Home Blog

दुलारा, दर्द पूछा और उठाई आवाज, CJP के आंदोलन में कैसे छा गईं डिंपल यादव?


कॉकरोच जनता पार्टी पिछले एक महीने से दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा मांगा रही थी। सोमवार को CJP ने पहले से तय संसद तक शांतिपूर्वक मार्च का आव्हान किया था लेकिन जैसे ही मार्च आगे बढ़ा दिल्ली पुलिस और पैरामिलिट्री के जवानों ने उन्हें रास्ते में रोका और उनपर लाठीचार्ज कर दिया।

 

पुलिस की इस लाठीचार्ज में दर्जनों प्रदर्शनकारी युवा घायल हो गए। कई पुलिसकर्मी भी इसमें घायल हुए। मगर, पुलिसिया लाठीचार्ज में बुरी तरह से घायल छात्र-छात्राएं सड़क और फुटपाथ पर लेट गए। घायल युवाओं को या तो उनके साथियों ने संभाला या फिर समाजवादी पार्टी की वरिष्ठ नेता और कन्नैज से सांसद डिंपल यादव ने। 


दिनभर छात्रों के बीच रहीं डिंपल यादव

 

दरअसल, डिंपल यादव सपा के लगभग एक दर्जन सांसदों के साथ में छात्रों के इस प्रदर्शन में शामिल होने पहुंची थीं। वह दिनभर छात्रों के बीच रहीं, जिसके बाद पुलिस उनको पकड़कर संसद मार्ग पुलिस थाने ले आई। जब सांसद डिंपल थाने के अंदर बैठी थीं, उन्हीं के सामने कई छात्र और छात्राएं बुरी तरह से घायल अवस्था में आए।

 

यह भी पढ़ें: ‘तब तक जारी रहेगा, जब तक कि….’, सोनम वांगचुक ने खत्म नहीं की है भूख हड़ताल

 

 

 

 

घायल छात्रों को दुलारते और नजर आईं

 

इस मंजर को देखने के बाद डिंपल यादव खुद को संभाल नहीं पाईं और वह घायल छात्रों को दुलारते और उनका दर्द बांटते हुई नजर आईं। उनके इन कदमों की सोशल मीडिया पर खूब तारीफ हो रही है। एक प्रदर्शनकारी युवक पर पुलिस की लाठीचार्ज में बुरी तरह से घायल हो गया था, जिसको उसके साथियों ने एक फुटपाथ पर लिटा दिया। घायल और बेसुध युवक को डिंपल यादव ने जैसे ही देखा वह खुद को रोक नहीं पाईं और उसे प्यार से और अपनेपन के भाव से सहलाने लगीं।

 

 

 

 

डिंपल यादव ने अपना एक हाथ घायल युवक के सिर और दूसरा उसके सीने पर रखकर उसकी मदद की। इसके बाद उन्होंने उसे अपने हाथों से हवा करती नजर आईं और एंबुलेंस को बुलवाया। इसी समय वह एक घायल छात्रा को अपने हाथ से पानी पिलाते हुए नजर आईं। इस दौरान सपा के सभी सांसद वहीं खड़े रहे।

 

अभिभावक बनीं डिंपल

 

इसी तरह से एक और छात्रा पुलिसिया कार्रवाई में घायल होकर संसद मार्ग थाने में आई, जिसे सांसद डिंपल यादव एक अभिभावक की तरह दुलारते हुए नजर आईं। उनके इन कदमों की वजह से सोशल मीडिया पर लोग उनके लिए लिख रहे हैं कि डिंपल यादव सिर्फ एक नेत्री ही नहीं, बल्कि एक पत्नी, मां और बहु भी हैं।

 

 

 

 

प्रदर्शन का बताया आंखों देखा हाल

 

दिनभर युवाओं के साथ रहीं डिंपल यादव बाद में संसद पहुंचीं। उन्होंने यहां कहा, ‘युवा लड़के और लड़कियों के ऊपर लाठीचार्ज किया गया था। कुछ के सिर में चोटें आईं, जबकि दूसरों को छाती पर चोट लगी। अगर पुलिस को बल प्रयोग करना ही था तो उन्हें कमर के नीचे मारना चाहिए था लेकिन इसके बजाय उन्होंने छात्रों के सिर और छाती पर मारा। छात्र बहुत ज्यादा गुस्से में थे। उन्होंने कहा कि वे सिर्फ आंदोलन का समर्थन करने आए थे और किसी से लड़ने नहीं आए थे। आज हमने जो देखा वह परेशान करने वाला है और इसे देश के इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में याद किया जाएगा।’

 

यह भी पढ़ें: ‘युवा विरोधी हैं PM’, राहुल गांधी बोले- शिक्षा मंत्री से इस्तीफा भी नहीं ले सकते

 

 

 

 

मोदी सरकार पर बरसीं डिंपल यादव

 

सपा सांसद डिंपल यादव ने आगे कहा, ‘आज लोकतंत्र के इतिहास में ये काला दिवस के रूप में मनाया जाएगा। पुलिस के आंखों में भी शर्मिंदगी दिख रही थी… कुछ पुलिसकर्मी गुंडे बने हुए थे। कुछ पुलिसवाले बिना वर्दी के आए और बच्चों को मारा है। बच्चों को करंट दिया। जहां नियम होता है कि आपको पैरों पर मारना है वहां बच्चों के सीने पर मारा है, ये आघात भारत माता के सीने पर किया है। हमारी मांग है कि शिक्षा मंत्री को हटाएं, सरकार जिम्मेदारी ले। इतनी अहंकारी कठोर और निर्दयी सरकार शायद ही देश के इतिहास ने देखी हो।’

 

 

 

भारत में पहली डेंगू वैक्सीन QDENGA को मिली मंजूरी, बिना टेस्ट लगेगा टीका


बारिश के मौसम में डेंगू के मामले तेजी से बढ़ने लगते हैं। इस बीमारी के खिलाफ भारत में अभी तक कोई वैक्सीन नहीं थी। अब इस जानलेवा बीमारी से बचाव के लिए भारत में पहली डेंगू वैक्सीन को मंजूरी मिल गई है। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने टेकेडा बायोफार्मास्युटिकल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की वैक्सीन QDENGA को बाजार में लाने की मंजूरी दे दी है। यह इस बीमारी से निपटने के लिए एक बड़ा कदम है। QDENGA को 4 से 60 साल के उम्र तक को लगाया जा सकता है।

 

