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अबकी अमेरिका सिर्फ दक्षिणी ईरान में ही बमबारी क्यों कर रहा, इसकी वजह क्या है?


अमेरिकी सेना लगातार सात रातों से ईरान पर भीषण बमबारी कर रही है। मगर अबकी बार की कार्रवाई रणनीतिक रूप से काफी सधी और एक क्षेत्र तक सीमित है। विशेषज्ञ इसके पीछे एक बड़े संघर्ष की तस्वीर देख रहे हैं, जबकि अमेरिकी सेना को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जीत दिख रही है। खाड़ी देशों को चिंता है कि कहीं अमेरिका की यह बमबारी उनकी सुरक्षा को ही खतरे में न डाल दे, क्योंकि ईरान ने इन देशों को उनके बुनियादी ढांचे पर हमला करने की धमकी दी है। 

 

युद्धविराम से पहले अमेरिका ने राजधानी तेहरान के आसपास भीषण बमबारी की थी। अबकी उसका निशाना दक्षिण ईरान यानी वह इलाका है, जो फारस की खड़ा और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सटा है। अमेरिका इसी इलाके को निशाना क्यों बना रहा है, उसकी रणनीति और आने वालों दिनों की सैन्य तैयारी क्या है? आइये समझते हैं।

 

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ईरान अब किसे बना रहा निशाना?

  • विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका एक व्यवस्थित तरीके से दक्षिणी ईरान पर हमला करके आईआरजीसी और उसकी नेवी को कमजोर बनाने में जुटा है, ताकि होर्मुज पर ईरान की पकड़ को कमजोर किया जा सके। पिछले एक हफ्ते से दक्षिणी ईरान में जारी हमलों से यह संकेत भी मिलते हैं कि डोनाल्ड ट्रंप किसी भी हाल में इस महत्वपूर्ण शिपिंग रूट पर ईरान का एकाधिकार नहीं चाहते हैं। 

 

  • विश्लेषकों का यह भी कहना है कि अमेरिकी सेना दक्षिणी तटीय ईरान पर स्थित सैन्य ठिकानों पर हमला करके आईआरजीसी की मारक क्षमता को सीमित करना चाहती है, क्योंकि इसी क्षेत्र से ही आईआरजीसी न केवल होर्मुज, बल्कि खाड़ी देशों पर ड्रोन और मिसाइल से हमला करता है।

 

  • शुरुआत में अमेरिका ने दक्षिण ईरान में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, लेकिन अब सड़कों, पुलों, सुरंगों, एयरपोर्ट और बिजली लाइन पर बमबारी शुरू कर दी है। नतीजा यह हुआ कि प्रमुख बंदरगाह शहर बंदर अब्बास काफी हद तक देश के अन्य हिस्से से कट चुका है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को जाने वाली सड़कें बंद हो चुकी हैं। र्मोजगान प्रांत में सड़कों को सबसे अधिक नुकसान पहुंचा है। बिजली की लाइन क्षतिग्रस्त हो गई। लोगों के सामने ऊर्जा संकट खड़ा हो गया है।

 

  • बंदर अब्बास के दक्षिण में अमेरिका ने नौसैनिक नाकेबंदी लगा रखी है। उत्तर में ईरान के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाली सड़कों और सुरंगों को तबाह कर दिया है। आज यह शहर लगभग पूरी तरह कट चुका है। इंटरनेट और टेलीफोन सेवा तक ठप हो गई है।

असली मकसद क्या?

इन बुनियादी ढांचों पर हमले के पीछे अमेरिका का मकसद आईआरजीसी को होर्मुज से दूर रखना। उसकी पहुंच को सीमित रखना। सैन्य साजो-समान किसी भी तरह फारस की खाड़ी तक न पहुंचे। अमेरिका अपने जमीनी अभियान के तहत फारस की खाड़ी पर स्थित ईरान के द्वीप पर कब्जा कर सकता है या खाड़ी के तट पर अपने सैनिकों की तैनात कर सकता है।

क्या ‘असली’ लड़ाई की जमीन तैयार कर रहा अमेरिका?

अब दुनियाभर में इस बात की अटकलें तेज होने लगी हैं कि अमेरिका दक्षिणी ईरान में सड़क और पुलों को इस वजह से नष्ट कर रहा है, ताकि जब वह जमीनी हमला करे तो आईआरजीसी वहां तक न पहुंच सके। ईरान के नेता भी इसे जमीनी हमले से पहले जमीन तैयार करने की रणनीति मान रहे हैं। ईरानी सांसद अमीर-हुसैन साबेती का कहना है कि दक्षिण के परिवहन रूटों को तबाह करना शायद जमीनी हमले की भूमिका है। क्षतिग्रस्त सड़कें और पुल द्वीपों या तटीय क्षेत्र में कब्जा करने के किसी भी कोशिश से पहले ईरानी सेनाओं की आवाजाही में बाधा डालेंगे।

 

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चाबहार पर हमला क्यों किया?

अमेरिका ने चाबहार स्थित एक समुद्री निगरानी टावर को भी तबाह किया है। उसका आरोप है कि आईआरजीसी इसका इस्तेमाल होर्मुज से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों की पर नजर रखने और उन पर हमला करने के लिए करता था। टावर नष्ट होने से आईआरसीजी की क्षमता सीधे तौर पर कम हुई है।

जमीनी हमले का विकल्प खुला है या नहीं?

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वैंस जमीनी हमले के पक्ष में नहीं है। उनका कहना है कि अमेरिका का ईरान में जमीनी सेना भेजने का कोई इरादा नहीं है। जबकि ट्रंप ने एक सप्ताह पहले फॉक्स न्यूज से बातचीत में जमीनी हमले के बारे में पूछने पर कहा था, ‘कभी-कभी जमीनी अभियान की जरूरत होती है। हमारे पास अन्य लोग हैं, जो हमारे लिए जमीनी अभियान चलाएंगे। माना जा रहा है कि ईरान का खार्ग द्वीप अमेरिका के निशाने पर है। यह तेल निर्यात का सबसे बड़ा टर्मिनल है। 

भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट ‘विक्रम-1’ लॉन्च, इससे देश में क्या बदलेगा?


भारत के निजी क्षेत्र द्वारा विकसित पहला ऑर्बिटल रॉकेट ‘विक्रम-1’ ने शनिवार को कई तकनीकी डेमोनेस्ट्रेशन पेलोड और पोस्टकार्ड्स को लेकर सफलतापूर्वक पृथ्वी की निचली कक्षा में पहुंचा दिया गया। इन पोस्टकार्ड्स में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पोस्ट कार्ड भी शामिल है। ‘मिशन आगमन’ नाम से संचालित इस मिशन के साथ भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र ने पहली बार उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करने वाले वैश्विक बाजार में औपचारिक रूप से एंट्री कर ली।

 

इस मिशन का संचालन हैदराबाद स्थित निजी कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने किया है। कंपनी ने इस मिशन को बड़ी सफलता करार दिया। अपने पहले अभियान में चार चरणों वाला और सात मंजिला इमारत जितना ऊंचा विक्रम-1 रॉकेट शनिवार को बादलों से घिरे मौसम के बीच दोपहर 12 बजकर पांच मिनट पर लॉन्च पैड से सफलतापूर्वक रवाना हुआ।

 

पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित हुआ रॉकेट

 

उड़ान भरने के बाद ग्राहा स्पेस, कॉसमोसर्व, डीक्यूब्ड और स्काईरूट के ‘स्कोप’ के तकनीकी परीक्षण के लिए तैयार छोटे उपग्रहों और उपकरणों को क्रमवार 450 किलोमीटर की ऊंचाई पर पृथ्वी की निचली कक्षा (एलईओ) में स्थापित किया गया। रॉकेट ने एक सूक्ष्म कलाकृति, 18 कैरेट सोने से बना एक सूक्ष्म रॉकेट और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का हाथों से लिखा वंदे मातरम् संदेश वाला पोस्टकार्ड भी सफलतापूर्वक कक्षा में पहुंचाया। 

 

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विक्रम-1 की खासियतें क्या हैं?

