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रक्षाबंधन पर पड़ जाए चंद्रग्रहण की छाया तो राखी बांधे या नहीं? समझिए


सनातन धर्म में रक्षाबंधन को बेहद पावन त्योहार माना जाता है। यह त्योहार भाई-बहन के अटूट प्रेम और भरोसे का प्रतीक है। इस साल 28 अगस्त को रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाएगा। संयोग से इसी दिन चंद्रग्रहण भी लगने वाला है, जो इस साल का आखिरी चंद्रग्रहण होगा। चंद्रग्रहण की वजह से त्योहार पर प्रभाव पड़ेगा। इसी वजह से एक तरफ कई लोग उस दिन अपने भाई को राखी नहीं बांधेंगे, जबकि दूसरी तरफ कई लोग उस दिन रक्षाबंधन की सारी परंपराएं निभाएंगे।

 

इस साल रक्षाबंधन का त्योहार मनाने को लेकर कई लोग दुविधा में हैं। जहां कुछ लोगों का मानना है कि चंद्रग्रहण की वजह से रक्षाबंधन का पर्व नहीं मनाना चाहिए, वहीं दूसरी तरफ चंद्रग्रहण के दिन कई महिलाएं अपने भाई को राखी बांधेंगी। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या चंद्रग्रहण के दिन राखी बांधने से कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा? इस सवाल का जवाब आइए जानते हैं।

 

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कब लगेगा चंद्रग्रहण?

ज्योतिषीय जानकारों के मुताबिक 28 अगस्त को चंद्रग्रहण सुबह 6 बजकर 53 मिनट से शुरू होगा, जो दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। यानी ग्रहण कुल 5 घंटे 39 मिनट तक रहने वाला है। इस ग्रहण को ब्लड मून भी कहा जाता है।

 

धार्मिक मान्यता के अनुसार चंद्रग्रहण के 9 घंटे पहले तक शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। कई लोगों का मानना है कि चंद्रग्रहण लगने से सूतक काल शुरू हो जाता है और उस दौरान शुभ कार्य नहीं करने चाहिए। अब सवाल उठता है कि रक्षाबंधन उस दिन मना सकते हैं या नहीं।

 

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क्या रक्षाबंधन मनाना चाहिए?

 

ज्योतिष जानकारों के मुताबिक 28 अगस्त को भारत में चंद्रग्रहण की लाल छाया दिखाई नहीं देगी। जब चंद्रग्रहण ही दिखाई नहीं देगा, तो उसके नकारात्मक प्रभाव भी नहीं पड़ेंगे। साथ ही भारत में सूतक काल भी मान्य नहीं माना जाएगा। इस वजह से भारत में सभी भक्तों को रक्षाबंधन का त्योहार उस दिन मनाना चाहिए।

 

इस साल 28 अगस्त को सभी लोग रक्षाबंधन की परंपराएं निभा सकते हैं। इसका मतलब साफ है कि सभी भक्त रक्षाबंधन के दिन पूजा-पाठ कर सकते हैं और अपने भाई को राखी भी बांध सकते हैं।

 

नोट- यह लेख धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।

ब्रिटेन के PM कीर स्टार्मर ने इस्तीफा क्यों दिया, कौन लेगा जगह? हर सवाल का जवाब


ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर एक बयान में प्रधानमंत्री और लेबर पार्टी के नेता पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी है। उन्होंने कहा कि उन्होंने जो भी फैसले लिए, वे हमेशा देश के हित में थे। स्टार्मर ने अपनी पत्नी विक का शुक्रिया अदा करते हुए उन्हें अपना सहारा बताया। 

भावुक होते हुए उन्होंने कहा कि अब वह सबसे अच्छे पति और पिता बनने पर ध्यान देंगे। उन्होंने अपने बच्चों को अपनी खुशी और गर्व बताया। बयान के बाद उन्होंने पत्नी को गले लगाया। कीर स्टार्मर ने कहा कि उन्होंने लेबर पार्टी को राजनीतिक, आर्थिक और नैतिक रूप से दिवालिया हालत से बाहर निकाला। 

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कीर स्टार्मर की उपलब्धियां क्या रहीं?