यह वैक्सीन किसी भी व्यक्ति को पहले डेंगू हुआ हो या नहीं। इस बात की परवाह किए बिना दी जा सकती है। इस वैक्सीन को देने से पहले किसी प्रकार के टेस्ट की जरूरत नहीं होगी। इस वजह से डेंगू वाले इलाकों में इसका इस्तेमाल करना आसान हो जाता है। यह वैक्सीन डेंगू वायरस के चारों प्रकार से सुरक्षा देती है। 

 

यह भी पढ़ें: हर 10 में से 9 को हाई कोलेस्ट्रॉल, ICMR की स्टडी में दावा

 

यह वैक्सीन 2022 में लॉन्च हुई थी। अभी तक 43 देशों में इसे मंजूरी मिल चुकी हैं और दुनियाभर में इसकी 32 मिलियन से ज्यादा डोज बांटी जा चुकी हैं। पिछले 2 दशकों में भारत में डेंगू के मामले 11 गुना बढ़ चुके हैं। दुनियाभर में डेंगू के कुल मामलों का लगभग एक तिहाई हिस्सा भारत में दर्ज किया जाता है। हर साल इस बीमारी की चपेट में हजारों लोग आते हैं और कई लोगों को अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है। आइए जानते हैं डेंगू से कैसे बच सकते हैं?

डेंगू के लक्षण

डेंगू एडीज मच्छर से काटने से फैलती है। यह एक वायरल बीमारी है। इस बीमारी के प्रमुख लक्षणों में:

  • तेज बुखार
  • मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द
  • लगातार सिरदर्द
  • त्वचा पर चकते
  • मतली
  • उल्टी

मामला गंभीर होने पर प्लेटलेट्स तेजी से गिरते हैं। इस दौरान मसूड़ों और नाक से खून भी आ सकता है।

 

यह भी पढ़ें: बच्चे को कब लगानी चाहिए सनस्क्रीन, किन बातों का रखें ध्यान? डॉक्टर ने बताया

डेंगू के मच्छरों से कैसे बच सकते हैं?

  • मच्छरदानी लगाएं।
  • घर के आसपास पानी न जमा होने दें।
  • कूलर के पानी को रोजाना बदलें।
  • पानी की टंकी को ढक कर रखें।
  • अपने आस पास साफ सफाई रखें।
  • कीटनाशक का इस्तेमाल करें।

महर्षि सौभरि के श्राप ने कैसे बचाई कालिया नाग की जान? जानिए पूरी कहानी


हिन्दू धर्म के ग्रंथों में कई ऐसी कहानियां और प्रसंग बताए गए हैं, जिनसे आज भी व्यक्ति को सीख मिलती है। धार्मिक ग्रंथों में देवी-देवताओं से जुड़े वरदान और श्राप की कई रोचक कथाएं वर्णित हैं। वरदान और श्राप का नाम सुनते ही लोगों के मन में यही विचार आता है कि वरदान मिलने से व्यक्ति का भला होता है और श्राप मिलने से उसका नुकसान होता है। जबकि श्रीमद्भागवत महापुराण में गरुड़ और कालिया नाग की एक ऐसी कथा मिलती है, जिसमें एक श्राप किसी दूसरे के प्राणों की रक्षा का कारण बनता है।

 

श्रीमद्भागवत महापुराण के स्कंध 10 के अध्याय 17 में कालिया नाग और गरुड़ की कथा का वर्णन मिलता है। इस कथा के अनुसार, राजा परीक्षित ने श्रीशुकदेव जी से पूछा था कि कालिया नाग ने रमणक द्वीप क्यों छोड़ दिया था। तब श्रीशुकदेव जी ने बताया कि कालिया नाग गरुड़ से अपनी जान बचाने के लिए रमणक द्वीप छोड़कर यमुना नदी में रहने लगे थे।

 

यह भी पढ़ें: ज्यादा सोचते हैं, तनाव है? श्रीमद्भगवद्गीता की यह सीख काम आएगी

 

गरुड़ और कालिया नाग के बीच युद्ध

 

कथा के अनुसार, रमणक द्वीप में प्रत्येक अमावस्या के दिन गरुड़ को एक सर्प अर्पित किया जाता था, ताकि वे अन्य नागों की रक्षा करते रहें। इसी परंपरा के तहत एक बार कालिया नाग की बारी आई। लेकिन गरुड़ का आहार बनने से बचने के लिए कालिया नाग वहां से भाग गया।

 

जब गरुड़ को कालिया नाग के भागने की खबर मिली तो वे अत्यंत क्रोधित हो गए और उन्होंने कालिया नाग को मारने का संकल्प लिया। इसके बाद दोनों के बीच भीषण युद्ध हुआ। कालिया नाग ने अपने विषैले दांतों से गरुड़ पर हमला किया लेकिन गरुड़ ने भी जोरदार पलटवार किया। गरुड़ अत्यंत शक्तिशाली थे, इसलिए युद्ध में कालिया नाग पर भारी पड़ने लगे। अपनी जान बचाने के लिए अंत में कालिया नाग वहां से भाग निकला।

 

यह भी पढ़ें: 19 जुलाई राशिफल: किन राशियों पर मेहरबान हैं सूर्य, किनका बढ़ा संघर्ष?

श्राप ने कैसे बचाई कालिया नाग की जान?


कालिया नाग और गरुड़ के युद्ध से पहले महर्षि सौभरि ने गरुड़ को श्राप दिया था। कथा के अनुसार, एक बार गरुड़ को भूख लगी और वे यमुना नदी में मछलियां खाने पहुंचे। वहां उन्होंने मत्स्यराज नाम की एक बड़ी मछली को अपना आहार बना लिया। इससे उस कुंड में रहने वाली अन्य मछलियां अत्यंत दुखी हो गईं।


मछलियों की यह स्थिति देखकर महर्षि सौभरि को बहुत दुख हुआ। उन्होंने मछलियों की रक्षा के लिए गरुड़ को श्राप दिया कि अब से यदि वे उस नदी में प्रवेश करेंगे या वहां किसी जीव का भक्षण करेंगे, तो उनके प्राण चले जाएंगे।


कालिया नाग को इस श्राप की जानकारी थी। इसलिए वह अपनी जान बचाने के लिए यमुना नदी में आकर रहने लगा। महर्षि सौभरि के इसी श्राप के कारण गरुड़ यमुना में नहीं जा सके और कालिया नाग के प्राण बच गए।

