Home Blog

प्राइमरी शिक्षकों के लिए TET पास करना अनिवार्य, एक साल समयसीमा बढ़ी


सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में प्राइमरी शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET पास करना अनिवार्य कर दिया है। हालांकि शीर्ष अदालत ने टीईटी पास करने की मौजूदा समयसीमा 31 अगस्त 2027 से बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दिया है। जस्टिस दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह अहम फैसला सुनाया है। 

 

एक आंकड़े के मुताबिक देशभर में करीब 30 लाख शिक्षक टीईटी उत्तीर्ण नहीं है। अब शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि इन शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक टीईटी पास करना होगा। 

 

यह भी पढ़ें: पंजाब निकाय चुनावों में AAP की आंधी, विपक्ष को धांधली क्यों लग रही?

 

कई राज्य सरकारों और शिक्षक संगठनों की पुनर्विचार याचिका पर न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई की। याचिका में शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को छूट देने की मांग की गई थी। हालांकि अदालत ने सेवारत शिक्षकों को छूट देने से इनकार कर दिया है।

 

यह भी पढ़ें: बाल पकड़कर घसीटा, पेट-पीठ पर लात-घूसों की बारिश; महिला सपा नेता के साथ मारपीट

 

अदालत ने कहा कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए योग्य शिक्षक जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल सितंबर में सेवारत शिक्षकों और भविष्य में नियुक्ति पाने वाले शिक्षकों के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य किया था। वहीं जिन शिक्षकों के पास पांच साल से कम की सेवा शेष बची थी, उन्हें छूट दी गई थी। हालांकि यह भी स्पष्ट किया था कि उन्हें प्रमोशन नहीं मिलेगा।

क्या गर्मी में ऑयली स्किन वालों को स्लगिंग करनी चाहिए?


सोशल मीडिया पर हर कोई ग्लास जैसी त्वचा के बारे में बात कर रहा है। क्या आप जानते हैं कि ग्लास जैसी त्वचा पाने के लिए आपको अपने स्किन केयर रूटीन में स्लगिंग को शामिल करना पड़ता है। स्लगिंग एक ऐसी प्रकिया है जो त्वचा को मॉश्चराइज रखने में मदद करता है। क्या यह तरीका उन लोगों के लिए फायदमेंद है जिनकी त्वचा ऑयली है? हमारे यहां पर तापमान ज्यादा गर्म और उमस भरा होता है। ऐसे में स्लगिंग करने से ओवर मॉश्चराइजेशन का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि क्या स्लगिंग सबके लिए फायदेमंद है।

 

स्लगिंग एक स्किन केयर रूटीन है जिसमें हम चेहरे पर रात में सोने से पहले पेट्रोलियम जेली या मॉश्चराइजर का इस्तेमाल करते हैं। इससे त्वचा में नमी बनी रहती है, ड्राइनेस और इरिटेशन की समस्या कम होती है। पेट्रोलियम जेली का इस्तेमाल करने के बाद हमारी त्वचा ग्लास की तरह चमकने लगती है।

 

यह भी पढ़ें: मास्टरशेफ विनर पंकज भदौरिया को हुआ ब्रेस्ट कैंसर, जानिए इस बीमारी के लक्षण

क्या भारतीयों के लिए फायदेमंद है स्लगिंग?

स्लगिंग भारतीयों के लिए बहुत फायदेमंद है। इससे आपकी त्वचा डिहाइड्रेटेड नहीं लगती है। अगर आपकी ऑयली स्किन है तो स्लगिंग करने से बचना चाहिए। स्लगिंग की वजह से मुंहासे की समस्या बढ़ जाती है।

स्लगिंग हर किसी के लिए नहीं होता है। अगर आपको एक्ने की समस्या है तो स्लगिंग करने से बचना चाहिए। ये आपकी परेशानियों को बढ़ाने का काम कर सकता है।

कैसे करें स्लगिंग?

सबसे पहले चेहरे को फेसवॉश से चेहरे को धो लें। 
इसके बाद सीरम और मॉश्चराइज लगाएं।
चेहरे में जब सभी चीजें अच्छे से एब्जॉर्ब हो जाएं तब चेहरे पर पेट्रोलियम जेली लगाएं।
पेट्रोलियम जेली लगाने के 30 मिनट तक इंतजार करें ताकि सभी प्रोडक्ट्स अच्छे से सेटल हो जाएं।

 

यह भी पढ़ें: स्टार्स की तरह दिखने की वजह से इन कलाकारों को मिला काम, फिर कहां हुए गायब?

स्लगिंग का फायदा

  • एजिंग को रोकता है-  स्लगिंग करने से त्वचा मुलायम और मॉश्चराइज रहती है जिससे झुर्रियां कम होती है।
  • फ्री रेडिकल्स से बचाता है- स्लगिंग त्वचा को फ्री रेडिकल्स से बचाती है जिससे इरिटेशन की समस्या नहीं होती है।
  • डैमेज से बचाता है- स्लगिंग करने से वॉटर लॉस नहीं होता है और नमी बनी रहती है।

प्रतिदिन करें गणेश चालीसा का पाठ, हर कार्य में मिलेगी सफलता


गणेश चालीसा का पाठ बेहद खास होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो भक्त गणेश चालीसा का पाठ करता है, उनके जीवन के सारे विघ्नों यानी संकटों को गणेश भगवान खत्म कर देते हैं। इसी वजह से गणेश भगवान को विघ्नहर्ता कहा जाता है। गणेश भगवान जी को सफलता, सुख-समृद्धि, शुभ आरंभ और बुद्धि का भगवान माना जाता है। गणेश भगवान के स्मरण से व्यक्ति को सुख-समृद्धि और मानसिक शांति मिलती है। धार्मिक जानकारों के मुताबिक, किसी भी व्यक्ति को कोई शुभ काम शुरू करने से पहले गणेश चालीसा पढ़ना चाहिए। इससे नई शुरुआत सफल होगी।

