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‘हम पंजाब की प्लानिंग कर रहे हैं’, दिपके ने बढ़ाई केजरीवाल की टेंशन


पंजाब में कथित पेपर लीक का मुद्दा गर्माता जा रहा है। विपक्षी दलों का आरोप है कि पंजाब की आप सरकार में कई बार पेपर लीक हो चुके हैं। बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल ने शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस का इस्तीफा मांगा है। उनका कहना है कि अगर केंद्र में धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दे सकते हैं तो पंजाब में भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने भी इस्तीफे की मांग की है।

 

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके से जब पंजाब के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हम इसकी प्लानिंग कर रहे हैं। उस पर भी बात की जाएगी। बता दें कि कुछ दिनों से पंजाब के मुद्दे पर सीजेपी नेताओं की चुप्पी पर सवाल उठने लगे थे। लोगों का कहना था कि अगर नीट पेपर लीक में धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लिया जा सकता है तो पंजाब के कथित पेपर लीक पर सीजेपी ने चुप्पी क्यों साध रखी है?

 

 

 

 

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हम पंजाब पर भी बोलेंगे: अभिजीत

पंजाब में कथित पेपर लीक के बारे में जब रविवार को अभिजीत दिपके से पूछा गया तो उन्होंने, ‘उस पर भी बोलेंगे और करेंगे हम। अभी हम उसकी ही प्लानिंग कर रहे हैं।’ आगे की रणनीति के बारे पूछने पर दिपके ने कहा, ‘हम जल्द ही आगे की स्ट्रैटेजी बताएंगे। यह (आंदोलन) कल ही खत्म हुआ है। प्लीज हमें थोड़ा समय दें।’ सरकार के साथ बातचीत पर अभिजीत ने बताया कि जो केस दर्ज किए गए हैं, उनके बारे में बातचीत चल रही है। किसी भी छात्र के खिलाफ कोई केस दर्ज नहीं होना चाहिए।

जंतर-मंतर पर पसरा सन्नाटा

उधर, कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन खत्म होते ही जंतर-मंतर में सन्नाटा पसर गया है। रविवार को प्रदर्शन स्थल पर दिनभर साफ-सफाई अभियान चलता रहा। शनिवार दोपहर तक जंतर-मंतर और आसपास का इलाका लोगों से भरा था। शोर-गुल और नारेबाजी चल रही थी। वहीं आंदोलन के आयोजक अभिजीत दिपके को टाइफफाइड हुआ है। वे घर पर हैं। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक अभी अस्पताल में है। सोमवार तक उन्हें छुट्टी मिलने की उम्मीद है।

 

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नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (NDMC) ने जंतर-मंतर और उसके आसपास विशेष सफाई अभियान चलाया। 100 से अधिक सफाई कर्मचारी, भारी वाहन और मशीनों को लगाया गया। पूरे इलाके से लगभग 60 मीट्रिक टन कचरा हटाया गया। सड़कों को प्रेशर-जेट मशीनों से धोया गया। नारे लिखीं दीवारों को दोबारा कलर किया गया। टूटे फुटपाथ और सड़कों की मरम्मत की जा रही है।

‘मन की बात’ की बात में PM की अपील, घर बनाएं गणपति बप्पा, लेकिन कैसे, तरीका जानिए


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के 136वें एपिसोड में कहा कि पिछले साल की तरह इस बार भी गणेश उत्सव पर प्लास्टर ऑफ पेरिस या बाहर से आने वाली मूर्तियों को नहीं लाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसकी जगह अपने देश की मिट्टी से बनी मूर्तियों की ही पूजा करनी चाहिए। पीएम मोदी ने सबसे कहा है कि लोग घर पर ही देश की मिट्टी से बप्पा की मूर्ति बनाएं। 

 

कई लोगों ने उन्हें मैसेज करके बताया कि उन्होंने यह बात मान ली है और वे घर पर ही मिट्टी से मूर्ति बना रहे हैं। जब हम घर की मिट्टी से मूर्ति बनाते हैं तो इससे देश की मिट्टी का मान बढ़ता है और हमारे पर्यावरण की भी रक्षा होती है। इस बार बाजार से केमिकल वाली मूर्ति लाने के बजाय घर पर ही साफ और प्राकृतिक मिट्टी से बप्पा की मूर्ति बनानी चाहिए।

 

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घर पर मिट्टी कैसे तैयार करें?

घर पर मिट्टी से गणेश मूर्ति बनाना बहुत आसान है और इसमें किसी भी तरह के केमिकल या नुकसान देने वाले रंगों का इस्तेमाल नहीं होता। सबसे पहले ऐसी मिट्टी लो जो बिल्कुल साफ हो और जिसमें कंकर या पत्थर न हों। अगर मिट्टी कड़ी है तो उसे कुछ देर पानी में भिगोकर रख दो ताकि वह नरम हो जाए। मिट्टी इतनी गीली होनी चाहिए कि आप उससे आसानी से आकार बना सको न तो बहुत ज्यादा पानी वाली और न ही बहुत सूखी। मूर्ति बनाने की शुरुआत सबसे पहले नीचे के हिस्से से करो। मिट्टी का एक छोटा सा गोला लेकर बप्पा के बैठने का आसन बनाओ। इसके बाद मिट्टी का थोड़ा बड़ा हिस्सा लेकर एक गोल या अंडाकार आकार बनाओ जो बप्पा का धड़ यानी पेट और छाती का हिस्सा बनेगा। इसमें थोड़ा सा पानी लगाकर जोड़ने से मिट्टी आपस में अच्छे से चिपक जाती है।

सिर, सूंड, हाथ और मुकुट कैसे जोड़ें?