अमेरिका ने ईरान के परमाणु प्लांट पर किया अटैक, जंग और तेज होने का खतरा बढ़ा


ईरान की परमाणु एजेंसी ने अमेरिका पर डारखोविन परमाणु साइट पर हमला करने का आरोप लगाया। यह परमाणु प्लांट अभी निर्माणाधीन है। दक्षिण-पश्चिम ईरान के खुजेस्तान प्रांत में डारखोविन परमाणु ऊर्जा संयंत्र का निर्माण साल 2022 से चल रहा है। परमाणु एजेंसी के मुताबिक सुबह लगभग 9 बजकर 39 मिनट के करीब प्लांट पर कई रॉकेट गिरे। एजेंसी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा उपायों के तहत एक शांतिपूर्ण परमाणु संयंत्र पर हमला अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन है।

 

डारखोविन परमाणु प्लांट पर हमले के मामले में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने भी प्रतिक्रिया दी। एजेंसी ने कहा, वह ईरान के दक्षिण-पश्चिमी खुजेस्तान प्रांत के दरखोविन में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा प्लांट के निर्माण स्थल पर रात भर हुए हमले की खबरों की जांच कर रही है। यह सुविधा निर्माण के बहुत प्रारंभिक चरण में है और जब आईएईए ने आखिरी बार इसका दौरा किया था तब इसमें कोई परमाणु सामग्री नहीं थी। आईएईए ने आगे कहा कि कथित हमले से किसी भी प्रकार का रेडियोलॉजिकल खतरा होने की आशंका नहीं है।

 

 

 

 

यह भी पढ़ें: पाकिस्तान में मुनीर vs मौलाना, फजलुर रहमान ने अपनी ही सेना को कैसे घेरा?

 

अमेरिका की आतंकवादी और आपराधिक सरकार, जिसकी फितरत ही दादागीरी और कानून को न मानना ​​है। उसने अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करते हुए एक आक्रामक और बर्बर हरकत की है। – ईरान परमाणु ऊर्जा संगठन।
 

बहरीन, कुवैत और जॉर्डन को निशाना बना रहा ईरान

ईरान की सेना और आईआरजीसी अमेरिका के हर हमलों का जवाब खाड़ी देशों पर पलटवार करके दे रही है। बहरीन और कुवैत पर ईरान ने ड्रोन और मिसाइल से हमला किया। कुवैत में एक पानी को शुद्ध करने वाले प्लांट और बिजली संयंत्र को नुकसान पहुंचा है। बहरीन की सेना ने भी ईरानी मिसाइल को निष्क्रिय करने की सूचना दी। वहीं जॉर्डन के अकाबा शहर को निशाना बनाकर दागी गई ईरानी मिसाइल को जॉर्डन और इजरायल की वायुसेना ने रोक दी।

अमेरिका ने तेज की बमबारी

उधर, ईरानी मीडिया ने बताया कि शनिवार की रात अमेरिका ने होर्मोजगान और खुजेस्तान प्रांत के अलावा केशम द्वीप पर बमबारी की। जॉर्डन में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद डोनाल्ड ट्रंप की सेना ने ईरान के खिलाफ अपनी कार्रवाई को और तेज कर दिया है। हालांकि खाड़ी देशों को डर सता रहा है कि लड़ाई तेज होने पर उनके बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है। 

 

यह भी पढ़ें: ‘गद्दार, सौदेबाज, दलाल…’, ईरान की सरकार से खफा अपने, तख्तापलट होगा?

अमेरिकी हमलों में ईरान में 50 की मौत

अमेरिका सेना ने शनिवार को लगातार आठवीं रात ईरान पर भीषण बमबारी की। बुनियादी ढांचे और परमाणु प्लांट को निशाना बनाया। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक 27 जून से 19 जुलाई तक अमेरिकी हमलों में 50 से अधिक लोगों की जान गई और 517 लोग घायल हुए हैं। घायलों में 19 बच्चे और 35 महिलाएं भी शामिल हैं। वहीं मृतक में पांच महिलाएं और दो नाबालिग है।  468 लोगों को अस्पताल से छुट्टी मिल गई। 32 लोग अभी भर्ती हैं। 28 की सर्जरी करनी पड़ी है। 

‘अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक आंदोलनकारी नहीं, शिक्षक हैं’, पत्नी का भावुक संदेश


लद्दाख के शिक्षा सुधाकर और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगजुक का अनशन अब 22वें दिन में पहुंच गया है। इस बीच उनकी पत्नी ने एक भावुक लेख लिखकर उनके संघर्ष को एक अलग नजरिए से पेश किया है। उन्होंने कहा कि वह सोनम वांगचुक को किसी आंदोलनकारी के तौर पर नहीं, बल्कि एक ऐसे शिक्षक के रूप में देखती हैं जिसे देश की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों के लिए अपनी असली जिसम्मेदारी छोड़कर सड़क पर उतना पड़ा।

 

उन्होंने कहा कि पिछले 30 वर्षों से दोनों का एक ही सपना रहा है शिक्षा के जरिए देश को बेहतर बनाना। सोमन वांगचुक ने SECMOL और HIAL जैसे संस्थानों के जरिए पढ़ाई को समाज और लोगों की जिंदगी से जोड़ने की कोशिश की। वहीं, उनकी पत्नी का मानना है कि शक्षा सिर्फ डिग्री या नौकरी पाने का जरिया नहीं, बल्कि इंसान के व्यक्तित्व को निखारने और उनकी छिपी हुई प्रतिभा को पहचानने का माध्यम होनी चाहिए।

 

यह भी पढ़ें: ‘आपकी चुप्पी अस्वीकार्य’, चंदा चोरी पर खरगे और राहुल गांधी ने लिखा PM को पत्र

गीतांजलि ने शिक्षा के उद्देश्य का किया जिक्र

अपने लेख में सोनम वांगचुक की वाइफ गीतांजलि जे आंग्मो ने बताया कि साल 1989 में श्री अरविंद आश्रम की यात्रा ने उनकी सोच को पूरी तरह बदल दिया। वहीं उन्हें यह समझ मिली कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पढ़ना-लिखना या परीक्षा पास करना नहीं, बल्कि व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक विकास को भी आगे बढ़ाना है। उनका मानना है कि मौजूदा शिक्षा व्यवस्था युवाओं को रोजगार तो देती है लेकिन उन्हें जीवन का उद्देश्य खोजने में पर्याप्त मदद नहीं कर पाती।

 

उन्होंने कहा कि HIAL जैसे संस्थानों की स्थापना इसी सोच के साथ की गई जहां स्थानीय समस्याओं के समाधान, व्यावहारिक, शिक्षा, नवाचार, सहानुभूति और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया जाता है। उनके मुताबिक, AI के दौर में भी इंसान की सबसे बड़ी ताकत उसकी संवेदनशीलता, रचनात्मक सोच और चरित्र ही रहेंगे। इसलिए शिक्षा प्रणाली में ऐसे सुधार जरूरी हैं जो बच्चों को केवल नौकरी के लिए नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए भी तैयार करें।

