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केन-बेतवा लिंक परियोजना का हजारों आदिवासी विरोध क्यों कर रहे हैं?


केन और बेतवा दोनों मध्य प्रदेश की बड़ी नदियों में शुमार हैं। यह दोनों ही यमुना की सहायक नदियां हैं। केन बांदा तो बेतवा हमीरपुर जिले में आकर यमुना में मिलती है। दोनों मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड संभाग की पानी की जरूरतों को पूरा करती हैं। इस बड़े और शुष्क इलाके में इन दोनों नदियों की इतनी अहमियत है कि यहां की खेती, बिजली और पीने के पानी की जरूरत पूरी होती है। इसके लिए दोनों नदियों पर बांध बनाया जा रहा है। 427 किलोमीटर लंबी केन और 590 किलोमीटर बेतवा नदी को जोड़ने के लिए परियोजना चलाई जा रही है, जिससे दोनों नदियों को जोड़कर  मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के करोड़ों लोगों की जरूरतें पूरी की जा सकें। 

 

केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना भारत की सबसे महत्वपूर्ण और पहली नदी जोड़ो परियोजना है। इसका मकसद पानी की कमी वाले क्षेत्रों को राहत देना है। इसे खास तौर पर बुंदेलखंड क्षेत्र के विकास के लिए बनाया जा रहा है। परियोजना के तहत केन नदी से अतिरिक्त पानी लेकर बेतवा नदी में पहुंचाना है। 

 

इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत प्रस्तावित दौधन बांध बनाया जा रहा है। प्रस्तावित दौधन बांध का निर्माण कार्य शुरू हो गया है, लेकिन यह निर्माण कार्य अधर में अटक गया है। मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में बन रहे इस बांध को लेकर बड़े स्तर पर विरोध हो रहा है। ऐसे में आइए इस परियोजना का विरोध क्यों हो रहा है और इलाके के लाखों आदिवासी इसके खिलाफ क्यों खड़े हो गए हैं… 

 

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बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन

मध्य प्रदेश के छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना का आदिवासी समाज बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन कर रहा है। यही वजह है कि महत्वाकांक्षी केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के तहत प्रस्तावित दौधन बांध का निर्माण कार्य लगातार शुक्रवार को छठवें दिन भी बंद रहा। ग्रामीण आदिवासी सरकार से उचित मुआवजे की मांग को लेकर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान कुछ ग्रामीणों ने जमीन पर लेटकर शवों की तरह प्रतीकात्मक रूप से अपना विरोध दर्ज कराया। 

 

यह प्रदर्शन स्थानीय नेता अमित भटनागर के नेतृत्व में हो रहा है। प्रदर्शन में मझगांव, विशरनगंज-नेगवा, दौधन, पलकोन्हा, खरयानी, सुकवाहा और मैनारी सहित 40 से अधिक गांवों के लोग हिस्सा ले रहे हैं। बांध के निर्माण स्थल पर प्रदर्शनकारियों ने शिविर लगा लिया है। उन्होंने विस्थापित परिवारों के लिए 12.5 लाख रुपये के मुआवजे के पैकेज की मांग की है। प्रदर्शनकारियों ने सागर संभाग के कमिश्नर के साथ बातचीत करने पर जोर दिया है। बिजावर और राजनगर के उप-संभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) ने घटनास्थल का दौरा किया, लेकिन प्रदर्शनकारी कमिश्नर से बात करने पर अड़े हुए हैं। 

प्रदर्शनकारियों ने लगाया गंभीर आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि पन्ना जिले में पहले की बांध परियोजनाओं से विस्थापित हुए लोगों को भी पर्याप्त मुआवजा नहीं मिला है। उन्होंने राहत और पुनर्वास लाभ में समानता की मांग की। प्रदर्शनकारी कर रहे हैं कि पहले के वादे पूरे नहीं किए गए हैं। इसमें सरकार ने हमसे अधिक मुआवजे देने का वादा किया था, लेकिन वह नहीं दिया गया है। उन्होंने दावा किया कि केन-बेतवा परियोजना के लिए शुरुआती समर्थन के बावजूद, प्रभावित परिवारों को अभी तक पर्याप्त भुगतान नहीं मिला है।

भुसोर नाका के पास सुरक्षा कड़ी

प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया है कि लाभार्थियों के केवल एक छोटे हिस्से को मुआवजा मिला है, जबकि सैकड़ों लोग अभी भी इसका इंतजार कर रहे हैं। प्रशासन ने बाहरी लोगों के प्रवेश को रोकने के लिए पन्ना टाइगर रिजर्व के भुसोर नाका के पास सुरक्षा कड़ी कर दी थी, लेकिन प्रदर्शनकारी वैकल्पिक रास्तों से प्रदर्शन स्थल पर पहुंच गए। हालांकि, अधिकारी बातचीत के जरिए इस स्थिति को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं।

 

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परिजोयना से पैदा होने वाला खतरा

इस परिजोयना को लेकर आदिवासी और पर्यावरणविद पर्यावरणीय चिंता भी जता रहे हैं। इस परियोजना में यह बड़ी रुकावट है। दरअसल, दोनों नदियों के पानी पर बनने वाले बांध से पन्ना टाइगर रिजर्व का एक बड़े हिस्से के डूब क्षेत्र में आ जाएगा। इससे यहां के जंगल और वन्यजीवों पर खतरा पैदा हो जाएगा। इसके अलावा ग्रामीणों के सामने विस्थापन का खतरा है। यहां रहने वाले लोग सदियों से इस क्षेत्र में रह रहे हैं, जिसमें हजारों लोगों को यहां से हटाना पड़ेगा। इसमें 24 गांवों का सीधा विस्थापन हो रहा है और 8 गांव सीधे तौर पर डूब जाएंगे।

केन-बेतवा लिंक कैसे होगी?

केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत मध्य प्रदेश से निकलने वाली केन और बेतवा नदी को नहर के माध्यम से जोड़ा जाएगा। इसके तहत केन नदी का पानी बेतवा नदी में बहाया जाएगा, जिससे न सिर्फ जल स्तर में बढोतरी होगी, बल्कि सिंचाई और पेयजल के लिए भरपूर पानी की उपलब्धता भी सुनिश्चित हो सकेगी। इस परियोजना के पहले चरण के तहत वर्तमान में दौधन बांध पर काम शुरू हुआ है। इस चरण में केन नदी पर 77 मीटर ऊंचा एक बांध प्रस्तावित है। 

 

इस परियोजना में बिजली उत्पादन के लिए दो पावर हाउस, एक बांध के निचले स्तर में और दूसरा निचले स्तर की सुरंग के आउटलेट पर भी प्रस्तावित है। लिंक नहर की कुल लंबाई 221 किलोमीटर होगी जिसमें 2 किलोमीटर सुरंग भी शामिल है।

परियोजना का मुख्य उद्देश्य

केन-बेतवा लिंक परियोजना के मुख्य लक्ष्य किसानों के खेतों की प्यास बुझाना है। इससे एमपी-यूपी के लगभग 10 लाख हेक्टेयर जमीन की सिंचाई होगी। दोनों राज्यों में तकरीबन 62 लाख लोगों को पीने का पानी दिया जा सकेगा। इस परियोजना से लगभग 100 से ज्यादा मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाएगा। वहीं, इससे सूखाग्रस्त बुंदेलखंड के विकास में कृषि और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।

किन क्षेत्रों को मिलेगा फायदा?

उत्तर प्रदेश के झांसी, बांदा, महोबा और ललितपुर जिलों के लोगों को फायदा पहुंचाएगी। वहीं, मध्य प्रदेश के पन्ना, छतरपुर और टीकमगढ़ जिलों को फायदा मिलेगा। यह सभी जिले बुंदेलखंड क्षेत्र में आते हैं, जो लंबे समय से सूखे की समस्या की मार झेल रहा है। इस सूखे क्षेत्र पानी की उपलब्ध होने से जल संकट का समाधान हो सकेगा। अगर इस परियोजना के लागत की बात की जाए तो इसपर कुल लागत लगभग 45,000 करोड़ रुपये आ सकती है। वहीं, इसके पूरा होने में लगभग 8 साल का समय लग सकता है।

गर्मी में चिपचिपी त्वचा से हैं परेशान, भूलकर न करें ये गलतियां

गर्मी के मौसम में धूल, धूप और पसीने की वजह से त्वचा संबंधी समस्याएं बढ़ जाती हैं। इस मौसम में ज्यादातर लोगों को पिंपल्स और रेडनेस की समस्या होती है। पसीने की वजह से त्वचा के पोर्स खुल बंद हो जाते हैं जिस वजह से डलनेस की समस्या बढ़ जाती है। खासतौर से जिन लोगों की ऑयली स्किन होती है उन्हें ज्यादा दिक्कत होती हैं।

 

इस मौसम में महिलाएं अपनी त्वचा का खास ख्याल रखते हुए छोटी-छोटी गलतियां कर देती हैं। हम आपको उन गलतियों के बारे में बता रहे हैं जिसे महिलाएं अक्सर नजर अंदाज कर देती हैं जिसकी वजह से त्वचा की चमक कम हो जाती है।

 

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गर्मी में भूलकर ने करें ये गलतियां 

बार-बार फेश वॉश करना

 

गर्मियों में पसीने की वजह से त्वचा चिपचिपी हो जाती है। चिपचिपी त्वचा से छुटकारा पाने के लिए लोग बार-बार चेहरा धोते हैं। आप इस तरह की गलती न करें। बार-बार फेस वॉश करने से त्वचा के नेचुरल ऑयल्स निकल जाते हैं और चेहरा बेजान नजर आने लगता है। इस वजह से त्वचा एक्स्ट्रा ऑयल का प्रोडक्शन करता है ताकि नमी बने रहे और इस वजह से पिंपल्स की समस्या बढ़ जाती है।

 

 

सनस्क्रीन नहीं लगना

 

कई महिलाओं को लगता है कि सनस्क्रीन लगाने से कोई खास फायदा नहीं होता है। आप इस तरह की गलती न करें। सनस्क्रीन आपको सूरज से निकलने वाली हानिकारक किरणों से बचाने का काम करता है। सनस्क्रीन नहीं लगाने से टेनिंग, सनबर्न की समस्या हो सकती है। इसके अलावा यह स्किन कैंसर के खतरे को भी कम करता है।

 

 

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हैवी मॉश्चराइजर

 

गर्मी में हैवी मॉश्चराइजर नहीं लगाना चाहिए। इससे त्वचा चिपचिपी और ऑयली बन सकती है। साथ ही पिंपल्स का खतरा भी बढ़ जाता है। इस मौसम में वॉटर बेस्ड या लाइटवेट मॉश्चराइजर का इस्तेमाल करना चाहिए।

 

एक्सफोलिएशन न करना

 

गर्मी में धूप और धूल की वजह से त्वचा को हफ्ते में दो बार एक्सफोलिएट जरूर करना चाहिए। एक्सफोलिएशन करने से डेड स्किन निकल जाती है और त्वचा में निखार नजर आता है। त्वचा को एक्सफोलिएट करने के लिए आप क्लींजर का इस्तेमाल कर सकते हैं।

