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इजरायल को मान्यता, गाजा में सैनिक; ट्रंप की तारीफ में कैसे फंसे मुनीर?


पिछले कुछ महीनों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से ज्यादा सेना प्रमुख असीम मुनीर की तारीफ की। व्हाइट हाउस में एक साथ लंच किया। जब असीम मुनीर को ‘माई फेवरेट फील्ड मार्शल’ कहा तो पूरी दुनिया हैरत में पड़ गई।

 

बार-बार तारीफ के अलावा भारत की तुलना में पाकिस्तान को अधिक महत्व दिया। गाजा पीस बोर्ड में पाकिस्तान को शामिल किया। पाकिस्तानी सैनिकों की तैनाती का प्रस्ताव रखा। हालांकि अभी तक पाकिस्तान ने अपने सैनिकों को गाजा नहीं भेजा है। 

पाकिस्तान का रहा इजरायल विरोधी रुख

ईरान से युद्ध शुरू होने के बाद पाकिस्तान एक अलग ही भूमिका में दिखा। उसने सक्रिया मध्यस्थता की। उसके प्रयास से कुछ हफ्तों का युद्धविराम लागू हुआ। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने ईरान पर हमले की निंदा की। मगर अमेरिका की जगह उन्होंने खुलकर इजरायल पर हमला बोला। रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इजरायल को कैंसर तक कह डाला। बाद में किसी दबाव में आकर आसिफ को अपना सोशल मीडिया पोस्ट डिलीट करना पड़ा। 

 

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पाकिस्तान के आगे कुआं… पीछे खाई

 

तारीफों और वाहवाही के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान को एक ऐसे मुहाने पर ला खड़ा कर दिया है, जहां आगे कुआं और पीछे खाई वाली स्थिति है। डोनाल्ड ट्रंप अपने पिछले कार्यकाल से ही सऊदी अरब पर अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होने का दबाव बनाने में जुटे हैं। 2020 में संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, सूडान और मोरक्को ने अब्राहम अकॉर्ड्स के तहत इजरायल को मान्यता दी और उसके साथ राजनयिक संबंधों की स्थापना की।

पाकिस्तान के साथ सऊदी अरब भी दुविधा में

इजरायल और यूएई की बढ़ती नजदीकी से सऊदी अरब परेशान है। पिछले साल कतर की राजधानी दोहा पर इजरायली हमले ने सऊदी अरब को नींद से जगा दिया। उसके बाद ही रियाद ने पाकिस्तान के साथ एक रक्षा समझौता किया। अब इसमें तुर्की और मिस्र को भी शामिल करने की कवायद चल रही है। अमेरिका न केवल पाकिस्तान बल्कि सऊदी अरब पर भी इजरायल को मान्यता देने का दबाव बनाने में जुटा है।  

 

उधर, तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन खुलकर बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ जहर उगलने में जुटे हैं। ऐसे में आने वाले समय में अगर इस तिकड़ी ने इजरायल के प्रति नरम रुख नहीं अपनाया तो डोनाल्ड ट्रंप की नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है।

पासपोर्ट तक बदलना पड़ेगा

पाकिस्तान के लिए इजरायल को मान्यता देना आसान नहीं होगा। वह अपने अस्तित्व के समय से ही इजरायल की जगह फिलिस्तीन को मान्यता देता हैं। यहां तक की उसके पासपोर्ट पर भी लिखा है कि यह इजरायल को छोड़कर पूरी दुनिया में मान्य है। अगर पाकिस्तान दबाव में आकर इजरायल को मान्यता देता है तो उसे अपना पासपोर्ट तक बदलना पड़ेगा।

 

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मुनीर को सता रहा अशांति फैलने का डर

सबसे बड़ी दुविधा यह है कि इस कदम से पूरे पाकिस्तान में अशांति फैल सकती है। जनता सड़कों पर उतर सकती है। विद्रोह की स्थिति पैदा हो सकती है। यही कारण है कि कोई सरकार इतना बड़ा जोखिम नहीं उठाना चाहती है। मगर अब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन अपनी तारीफों के बदले पाकिस्तान से यह कीमत चुकाने का दबाव बना रहा है। बता दें कि सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ के शासन में पाकिस्तान और इजरायल के बीच रिश्तों को सुधारने की पहल हुई थी। 

 

गाजा पीस डील के तहत पाकिस्तान को अपने सैनिकों को भी वहां भेजने हैं। यह सैनिक इजरायली सेना की जगह तैनात होंगे। इनका गांव गाजा में सुरक्षा आदि को संभालना है। पाकिस्तान ने अभी तक अपने सैनिक नहीं भेजे हैं। असीम मुनीर और वहां की सरकार सैनिकों को भेजने से कतरा रही है। उसका मानना है कि अगर सैनिकों को भेजा गया तो जनता में गलत मैसेज जाएगा। अगर पाकिस्तान समझौते के तहत सैनिकों को नहीं भेजता है तो ट्रंप का गुस्सा झेलना पड़ेगा।