कीर स्टार्मर ने दावा किया कि उन्होंने पार्टी की यहूदी विरोधी छवि को खत्म किया, अर्थव्यवस्था, रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा पर लोगों का विश्वास बहाल किया। उन्होंने 2024 में डाउनिंग स्ट्रीट में प्रवेश को अपने जीवन का सबसे गर्व का पल बताया। उन्होंने ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय से सोमवार सुबह इस फैसले की जानकारी दी। 

कैसे चुना जाएगा नया नेता?

कीर स्टार्मर ने लेबर पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से कहा है कि 9 जुलाई से नेतृत्व चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो और गर्मियों की छुट्टियों से पहले नया नेता चुना जाए। नया नेता चुने जाने तक वह प्रधानमंत्री बने रहेंगे। उन्होंने अगले प्रधानमंत्री को पूरा सहयोग देने का वादा किया।

कौन संभालेगा कीर स्टार्मर की जगह?

यह काफी चौंकाने वाला है क्योंकि लेबर पार्टी ने 2024 के आम चुनाव में भारी जीत हासिल की थी, मात्र दो साल बाद स्टार्मर को इस्तीफा देना पड़ रहा है। वेस्टमिंस्टर में सोमवार को ही एंडी बर्नहम भी सांसद के रूप में शपथ लेंगे, जिन्हें स्टार्मर का संभावित उत्तराधिकारी माना जा रहा है।

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इस्तीफा क्यों दिया है?

18 जून 2026 को हुए उप-चुनाव में ग्रेटर मैनचेस्टर के पूर्व मेयर एंडी बर्नहम ने भारी अंतर से जीत हासिल की थी। उन्होंने लगभग 55 फीसदी वोट पाए और रिफॉर्म यूके के उम्मीदवार को 9,000 से ज्यादा वोटों से हराया। यह जीत बर्नहम को संसद पहुंचाने वाली थी। 

अब वह लेबर पार्टी की लीडरशिप रेस में हिस्सा ले सकेंगे। उनकी जीत के बाद पार्टी के अंदर स्टार्मर के खिलाफ बगावत तेज हो गई। बर्नहम को कई सांसदों का समर्थन मिला और उन्हें स्टार्मर का संभावित उत्तराधिकारी माना जा रहा है। 

मई 2026 के लोकल चुनावों में लेबर पार्टी को भारी नुकसान हुआ। पार्टी ने करीब 1,500 सीटें गंवाईं। इसके बाद दर्जनों लेबर सांसदों ने स्टार्मर से इस्तीफा मांगा और डिपार्चर टाइमलाइन सेट करने की मांग की। कई मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया, जिसमें पूर्व हेल्थ सेक्रेटरी वेस स्ट्रीटिंग भी शामिल हैं। अब कीर स्टार्मर अगले आम चुनाव में पार्टी का नेतृत्व नहीं करेंगे।

कहां-कहां चूके कीर स्टार्मर?

कीर स्टार्मर पार्टी की प्रवासन नीतियां सवालों के घेरे में रहे। उर्जा नीतियां भी ब्रिटेन के लिए असरदार साबित नहीं हुईं। डोना्ड ट्रंप ने भी इन्हीं बातों को लेकर आशंका जाहिर की थी। डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी कहा था कि वह नॉर्थ सी ड्रिलिंग बढ़ाने की वकालत कर रहे हैं लेकिन उनके देश की हालत ऐसी नहीं है। 

कीर स्टार्मर पर डिफेंस को पर्याप्त फंड न देने के भी आरोप लगे हैं। कई दिग्गज अधिकारियों ने इस्तीफे दिए, जिनकी वजह से उनकी बदनामी हुई। एपस्टीन फाइल्स में नाम और पीटर मंडेलसन को अमेरिका में एंबेसडर नियुक्त करने पर भी विवाद हुआ। 

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किचन का सिंक जाम हो तो क्या करें? 6 नुस्खे जो बनाएंगे आपका काम