वृंदावन में इस जगह नहीं पहुंचा कलियुग, टटिया की अनोखी परंपरा का सच जानिए


वृंदावन क्षेत्र के पास टटिया वह स्थान है, जहां आज भी द्वापर युग की तरह प्राकृतिक सुंदरता बरकरार है। माना जाता है कि यहां कलियुग का आना ही अभी तक नहीं हुआ है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक टटिया स्थान पर भगवान कृष्ण ने अपना देह त्यागा था। धार्मिक जानकारों का मानना है कि भगवान कृष्ण के शरीर छोड़ने के बाद ही कलियुग की शुरुआत हो गई थी लेकिन टटिया में आज भी द्वापर युग जीवित है। टटिया में श्री मोहिनी बिहारी मंदिर है, जहां भगवान कृष्ण और राधा जी की पूजा-अर्चना की जाती है। इस मंदिर के दर्शन करने देश-दुनिया से कई लोग आते हैं। इस जगह पर ही संत हरिदास जी का निवास था। संत हरिदास भगवान कृष्ण के सबसे बड़े भक्त माने जाते हैं। उन्होंने यहीं पर संगीत का ज्ञान प्राप्त किया था।

 

पहले टटिया स्थान चारों तरफ से बांस और डंडों से घिरा रहता था, जिसे स्थानीय लोग टटिया कहते थे। इसी वजह से इस स्थान को टटिया कहा जाता है। मान्यता है कि यहां रहने वाले लोग बिजली, फोन और आधुनिक मशीनों के बजाय सादगी और सुकून भरा जीवन जीते हैं। यहां श्री मोहिनी बिहारी मंदिर में हर दिन भव्यता के साथ पूजा-अर्चना होती है। आइए जान लेते हैं कि इस स्थान की क्या खासियत हैं।

 

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टटिया स्थान की खासियत

टटिया स्थान वृंदावन के शोर-शराबे से बिल्कुल विपरीत और खास है। यहां के श्री मोहिनी बिहारी मंदिर में राधा अष्टमी के दिन  कई श्रद्धालु आते हैं। यहां के लोग नल के पानी के बजाय कुएं के पानी का प्रयोग करते हैं। यहां की सबसे खास बात यह है कि यहां रहने वाले साधु-संत दान-दक्षिणा नहीं लेते हैं। इसके अलावा श्री मोहिनी बिहारी मंदिर में भी दान पेटी नहीं रखी गई है।

हरिदास संप्रदाय का उदय

माना जाता है कि हरिदास संप्रदाय के पहले आचार्य हरिदास जी यहीं रहते थे। हरिदास जी के सातवें शिष्य श्री ललित किशोर जी यहां भजन करते थे, जिनके शिष्य महंत श्री ललित मोहन दास ने 1823 में श्री मोहिनी बिहारी जी का मंदिर बनवाया था। मंदिर के आसपास बांस की टटिया लगाई गई थी, जिसकी वजह से आज भी यहां चारों तरफ बांस के पेड़ देखने को मिलते हैं।

 

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टटिया पवित्र स्थल कैसे पहुंचें?

यह स्थल वृंदावन के निधिवन से सिर्फ एक किलोमीटर दूर है। जो लोग इस जगह पर जाना चाहते हैं, वे अपने राज्य से ट्रेन या बस के जरिए मथुरा आ सकते हैं। फिर वहां से वृंदावन बस या कार से पहुंच जाए। वृंदावन पहुंचने के बाद एक घंटे में टटिया धाम जाया जा सकता है।

टटिया स्थान पर जाने के विशेष नियम

फोन स्विच ऑफ रखें – यहां आने वाले सभी लोगों को मोबाइल चलाने से बचना चाहिए क्योंकि यहां फोटो खींचना और फोन चलाना प्रतिबंधित है।


सिर ढक कर रखें – माना जाता है कि यहां आने वाली सभी महिलाएं हमेशा अपना सिर ढककर रखती हैं। इस वजह से यहां आने वाली महिलाओं को स्कार्फ या दुपट्टा साथ रखना चाहिए, ताकि वे अपना सिर ढक सकें।


साफ-सफाई का ध्यान रखें – अक्सर लोग किसी पर्यटन स्थल पर जाते हैं तो जाने-अनजाने में गंदगी फैलाते हैं, जैसे खाली बोतल रास्ते में फेंकना। इस प्रकार की गलती करने से बचें, क्योंकि यह स्थान बेहद साफ-सुथरा है।

 

डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। खबरगांव इसकी पुष्टि नहीं करता है।

   

‘हथियारों से लैस हो रहे जहाज’, ईरान से बात नहीं बनी तो क्या करेंगे ट्रंप?


अमेरिका और ईरान के बीच शनिवार को इस्लामाबाद में होने वाली अहम शांति वार्ता शुरू होने से कुछ घंटे पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ चेतावनी दे दी है। उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान में बातचीत असफल रही तो अमेरिकी युद्धपोतों को दुनिया के सबसे बेहतरीन हथियारों और गोला-बारूद से लोड किया जा रहा है।

 

न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए गए फोन इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, ‘हम रीसेट कर रहे हैं। हम जहाजों को सबसे अच्छे गोला-बारूद और हथियारों से भर रहे हैं, जो पहले से भी ज्यादा बेहतर हैं। पिछली बार हमने उन्हें पूरी तरह तोड़ दिया था, इस बार और बेहतर तैयारी है।’

 