 

विक्रम-1 लॉन्च व्हीकल को पहली बार स्काईरूट एयरोस्पेस ने नवंबर 2025 में दुनिया के सामने दिखाया था। यह भारत का पहला कमर्शियल लॉन्च व्हीकल है। रॉकेट का नाम भारतीय अंतरिक्ष प्रोग्राम के जनक विक्रम साराभाई के नाम पर विक्रम-1 रखा गया है। यह रॉकेट छोटे साइज के सैटेलाइट को ‘लो अर्थ ऑर्बिट’ में ले जाने में सक्षम है।

 

 

 

 

महान विभूतियों के नाम रॉकेटों और इंजनों के नाम

 

स्काईरूट एयरोस्पेस ने बताया कि इस सूक्ष्म कलाकृति पेलोड में भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक विक्रम साराभाई, वैज्ञानिक सर सीवी रमन और पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की सूक्ष्म प्रतिमाएं शामिल हैं। इन्हें भारत की वैज्ञानिक और अंतरिक्ष यात्रा को दिशा देने वाले तीन दूरदर्शी शख्सियतों को श्रद्धांजलि के रूप में तैयार किया गया है। कंपनी ने कहा, ‘स्काईरूट ने गर्व के साथ अपने रॉकेटों और इंजनों का नाम इन्हीं महान विभूतियों के नाम पर रखा है।’

 

नेविगेशन प्रणालियों को मिलेगा फायदा

 

स्काईरूट एयरोस्पेस ने कहा कि इस परीक्षण उड़ान के दौरान प्राप्त इंजीनियरिंग आंकड़ों का विश्लेषण कर रॉकेट की मार्गदर्शन और नेविगेशन प्रणालियों की कार्यक्षमता का सत्यापन किया जाएगा। साथ ही इन आंकड़ों के आधार पर भविष्य के वाणिज्यिक उपग्रह मिशनों के लिए आवश्यक तकनीकी सुधार किए जाएंगे। 

 

इसरो के पूर्व वैज्ञानिक हैं कंपनी संस्थापक

 

इस सफल उड़ान ने वास्तविक उड़ान परिस्थितियों में रॉकेट की पूर्ण कार्बन कंपोजिट संरचना और थ्री-डी प्रिंटेड इंजनों के प्रदर्शन को प्रमाणित किया। कंपनी का दावा है कि ये दोनों तकनीकें अपने प्रकार की पहली टेक्नालॉजी हैं। स्काईरूट एयरोस्पेस के दोनों संस्थापक पवन कुमार चांदना और नागा भरत डाका, दोनों भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व वैज्ञानिक हैं। प्रक्षेपण के दौरान दोनों इसरो प्रमुख वी. नारायणन के साथ इसरो के मिशन नियंत्रण केंद्र (एमसीसी) में मौजूद थे। इसरो के पूर्व अध्यक्षों, भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला और आंध्र प्रदेश के मंत्री नारा लोकेश ने भी एमसीसी से इस प्रक्षेपण को देखा।

 

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भारत को क्या मिलेगा फायदा?

 

यह ऐतिहासिक उपलब्धि तेजी से बढ़ रहे वैश्विक लघु उपग्रह प्रक्षेपण बाजार में भारत की स्थिति को और मजबूत करने तथा इसरो के साथ-साथ अंतरिक्ष क्षेत्र में देश की उपस्थिति का विस्तार करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विक्रम-1 के साथ भेजे गए पेलोड में कॉसमोसर्व स्पेस का ‘एम्ब्रेस’ मिशन शामिल है। यह कक्षा में रोबोटिक भुजाओं (यांत्रिक हाथों) के प्रदर्शन से जुड़ा मिशन है, जिनका मकसद अंतरिक्ष में मौजूद मलबे को हटाने की क्षमता का परीक्षण करना है।

 

इसके अलावा ग्राहा स्पेस का ‘सोलारस’ भी भेजा गया। यह एक कॉम्पैक्ट उपग्रह मिशन है, जिसे पृथ्वी की निचली कक्षा में नई तकनीकी क्षमताओं के प्रदर्शन के लिए विकसित किया गया है। कंपनी के अनुसार, स्काईरूट एयरोस्पेस का ‘स्कोप’ उपग्रह एक आंतरिक प्रायोगिक पेलोड है, जिसे भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों में उपयोग होने वाली प्रौद्योगिकियों के परीक्षण के लिए विकसित किया गया है।

बचे हुए खाने से बनाएं टेस्टी डिश, स्वाद मिलेगा और पैसा भी बचेगा

अक्सर घर में खाना थोड़ा बहुत बच जाता है। कई लोग इसे बेकार समझकर फेंक देते हैं लेकिन ऐसी करना सही नहीं है। इससे न सिर्फ खाने की बर्बादी होती है बल्कि पैसों का भी नुकसान होता है। अगर बचा हुआ खाना सही तरीके से रखा गया हो तो उसका दोबारा इस्तेमाल करके कई टेस्टी और नई डिश तैयार की जा सकती है।

 

बस थोड़ी सी समझदारी और कुछ आसान किचन ट्रिक्स अपनाकर आप बचे हुए चावल, रोटी, दाल, सब्जी या ब्रेड को नया स्वाद दे सकते हैं। इससे हर दिन कुछ अलग खाने को भी मिल जाता है और फूड वेस्टेज भी कम होती है। आइए जानते हैं कि बचे हुए खाने से बनने वाली 6 आसान और टेस्टी डिश के बारे में।

 

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1. बचे हुए चावल से बनाएं वेज फ्राइड राइस

अगर रात के चावल बच गए हैं तो उन्हें दोबारा गर्म करके वैसे ही खाने की बजाय उनसे वेज फ्राइड राइस बनाया जा सकता है। इसमें कुछ ताजी सब्जियां और हल्के मसाले मिलाकर चावल का स्वाद पूरी तरह बदल जाता है। यह लंच या डिनर के लिए भी बढ़िया विकल्प होता है।

कैसे बनाएं?

  • एक पैन में 1-2 चम्मच तेल गर्म करें। 
  • इसमें प्याज, गाजर, शिमला मिर्च, मटर या अपने पसंद के अनुसार सब्जियां डालकर 3-4 मिनट भून लें। 
  • अब बचे हुए चावल डालें और फिस उसमें स्वादानुसार नमक, काली मिर्च और थोड़ा सोया सॉस मिलाएं। 
  • अब 2-3 मिनट तक चलाते हुए पकांए। 
  • ऊपर से हरा धनिया डालकर गर्मागर्म परोसें। 

2 बची हुई रोटी से बनाएं रोटी नाचोज

 

अगर घर में रोटियां बच गई हैं तो उन्हें फेंकने की जरूरत नहीं है। इन्हें कुरकुरा बनाकर टेस्टी रोटी नाचोज तैयार किए जा सकते हैं। यह शाम कि हल्की भूख के लिए एक मजेदार स्नैक है।

कैसे बनाएं?