आमतौर पर हर घर में किचन का सिंक अक्सर जाम हो जाता है। किचन घर का वह हिस्सा है जहां सुबह से रात तक सबसे ज्यादा काम होता रहता है। बर्तन धोना, सब्जियां साफ करना और रोजमर्रा के दूसरे कामों में सिंक का इस्तेमाल लगातार होता है।जब बर्तनों से निकलने वाला तेल, घी, मसाले, चायपत्ती और खाने के छोटे-छोटे कण पाइप में चले जाते हैं तो धीरे-धीरे सिंक जाम हो जाता है। पानी बहना बंद हो जाता है और सिंक में पानी भरने लगता है।

अगर समय पर साफ-सफाई न की जाए तो पूरे रसोईघर में बदबू फैलने लगती है, जिससे घरवालों को काफी परेशानी होती है।ऐसी स्थिति में लोगों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। रोजाना का काम रुक जाता है और घर में तनाव बढ़ जाता है लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। 

 

कई आसान और प्रभावी घरेलू उपायों की मदद से जाम हुआ सिंक जल्दी साफ किया जा सकता है।इन उपायों को अपनाकर आप बिना किसी महंगे प्लंबर के बुलाए या केमिकल इस्तेमाल किए अपने किचन को साफ और सुगंधित रख सकते हैं। समय-समय पर इन तरीकों का इस्तेमाल करने से सिंक जाम होने की समस्या भी कम हो जाती है।

 

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1. गर्म पानी का इस्तेमाल करें

अगर जाम ज्यादा गंभीर नहीं है तो सबसे पहले पाइप में धीरे-धीरे गर्म पानी डालें। गर्म पानी चिकनाई और जमी गंदगी को नरम करके बहाने में मदद करता है। यह तरीका किचन सिंक के लिए खासतौर पर कारगर माना जाता है।

2. बेकिंग सोडा और सिरके का मिश्रण

सिंक के ड्रेन में आधा कप बेकिंग सोडा डालें और उसके ऊपर एक कप सफेद सिरका डाल दें। कुछ मिनट तक झाग बनने दें और फिर गर्म पानी डालकर पाइप को फ्लश कर दें। इससे पाइप में जमा गंदगी ढीली हो सकती है।

3. प्लंजर का उपयोग करें

अगर पानी बिल्कुल नहीं निकल रहा है, तो प्लंजर का इस्तेमाल करें। कुछ मिनट तक दबाव बनाने से पाइप में फंसी गंदगी बाहर निकल सकती है और पानी का प्रवाह सामान्य हो सकता है।

4. ड्रेन स्ट्रेनर साफ करें

कई बार जाम की वजह पाइप नहीं बल्कि ड्रेन कवर या स्ट्रेनर में फंसे बाल और कचरा होते हैं। इसे निकालकर अच्छी तरह साफ करें।

5. पाइप ट्रैप की सफाई करें

सिंक के नीचे लगे U-आकार के पाइप (P-Trap) में अक्सर गंदगी जमा हो जाती है। बाल्टी रखकर इस हिस्से को खोलें और जमा कचरा निकालकर दोबारा फिट कर दें।

6. वायर या हुक की मदद लें

पतले तार या हुक को ड्रेन में डालकर फंसे हुए बाल, प्लास्टिक या अन्य कचरे को बाहर निकाला जा सकता है। यह तरीका बाथरूम सिंक में ज्यादा उपयोगी होता है।

 

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कब बुलाना चाहिए प्लंबर को?

अगर घरेलू तरीकों को इस्तेमाल करने के बाद भी सिंक में से पानी नहीं निकल रहा है, बदबू आ रही है या फिर बार-बार सिंक जाम हो रहा है तो समस्या काफी बढ़ गई है। ऐसे में फिर प्लंबर की मदद लेना ही सबसे बेहतर होगा।

 

‘पुजारी महिला के सिर पर नहीं रखेगा हाथ’, हरिद्वार के मंदिर ने क्यों लिया फैसला?


उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित मनसा देवी मंदिर कमेटी ने एक फैसला लिया है। इस फैसले के मुताबिक मंदिर में कोई भी पुजारी आशीर्वाद देने के लिए किसी भक्त के सिर पर हाथ नहीं रखेगें। यह नियम महिलाओं की सुरक्षा और मंदिर की मर्यादा को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। इस नियम को लेकर मंदिर ट्रस्ट के प्रमुख महंत रविंद्र पुरी ने अहम जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में यहां कुंभ मेला लगेगा, जहां लाखों लोग आएंगे। ऐसे में पुजारियों के खिलाफ कोई शिकायत न आए, इसलिए यह फैसला लिया गया है।


महंत रविंद्र पुरी ने हाल ही में एएनआई को इंटरव्यू दिया था। इसमें उन्होंने बताया कि पुजारी अपने हाथों से भक्तों के माथे पर तिलक लगा सकते हैं, हालांकि वे किसी भी भक्त के सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद नहीं दे सकते। नियम के मुताबिक जो पुजारी इस नियम का पालन नहीं करेगा, उसे मंदिर की सेवा से बाहर कर दिया जाएगा।

 

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महंत रविंद्र पुरी ने क्या कहा?


इस नियम को लेकर महंत रविंद्र पुरी ने कहा, ‘हमने सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद देने की परंपरा पर रोक लगाई है। अब से कोई भी पुजारी महिला या पुरुष के सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद नहीं दे सकता। पुजारी भक्तों से प्रसाद ले सकते हैं और उन्हें आशीर्वचन दे सकते हैं। आशीर्वाद देने वाला कोई पुजारी नहीं है, बल्कि मां भवानी हैं, जो भक्तों को आशीर्वाद देती हैं।’


आगे उन्होंने कहा, ‘मैं समझता हूं कि पुजारी द्वारा सिर छूकर आशीर्वाद देना सही नहीं है। आने वाले दिनों में कुंभ का मेला लगेगा, जहां करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु आने वाले हैं। कई पुजारी अलग-अलग सोच और विचारों के होते हैं, जिनके मन में क्या चल रहा है, यह किसी को पता नहीं होता। इसलिए हम कोशिश कर रहे हैं कि भविष्य में कोई शिकायत न आए। भक्तों के साथ कोई अप्रिय घटना न हो, इसलिए हमने इस नियम की शुरुआत की है।’भक्तों को मां भवानी देंगी आशीर्वाद


महंत रविंद्र पुरी ने बताया कि जो भक्त इस मंदिर में दर्शन करने आएंगे, उन्हें पुजारी क्या आशीर्वाद देंगे? वे तो माता भवानी का आशीर्वाद लेने आते हैं। जिस प्रकार श्रद्धालु भगवान के भक्त हैं, उसी प्रकार पुजारी भी भगवान के भक्त हैं। ऐसे में एक भक्त दूसरे भक्त को क्या आशीर्वाद दे सकता है? इसलिए पुजारियों द्वारा सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद देने की परंपरा को समाप्त करने का नियम लाया गया है।

भगवान राम की तस्वीर पर फेंके जूते, बांग्लादेश में बवाल, सड़क पर उतरे हिंदू


बांग्लादेश की राजधानी ढाका और देश के कई हिस्सों में लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। लोगों का आरोप है कि पलाशबाड़ी में एक जुलूस के दौरान भगवान राम की तस्वीर पर जूते फेंके गए थे। साथ ही राधा-गोबिंद मंदिर में भगवान राम की मूर्ति तोड़ने की धमकी भी दी गई थी। इस घटना के विरोध में हजारों हिंदू लोग सड़कों पर उतर आए और आंदोलन शुरू कर दिया। लोगों ने सरकार से मांग की है कि इस शर्मनाक हरकत को अंजाम देने वालों को सख्त सजा दी जाए।

 

यह विरोध प्रदर्शन शुक्रवार रात को शुरू हुआ था। इसके बाद शनिवार को हजारों लोग प्रदर्शन में शामिल हुए, जिसके चलते मामला गंभीर रूप लेता गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ भी नाराजगी जताई। लोगों का कहना है कि सरकार अल्पसंख्यकों की धार्मिक आस्था की रक्षा करने में विफल रही है, साथ ही अब तक आरोपियों को सजा भी नहीं दिला पाई है।

 

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हिंदू संगठनों ने किया विरोध प्रदर्शन