 

यह भी पढ़ें: मानसून सत्र से पहले बैठक में हंगामा, बागी सांसदों को बुलाने पर विपक्षी नाराज

गीतांजलि ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

सोनम वांगजुक की पत्नी ने लिखा कि उनके पति का अनशन केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्ता में बदलाव की मांग की प्रतीक है। उन्होंने आरोप लगाया कि अनशन के दौरान सोमन वांगचुक को उनकी इच्छा के विरुद्ध सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया जहां भारी पुलिस मौजूदगी के कारण माहौल इलाज से अधिक हिरासत जैसा महसूस हो रहा है।

 

उन्होंने उम्मीद जताई कि शिक्षा का मुद्दा संसद और सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल होगा। उनका कहना है कि सोनम वांगचुक के संघर्ष का सबसे बड़ा सम्मान यही होगा कि देश ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित करे, जहां हर बच्चे को अपनी पूरी क्षमता पहचानने और समाज के लिए सार्थक योगदान देने का अवसर मिल सके।

वर्क लाइफ बैलेंस बिगड़ रहा है? आजमाएं ये 6 तरीके, तनाव कम होगा


आजकल भागदौड़ भरी जिंदगी में ज्यादातर लोग काम और निजी जीवन के बीच बैलेंस बनाने में मुश्किल महसूस करते हैं। ऑफिस का काम, घर की जिम्मेदारियां और लगातार मोबाइल या लैपटॉप पर जुड़े रहने की वजह से कई लोगों को अपने लिए समय ही नहीं मिल पाता है।

 

अगर समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए तो इसका असर मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ रिश्तों पर भी असर पड़ता है। ऐसे में कुछ आसान आदतें अपनाकर वर्क लाइफ बैलेंस को बेहतर बनाया जा सकता है। आइए जानते हैं 6 आसान तरीके।

1. काम और निजी जीवन की सीमा तय करें

आजकल कई लोग ऑफिस का काम घर आने के बाद भी करते रहते हैं। इससे परिवार और खुद के लिए समय नहीं बचता। कोशिश करें कि ऑफिस के तय समय के बाद काम से जुड़ी कॉल, ईमेल और मैसेज से दूरी बनाएं। इससे आपको मानसिक आराम मिलेगा।

2. रोजाना अपने लिए थोड़ा समय निकालें

दिनभर काम करने के बाद कम से कम 30 मिनट अपनी पसंद की किसी एक्टिविटी के लिए जरूर निकालें। आप किताब पढ़ सकते हैं, संगीत सुन सकते हैं, टहलने जा सकते हैं या कोई नया शौक अपना सकते हैं। इससे तनाव कम होता है और मन शांत रहता है।

3. हर काम की पहले से योजना बनाएं

अगर दिन की शुरुआत बिना प्लानिंग के होती है तो काम का दबाव बढ़ सकता है। इसलिए सुबह या एक रात पहले ही जरूरी कामों की सूची बना लें। सबसे जरूरी काम पहले पूरे करें और बाकी काम बाद में करें।

4. काम के बीच छोटे-छोटे ब्रेक लें

लगातार कई घंटे काम करने से थकान और तनाव बढ़ सकता है। हर 60 से 90 मिनट के बाद 5 से 10 मिनट का छोटा ब्रेक लें। इस दौरान थोड़ा टहलें, पानी पिएं या आंखों को आराम दें। इससे काम पर दोबारा बेहतर तरीके से ध्यान लगाया जा सकता है।

5. परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताएं

काम कितना भी जरूरी क्यों न हो, अपने परिवार और दोस्तों के लिए समय जरूर निकालें। उनके साथ बातचीत करने, खाना खाने या घूमने जाने से मन हल्का होता है और रिश्ते भी मजबूत होते हैं।

6. अच्छी नींद और सेहत को नजरअंदाज न करें

अगर आप पर्याप्त नींद नहीं लेते या खानपान पर ध्यान नहीं देते तो इसका असर आपके काम और मूड दोनों पर पड़ सकता है। रोज 7 से 8 घंटे की नींद लें, संतुलित भोजन करें और हल्की-फुल्की एक्सरसाइज या योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।

किन संकेतों से समझें कि आपका वर्क लाइफ बैलेंस बिगड़ रहा है?

  • हर समय काम का तनाव महसूस होना।
  • परिवार या दोस्तों के लिए समय न निकाल पाना।
  • नींद पूरी न होना।
  • छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन आना।
  • लगातार थकान महसूस होना।
  • छुट्टी के दिन भी काम के बारे में सोचना।

किन राशियों पर मेहरबान हैं सूर्य, किनका बढ़ा संघर्ष?


आज का दिन कई लोगों के लिए सकारात्मक रहेगा। ग्रहों की चाल सभी लोगों को यह सिखाएगी कि सफलता सिर्फ मेहनत से नहीं मिलती, बल्कि जो लोग अपनी मेहनत पर विश्वास करते हैं, उन्हें ही सफलता मिलती है। आज आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि है। पंचांग के अनुसार आज का दिन बेहद ऊर्जावान और सकारात्मक रहने वाला है। अंक ज्योतिष के नजरिए से देखें तो आज का मूलांक 1 है, जो सूर्य देव का अंक है। क्योंकि आज रविवार भी है, इसलिए सूर्य की असीम ऊर्जा और लीडरशिप क्वालिटी लोगों में उभरेगी। आज के दिन ग्रहों की चाल लोगों का आत्मविश्वास बढ़ाएगी।

 

ऊर्जा की बात करें तो आज इच्छाशक्ति मजबूत होगी। रविवार और मूलांक 1 का यह अद्भुत संयोग सरकारी कार्यों में सफलता, मान-सम्मान में वृद्धि और प्रशासनिक क्षेत्र से जुड़े लोगों को विशेष लाभ दिलाने वाला साबित होगा। सभी 12 राशियों के लिए आज का दिन आत्ममंथन करने और अपने लक्ष्यों की ओर एक कदम आगे बढ़ाने का है। आइए जानते हैं मेष से लेकर मीन राशि तक के जातकों के लिए आज का दिन कैसा रहेगा।

 

 

 