  • रोटी को छोटे-छोटे त्रिकोण आकार में काट लें।
  • हल्का तेल लगाकर तवे या ओवन में कुरकुरा कर लें।
  • ऊपर से प्याज, टमाटर, शिमला मिर्च और चाट मसाला डालें।
  • चाहें तो थोड़ा चीज डालकर 2 मिनट गर्म करें।
  • टोमैटो सॉस या हरी चटनी के साथ खाएं।

3. बची हुई दाल से बनाएं दाल पराठा

 

अगर दाल बच गई है तो उसे फेंकने की बजाय आटा गूंधने में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे पराठे टेस्टी भी बनते हैं और उनमें पोषण भी बढ़ जाता है। यह नाश्ते के लिए अच्छा विकल्प है।

कैसे बनाएं?

  • बची हुई दाल में आटा डालकर गूंध लें।
  • हरा धनिया, अजवाइन और बारीक कटी हरी मिर्च मिलाएं।
  • जरूरत हो तो थोड़ा और आटा डालें।
  • पराठा बेलकर तवे पर घी या तेल से सेंक लें।
  • दही, अचार या चटनी के साथ परोसें।

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4. बची हुई सब्जी से बनाएं सैंडविच

अगर आलू, पनीर या मिक्स वेज की सब्जी बच गई है तो उससे झटपट सैंडविच बनाया जा सकता है। इससे बची हुई सब्जी का स्वाद भी नया लगने लगता है और बच्चों को भी पसंद आता है।

कैसे बनाएं?

  • ब्रेड पर बटर या हरी चटनी लगाएं।
  • बची हुई सब्जी को अच्छी तरह फैलाएं।
  • चाहें तो चीज का स्लाइस रखें।
  • दूसरी ब्रेड रखकर तवे या सैंडविच मेकर में सेंक लें।
  • सॉस के साथ सर्व करें।

5. बची हुई खिचड़ी से बनाएं कुरकुरी टिक्की

 

अगर खिचड़ी बच गई है तो उसे दोबारा खाने की बजाय उससे टेस्टी टिक्की बनाई जा सकती है। बाहर से कुरकुरी और अंदर से नरम यह टिक्की बच्चों और बड़ों दोनों को पसंद आती है।

कैसे बनाएं?

  • खिचड़ी में थोड़ा बेसन या ब्रेड क्रम्ब्स मिलाएं।
  • छोटे-छोटे टिक्की का आकार दें।
  • तवे पर हल्का तेल डालकर दोनों तरफ से सुनहरा होने तक सेंकें।
  • हरी चटनी या दही के साथ परोसें।

6. बची हुई ब्रेड से बनाएं ब्रेड उपमा

 

अगर ब्रेड के कुछ स्लाइस बच गए हैं तो उनसे कुछ ही मिनटों में स्वादिष्ट ब्रेड उपमा तैयार किया जा सकता है। यह सुबह के नाश्ते या शाम के स्नैक के लिए अच्छा विकल्प है।

कैसे बनाएं?

  • ब्रेड को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें।
  • पैन में तेल गर्म करके राई, करी पत्ता और हरी मिर्च का तड़का लगाएं।
  • प्याज और टमाटर डालकर हल्का भून लें।
  • अब ब्रेड के टुकड़े डालकर अच्छी तरह मिलाएं।
  • ऊपर से हरा धनिया डालकर गर्मागर्म परोसें।

बचे हुए खाने का इस्तेमाल करते समय रखें इन बातों का ध्यान

  • खाने को हमेशा ढककर फ्रिज में रखें।
  • कोशिश करें कि 24 घंटे के अंदर उसका इस्तेमाल कर लें।
  • खाने को दोबारा अच्छी तरह गर्म करके ही खाएं।
  • अगर खाने की खुशबू, रंग या स्वाद बदल गया हो तो उसका इस्तेमाल न करें।
  • एक ही खाने को बार-बार गर्म करने से बचें।

18 जुलाई राशिफल, शनि और मंगल के प्रभाव से आपके जीवन में क्या बदलाव आएगा? जानिए


आज का दिन आध्यात्मिक और मानसिक स्थिरता के लिए बेहद खास है क्योंकि शनिवार का दिन शनि देव को समर्पित होता है। आज आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है। अंक ज्योतिष के अनुसार आज का मूलांक 9 है, जो मंगल की ऊर्जा और साहस का प्रतीक है। आज चंद्रमा सिंह राशि में प्रवेश कर रहे हैं, जबकि सूर्य कर्क राशि में विराजमान हैं। शनि अपनी स्वराशि कुंभ में स्थित हैं। ग्रहों की यह स्थिति सभी के भीतर नई ऊर्जा का संचार करेगी, जिससे रुके हुए काम तेज़ी से पूरे होंगे।


आज की ऊर्जा कर्मप्रधान और अनुशासित रहने की प्रेरणा देती है। शनि और मंगल के प्रभाव के कारण आज जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना होगा। सही दिशा में किए गए प्रयास आगे चलकर लाभ देंगे। सिंह राशि में चंद्रमा की स्थिति लोगों के आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता को बढ़ाएगी, जो व्यापार और करियर में नए अवसर पैदा करेगी। यह दिन अपनी कमियों को सुधारने और भविष्य की मजबूत योजनाएं बनाने के लिए शानदार है। आइए जानते हैं कि आज का दिन सभी 12 राशियों के लिए कैसा रहने वाला है।

 

 

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राशिफलमेष राशि


ऑफिस में आपकी नेतृत्व क्षमता की सराहना होगी। व्यापार में किसी नए प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर सकते हैं, जिससे भविष्य में बड़ा लाभ होगा। पुराने कर्ज या किसी अटके हुए भुगतान को निपटाने में पैसा खर्च हो सकता है।
आज क्या करें: हनुमान जी को बूंदी का प्रसाद चढ़ाएं।
आज क्या न करें: आज कागजी कार्रवाई में जल्दबाजी न दिखाएं।


वृषभ राशि


नौकरीपेशा जातकों के लिए दिन शानदार है। बॉस आपके काम से प्रभावित होंगे। आर्थिक रूप से दिन मजबूत रहेगा। निवेश के अच्छे अवसर मिलेंगे। लव लाइफ में पार्टनर के साथ रोमांटिक समय बिताने का मौका मिलेगा।
आज क्या करें: शनि मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
आज क्या न करें: सहकर्मियों के साथ किसी भी तरह की गॉसिप न करें।


मिथुन राशि


बिजनेस में नई डील फाइनल हो सकती है लेकिन बातचीत के दौरान अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें। नौकरी में बदलाव के विचार आ सकते हैं। धन लाभ के योग हैं, परंतु सुख-सुविधाओं की चीजों पर अत्यधिक खर्च बजट बिगाड़ सकता है।
आज क्या करें: बहते जल में थोड़े से काले तिल बहा दें।
आज क्या न करें: आज पैसों का लेन-देन करने या किसी को उधार देने से बचें।

 

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कर्क राशि


व्यापार में धन लाभ के प्रबल योग हैं। नौकरी में प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिलने की संभावना है। धन कमाने के नए स्रोत बनेंगे। पुराना निवेश आज लाभ दे सकता है, जिससे आपकी वित्तीय स्थिति मजबूत होगी। परिवार में खुशी का माहौल रहेगा।
आज क्या करें: शिवलिंग पर कच्चा दूध और जल अर्पित करें।
आज क्या न करें: अपनी रणनीतियां किसी बाहरी व्यक्ति से साझा न करें।


