रजातियों के लिए प्रजनन की स्थिति बेहतर होने लगी। कुल मिलाकर द्वीप फिर से अपनी पुरानी स्थिति पर पहुंचने लगा। इस मामले ने पूरी दुनिया को सचेत किया कि कैसे प्रकृति के सात छेड़छाड़ उसे तबाह कर सकती है। मैक्वेरी द्वीप पर एक गलत फैसले से दशकों तक संतुलन बिगड़ता रहा। हालांकि, मैक्वेरी द्वीप पर तो अभियान सफल रहा लेकिन कई जगहों पर आज भी मानवीय गलतियों के कारण प्रकृति का संतुलन बिगड़ गया है। 

YES बैंक लोन घोटाले में ED की रेड, महाराष्ट्र-दिल्ली समेत 17 ठिकानों पर छापेमारी


प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को यस बैंक (Yes Bank) से जुड़े लोन घोटाले की जांच के तहत महाराष्ट्र और दिल्ली में 17 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई तीन निजी कंपनियों, उनके प्रमोटर्स, निदेशकों, कर्मचारियों और एक पूर्व यस बैंक कर्मचारी से जुड़े परिसरों पर की गई है। फिलहाल जांच जारी है। छापेमारी मुंबई, खंडाला और दिल्ली में की गई। जिन संस्थानों पर कार्रवाई हुई है उनमें सुरक्षा एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड (SARCL), सुरक्षा रियल्टी लिमिटेड और ख्याति रियलटर्स प्राइवेट लिमिटेड सहित अन्य संबंधित लोग शामिल हैं।

 

ED की यह कार्रवाई यस बैंक के फर्जी लोन असाइनमेंट से जुड़े मामले में की जा रही है। आरोप है कि मैकस्टार मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड और अन्य कंपनियों के लोन को वित्तीय वर्ष 2016-17 और 2017-18 के दौरान गलत तरीके से ट्रांसफर किया गया।

 

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सर्कुलर ट्रांजैक्शन और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप

ED मुंबई जोनल ऑफिस-1 इस पूरे मामले की जांच कर रहा है। एजेंसी का कहना है कि छापेमारी का मकसद मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े सबूत जुटाना है। जांच में यह भी सामने आ रहा है कि एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों (ARCs) और यस बैंक के बीच मिलीभगत कर स्ट्रेस्ड एसेट्स को गलत तरीके से हासिल किया गया। आरोप यह भी है कि नीलामी प्रक्रिया में संपत्तियों का गलत मूल्यांकन किया गया, फर्जी दावे पेश किए गए और NCLT की कार्यवाही में पारदर्शिता को प्रभावित किया गया।

 

फिलहाल इस पूरे मामले पर संबंधित कंपनियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। ED का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस कथित बैंक घोटाले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

16 जून का राशिफल, बजरंगबली की कृपा से किस राशि को मिलेगा करियर में लाभ?


16 जून को मंगलवार है। आज का मूलांक 7 है, जो केतु का अंक होने के कारण मानसिक स्पष्टता, आध्यात्मिक चेतना को जागृत करता है। आकाश मंडल में चंद्रमा आज मिथुन राशि में प्रवेश कर रहे हैं, जहां उनका संयोग बुध और सूर्य के साथ हो रहा है। इसके साथ ही मंगल अपनी ही स्वराशि मेष में रहेंगे। ग्रह-नक्षत्रों का यह ताना-बाना आज के दिन को गतिशील, बौद्धिक रूप से समृद्ध और फैसले लेने के लिए योग्य बनाता है।

 

आज की ऊर्जा कर्मप्रधान है। मंगलवार का दिन होने से हनुमान जी की विशेष कृपा बरसेगी, जिससे बाधाओं का नाश होगा और साहस में बढ़ोतरी होगी। यह दिन अधूरे कामों को तेज रफ्तार देने और नई रणनीतियों पर विचार करने के लिए शानदार है। हालांकि, मूलांक 7 के प्रभाव के कारण जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना होगा। आइए जानते हैं कि ग्रहों की यह विशेष जुगलबंदी मेष से लेकर मीन राशि तक के जातकों के जीवन पर क्या प्रभाव डालने वाली है।

 

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राशिफल

मेष राशि

 

ऑफिस में आपका प्रभाव बढ़ेगा। व्यापार में नए सौदे फायदेमंद रहेंगे। धन लाभ के योग हैं। जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा, परिवार में खुशी का माहौल रहेगा।

आज क्या करें: हनुमान चालीसा का पाठ करें।

आज क्या न करें: किसी भी काम में जल्दबाजी न दिखाएं।

 