 

विघ्नहर्ता गणेश भगवान जी का स्मरण करने से भक्तों के हर काम सफल होते हैं। जो लोग हर रोज गणेश चालीसा पढ़ते हैं, उन पर गणेश भगवान का खास आशीर्वाद मिलता है। इस वजह से भक्तों को कोशिश करनी चाहिए कि वे रोज गणेश चालीसा पढ़ें। इसके अलावा, जो व्यक्ति हर रोज गणेश चालीसा का पाठ नहीं कर पाते हैं, उन्हें बुधवार के दिन गणेश चालीसा पढ़ना चाहिए। बुधवार को गणेश भगवान का दिन माना जाता है।

 

यह भी पढ़ें: ‘नमो नमो दुर्गे सुख करनी’, पढ़ें दुर्गा चालीसा, मिलेगा मां दुर्गा का आशीर्वाद

गणेश चलीसा

 

दोहा

 

जय गणपति सद्गुण सदन कविवर बदन कृपाल।
विघ्न हरण मंगल करण जय जय गिरिजालाल॥
 
 चौपाई 

 

जय जय जय गणपति राजू।
मंगल भरण करण शुभ काजू॥

 

जय गजबदन सदन सुखदाता।
विश्व विनायक बुद्धि विधाता॥
 
वक्र तुण्ड शुचि शुण्ड सुहावन।
तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन॥

 

राजित मणि मुक्तन उर माला।
स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला॥
 
पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं।
मोदक भोग सुगन्धित फूलं॥

 

सुन्दर पीताम्बर तन साजित।
चरण पादुका मुनि मन राजित॥
 
धनि शिवसुवन षडानन भ्राता।
गौरी ललन विश्व-विधाता॥

 

ऋद्धि सिद्धि तव चंवर डुलावे।
मूषक वाहन सोहत द्वारे॥

 

यह भी पढ़ें: 28 मई का राशिफल: बृहस्पति देव की कृपा से आपको धन लाभ होगा या नहीं?


 
कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी।
अति शुचि पावन मंगल कारी॥
 
एक समय गिरिराज कुमारी।
पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी॥
 
भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा।
तब पहुंच्यो तुम धरि द्विज रूपा।
 
अतिथि जानि कै गौरी सुखारी।
बहु विधि सेवा करी तुम्हारी॥
 
अति प्रसन्न ह्वै तुम वर दीन्हा।
मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा॥
 
मिलहि पुत्र तुहि बुद्धि विशाला।
बिना गर्भ धारण यहि काला॥
 
गणनायक गुण ज्ञान निधाना।
पूजित प्रथम रूप भगवाना॥
 
अस कहि अन्तर्धान रूप ह्वै।
पलना पर बालक स्वरूप ह्वै॥

 

यह भी पढ़ें: मनुस्मृति के अनुसार लव मैरिज उचित है या नहीं? जानिए पूरा सच


 
बनि शिशु रुदन जबहि तुम ठाना।
लखि मुख सुख नहिं गौरि समाना॥
 

सकल मगन सुख मंगल गावहिं।
नभ ते सुरन सुमन वर्षावहिं॥
 
शम्भु उमा बहुदान लुटावहिं।
सुर मुनि जन सुत देखन आवहिं॥
 
लखि अति आनन्द मंगल साजा।
देखन भी आए शनि राजा॥
 
निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं।
बालक देखन चाहत नाहीं॥
 
गिरजा कछु मन भेद बढ़ायो।
उत्सव मोर न शनि तुहि भायो॥
 
कहन लगे शनि मन सकुचाई।
का करिहौ शिशु मोहि दिखाई॥
 
नहिं विश्वास उमा कर भयऊ।
शनि सों बालक देखन कह्यऊ॥
 
पड़तहिं शनि दृग कोण प्रकाशा।
बालक शिर उड़ि गयो आकाशा॥

 

यह भी पढ़ें: 27 मई राशिफल: पद्मिनी एकादशी पर भाग्य देगा साथ या बढ़ेंगी परेशानियां? जानिए


 
गिरजा गिरीं विकल ह्वै धरणी।
सो दुख दशा गयो नहिं वरणी॥
 
हाहाकार मच्यो कैलाशा।
शनि कीन्ह्यों लखि सुत को नाशा॥
 
तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधाए।
काटि चक्र सो गज शिर लाए॥
 
बालक के धड़ ऊपर धारयो।
प्राण मन्त्र पढ़ शंकर डारयो॥
 
नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे।
प्रथम पूज्य बुद्धि निधि वर दीन्हे॥
 
बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा।
पृथ्वी की प्रदक्षिणा लीन्हा॥
 
चले षडानन भरमि भुलाई।
रची बैठ तुम बुद्धि उपाई॥
 
चरण मातु-पितु के धर लीन्हें।
तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें॥
 
धनि गणेश कहि शिव हिय हरषे।
नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे॥
 
तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई।
शेष सहस मुख सकै न गाई॥
 
मैं मति हीन मलीन दुखारी।
करहुं कौन बिधि विनय तुम्हारी॥
 
भजत रामसुन्दर प्रभुदासा।
लख प्रयाग ककरा दुर्वासा॥
 
अब प्रभु दया दीन पर कीजै।
अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै॥

 

यह भी पढ़ें: 28 मई का राशिफल: बृहस्पति देव की कृपा से आपको धन लाभ होगा या नहीं?


दोहा

 

श्री गणेश यह चालीसा पाठ करें धर ध्यान।
नित नव मंगल गृह बसै लहे जगत सन्मान॥
 
सम्वत् अपन सहस्र दश ऋषि पंचमी दिनेश।
पूरण चालीसा भयो मंगल मूर्ति गणेश॥

 

‘ओमान को उड़ा देंगे’, 200 साल पुराने साथी को अमेरिका ने क्यों धमकी दी?