सिंह राशि


चंद्रमा आपकी ही राशि में है, जिससे आत्मविश्वास चरम पर रहेगा। आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी। फिजूलखर्ची पर नियंत्रण रखना आवश्यक है, वरना महीने के अंत में परेशानी हो सकती है। गुस्से के कारण पार्टनर से विवाद हो सकता है।
आज क्या करें: सूर्य देव को जल में रोली मिलाकर अर्घ्य दें।
आज क्या न करें: आज किसी भी बात पर गुस्सा करने से बचें।


कन्या राशि


ऑफिस में काम का दबाव अधिक रह सकता है। आज खर्चों की अधिकता रहेगी। जीवनसाथी का भावनात्मक सहयोग आपको संबल देगा। बच्चों की शिक्षा या करियर को लेकर थोड़ी चिंता रह सकती है।
आज क्या करें: किसी जरूरतमंद व्यक्ति को काले रंग के कपड़े दान करें।
आज क्या न करें: आज के दिन घूमने से बचें।

 

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तुला राशि


आज का दिन आपके लिए बेहद भाग्यशाली है। व्यापार में मनमुताबिक मुनाफा होगा और नौकरी में आपकी मेहनत की सराहना की जाएगी। अचानक धन लाभ के योग बन रहे हैं। लॉटरी से लाभ होने की संभावना है।
आज क्या करें: चींटियों को आटा और शक्कर डालें।
आज क्या न करें: सफलता के नशे में चूर होकर अपनों से रूखा व्यवहार न करें।


वृश्चिक राशि


सरकारी क्षेत्र से जुड़े जातकों को आज कोई बड़ी सफलता मिल सकती है। आर्थिक पक्ष मजबूत रहेगा। माता-पिता के स्वास्थ्य में सुधार होगा। जीवनसाथी के साथ किसी पारिवारिक मुद्दे पर गंभीर और सकारात्मक चर्चा हो सकती है।
आज क्या करें: सुंदरकांड का पाठ करें।
आज क्या न करें: आज गाड़ी चलाते समय जल्दबाजी न करें।


धनु राशि


भाग्य का पूरा साथ मिलेगा। यदि आप नौकरी बदलने की कोशिश कर रहे हैं, तो आज कोई अच्छी खबर मिल सकती है। धार्मिक कार्यों में धन खर्च हो सकता है, जिससे आपको मानसिक संतुष्टि और मान-सम्मान मिलेगा।
आज क्या करें: माथे पर हल्दी या केसर का तिलक लगाएं।
आज क्या न करें: भाग्य के भरोसे बैठकर कर्म करना न छोड़ें।

 

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मकर राशि


आज का दिन थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। व्यापार में कोई भी बड़ा जोखिम लेने से बचें। पैसों के मामले में हाथ तंग रह सकता है। अचानक कोई बड़ा खर्च सामने आने से बजट गड़बड़ा सकता है, इसलिए सतर्क रहें।
आज क्या करें: शनि चालीसा का पाठ करें।
आज क्या न करें: पैसों का लेन-देन में गारंटी लेने की भूल न करें।


कुंभ राशि


नौकरीपेशा जातकों को सहकर्मियों का पूरा सहयोग मिलेगा। व्यापार में नए ग्राहक जुड़ेंगे। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। अटका हुआ धन वापस मिल सकता है, जिससे आपकी कई अधूरी योजनाएं फिर से शुरू हो सकेंगी।
आज क्या करें: शमी के पौधे में जल अर्पित करें।
आज क्या न करें: अपने जीवनसाथी पर बेवजह शक करने से बचें।


मीन राशि


नौकरीपेशा लोगों के लिए दिन मेहनत से भरा रहेगा। नौकरी में आपके काम की बारीकी से जांच हो सकती है। धन लाभ सामान्य रहेगा, लेकिन स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों पर कुछ पैसा खर्च हो सकता है। बीमा या निवेश की योजनाएं काम आएंगी।
आज क्या करें: भगवान शिव का महामृत्युंजय मंत्र जपें।
आज क्या न करें: आज कर्ज लेने या देने से बचें।


नोट: यह राशिफल ज्योतिषीय मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।

पाकिस्तान में मुनीर vs मौलाना, फजलुर रहमान ने अपनी ही सेना को कैसे घेरा?


कहा जाता है कि पाकिस्तान की सेना जंग कोई जीती नहीं और चुनाव कोई हारी नहीं। अब उसकी इसी उपलब्धि को एक मौलाना चुनौती देने में जुटा है। पाकिस्तान की सेना से मौलाना ने साफ कहा है कि अगर सियासत करने का इतना ही शौक है तो वर्दी उतारो और चुनाव लड़ लो। पता चल जाएगा कि जनता किसके साथ है। अब भला जो सेना खुद चुनाव कराती हो, सीएम-पीएम चुनती हो… उसको यह शब्द कितने अच्छे लगेंगे।

 

कुछ लोगों का कहना है कि अगर यह बयान किसी नेता ने दिया होता तो बंदूक की दम पर सत्ता चलाने वाली पाकिस्तान की सेना कब का उसे निपटा चुकी थी। मसला यहां मौलाना है और उस मौलाना का, जिसकी पकड़ पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर से बलूचिस्तान तक है। हालांकि सेना ने मौलाना के खिलाफ नेताओं और यूट्यूबरों की फौज उतार दी है। चौतरफा बयानबाजी जारी है। कोई मौलाना को देशद्रोही बता रहा तो कोई कौम का दुश्मन।

 

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दूसरी तरफ मौलाना भी अपनी जबान पर टिका है। यही कारण है कि पूरा मामला ‘मौलाना vs मुनीर’ होता जा रहा है। कहा जा रहा है कि सेना मौलाना से कुछ ऐसा करवाना चाहती है, जो पहले हाफिज सईद उसके लिए करता था, लेकिन मौलाना होशियार निकला। उसने हजारों की भीड़ के सामने न केवल आसिम मुनीर के प्लान की पोल खोल दी, बल्कि सेना के इशारे पर नाचने से भी मना कर दिया है। इसे पाकिस्तान की सैन्य भाषा में बगावत कहा जा रहा है।

 

आइये बात करते हैं कि पाकिस्तान के बेहद प्रभावशाली मौलाना और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम के सरबराह फजलुर रहमान के कसूर जलसे की, जिसने पाकिस्तान के सैन्य और सियासी हलकों में तूफान ला दिया है।

कसूर जलसे में क्या हुआ?

13 अप्रैल को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के कसूर में मौलाना फजलुर रहमान का जलसा होना था। मगर पाकिस्तान की सेना ने अनुमति नहीं दी। मौलाना फजलुर रहमान ने सेना की मंजूरी बगैर कसूर में जलसा किया और आसिम मुनीर पर खूब हमला बोला। मौलाना ने खुलासा किया कि पाकिस्तान की सेना चाहती थी कि वे हथियारबंद लश्कर का गठन करें, ताकि बाद यह लड़ाके बलूचिस्तान, खैबरपख्तूनख्वा और पीओके में सेना के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों को निशाना बना सके। हालांकि मौलाना ने साफ मना कर दिया और कहा कि मुझे इसका वेतन नहीं मिलता है।

‘सेना शहादत के लिए वेतन लेती है’

जलसे में मौलाना फजलुर रहमान ने पाकिस्तान के जान गंवाने वाले सैनिकों पर बेहद कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, ‘वे (सेना) कहते हैं कि हमारे जवान भी तो शहीद हो रहे हैं। ओ बाबा तेरे जवानों ने पेटी ही इसलिए बांधी है। तनख्वाह इसी की ले रहे हैं कि उन्हें मुल्क की सलामती के लिए लड़ना है। तुम खून का मेरे ऊपर क्या एहसान डालते हो। मेरे खून पसीने के टैक्स से इसी बात के लिए तो तनख्वाह ले रहे हो।’ 

मौलाना से क्या करवाना चाहती है पाकिस्तानी सेना?