तारीफ के पीछे ईरान एंगल भी

पाकिस्तान की तारीफ का एक एंगल यह भी है कि ईरान युद्ध में भी अमेरिका को उसकी मदद चाहिए थी। ईरान के खिलाफ अमेरिका नूर खान एयरबेस को इस्तेमाल करना चाहता था। इसके अलावा खाड़ी देशों से ईरान की शत्रुता की स्थिति में पाकिस्तान ही इकलौता देश बचा था, जो तेहरान तक अमेरिका का मैसेज पहुंचा सकता था। यही कारण है कि ट्रंप ने हर मौके पर असीम मुनीर की खूब तारीफ की।

सीमा के करीब बने अवैध निर्माण पर चलेगा बुलडोजर, गृह मंत्री शाह का आदेश


अंतरराष्ट्रीय सीमा के करीब बने अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलेगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश की सीमा के 15 किमी के भीतर अवैध निर्माण के खिलाफ एक्शन लेने का आदेश दिया है। राजस्थान के बीकानेर में मंगलवार को सुरक्षा समीक्षा बैठक में शाह ने अधिकारियों को पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय सीमा के करीब बनी अवैध इमारतों को ध्वस्त करने और जीरो टॉलरेंस की नीति को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है।

 

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश के सीमावर्ती जिलों को अपराधों और नशीली दवाओं के खतरे के पीछे के स्रोत, पैटर्न और नेटवर्क का अध्ययन करने और स्थायी समाधान खोजने का निर्देश दिया गया है। मंत्रालय ने देश की सीमा के भीतर 0 से 15 किमी के दायरे में स्थित अवैध निर्माणों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति को सख्ती से लागू करने और अवैध निर्माण को ध्वस्त करने का निर्देश दिया है।

 

 

 

 

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अमित शाह की बैठक में कौन-कौन था शामिल

  • राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा
  • प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारी 
  • बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर, श्री गंगानगर और फलौदी के डीएम और एसपी

बैंक लेनदेन पर रखेंगी निगाह

अधिकारियों के मुताबिक गृह मंत्रालय ने सीमावर्ती क्षेत्रों के सभी बैंकों को बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का वेरिफिकेशन, आय के स्रोत की जांच, म्यूल अकाउंट की पहचान, नकली आधार कार्ड और जाली कंपनियों को ट्रैक करने का निर्देश दिया है। सीमावर्ती इलाके में तस्करी को रोकने की खातिर जिला मजिस्ट्रेटों को अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है।

 

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अमित शाह ने नागरिकों, राज्य मशीनरी और सुरक्षा एजेंसियों को मिलाकर सीमावर्ती जिले के लिए 360 डिग्री सुरक्षा कवर तैयार करने पर अधिक बल दिया। सीमावर्ती गांवों में सभी सरकारी योजनाओं को 100 फीसदी पहुंचाने का निर्देश दिया। इसके अलावा साइबर अपराधों से निपटने की खातिर ‘1930’ कॉल सेंटर के इस्तेमाल की अपील की। शाह ने दो महीने बाद इन मुद्दों पर दोबारा समीक्षा और फीडबैक लेने की बात कही और यह भी कहा कि सभी जिलों को परिणामोन्मुख कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी। 

कौन डोनेट कर सकता है ब्रेस्ट मिल्क? डॉक्टर से जानिए नियम से लेकर पूरी प्रक्रिया


मां का दूध नवजात शिशु के लिए सबसे संपूर्ण और सुरक्षित आहार माना जाता है। इसमें मौजूद पोषक तत्व, एंटीबॉडी और इम्यूनिटी बढ़ाने वाले गुण बच्चे को संक्रमणों से बचाने में मदद करते हैं। लेकिन कई बार कुछ माताएं स्वास्थ्य समस्याओं, समय से पहले डिलीवरी, कम दूध बनने या अन्य कारणों से अपने शिशु को पर्याप्त स्तनपान नहीं करा पातीं। ऐसे में ब्रेस्ट मिल्क डोनेशन यानी स्तन दूध दान कई नवजात बच्चों के लिए वरदान साबित होता है।

 

बैडमिंटन प्लेयर ज्वाला गुट्टा ने 1 साल के अंदर 60 लीटर ब्रेस्ट मिल्क दान किया है। वह अन्य महिलाओं से भी ब्रेस्ट मिल्क दान करने की अपील करती हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि कौन सी महिलाएं ब्रेस्ट मिल्क डोनेट कर सकती हैं? ब्रेस्ट को मिल्क कैसे स्टोर कर सकते हैं और इसकी क्या प्रकिया है। इसके बारे में हमने गुड़गांव सेक्टर 14 की क्लाउडनाइन ग्रुप ऑफ अस्पताल में स्त्री विभाग की विशेषज्ञ डॉक्टर चेतना जैन  से बात की।

 

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कौन सी महिलाएं ब्रेस्ट मिल्क डोनेट कर सकती हैं?