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जेडी वेंस इस्लामाबाद रवाना

ट्रंप ने यह बयान तब दिया जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस्लामाबाद के लिए रवाना हो चुके थे। दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण बातचीत शनिवार को शुरू होनी है। ट्रंप से जब पूछा गया कि क्या ये वार्ता सफल होगी, तो उन्होंने जवाब दिया, ‘हम लगभग 24 घंटे में यह जान लेंगे। बहुत जल्दी पता चल जाएगा।’

 

उन्होंने साफ कहा कि अगर बातचीत फेल हो गई तो अमेरिका अपने जहाजों को ‘सबसे बेहतरीन हथियारों से लोड करेगा और उन्हें बहुत प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करेगा।’ ट्रंप ने आगे कहा, ‘हम जहाजों को लोड कर रहे हैं। हम उन्हें पहले से भी ज्यादा स्तर पर हथियारों से भर रहे हैं ताकि पूरी तरह से विनाश किया जा सके।’

परमाणु कार्यक्रम पर की बात

ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी बात की। उन्होंने दावा किया कि ईरान अपने परमाणु हथियार हटा रहा है। ट्रंप ने कहा, ‘हमारे सामने तो वे कह रहे हैं कि सारे परमाणु हथियार और सब कुछ खत्म हो गया है लेकिन प्रेस में जाकर वे कहते हैं कि हमें यूरेनियम संवर्धन (enrichment) करना है।’

 

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यह बैठक दुनिया भर में काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कई सालों से चला आ रहा है। अमेरिका का कहना है कि वह ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना चाहता है, जबकि ईरान अपना कार्यक्रम शांतिपूर्ण बताता है। अगर इस्लामाबाद में बातचीत नाकाम रही तो स्थिति और बिगड़ सकती है।

‘पैसे देते रहो और खुश रहो’, तलाक मांगने वाले शख्स को सुप्रीम कोर्ट ने दी नसीहत


एक कपल पिछले 16 साल से अलग रह रहा है। अभी तक दोनों का तलाक भी नहीं हुआ है। यही मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने तलाक की याचिका दायर करने वाले शख्स को कहा है कि वह अपनी पत्नी को हर महीने 15 हजार रुपये की तय रकम देता रहे और शांत रहे। रोचक बात है कि महिला का कहना है कि वह अपने पति के घर लौटने और उसके साथ रहने को तैयार है। महिला का कहना है कि वह अपने पति के सामने भी यही प्रस्ताव कई बार रख चुकी है लेकिन वह इसके लिए राजी नहीं हो रहा है।

 

याचिका दायर करने वाले शख्स के वकील ने कोर्ट को बताया कि यह कपल पिछले 16 साल से अलग-अलग रह रहा है। इतना ही नहीं, पिछले 16 साल से यह शख्स अपनी पत्नी को हर महीने 15 हजार रुपये का मेंटेनेंस भी दे रहा है। इस शख्स का तर्क है कि दोनों के बीच में गहरे मतभेद हैं और दोनों एक-दूसरे के लिए ठीक नहीं हैं इसलिए अब तलाक की अनुमति दे दी जानी चाहिए।

 

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कोर्ट में क्या हुआ?

 

वहीं, महिला इस तरह की बातों से इनकार कर रही है। उनका मानना है कि अभी भी इस रिश्ते को बचाने की गुंजाइश बाकी है। उनका कहना है कि वह अभी भी अपने पति के घर लौटने और उनके साथ रहने को तैयार हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सलाह भी दी कि उन्हें अपनी पत्नी को अपने साथ रखना चाहिए और समझौते की संभावना को इस तरह नहीं खत्म करना चाहिए।

 

रोचक बात है कि इस शख्स की उम्र अब 54 साल हो चुकी है। कोर्ट ने उनसे कहा, ’15 हजार रुपये आज के समय में कोई बहुत बड़ी रमक है। आप पैसे देते रहिए और खुश रहिए।’ इस पर याचिकाकर्ता ने कहा, ‘मेरे पास पैसे नहीं हैं। मेरी सैलरी 65 हजार रुपये है और अब मैं 54 साल का हो गया हूं। मुझे कोई पेंशन भी नहीं मिलने वाली है।’ हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने तलाक की अनुमति देने से इनकार कर दिया और कहा कि मौजूदा स्थिति ही बरकरार रखी जाए।

 

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कोर्ट ने यह भी पूछा कि अगर तलाक होगा तो एलिमनी के रूप में कितने पैसे दिए जाने चाहिए? इस पर याचिकाकर्ता शख्स ने कहा कि उनके पास इतने पैसे नहीं हैं कि वह मौजदा रकम को बढ़ा सकें। 

खान-पान ही नहीं AC से भी बढ़ सकता है किडनी स्टोन का खतरा, डॉक्टर से जानें


खराब लाइफस्टाइल का असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है। खासतौर से युवाओं में किडनी स्टोन (पथरी) के मामले तेजी से बढ़े हैं। नेशनल किडनी फाउंडेशन के अनुसार हर 10 में से 1 व्यक्ति किडनी स्टोन की बीमारी से पीड़ित है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि किडनी स्टोन किन कारणों से होता और इससे बचने का क्या तरीका है? इस बारे में हमने मोहाली के शैल्बी अस्पताल की कंसल्टेंट यूरोलॉजिस्ट और ट्रांसप्लांट फिजिशियन डॉक्टर सुखवीर कौर गिल  से बात की।

 

डॉक्टर सुखवीर कौर गिल ने बताया, ‘किडनी स्टोन का मुख्य कारण सीडेंटरी लाइफस्टाइल, ओबेसिटी और डिहाइड्रेशन है।’ इस गंभीर बीमारी से बचने के लिए शरीर को हाइड्रेट रखना बहुत जरूरी है।

 

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पथरी होने के मुख्य कारण क्या हैं?