अब एक और छोटा गोला बनाकर उसे धड़ के ऊपर जोड़ दो जो बप्पा का सिर बनेगा। इसके बाद मिट्टी का एक पतला टुकड़ा लेकर उसे हल्का सा गोल करते हुए सूंड का आकार दो और सिर के नीचे मुंह वाली जगह पर जोड़ दो। सूंड को आप अपनी पसंद के अनुसार बाएं या दाएं तरफ थोड़ा सा मोड़ भी सकते हैं। बप्पा के हाथों के लिए मिट्टी के छोटे-छोटे टुकड़े बनाकर उन्हें धड़ के दोनों तरफ जोड़ दो। कान बनाने के लिए मिट्टी की छोटी और पतली पट्टी बनाकर उन्हें सिर के दोनों तरफ थोड़ा सा गोल करके लगा दो। सबसे ऊपर मिट्टी का एक छोटा सा तिकोना डिजाइन बनाकर बप्पा का मुकुट लगा दो।

 

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मूर्ति को सुखाना और रंग कैसे करें?

जब मूर्ति पूरी तरह से बन जाए तब उसे किसी छांव वाली जगह पर एक से दो दिन के लिए सूखने के लिए रख दो। जब मिट्टी पूरी तरह सूख जाए तब आप उस पर हल्दी, चंदन या पानी में घुले हुए प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल कर सकते हो जिससे पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा। इस तरह आपका घर पर ही बिल्कुल साफ और प्राकृतिक गणेश जी का रूप तैयार हो जाएगा।

ग्रह, नक्षत्र, तारे, क्या कर रहे हैं इशारे? पढ़ें 26 जुलाई का राशिफल


26 जुलाई 2026 को रविवार का दिन है। पंचांग के अनुसार आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि का सुंदर योग बन रहा है। इस दिन का मूलांक 8 है, जो शनिदेव के प्रभाव को दर्शाता है। शनिदेव के प्रभाव की वजह से लोगों को करियर में कठिन परिश्रम करना पड़ सकता है। इसके अलावा, रविवार का दिन होने के कारण सूर्य देव की विशेष कृपा से आज के वातावरण में नई ऊर्जा, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता बढ़ेगी। ग्रहों की गोचर स्थिति आज कर्म और आत्मबल का बेहतरीन संतुलन स्थापित कर रही है।


आज की ऊर्जा आपको अपने लक्ष्यों के प्रति गंभीर होने और आलस्य छोड़कर व्यावहारिक कदम उठाने का संदेश देती है। एक तरफ जहां सूर्य का प्रभाव आपको साहस और पहचान दिलाने में मदद करेगा, वहीं मूलांक 8 का प्रभाव आपको वित्तीय मामलों में समझदारी और धैर्य से काम लेने की सलाह देता है। यह दिन उन कामों को पूरा करने के लिए शुभ है, जिन्हें आप लंबे समय से टाल रहे थे। आइए जानते हैं कि आज का दिन सभी 12 राशियों के जातकों के लिए करियर, धन, प्रेम और स्वास्थ्य के लिहाज से कैसा रहने वाला है।

 

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राशिफल

 


मेष राशि


आज आपके भीतर गजब का उत्साह रहेगा। ऑफिस में आपके नए विचारों की सराहना होगी। आर्थिक नजरिए से आज का दिन शानदार रहेगा। कहीं से रुका हुआ धन वापस मिल सकता है। जीवनसाथी के साथ रिश्तों में मधुरता बनी रहेगी।
आज क्या करें: सूर्य देव को जल अर्पित करें और लाल फल का दान करें।
आज क्या न करें: जल्दबाजी में कोई बड़ा वित्तीय निर्णय लेने से बचें।


वृषभ राशि


आज काम का बोझ थोड़ा अधिक रह सकता है लेकिन आपकी बुद्धिमत्ता से सभी कार्य समय पर पूरे होंगे। व्यापार में नए सौदों के अवसर मिल सकते हैं। प्रेम संबंधों में नयापन महसूस होगा। यदि पार्टनर के साथ कोई अनबन चल रही थी।
आज क्या करें: छोटी बच्चियों को मीठा भोजन या फल भेंट करें।
आज क्या न करें: कार्यस्थल पर सहयोगियों के साथ बहस में न उलझें।


मिथुन राशि


आज आपकी बातचीत करने की शैली आपको बड़ा लाभ दिला सकती है। नेटवर्किंग और मार्केटिंग से जुड़े लोगों के लिए बेहतरीन दिन है। आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी और आय के नए स्रोत सामने आ सकते हैं। 
आज क्या करें: किसी जरूरतमंद को हरी सब्जियां या अन्न दान करें।
आज क्या न करें: अपनी योजनाओं का बखान हर किसी के सामने न करें।

 

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कर्क राशि


आज मानसिक रूप से थोड़ा संवेदनशील महसूस कर सकते हैं। काम में मन लगाने के लिए थोड़ा प्रयास करना होगा। परिजनों के सहयोग से मन को शांति मिलेगी। जीवनसाथी की कोई बात आपके दिल को छू सकती है, जिससे आपसी प्रेम बढ़ेगा।
आज क्या करें: शिवलिंग पर कच्चा दूध और जल चढ़ाएं।
आज क्या न करें: नकारात्मक विचारों को अपने ऊपर हावी न होने दें।


सिंह राशि


रविवार का दिन और आपकी राशि के स्वामी सूर्य, आज आपका सितारा बुलंद रखेंगे। अटके हुए सरकारी काम आसानी से बन जाएंगे। प्रेम जीवन में उत्साह और गर्मजोशी रहेगी। पार्टनर के साथ आज का दिन बेहद यादगार रहेगा और कोई सरप्राइज मिल सकता है।
आज क्या करें: आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें।
आज क्या न करें: अपने व्यवहार में अहंकार को बिल्कुल जगह न दें।