इस घटना को लेकर बांग्लादेश पूजा उद्जापन परिषद ने भी प्रदर्शन किया। उनके साथ बौद्ध और ईसाई संगठनों के सदस्य भी शामिल हुए। इस मामले पर हिंदू संगठनों का कहना है कि इस घटना ने लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है, जो बिल्कुल भी उचित नहीं है। इन संगठनों ने ढाका प्रेस क्लब के सामने प्रदर्शन किया, जहां हिंदू संगठनों के नेताओं ने घटना की निंदा की। साथ ही पूरे देश को संदेश दिया कि इस तरह की घटनाएं सांप्रदायिक मतभेद बढ़ाती हैं।

 

विरोध प्रदर्शन में शामिल एक व्यक्ति ने कहा, ‘हम इस देश के नागरिक हैं, हम यहां के प्रवासी नहीं हैं। बांग्लादेश के निर्माण में हमने भी खून बहाया है। हमारे पूर्वजों के बलिदान से ही यह देश बना है। इसलिए अब हमें देश में हो रही बुराइयों को रोकना होगा।’

 

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प्रदर्शन में शामिल लोगों ने मांग की कि जुलूस के दौरान हुई घटना पर तुरंत कार्रवाई की जाए और आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाए। फिलहाल इस मामले में किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

190 देशों में भारत से अलग कैसे मनाया जा रहा योग दिवस? देखिए तस्वीरें

इस साल दुनिया आज के दिन अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मना रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुनिया के 190 देश आज योग दिवस का उत्सव मना रहे हैं। दुनिया के कई देशों में भारतीय दूतावास ने योग कार्यक्रमों का आयोजन किया है, जिसमें हजारों की तादाद में लोग शामिल हुए और हेल्दी लाइफस्टाइल का संकल्प ले रहे हैं। इस साल योग दिवस की थीम है ‘योगा फॉर हेल्दी एजिंग’, यानी बढ़ती उम्र में स्वस्थ रहने के लिए योग करें।

 

अमेरिका में भारतीय दूतावास ने आज 30 से ज्यादा योग कार्यक्रम आयोजित किए हैं। इसी तरह नेपाल के लुंबिनी में भी योग दिवस के खास कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। इस साल 21वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जा रहा है। अब सवाल उठता है कि कौन-कौन से देश अंतरराष्ट्रीय योग की ऊर्जा में शामिल हैं। साथ ही यह भी सवाल उठता है कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुरुआत कब हुई थी।

 

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कहां मनाया जा रहा है योग दिवस?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आज 190 देशों में योग दिवस मनाया जा रहा है। भारत के अलावा यूरोप, चीन, कनाडा, अमेरिका समेत कई देशों में योग के कार्यक्रम हो रहे हैं, जहां करोड़ों लोग सुबह 5 बजे से ही योग करते नजर आए।

 

 प्रतीकात्मक तस्वीर, image credit- gemini

 

भारतीय दूतावास ने दुनिया के कई देशों में योग कार्यक्रम आयोजित किए हैं। जहां एक तरफ अमेरिका में 30 से ज्यादा योग कार्यक्रम आयोजित किए गए, वहीं दूसरी तरफ नेपाल के लुंबिनी में भी खास कार्यक्रम रखा गया है। भारतीय दूतावास ने नेपाल के लुंबिनी में कहा कि यह स्थान गौतम बुद्ध की जन्मस्थली है, जो बेहद खास महत्व रखता है। यहां कार्यक्रम आयोजित करने से योग को एक नई पहचान मिलती है, जिसकी अहमियत पूरी दुनिया में है।

 

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कब शुरू हुआ अंतरराष्ट्रीय योग दिवस?

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का प्रस्ताव रखा था। 27 सितंबर 2014 को नरेंद्र मोदी ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा था। इसके बाद 11 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया था।

 

इसके बाद 2015 में पहली बार भारत समेत कई देशों में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया था। उस साल भारत में दिल्ली के राजपथ पर नरेंद्र मोदी समेत हजारों लोगों ने योग किया था, जहां लगभग 35,985 लोग शामिल हुए थे।

 

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पश्चिम बंगाल में खास कार्यक्रम

इस साल पश्चिम बंगाल के कोलकाता में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का खास कार्यक्रम आयोजित किया गया। जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई लोग शामिल हुए। कोलकाता के योग कार्यक्रम का आयोजन आयुष मंत्रालय और मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा ने मिलकर किया है।