यह भी पढ़ें: लव पार्टनर को दे रहे हैं धोखा? गरुण पुराण में लिखी है सजा

राशिफल


मेष राशि


आज आपका आत्मविश्वास कमजोर हो सकता है। दफ्तर में योजना के मुताबिक काम नहीं कर पाएंगे, हालांकि सहकर्मियों का पूरा सहयोग मिलेगा। धन लाभ के योग हैं। जीवनसाथी के साथ तालमेल बेहतरीन रहेगा।
आज क्या करें: सूर्य देव को जल अर्पित करें।
आज क्या न करें: आज किसी भी काम में जल्दबाजी न करें।


वृषभ राशि


नौकरी में काम का बोझ थोड़ा बढ़ सकता है, धैर्य से काम लें। कारोबारी लोग आज बड़ा निवेश करने से पहले अनुभवी लोगों की सलाह अवश्य लें। आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी, हालांकि सुख-सुविधा की वस्तुओं पर कुछ अनावश्यक खर्च हो सकता है।
आज क्या करें: किसी जरूरतमंद को फल या अनाज का दान करें।
आज क्या न करें: आज के दिन किसी को भी उधार देने से बचें।


मिथुन राशि


आज आपकी कम्युनिकेशन स्किल बिगड़े हुए काम को पूरा करा देगी। प्रेम जीवन में नया उत्साह रहेगा। भाई-बहनों के साथ संबंधों में मधुरता आएगी और घर का माहौल खुशनुमा रहेगा।
आज क्या करें: भगवान गणेश की आराधना करें।
आज क्या न करें: आज अपनी योजनाओं को दूसरों के साथ साझा न करें।

 

यह भी पढ़ें: 18 जुलाई राशिफल, शनि और मंगल के प्रभाव से आपके जीवन में क्या बदलाव आएगा? जानिए


कर्क राशि


ऑफिस में आपके काम को वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा नोटिस किया जाएगा। व्यापारी वर्ग को ग्राहकों से अच्छा फीडबैक मिलेगा। पैसे बचाने की आपकी योजना आज सफल रहेगी। 
आज क्या करें: शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग पर दूध अर्पित करें।
आज क्या न करें: पुरानी बातों को सोचकर अपना मूड खराब न करें।


सिंह राशि


आज आपका सितारा बुलंदियों पर है। नौकरी में पदोन्नति या नई जिम्मेदारी मिल सकती है। व्यापार में बड़ा आर्थिक लाभ होने के योग हैं। धन की स्थिति मजबूत होगी। पैतृक संपत्ति से जुड़े मामलों में आपके पक्ष में फैसला आ सकता है।
आज क्या करें: आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें।
आज क्या न करें: अहंकार साबित करने की जिद से बचें।


कन्या राशि


दफ्तर में कुछ चुनौतियां आ सकती हैं। सहकर्मियों की राजनीति से दूर रहें। अचानक कुछ बड़े खर्च सामने आ सकते हैं, जिससे बजट गड़बड़ा सकता है। सोच-समझकर धन खर्च करें। लव पार्टनर के साथ किसी बात पर बहस हो सकती है।
आज क्या करें: पक्षियों को दाना-पानी डालें।
आज क्या न करें: आज के दिन कोई नया बड़ा सौदा न करें।

 

यह भी पढ़ें: भोग से खत्म होती हैं इच्छाएं? राजा ययाति की कथा से समझिए


तुला राशि


कला, मीडिया और रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए आज का दिन शानदार है। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। सुख-साधनों और भौतिक सुविधाओं पर धन खर्च हो सकता है, जो आनंद देगा। 
आज क्या करें: माता लक्ष्मी के सामने घी का दीपक जलाएं।
आज क्या न करें: अजनबी व्यक्ति पर जरूरत से ज्यादा भरोसा न करें।


वृश्चिक राशि


नौकरीपेशा जातकों को अपनी मेहनत का पूरा फल मिलेगा। प्रॉपर्टी से जुड़े कारोबारियों को बड़ी सफलता मिल सकती है। रुका हुआ धन वापस मिलने से आर्थिक परेशानियां दूर होंगी। जीवनसाथी के साथ भविष्य की योजनाओं पर गंभीर चर्चा होगी।
आज क्या करें: हनुमान चालीसा का पाठ करें।
आज क्या न करें: फटे-पुराने कपड़े या सामान का इस्तेमाल न करें।


धनु राशि


उच्च शिक्षा या विदेश से जुड़े कार्यों में सफलता मिलेगी। व्यापार के सिलसिले में की गई यात्राएं बेहद लाभदायक सिद्ध होंगी। भाग्य का पूरा साथ मिलेगा, जिससे अचानक धन लाभ के योग बनेंगे। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
आज क्या करें: माथे पर केसर या हल्दी का तिलक लगाएं।
आज क्या न करें: आज अपनी जिम्मेदारियों से पीछे हटने का प्रयास न करें।

 

यह भी पढ़ें: 17 जुलाई राशिफल: किन लोगों को मिलेगा लक्ष्मी मां का आशीर्वाद और होगा आर्थिक लाभ?


मकर राशि


ऑफिस में अधिकारियों के साथ बहस हो सकती है। आज का दिन पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ में कोई बड़ा बदलाव करने के लिए सही नहीं है। शेयर बाजार या सट्टेबाजी से आज पूरी तरह दूरी बनाकर रखें। पारिवारिक माहौल थोड़ा तनावपूर्ण रह सकता है।
आज क्या करें: शनि चालीसा का पाठ करें या सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
आज क्या न करें: आज वाहन चलाते समय लापरवाही बिल्कुल न बरतें।


कुंभ राशि


टीम वर्क से काम करने पर आज आपको बड़ी सफलता मिलेगी। आज किसी पुराने दोस्त की मदद से आर्थिक लाभ का नया जरिया मिल सकता है। शाम का समय परिवार के साथ हंसी-मजाक में बीतेगा, जिससे मानसिक शांति मिलेगी।
आज क्या करें: बहते पानी में काले तिल प्रवाहित करें या गरीबों को भोजन कराएं।
आज क्या न करें: आज किसी भी कानूनी मामले को हल्के में न लें।


मीन राशि


नौकरी में विरोधियों पर आप भारी पड़ेंगे। अपनी सूझबूझ से आप कार्यस्थल की समस्याओं को आसानी से हल कर लेंगे। पैसों के लेन-देन में सावधानी रखें। पार्टनर की भावनाओं का सम्मान करें और उन्हें पर्याप्त समय दें।
आज क्या करें: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का जाप करें।
आज क्या न करें: आज स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही न बरतें।

 

नोट: यह राशिफल ज्योतिषीय मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।

अबकी अमेरिका सिर्फ दक्षिणी ईरान में ही बमबारी क्यों कर रहा, इसकी वजह क्या है?


