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नगर बाजार में पशु की मौत,सड़क पर पड़ा रहा शव:राहगीरों और वाहन चालकों को हुई परेशानी

बस्ती के नगर बाजार के मेन रोड पर नीति रात एक अज्ञात वाहन की टक्कर से एक पशु की मौत हो गई। यह हादसा रात करीब 2 बजे हुआ था। इसके बावजूद सुबह करीब 9:30 बजे तक मृत पशु का शव सड़क से नहीं हटाया गया। इससे राहगीरों और वाहन चालकों को काफी परेशानी हुई। सुबह सड़क पर शव पड़े होने से ट्रैफिक पर असर पड़ा। आसपास के दुकानदारों और स्थानीय लोगों ने बताया कि मुख्य मार्ग पर शव होने के कारण वाहन चालकों को बचकर निकलना पड़ रहा था। इससे किसी दुर्घटना की आशंका भी बनी हुई थी। स्थानीय लोगों ने एनएचएआई की पेट्रोलिंग टीम और नगर पंचायत के काम करने के तरीके पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि मुख्य मार्ग पर ऐसी घटना के बाद भी कई घंटे तक शव का न हटना जिम्मेदार विभागों पर सवाल खड़े करता है। दुकानदारों और राहगीरों ने एनएचएआई पेट्रोलिंग टीम और नगर पंचायत प्रशासन से मांग की है कि सड़क से मृत पशुओं को हटाने के लिए तुरंत व्यवस्था की जाए। इससे ट्रैफिक सही रहेगा और किसी भी संभावित दुर्घटना को टाला जा सकेगा।

महराजगंज में आजाद समाज पार्टी ने राष्ट्रपति को सौंपा ज्ञापन:गोंडा-अयोध्या हत्या, चंद्रशेखर पर हमले समेत 4 मुद्दों पर की कार्रवाई की मांग


महाराजगंज जिला मुख्यालय पर बुधवार को भीम आर्मी/आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति के नाम चार सूत्रीय ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा। यह ज्ञापन जिलाध्यक्ष अंकित सिंह के नेतृत्व में दिया गया। इसमें गोंडा और अयोध्या में हुई हत्याओं, बाराबंकी में चंद्रशेखर आजाद के काफिले पर हुए कथित हमले, पंचायत सहायकों की मांगों और 68500 शिक्षक भर्ती में आरक्षण से जुड़े मामलों को उठाया गया। ज्ञापन में बताया गया कि 13 सितंबर को बाराबंकी के रामनगर थाना क्षेत्र के बुढ़वल में चंद्रशेखर आजाद के काफिले को रोका गया था। इसके बाद पथराव और हिंसक हमले की शिकायत मिली थी। पार्टी ने मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच, सीसीटीवी व इलेक्ट्रॉनिक सबूत सुरक्षित रखने और दोषियों पर एक्शन की मांग की। साथ ही चंद्रशेखर आजाद की सुरक्षा का खतरे का आकलन कराने की भी मांग रखी गई। पार्टी ने लखनऊ के ईको गार्डन में धरना दे रहे पंचायत सहायकों की समस्याएं हल करने की मांग की। इसके अलावा, 68500 शिक्षक भर्ती में आरक्षण संबंधी मामले में पिछड़ा वर्ग आयोग के आदेश का पालन कराने पर भी जोर दिया गया। सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद और मुरादाबाद की मुस्तफा मस्जिद सहित धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में निष्पक्ष प्रक्रिया अपनाने की मांग भी ज्ञापन में शामिल थी।

मोबाइल न देने पर भाई ने की पिटाई:इकौना में घायल अस्पताल में भर्ती कराया गया

श्रावस्ती के इकौना थाना क्षेत्र के केवटन पुरवा गांव में मोबाइल फोन मांगने को लेकर दो भाइयों में झगड़ा हो गया। मोबाइल देने से मना करने पर एक भाई ने दूसरे की पिटाई कर दी, जिससे वह घायल हो गया। जानकारी के मुताबिक, केवटन पुरवा निवासी घनश्याम से उनके भाई ने फोन करने के लिए मोबाइल मांगा था। घनश्याम ने मोबाइल देने से इनकार कर दिया। इसी बात को लेकर दोनों भाइयों के बीच कहासुनी हुई। आरोप है कि कहासुनी के बाद घनश्याम के भाई ने उनकी पिटाई शुरू कर दी। इस मारपीट में घनश्याम को चोटें आईं और वह घायल हो गए। घटना के बाद आसपास के लोगों ने परिजनों को सूचना दी। परिजन मौके पर पहुंचे और घायल घनश्याम को एंबुलेंस की मदद से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इकौना ले गए। वहां डॉक्टरों ने उनका शुरुआती इलाज किया। इलाज के बाद डॉक्टरों ने घनश्याम को इकौना थाने भेज दिया।