ईरान के बाद मध्य पूर्व में अब अमेरिका और ओमान के बीच रिश्ते बिगड़ते दिख रहे हैं। यह तब हो रहा है जब दोनों देशों के बीच 200 साल के ऐतिहासिक रिश्ते हैं। ओमान हमेशा से अमेरिका का सक्रिय सहयोगी रहा है। ईरान से युद्ध शुरू होने से पहले परमाणु वार्ता में बेहद अहम किरदार निभाया। जंग शुरू हुई तो अमेरिका का करीबी होने की सजा भी भुगतनी पड़ी।

 

ईरान ने 1 मार्च को ओमान के दुक्म वाणिज्यिक बंदरगाह पर दो ड्रोन से हमला किया। 3 मार्च को एक ईंधन टैंक पर अटैक किया। अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ओमान को उड़ा देने की धमकी दी। आइये समझते हैं कि ट्रंप को यह धमकी क्यों देनी पड़ी, इसके पीछे क्या वजह है?

 

यह भी पढ़ें: ईरान पर अमेरिका का हमला, IRGC ने कुवैत पर दागी मिसाइलें; लेबनान में भीषण बमबारी

 

डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को वाशिंगटन में कैबिनेट की बैठक बुलाई। तभी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बारे में ट्रंप ने कहा, इसे कोई काबू नहीं करने वाला है। यह अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र है। ओमान भी बाकी देशों की तरह व्यवहार करेगा। वरना हमें उन्हें उड़ा देना होगा।

 

शुरुआत में लोगों को लगा कि ट्रंप ने गलती से ईरान की जगह ओमान बोल दिया है, क्योंकि ट्रंप ऐसी गलती कई बार कर चुके हैं। बाद में अमेरिकी विदेश मंत्रालय के सोशल मीडिया पोस्ट ने साफ कर दिया कि ट्रंप ने ओमान को ही धमकी दी है। अब सवाल उठता है कि ट्रंप ने ओमान को धमकी क्यों दी?

यह है धमकी के पीछे की वजह

ईरान के सरकारी टीवी ने ट्रंप के बयान से पहले दावा किया कि अमेरिका और ईरान एक समझौते के बेहद करीब हैं। इसके तहत ईरान और ओमान मिलकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को नियंत्रित करेंगे। यहां से गुजरने वाले जहाजों को ‘सेवा शुल्क’ देना होगा। अब माना जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन इसी बात से नाराज है, क्योंकि अमेरिका की पूरी कोशिश कब्जा मुक्त स्ट्रेट ऑफ होर्मुज है। अगर वहां ईरान और ओमान का नियंत्रण हो जाता है तो वैश्विक स्तर पर यह अमेरिका की बड़ी हार होगी। बुधवार को जब ट्रंप से ईरान और ओमान के नियंत्रण के बारे में पूछा गया तो उन्होंने ओमान को उड़ाने की धमकी दी।

 

यह भी पढ़ें: ईरान पर US ने फिर कर दिया हमला, समुद्र में बारूद बिछा रही नावों को बनाया निशाना

 

डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र का हिस्सा है। हालांकि उनका यह तथ्य सही नहीं है। इसका अधिकांश भाग ओमान और ईरान के जलक्षेत्र में पड़ता है। कुछ हिस्सा संयुक्त अरब अमीरात में पड़ता है। हालांकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अंतरराष्ट्रीय स्ट्रेट है। यहां करीब 20 फीसद पेट्रोलियम और गैस का निर्यात होता है।

 

28 फरवरी के तड़के अमेरिका और इजरायल ने एक साथ ईरान पर बमबारी शुरू की। इसके बाद तेहरान ने स्ट्रेट को बंद कर दिया। हालांकि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में न होने की स्थिति में भी कोई देश प्राकृतिक जलडमरूमध्य पर शुल्क नहीं लगा सकता है। अगर ऐसा किया जाता है तो यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है। 

 

‘जितने कटे, उसके दोगुने पेड़ लगाए जाएं’, ललितपुर-सिंगरौली लाइन पर बोले रेलमंत्री


उत्तर प्रदेश के ललितपुर और मध्य प्रदेश के सिंगरौली को जोड़ने के लिए रेल लाइन का काम जारी है। हाल ही में खबरें आईं कि इसका जो रूट तय किया गया उस पर 54 हजार से ज्यादा पेड़ काट दिए गए और अब रूट को ही बदला जा रहा है। इसके चलते और पेड़ काटे जाएंगे। इन खबरों का संज्ञान लेते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने निर्देश दिए हैं कि इसका फिर से अध्ययन किया जाए ताकि पेड़ों को बचाया जा सके। इतना ही नहीं, उन्होंने निर्देश दिए हैं कि प्रभावित क्षेत्र में जितने पेड़ हैं, उनसे दोगुने ज्यादा पेड़ लगाए जाएं।

 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, खजुराहो-पन्ना सेक्शन पर रेलवे लाइन बिछाने से पहले 54,578 पेड़ कटवा दिए गए और इस पर 24.78 करोड़ रुपये खर्च हुए। फिर  रेलवे ने कहा कि इस रूट पर 6 खतरनाक मोड़ हैं जिनके चलते ट्रेन का संचालन सुरक्षित नहीं था। अब इस रूट को बदलल दिया गया है और नया रूट पहले वाली जगह से लगभग 1 किलोमीटर दूर से प्रस्तावित किया गया है। इसके लिए फिर से पेड़ों को काटा जाना है और वन विभाग ने पेड़ों की गिनती भी शुरू कर दी है। 

 

यह भी पढ़ें: दिल्ली से पंजाब तक बदले BJP के अध्यक्ष, कहां, किसे मिला मौका?