स्वस्थ स्तनपान कराने वाली महिलाएं, जिनके शरीर में पर्याप्त मात्रा में दूध बन रहा हो, ब्रेस्ट मिल्क डोनेट कर सकती हैं। हालांकि, इसके लिए कुछ जरूरी शर्तें होती हैं:

मां पूरी तरह स्वस्थ हो।

  • कोई गंभीर संक्रमण या संक्रामक बीमारी न हो।
  • एचआईवी (HIV), हेपेटाइटिस B/C, सिफलिस जैसी बीमारियों की जांच नेगेटिव हो।
  • धूम्रपान, शराब या नशीले पदार्थों का सेवन न करती हो।
  • डॉक्टर द्वारा प्रतिबंधित दवाइयों का सेवन न कर रही हो।
  • बच्चे की उम्र सामान्यतः 6 महीने से कम हो तो दूध की गुणवत्ता बेहतर मानी जाती है।
  • डोनर मां की मेडिकल हिस्ट्री और ब्लड टेस्ट के बाद ही दूध स्वीकार किया जाता है।
  • अगर कोई महिला ब्रेस्ट मिल्क डोनेट करना चाहती हैं तो उन्हें किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

ब्रेस्ट मिल्क डोनेट करने से पहले स्वच्छता और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

 

कुछ महत्वपूर्ण बातें:

 

1. हाथों की सफाई- दूध निकालने से पहले कम से कम 20 सेकंड तक साबुन से हाथ धोएं।

2. ब्रेस्ट पंप की सफाई- पंप के सभी हिस्सों को हर इस्तेमाल के बाद गर्म पानी और साबुन से अच्छी तरह साफ करें और सुखाएं।

3. सही कंटेनर का उपयोग- दूध को केवल स्टरलाइज्ड और फूड-ग्रेड कंटेनर या मिल्क स्टोरेज बैग में ही रखें।

4. एक्सपायरी और स्टोरेज टाइम लिखें- दूध निकालने की तारीख और समय कंटेनर पर लिखना जरूरी होता है।

5. बीमारी में डोनेट न करें- अगर मां को बुखार, संक्रमण, सर्दी-जुकाम या कोई बीमारी हो तो डॉक्टर की सलाह के बिना दूध डोनेट नहीं करना चाहिए।

6. संतुलित आहार लें- डोनर मां को पौष्टिक भोजन, पर्याप्त पानी और आराम लेना चाहिए ताकि दूध की गुणवत्ता अच्छी बनी रहे।

ब्रेस्ट मिल्क को कितने दिन का पंप करके फ्रीज में रख सकते हैं?

ब्रेस्ट मिल्क की सुरक्षा और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए सही तापमान पर स्टोर करना बहुत जरूरी है।

सामान्य स्टोरेज गाइडलाइन:

  • कमरे के तापमान (25°C तक): लगभग 4 घंटे
  • रेफ्रिजरेटर (4°C): 3–4 दिन
  • फ्रीजर (-18°C या उससे कम): लगभग 6 महीने तक सुरक्षित
  • डीप फ्रीजर: 6–12 महीने तक
  • हालांकि, जितना जल्दी दूध उपयोग किया जाए, उतना बेहतर माना जाता है।

कुछ जरूरी सावधानियां-

  • दूध को छोटे-छोटे हिस्सों में स्टोर करें।
  • एक बार पिघलाया हुआ दूध दोबारा फ्रीज न करें।
  • दूध को माइक्रोवेव में गर्म न करें।
  • फ्रीज किए गए दूध को फ्रिज में धीरे-धीरे डीफ्रॉस्ट करना बेहतर होता है।

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क्या ब्रेस्ट मिल्क को स्टोर करने के लिए खास तरह का पैकेट चाहिए होता है?

जी हां, ब्रेस्ट मिल्क को सुरक्षित रखने के लिए विशेष प्रकार के स्टोरेज बैग या कंटेनर का उपयोग किया जाता है।

 

सही स्टोरेज विकल्प:

 

BPA-free प्लास्टिक या ग्लास कंटेनर
विशेष Breast Milk Storage Bags
एयरटाइट और फूड-ग्रेड कंटेनर

साधारण प्लास्टिक बैग या बोतलों का उपयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि इनमें संक्रमण या लीकेज का खतरा हो सकता है।

 

स्टोरेज बैग चुनते समय ध्यान रखें:

 

बैग मजबूत और लीक-प्रूफ हो।
उस पर तारीख और मात्रा लिखने की जगह हो।
एक बार उपयोग के बाद दोबारा इस्तेमाल न करें।

ब्रेस्ट मिल्क डोनेट करने की प्रक्रिया क्या है?