कन्या राशि


आज का दिन योजनाबद्ध तरीके से काम करने का है। दफ्तर में आपके काम की तारीफ होगी। धन संबंधी मामलों में दिन सामान्य रहेगा। घर-परिवार में किसी मांगलिक कार्य की चर्चा हो सकती है। 
आज क्या करें: गाय को हरा चारा या पालक खिलाएं।
आज क्या न करें: दूसरों के काम में बेवजह हस्तक्षेप करने से बचें।

 

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तुला राशि


व्यापारिक दृष्टिकोण से आज का दिन काफी लाभकारी रहने वाला है। कला, डिजाइनिंग और मीडिया से जुड़े लोगों को नए अवसर मिलेंगे। धन का आगमन आसानी से होगा,  सिंगल जातकों की किसी खास व्यक्ति से मुलाकात होने की संभावना है।
आज क्या करें: किसी मंदिर में कपूर जलाएं या सफेद मिठाई का भोग लगाएं।
आज क्या न करें: किसी भी स्थिति में अपना संतुलन और धैर्य न खोएं।


वृश्चिक राशि


दफ्तर में आज आपको थोड़ी ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है। प्रतिस्पर्धी आपको चुनौती देने की कोशिश करेंगे, लेकिन आपका आत्मविश्वास आपको विजयी बनाएगा। धन के लेन-देन में थोड़ी सावधानी बरतें। लव लाइफ में पार्टनर की भावनाओं का सम्मान करें।
आज क्या करें: हनुमान चालीसा का पाठ करें और चमेली के तेल का दीपक जलाएं।
आज क्या न करें: गुस्से या आवेश में आकर कोई फैसला न लें।


धनु राशि


आज भाग्य का भरपूर साथ मिलेगा। उच्च शिक्षा और विदेश से जुड़े काम बन सकते हैं। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और कहीं से अचानक धन लाभ होने के योग हैं। घर में मेहमानों के आगमन से चहल-पहल रहेगी।
आज क्या करें: अपने गुरु या घर के बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लें।
आज क्या न करें: अपनी जिम्मेदारियों से भागने की कोशिश न करें।

 

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मकर राशि


मूलांक 8 का प्रभाव आज आपकी कार्यशैली को और निखारेगा। कार्यक्षेत्र में अनुशासन और निरंतरता से बड़े नतीजे मिलेंगे। आर्थिक रूप से दिन स्थिर रहेगा। बजट बनाकर चलना समझदारी होगी।
आज क्या करें: पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
आज क्या न करें: सेहत के प्रति लापरवाही बिल्कुल न बरतें।


कुंभ राशि


साझेदारी के काम में आज अच्छा मुनाफा हो सकता है। नए व्यावसायिक संबंध बनेंगे, जो भविष्य में फलदायी सिद्ध होंगे। वित्तीय लेन-देन के लिए आज का दिन काफी शुभ है। लव पार्टनर के साथ रोमांटिक समय बिताने का मौका मिलेगा।
आज क्या करें: पक्षियों के लिए पीने के पानी और दाने का प्रबंध करें।
आज क्या न करें: किसी भी दस्तावेज पर बिना पढ़े हस्ताक्षर न करें।


मीन राशि


आज का दिन मिले-जुले परिणाम लेकर आएगा। ऑफिस में अपने काम पर ध्यान केंद्रित रखें और राजनीति से दूर रहें। आर्थिक स्थिति ठीक रहेगी, लेकिन अनचाहे खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी है। पार्टनर के साथ संवाद बनाए रखें, ताकि कोई गलतफहमी न पनपे। दोस्तों का सहयोग आपका मनोबल बढ़ाएगा।
आज क्या करें: भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित करें।
आज क्या न करें: आलस्य के कारण आज का काम कल पर न टालें।

 

नोट: यह राशिफल ज्योतिषीय मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।

अमेरिका के साथ परमाणु डील ने कैसे सऊदी अरब को उलझन में डाला?


अमेरिका और सऊदी अरब के बीच ऐतिहासिक परमाणु समझौते ने जहां इजरायल की टेंशन बढ़ा दी तो वहीं रियाद के सामने असमंजस की स्थिति खड़ी कर दी है। 2009 में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बाद मध्य पूर्व में यह अमेरिका का किसी इस्लामिक देश के साथ किया गया दूसरा परमाणु समझौता है। हालांकि सऊदी अरब के साथ की गई डील यूएई की डील से बेहद अलग है। ताजा डील के तहत सऊदी अरब अपने यहां यूरेनियम का संवर्धन कर सकेगा। 

 

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी को निगरानी भी नहीं करनी होगी, जबकि यह छूट यूएई को हासिल नहीं है। मगर पूरी डील में एक पेच है। सऊदी अरब को डील के तहत इजरायल को मान्यता देनी होगी। इसका ऐलान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद कर चुके हैं। लेकिन सऊदी अरब प्रशासन ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। इजरायल को मान्यता देने के मामले में बेहद सतर्क है। 

 

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  • सऊदी अरब में फिलिस्तीन के प्रति गहरी सहानुभूति है। अगर फिलिस्तीन राज्य के बिना सऊदी सरकार इजरायल को मान्यता देती है तो न केवल उसकी जनता, बल्कि मुस्लिम जगत में गलत संदेश जाएगा। इस्लामिक देशों में उसकी पकड़ कमजोर होगी। दुनियाभर के सुन्नी मुस्लिमों में सऊदी अरब का खास प्रभाव है। मान्यता देने से उसका यह प्रभाव भी घट सकता है।

 

  • हाल के दिनों में सऊदी अरब ने तुर्की के साथ अपने रिश्तों को बेहतर किया है। मौजूदा समय में तुर्की और इजरायल के बीच तनाव है। अगर इजरायल को रियाद मान्यता देता है तो तुर्की के साथ उसकी रणनीतिक साझेदारी कमजोर पड़ सकती है। हालांकि यह दूसरी बात है कि तुर्की ने पहले ही इजरायल को मान्यता दे रखी है।