सिद्धार्थनगर पुलिस ने छात्रों को साइबर फ्रॉड से बचने के:सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत जानकारी शेयर न करने और हेल्पलाइन नंबर की जानकारी दी

सिद्धार्थनगर जिले के लोटन थाने में 16 सितंबर 2026 को साइबर जागरूकता अभियान चलाया गया। यह अभियान कल्पनाथ इंटर कॉलेज में हुआ, जहां छात्रों को साइबर अपराधों के बारे में जानकारी दी गई। पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन के आदेश पर, अपर पुलिस अधीक्षक प्रशांत कुमार प्रसाद और क्षेत्राधिकारी सदर विश्वजीत सौरयान के पर्यवेक्षण में यह कार्यक्रम हुआ। थानाध्यक्ष प्रदीप कुमार सिंह के नेतृत्व में साइबर सेल टीम ने छात्रों को जागरूक किया। अभियान के दौरान छात्रों को पैसों की धोखाधड़ी, साइबर फ्रॉड और सोशल मीडिया पर अवैध कमेंट या आपत्तिजनक वीडियो के दुरुपयोग जैसे अपराधों से बचने के तरीके बताए गए। उन्हें यह भी समझाया गया कि व्यक्तिगत जानकारी का गलत इस्तेमाल कैसे हो सकता है। साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए सरकार द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबर 1930 और एनसीआरपी पोर्टल पर रिपोर्ट करने के निर्देश भी दिए गए। छात्रों को कई महत्वपूर्ण बातों के बारे में बताया गया। उन्हें सलाह दी गई कि किसी भी संदिग्ध ईमेल, कॉल या मैसेज में दिए गए लिंक पर क्लिक न करें और न ही अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा करें। यदि जरूरी हो, तो सीधे संगठन की आधिकारिक वेबसाइट से संपर्क करें। इसके अलावा, अत्यधिक आकर्षक ऑफर वाले विज्ञापनों या सोशल मीडिया पोस्ट से सावधान रहने को कहा गया। छात्रों को अपने सभी डिवाइसों को लॉक, पिन या बायोमेट्रिक सुरक्षा से सुरक्षित रखने की भी सलाह दी गई। यह भी बताया गया कि सभी ऑनलाइन खातों के लिए एक ही पासवर्ड का उपयोग करने से बचें। व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी कभी भी किसी अज्ञात फोन कॉल या ईमेल पर साझा न करें। अपने सभी उपकरणों पर एंटी-वायरस सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करें और उसे हमेशा अपडेट रखें। ऑनलाइन खरीदारी के लिए केवल सुरक्षित वेबसाइट्स का ही उपयोग करें।

UP: भगवान परशुराम की प्रतिमा खंडित होने से ब्राह्मण समाज में आक्रोश, मौके पर पहुंची पुलिस

हाथरस: सदर कोतवाली क्षेत्र के बुर्ज वाला कुआं स्थित ब्राह्मण समाज के आराध्य भगवान परशुराम जी की आदमकद प्रतिमा को असामाजिक तत्वों द्वारा खंडित किए जाने का मामला सामने आया है। प्रतिमा खंडित होने की जानकारी मिलते ही क्षेत्र में हड़कंप मच गया और बड़ी संख्या में ब्राह्मण समाज के लोग मौके पर एकत्रित हो गए।

प्रतिमा खंडित होने की सूचना मिलते ही पुलिस के आला अधिकारी और इलाका पुलिस तत्काल मौके पर पहुंच गई। पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और मौके पर मौजूद आक्रोशित लोगों से बातचीत कर स्थिति की जानकारी ली। पुलिस द्वारा लोगों को जल्द से जल्द मामले का खुलासा करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिया जा रहा है।

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घटना को लेकर ब्राह्मण समाज के लोगों में काफी आक्रोश दिखाई दिया। समाज के लोगों का कहना है कि भगवान परशुराम जी की प्रतिमा को खंडित किया जाना बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने पुलिस और प्रशासन से मांग की है कि घटना को अंजाम देने वाले आरोपियों की जल्द पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए और उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