दोगुने पेड़ लगाने के निर्देश

 

पन्ना के जंगल के अलाइनमेंट से जुड़ी खबरों का रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संज्ञान लिया है। अलाइनमेंट के ड्रोन फोटोज और टोपो शीट का अध्ययन किया गया है। साथ ही, टीम को निर्देश दिया गया है कि वर्तमान अलाइनमेंट में तकनीकी विशेषज्ञों को बुलाकर रेलवे लाइन निर्माण का एक बार फिर अध्ययन किया जाए ताकि पेड़ों को बचाया जा सके। इतना ही नहीं, यह भी निर्देश दिया गया कि प्रभावित क्षेत्र में जितने पेड़ हैं, उनसे दोगुने से अधिक पेड़ आगामी मानसून से पहले लगाए जाएंगे।

 

यह भी पढ़ें: समस्तीपुर में घूसखोर ASI का वीडियो हुआ वायरल, तुरंत हो गए सस्पेंड

 

बता दें कि ललितपुर–सिंगरौली रेल लाइन परियोजना बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण रेल कनेक्टिविटी परियोजना है। यह परियोजना मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के पिछड़े क्षेत्रों को रेल नेटवर्क से जोड़ती है। सिंगरौली–ललितपुर रेलवे लाइन पन्ना के जंगलों से होकर गुजरती है। यह लाइन मध्य प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र को झांसी–भोपाल की मुख्य रेल लाइन से जोड़ती है।

गर्मी में क्यों बढ़ गई है खांसी-जुकाम की समस्या? डॉक्टर से जानें बचाव का तरीका


गर्मी के मौसम में शरीर को ठंडा रखने के लिए हम एसी, कूलर और पंखे का इस्तेमाल करते हैं। इस मौसम में हम दिन भर धूप और गर्मी में बाहर रहते हैं और घर आने पर एसी में बैठ जाते हैं। इस वजह से कुछ लोग सर्द-गर्म की समस्या हो जाती है। इसके अलावा हीटवेव की वजह से हवा ड्राई और डस्टी हो सकती है। इन कारणों से खांसी, जुकाम, गले में खराश की समस्या बढ़ जाती है। हमने इस बारे में बेंगलुरु के एस्टर आरवी अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन विभाग के लीड कंसल्टेंट डॉ. अरविंदा एस. एन. से बात की।

 

डॉक्टर एस. एन के मुताबिक हीट वेव की वजह से हवा सूखी और धूल भरी हो जाती थी जिससे गला, नाक और सांस लेने की नलियों में इरिटेशन महसूस होती है। इस मौसम में धुआं और प्रदूषण की वजह से एलर्जी और सांस संबंधी समस्याएं बढ़ जाती है। इसके अलावा शरीर में पानी की कमी होने से गला और नाक की अंदरूनी परत सूख जाती है जिससे सूखी खांसी, छींक और गले में खराश की समस्या बढ़ जाती है।

 

यह भी पढ़ें: Car Tips: धूप में खड़ी कार में बैठने से पहले करें ये काम

कौन से लक्षण नजर आते हैं?

अस्थमा, साइनेस और एलर्जी से पीड़ित लोगों को ज्यादा परेशानी होती है। लंबे समय तक गर्म हवाओं, धूल और खराब एयर क्वॉलिटी के संपर्क में आने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

  • सूखी खांसी
  • बार-बार छींक आना
  • गले में खराश या जलन
  • नाक बंद होना
  • आंखों से पानी आना
  • सांस लेने में तकलीफ होना
  • सिरदर्द

कुछ लोगों को थकान, सीने में जकड़न या सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज आना शामिल हैं।
 
खांसी और छींक का इलाज क्या है?

  • गर्मी के मौसम में खांसी और छींक की समस्या का इलाज मुख्य रूप से शरीर को डिहाइड्रेशन से बचना है। इसके अलावा गर्म हवा, धूल, प्रदूषण से दूर रहे।
  • पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। इससे गला और सांस की नलियों में नमी बनी रहती है जिससे जलन कम होती है। 
    बाहर धूप में निकलने से बचें।
  • डॉक्टर आपको एंटीहिस्टाइमन दवाएं, नेजल स्प्रे, इनहेलर और खांसी को कम करने के लिए दवा देते हैं। अगर आपको हल्की खांसी है तो भाप लें, गुनगुना पानी पिएं, नमक वाले गुनगुन पानी से गरारे करें और शहद का सेवन करें। 
  • इसके अलावा जिन लोगों को अस्थमा या एलर्जी की समस्या है उन्हें अपनी नियमित दवाएं लेनी चाहिए। गर्मी से धूल से बचकर रहे।

यह भी पढ़ें: गर्मी में चाय और कॉफी पीना सेहत के लिए खतरनाक, डाइटिशियन से समझें कैसे?

क्या घरेलू नुस्खों से आराम मिलेगा?

हल्की खांसी और छींक की समस्या को घरेलू उपाय से ठीक किया जा सकता है। गुनगुना पानी, हर्बल चाय और मौसमी फलों का सेवन करें जिससे शरीर हाइड्रेटेड रहे।
कमरे में सही वेंटिलेशन या ह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल करें।

दवा लेने के बाद ठीक न होने पर क्या करें?