  • डिहाइड्रेशन की समस्या- पानी की कमी की वजह से पथरी होने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। अगर आप पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पी रहे हैं तो धीरे-धीरे यह समस्या गंभीर हो सकती है। 
  • सेडेंटरी लाइफस्टाइल – पथरी होने का दूसरा मुख्य कारण सेडेंटरी लाइफस्टाइल है। यह एक जीवनशैली है जिसमें हम घंटों एक ही जगह पर बैठकर काम कर रहे हैं। वहीं पर बैठकर खा रहे हैं और फिजिकल एक्टिविटी ना के बराबर कर रहे हैं।

क्या एसी में बैठने से पथरी होती है?

 

एसी से सीधे तौर पर किडनी स्टोन होने का खतरा नहीं होता है लेकिन जैसे हम ऑफिस या वर्क फ्रॉम होम में एसी में बैठकर घंटों काम कर रहे हैं। उसके साथ नमक वाले चिप्स खा रहे हैं, कुकीज खा रहे हैं और पानी नहीं पी रहे हैं। ये चीजें शरीर में डिहाइड्रेशन की समस्या को बढ़ा देती है। इस वजह से पथरी होने का खतरा बढ़ सकता है

पथरी के लक्षण 

  • पीठ, पेट के निचले हिस्से, या कमर में अचानक से तेज दर्द होना
  • बार-बार पेशाब आना
  • पेशाब आते समय जलन महसूस होना
  • पेशाब में खून आना

क्या होती है पथरी?

 

पानी नहीं पीने की वजह से यूरिन गाढ़ा हो जाता है। गाढ़ा होने के बाद यूरिन में जो मिनरल्स होते हैं वे क्रिस्टल बनकर किडनी में जमा होने लगते हैं। किडनी स्टोन के 80% से ज्यादा मामले में कैल्शियम ऑक्सालेट के होते है। दूसरे नंबर पर कैल्शियम फॉस्फेट रहता है। इसके अलावा यूरिक एसिड से भी स्टोन बनता है।

 

स्ट्रुवाइट स्टोन (Struvite Stones) किडनी में बनने वाली एक विशेष प्रकार की पथरी है जो मुख्य रूप से लंबे समय तक रहने वाले मूत्र मार्ग संक्रमण (UTI) के कारण बनती है। ये मैग्नीशियम, अमोनियम और फॉस्फेट से बनी होती हैं। 

 

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बचाव

  • मरीज को सलाह दी जाती है कि अगर आपके यूरिन से स्टोन पास हो रहा है तो उसका टेस्ट करवाया ताकि पता चल जाएगा कौन सा स्टोन है? आज कल इस तरह के टेस्ट उपलब्ध है जिससे स्टोन के टाइप के बारे में पता चल सकता है। अगर हमें स्टोन पता लग जाएगा तो हम उन्हें उसके हिसाब से दवाएं देंगे।
  • जब स्टोन के बारे में नहीं पता है तो उन्हें कैल्शियम से जुड़ी सारी गाइडलाइन के बारे में बताते हैं।
  •  पथरी के मरीज को रोजाना 2 से 3 लीटर पानी पीना चाहिए।
  • एक्स्ट्रा सॉल्ट न खाएं, जैसे कि आचार, फलों पर नमक न लगाकर न खाएं आदि।
  • कुछ चीजों में ऑक्सालेट की मात्रा ज्यादा होती है। उन चीजों को खाने से परहेज करने की सलाह दी जाती है जैसे की पालक, चॉकलेट, नट्स आदि।
  • पथरी के मरीज कैल्शियम को बिल्कुल ही बंद कर देते हैं। ऐसे में हमारी गाइडलाइन होती है कि बाहर से कैल्शियम सप्लीमेंट न लें। नेचुरल कैल्शियम तो शरीर के लिए जरूरी है। उसे लेना बंद नहीं करना है।
  • विटामिन सी वाली चीजों को नियमित मात्रा में लें।

उत्तराखंड के चारधाम तीर्थस्थल में आदि शंकराचार्य का योगदान क्या है? जानिए


2026 के अप्रैल महीने में उत्तराखंड के 4 पवित्र तीर्थस्थलों में चारधाम की यात्रा शुरू होने वाली है। यह यात्रा 19 अप्रैल से शुरू होगी। इस दौरान लाखों की तादाद में लोग मंदिर के दर्शन करने आएंगे। उत्तराखंड के चारधाम यात्रा को बढ़ावा देने में आदि शंकराचार्य ने अहम योगदान दिया है। आदि शंकराचार्य ने हिंदू धर्म के पुनरुत्थान में बेहद अहम योगदान दिया है। उन्होंने पूरे देश में पदयात्रा कर भगवान की उपासना की थी। इसी प्रकार लगभग 8वीं शताब्दी में वह केरल से पदयात्रा करके उत्तराखंड पहुंचे थे, जहां आदि शंकराचार्य जी ने गंगोत्री से लेकर केदारनाथ तक की यात्रा की थी और पूरी दुनिया को चारधाम यात्रा करने के लिए प्रेरित किया था।

 

उत्तराखंड के चमोली जिला में आदि शंकराचार्य ने अपना पहला मठ जोशीमठ की स्थापना की थी। धार्मिक मान्यता के अनुसार आदि शंकराचार्य ने ही गंगोत्री, केदारनाथ, यमुनोत्री धाम को पुनः स्थापित कर उत्तराखंड की छोटा चारधाम यात्रा करने के लिए लोगों को प्रेरित किया था। अब सवाल उठता है कि आदि शंकराचार्य का चारधाम यात्रा में क्या योगदान है।

 

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उत्तराखंड में चारधाम की स्थापना