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वहीं, पुलिस अधिकारियों द्वारा घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने समेत अन्य पहलुओं पर जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच कर घटना के पीछे जिम्मेदार लोगों का पता लगाया जाएगा।

फिलहाल पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की जा रही है। ब्राह्मण समाज के लोगों ने स्पष्ट किया है कि जब तक घटना का खुलासा कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे मामले पर नजर बनाए रखेंगे।

बाइट- योगेंद्र शर्मा, ब्राह्मण महासभा अध्यक्ष

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MP के मेधावी छात्रों के लिए जरूरी खबर, ई-स्कूटी योजना की रकम पर सरकार ने बढ़ाई सख्ती

विदिशा। मध्य प्रदेश शासन द्वारा सरकारी स्कूलों के मेधावी विद्यार्थियों के लिए संचालित "मुख्यमंत्री ई-स्कूटी, मोटराइज्ड वाहन योजना" को लेकर नए और कड़े दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। शैक्षणिक सत्र 2025-26 में 12वीं की बोर्ड परीक्षा में 70 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले स्कूल के टॉपर्स विद्यार्थियों को इस योजना का लाभ दिया जाएगा। राज्य स्तर पर इस योजना के तहत 19 सितंबर को राजधानी भोपाल के सुभाष उत्कृष्ट उमावि परिसर में आयोजित मुख्य समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 7,500 से अधिक विद्यार्थियों के खातों में ऑनलाइन राशि ट्रांसफर की जाएगी।

वाहन खरीदना अनिवार्य, लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई

योजना के प्रावधानों के मुताबिक, विद्यार्थियों या उनके अभिभावकों के बैंक खातों में भेजी जाने वाली राशि से केवल ई-स्कूटी या मोटराइज्ड वाहन ही खरीदना अनिवार्य होगा। यदि कोई छात्र या पालक राशि मिलने के बाद वाहन नहीं खरीदता है, तो शासन स्तर पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। विदिशा के जिला शिक्षा अधिकारी एनके अहिरवार के अनुसार, वाहन न खरीदने की स्थिति में विद्यार्थी व पालकों से राशि की पूरी वसूली की जाएगी और संबंधित थाने में एफआईआर तक दर्ज कराई जा सकती है। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में एक विशेष समिति का गठन किया गया है।

निर्धारित की गई है वाहन की अधिकतम राशि

पात्र विद्यार्थियों को उनकी पसंद का इलेक्ट्रिक वाहन चुनने की स्वतंत्रता दी गई है। सरकार द्वारा ई-स्कूटी के लिए अधिकतम 1.20 लाख रुपये और दिव्यांग या अन्य पात्र विद्यार्थियों के लिए मोटराइज्ड वाहन के वास्ते अधिकतम 90 हजार रुपये की राशि तय की गई है। यह राशि सीधे विद्यार्थी के बैंक खाते में भेजी जाएगी, और यदि छात्र का खाता नहीं है तो उसके माता-पिता या अभिभावक के खाते में जमा कराई जाएगी। इसके अलावा, वाहन के रजिस्ट्रेशन, बीमा (इंश्योरेंस) और एसेसरीज का खर्च भी इसी निर्धारित बजट से संबंधित विक्रेता को चुकाया जाएगा।

तीन साल तक वाहन बेचने पर रहेगा प्रतिबंध

योजना के तहत खरीदे जाने वाले वाहनों के दुरुपयोग को रोकने के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं। नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, विद्यार्थी इस प्रकार प्राप्त वाहन को तीन साल की अवधि तक न तो बेच सकेगा और न ही किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर ट्रांसफर कर पाएगा। इस नियम का पालन सुनिश्चित करने के लिए वाहन के रजिस्ट्रेशन के वक्त ही तीन साल का हाइपोथिकेशन (बंधक) दर्ज किया जाएगा, जिससे तय समय सीमा से पहले वाहन का मालिकाना हक बदला न जा सके।

बस्ती के पकरी जई गांव में टूटी नाली:रिपेयरिंग न होने से गंदगी और बीमारियां बढ़ रही, इंटरलॉकिंग सड़कें भी खराब