अमेरिकी सेना लगातार सात रातों से ईरान पर भीषण बमबारी कर रही है। मगर अबकी बार की कार्रवाई रणनीतिक रूप से काफी सधी और एक क्षेत्र तक सीमित है। विशेषज्ञ इसके पीछे एक बड़े संघर्ष की तस्वीर देख रहे हैं, जबकि अमेरिकी सेना को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जीत दिख रही है। खाड़ी देशों को चिंता है कि कहीं अमेरिका की यह बमबारी उनकी सुरक्षा को ही खतरे में न डाल दे, क्योंकि ईरान ने इन देशों को उनके बुनियादी ढांचे पर हमला करने की धमकी दी है। 

 

युद्धविराम से पहले अमेरिका ने राजधानी तेहरान के आसपास भीषण बमबारी की थी। अबकी उसका निशाना दक्षिण ईरान यानी वह इलाका है, जो फारस की खड़ा और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सटा है। अमेरिका इसी इलाके को निशाना क्यों बना रहा है, उसकी रणनीति और आने वालों दिनों की सैन्य तैयारी क्या है? आइये समझते हैं।

 

यह भी पढ़ें: पाकिस्तान में मुनीर vs मौलाना, फजलुर रहमान ने अपनी ही सेना को कैसे घेरा?

ईरान अब किसे बना रहा निशाना?

  • विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका एक व्यवस्थित तरीके से दक्षिणी ईरान पर हमला करके आईआरजीसी और उसकी नेवी को कमजोर बनाने में जुटा है, ताकि होर्मुज पर ईरान की पकड़ को कमजोर किया जा सके। पिछले एक हफ्ते से दक्षिणी ईरान में जारी हमलों से यह संकेत भी मिलते हैं कि डोनाल्ड ट्रंप किसी भी हाल में इस महत्वपूर्ण शिपिंग रूट पर ईरान का एकाधिकार नहीं चाहते हैं। 

 

  • विश्लेषकों का यह भी कहना है कि अमेरिकी सेना दक्षिणी तटीय ईरान पर स्थित सैन्य ठिकानों पर हमला करके आईआरजीसी की मारक क्षमता को सीमित करना चाहती है, क्योंकि इसी क्षेत्र से ही आईआरजीसी न केवल होर्मुज, बल्कि खाड़ी देशों पर ड्रोन और मिसाइल से हमला करता है।

 

  • शुरुआत में अमेरिका ने दक्षिण ईरान में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, लेकिन अब सड़कों, पुलों, सुरंगों, एयरपोर्ट और बिजली लाइन पर बमबारी शुरू कर दी है। नतीजा यह हुआ कि प्रमुख बंदरगाह शहर बंदर अब्बास काफी हद तक देश के अन्य हिस्से से कट चुका है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को जाने वाली सड़कें बंद हो चुकी हैं। र्मोजगान प्रांत में सड़कों को सबसे अधिक नुकसान पहुंचा है। बिजली की लाइन क्षतिग्रस्त हो गई। लोगों के सामने ऊर्जा संकट खड़ा हो गया है।

 

  • बंदर अब्बास के दक्षिण में अमेरिका ने नौसैनिक नाकेबंदी लगा रखी है। उत्तर में ईरान के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाली सड़कों और सुरंगों को तबाह कर दिया है। आज यह शहर लगभग पूरी तरह कट चुका है। इंटरनेट और टेलीफोन सेवा तक ठप हो गई है।

असली मकसद क्या?

इन बुनियादी ढांचों पर हमले के पीछे अमेरिका का मकसद आईआरजीसी को होर्मुज से दूर रखना। उसकी पहुंच को सीमित रखना। सैन्य साजो-समान किसी भी तरह फारस की खाड़ी तक न पहुंचे। अमेरिका अपने जमीनी अभियान के तहत फारस की खाड़ी पर स्थित ईरान के द्वीप पर कब्जा कर सकता है या खाड़ी के तट पर अपने सैनिकों की तैनात कर सकता है।

क्या ‘असली’ लड़ाई की जमीन तैयार कर रहा अमेरिका?

अब दुनियाभर में इस बात की अटकलें तेज होने लगी हैं कि अमेरिका दक्षिणी ईरान में सड़क और पुलों को इस वजह से नष्ट कर रहा है, ताकि जब वह जमीनी हमला करे तो आईआरजीसी वहां तक न पहुंच सके। ईरान के नेता भी इसे जमीनी हमले से पहले जमीन तैयार करने की रणनीति मान रहे हैं। ईरानी सांसद अमीर-हुसैन साबेती का कहना है कि दक्षिण के परिवहन रूटों को तबाह करना शायद जमीनी हमले की भूमिका है। क्षतिग्रस्त सड़कें और पुल द्वीपों या तटीय क्षेत्र में कब्जा करने के किसी भी कोशिश से पहले ईरानी सेनाओं की आवाजाही में बाधा डालेंगे।

 

यह भी पढ़ें: तीसरी बार चाबहार पोर्ट पर हमला, मलबे के ढेर में तब्दील हुआ कंट्रोल टावर

चाबहार पर हमला क्यों किया?

अमेरिका ने चाबहार स्थित एक समुद्री निगरानी टावर को भी तबाह किया है। उसका आरोप है कि आईआरजीसी इसका इस्तेमाल होर्मुज से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों की पर नजर रखने और उन पर हमला करने के लिए करता था। टावर नष्ट होने से आईआरसीजी की क्षमता सीधे तौर पर कम हुई है।

जमीनी हमले का विकल्प खुला है या नहीं?

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वैंस जमीनी हमले के पक्ष में नहीं है। उनका कहना है कि अमेरिका का ईरान में जमीनी सेना भेजने का कोई इरादा नहीं है। जबकि ट्रंप ने एक सप्ताह पहले फॉक्स न्यूज से बातचीत में जमीनी हमले के बारे में पूछने पर कहा था, ‘कभी-कभी जमीनी अभियान की जरूरत होती है। हमारे पास अन्य लोग हैं, जो हमारे लिए जमीनी अभियान चलाएंगे। माना जा रहा है कि ईरान का खार्ग द्वीप अमेरिका के निशाने पर है। यह तेल निर्यात का सबसे बड़ा टर्मिनल है। 

भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट ‘विक्रम-1’ लॉन्च, इससे देश में क्या बदलेगा?