भारत में अब कई अस्पताल और ह्यूमन मिल्क बैंक ब्रेस्ट मिल्क डोनेशन को बढ़ावा दे रहे हैं। प्रक्रिया सामान्यतः इस प्रकार होती है:

 

1. रजिस्ट्रेशन– डोनर मां को मिल्क बैंक या अस्पताल में रजिस्ट्रेशन करवाना होता है।

2. हेल्थ स्क्रीनिंग-मां की मेडिकल हिस्ट्री ली जाती है और कुछ ब्लड टेस्ट किए जाते हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि दूध सुरक्षित है।

3. दूध निकालना-मां घर पर या अस्पताल में स्वच्छ तरीके से दूध निकाल सकती है।

4. स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट– दूध को सही तापमान पर स्टोर करके मिल्क बैंक तक पहुंचाया जाता है।

5. पाश्चराइजेशन-मिल्क बैंक में दूध को पाश्चराइज किया जाता है ताकि किसी भी प्रकार के बैक्टीरिया या संक्रमण का खतरा समाप्त हो जाए।

 

जरूरतमंद शिशुओं को उपलब्ध कराना इसके बाद यह दूध विशेष रूप से समय से पहले जन्मे (preterm), कम वजन वाले या बीमार बच्चों को दिया जाता है।

 

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ब्रेस्ट मिल्क डोनेशन क्यों महत्वपूर्ण है?

समय से पहले जन्मे बच्चों के लिए जीवनरक्षक साबित हो सकता है।
संक्रमण और पेट संबंधी बीमारियों का खतरा कम करता है।
नवजात की इम्यूनिटी मजबूत करता है।
मां के दूध का विकल्प होने के कारण यह फार्मूला मिल्क से अधिक सुरक्षित माना जाता है।


निष्कर्ष

 

ब्रेस्ट मिल्क डोनेशन एक संवेदनशील और मानवीय पहल है जो कई नवजात बच्चों को स्वस्थ जीवन देने में मदद करती है। यदि किसी मां के पास अतिरिक्त दूध है और वह स्वस्थ हैं, तो वे डॉक्टर की सलाह लेकर मिल्क डोनेशन कर सकती हैं। सही स्वच्छता, सुरक्षित स्टोरेज और मेडिकल गाइडलाइन का पालन करके यह प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित और लाभकारी बनाई जा सकती है।

श्री हनुमान चालीसा। Hanuman Chalisa Hindi


सनातन धर्म में हनुमान चालीसा का पाठ करना बेहद लाभकारी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, जो भक्त मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं, उनके सारे कष्ट और परेशानियां दूर हो जाती हैं। तुलसीदास जी  ने हनुमान चालीसा की रचना की थी। कई कथाओं के मुताबिक, जब तुलसीदास जी को अकबर के सिपाहियों ने जेल में बंद कर दिया था, तब उन्होंने जेल में रहते हुए हनुमान चालीसा लिखी थी। जिससे कठिन परिस्थिति में उन्हें हनुमान जी का सहारा मिला, तभी से हनुमान चालीसा का पाठ प्रसिद्ध हो गया।

 

हनुमान चालीसा अवधी भाषा में लिखी गई है, जिसकी शुरुआत दोहे से होती है। इसके बाद 40 चौपाइयां लिखी गई हैं। इन चौपाइयों में हनुमान जी के गुणों का वर्णन किया गया है। हनुमान चालीसा की चौपाइयों में सिर्फ शब्द ही नहीं, बल्कि हर शब्द के उच्चारण से भक्तों को शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है।

 

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हनुमान चलीसा

 

दोहा

 

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।। 
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।। 

 

चौपाई

 

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।

 

रामदूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।
 
महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी।।
 
कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुंडल कुंचित केसा।।

 

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
कांधे मूंज जनेऊ साजै।।

 

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संकर सुवन केसरीनंदन।
तेज प्रताप महा जग बन्दन।।
 
विद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर।।
 
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया।।
 
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
बिकट रूप धरि लंक जरावा।।
 
भीम रूप धरि असुर संहारे।
रामचंद्र के काज संवारे।।
 
लाय सजीवन लखन जियाये।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।।

 

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।
 
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।
 
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा।।
 
जम कुबेर दिगपाल जहां ते।
कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।

 

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तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा।।
 
तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।
लंकेस्वर भए सब जग जाना।।
 
जुग सहस्र जोजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।
 
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।
 
दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।
 
राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।
 
सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रक्षक काहू को डर ना।।

 

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आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हांक तें कांपै।।
 
भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै।।
 
नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा।।
 
संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।
 
सब पर राम तपस्वी राजा।
तिन के काज सकल तुम साजा।
 
और मनोरथ जो कोई लावै।
सोइ अमित जीवन फल पावै।।
 
चारों जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा।।
 
साधु-संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे।।
 
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता।।

 

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राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा।।
 
तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम-जनम के दुख बिसरावै।।
 
अन्तकाल रघुबर पुर जाई।
जहां जन्म हरि-भक्त कहाई।।
 
और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।
 
संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।
 
जै जै जै हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।
 
जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बंदि महा सुख होई।।

 

 

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जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा।।
 
तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय मंह डेरा।। 
 
दोहा 
 
पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।
 

ईरान पर US ने फिर कर दिया हमला, समुद्र में बारूद बिछा रही नावों को बनाया निशाना


एक तरफ कहा जा रहा है कि ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत अंतिम दौर में है और जल्द ही पूरी तरह से शांति स्थापित हो सकती है। दूसरी तरफ अमेरिका ने जबरदस्त हमला कर दिया है। अमेरिका की ओर से ही बताया गया है कि यह हमला उसने ‘सेल्फ डिफेंस’ में किया है और समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछाने वाली नाव को निशाना बनाया है। अमेरिका की ओर से कहा गया है कि ये हवाई हमले दक्षिणी ईरान में उन जगहों पर किए गए हैं जहां बारूदी सुरंग बिछाने के अलावा मिसाइल लॉन्चिंग के लिए जगह बनाने की कोशिश हो रही है।