फजलुर रहमान ने आगे पाकिस्तान सेना की पोल खोल दी और कहा कि हमें कहते हैं कि तुम लश्कर निकालो। तुम असलहा लेकर मुसल्लह (हथियारबंद) गिरोहों के साथ लड़ो। मैंने कोई तनख्वाह नहीं ली। मैं कोई लश्कर नहीं बनाऊंगा। तुम चले जाओंगे… तुम मेरी सरजमीं को आने वाले नस्लों तक जातीय दुश्मनी तक धकेल रहे हो। हमेशा-हमेशा के लिए कत्लोगारत की तरफ धकेल रहे हो। यह किसी और को समझाओ। यह हमें मत समझाया करो।

 

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‘वर्दी उतारा और चुनाव लड़ो’

मौलाना ने चुनौती भरे स्वरों में कहा कि अगर आपको सियासत करनी है तो वर्दी उतारकर आइये। पता चल जाएगा कि वर्दी वाले को लोग क्या वोट देते हैं। यह आपका इख्तियार (अधिकार) है कि आप जिसको चाहेंगे तो हुकूमत देंगे और जिससे चाहेंगे तो हुकूमत छीन लेंगे।

टकराव के मूड में मौलाना

अब गुजरांवाला समेत पाकिस्तान के कई शहरों में मौलाना फजलुर रहमान के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा रही है। 28 जुलाई को पाकिस्तान की एक अदालत ने उन्हें तलब भी किया है। अब देखना यह होगा कि पाकिस्तान की सेना मौलाना के खिलाफ कोई कदम उठाती है या अपने कदम पीछे खींचती है, क्योंकि कसूर जलसे में ही मौलाना ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर कोई हाथ उनकी तरफ बढ़ेगा तो उसे धर से काट दिया जाएगा।

क्या सत्ता में मजबूत होगी सेना की पकड़ या बगावत का खौफ

कुछ विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान की सेना अभी चौतरफा घिरी है। चार में से दो प्रांत में हालात बेकाबू हैं। बलूचिस्तान काफी हद तक हाथ से निकल चुका है। खैबरपख्तूनख्वा में टीटीपी ने कहर बरपा रखा है। पीओके में जनता सड़कों पर उतरी है। ऐसे में सेना नहीं चाहती है कि उसके सबसे मजबूत गढ़ पंजाब में कोई उधल-पुथल हो। यही कारण कि मौलाना के खिलाफ कदम उठाने से पहले पाकिस्तान की सेना फूंक-फूंककर कदम रख रही है। 

 

दूसरी तरफ कुछ विश्लेषकों की राय अलग है। उनका मानना है कि पीओजेके, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में मची उथल-पुथल सेना को सत्ता में अपनी पकड़ और मजूबत करने का मौका देगी। मौलाना के बयान सत्ता हथियाना का एक माध्यम बन सकता है, क्योंकि अगर मौलाना पर एक्शन लिया गया तो हंगामा होना लाजिमी है। ऐसे में सेना नागरिक सरकार के स्थान पर खुद ही कमान संभाल सकती है। 

मौलाना की क्यों हो रही तारीफ?

पाकिस्तान में सेना से भिड़ना मानो शेर की मांद में घुसने जैसा है। ऐसे में न केवल पाकिस्तान के भीतर, बल्कि दुनियाभर में फैले पाकिस्तानी मौलाना के बयान की तारीफ करने में जुटे हैं। उनका कहना है कि मौलाना में कोई बात तो है, जो इस्लामाबाद के ठीक बंगल में सेना को खुली चुनौती देने में जुटे हैं। सेना के खिलाफ उनका एक-एक शब्द जिगरवाला है। वरना इमरान खान ने आसिम मुनीर से भिड़ने की कोशिश की और उनके साथ क्या हुआ? यह दुनिया देख ही रही है। 

E20 पेट्रोल से क्या-क्या खराब हो रहा है? गाड़ियां बनाने वाले मैकेनिक्स से जानिए


देशभर में पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण यानी E20 पेट्रोल की आपूर्ति तेजी से बढ़ाई जा रही है। सरकार इसे कच्चे तेल के आयात में कमी, किसानों की आय बढ़ाने और प्रदूषण घटाने की दिशा में बड़ा कदम बता रही है। वहीं दूसरी ओर पुराने वाहन मालिकों की चिंताएं भी बढ़ रही हैं। ऑटो वर्कशॉप पर पहुंचने वाले कई ग्राहक माइलेज कम होने, इंजन की परफॉर्मेंस घटने, स्टार्टिंग में दिक्कत, फ्यूल सिस्टम में खराबी और समय से पहले सर्विस की जरूरत पड़ने जैसी शिकायतें लेकर पहुंच रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि सभी वाहनों में ऐसी समस्या नहीं आती और इसका सीधा संबंध वाहन की उम्र, तकनीक, रखरखाव और E20 कम्पैटिबिलिटी से है।

 

लखनऊ के ऑटो मैकेनिक शकील अहमद बताते हैं कि पिछले कुछ महीनों में उनकी वर्कशॉप पर 2018 से पहले की बाइक और स्कूटर लेकर आने वाले ग्राहकों की संख्या बढ़ी है। अधिकांश वाहन चालक माइलेज कम होने, सुबह इंजन स्टार्ट होने में दिक्कत, एक्सीलेरेशन कम मिलने और इंजन के रफ चलने की शिकायत कर रहे हैं। शकील का कहना है कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन लंबे समय तक टंकी में रहने पर नमी को अपनी ओर खींच सकता है। अगर वाहन कई दिनों तक खड़ा रहे तो फ्यूल सिस्टम पर इसका असर दिखाई देने लगता है। ऐसे मामलों में फ्यूल फिल्टर, स्पार्क प्लग, थ्रॉटल बॉडी और इंजेक्टर की सफाई पहले की तुलना में अधिक करनी पड़ रही है। उनका कहना है कि समय पर सर्विस नहीं कराने वाले वाहनों में यह समस्या ज्यादा देखने को मिल रही है।
 

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फिल्टर, इंजेक्टर और पंप पर बढ़ रहा दबाव

कानपुर के ऑटो मैकेनिक राजेश वर्मा का कहना है कि E20 पेट्रोल आने के बाद पुरानी कारों में फ्यूल फिल्टर जल्दी चोक होने के मामले बढ़े हैं। कई ग्राहकों की गाड़ियों में इंजेक्टर की सफाई सामान्य से पहले करनी पड़ रही है, जबकि कुछ मामलों में फ्यूल लाइन और रबर सील भी बदलनी पड़ी है। राजेश बताते हैं कि पहले जहां कई वाहन 20 से 25 हजार किलोमीटर तक बिना किसी बड़ी दिक्कत के चलते थे, वहीं अब कुछ पुरानी गाड़ियों में 10 से 15 हजार किलोमीटर के भीतर ही फ्यूल सिस्टम की जांच और सफाई की जरूरत पड़ रही है। उनका कहना है कि यदि समय पर सर्विस न कराई जाए तो फ्यूल पंप और इंजेक्टर खराब होने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे वाहन मालिक का खर्च भी बढ़ सकता है।