बस्ती जिले के साउघाट ब्लॉक की ग्राम पंचायत पकरी जई गांव में नाली की खराब हालत से ग्रामीण परेशान हैं। नाली की मरम्मत न होने के कारण यहां गंदगी और बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। गांव की नालियां और इंटरलॉकिंग सड़कें टूटी हुई हैं। नालियों में गंदगी जमा होने से कई तरह की बीमारियां फैलने की आशंका है। वहीं, खराब सड़कों के कारण राहगीरों को आने-जाने में काफी दिक्कतें हो रही हैं। स्थानीय निवासी सनी कुमार, अमित प्रसाद, मेवालाल स्नेही और पवन कुमार ने बताया कि नालियों में जमी गंदगी से गांव में बीमारियां बढ़ रही हैं। उन्होंने प्रशासन से जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या के कारण उनका दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है और उन्हें स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं का सामना करना पड़ रहा है।

नीति आयोग के इंडिकेटरों की समीक्षा:श्रावस्ती में हुई बैठक, अधिकारियों को दिए गए लक्ष्य पूरे करने के निर्देश

श्रावस्ती के जमुनहा में नीति आयोग के आकांक्षी विकासखंड कार्यक्रम (ABP) के तहत एक समीक्षा बैठक हुई। यह बैठक बुधवार को खंड विकास अधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित की गई। इसमें अलग-अलग विभागों के अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए। पिरामल फाउंडेशन, C3 और ABP फेलो के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। बैठक में नीति आयोग के तय किए गए कई अहम इंडिकेटरों की समीक्षा की गई। जिन इंडिकेटरों में राज्य के औसत से कम प्रगति मिली, उन विभागों को जरूरी निर्देश दिए गए। अधिकारियों से कहा गया कि वे समय पर काम पूरा करने की योजना बनाएं और तय लक्ष्य हासिल करें। खंड विकास अधिकारी ने सभी विभागों से मिलकर काम करने को कहा। उन्होंने काम की गुणवत्ता, पारदर्शिता और बेहतर तरीके से काम करने पर खास ध्यान देने के निर्देश दिए। साथ ही, विकासखंड और जिले की रैंकिंग में लगातार सुधार के लिए गंभीरता से कोशिश करने पर जोर दिया गया। बैठक में यह भी निर्देश दिया गया कि अगली समीक्षा बैठक में सभी विभाग अपने पोर्टलों की ताजा प्रगति रिपोर्ट के साथ जरूर मौजूद रहें। इससे योजनाओं की प्रगति की अच्छे से समीक्षा हो सकेगी।

2024 में मुंबई और आस-पास के शहरों में 1,406 आत्महत्याएं दर्ज की गईं

भारत के तेज़ी से बदलते शहरी माहौल में, पैसे की तंगी, बिज़नेस में नुकसान, बढ़ते लोन, नौकरी की असुरक्षा, परिवार की ज़िम्मेदारियाँ और एक खास तरह की ज़िंदगी बनाए रखने का दबाव, बहुत ज़्यादा मानसिक परेशानी की वजह बनते जा रहे हैं।(1,406 Suicides Reported in Mumbai in 2024)

वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेंशन डे 2026, जो 10 सितंबर को “सुसाइड पर सोच बदलना” थीम के साथ मनाया जाएगा, इस बात पर ज़ोर देता है कि चुप्पी और बदनामी को खुली बातचीत, हमदर्दी और समय पर मेंटल-हेल्थ सपोर्ट से बदलने की तुरंत ज़रूरत है।

भारत में सुसाइड का बोझ लगातार बढ़ रहा है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के डेटा के मुताबिक, 2023 में 171,418 सुसाइड के मामले सामने आए, जबकि 2022 में यह संख्या 170,924 थी। 2023 में सुसाइड रेट लगभग 12.3 प्रति लाख आबादी थी। खास बात यह है कि 2023 में रिपोर्ट किए गए सुसाइड के लगभग दो-तिहाई मामले 18-45 साल के लोगों के थे, जो आर्थिक और सामाजिक रूप से एक्टिव आबादी की कमज़ोरी को दिखाता है।

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के जारी ऑफिशियल डेटा के मुताबिक, 2024 में मुंबई में 1,406 सुसाइड हुए। कुल संख्या के हिसाब से मुंबई भारत के बड़े शहरों में चौथे नंबर पर है, जो दिल्ली (2,905 केस), बेंगलुरु (2,403 केस) और दूसरे मेट्रोपॉलिटन सेंटर्स के बराबर है।