अगर दवा लेने के बाद भी खांसी और छींक की समस्या ठीक नहीं हो रही है तो डॉक्टर आपको कुछ टेस्ट लेने की सलाह देते हैं जिसमें चेस्ट एक्स रे शामिल होता है जिससे फेफड़ों में संक्रमण या सांस से जुड़ी अन्य बीमारियों का पता लगाया जाता है। 
पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट (PMT) से यह पता चलता है कि कहीं अस्थमा या सांस की नलियों में कोई परेशानी तो नहीं है। इसके अलावा ब्लड टेस्ट की सलाह दी जाती है ताकि शरीर में सूजन का पता लगता है। अगर लंबे समय तक साइनेस या एलर्जी बनी हुई है तो डॉक्टर साइनस जांच या सीटी स्कैन कराने की सलाह दे सकते हैं।

मनुस्मृति के अनुसार लव मैरिज उचित है या नहीं? जानिए पूरा सच


सनातन धर्म में विवाह 16 संस्कारों में से एक है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक किसी व्यक्ति का जीवन तब अधूरा माना जाता है जब उसकी शादी न हो। शादी और बच्चों को जन्म देना एक अहम कर्म माना गया है। हिंदू विवाह में वर-वधू सात वचन लेते हैं। इन वचनों के जरिए वर-वधू का बंधन जुड़ जाता है। पहले के समय में लोग परिवार की मर्जी से शादी कर लेते थे, जबकि आज के दौर में लड़के-लड़कियां अपने जीवन के फैसले खुद लेना पसंद करते हैं। इसी वजह से वे शादी भी अपने मनपसंद वर या वधू से करना पसंद करते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या हिंदू धर्म में लव मैरिज वाजिब है।

 

धार्मिक ग्रंथ मनुस्मृति में शादी के बारे में बताया गया है। ग्रंथ के मुताबिक हिंदू धर्म में आठ प्रकार के विवाह होते हैं, जहां हर प्रकार के विवाह का अलग नाम दिया गया है। मनुस्मृति में जिन महिलाओं का जबरन विवाह करवाया जाता है, उसे सबसे खराब विवाह माना गया है। इसके अलावा लव मैरिज का भी मनुस्मृति में जिक्र किया गया है।

 

यह भी पढ़ें: ‘संकट कटै मिटे सब पीरा..’, हनुमान चालीसा का पाठ करने से क्या होगा?

8 प्रकार के विवाह

 

मनुस्मृति में अलग-अलग प्रकार के विवाहों का खास नाम बताया गया है। लव मैरिज को गंधर्व विवाह कहा जाता है। इसके अलावा ब्रह्म, आर्ष, देव, प्रजापत्य, असुर, पैशाच और राक्षस विवाह के बारे में भी बताया गया है।

1. ब्रह्म विवाह- इस प्रकार के विवाह में पिता बेटी के लिए योग्य वर ढूंढते हैं। परिवार की इच्छा के मुताबिक वर-वधू की रीति-रिवाजों के तहत शादी कराई जाती है। इस प्रकार के विवाह को मनुस्मृति में सबसे अच्छा माना गया है।
2. देव विवाह- इस प्रकार के विवाह में यज्ञ कराने वाले पुरोहित को कन्यादान किया जाता है। इस तरह के विवाह को भी उत्तम माना गया है।
3. आर्ष विवाह– इसमें दूल्हा पक्ष विवाह में दुल्हन के परिवार को गाय या कोई संपत्ति उपहार के तौर पर देता है। इस तरह के विवाह को वेदों के अनुरूप माना गया है।
4. प्रजापत्य विवाह-इस प्रकार के विवाह में न दुल्हन का परिवार दूल्हे के परिवार को दहेज देता है और न ही दूल्हा पक्ष लड़की के घरवालों को कोई उपहार देता है। इसे भी शास्त्रों में उचित माना गया है।

 

यह भी पढ़ें: 26 मई का राशिफल: मंगलवार के दिन हनुमान जी की कृपा बरसेगी या नहीं?

 

 

5. असुर विवाह-इसमें वर पक्ष वधू के परिवार को धन-संपत्ति देकर शादी करता है। इसे मनुस्मृति में उचित नहीं माना गया है।
6. पैशाच विवाह-जहां कोई वर वधू के साथ जबरदस्ती विवाह करता है, उसे पैशाच विवाह कहा जाता है। इस विवाह को उचित नहीं माना गया है।
7. राक्षस विवाह-इस प्रकार के विवाह में वर महिला का अपहरण कर शादी करता है। इसे मनुस्मृति में अस्वीकार्य माना गया है।
8. गंधर्व विवाह-इसे आज के दौर में लव मैरिज कहा जाता है, जिसमें लड़का-लड़की खुद एक-दूसरे को चुनकर शादी करते हैं।

लव मैरिज सही या गलत?

मनुस्मृति में लव मैरिज को पूरी तरह नकारा नहीं गया है। मनुस्मृति में प्रेम विवाह को स्वीकार किया गया है, हालांकि इसे सबसे उत्तम विवाह नहीं माना गया। मनुस्मृति में ब्रह्म विवाह को सबसे श्रेष्ठ माना गया है। फिर भी प्रेम विवाह को मान्यता दी गई है।

 

यह भी पढ़ें: 25 मई राशिफल: गंगा दशहरा के दिन किन लोगों पर बरसेगी गंगा मां की कृपा? जानि

 

प्रेम विवाह को लेकर मनुस्मृति में सलाह दी गई है कि अगर वर-वधू प्रेम विवाह करते हैं, तो उन्हें अपने माता-पिता का आशीर्वाद और सहमति जरूर लेनी चाहिए। इसके अलावा इंटरकास्ट लव मैरिज को मनुस्मृति में स्वीकृति नहीं दी गई है।

इजरायल को मान्यता, गाजा में सैनिक; ट्रंप की तारीफ में कैसे फंसे मुनीर?