 

फर्रुखाबाद के टू-व्हीलर वर्कशॉप संचालक विनीत झा का कहना है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल के बाद पुरानी गाड़ियों का औसत (माइलेज) पहले की तुलना में कम हुआ है। इसके कारण वाहन मालिकों को पहले से जल्दी-जल्दी सर्विस करानी पड़ रही है। उन्होंने बताया कि नई गाड़ियों में भी कुछ मामलों में इंजेक्टर में कचरा फंसने की शिकायतें सामने आई हैं। उनके अनुसार पेट्रोल और एथेनॉल के गुण अलग-अलग होने के कारण फ्यूल सिस्टम में जमा अशुद्धियां पंप और इंजेक्टर तक पहुंचकर परेशानी पैदा कर सकती हैं।

 

विनीत झा ने बताया कि हाल ही में बरेली से आई एक रॉयल एनफील्ड बुलेट की पेट्रोल टंकी में एथेनॉल चाशनी जैसी परत बनकर जम गया था। इसके चलते फ्यूल पंप खराब हो गया और इंजेक्टर तक पेट्रोल की सप्लाई बंद हो गई। पूरी टंकी, फ्यूल लाइन और इंजेक्टर की सफाई के बाद ही बाइक दोबारा चल सकी।

 

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टू-व्हीलर चालकों की सबसे बड़ी शिकायत- माइलेज और पिकअप

वर्कशॉप संचालकों के अनुसार सबसे ज्यादा शिकायतें बाइक और स्कूटर मालिकों से मिल रही हैं। कई लोगों का कहना है कि E20 पेट्रोल भराने के बाद माइलेज में कमी आई है, जबकि कुछ वाहन चालकों ने पिकअप कमजोर होने और इंजन के पहले जैसा रिस्पॉन्स नहीं मिलने की बात कही है। हालांकि, यह समस्या हर वाहन में नहीं देखी गई है।


कारों में क्या दिक्कतें आ रही हैं?

मैकेनिकों के अनुसार E20 के लिए तैयार नहीं की गई पुरानी कारों में समय के साथ फ्यूल पाइप, रबर सील, फ्यूल पंप और इंजेक्टर पर असर पड़ सकता है। यदि समय पर सर्विस और जांच नहीं कराई जाए तो मरम्मत का खर्च बढ़ सकता है। वहीं नई E20-रेडी कारों में ऐसी शिकायतें अपेक्षाकृत कम देखने को मिल रही हैं।

 

क्यों घट जाता है माइलेज?

ऑटो विशेषज्ञों के अनुसार, एथेनॉल की ऊर्जा क्षमता सामान्य पेट्रोल की तुलना में कम होती है। इसी वजह से कई वाहनों में 3 से 8 प्रतिशत तक माइलेज कम महसूस हो सकता है। वास्तविक अंतर वाहन की तकनीक, इंजन ट्यूनिंग और ड्राइविंग स्टाइल पर निर्भर करता है।ऑटो विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वाहन निर्माता कंपनी ने आपकी कार या बाइक को E20 कम्पैटिबल घोषित किया है तो सामान्य परिस्थितियों में घबराने की जरूरत नहीं है लेकिन पुराने वाहनों में समय-समय पर फ्यूल फिल्टर, इंजेक्टर, फ्यूल लाइन और फ्यूल पंप की जांच कराना जरूरी है। लंबे समय तक वाहन बिना चलाए खड़ा रखने से भी बचना चाहिए।

बच्चों का फोन यूज़ कैसे कंट्रोल करें? जानें आसान और असरदार तरीके


आजकल छोटे बच्चे भी मोबाइल फोन का खूब इस्तेमाल करने लगे हैं। पढ़ाई से लेकर गेम खेलने और वीडियो देखने तक ज्यादातर उनकी नजर मोबाइल स्क्रीन पर ही रहती है। ऐसे में सभी लोगों के मन में बस यही सवाल आता है कि बच्चों को मोबाईल फोन से कैसे दूर करा जाए। बच्चों का फोन इस्तेमाल पूरी तरह बंद करना जरूरी नहीं है बल्कि उसे सही तरीके से कंट्रोल करना ज्यादा जरूरी है। अगर शुरुआत से ही कुछ आसान नियम बनाए जाएं और परिवार भी उनका पालन करे तो बच्चे धीरे-धीरे मोबाइल का इस्तेमाल कम करना सीख जाएंगे।

 

जरूरत से ज्यादा फोन इस्तेमाल करने की वजह से बच्चों की पढ़ाई, नींद और आखों की सेहत पर भी असर पड़ सकता है। अगर आपका बच्चा भी घंटों फोन चलाता है और बार-बार मोबाइल मांगता है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। कुछ आसान आदतें अपनाकर और फोन की सही सेटिंग्स का इस्तेमाल करके आप बच्चों का स्क्रीन टाइम कम कर सकते हैं।

 

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फोन इस्तेमाल करने का समय तय करें

सबसे पहले बच्चे के लिए रोजाना मोबाइल इस्तेमाल करने का एक तय समय बनाएं। जैसे पढ़ाई पूरी होने के बाद 30 मिनट या 1 घंटा ही फोन दें। इससे बच्चे को भी पता रहेगा कि कब फोन इस्तेमाल करना है और कब नहीं।

फोन में पेरेंटल कंट्रोल चालू करें

अगर बच्चा एंड्रॉइड या आई फोन इस्तेमाल करता है तो उसमें मिलने वाले पेरेंटल कंट्रोल फीचर को ऑन करें। इससे आप यह तय कर सकते हैं कि बच्चा कौन-से ऐप इस्तेमाल करेगा, कितना समय फोन चलाएगा और कौन-सा कंटेंट देख पाएगा।

 

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खाने और सोने के समय फोन न दें

खाना खाते समय या सोने से पहले बच्चों को मोबाइल देने से बचें। इससे उनकी नींद खराब हो सकती है और फोन की आदत भी बढ़ सकती है। कोशिश करें कि सोने से कम से कम एक घंटा पहले फोन बंद करवा दें।

खुद भी फोन कम इस्तेमाल करें

बच्चे वही सीखते हैं जो घर में देखते हैं। अगर माता-पिता हर समय फोन में लगे रहेंगे तो बच्चे भी वैसा ही करेंगे। इसलिए बच्चों के सामने खुद भी मोबाइल का इस्तेमाल कम करें।

फोन की जगह दूसरी एक्टिविटी कराएं

बच्चों को आउटडोर गेम, किताबें पढ़ने, ड्राइंग, पेंटिंग, पहेलियां या परिवार के साथ समय बिताने जैसी गतिविधियों में शामिल करें। इससे उनका ध्यान मोबाइल से हटेगा।

बच्चों से बात करें

बच्चे का फोन अचानक छीनने के बजाय उसे प्यार से समझाएं कि ज्यादा मोबाइल चलाने से क्या नुकसान हो सकते हैं। जब बच्चा वजह समझेगा तो नियम मानने की संभावना भी बढ़ेगी।

जरूरत पड़ने पर फैमिली या स्क्रीन टाइम फीचर का इस्तेमाल करें

एंड्रॉइड में गूगल फैमिली और आईफोन में स्क्रीन टाइम जैसे फीचर उपलब्ध हैं। इनकी मदद से आप ऐप की समय सीमा तय कर सकते हैं, नए ऐप डाउनलोड करने की अनुमति नियंत्रित कर सकते हैं और बच्चे की स्क्रीन टाइम रिपोर्ट भी देख सकते हैं।

 

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कौन-से ऐप्स बच्चों के लिए सुरक्षित हैं?