वृषभ राशि

 

नौकरी में सीनियर्स की सराहना मिलेगी। व्यापार में धीमी शुरुआत होगी। फंसा हुआ धन वापस मिल सकता है, बचत पर ध्यान दें। आपकी बातचीत से पारिवारिक विवाद सुलझेंगे। रिश्तों में नजदीकियां आएंगी।

आज क्या करें: पक्षियों को दाना डालें।

आज क्या न करें: आज किसी को उधार देने से बचें।

 

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मिथुन राशि

 

आज चंद्रमा आपकी राशि में है, जिससे बौद्धिक क्षमता बढ़ेगी। नई योजनाएं सफल होंगी। आर्थिक पक्ष मजबूत रहेगा। लव लाइफ में रोमांच रहेगा। परिवार के साथ अच्छा समय बीतेगा।

आज क्या करें: गाय को हरा चारा खिलाएं।

आज क्या न करें: खुद पर नकारात्मक विचारों को हावी न होने दें।

 

कर्क राशि

 

ऑफिस में विवादों से दूर रहें। खर्चों की अधिकता रहेगी, बजट बनाकर चलना समझदारी होगी। जीवनसाथी की भावनाओं का सम्मान करें, घरेलू मामलों में धैर्य रखें।

आज क्या करें: ॐ नमः शिवाय का जाप करें।

आज क्या न करें: आज कोई बड़ा निवेश न करें।

 

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सिंह राशि

 

करियर में बड़ा उछाल आने के संकेत हैं। व्यापारियों को बड़ा मुनाफा होगा। धन कमाने के मजबूत योग हैं, निवेश के लिए दिन उत्तम है। बड़े भाई-बहनों का सहयोग मिलेगा।

आज क्या करें: सूर्य देव को अर्घ्य दें।

आज क्या न करें: अहंकार की भावना को खुद पर हावी न होने दें।

 

कन्या राशि

 

कार्यस्थल पर आपके काम की तारीफ होगी। नया बिजनेस शुरू करने का विचार बनेगा। आर्थिक स्थिति स्थिर रहेगी। माता-पिता का आशीर्वाद मिलेगा। पैतृक संपत्ति के मामले सुलझेंगे।

आज क्या करें: जरूरतमंदों को फल दान करें।

आज क्या न करें: ऑफिस के काम को कल पर न टालें।

 

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तुला राशि

 

आज भाग्य का साथ मिलेगा। नौकरी में ट्रांसफर या प्रमोशन की बात चल सकती है। खर्च और आमदनी में संतुलन बना रहेगा। धार्मिक कार्यों में खर्च होगा। परिवार के साथ किसी धार्मिक स्थल घूमने जा सकते हैं।

आज क्या करें: किसी मंदिर में कपूर दान करें।

आज क्या न करें: भाग्य के भरोसे बैठकर मेहनत करना न छोड़ें।

 

वृश्चिक राशि

 

ऑफिस में चुनौतियां आ सकती हैं। दुश्मनों से सावधान रहने की जरूरत है। पैसों के लेन-देन में सावधानी बरतें। जीवनसाथी के साथ बहस हो सकती है, शांति से बात सुलझाएं।

आज क्या करें: सुंदरकांड का पाठ करें या सुनें।

आज क्या न करें: आज कोई नया कीमती सामान न खरीदें।

 

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धनु राशि

 

पार्टनरशिप के बिजनेस में बड़ा फायदा होगा। नौकरी में नए अधिकार मिल सकते हैं। आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी, लेकिन रुका हुआ पैसा वापस मिलने से आर्थिक तंगी दूर होगी।

आज क्या करें: माथे पर केसर या हल्दी का तिलक लगाएं।

आज क्या न करें: आज किसी साझा सौदे में लापरवाही न बरतें।

 

मकर राशि

 

नौकरी में आपको मेहनत के अनुसार परिणाम मिलेंगे। नौकरीपेशा लोग राजनीति का शिकार होने से बचें। पुराने कर्ज से मुक्ति मिलने के रास्ते खुलेंगे। खर्च नियंत्रित रहेगा। परिवार में तालमेल बना रहेगा।

आज क्या करें: चींटियों को आटा डालें।

आज क्या न करें: विरोधियों को कमजोर समझने की भूल न करें।

 

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कुंभ राशि

 

आज विद्यार्थियों के लिए दिन बेहतरीन है। व्यापार में नए आइडियाज सफल होंगे। अचानक धन लाभ हो सकता है। लॉटरी या शेयर मार्केट से फायदा संभव है। लवमेट के साथ क्वालिटी टाइम बिताएंगे।