पिछले कुछ महीनों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से ज्यादा सेना प्रमुख असीम मुनीर की तारीफ की। व्हाइट हाउस में एक साथ लंच किया। जब असीम मुनीर को ‘माई फेवरेट फील्ड मार्शल’ कहा तो पूरी दुनिया हैरत में पड़ गई।

 

बार-बार तारीफ के अलावा भारत की तुलना में पाकिस्तान को अधिक महत्व दिया। गाजा पीस बोर्ड में पाकिस्तान को शामिल किया। पाकिस्तानी सैनिकों की तैनाती का प्रस्ताव रखा। हालांकि अभी तक पाकिस्तान ने अपने सैनिकों को गाजा नहीं भेजा है। 

पाकिस्तान का रहा इजरायल विरोधी रुख

ईरान से युद्ध शुरू होने के बाद पाकिस्तान एक अलग ही भूमिका में दिखा। उसने सक्रिया मध्यस्थता की। उसके प्रयास से कुछ हफ्तों का युद्धविराम लागू हुआ। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने ईरान पर हमले की निंदा की। मगर अमेरिका की जगह उन्होंने खुलकर इजरायल पर हमला बोला। रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इजरायल को कैंसर तक कह डाला। बाद में किसी दबाव में आकर आसिफ को अपना सोशल मीडिया पोस्ट डिलीट करना पड़ा। 

 

यह भी पढ़ें: पटना में सूरज उगने से पहले एनकाउंटर, सुबह चार बजे पुलिस ने घेरा गांव

पाकिस्तान के आगे कुआं… पीछे खाई

 

तारीफों और वाहवाही के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान को एक ऐसे मुहाने पर ला खड़ा कर दिया है, जहां आगे कुआं और पीछे खाई वाली स्थिति है। डोनाल्ड ट्रंप अपने पिछले कार्यकाल से ही सऊदी अरब पर अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होने का दबाव बनाने में जुटे हैं। 2020 में संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, सूडान और मोरक्को ने अब्राहम अकॉर्ड्स के तहत इजरायल को मान्यता दी और उसके साथ राजनयिक संबंधों की स्थापना की।

पाकिस्तान के साथ सऊदी अरब भी दुविधा में

इजरायल और यूएई की बढ़ती नजदीकी से सऊदी अरब परेशान है। पिछले साल कतर की राजधानी दोहा पर इजरायली हमले ने सऊदी अरब को नींद से जगा दिया। उसके बाद ही रियाद ने पाकिस्तान के साथ एक रक्षा समझौता किया। अब इसमें तुर्की और मिस्र को भी शामिल करने की कवायद चल रही है। अमेरिका न केवल पाकिस्तान बल्कि सऊदी अरब पर भी इजरायल को मान्यता देने का दबाव बनाने में जुटा है।  

 

उधर, तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन खुलकर बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ जहर उगलने में जुटे हैं। ऐसे में आने वाले समय में अगर इस तिकड़ी ने इजरायल के प्रति नरम रुख नहीं अपनाया तो डोनाल्ड ट्रंप की नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है।

पासपोर्ट तक बदलना पड़ेगा

पाकिस्तान के लिए इजरायल को मान्यता देना आसान नहीं होगा। वह अपने अस्तित्व के समय से ही इजरायल की जगह फिलिस्तीन को मान्यता देता हैं। यहां तक की उसके पासपोर्ट पर भी लिखा है कि यह इजरायल को छोड़कर पूरी दुनिया में मान्य है। अगर पाकिस्तान दबाव में आकर इजरायल को मान्यता देता है तो उसे अपना पासपोर्ट तक बदलना पड़ेगा।

 

यह भी पढ़ें: ईरान में यूरेनियम डील पर बनी बात, ट्रंप का दावा, यकीन किसी को नहीं, ऐसा क्यों?

मुनीर को सता रहा अशांति फैलने का डर

सबसे बड़ी दुविधा यह है कि इस कदम से पूरे पाकिस्तान में अशांति फैल सकती है। जनता सड़कों पर उतर सकती है। विद्रोह की स्थिति पैदा हो सकती है। यही कारण है कि कोई सरकार इतना बड़ा जोखिम नहीं उठाना चाहती है। मगर अब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन अपनी तारीफों के बदले पाकिस्तान से यह कीमत चुकाने का दबाव बना रहा है। बता दें कि सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ के शासन में पाकिस्तान और इजरायल के बीच रिश्तों को सुधारने की पहल हुई थी। 

 

गाजा पीस डील के तहत पाकिस्तान को अपने सैनिकों को भी वहां भेजने हैं। यह सैनिक इजरायली सेना की जगह तैनात होंगे। इनका गांव गाजा में सुरक्षा आदि को संभालना है। पाकिस्तान ने अभी तक अपने सैनिक नहीं भेजे हैं। असीम मुनीर और वहां की सरकार सैनिकों को भेजने से कतरा रही है। उसका मानना है कि अगर सैनिकों को भेजा गया तो जनता में गलत मैसेज जाएगा। अगर पाकिस्तान समझौते के तहत सैनिकों को नहीं भेजता है तो ट्रंप का गुस्सा झेलना पड़ेगा।

तारीफ के पीछे ईरान एंगल भी

पाकिस्तान की तारीफ का एक एंगल यह भी है कि ईरान युद्ध में भी अमेरिका को उसकी मदद चाहिए थी। ईरान के खिलाफ अमेरिका नूर खान एयरबेस को इस्तेमाल करना चाहता था। इसके अलावा खाड़ी देशों से ईरान की शत्रुता की स्थिति में पाकिस्तान ही इकलौता देश बचा था, जो तेहरान तक अमेरिका का मैसेज पहुंचा सकता था। यही कारण है कि ट्रंप ने हर मौके पर असीम मुनीर की खूब तारीफ की।

सीमा के करीब बने अवैध निर्माण पर चलेगा बुलडोजर, गृह मंत्री शाह का आदेश


अंतरराष्ट्रीय सीमा के करीब बने अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलेगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश की सीमा के 15 किमी के भीतर अवैध निर्माण के खिलाफ एक्शन लेने का आदेश दिया है। राजस्थान के बीकानेर में मंगलवार को सुरक्षा समीक्षा बैठक में शाह ने अधिकारियों को पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय सीमा के करीब बनी अवैध इमारतों को ध्वस्त करने और जीरो टॉलरेंस की नीति को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है।