  • गूगल फैमिली लिंक (Google Family Link)
  • यू-ट्यूब किड्स (YouTube Kids)
  • किड्स मोड (Kids Mode)
  • एप्पल स्क्रीन टाइम (Apple Screen Time)

ज्यादा मोबाइल चलाने से क्या नुकसान हो सकते हैं?

  • आंखों पर असर पड़ सकता है।
  • नींद खराब हो सकती है।
  • पढ़ाई में ध्यान कम लग सकता है।
  • शारीरिक गतिविधियां कम हो सकती हैं।
  • चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है।

किन लोगों को मिलेगा लक्ष्मी मां का आशीर्वाद और होगा आर्थिक लाभ?


आज के दिन कुछ लोगों पर माता लक्ष्मी की विशेष कृपा रहेगी। साथ ही लोगों पर शुक्र देव का प्रभाव भी पड़ेगा। हिंदू पंचांग के मुताबिक आज आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि है। आज का मूलांक 8 है, जो शनि देव के प्रभाव को दर्शाता है। इससे कर्म, न्याय और भौतिक सुखों के बीच एक सुंदर संतुलन देखने को मिलेगा। चंद्रमा आज सिंह राशि में विराजमान रहेंगे, जिससे सिंह राशि के लोगों में लीडरशिप क्वालिटी उभरकर सामने आएगी। सूर्य और बुध मिथुन राशि में रहेंगे, जिससे बुधादित्य योग बनेगा। इसके अलावा शुक्र ग्रह कर्क राशि में होंगे। आज का दिन बौद्धिक और आर्थिक रूप से बेहद फलदायी रहेगा।


आज की ऊर्जा हमें अनुशासन के साथ अपने लक्ष्यों को पूरा करने की प्रेरणा देती है। जहां एक ओर मूलांक 8 का प्रभाव हमें कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित करेगा, वहीं दूसरी तरफ शुक्रवार होने की वजह से प्रेम, सौंदर्य और भौतिक सुख-सुविधाओं की ओर लोगों का झुकाव बढ़ेगा। आज का दिन निवेश, नए व्यापार और पारिवारिक संबंधों को मजबूत करने के लिए शानदार है। हालांकि लोगों को अपने ऊपर संयम रखने की जरूरत है। आइए जानते हैं मेष से लेकर मीन राशि तक सभी राशियों के लिए आज का दिन कैसा रहने वाला है।

 

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राशिफल


मेष


ऑफिस में आज आपको ज्यादा काम करना होगा, जिसमें सहकर्मियों का पूरा सहयोग मिलेगा। आज धन लाभ के अच्छे योग हैं, लेकिन फिजूलखर्ची करने से बचना होगा। जीवनसाथी के साथ रिश्ते बेहतर होंगे। शाम को परिवार के साथ अच्छा समय बीतेगा।
आज क्या करें: माता लक्ष्मी को लाल गुलाब अर्पित करें।
आज क्या न करें: नए काम में जल्दबाजी में धन निवेश करने से बचें।


वृषभ


व्यापार में नए सौदे मिल सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिल सकती है। पैतृक संपत्ति से लाभ होने के संकेत हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी। प्रेम जीवन में रोमांस बढ़ेगा।
आज क्या करें: किसी कन्या को सफेद मिठाई खिलाएं।
आज क्या न करें: आज किसी से उधार लेने और देने से बचें।


मिथुन


लेखन, कला और क्रिएटिव काम करने वाले लोगों का आज का दिन बेहद शानदार रहेगा। पुराने कर्ज को चुकाने में धन खर्च हो सकता है। परिवार में भाई-बहनों से बहस हो सकती है। शांत रहकर बातचीत से मामला सुलझाएं।
आज क्या करें: पक्षियों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था करें।
आज क्या न करें: किसी भी व्यक्ति की बुराई न करें।

 

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कर्क


नौकरी बदलने के सकारात्मक योग बन रहे हैं। कारोबारी यात्राएं सफल और लाभदायक रहेंगी। भौतिक सुख-साधनों और विलासिता की वस्तुओं पर धन खर्च होगा। जीवनसाथी की सलाह आज आपके बहुत काम आएगी।
आज क्या करें: शिवलिंग पर दूध और जल का अभिषेक करें।
आज क्या न करें: आज गुस्से में आकर कोई भी पारिवारिक फैसला न लें।


सिंह


चंद्रमा आपकी ही राशि में रहेंगे, जिससे आपका प्रभाव बढ़ेगा। आज अटके हुए सरकारी काम पूरे होंगे। आर्थिक रूप से आज का दिन बेहद मुनाफे वाला रहेगा। दोस्तों के साथ घूमने का प्लान बन सकता है।
आज क्या करें: सूर्य देव को तांबे के लोटे से जल अर्पित करें।
आज क्या न करें:  अहंकार को अपने रिश्तों के बीच न आने दें।


कन्या


ऑफिस में काम का दबाव अधिक रहेगा। दुश्मनों और विरोधियों से सावधान रहने की जरूरत है। आज लेन-देन के मामलों में सावधानी बरतें। परिवार के किसी सदस्य की सेहत को लेकर चिंता रह सकती है। पार्टनर को समय दें।
आज क्या करें: जरूरतमंदों में हरी मूंग की दाल का दान करें।
आज क्या न करें: आज किसी भी तरह के कानूनी पचड़े में न पड़ें।

 

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तुला


नौकरीपेशा लोगों को बड़ी उपलब्धि हासिल हो सकती है। फंसा हुआ पैसा वापस मिलेगा, जिससे आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। जीवनसाथी के साथ तालमेल बना रहेगा। आपकी सेहत बिल्कुल दुरुस्त रहेगी।
आज क्या करें: छोटी कन्याओं का आशीर्वाद लें।

आज क्या न करें: ज्यादा आत्मविश्वास में आकर किसी का अनादर न करें।


वृश्चिक


मेहनत का पूरा फल मिलेगा। बॉस आपके काम की तारीफ करेंगे। नया स्टार्टअप शुरू करने के लिए समय अच्छा है। अचानक धन लाभ के योग हैं, लेकिन सुख-सुविधाओं पर खर्च भी बढ़ सकता है। घर में शांति रहेगी।
आज क्या करें: हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाएं।
आज क्या न करें: आलस और टालमटोल की आदत से बचें।


धनु


भाग्य का पूरा साथ मिलेगा। धार्मिक या सामाजिक कामों में रुचि बढ़ेगी। आर्थिक स्थिति सामान्य से बेहतर रहेगी। परिवार के साथ किसी धार्मिक यात्रा पर जाने का योग बन रहा है। घर का माहौल खुशनुमा रहेगा।
आज क्या करें: माथे पर केसर या हल्दी का तिलक लगाएं।
आज क्या न करें: अपने गुरु या बड़ों के विचारों का अनादर न करें।

 

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मकर


ऑफिस में थोड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। सहकर्मियों के साथ तालमेल बिठाने में दिक्कत आ सकती है। आज का दिन बजट बनाकर चलने का है। अचानक बड़े खर्च सामने आ सकते हैं।
आज क्या करें: शनि मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
आज क्या न करें: गाड़ी चलाते समय लापरवाही बिल्कुल न बरतें।