 

यह हमला ऐसे वक्त हुआ है जब कयास लगाए जा रहे हैं कि अब अमेरिकी और ईरान के बीच सहमति बन जाएगी और ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह खोलने पर सहमत हो जाएगा। अब दक्षिणी ईरान में हुए इस हमले के अलावा बंदर अब्बास में भी बम धमाके की खबर सामने आई है। उधर कतर की मध्यस्थता के जरिए ईरान और अमेरिका के बीच सहमति बनाने की कोशिश जारी है। हालांकि, इस सबके बावजूद इजरायल ने लेबनान पर हमले कम नहीं किए हैं और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इन हमलों को और बढ़ाने के संकेत दिए हैं।

 

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क्यों किया ऐसा हमला?

 

अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि ये हमले अमेरिकी सैनिकों को ईरानी सेना से पैदा होने वाले खतरों से बचाने के लिए किए गए हैं। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिकी नेवी के कैप्टन और सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता टिम हॉकिन्स ने कहा, ‘अमेरिकी सेंट्रल कमांड हमारी सेना की रक्षा कर रही है।’ बता दें कि यह हमला उस वक्त हुआ जब बातचीत लगातार जारी है और दोनों देशों की ओर से सीजफायर जारी है।

इस हमले से इतर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम को या तो नष्ट कर दिया जाए या फिर उसे अमेरिका को सौंप दिया जाए। उन्होंने अपने ट्रुथ सोशल अकाउंट पर लिखा है, ‘एनरिच्ड यूरेनियम को तत्काल अमेरिका को सौंप दिया जाए ताकि उसे वापस लाया जा सके और नष्ट किया जा सके या फिर ईरान के सहयोग और उसकी मदद से इसे किसी ऐसी जगह पर नष्ट किया जाए जिसके लिए अटॉमिक एनर्जी कमीशन सहमत हो और वह इसका गवाह भी बने।’

 

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डोनाल्ड ट्रंप का यह पोस्ट उस वक्त आया है जब कहा जा रहा है कि कतर में चल रही बातचीत आखिरी दौर में है और अमेरिका-ईरान के बीच सहमति बन सकती हैं। हालांकि, शुरू से यही देखा गया है कि ईरान न्यूक्लियर एनरिचमेंट या अपना परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से बंद करने को राजी नहीं है और अमेरिका उससे ऐसा ही करवाना चाहता है। इसी को लेकर तमाम बार की बातचीत बेनतीजा भी साबित हुई है।

‘पत्नी घर का काम नहीं करती,’ पति ने तलाक मांगा, HC ने कहा, ‘हर महीने दो 20 हजार’


बॉम्बे हाई कोर्ट ने पत्नी की कथित क्रूरता से जुड़ी एक याचिका में ऐसा फैसला सुनाया है, जिसे महिला सशक्तीकरण की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। एक शख्स ने हाई कोर्ट में पत्नी से तलाक के लिए अर्जी दी थी। तलाक में कहा गया था कि पत्नी घर के काम नहीं करती है, मां-बाप की सेवा नहीं करती है, इसलिए क्रूरता के आधार पर तलाक दिया जाए। हाई कोर्ट ने जो फैसला सुनाया, वह फैसला, एक बड़े तबके को रास नहीं आ सकता है।

बॉम्बे बाई कोर्ट ने पति को ही सबक सिखा दिया। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पति हर महीने अब पत्नी को 10 हजार रुपये गुजारा भत्ता देगा, 10 हजार रुपये, घर के किराए के तौर पर देना होगा। यह फैसला लोगों को चौका रहा है लेकिन इस फैसले के पीछे की वजह बेहद दिलचस्प है। 

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पति, पत्नी के खिलाफ अदालत क्यों गया?

यह मामला, साल 2004 का है। पति ने अदालत में याचिका दायर की। पति ने अपनी याचिका में कहा, ‘पत्नी घर के काम नहीं करती है, खाना नहीं बनाती है, वह मां-बाप की इज्जत नहीं करती है, उसका व्यवहार तीखा है, वह अभिभावकों का आदर नहीं करती है, उसे खाना बनाने नहीं आता है, इन सब की वजह से मानसिक तनाव हो रहा है, यह क्रूरता है।’

कोर्ट ने कहा, ‘घर के काम न करना क्रूरता नहीं’

बॉम्बे हाई कोर्ट:-
‘अगर पत्नी, घर के काम नहीं कर पाती है, खाना नहीं बना पाती है, साफ सफाई नहीं कर पाती है तो यह क्रूरता नहीं है। शादी बराबरी का रिश्ता है, कोई सर्विस कॉन्ट्रेक्ट नहीं है। पत्नियां नौकर नहीं हैं।’

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बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पत्नी का घर के काम करने से इनकार करना क्रूरता नहीं है, न ही इसे मानसिक क्रूरता करार दिया जा सकता है। 8 मई 2026 को जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस मंजूषा देशपांडे की बेंच ने यह फैसला सुनाया। हाई कोर्ट ने साल 2010 में बांद्रा फैमिली कोर्ट के उस फैसले को खारिज कर दिया, जिसमें तलाक को इजाजत दे दी गई थी और पति को गुजारा भत्ता देने से छूट मिला था। 

क्यों कोर्ट ने यह फैसला सुनाया?