माना जाता है कि पूरे देश में आदि शंकराचार्य ने ही चारधाम यात्रा की अवधारणा लाई थी। इसके साथ उन्होंने ही उत्तराखंड के छोटे चारधाम को एक साथ पिरोया था। उत्तराखंड का छोटा चारधाम यानी यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के दर्शन करने के लिए लोगों को प्रेरित किया। आदि शंकराचार्य ने केवल ज्योतिर्मठ की स्थापना ही नहीं की, बल्कि बद्रीनाथ मंदिर की स्थापना के साथ ही केदारनाथ मंदिर में दुबारा से पूजा-पद्धति की शुरुआत भी की थी।

 

ज्योतिर्मठ की स्थापना

आदि शंकराचार्य ने उत्तराखंड यात्रा के दौरान जोशीमठ की स्थापना की थी, जो कि उनकी यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र था। यहीं उन्होंने अमर कल्पवृक्ष के नीचे तपस्या की थी। इस वजह से वहां ‘ज्योतिर्मठ’ की स्थापना की गई। यह बद्रीनाथ धाम का शीतकालीन निवास और ज्ञान का केंद्र बना।

 

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बद्रीनाथ मंदिर की पुनः स्थापना

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक आदि शंकराचार्य ने अलकनंदा नदी से भगवान बद्रीनारायण की मूर्ति को निकाला था। उसके बाद भगवान की मूर्ति को मंदिर में पुनः स्थापित किया था। इसके बाद मंदिर में रीति-रिवाजों के साथ पुजारियों द्वारा पूजा करवाई गई। बद्रीनाथ मंदिर का खास महत्व है। यह भारत के चार धामों में से एक है।

 

केदारनाथ में अंतिम समय

माना जाता है कि सिर्फ 32 वर्ष की उम्र में ही शंकराचार्य ने अंतिम समाधि ली थी। आदि शंकराचार्य केदारनाथ मंदिर के पास ही अपने जीवन के अंतिम क्षणों में रहे थे। इसी वजह से केदारनाथ मंदिर के ठीक पीछे आदि शंकराचार्य की समाधि है, जहां अक्सर भक्तजन दर्शन करने आते हैं।

 

डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि नहीं की जाती है।

 

पूर्व PM नफ्ताली बेनेट की हत्या की साजिश नाकाम, ईरान ने इजरायली को दी थी सुपारी


इजरायल की घरेलू खुफिया एजेंसी शिन बेट ने पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट की हत्या की साजिश रचने के आरोप में एक युवक को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार 22 वर्षीय युवक की पहचान अमी गैदारोव के रूप में हुई है। वह हाइफा का रहने वाला है। इजरायली पुलिस और शिन बेट के मुताबिक युवक ईरान के संपर्क में था और विस्फोटक तैयार कर रहा था, ताकि पूर्व पीएम नेफ्ताली बेनेट को की हत्या को अंजाम दिया जा सके।

 

इजरायली खुफिया एजेंसी ने बताया कि आरोपी युवक 2025 के अगस्त महीने से ही ईरानी हैंडलर के संपर्क में था। भारी धनराशि के बदले वह कई कार्यों को अंजाम कर चुका था। अबकी बार उसे विस्फोटक सामग्री तैयार करने का निर्देश मिला था।

 

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उसने विशेष संचार उपकरण खरीदे, ताकि अपने हैंडलर और सहयोगियों से सुरक्षित तरीके से बाचती की जा सके। उसने हाइफा में ही एक अपार्टमेंट भी किराये पर लिया। उसने अपनी हर गतिविधि की फोटो और वीडियो बनाए। इन्हें आगे ईरानी हैंडलरों तक भेजा। इससे ईरानी हैंडलर को इससे काम पूरा होने का मैसेज गया। आरोपी ने ईरानी हैंडलर के कहने पर विस्फोटक सामग्री जुटाई और कुछ अन्य लोगों को भी भर्ती किया। 

 

इजरायली पुलिस ने दो अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया है। उन्होंने कच्चा माल हासिल करने, विस्फोटक को छिपाने और टेस्टिंग करने में मदद की। आरोपियों ने इजरायल के अंदर कई स्थानों पर अलग-अलग जगह विस्फोटक का परीक्षण भी किया था। 

 

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ईरान पर इजरायली हमले के वक्त गैदारोव को खुफिया जानकारी जुटाने का काम मिला। उसे हाइफा बंदरगाह और मिसाइल से तबाह होने वाली जगह की तस्वीरें लेने को कहा गया था। हालांकि अमी गैदारोव कोई घटना को अंजाम देता, उससे पहले ही मार्च महीने में उसे लाहाव 433 राष्ट्रीय अपराध इकाई और शिन बेट के संयुक्त अभियान में गिरफ्तार कर लिया गया।

किसान सावधान! बारिश होगी या नहीं? मौसम विभाग के अनुमान से जान लीजिए

देशभर में मौसम का मिजाज बदला है। इस साल अप्रैल महीने में भी तापमान सामान्य से काफी कम है। उत्तर भारत से दक्षिण भारत तक मौसम खराब रहने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, देशभर में अगले कुछ दिनों तक मौसम की मार जारी रह सकती है। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में बारिश और आंधी-तूफान की संभावना है। मौसम विभाग ने बताया है कि एक पश्चिमी विक्षोभ अभी भी सक्रिय और इसका असर अगले कुछ दिनों तक रह सकता है। इससे उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान के साथ-साथ 12 राज्यों में आंधी-बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। लगातार हो रही बारिश के कारण किसान परेशान हैं 

 

दिल्ली में अगले कुछ दिनों तक मौसम साफ रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने 9 अप्रैल से 11 अप्रैल तक मौसम साफ रहने का अनुमान है। कल दिल्ली में भले ही बारिश हुई हो लेकिन अगले कुछ दिनों तक अब मौसम साफ रहने वाला है। बीते करीब एक महीने से मौसम में बदलाव के कारण वायु प्रदूषण से भी लोगों को राहत मिली है। हालांकि, आने वाले 3 से 4 दिनों तक तेज हवाओं का दौर जारी रहने की संभावना है। 

 

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आज का मौसम

 

उत्तर प्रदेश में कैसा रहेगा मौसम?