 

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश के सीमावर्ती जिलों को अपराधों और नशीली दवाओं के खतरे के पीछे के स्रोत, पैटर्न और नेटवर्क का अध्ययन करने और स्थायी समाधान खोजने का निर्देश दिया गया है। मंत्रालय ने देश की सीमा के भीतर 0 से 15 किमी के दायरे में स्थित अवैध निर्माणों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति को सख्ती से लागू करने और अवैध निर्माण को ध्वस्त करने का निर्देश दिया है।

 

 

 

 

यह भी पढ़ें: ‘V D सतीशन और V D सावरकर में कोई अंतर नहीं’, विजयन के घर छापेमारी पर भड़का लेफ्ट

अमित शाह की बैठक में कौन-कौन था शामिल

  • राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा
  • प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारी 
  • बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर, श्री गंगानगर और फलौदी के डीएम और एसपी

बैंक लेनदेन पर रखेंगी निगाह

अधिकारियों के मुताबिक गृह मंत्रालय ने सीमावर्ती क्षेत्रों के सभी बैंकों को बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का वेरिफिकेशन, आय के स्रोत की जांच, म्यूल अकाउंट की पहचान, नकली आधार कार्ड और जाली कंपनियों को ट्रैक करने का निर्देश दिया है। सीमावर्ती इलाके में तस्करी को रोकने की खातिर जिला मजिस्ट्रेटों को अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है।

 

यह भी पढ़ें: जयंत चौधरी गए, अब जाटों को साधने के लिए अखिलेश यादव ने खेला बड़ा दांव

 

अमित शाह ने नागरिकों, राज्य मशीनरी और सुरक्षा एजेंसियों को मिलाकर सीमावर्ती जिले के लिए 360 डिग्री सुरक्षा कवर तैयार करने पर अधिक बल दिया। सीमावर्ती गांवों में सभी सरकारी योजनाओं को 100 फीसदी पहुंचाने का निर्देश दिया। इसके अलावा साइबर अपराधों से निपटने की खातिर ‘1930’ कॉल सेंटर के इस्तेमाल की अपील की। शाह ने दो महीने बाद इन मुद्दों पर दोबारा समीक्षा और फीडबैक लेने की बात कही और यह भी कहा कि सभी जिलों को परिणामोन्मुख कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी। 

कौन डोनेट कर सकता है ब्रेस्ट मिल्क? डॉक्टर से जानिए नियम से लेकर पूरी प्रक्रिया


मां का दूध नवजात शिशु के लिए सबसे संपूर्ण और सुरक्षित आहार माना जाता है। इसमें मौजूद पोषक तत्व, एंटीबॉडी और इम्यूनिटी बढ़ाने वाले गुण बच्चे को संक्रमणों से बचाने में मदद करते हैं। लेकिन कई बार कुछ माताएं स्वास्थ्य समस्याओं, समय से पहले डिलीवरी, कम दूध बनने या अन्य कारणों से अपने शिशु को पर्याप्त स्तनपान नहीं करा पातीं। ऐसे में ब्रेस्ट मिल्क डोनेशन यानी स्तन दूध दान कई नवजात बच्चों के लिए वरदान साबित होता है।

 

बैडमिंटन प्लेयर ज्वाला गुट्टा ने 1 साल के अंदर 60 लीटर ब्रेस्ट मिल्क दान किया है। वह अन्य महिलाओं से भी ब्रेस्ट मिल्क दान करने की अपील करती हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि कौन सी महिलाएं ब्रेस्ट मिल्क डोनेट कर सकती हैं? ब्रेस्ट को मिल्क कैसे स्टोर कर सकते हैं और इसकी क्या प्रकिया है। इसके बारे में हमने गुड़गांव सेक्टर 14 की क्लाउडनाइन ग्रुप ऑफ अस्पताल में स्त्री विभाग की विशेषज्ञ डॉक्टर चेतना जैन  से बात की।

 

यह भी पढ़ें: गर्मी में चाय और कॉफी पीना सेहत के लिए खतरनाक, डाइटिशियन से समझें कैसे?

कौन सी महिलाएं ब्रेस्ट मिल्क डोनेट कर सकती हैं?

स्वस्थ स्तनपान कराने वाली महिलाएं, जिनके शरीर में पर्याप्त मात्रा में दूध बन रहा हो, ब्रेस्ट मिल्क डोनेट कर सकती हैं। हालांकि, इसके लिए कुछ जरूरी शर्तें होती हैं:

मां पूरी तरह स्वस्थ हो।

  • कोई गंभीर संक्रमण या संक्रामक बीमारी न हो।
  • एचआईवी (HIV), हेपेटाइटिस B/C, सिफलिस जैसी बीमारियों की जांच नेगेटिव हो।
  • धूम्रपान, शराब या नशीले पदार्थों का सेवन न करती हो।
  • डॉक्टर द्वारा प्रतिबंधित दवाइयों का सेवन न कर रही हो।
  • बच्चे की उम्र सामान्यतः 6 महीने से कम हो तो दूध की गुणवत्ता बेहतर मानी जाती है।
  • डोनर मां की मेडिकल हिस्ट्री और ब्लड टेस्ट के बाद ही दूध स्वीकार किया जाता है।
  • अगर कोई महिला ब्रेस्ट मिल्क डोनेट करना चाहती हैं तो उन्हें किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

ब्रेस्ट मिल्क डोनेट करने से पहले स्वच्छता और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

 

कुछ महत्वपूर्ण बातें:

 