भारत के निजी क्षेत्र द्वारा विकसित पहला ऑर्बिटल रॉकेट ‘विक्रम-1’ ने शनिवार को कई तकनीकी डेमोनेस्ट्रेशन पेलोड और पोस्टकार्ड्स को लेकर सफलतापूर्वक पृथ्वी की निचली कक्षा में पहुंचा दिया गया। इन पोस्टकार्ड्स में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पोस्ट कार्ड भी शामिल है। ‘मिशन आगमन’ नाम से संचालित इस मिशन के साथ भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र ने पहली बार उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करने वाले वैश्विक बाजार में औपचारिक रूप से एंट्री कर ली।

 

इस मिशन का संचालन हैदराबाद स्थित निजी कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने किया है। कंपनी ने इस मिशन को बड़ी सफलता करार दिया। अपने पहले अभियान में चार चरणों वाला और सात मंजिला इमारत जितना ऊंचा विक्रम-1 रॉकेट शनिवार को बादलों से घिरे मौसम के बीच दोपहर 12 बजकर पांच मिनट पर लॉन्च पैड से सफलतापूर्वक रवाना हुआ।

 

पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित हुआ रॉकेट

 

उड़ान भरने के बाद ग्राहा स्पेस, कॉसमोसर्व, डीक्यूब्ड और स्काईरूट के ‘स्कोप’ के तकनीकी परीक्षण के लिए तैयार छोटे उपग्रहों और उपकरणों को क्रमवार 450 किलोमीटर की ऊंचाई पर पृथ्वी की निचली कक्षा (एलईओ) में स्थापित किया गया। रॉकेट ने एक सूक्ष्म कलाकृति, 18 कैरेट सोने से बना एक सूक्ष्म रॉकेट और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का हाथों से लिखा वंदे मातरम् संदेश वाला पोस्टकार्ड भी सफलतापूर्वक कक्षा में पहुंचाया। 

 

यह भी पढ़ें: दिपके पर फेंकी गई स्याही, X पर लिखा- नीला मेरा पसंदीदा रंग… जय भीम

 

विक्रम-1 की खासियतें क्या हैं?

 

विक्रम-1 लॉन्च व्हीकल को पहली बार स्काईरूट एयरोस्पेस ने नवंबर 2025 में दुनिया के सामने दिखाया था। यह भारत का पहला कमर्शियल लॉन्च व्हीकल है। रॉकेट का नाम भारतीय अंतरिक्ष प्रोग्राम के जनक विक्रम साराभाई के नाम पर विक्रम-1 रखा गया है। यह रॉकेट छोटे साइज के सैटेलाइट को ‘लो अर्थ ऑर्बिट’ में ले जाने में सक्षम है।

 

 

 

 

महान विभूतियों के नाम रॉकेटों और इंजनों के नाम

 

स्काईरूट एयरोस्पेस ने बताया कि इस सूक्ष्म कलाकृति पेलोड में भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक विक्रम साराभाई, वैज्ञानिक सर सीवी रमन और पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की सूक्ष्म प्रतिमाएं शामिल हैं। इन्हें भारत की वैज्ञानिक और अंतरिक्ष यात्रा को दिशा देने वाले तीन दूरदर्शी शख्सियतों को श्रद्धांजलि के रूप में तैयार किया गया है। कंपनी ने कहा, ‘स्काईरूट ने गर्व के साथ अपने रॉकेटों और इंजनों का नाम इन्हीं महान विभूतियों के नाम पर रखा है।’

 

नेविगेशन प्रणालियों को मिलेगा फायदा

 

स्काईरूट एयरोस्पेस ने कहा कि इस परीक्षण उड़ान के दौरान प्राप्त इंजीनियरिंग आंकड़ों का विश्लेषण कर रॉकेट की मार्गदर्शन और नेविगेशन प्रणालियों की कार्यक्षमता का सत्यापन किया जाएगा। साथ ही इन आंकड़ों के आधार पर भविष्य के वाणिज्यिक उपग्रह मिशनों के लिए आवश्यक तकनीकी सुधार किए जाएंगे। 

 

इसरो के पूर्व वैज्ञानिक हैं कंपनी संस्थापक

 

इस सफल उड़ान ने वास्तविक उड़ान परिस्थितियों में रॉकेट की पूर्ण कार्बन कंपोजिट संरचना और थ्री-डी प्रिंटेड इंजनों के प्रदर्शन को प्रमाणित किया। कंपनी का दावा है कि ये दोनों तकनीकें अपने प्रकार की पहली टेक्नालॉजी हैं। स्काईरूट एयरोस्पेस के दोनों संस्थापक पवन कुमार चांदना और नागा भरत डाका, दोनों भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व वैज्ञानिक हैं। प्रक्षेपण के दौरान दोनों इसरो प्रमुख वी. नारायणन के साथ इसरो के मिशन नियंत्रण केंद्र (एमसीसी) में मौजूद थे। इसरो के पूर्व अध्यक्षों, भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला और आंध्र प्रदेश के मंत्री नारा लोकेश ने भी एमसीसी से इस प्रक्षेपण को देखा।

 

यह भी पढ़ें: ‘न इलाज चल रहा और न ही रिपोर्ट दी जा रही’, सोनम की पत्नी ने लगाया बड़ा आरोप

 

भारत को क्या मिलेगा फायदा?

 

यह ऐतिहासिक उपलब्धि तेजी से बढ़ रहे वैश्विक लघु उपग्रह प्रक्षेपण बाजार में भारत की स्थिति को और मजबूत करने तथा इसरो के साथ-साथ अंतरिक्ष क्षेत्र में देश की उपस्थिति का विस्तार करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विक्रम-1 के साथ भेजे गए पेलोड में कॉसमोसर्व स्पेस का ‘एम्ब्रेस’ मिशन शामिल है। यह कक्षा में रोबोटिक भुजाओं (यांत्रिक हाथों) के प्रदर्शन से जुड़ा मिशन है, जिनका मकसद अंतरिक्ष में मौजूद मलबे को हटाने की क्षमता का परीक्षण करना है।

 

इसके अलावा ग्राहा स्पेस का ‘सोलारस’ भी भेजा गया। यह एक कॉम्पैक्ट उपग्रह मिशन है, जिसे पृथ्वी की निचली कक्षा में नई तकनीकी क्षमताओं के प्रदर्शन के लिए विकसित किया गया है। कंपनी के अनुसार, स्काईरूट एयरोस्पेस का ‘स्कोप’ उपग्रह एक आंतरिक प्रायोगिक पेलोड है, जिसे भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों में उपयोग होने वाली प्रौद्योगिकियों के परीक्षण के लिए विकसित किया गया है।