 

  • लाल सागर में अपनी रणनीतिक पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से सऊदी अरब ने सोमालिया का खुलकर समर्थन किया। दूसरी तरफ इजरायल ने सोमालिया से अलग हुए सोमालीलैंड को मान्यता देने वाला दुनिया का पहला देश बना। इजरायल को मान्यता देने का मतलब सोमालिया में उसके हितों का टकराव बढ़ेगा। यहां अपनी मूल रणनीति भी बदलने पड़ेगी।

 

  • अमेरिका और इजरायल के साथ जंग के बीच ईरान ने उन देशों को धमकी दी थी, जो इजरायल के सहयोगी हैं। अभी खाड़ी में सिर्फ बहरीन और यूएई ही इजरायल को मान्यता देने वाले इस्लामिक देश है। इन देशों को जंग में इसका खामियाजा भी उठाना पड़ा। पहले चरण में यूएई और दूसरे में बहरीन को ईरान ने खूब निशाना बनाया। सउदी अरब को यह भी खतरा है कि इजरायल के साथ उसके संबंध सीधे ईरान के खिलाफ खड़े कर देंगे, जबकि मौजूदा संघर्ष में सऊदी अरब उलझने से बचता रहा है।

 

  • पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच घनिष्ठ आर्थिक और रक्षा संबंध है। यदि इजरायल के साथ रिश्ते बेहतर होते हैं तो पाकिस्तान के साथ संबंध बिगड़ सकते है। पाकिस्तान के धार्मिक गलियारों में इजरायल के खिलाफ भावना सबसे आक्रामक है। सऊदी अरब और इजरायल के बीच सीधे राजनयिक संबंध स्थापित होने के बाद पाकिस्तान सरकार को खुलकर समर्थन करना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि सरकार को घरेलू स्तर पर विरोध का सामना करना पड़ सकता है।

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हूती और ईरान का एंगल समझिए

यमन की सीमा भी सऊदी अरब से लगती है। यहां के हथियारबंद हूती विद्रोहियों की न सऊदी अरब से बनती है और न ही इजरायल से। अगर दोनों देशों के बीच रिश्ते सामान्य हुए तो हूती विद्रोही सऊदी अरब के खिलाफ मोर्चा खोल सकते हैं। वहीं मान्यता देने का मतलब यह होगा कि सऊदी अरब अपना परमाणु कार्यक्रम शुरू कर सकता है, लेकिन यह शुरू करना आसान नहीं है। ईरान और हूती विद्रोही कभी नहीं चाहेंगे कि रियाद के पास परमाणु बम आए। वो भी तब जब ईरान का परमाणु बम बनाने का सपना लगभग टूटने के कगार पर है।

बंद मेट्रो स्टेशन ने बढ़ाई मुश्किलें, महंगी कैब-ट्रैफिक से जूझते रहे लोग

जंतर-मंतर पर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी ने 39 दिनों तक लंबा आंदोलन किया, जिसकी बदौलत बीजेपी सांसद प्रधान ने शनिवार (25 जुलाई) को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से दोपहर 2 बजकर 18 मिनट पर अपने पद से इस्तीफा दे दिया। आंदोलन को देखते हुए सरकार ने कई कदम उठाए थे। इन्हीं कदमों में से एक था दिल्ली मेट्रो द्वारा एक दर्जन से अधिक स्टेशनों को बंद करना। सरकार ने आंदोलन में सुरक्षा की दृष्टि से लुटीयंस दिल्ली में मौजूद 18 मेट्रो स्टेशनों को बंद रखा था। प्रधान का इस्तीफा और प्रदर्शन खत्म होते ही मेट्रो ने शनिवार शाम 6:22 बजे सभी गेट खोल दिए।

 

मगर, सरकार के इस कदम से आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन कई दिनों से बंद था, जिसके चलते यहां मेट्रो से आने वाले हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। दिल्ली-एनसीआर से नई दिल्ली रेलवे स्टेशन आने वाले यात्री मेट्रो से आते-जाते हैं। मेट्रो की यात्रा लोगों के लिए सस्ती और समय बचाने वाली होती है।

 

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खबरगांव ने जानी ग्राउंड पर लोगों की परेशानी

 

दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मेट्रो बंद होने की वजह से होने वाली परेशानियों को जानने के लिए ‘खबरगांव’ ने शनिवार दोपहर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से पहले जाकर जायजा लिया। सामने आया कि स्टेशन आने वाले यात्रियों को ‘नई दिल्ली मेट्रो’ के बंद होने से समय और पैसों की भारी क्षति हुई। मेट्रो नहीं चलने की वजह से लोग कैब, ऑटो से स्टेशन आते-जाते मिले।

 

 

12 किलोमीटर के लिए 600 रुपये

 

पियूष नाम के एक यात्री अपने पिता के साथ बिहार के दरभंगा जिले से आए थे। उन्हें दिल्ली के भरत नगर (NFC) जाना था, जिसके लिए उन्होंने उबर से कैब बुक की थी। उन्होंने बताया कि जो कैब सामान्य दिनों में 250-300 रुपये में हो जाती थी वही कैब वाला आज 600 रुपये में आ रहा है। यात्री ने बताया कि मेट्रो बंद होने की वजह से उन्हें मजबूरन अधिक पैसे चुकाने पड़ रहे हैं। रेलवे स्टेशन से भरत नजर की दूरी 12 किलोमीटर है।

 