साल 2004 में जब पति ने तलाक की तहरीर दी थी, तभी पत्नी ने गुजारा भत्ता मांग लिया था। बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि साल 2010 में फैमिली कोर्ट का गुजारा भत्ता देने से इनकार करना एक ‘आर्ट और क्राफ्ट क्लास’ के विज्ञापन के आधार पर था। इसका कोई सबूत नहीं था कि इससे होने वाली आय, जीवन यापन के लिए पर्याप्त थी। 

हाई कोर्ट ने कहा कि पत्नी के ‘आर्ट और क्राफ्ट’ क्लास के विज्ञापन के आधार पर कहा कि कौशल का होना, कभी कभार उससे कमाई करना, नियमित आय का साधन नहीं माना जा सकता है। ऐसा कोई प्रमाण नहीं है यह नियमित आधार का स्रोत हो।’ 

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इसलिए पति को देना होगा हर महीने 20 हजार

हाई कोर्ट ने कहा कि पति चार्टर्ड अकाउंटेंट है, उसके पास स्थिर आय का साधन है, वह गुजारा भत्ता देने में सक्षम है, इसलिए हर महीने पत्नी को 10 हजार रुपये का गुजारा भत्ता दे और कम से कम 10 हजार महीने पत्नी के आवासीय खर्चे का भत्ता दे। 

गर्मी में फॉलो करें ये 4 टिप्स, त्वचा और बाल संबंधी समस्याओं से पाएं छुटकारा


गर्मी के मौसम में धूप और प्रदूषण की वजह से त्वचा संबंधी परेशानियां बढ़ जाती हैं। इस मौसम में तापमान अधिक होने की वजह से पसीना भी ज्यादा आता है जिससे त्वचा चिपचिपी और बेजान नजर आती है। जिन लोगों की स्किन ऑयली या सेंसिटिव हैं उन्हें मुंहासे, खुजली और रेडनेस की समस्या रहती है। इन समस्याओं से दूर रहने के लिए त्वचा का खास ख्याल रखने की जरूरत होती है। 

 

इस मौसम में सिर्फ त्वचा ही नहीं बालों से जुड़ी समस्याएं भी बढ़ जाती हैं। हम आपको कुछ ब्यूटी टिप्स बता रहे हैं जिसकी मदद से आप इन समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं। इन नुस्खों को हमारी दादी और नानी के समय से आजमाया जा रहा है।

 

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गर्मी में कैसे रखें त्वचा और बालों का ख्याल?

लौंग का पानी

 

अगर आपको डैंड्रफ की समस्या है तो छुटकारा पाने के लिए लौंग के पानी का इस्तेमाल करें। लौंग में बायोएक्टिव कंपाउड Eugenol पाया जाता है जो फंगल इंफेक्शन को दूर रखने में मदद करता। साथ ही सर्कुलेशन को बेहतर करता है। ये आपके हेयर फॉलिकल्स को मजबूत करने का काम करता है। 

 

ऑयल पुलिंग

 

ऑयल पुलिंग के लिए नारियर तेल सबसे बेहतर होता है। इसमें एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल एजेंट है। ऑयल पुलिंग करने के लिए आपको सुबह खाली पेट 1 चम्मच नारियल तेल मुंह में डालें। इसके बाद तेल को 10 से 15 मिनट तक मुंह में घुमाएं और बाद में थूक दें। इसके बाद मुंह को गर्म पानी से साफ करें।

 

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बालों को रीठा से धोएं

 

आप शैंपू की जगह पर बालों को रीठा से धोएं। इसमें प्राकृतिक रूप से सैपोनिन होता है जो पानी से मिलता है तो साबुन की तरह झाग बनाता है। ये आपके बालों को मुलायम रखने में भी मदद करता है।

 

पानी पीते रहना चाहिए

 

पानी की कमी से आपका त्वचा रूखी और बेजान नजर आती है। शरीर को हाइड्रेटेड रखने के लिए पानी पीते रहना चाहिए। हर व्यक्ति को दिन भर में 2.5 से 3 लीटर पानी पीना चाहिए।