आज क्या करें: हनुमान जी को बूंदी का भोग लगाएं।

आज क्या न करें: भावनाओं में बहकर कोई बड़ा फैसला न लें।

 

मीन राशि

 

आज वर्क फ्रॉम होम कर रहे लोगों को सफलता मिलेगी। ऑफिस के काम का थोड़ा दबाव रह सकता है। सुख-सुविधाओं की चीजों पर धन खर्च होगा, जिससे बजट प्रभावित हो सकता है।

आज क्या करें: शिवलिंग पर जल अर्पित करें।

आज क्या न करें: आज के दिन घर में क्लेश न करें।

 

नोट: यह राशिफल ज्योतिषीय मान्यताओं के आधार पर बताया गया है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।

उड़ान भरते ही जमीन पर गिर पड़ा अमेरिका का B-52 बॉम्बर विमान, 8 लोगों की मौत


अमेरिका के कैलिफोर्निया में एक बड़ा हादसा हुआ है। अमेरिकी वायुसेना का एक B-52 स्ट्रैटोफोर्ट्रेस बॉम्बर विमान उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में विमान में सवार सभी 8 लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों ने शुरुआती जांच के बाद हादसे को नॉन-सर्वाइवेबल बताया है यानी इस हादसे में किसी के भी बचने के उम्मीद कम है। 

 

रिपोर्ट्स के अनुसार, यह हादसा कैलिफोर्निया के मोजावे रेगिस्तान क्षेत्र में स्थित एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस पर हुआ। जानकारी के अनुसार, विमान स्थानीय समय के अनुसार सुबह करीब 11:20 बजे उड़ान भरने के बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे के तुरंत बाद विमान में आग लग गई और मौके पर धुएं का बड़ा गुबार दिखाई दिया।

 

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टेस्टिंग के दौरान हुआ हादसा

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक यह विमान किसी युद्ध अभियान का हिस्सा नहीं था, बल्कि नियमित परीक्षण उड़ान का हिस्सा था। बताया गया कि विमान रडार मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम से जुड़ी टेस्ट उड़ान पर था। उड़ान शुरू होने के कुछ ही समय बाद विमान कंट्रोल खो बैठा और जमीन पर गिर गया।

8 लोगों की मौत

एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस के अधिकारियों ने प्रेस ब्रीफिंग में हादसे की पुष्टि करते हुए कहा कि इस दुर्घटना में आठ अमेरिकियों की जान गई है। दुर्घटना के बाद इमरजेंसी टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं, लेकिन प्रारंभिक स्थिति देखकर स्पष्ट हो गया कि किसी को बचाया नहीं जा सकता। इसके बाद बचाव अभियान को रिकवरी ऑपरेशन में बदल दिया गया।

 

रिपोर्ट के अनुसार, विमान में सैन्य कर्मियों के साथ कुछ सरकारी और तकनीकी सहयोगी भी मौजूद थे। कुछ रिपोर्टों में बताया गया कि मृतकों में विमान निर्माण और तकनीकी परीक्षण से जुड़े लोग भी शामिल थे। खबर लिखे जाने तक मृतकों की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई थी। 

क्यों हुआ हादसा?

फिलहाल हादसे की वजह आधिकारिक तौर पर साफ नहीं की गई है। जांच एजेंसियों ने तकनीकी खराबी, फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम और परीक्षण प्रक्रिया से जुड़े सभी पहलुओं की जांच शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि टेस्ट मिशन सामान्य उड़ानों की तुलना में अधिक जोखिम वाले होते हैं क्योंकि इनमें नए सिस्टम और बदलावों का परीक्षण किया जाता है।

 

B-52 अमेरिकी वायुसेना के सबसे पुराने और रणनीतिक बॉम्बर विमानों में गिना जाता है। यह विमान दशकों से सेवा में है और लगातार तकनीकी अपग्रेड के साथ इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे में इस दुर्घटना को अमेरिकी सेना लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

कौन उठा रहा सोनम रघुवंशी का खर्च? जमानत मिलने के बाद खुद किए कई बड़े खुलासे


मध्यप्रदेश के इंदौर का चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड एक बार फिर सुर्खियों में है। इस मामले में मुख्य आरोपी और मृतक राजा रघुवंशी की पत्नी सोनम रघुवंशी ने अब मीडिया के सामने आकर कई खुलासे किए हैं। उन्होंने कहा कि वह नेपाल नहीं भागी थी। सोनम ने कहा कि उनके बारे में झूठ फैलाया जा रहा है और जनता अफवाह पर भरोसा ना करे। सोनम रघुवंशी अपने पति राजा रघुवंसी की हत्या के मामले में आरोपी हैं और फिलहाल वह जमानत पर बाहर हैं। 