देश के सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग ने यूपी के बांदा, फतेहपुर, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, हरदोई फरेखाबाद, कन्नौज, कानपुर देहात, कानपुर नगर, उन्नाव, लखनऊ, बाराबंकी, रायबरेली, अमेठी, सहारनपुर, शामती मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ, गाजियाबाद, हापुड़, गौतम बुद्ध नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा, हाथरस, कासगंज, एटा, आगरा, फिरोजाबाद मैनपुरी, इटावा, औरेया और बिजनौर में बारिश होने की संभावना जताई है। इसके साथ ही आसमानी बिजली गिरने की भी संभावना है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश में कुछ जिलों में ओले गिरने का अलर्ट भी जारी किया गया है।  गौतम बुद्ध नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा, कासगंज, एटा, आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा के आसपास के इलाकों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं।

बिहार में कैसा रहेगा मौसम?

बिहार में भी मौसम खराब रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने आंधी बारिश और ठनका गिरने का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, बिहार के दरभंगा, मधुबनी, अररिया, समस्तीपुर, वैशाली, सिवान, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर और किशनगंज समेत आसपास के जिलों में आज हल्की बारिश हो सकती है। कल यानी 10 अप्रैल से मौसम शुष्क रहने की संभावना है और किसी भी हिस्से में बारिश होने की संभावना नहीं है। 

 

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राजस्थान-मध्यप्रदेश का मौसम

राजस्थान और मध्य प्रदेश की बात करें तो इन दोनों राज्यों के मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा। पश्चिमी विक्षोभ का असर राजस्थान में भी देखने को मिलेगा और राज्य के कुछ हिस्सों में बारिश हो सकती है। हालांकि, आज रात से मौसम में कुछ सुधार देखने को मिल सकता है। कल से तापमान में बढ़ोतरी शुरू हो जाएगी और गर्मी का दौर शुरू हो सकता है। हालांकि, आज कुछ जिलों में हल्की बारिश और ओले गिरने की संभावना है। राज्य के 10 से ज्यादा शहरों में अभी तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से नीचे है और अगले 10 दिनों तक मौसम ऐसा ही रहने की संभावना है। 

 

मध्य प्रदेश के 32 जिलों में आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। भोपाल, विदिशा, रायसेन, सिहोर, अशोकनगर, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, श्योपुरकला, सिंगरौली, सीधी, रीवा, मऊगंज, सतना, अनूपपुर, शहडोल, उमरिया, डिंडोरी, कटनी, जबलपुर, सिवनी, मंडला, निवाड़ी, मैहर, बालाघाट, पन्ना, दमोह, सागर, छतरपुर और टीकमगढ़ में बारिश होने की संभावना है। इस राज्य में भी राजस्थान की तरह ही कल से मौसम शुष्क रहने की संभावना है। 

पहाड़ी राज्यों में कैसा रहेगा मौसम?

पश्चिमी विक्षोभ का असर देश के पहाड़ी राज्यों में भी देखने को मिल रहा है, जहां मौसम की गतिविधायां जारी हैं। उत्तराखंड के कुछ पर्वतीय हिस्सों में बर्फबारी जारी है। मौसम विभाग के अनुसार, 9 अप्रैल को राज्य में हल्की से मध्यम स्तर की बारिश और बर्फबारी हो सकती है। इस दौरान 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। कल भी मौसम ऐसा ही रहने की संभावना है जिससे तापमान में और ज्यादा गिरावट दर्ज की जाएगी। 

 

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हिमाचल की बात करें तो हिमाचल के कई हिस्सों में आज बारिश होने की संभावना है। इसके साथ ही पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी देखने को मिल सकती है। मौसम विभाग के अनुसार, राज्य के कई जिलों में बारिश होने से तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है। इसको देखते हुए मौसम विभाग ने शिमला, कांगड़ा, कसौल, कुफरी समेत कई जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है।

अन्य राज्यों का हाल

मौसम विभाग ने उत्तर-पश्चिम और पूर्वी भारत के करीब 13 राज्यों में आंधी-तूफान, गरज-चमक और अच्छी बारिश होने की संभावना जताई गई है। दक्षिण भारत में केरल, गोवा और तमिलाडु में मौसम खराब रहने की संभावना है। इसके साथ ही ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल में भी मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है। आज असम और मेघालय में भारी बारिश और ओले गिरने की संभावना है, जिसको देखते हुए मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी कर दिया है। इसके अलावा पूर्वोत्तर के ज्यादातर राज्यों में मौसम की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं और यह 11 अप्रैल तक जारी रह सकती हैं। 