बचे हुए खाने से बनाएं टेस्टी डिश, स्वाद मिलेगा और पैसा भी बचेगा

अक्सर घर में खाना थोड़ा बहुत बच जाता है। कई लोग इसे बेकार समझकर फेंक देते हैं लेकिन ऐसी करना सही नहीं है। इससे न सिर्फ खाने की बर्बादी होती है बल्कि पैसों का भी नुकसान होता है। अगर बचा हुआ खाना सही तरीके से रखा गया हो तो उसका दोबारा इस्तेमाल करके कई टेस्टी और नई डिश तैयार की जा सकती है।

 

बस थोड़ी सी समझदारी और कुछ आसान किचन ट्रिक्स अपनाकर आप बचे हुए चावल, रोटी, दाल, सब्जी या ब्रेड को नया स्वाद दे सकते हैं। इससे हर दिन कुछ अलग खाने को भी मिल जाता है और फूड वेस्टेज भी कम होती है। आइए जानते हैं कि बचे हुए खाने से बनने वाली 6 आसान और टेस्टी डिश के बारे में।

 

यह भी पढ़ें: बच्चों का फोन यूज़ कैसे कंट्रोल करें? जानें आसान और असरदार तरीके

1. बचे हुए चावल से बनाएं वेज फ्राइड राइस

अगर रात के चावल बच गए हैं तो उन्हें दोबारा गर्म करके वैसे ही खाने की बजाय उनसे वेज फ्राइड राइस बनाया जा सकता है। इसमें कुछ ताजी सब्जियां और हल्के मसाले मिलाकर चावल का स्वाद पूरी तरह बदल जाता है। यह लंच या डिनर के लिए भी बढ़िया विकल्प होता है।

कैसे बनाएं?

  • एक पैन में 1-2 चम्मच तेल गर्म करें। 
  • इसमें प्याज, गाजर, शिमला मिर्च, मटर या अपने पसंद के अनुसार सब्जियां डालकर 3-4 मिनट भून लें। 
  • अब बचे हुए चावल डालें और फिस उसमें स्वादानुसार नमक, काली मिर्च और थोड़ा सोया सॉस मिलाएं। 
  • अब 2-3 मिनट तक चलाते हुए पकांए। 
  • ऊपर से हरा धनिया डालकर गर्मागर्म परोसें। 

2 बची हुई रोटी से बनाएं रोटी नाचोज

 

अगर घर में रोटियां बच गई हैं तो उन्हें फेंकने की जरूरत नहीं है। इन्हें कुरकुरा बनाकर टेस्टी रोटी नाचोज तैयार किए जा सकते हैं। यह शाम कि हल्की भूख के लिए एक मजेदार स्नैक है।

कैसे बनाएं?

  • रोटी को छोटे-छोटे त्रिकोण आकार में काट लें।
  • हल्का तेल लगाकर तवे या ओवन में कुरकुरा कर लें।
  • ऊपर से प्याज, टमाटर, शिमला मिर्च और चाट मसाला डालें।
  • चाहें तो थोड़ा चीज डालकर 2 मिनट गर्म करें।
  • टोमैटो सॉस या हरी चटनी के साथ खाएं।

3. बची हुई दाल से बनाएं दाल पराठा

 

अगर दाल बच गई है तो उसे फेंकने की बजाय आटा गूंधने में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे पराठे टेस्टी भी बनते हैं और उनमें पोषण भी बढ़ जाता है। यह नाश्ते के लिए अच्छा विकल्प है।

कैसे बनाएं?

  • बची हुई दाल में आटा डालकर गूंध लें।
  • हरा धनिया, अजवाइन और बारीक कटी हरी मिर्च मिलाएं।
  • जरूरत हो तो थोड़ा और आटा डालें।
  • पराठा बेलकर तवे पर घी या तेल से सेंक लें।
  • दही, अचार या चटनी के साथ परोसें।

यह भी पढ़ें: ड्रिंक्स से लेकर मीठे तक, सावन व्रत में ट्राई करें ये टेस्टी और हेल्दी रेसिपी

4. बची हुई सब्जी से बनाएं सैंडविच

अगर आलू, पनीर या मिक्स वेज की सब्जी बच गई है तो उससे झटपट सैंडविच बनाया जा सकता है। इससे बची हुई सब्जी का स्वाद भी नया लगने लगता है और बच्चों को भी पसंद आता है।

कैसे बनाएं?

  • ब्रेड पर बटर या हरी चटनी लगाएं।
  • बची हुई सब्जी को अच्छी तरह फैलाएं।
  • चाहें तो चीज का स्लाइस रखें।
  • दूसरी ब्रेड रखकर तवे या सैंडविच मेकर में सेंक लें।
  • सॉस के साथ सर्व करें।

5. बची हुई खिचड़ी से बनाएं कुरकुरी टिक्की

 

अगर खिचड़ी बच गई है तो उसे दोबारा खाने की बजाय उससे टेस्टी टिक्की बनाई जा सकती है। बाहर से कुरकुरी और अंदर से नरम यह टिक्की बच्चों और बड़ों दोनों को पसंद आती है।

कैसे बनाएं?

  • खिचड़ी में थोड़ा बेसन या ब्रेड क्रम्ब्स मिलाएं।
  • छोटे-छोटे टिक्की का आकार दें।
  • तवे पर हल्का तेल डालकर दोनों तरफ से सुनहरा होने तक सेंकें।
  • हरी चटनी या दही के साथ परोसें।

6. बची हुई ब्रेड से बनाएं ब्रेड उपमा

 

अगर ब्रेड के कुछ स्लाइस बच गए हैं तो उनसे कुछ ही मिनटों में स्वादिष्ट ब्रेड उपमा तैयार किया जा सकता है। यह सुबह के नाश्ते या शाम के स्नैक के लिए अच्छा विकल्प है।

कैसे बनाएं?

  • ब्रेड को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें।
  • पैन में तेल गर्म करके राई, करी पत्ता और हरी मिर्च का तड़का लगाएं।
  • प्याज और टमाटर डालकर हल्का भून लें।
  • अब ब्रेड के टुकड़े डालकर अच्छी तरह मिलाएं।
  • ऊपर से हरा धनिया डालकर गर्मागर्म परोसें।

बचे हुए खाने का इस्तेमाल करते समय रखें इन बातों का ध्यान

  • खाने को हमेशा ढककर फ्रिज में रखें।
  • कोशिश करें कि 24 घंटे के अंदर उसका इस्तेमाल कर लें।
  • खाने को दोबारा अच्छी तरह गर्म करके ही खाएं।
  • अगर खाने की खुशबू, रंग या स्वाद बदल गया हो तो उसका इस्तेमाल न करें।
  • एक ही खाने को बार-बार गर्म करने से बचें।