चांदनी चौक स्टेशन बना सहारा


प्रशांत नाम के एक यात्री चंडीगढ़ से दिल्ली आए। वह स्टेशन के अजमेरी गेट पर मेट्रो के ठीक सामने अपनी कैब का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने बताया कि उन्हें गुरुग्राम जाना है लेकिन यहां से मेट्रो नहीं चल रही। प्रशांत ने बताया कि वह हमेशा 60 रुपये मेट्रो में किराया देकर स्टेशन आते-जाते हैं। मगर, उन्होंने बताया की यहां से गुरुग्राम दूर है ऐसे में उन्होंने यहां से उबर बाइक की है, जिससे वह चांदनी चौक जाएंगे और वहां से मेट्रो पकड़कर गुरुग्राम निकलेंगे। जाते-जाते उन्होंने बताया कि मेट्रो बंद होने से दिक्कत हो रही है।

 

 

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बिहार के गोपालगंज से चेतन और नित्या को स्टेशन के बाहर फुटपाथ पर बैठकर काफी देर से अपनी कैब बुक कर रहे थे, लेकिन कैब वाला बार-बार उनकी राइड कैंसिल कर रहा था। पूछने पर उन्होंने बताया कि मेट्रो नहीं चलने की वजह से परेशानी हो रही है क्योंकि मेट्रो से उनके पैसे और समय दोनों की बचत होती है मगर, अब कैब के सहारे हमें निर्भर होना पड़ रहा है।

 

दोनों को द्वारका मोड़ जाना था। उन्होंने बताया कि वह चांदनी चौक मेट्रो स्टेशन जाएंगे और वहां से द्वारका जाने वाली मेट्रो पकड़ेंगे।


मेट्रो बंद होने की वजह से डबल खर्च करने पड़े

 

इसी तरह से पिंटू अपनी पत्नी और बेटे को लेने के लिए उत्तम नगर से स्टेशन आए थे। वह करोल बाग तक मेट्रो से आए और वहां से ऑटो लेकर यहां आए। अपने परिवार के साथ स्टेशन के बाहर खड़े पिंटू ने बताया कि वह बैक बुक करके यहां से करोल बाग जाएंगे फिर वहां से उत्तम नगर जाने वाली मेट्रो पकड़ेंगे। उन्होंने बताया कि जो काम कम पैसों में हो जाता था वह मेट्रो बंद होने की वजह से डबल खर्च करने पड़ रहे हैं।

 

 

ओला, उबर और रैपिडो की मनमानी

 

नई दिल्ली मेट्रो बंद होने की वजह से ओला, उबर और रैपिडो जैसी कार सेवा देने वाली कंपनियां मनमानी करती दिखीं। लोगों ने आरोप लगाया कि मन-माफिक पैसे और लोकेशन ना मिलने से लोगों की दो से तीन साइड कैंसिल करती दिखीं। कई यात्रियों ने इसकी शिकायत कीं। एक यात्री तो दो राइड कैंसिल होने की वजह से झल्ला गया।

सुबह की ये 5 अच्छी आदतें रखेंगी पूरे दिन एनर्जी से भरपूर, आज से ही अपनाएं


सुबह की शुरुआत जैसी होती है अक्सर हमारा पूरा दिन भी वैसा ही बीतता है। अगर दिन की शुरुआत आलस और थकान के साथ होती है तो काम में मन नहीं लगता है। ऐसे में फिर शरीर भी सुस्त महसूस करने लगता है। वहीं सुबह की कुछ अच्छी आदतें अपनाने से शरीर और दिमाग दोनों तरोताजा महसूस करते हैं। इसलिए सुबह की दिनचर्या पर ध्यान देना बहुत जरूरी होता है। ये आदतें अपनाना मुश्किल नहीं है और इन्हें हर उम्र के लोग आसानी से अपनी लाइफस्टाइल का हिस्सा बना सकते हैं।

 

अच्छी बात यह है कि पूरे दिन एनर्जी बनाए रखने के लिए आपको कोई मुश्किल काम करने की जरूरत नहीं है। रोज सुबह की कुछ आसान आदतें अपनाकर आप खुद को दिनभर फ्रैश और एक्टिव महसूस कर सकते हैं। आइए जानते हैं ऐसी 5 आसान आदतों के बारे में जिन्हें अपने लाइफस्टाइल में शामिल करके आप पूरे दिन बेहतर महसूस कर सकते हैं।

 

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1. सुबह उठते ही एक गिलास पानी पिएं

रातभर सोने के बाद शरीर को पानी की जरूरत होती है। इसलिए सुबह उठते ही एक गिलास सादा या गुनगुना पानी पीने की आदत डालें। इससे शरीर फ्रैश महसूस करता है और दिन की शुरुआत भी अच्छी होती है। साथ ही शरीर में पानी की कमी भी पूरी होने लगती है।

2. कुछ देर धूप में जरूर बैठें

सुबह की हल्की धूप शरीर के लिए फायदेमंद मानी जाती है। रोज 10 से 15 मिनट धूप में बैठने या टहलने की कोशिश करें। इससे शरीर को विटामिन डी मिलता है और मन भी अच्छा महसूस करता है। सुबह की ताजी हवा भी शरीर को तरोताजा रखने में मदद करती है।

3. हल्की एक्सरसाइज या वॉक करें

सुबह 15 से 20 मिनट टहलना, स्ट्रेचिंग करना अच्छी आदत है। इससे शरीर में फुर्ती आती है और दिनभर काम करने में आसानी होती है। अगर समय कम हो तो घर पर ही कुछ आसान एक्सरसाइज कर सकते हैं।

 

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4. हेल्दी नाश्ता जरूर करें

कई लोग जल्दी के कारण सुबह का नाश्ता छोड़ देते हैं लेकिन ऐसा नहीं करना चाहिए। नाश्ते में फल, दूध, दही, दलिया, पोहा, ओट्स या अंडा जैसी पौष्टिक चीजें शामिल करें। अच्छा नाश्ता करने से शरीर को दिनभर काम करने की ताकत मिलती है और जल्दी भूख भी नहीं लगती है।