फलों और सब्जियों के छिलकों में छिपे हैं ब्यूटी सीक्रेट, समझिए कैसे काम आएंगे


 ग्लोइंग स्किन पाने के लिए लोग महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स का उपयोग करते हैं लेकिन फल और सब्जियों के छिलकों की सहायता से हम ग्लोइंग स्किन पा सकते हैं। जिन्हें हम अक्सर बेकार समझकर कूड़ेदान में फेंक देते हैं, वे वास्तव में स्किन के लिए किसी खजाने से कम नहीं हैं। आलू, केले, पपीते, संतरे और खीरे के छिलकों में विटामिन सी, ए, एंटीऑक्सीडेंट, फाइबर और कई जरूरी मिनरल्स पाए जाते हैं, जो स्किन को अंदर से पोषण देते हैं। ये न सिर्फ डार्क सर्कल, पिग्मेंटेशन और टैनिंग को कम करने में मदद करते हैं बल्कि स्किन को नेचुरल ग्लो बनाए रखने में भी काफी असरदार साबित होते हैं। खास बात यह है कि ये उपाय पूरी तरह से नेचुरल होते हैं, जिससे साइड इफेक्ट्स का खतरा भी बहुत कम होता है।

अगर आप रोजमर्रा की जिंदगी में इन छिलकों का सही तरीके से इस्तेमाल करना सीख जाएं तो बिना ज्यादा खर्च किए आप अपनी स्किन की देखभाल कर सकते हैं। जो चीजें अब तक आपके लिए सिर्फ कचरा थीं, वही अब आपकी स्किन के लिए सबसे सस्ता, आसान और असरदार ब्यूटी सीक्रेट बन सकती हैं। अब सवाल उठता है कि इन छिलकों को अपने चेहरे और स्किन पर कैसे लगाएं, जिससे हमारी स्किन ग्लो करे।

 

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1. आलू के छिलके

आलू के छिलके हमारी स्किन का ग्लो बढ़ा सकते हैं क्योंकि इनमें विटामिन्स, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जिससे हमारे चेहरे पर न सिर्फ ग्लो आता है बल्कि दाग-धब्बे भी हल्के होने लगते हैं। आलू के छिलकों को चेहरे पर कई तरह से लगाया जा सकता है।


कैसे करें यूज?


आलू के छिलकों का प्रयोग हम अपनी स्किन की समस्या के मुताबिक कर सकते हैं। जैसे, अगर हमारे चेहरे पर दाग-धब्बे हैं, तो आलू के छिलके को चेहरे पर 5 से 10 मिनट रगड़ लें, उसके बाद साफ पानी से चेहरा धो लें। जिन लोगों की आंखों के पास डार्क सर्कल हैं, वे आलू के छिलके का रस निकाल लें, उसमें रुई डुबोकर आंखों के पास रख दें।

 

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2. केले के छिलके

केले के छिलकों में पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो चेहरे के पिंपल्स कम करने के लिए फायदेमंद होते हैं। केले के छिलकों का उपयोग न केवल चेहरे बल्कि हाथ-पैर पर रगड़ने से भी स्किन में नमी बनाए रखता है। इसके उपयोग से स्किन को पोषण मिलता है, जिससे ज्यादा उम्र के लोगों की स्किन भी जवान दिख सकती है।


कैसे करें यूज?


केले के छिलकों का स्किन केयर के लिए प्रयोग करना सबसे आसान और सरल है। सबसे पहले केले के छिलकों को साफ पानी से धो लें, उसके बाद उन्हें चेहरे पर हल्के हाथों से रगड़ें। इस प्रक्रिया को हफ्ते में दो बार इस्तेमाल कर सकते हैं।

 

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3. संतरे के छिलके

संतरे के छिलकों में विटामिन सी होता है, जो हमारे चेहरे की चमक बढ़ाने में मदद करता है। इसके अलावा यह चेहरे को फ्रेश बनाए रखने में भी सहायक होता है। इसका उपयोग हम फेस पैक के तौर पर कर सकते हैं।


कैसे करें यूज?


संतरे के छिलकों को सबसे पहले धूप में सुखा लें, उसके बाद उन्हें पीसकर एक जार में रख लें। फिर हफ्ते में दो दिन उस पाउडर को दूध या दही में मिलाकर पेस्ट बना लें और चेहरे पर लगाएं। पेस्ट लगाने के 15 मिनट बाद चेहरा धो लें।


4. पपीते के छिलके

पपीते के छिलकों में विटामिन ए और सी होते हैं, जो हमारे चेहरे की डेड स्किन को हटाकर नई और चमकदार स्किन लाने में मदद करते हैं। इनके उपयोग से चेहरा पहले से ज्यादा जवान और मुलायम बन जाता है, जिससे व्यक्ति की सुंदरता और बढ़ जाती है।

 

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कैसे करें यूज?


पपीते के छिलकों को सबसे पहले सुखा लें, उसके बाद उन्हें मिक्सर की सहायता से पीस लें और पाउडर को एक डिब्बे में रख लें। फिर इस पाउडर को एलोवेरा जेल में मिलाकर लगा सकते हैं। 2 चम्मच छिलके के पाउडर में 1 चम्मच एलोवेरा जेल मिलाकर पेस्ट बना लें।


5. खीरे के छिलके

खीरे के छिलके हमारे चेहरे के ब्लैकहेड्स और पोर्स की गंदगी दूर करने में मदद करते हैं। इसके अलावा इनके उपयोग से चेहरे के दाग-धब्बे भी कम हो जाते हैं। साथ ही खीरे के छिलकों को चेहरे पर लगाने से स्किन फ्रेश महसूस करती है।


कैसे करें यूज?


खीरे के छिलकों को साफ पानी से धो लें, उसके बाद उन्हें पीस लें। फिर इस पेस्ट को चेहरे पर 10 से 15 मिनट के लिए लगाएं और बाद में धो लें। इस तरह जिन छिलकों को आप अब तक बेकार समझते थे, वही आपकी स्किन के लिए एक असरदार और नेचुरल ब्यूटी सीक्रेट बन सकते हैं।