ज्यादा विटामिन डी सप्लीमेंट्स खाना हो सकता है सेहत के लिए खतरनाक, जानिए


आजकल कई लोगों को बाल झड़ने की समस्या, हर समय शरीर में दर्द रहने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जो शरीर में विटामिन डी की कमी के कारण हो सकता है। इसी वजह से कई लोग विटामिन डी की दवा खाने लगते हैं। विटामिन डी सप्लीमेंट से जुड़ा एक चौंकाने वाला सच सामने आया है, जहां हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. उमैर इफ्तिखार ने बताया है कि ज्यादा विटामिन डी सप्लीमेंट खाने से किडनी फेल हो सकती है। इसके अलावा सेहत से जुड़ी और भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

 

डॉ. उमैर इफ्तिखार ने हाल ही में इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में विटामिन डी की दवा के बारे में बात की थी। जहां उमैर ने बताया कि बिना सोचे-समझे विटामिन डी की दवा खाने से हेल्थ से जुड़ी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। अब सवाल उठता है कि डॉ.उमैर इफ्तिखार ने विटामिन डी सप्लीमेंट को लेकर क्या कहा थे?

 

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विटामिन डी के सप्लीमेंट से हुआ किडनी फेल

 

डॉ. उमैर इफ्तिखार ने बताया था कि उनके पास 26 साल की एक मरीज आई थीं, जिन्होंने कुछ समय पहले विटामिन डी लेना शुरू किया था क्योंकि उनके शरीर में विटामिन डी की कमी थी। कुछ महीनों बाद भी उस महिला ने बिना ब्लड टेस्ट कराए और डॉक्टर की सलाह लिए बगैर दवा खाना जारी रखा, जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा।

 

ज्यादा विटामिन डी की दवा खाने की वजह से उन्हें उल्टी, कमजोरी, ज्यादा प्यास लगना और बार-बार पेशाब आने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। इसके बाद जब उनका ब्लड टेस्ट कराया गया तो पता चला कि उनके शरीर में विटामिन डी का स्तर काफी बढ़ चुका था, जिससे उनकी किडनी खराब हो गई थी। उनकी किडनी के इलाज के लिए डायलिसिस करना पड़ा।

 

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डॉ. उमैर इफ्तिखार ने बताया कि जब शरीर में विटामिन डी का स्तर बढ़ता है तो साथ ही कैल्शियम का स्तर भी खतरनाक तरीके से बढ़ सकता है, जिससे व्यक्ति की किडनी खराब हो सकती है। इसी वजह से किसी भी व्यक्ति को डॉक्टर की सलाह के बिना विटामिन डी का सप्लीमेंट नहीं खाना चाहिए।

 

विटामिन डी की दवा कब खाएं?

 

डॉक्टर ने बताया कि कई बार लोग थकान, उदासी और बाल झड़ने जैसे लक्षणों को विटामिन डी की कमी समझ लेते हैं, जबकि ये समस्याएं किसी दूसरी बीमारी के लक्षण भी हो सकती हैं। इसलिए लोगों को पहले ब्लड टेस्ट कराना चाहिए और उसके आधार पर ही यह दवा खानी चाहिए।

 

लोगों को विटामिन डी सप्लीमेंट लेना शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए और विटामिन डी के स्तर की जांच करवानी चाहिए, वरना इसके बुरे खामियाजे का सामना करना पड़ सकता है।

निर्जला एकादशी कब है, 24 या 25 जून? सही तारीख, मुहूर्त और पूजा विधि जानिए


सनातन धर्म में एकादशी का विशेष महत्व माना जाता है। इस पर्व पर कई लोग भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना और व्रत रखते हैं। हर महीने में दो एकादशियां मनाई जाती हैं, जिनमें एक एकादशी शुक्ल पक्ष की होती है तो दूसरी एकादशी कृष्ण पक्ष की होती है। दोनों ही एकादशियों का अलग-अलग महत्व होता है। इस तरह पूरे साल में 24 एकादशी पर्व मनाए जाते हैं, जिनमें निर्जला एकादशी का खास महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो भी भक्त इस दिन व्रत रखते हैं, भगवान उनकी सभी इच्छाओं को पूरा करते हैं। साथ ही इस व्रत के प्रभाव से भक्तों के पाप और कष्ट दूर हो जाते हैं।