5. उठते ही मोबाइल चलाने से बचें

आजकल कई लोग सुबह आंख खुलते ही मोबाइल देखने लगते हैं। इससे दिमाग पर बेवजह का दबाव पड़ सकता है। कोशिश करें कि उठने के बाद कुछ मिनट मोबाइल से दूर रहें। इसकी जगह गहरी सांस लें, थोड़ा टहलें या दिनभर के जरूरी कामों की योजना बना लें। इससे दिन की शुरुआत शांत और अच्छी होती है।

देवशयनी एकादशी के दिन पढ़िए यह कथा, तभी बरसेगी भगवान विष्णु की कृपा


आज देवशयनी एकादशी का पर्व है। सनातन धर्म में इस पर्व का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो भक्त इस दिन व्रत रखता है, सच्चे मन से भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करता है और व्रत कथा पढ़ता या सुनता है, उसे न केवल भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है, बल्कि अनजाने में किए गए पापों से भी मुक्ति मिलती है। साथ ही भक्त को मोक्ष की प्राप्ति होती है और उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।


इसी व्रत के बारे में एक बार युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा था कि देवशयनी एकादशी का क्या महत्व है। तब भगवान श्रीकृष्ण ने उत्तर दिया कि यह सभी एकादशी व्रतों में श्रेष्ठ है। इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति के पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि बड़ी संख्या में भक्त देवशयनी एकादशी का व्रत रखते हैं।

 

धार्मिक जानकारों के अनुसार, जिन लोगों ने देवशयनी एकादशी का व्रत रखा लेकिन व्रत कथा नहीं पढ़ी या सुनी, उनका व्रत अधूरा माना जाता है। ऐसे में भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण नहीं होतीं। इसलिए इस दिन व्रत के साथ व्रत कथा पढ़ना या सुनना भी बेहद जरूरी माना गया है। अब सवाल उठता है कि देवशयनी एकादशी की व्रत कथा क्या है? आइए जानते हैं।

 

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देवशयनी एकादशी व्रत कथा

 

कथा के अनुसार, प्राचीन समय में मांधाता नाम के एक राजा थे। वे अपनी प्रजा के हितों की रक्षा करते थे और राज्य के लोगों के कल्याण के लिए कार्य करते थे। उनके राज्य में कभी अकाल नहीं पड़ता था। हालांकि, एक बार उनके राज्य में लगातार तीन सालों तक बारिश नहीं हुई। बारिश न होने के कारण पूरे राज्य में भयंकर अकाल पड़ गया। लोग अन्न और जल के लिए तरसने लगे। अन्न और जल की कमी के कारण लोगों ने हवन, यज्ञ और पूजा जैसे धार्मिक अनुष्ठान भी करना छोड़ दिए। 

 

राज्य की ऐसी स्थिति देखकर राजा मांधाता बहुत दुखी और चिंतित हो गए। वे लगातार सोचने लगे कि इस समस्या का समाधान कैसे निकाला जाए। काफी विचार-विमर्श करने के बाद वे समाधान की खोज में जंगल की ओर निकल पड़े।

 

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जब राजा मांधाता घोड़े पर सवार होकर जंगल में घूम रहे थे, तब उन्हें ब्रह्माजी के पुत्र महर्षि अंगिरा का आश्रम दिखाई दिया। वे तुरंत आश्रम पहुंचे और हाथ जोड़कर बोले, ‘हे ऋषिवर मैं सदैव धर्म का पालन करता हूं, फिर भी मेरे राज्य में पिछले तीन साल से बारिश नहीं हुई है। कृपया कोई ऐसा उपाय बताइए, जिससे मेरे राज्य में फिर से बारिश हो और अकाल समाप्त हो जाए।’

 

तब महर्षि अंगिरा ने कहा, ‘हे राजन आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष में आने वाली देवशयनी एकादशी का व्रत करें। इस व्रत के प्रभाव से भक्तों को पापों से मुक्ति मिलती है। आप अपने राज्य के सभी लोगों के साथ मिलकर देवशयनी एकादशी का व्रत रखें और विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करें। इससे आपके राज्य की सभी परेशानियां दूर हो जाएंगी।’ महर्षि अंगिरा से उपाय जानने के बाद राजा मांधाता अपने राज्य लौट आए। जब देवशयनी एकादशी का दिन आया, तब राजा ने पूरी प्रजा के साथ मिलकर व्रत रखा और विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की। व्रत के प्रभाव से राज्य में अच्छी बारिश हुई, चारों ओर हरियाली छा गई और राज्य से अकाल समाप्त हो गया।

 

नोट- यह कथा धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। खबरगांव इसकी पुष्टि नहीं करता है।

 

हूतियों के हमले, सऊदी अरब की टेंशन; दुविधा में कैसे फंसा पाकिस्तान?


अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग में पाकिस्तान ने भरसक प्रयास किया कि सऊदी अरब को निशाना न बनाया जाए। पिछले पांच महीने में उसकी यह कोशिश रंग भी लाई। पहले चरण के संघर्ष में ईरान ने सबसे अधिक संयुक्त अरब अमीरात को निशाना बनाया। अमेरिका ने सीजफायर के बीच जब दोबारा हमला किया तो अबकी बार जॉर्डन, कतर, कुवैत और बहरीन को खूब हमले झेलने पड़े। मगर 13 जुलाई को कुछ ऐसा हुआ, जिसने सारे समीकरणों को बदल कर रख दिया। आज न केवल सऊदी अरब के सामने सबसे बड़ी सुरक्षा चुनौती खड़ी हो गई, बल्कि पाकिस्तान भी दुविधा में फंस चुका है।

 

तीन जुलाई को यमन के हूती विद्रोहियों का एक प्रतिनिधिमंडल तेहरान पहुंचा। यह प्रतिनिधिमंडल करीब एक हफ्ते तक चले अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल हुआ। 13 जुलाई को ईरान की महान एयरलाइन के विमान से प्रतिनिधिमंडल की वापसी हुई। यह विमान जैसे ही राजधानी सना के अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के पास पहुंचा, वैसे ही सऊदी अरब समर्थित यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार ने रनवे पर हमला कर दिया। हूती विद्रोहियों को विमान मोड़ना पड़ा और लाल सागर के तट पर स्थित होदेइदा एयरपोर्ट पर उतारना पड़ा। 

 

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पाकिस्तान ने ईरान को कौन सी धमकी भेजी?