‘मैं रहूं या ना रहूं, चिंता मत करना…’, वायरल हो गया प्रेमानंद महाराज का वीडियो


प्रेमानंद महाराज की तबीयत अभी ठीक नहीं है, जिसकी वजह से उनकी रोज होने वाली पैदल यात्रा और भक्तों से मिलना अभी बंद है। इसी बीच उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है जिसमें वह अपने भक्तों को समझाते हुए कह रहे हैं, ‘बिल्कुल भी चिंता मत करना। चाहे हम मिलें या ना मिलें, चाहे हम बोलें या ना बोलें, हम आप सब से बहुत प्यार करते हैं। सबसे जरूरी बात है कि आपको फिक्र नहीं करनी है। आप ये मत सोचिए कि आगे क्या होगा। हम बिना बोले भी आपके मन में रहेंगे।’

 

प्रेमानंद महाराज की रात वाली पदयात्रा 17 मई से बंद है। इस वजह से भक्त उनकी सेहत को लेकर परेशान हैं। उनके शिष्यों ने पहले ही बताया था कि उनकी तबीयत स्थिर नहीं है। इसलिए उनसे मिलना और बातचीत अभी बंद है। उनके करीबी लोगों के मुताबिक, प्रेमानंद महाराज की दोनों किडनी खराब हैं और उन्हें हफ्ते में दो से तीन बार डायलिसिस कराना पड़ता है।

 

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भक्तों से कही यह बात

महाराज जी ने अपने वीडियो में आगे कहा, ‘गुरुदेव जो कहते हैं आप उसका पालन करें। आप एकदम बेफिक्र रहें। आप जो भी सेवा कर रहे हैं, उसे करते रहें। भगवान के नाम का जाप लगातार करें सब अच्छा होगा। आपका गुरुदेव आपके मन में हमेशा रहेगा। आप बिना किसी डर के भजन करें। जब हमारा मन करेगा, हम फिर से बात करेंगे।’ 17 मई की रात को जब हजारों भक्त उनके दर्शन के लिए आए थे तब शिष्यों ने जानकारी दी थी कि प्रेमानंद महाराज की पदयात्रा अभी नहीं हो पाएगी।

 

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प्रेमानंद महाराज का सफर 

प्रेमानंद महाराज का जन्म कानपुर जिले की नरवल तहसील में हुआ था। उनके पिता का नाम शंभू नारायण पांडेय और माता का नाम रमा देवी है। वह तीन भाइयों में से दूसरे नंबर पर हैं। बचपन में उनका नाम अनिरुद्ध कुमार पांडेय था। उन्होंने आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की है, जब वह छोटे थे तब उन्होंने अपने दोस्तों के साथ एक शिव मंदिर बनाने की कोशिश की थी लेकिन कुछ लोगों के विरोध के कारण वह काम पूरा नहीं हो पाया।

 

इस बात से वह बहुत दुखी हुए और उन्होंने घर छोड़ दिया। वह कानपुर से काशी चले गए और 13 साल की उम्र में उन्होंने ब्रह्मचारी बनने का फैसला किया और उन्हें ‘आर्यन ब्रह्मचारी’ नाम दिया गया। वहां करीब 15 महीने रहने के बाद उन्होंने गुरु गौरी शरण महाराज से दीक्षा ली और फिर वह मथुरा आ गए।

क्या इजरायल को मान्यता देगा ईरान? डोनाल्ड ट्रंप के दावे से उठे सवाल


अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि जब तक ईरान के साथ कोई समझौता नहीं होता है, तब तक अमेरिकी की नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहेगी। धमकी भरे लहजे में कहा कि ईरान न तो परमाणु बम बना सकता है और न ही कहीं से हासिल कर सकता है। यह भी इशारा किया कि भविष्य में ईरान अब्राहम समझौते का हिस्सा बन सकता है। 

 

2020 में अमेरिका की मध्यस्थता से अब्राहम समझौता अस्तित्व में आया था। इसके तहत खाड़ी देशों और इजरायल के बीच राजनयिक संबंध स्थापित करना शामिल है। संयुक्त अरब अमीरात ने इसी समझौते के तहत इजरायल को मान्यता दी थी। अब ट्रंप के दावे के मुताबिक यह देखना होगा कि क्या भविष्य में ईरान भी इजरायल को मान्यता देगा?

 

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डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को अपने ट्रुथ सोशल पर एक लंबा चौड़ा पोस्ट किया। इसमें ईरान के साथ न्यूक्लियर डील करने पर ओबामा प्रशासन की आलोचना की और इसे अमेरिका की अब तक सबसे खराब डील बताया। ट्रंप का दावा है कि यह समझौता ईरान को न्यूक्लियर हथियार बनाने का सीधा रास्ता था। मगर मौजूदा प्रशासन ईरान के साथ जो बातचीत कर रहा है, उसमें कुछ नहीं है। असल में यह उसके बिल्कुल उलट है।

ट्रंप ने बताया- कब तक लागू रहेगी नाकाबंदी

ट्रंप ने दावा किया, ‘बातचीत व्यवस्थित और रचनात्मक तरीके से आगे बढ़ रही है। मैंने अपने प्रतिनिधियों को निर्देश दिया है कि वे किसी डील को लेकर जल्दबाजी न करें, क्योंकि समय हमारे पक्ष में है। जब तक कोई समझौता नहीं हो जाता, उसे प्रमाणित नहीं कर दिया जाता और उस पर साइन नहीं होते हैं, तब तक नाकाबंदी पूरी तरह से लागू रहेगी।’ 