निर्जला एकादशी पर्व ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में मनाया जाता है। यानी यह जून महीने में पड़ता है। इस साल कई भक्तों के मन में यह सवाल है कि निर्जला एकादशी कब है। जहां कुछ लोगों का मानना है कि यह पर्व 24 जून को मनाया जाएगा, वहीं कई धार्मिक जानकारों का कहना है कि इस साल 25 जून को निर्जला एकादशी मनानी चाहिए। आइए जानते हैं निर्जला एकादशी की सही तारीख, मुहूर्त और पूजा की सही विधि क्या है।

 

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कब है निर्जला एकादशी व्रत?


हिन्दू पंचांग के मुताबिक, निर्जला एकादशी 24 जून को रात 8 बजकर 9 मिनट पर शुरू होगी, जो 25 जून की रात 9 बजकर 14 मिनट पर समाप्त होगी। पर्व की उदया तिथि 25 जून को पड़ रही है, इसलिए निर्जला एकादशी का व्रत और पूजन 25 जून को करना शुभ माना जाएगा।


निर्जला एकादशी का व्रत रखने वाले भक्त 26 जून को व्रत का पारण करेंगे। हिन्दू पंचांग के अनुसार, 26 जून को सुबह 5 बजकर 41 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 25 मिनट तक पारण का शुभ मुहूर्त रहेगा। पारण से पहले स्नान करके पूजा-पाठ करना चाहिए।

 

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पूजा का मुहूर्त


धार्मिक जानकारों के अनुसार, निर्जला एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 5 मिनट से शुरू होगा, जो सुबह 4 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा निर्जला एकादशी के दिन रवि योग भी रहेगा, जिसका शुभ समय सुबह 5 बजकर 25 मिनट से लेकर शाम 4 बजकर 29 मिनट तक माना गया है। रवि योग ज्योतिष शास्त्र में अत्यंत शुभ माना जाता है। इस समय किए गए कार्यों में सफलता मिलने की मान्यता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करके पूजा-पाठ करना शुभ माना जाता है।पूजा की विधि


धार्मिक जानकारों के मुताबिक, निर्जला एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद भक्तों को व्रत का संकल्प लेना चाहिए। फिर श्रद्धा और प्रेम भाव से भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। पूजन के दौरान भगवान को फूल, फल और तुलसी दल अर्पित करना चाहिए। इसके बाद घी का दीपक जलाना चाहिए। पूजा समाप्त होने के बाद विष्णु चालीसा और भगवान विष्णु के मंत्रों का पाठ करना चाहिए। साथ ही दिनभर व्रत का पालन करते हुए भगवान का स्मरण करना चाहिए।

 

नोट: यह खबर धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।

अमेरिका और चीन की वजह से दुनिया में फैला कोरोना? तुलसी गबार्ड ने कर दिया खुलासा


अमेरिका की राष्ट्रीय खुफिया एजेंसी की प्रमुख तुलसी गबार्ड ने अपने कार्यकाल के आखिरी दिनों में डॉक्टर एंथनी फाउची पर सवाल उठाते हुए कुछ दस्तावेज जारी किए हैं। ये दस्तावेज कोविड-19 महामारी की उत्पत्ति की जांच में एंथनी फाउची की भूमिका से जुड़े हैं। तुलसी गबार्ड ने कहा है कि फाउची ने खुफिया एजेंसियों पर दबाव बनाया और लैब लीक थ्योरी को दबाने की कोशिश की। 

तुलसी गबार्ड ने आरोप लगाया है कि एंथनी फाउची ने अमेरिका की फंडिंग से वुहान में हो रहे वायरस रिसर्च को भी सवालों के घेरे में रखा। तुलसी गबार्ड का कहना है कि ये दस्तावेज दिखाते हैं कि फाउची ने खुफिया अधिकारियों को प्रभावित किया और कांग्रेस के सामने गलत बयान दिया।

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तुलसी गबार्ड ने क्या दावे किए हैं?