हमले के जवाब में हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर बैलेस्टिक मिसाइल दागीं। हालांकि इन्हें रोक लिया गया। पाकिस्तान ने खुलकर सऊदी अरब का समर्थन किया और बल इस्तेमाल करने पर हूती विद्रोहियों को चेतावनी भी दी। पाकिस्तान मीडिया के मुताबिक वहां की सरकार ने ईरान को एक मैसेज भेजा। इसमें कहा कि सऊदी अरब उसकी रेड लाइन है। अगर रियाद पर हमला किया तो पाकिस्तान के पास कोई और विकल्प नहीं बचेगा।

हूतियों ने कैसे दिया धमकी का जवाब?

हूती विद्रोहियों ने पाकिस्तानी की धमकियों को नजरअदांज किया और लाल सागर में सऊदी अरब के खिलाफ नाकेबंदी का ऐलान कर दिया। 23 जुलाई को सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर हमला किया। यही से पाकिस्तान की हूती और ईरान रूपी दुविधा की शुरुआत हुई। जहां अमेरिका ने खुलकर हूती विद्रोहियों और ईरान को परिणाम भुगतने की धमकी दी तो वहीं पाकिस्तान के नेतृत्व ने चुप्पी साध ली है।

ख्वाब टूटने का डर

पाकिस्तान की सेना और सरकार को डर है कि ईरान संघर्ष में उसको भी घसीटा जा सकता है। अगर ऐसा हुआ तो ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता कराके शांतिदूत बनने का उसका ख्बाव चकनाचूर हो जाएगा।

जंग में पाकिस्तान के उतरने का खतरा बढ़ा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यमन सीमा के करीब सऊदी अरब में पाकिस्तान के हजारों सैनिक और फाइटर जेट की एक स्क्वाड्रन तैनात है। पाकिस्तान के रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हूतियों के ताजा हमले के बाद संघर्ष में पाकिस्तान के उतरने का खतरा पहले अधिक बढ़ चुका है। 

 

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बता दें कि पिछले साल पाकिस्तान और सऊदी अरब ने एक रक्षा समझौता किया था। इसके तहत एक पर हमला दूसरे पर हुआ हमला माना जाएगा। कुछ समय पहले ही पाकिस्तान ने ईरान के नेताओं को संदेश भेजा था कि सऊदी अरब पर हमले पाकिस्तान पर हमले माने जाएंगे। यह हमारी रेड लाइन है।

घरेलू स्तर पर चुनौती कम नहीं

पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व को डर सता रहा है कि अगर हूती विद्रोहियों के साथ संघर्ष बढ़ता है तो पाकिस्तान को भी जंग में लाजिम तौर पर उतरना पड़ेगा। वो भी तब जब पाकिस्तान घरेलू स्तर पर सबसे बड़ी चुनौती का सामना कर रहा है। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में प्रदर्शन का दौर जारी है। खैबर पख्तूनख्वा में सेना सुरक्षित नहीं है। बलूचिस्तान में अलगाववाद की लहर चरम पर है। रोजाना बड़ी तादाद में सैनिकों के मारे जाने की खबर आ रही हैं।

पड़ोसी से भी इस्लामाबाद की नहीं बनती

घरेलू मामलों के इतर पाकिस्तान के अपने पड़ोसियों से भी रिश्ते अच्छे नहीं है। अफगानिस्तान के साथ उसके संबंध रसातल पर हैं। पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत के साथ तनातनी का माहौल है। पाकिस्तान की सरकार को यह भी डर सता रहा है कि अगर हूती विद्रोहियों के खिलाफ जंग में उतरे तो ईरान के साथ भी प्रत्यक्ष संघर्ष का हिस्सा बनना पड़ सकता है और यह स्थिति बेहद नाजुक होगी, क्योंकि ईरान के साथ उसकी करीब 900 किमी लंबी सीमा लगती है। 

ऊर्जा संकट गहराने का खतरा 

पाकिस्तान किसी भी हाल में ईरान के साथ संबंध नहीं बिगाड़ना चाहता है। लेकिन खाड़ी देशों के साथ संतुलन भी बनाना चाहता है। इसकी वजह है कि पाकिस्तान तेल और गैस आपूर्ति के मामलों में खाड़ी देशों पर अधिक निर्भर है। खासकर सऊदी अरब उसका बेहद अहम आर्थिक सहयोगी है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के बाद पाकिस्तान को अधिकांश तेल की आपूर्ति सऊदी अरब ही कर रहा है। लाल सागर के रास्ते यह खेप कराची तक पहुंचाई जा रही है। सऊदी अरब के खिलाफ हूती विद्रोहियों की नाकेबंदी से पाकिस्तान के सामने ऊर्जा संकट खड़ा होने का खतरा बढ़ चुका है। यही स्थिति पाकिस्तान को जंग में खींच सकती है।

VBSA बिल क्या है? इससे छात्रों-शिक्षकों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?


देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में बदलाव लाने के लिए केंद्र सरकार विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान (VBSA) बिल लाने की तैयारी कर रही है। सरकार का कहना है कि इस बिल से विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की व्यवस्था को बेहतर बनाया जाएगा और उच्च शिक्षा से जुड़े नियमों को आसान बनाया जाएगा। हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर शिक्षा जगत और राजनीतिक दलों के बीच चर्चा भी तेज हो गई है।

 

सरकार का दावा है कि VBSA बिल से अलग-अलग शिक्षा नियामक संस्थाओं की जगह एक नई व्यवस्था बनाई जाएगी जिससे काम करने में आसानी होगी और शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर होगी। वहीं कई शिक्षकों और विपक्षी दलों का कहना है कि इस बिल से विश्वविद्यालयों की स्वतंत्रता पर असर पड़ सकता है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि VBSA बिल क्या है, इसका छात्रों और शिक्षकों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है और बैठक रद्द क्यों हुई है।

VBSA बिल है क्या?

VBSA बिल, 2025 केंद्र सरकार का एक प्रस्तावित बिल है। जिसका मकसद देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में बदलाव करना है। इस बिल के जरिए विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के नियमन की प्रक्रिया को सरल और एक समान बनाने की कोशिश की गई है। सरकार का कहना है कि इससे उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा और संस्थानों के कामकाज में पारदर्शिता आएगी।

 

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इस बिल के तहत विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) जैसी अलग-अलग संस्थाओं की जगह विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान (VBSA) नाम की एक नई संस्था बनाने का प्रस्ताव है। यह संस्था देश के उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए नियम तय करने, उनकी गुणवत्ता की निगरानी करने और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने का काम करेगी।

छात्रों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?

केंद्र सरकार का नया VBSA बिल उच्च शिक्षा के पुराने नियमों को बदलने जा रहा है। इसके तहत UGC और AICTE जैसी संस्थाओं को हटाकर एक बड़ा केंद्रीय बोर्ड बनाया जाएगा। इसे पूरे देश में एक जैसा पढ़ाई का नियम क्रेडिट सिस्टम लागू होगा। इससे छात्र बीच में ही आसानी से अपना कॉलेज बदल सकेंगे। हालांकि, डिजिटल सिस्टम होने से स्कॉलरशिप और डिग्री का काम तेज होगा।वहीं दूसरी और छात्र संगठनों को डर है कि कॉलेजों को ज्यादा छूट मिलने से वे अपनी फीस बढ़ा सकते हैं।

 

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शिक्षकों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?

प्रोफेसरों की भर्ती और प्रमोशन के नियम साफ-सुथरे होंगे। रिसर्च (शोध) करने के लिए सरकार से सीधे और जल्दी पैसा मिलेगा। वहीं टीचर यूनियनों को डर है कि परमानेंट नौकरियों की जगह कॉन्ट्रैक्ट पर रखने की प्रकिया बढ़ जाएगी। इन विवादों की वजह से इस बिल की जांच अभी संसद की संयुक्त समिति (JPC) कर रही 

मानसून में बिजली का बिल क्यों बढ़ जाता है? बचत के तरीके जानिए


मॉनसून आते ही लोगों को गर्मी से राहत तो मिलती है लेकिन कई घरों में बिजली का बिल पहले से ज्यादा आने लगता है। ऐसे में लोग अक्सर सोचते हैं कि जब गर्मी कम हो गई है तो बिल बढ़ क्यों गया। बारिश के मौसम में कुछ ऐसी वजहें होती हैं जिनसे बिजली की खपत बढ़ जाती है। हवा में नमी बढ़ने, कम धूप निकलने और कुछ इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के ज्यादा इस्तेमाल का सीधा असर बिजली की खपत पर पड़ता है। कई बार लोग बिना वजह बढ़े हुए बिल को बिजली कंपनी की गलती मान लेते हैं जबकि इसकी वजह घर में इस्तेमाल होने वाले उपकरण भी हो सकते हैं।

 

अगर आप भी हर महीने बढ़ते बिजली बिल से परेशान हैं तो इसके पीछे की वजह जानना जरूरी है। साथ ही कुछ आसान आदतें अपनाकर बिजली की खपत को काफी हद तक कम किया जा सकता है। आइए जानते हैं कि मानसून में बिजली का बिल किन कारणों से बढ़ता है और इसे कम करने के लिए आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

 

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मॉनसून में बिजली का बिल ज्यादा क्यों आता है?

बारिश के मौसम में हवा में नमी बढ़ जाती है। इसकी वजह से कई लोग एसी को लंबे समय तक चलाते हैं या उसे ड्राई मोड पर इस्तेमाल करते हैं जिससे बिजली की खपत बढ़ सकती है। वहीं लगातार बारिश होने पर कपड़े जल्दी नहीं सूखते इसलिए कई लोग ड्रायर या वॉशिंग मशीन के ड्राई फीचर का ज्यादा इस्तेमाल करने लगते हैं। इससे भी बिजली का बिल बढ़ने की संभावना रहती है। इसके अलावा बारिश के दिनों में धूप कम निकलती है और घर के अंदर अंधेरा ज्यादा रहता है। ऐसे में दिन के समय भी लाइट, पंखे और दूसरे बिजली के उपकरण ज्यादा देर तक चलते हैं। वहीं अगर फ्रिज का दरवाजा बार-बार खोला जाए या उसमें जरूरत से ज्यादा सामान भर दिया जाए तो उसे ठंडा रखने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है जिससे बिजली की खपत और बढ़ सकती है।

 

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बिजली का बिल कम करने के तरीके

  • एसी का तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच रखें।
  • जरूरत न होने पर लाइट, पंखे और दूसरे उपकरण बंद कर दें।
  • जहां पॉसिबल हो LED बल्ब का इस्तेमाल करें।
  • कपड़ों को ड्रायर की बजाय नेचुरल हवा में सुखाने की कोशिश करें।
  • एसी और फ्रिज की समय-समय पर सर्विस कराएं ताकि वह बेहतर तरीके से काम करें।
  • टीवी, चार्जर और दूसरे उपकरणों को स्टैंडबाय मोड में छोड़ने की बजाय प्लग से बंद करें।
  • दिन में जितना हो सके नेचुरल रोशनी का इस्तेमाल करें।