कुंभ


बिजनेस में बड़ा मुनाफा होने की उम्मीद है। नए लोगों से संपर्क व्यापार को नई दिशा देगा। आज आपकी सैलरी बढ़ सकती है। जीवनसाथी के साथ चल रहा मनमुटाव खत्म होगा और आपसी प्रेम गहरा होगा।
आज क्या करें: गरीबों को अन्न दान करें।
आज क्या न करें:  किसी पर भरोसा न करें।


मीन


नौकरी में आपके काम की सराहना होगी, लेकिन काम का बोझ थोड़ा अधिक रह सकता है। संयम से काम लें। रुका हुआ पैसा मिलने की उम्मीद है, लेकिन लेन-देन के मामलों में लिखित दस्तावेज जरूर रखें।
आज क्या करें: केले के पेड़ की पूजा करें।
आज क्या न करें: आज अपनी योजनाएं किसी को न बताएं।

 

नोट: यह राशिफल ज्योतिषीय मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।

इराक से पाकिस्तान बॉर्डर तक, अमेरिका ने ईरान में की भीषण बमबारी


अमेरिका और ईरान के बीच जंग अन्य क्षेत्रों तक फैलने लगी है। दक्षिणी ईरान में अमेरिकी सेना ने इराक से पाकिस्तान सीमा तक फैले ईरानी क्षेत्र में भीषण बमबारी की। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक अमेरिका हमलों में 35 से ज्यादा लोगों की जान गई और 300 से अधिक लोग घायल हुए है। 

 

गुरुवार तड़के अमेरिका सेना ने अपने हमलों का विस्तार किया और राजधानी तेहरान के आसपास सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। जवाब में आईआरजीसी ने अमेरिका के सहोयीगी खाड़ी देशों पर बैलेस्टिक मिसाइल और ड्रोन से हमला किया।

 

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अमेरिका ने कहां-कहां पर किया हमला?

ईरान ने आखिरी तक प्रतिरोध दिखाने की कसम खाई। अमेरिकी सेना ने हमदान, होर्मोजगान, खुजेस्तान, लोरेस्तान, मरकजी, सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांतों पर भीषण बमबारी की। ईरान के बैलेस्टिक मिसाइल और अंतरिक्ष कार्यक्रम के गढ़ उत्तरी सेमनान प्रांत में भी हमलों की खबर है। 

 

बुधवार की रात फारस की खाड़ी पर स्थित चाबहार शहर में भी बमबारी हुई। अमेरिकी सेना ने ईरान की नाकेबंदी भी शुरू कर दी है। इस बीच खार्ग द्वीप जाने वाले एक तेल टैंकर भी मिसाइल से हमला किया गया। अमेरिका सेना का कहना है कि कई चेतावनियों को नजरअंदाज करने के बाद जहाज पर अटैक किया गया है। ईरान के सबसे बड़े बंदरगाह शहर बंदर अब्बास में आईआरजीसी और उसकी नौसेना सुविधाओं को भी निशाना बनाया गया है।

होर्मुज हमारी लक्ष्मण रेखा: ईरानी सेना

ईरान की सेना ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी हाल में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिका का नियंत्रण स्थापित नहीं होने देगी। बयान में कहा, ‘हम किसी भी परिस्थिति में अमेरिका को होर्मुज जलडमरूमध्य में दखल देने की अनुमति नहीं देंगे। यह ईरान की अभेद्य लक्ष्मण रेखा है।’ 

 

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खाड़ी देशों को ईरान की धमकी

ईरान हर अमेरिकी हमले का जवाब खाड़ी देशों पर पलटवार करके दे रहा है। गुरुवार तड़के ईरान ने कुवैत, जॉर्डन और बहरीन पर ड्रोन और मिसाइल से हमला किया। धमकी भी दी कि हमलों की संख्या बढ़ भी सकती है। एक बयान में ईरान की सेना ने कहा, ‘हमारे पड़ोसियों को यह पता होना चाहिए कि अमेरिकियों को अड्डा मुहैया कराना और उन्हें ईरानी धरती पर गोलीबारी करने की अनुमति देना अस्वीकार्य है और इसका जवाब जरूर दिया जाएगा।’

 

ईरानी सेना के खातम अल-अनबिया केंद्रीय मुख्यालय के ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अकरमिनिया ने धमकी दी कि अगर ट्रंप ने ईरानी बुनियादी ढांचे पर हमला किया तो इस क्षेत्र का सारा बुनियादी ढांचा ईरान के शक्तिशाली सशस्त्र बलों के कठोर हमलों से तबाह हो जाएगा।

100 से ज्यादा वैज्ञानिकों ने छोड़ा ISRO, सरकार ने सख्त किए इस्तीफे के नियम


भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के गगनयान और दूसरे अहम मिशन से जुड़े  100 से अधिक वैज्ञानिकों ने पिछले एक साल में इस्तीफा दे दिया है। नतीजा यह हुआ कि इसरो के डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस को स्वैच्छिक रिटायरमेंट और इस्तीफा से जुड़े नियमों को सख्त करना पड़ा है। अब इस्तीफा और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के मामले में मुख्यालय से अनुमति लेनी होगी। इसरो के चेयरमैन वी. नारायणन ने भी लोगों के जाने की बात मानी है। उन्होंने कहा कि, ‘बहुत से लोग जाते हैं, लेकिन यह हर संगठन का हिस्सा है।

 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 14 जुलाई को जारी इंटरनल मेमोरैंडम में केंद्र सरकार ने इसरो केंद्रों को निर्देश दिया है कि वे गगनयान और अन्य प्रमुख मिशनों से जुड़े ग्रुप ‘A’ के ​​वैज्ञानिक और तकनीकी कर्मियों से इस्तीफे या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के अनुरोध को स्वीकार न करें। इस्तीफा और सेवानिवृत्ति के सभी अनुरोध अब अंतरिक्ष विभाग को भेजे जाएंगे। दस्तावेज में कहा गया कि हाल ही में लोगों के छोड़ने की बढ़ती संख्या ने राष्ट्रीय महत्व के प्रोजेक्ट्स पर बुरा असर डाला है।

 

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यूनिट प्रमुखों से अधिकार लिया वापस

25 नवंबर 2020 को सरकार ने इसरो सेंटर के डायरेक्टर और यूनिट के प्रमुखों को ग्रुप ए के साइंटिफिक और टेक्निकल स्टाफ के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति और इस्तीफे के अनुरोध स्वीकार करने का अधिकार भी वापस ले लिया है। माना जा रहा है कि सरकार ने यह कदम इस वजह से उठाया है ताकि राष्ट्रीय हित के मिशनों पर कोई असर न पड़े।

कितने लोगों ने छोड़ी नौकरी

उधर, डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस ने इस्तीफा देने वाले कर्मचारियों की संख्या का खुलासा नहीं किया है, लेकिन टाइम्स ऑफ इंडिया ने सूत्रों के हवाले से बताया कि पिछले साल 100 से 120 लोगों ने इस्तीफा दिया है। रिपोर्ट में बताया गया कि यूआर राव सैटेलाइट सेंटर के 80 कर्मचारियों और विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर के 20 वैज्ञानिकों ने नौकरी छोड़ी है। 

 

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केंद्रीय मंत्री ने क्या कहा?

इसरो छोड़ने वाले वैज्ञानिकों से जुड़े सवाल पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि इसरो में बहुत बड़ी संख्या में कर्मचारी हैं। जैसे-जैसे लोग छोड़ते हैं, वैसे-वैसे कई लोग जुड़ते भी हैं। कई लोग गए हैं तो कई लोग आए भी हैं।