 

जेल से रिहा होने के बाद सोनम शिलॉन्ग में रह रही है। सोनम ने वहां के एक लोकल चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा है कि मैं शिलॉन्ग में ही हूं। इसके साथ ही उन्होंने साफ किया कि उनका फिलहाल इंदौर जाने का कोई प्लान नहीं है। सोनम ने कहा कि वह इस मामले में जांच में सहयोग करेंगी। उन्होंने कहा, ‘मैंने हमेशा कोर्ट की कार्यवाही में पूरा सहयोग किया है। आगे भी करती रहूंगी।’

 

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राजा के भाई ने लगाया था आरोप

राजा रघुवंशी का परिवार सोमन रघुवंशी की जमानत का विरोध कर रहा है। हालांकि, कोर्ट ने सोनम को जमानत दे दी है। इसके बाद राजा रघुवंशी के भाई विपिन रघुवंशी ने आरोप लगाया था कि सशर्त जमानत पर जेल से रिहा होने के बाद सोनम देश छोड़कर नेपाल भाग गई है। उन्होंने मामले की CBI जांच कराने की भी मांग की थी।

 

हालांकि, सोमन में इन आरोपों के बाद साफ जवाब दिया है कि वह नेपाल नहीं गई हैं। उन्होंने कहा कि वह जमानत की शर्तों का पालन कर रही हैं। सोनम ने कहा, ‘कोर्ट ने जमानत के लिए जो भी शर्तें रखी हैं,  मैंने हमेशा उनका पूरी तरह पालन किया है और मैं उस दायरे को कभी नहीं तोड़ूंगी।’

कौन उठा रहा सोनम का खर्च?

सोनम ने इंटरव्यू में साफ किया कि वर्तमान में वह शिलॉन्ग में ही रह रही है। उन्होंने कहा कि मैं शिलॉन्ग से बाहर बिल्कुल नहीं गई हूं। इसके साथ ही उनसे इंटरव्यू में खर्च को लेकर भी सवाल किया गया। इस सवाल के जवाब में सोनम ने कहा कि उसके बारे में मैं कुछ नहीं बताना चाहती। सोनम ने कहा कि खर्च उनका निजी मामला है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सुरक्षा कारणों की वजह से शिलॉन्ग के भीतर अपने सटीक रहने के स्थान को सार्वजनिक नहीं कर सकती।

 

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हत्या पर क्या बोली?

इंटरव्यू में सोनम से उनके पति की हत्या के बारे में भी पूछा गया। इस बारे में जवाब देते हुए सोनम ने कहा कि मैं इस पर कुछ नहीं बोलूंगी। अभी मेरा केस ट्रायल में चल रहा है। मैंने कोर्ट का हमेशा सहयोग किया है। हालांकि, उन्होंने नेपाल भागने के आरोपों का खंडन किया। 


सोनम रघुवंशी की शादी 2025 में राजा रघुवंशी से हुई थी। इसके बाद वह अपने पति के साथ हनीमून पर कई थी। हनीमून के दौरान ही सोनम के पति राजा रघुवंशी की हत्या कर दी गई थी। इस मामले की चर्चा पूरे देश में हुई थी। सोनम रघुवंशी इस मर्डर के बाद कुछ दिन गायब रही थी लेकिन बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। अब कोर्ट में वह अपने पति की हत्या के मामले में ट्रायल का सामना कर रही है।  

हर वक्त ऑनलाइन रहना जरूरी नहीं, डिजिटल डिटॉक्स के अपनाएं आसान तरीके


आज के समय में मोबाइल फोन हमारी जरूरत से ज्यादा हमारी आदत बन चुका है। सुबह आंख खुलते ही सबसे पहले हम फोन देखते हैं और रात को सोने से ठीक पहले भी सोशल मीडिया चलाना ज्यादातर लोगों की आदत बन गया है। काम, पढ़ाई, खरीदारी और मनोरंजन का बड़ा हिस्सा अब पूरी तरह फोन की स्क्रीन तक सिमट गया है। इससे आंखों पर दबाव, गर्दन में दर्द, नींद की समस्या और मानसिक थकान जैसी परेशानियां बढ़ रही हैं। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम डिजिटल दुनिया से इतने ज्यादा जुड़ गए हैं कि असली दुनिया की छोटी-छोटी खुशियां कहीं खो सी गई हैं। 