  • अमेरिका की वजह से दुनिया में फैला वायरस: अमेरिका की डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस तुलसी गबार्ड ने कहा कि कोविड-19 महामारी की शुरुआत चीन के वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (WIV) की लैब से हुई। इसके पीछे अमेरिकी टैक्सपेयर्स का पैसा था। डॉ. एंथनी फाउची की संस्था नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इन्फेक्सन डिजीज (NIAID) ने यह रकम दी थी। 
  • गेन ऑफ फंक्शन पर लुटाए करोड़ों डॉलर: डॉ. एंथनी फाउची ने फौची ने वुहान लैब में चमगादड़ों के कोरोना वायरस पर ‘गेन ऑफ फंक्शन’ रिसर्च के लिए करोड़ों डॉलर दिए। यह वायरस को ज्यादा खतरनाक बनाने के लिए किया गया। अब यह माना जा रहा है कि यही रिसर्च गलती से लैब लीक की वजह बनी और पूरी दुनिया में महामारी फैली।
  • डॉ. फाउची ने झूठ बोला, सच छिपाया: तुलसी गबार्ड ने नए दस्तावेज और ईमेल जारी किए हैं। इनमें दावा किया गया है कि डॉ. एंथनी फाउची ने खुफिया एजेंसियों के साथ मिलकर सच छिपाया। उन्होंने लैब लीक थ्योरी को दबाने के लिए वैज्ञानिकों को इस्तेमाल किया और वायरस के नेचुरल ओरिजिन की थ्योरी गढ़ी। डॉक्टर फाउची ने खुफिया रिपोर्टों को प्रभावित जिससे ताकि उनकी अपनी गलती छिप जाए। 

क्यों तुलसी गबार्ड के दावे को छिपा रहा अमेरिका?

तुलसी गबार्ड के दावे पर अब अमेरिका की किरकिरी हो रही है। साल 2024 में कांग्रेस की सुनवाई में डॉ. फाउची ने शपथ लेकर कहा था कि उन्होंने खुफिया एजेंसियों से वायरल रिसर्च पर कोई बात नहीं की। अब जारी दस्तावेज इस बात का खंडन करते हैं। तुलसी गबार्ड का कहना है कि फाउची ने कांग्रेस से झूठ बोला।

वायरस पर खुलासा करने वाले कई लोगों ने बताया है कि जो अधिकारी लैब लीक थ्योरी का समर्थन करते थे, उन्हें परेशान किया गया, प्रमोशन रोके गए और नौकरी से निकाला गया। इससे खुफिया एजेंसियों में सच बोलने का माहौल खराब हुआ।

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तुलसी गबार्ड:-
अमेरिकी लोगों को अब सच्चाई पता लगनी चाहिए। सालों तक झूठ, सेंसरशिप और कवर-अप चला। डॉ. फाउची जैसे लोग अपनी गलतियों को छिपाने के लिए खुफिया जानकारी का दुरुपयोग करते रहे। यह सब राष्ट्रपति ट्रंप के पूरी पारदर्शिता वाले आदेश पर हुआ है।  

क्यों पद छोड़ रहीं हैं तुलसी गबार्ड?

तुलसी गबार्ड अपने पति की कैंसर की बीमारी की देखभाल के लिए पद छोड़ रही हैं। उनके बाद बिल पुल्टे अंतरिम प्रमुख बनने जा रहे हैं, लेकिन उनकी नियुक्ति पर सीनेट में दोनों पार्टियों से विरोध हो रहा है। कई सीनेटरों का कहना है कि पुल्टे के पास खुफिया अनुभव नहीं है और वे खुफिया एजेंसी का दुरुपयोग कर सकते हैं।

अब कौन लेगा तुलसी गबार्ड की जगह?

डोनाल्ड ट्रंप ने जे क्लेटन को स्थायी प्रमुख के रूप में नामित किया है, लेकिन वोटर आईडी कानून पास न होने के कारण उनकी पुष्टि अटकी हुई है। तुलसी गबार्ड के इस आखिरी कदम को उनके कार्यकाल की विरासत के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने कोविड वायरस के पैदा होने और उसमें फाउची की भूमिका को बेनकाब किया है।