शहरों में रहने वाले लोगों के लिए, पैसे की तंगी बहुत ज़्यादा हो सकती है। बिज़नेस में रुकावट, जमा हुए लोन, EMI का दबाव, नौकरी छूटना, प्रोफेशनल कॉम्पिटिशन, रिश्तों में मुश्किलें, सोशल आइसोलेशन और साथियों के साथ “तालमेल बनाए रखने” की ज़रूरत कई तरह के दबाव पैदा कर सकती है। पैसे की तंगी को अलग से नहीं देखना चाहिए; यह डिप्रेशन, एंग्जायटी, नशे की लत, परिवार में झगड़े और दूसरी मेंटल हेल्थ चुनौतियों से जुड़ सकता है।

परिवार और रिश्तों से जुड़ा तनाव भी इमोशनल परेशानी में काफी योगदान दे सकता है। अक्सर रिश्तों में झगड़े, शादी में झगड़ा, अलगाव या तलाक, शादी के बाहर के रिश्ते, जाति और सोशल बैकग्राउंड को लेकर पार्टनर या परिवारों के बीच मतभेद, रिश्तों का परिवार में विरोध, घरेलू झगड़े, इमोशनल रिजेक्शन, भरोसा टूटना, रिश्तों में अकेलापन और अनसुलझे झगड़े लोगों को अकेला और परेशान महसूस करा सकते हैं।  कुछ हालात में, रिश्ता टूटने या लंबे समय तक चले पारिवारिक झगड़े के बाद बहुत ज़्यादा इमोशन मौजूदा फाइनेंशियल, प्रोफेशनल या मेंटल-हेल्थ की दिक्कतों को और बढ़ा सकते हैं। इन वजहों को सुसाइड की अकेली या पक्की वजहों के बजाय संभावित वजहों के तौर पर समझना चाहिए।

बोरीवली के एपेक्स ग्रुप ऑफ़ हॉस्पिटल्स के कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट, MD साइकेट्री, डॉ. प्रतीक सुरंदाशे ने कहा, “बिज़नेस में नुकसान, फेल हुआ वेंचर, बेरोज़गारी या लोन न चुका पाना, जब कोई इंसान पहले से ही इमोशनली परेशान हो, तो उसे दुनिया खत्म होने जैसा महसूस हो सकता है। लेकिन फाइनेंशियल क्राइसिस एक सिचुएशन है—किसी इंसान की पहचान या उसके भविष्य का अंत नहीं। हमारे शहरों में, जहाँ सफलता को अक्सर इनकम, लाइफस्टाइल और प्रोफेशनल अचीवमेंट से मापा जाता है, लोग यह मानने में झिझक सकते हैं कि वे स्ट्रगल कर रहे हैं। हमें यह सोच बदलने की ज़रूरत है। किसी से पूछना कि वे कैसे कोप कर रहे हैं, बिना जजमेंट के सुनना और प्रोफेशनल मदद के लिए बढ़ावा देना बहुत ज़रूरी हो सकता है। मैसेज साफ होना चाहिए: फाइनेंशियल प्रॉब्लम स्टेप बाय स्टेप सॉल्व हो सकती हैं; ज़िंदगी को बदला नहीं जा सकता।”

एपेक्स ग्रुप ऑफ़ हॉस्पिटल्स के कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट, एमडी साइकेट्री, डॉ. प्रतीक सुरंदाशे ने आगे कहा, “परिवार और रिश्तों के संघर्ष समान रूप से परेशान करने वाले हो सकते हैं। जोड़ों के बीच झगड़े, अलगाव, तलाक, रिश्ते टूटना, रिश्ते के लिए परिवार का विरोध, जाति या सामाजिक पृष्ठभूमि में अंतर, विश्वासघात और अनसुलझे भावनात्मक संघर्ष किसी व्यक्ति की सुरक्षा और अपनेपन की भावना को गहराई से प्रभावित कर सकते हैं। जब कई तनाव एक साथ होते हैं, तो व्यक्ति को लग सकता है कि आगे बढ़ने का कोई रास्ता नहीं है। यह ठीक वही समय है जब परिवार के सदस्यों और दोस्तों को न्याय करने के बजाय सुनने, जुड़े रहने और पेशेवर मदद को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता होती है।” विशेषज्ञ इस बात पर ज़ोर देते हैं कि आत्महत्या की रोकथाम के लिए समुदायों को चेतावनी के संकेतों को जल्दी पहचानने और बातचीत के लिए सुरक्षित स्थान बनाने की आवश्यकता होती है।

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