1. हाथों की सफाई- दूध निकालने से पहले कम से कम 20 सेकंड तक साबुन से हाथ धोएं।

2. ब्रेस्ट पंप की सफाई- पंप के सभी हिस्सों को हर इस्तेमाल के बाद गर्म पानी और साबुन से अच्छी तरह साफ करें और सुखाएं।

3. सही कंटेनर का उपयोग- दूध को केवल स्टरलाइज्ड और फूड-ग्रेड कंटेनर या मिल्क स्टोरेज बैग में ही रखें।

4. एक्सपायरी और स्टोरेज टाइम लिखें- दूध निकालने की तारीख और समय कंटेनर पर लिखना जरूरी होता है।

5. बीमारी में डोनेट न करें- अगर मां को बुखार, संक्रमण, सर्दी-जुकाम या कोई बीमारी हो तो डॉक्टर की सलाह के बिना दूध डोनेट नहीं करना चाहिए।

6. संतुलित आहार लें- डोनर मां को पौष्टिक भोजन, पर्याप्त पानी और आराम लेना चाहिए ताकि दूध की गुणवत्ता अच्छी बनी रहे।

ब्रेस्ट मिल्क को कितने दिन का पंप करके फ्रीज में रख सकते हैं?

ब्रेस्ट मिल्क की सुरक्षा और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए सही तापमान पर स्टोर करना बहुत जरूरी है।

सामान्य स्टोरेज गाइडलाइन:

  • कमरे के तापमान (25°C तक): लगभग 4 घंटे
  • रेफ्रिजरेटर (4°C): 3–4 दिन
  • फ्रीजर (-18°C या उससे कम): लगभग 6 महीने तक सुरक्षित
  • डीप फ्रीजर: 6–12 महीने तक
  • हालांकि, जितना जल्दी दूध उपयोग किया जाए, उतना बेहतर माना जाता है।

कुछ जरूरी सावधानियां-

  • दूध को छोटे-छोटे हिस्सों में स्टोर करें।
  • एक बार पिघलाया हुआ दूध दोबारा फ्रीज न करें।
  • दूध को माइक्रोवेव में गर्म न करें।
  • फ्रीज किए गए दूध को फ्रिज में धीरे-धीरे डीफ्रॉस्ट करना बेहतर होता है।

यह भी पढ़ें: घंटों फोन और लैपटॉप चलाने से बढ़ रहा है डायबिटीज का खतरा, स्टडी में दावा

क्या ब्रेस्ट मिल्क को स्टोर करने के लिए खास तरह का पैकेट चाहिए होता है?

जी हां, ब्रेस्ट मिल्क को सुरक्षित रखने के लिए विशेष प्रकार के स्टोरेज बैग या कंटेनर का उपयोग किया जाता है।

 

सही स्टोरेज विकल्प:

 

BPA-free प्लास्टिक या ग्लास कंटेनर
विशेष Breast Milk Storage Bags
एयरटाइट और फूड-ग्रेड कंटेनर

साधारण प्लास्टिक बैग या बोतलों का उपयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि इनमें संक्रमण या लीकेज का खतरा हो सकता है।

 

स्टोरेज बैग चुनते समय ध्यान रखें:

 

बैग मजबूत और लीक-प्रूफ हो।
उस पर तारीख और मात्रा लिखने की जगह हो।
एक बार उपयोग के बाद दोबारा इस्तेमाल न करें।

ब्रेस्ट मिल्क डोनेट करने की प्रक्रिया क्या है?

भारत में अब कई अस्पताल और ह्यूमन मिल्क बैंक ब्रेस्ट मिल्क डोनेशन को बढ़ावा दे रहे हैं। प्रक्रिया सामान्यतः इस प्रकार होती है:

 

1. रजिस्ट्रेशन– डोनर मां को मिल्क बैंक या अस्पताल में रजिस्ट्रेशन करवाना होता है।

2. हेल्थ स्क्रीनिंग-मां की मेडिकल हिस्ट्री ली जाती है और कुछ ब्लड टेस्ट किए जाते हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि दूध सुरक्षित है।

3. दूध निकालना-मां घर पर या अस्पताल में स्वच्छ तरीके से दूध निकाल सकती है।

4. स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट– दूध को सही तापमान पर स्टोर करके मिल्क बैंक तक पहुंचाया जाता है।

5. पाश्चराइजेशन-मिल्क बैंक में दूध को पाश्चराइज किया जाता है ताकि किसी भी प्रकार के बैक्टीरिया या संक्रमण का खतरा समाप्त हो जाए।

 

जरूरतमंद शिशुओं को उपलब्ध कराना इसके बाद यह दूध विशेष रूप से समय से पहले जन्मे (preterm), कम वजन वाले या बीमार बच्चों को दिया जाता है।

 

यह भी पढ़ें: ना देखना पसंद है, ना पढ़ना, न्यूज से क्यों दूर हो रहे लोग? हो गया खुलासा

ब्रेस्ट मिल्क डोनेशन क्यों महत्वपूर्ण है?

समय से पहले जन्मे बच्चों के लिए जीवनरक्षक साबित हो सकता है।
संक्रमण और पेट संबंधी बीमारियों का खतरा कम करता है।
नवजात की इम्यूनिटी मजबूत करता है।
मां के दूध का विकल्प होने के कारण यह फार्मूला मिल्क से अधिक सुरक्षित माना जाता है।


निष्कर्ष

 

ब्रेस्ट मिल्क डोनेशन एक संवेदनशील और मानवीय पहल है जो कई नवजात बच्चों को स्वस्थ जीवन देने में मदद करती है। यदि किसी मां के पास अतिरिक्त दूध है और वह स्वस्थ हैं, तो वे डॉक्टर की सलाह लेकर मिल्क डोनेशन कर सकती हैं। सही स्वच्छता, सुरक्षित स्टोरेज और मेडिकल गाइडलाइन का पालन करके यह प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित और लाभकारी बनाई जा सकती है।