ईरान कोई परमाणु हथियार नहीं बना सकता: ट्रंप

ट्रंप ने आगे कहा, ‘दोनों पक्षों को अपना समय लेना चाहिए और सब कुछ ठीक से करना चाहिए। इसमें कोई गलती नहीं हो सकती। ईरान के साथ हमारे संबंध अब कहीं अधिक पेशेवर और फलदायी बनते जा रहे हैं। हालांकि उन्हें यह समझना होगा कि वे कोई भी न्यूक्लियर हथियार या बम न तो बना सकते हैं और न ही कहीं से हासिल कर सकते हैं।’

 

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क्या अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होगा ईरान

ट्रंप ने मध्य पूर्व के सभी देशों को समर्थन और सहयोग की खातिर धन्यवाद दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि यह समर्थन और सहयोग तब और भी अधिक बढ़ेगा और मजबूत होगा जब वे ऐतिहासिक अब्राहम अकॉर्ड्स (Abraham Accords) में शामिल देशों के साथ जुड़ेंगे। कौन जाने शायद ‘इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान’ भी इसमें शामिल होना चाहे।

‘मीडिया से पहले एजेंसियों को बताएं’, त्विषा के परिवार को सुप्रीम कोर्ट की नसीहत


मध्य प्रदेश के चर्चित त्विषा शर्मा केस अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। सोमवार को स्वत: संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह त्विषा शर्मा मौत मामले की जांच और उसे निपटाने के तरीके से परेशान है। सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया से इस मामले से जुड़े घटनाक्रमों की रिपोर्टिंग करते समय संयम बरतने को कहा।

त्विषा शर्मा भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में अपने ससुराल में 12 मई को फंदे से लटकी मिली थीं। उनकी उम्र 33 साल थी। उनके परिवार ने उनके ससुराल वालों पर दहेज उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया है। 

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त्विषा की ससुराल ने क्या आरोप लगाए हैं?

त्विषा के ससुराल वालों ने दावा किया कि उन्हें नशे की लत थी। पुलिस ने त्विषा के पति और पेशे से वकील समर्थ सिंह और उनकी सास और पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज उत्पीड़न के आरोपों में प्राथमिकी दर्ज की है।

सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया को क्या सलाह दी?

चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि अदालत तय  करेगी कि मामले की जांच निष्पक्ष, स्वतंत्र और पूर्वाग्रह रहित हो। बेंच ने कहा है, ‘कुछ कार्रवाइयों से हम व्यथित हैं। हम अपने मीडिया मित्रों से अनुरोध करेंगे कि वे पीड़िता के परिवार या दूसरे पक्ष के परिवार के बयान लेने से बचें। चीजों को कानून और प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ने दिया जाए।’

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‘दर्द को साउंड बाइट की तरह न पेश करें’

बेंच ने कहा, ‘हम मीडिया से अनुरोध करते हैं कि वह पीड़िता के परिवार के बयान रिकॉर्ड न करें और उनके दर्द को महज साउंड बाइट बनाकर पेश न करें। इस मामले में कोई विमर्श गढ़ने से बचना चाहिए।’

तुषार मेहता ने मीडिया के लिए क्या दलील दी?

मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मीडिया के हस्तक्षेप की वजह से मामले की जांच आगे बढ़ी है। उन्होंने कहा कि यह मामला सभी माता-पिता के लिए एक संदेश है कि इस तरह की दुर्भाग्यपूर्ण घटना का सामना करने से बेहतर है कि बेटी का तलाक हो जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल की इस दलील पर गौर किया। कोर्ट ने कहा है कि CBI केस को अपने हाथ में ले, अधिकारियों के सामने यह मुद्दा उठाया जाएगा।

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‘मीडिया नहीं, एजेंसी से बताएं तथ्य,’  

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘हम पीड़िता के परिवार के सदस्यों के साथ-साथ आरोपियों के परिवार के सदस्यों से भी कहना चाहेंगे कि वे सार्वजनिक रूप से या मीडिया मंचों पर बयान देने के बजाय जांच एजेंसी के समक्ष अपनी बात दर्ज कराएं ताकि जारी जांच पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े या कोई पूर्वाग्रह नहीं हो।’

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘हम मीडिया से भी अनुरोध करते हैं कि वह ऐसे लोगों के बयान रिकॉर्ड करने से बचे जो संभावित गवाह हैं, क्योंकि इससे उन मुद्दों के निष्कर्षों पर अनावश्यक प्रभाव पड़ सकता है जिनकी जांच की जानी है।’

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सुप्रीम कोर्ट कैसे पहुंचा केस?

सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए इस केस पर सुनवाई की। कोर्ट ने कहा है, ‘हम लोगों से भी अनुरोध करते हैं कि वे अटकलों से बचे और देश की प्रमुख जांच एजेंसियों में से एक पर भरोसा रखे। हमें विश्वास है कि समय आने पर एजेंसी जांच को निष्कर्ष तक पहुंचाएगी।’