 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि डिजिटल डिटॉक्स का मतलब तकनीक को पूरी तरह छोड़ना नहीं है। इसका मतलब है कि हम तकनीक का इस्तेमाल सही तरीके से करें ताकि हम अपनी असल जिंदगी का आनंद ले सकें। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, लगातार डिजिटल शोर में रहने से दिमाग पर बुरा असर पड़ता है। इसलिए हफ्ते के अंत में यानी वीकेंड पर फोन से दूरी बनाना मन को शांत करने, परिवार के साथ समय बिताने और खुद को तरोताजा करने का बहुत अच्छा तरीका है।

 

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फोन चलाने की अपनी आदतों को पहचानें

डिजिटल डिटॉक्स शुरू करने के लिए पहले यह देखें कि आप दिन में कितनी बार फोन चेक करते हैं। अपने फोन की सेटिंग्स में जाकर यह देखें कि आप किस ऐप पर सबसे ज्यादा समय बिता रहे हैं। जब आपको पता चल जाएगा कि आपका समय कहां ज्यादा खर्च हो रहा है, तो आप उन ऐप्स का इस्तेमाल कम कर सकते हैं जो आपके लिए बहुत जरूरी नहीं हैं। अपनी डिजिटल लाइफ को सुधारने की दिशा में यह पहला और जरूरी कदम है।

सुबह के पहले घंटे में फोन का उपयोग न करें

उठते ही फोन देखने की आदत हमारे पूरे दिन की ऊर्जा पर बुरा असर डालती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि जागने के बाद का कम से कम पहला एक घंटा आप बिना फोन के बिताएं। उस समय आप टहलने जाएं, कसरत करें या कोई किताब पढ़ें। यह छोटी सी आदत आपके मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाती है और आपको पूरे दिन शांत महसूस करने में मदद करती है।

जरूरी न हो तो नोटिफिकेशन बंद रखें

फोन में आने वाले हर नोटिफिकेशन की हमें जरूरत नहीं होती। ये नोटिफिकेशन हमारा ध्यान बार-बार भटकाते हैं और हमारे काम में रुकावट डालते हैं। आप उन ऐप्स के नोटिफिकेशन बंद कर दें जो आपके लिए जरूरी नहीं हैं। इससे आप फोन के गुलाम नहीं बनेंगे और आप खुद तय कर पाएंगे कि आपको फोन कब और क्यों देखना है।

घर में फोन के लिए नो फोन जोन बनाएं

अपने घर की कुछ जगहों को पूरी तरह से फोन से दूर रखें। जैसे कि डाइनिंग टेबल पर खाना खाते समय और बेडरूम में सोने से पहले फोन का इस्तेमाल न करें। जब आप खाना खाते हैं या परिवार के साथ बैठते हैं, तो फोन को पास न रखें। इससे आपसी बातचीत बढ़ेगी और आपके रिश्ते मजबूत होंगे। बेडरूम में फोन न ले जाने से आपकी नींद अच्छी आएगी और आप हानिकारक रोशनी से बच सकेंगे।

वीकेंड को बनाएं डिजिटल डिटॉक्स डे

पूरे हफ्ते काम के दबाव के बाद वीकेंड पर खुद को तकनीक से दूर रखना बहुत जरूरी है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, छुट्टी के दिन डिजिटल दुनिया से दूर रहकर आप अपना तनाव कम कर सकते हैं और जीवन की छोटी खुशियों को महसूस कर सकते हैं। छुट्टी के दिन कम से कम कुछ घंटे या पूरा एक दिन सोशल मीडिया से दूरी बनाएं। इस दौरान आप दोस्तों से मिलें, बाहर घूमने जाएं या अपने पसंदीदा काम करें। यह बदलाव आपको मानसिक शांति देगा और आप नई ऊर्जा के साथ काम पर लौट सकेंगे।

ऑफलाइन शौक को समय दें

फोन चलाने के बजाय खाली समय में कुछ और काम करें। आप पेंटिंग कर सकते हैं, पौधे लगा सकते हैं, योग कर सकते हैं, रनिंग कर सकते हैं या अच्छा संगीत सुन सकते हैं। जब आप अपनी पसंद का काम करेंगे, तो आपको फोन की याद कम आएगी और आपको ज्यादा खुशी मिलेगी। ये गतिविधियां आपको यह बताती हैं कि बिना फोन के भी जिंदगी कितनी सुखद और अच्छी हो सकती है।

 

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सोने से कम से कम एक घंटा पहले फोन का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर देना चाहिए। मोबाइल की स्क्रीन से आने वाली नीली रोशनी हमारी नींद के हार्मोन को खराब करती है। अगर आप सोने से पहले फोन नहीं देखेंगे, तो आपको गहरी और अच्छी नींद आएगी। रात को फोन से दूरी बनाकर आप अपनी सेहत का ध्यान रख सकते हैं।