कबीरपंथी वे लोग हैं जो संत कबीर के विचारों को अपने जीवन में मानते और अपनाते हैं। संत कबीर के विचारों को न केवल हिंदू बल्कि मुस्लिम धर्म के लोग भी मानते हैं। कबीरपंथी लोग निराकार ईश्वर में विश्वास करते हैं। उनका मानना है कि ईश्वर का कोई आकार नहीं होता है। इस वजह से वे किसी भगवान की सजीव मूर्ति की पूजा नहीं करते, बल्कि अपने ईश्वर का स्मरण करते हैं। कबीर समुदाय के लोग हर साल ज्येष्ठ मास में संत कबीर जयंती मनाते हैं। इस दिन संत कबीर के स्मरण में भजन-कीर्तन और उनके उपदेशों का पाठ किया जाता है। संत कबीर धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि समाज सुधारक के तौर पर भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
माना जाता है कि देश में 96 लाख लोग कबीरपंथी हैं, जिनमें हिंदू, मुस्लिम, बौद्ध और जैन धर्म के लोग शामिल हैं। कबीर के विचारों को मानने वाले अनुयायी कंठी पहनते हैं और कबीर बीजक, रमैनी जैसे ग्रंथों के प्रति पूज्य भावना रखते हैं। इस पंथ में गुरु का विचार सर्वोच्च होता है। अब सवाल उठता है कि संत कबीर के विचारधारा क्या है, जिन्हें कबीरपंथी मानते है।
कबीर के विचार क्या हैं, जिन्हें कबीरपंथी मानते हैं
निराकार ईश्वर में विश्वास – संत कबीर का मानना था कि ईश्वर निराकार है। वह कर्मकांड जैसे रोजा, ईद, मंदिर, मस्जिद और मूर्तिपूजा का विरोध करते थे। उनका कहना था कि ईश्वर व्यक्ति के मन में वास करता है।
मानवता और समानता – संत कबीर ने जाति, वर्ग और धर्म के बंधनों को खारिज किया और सभी मनुष्यों को एक समान माना। इसी वजह से कबीरपंथी लोग सभी धर्म और जातियों को समान मानते हैं।
सादा जीवन -कबीरपंथी लोग सादा जीवन जीने में विश्वास करते हैं क्योंकि संत कबीर सादगी, पवित्रता, सत्यनिष्ठा और शाकाहारी भोजन पर जोर देते थे।
कर्म प्रधान जीवन – संत कबीर का मानना था कि व्यक्ति को अपने जीवन में कर्म प्रधान होना चाहिए। इसलिए कबीरपंथी अनुयायी अपने कर्मों को प्राथमिकता देते हैं।
गुरु ही मार्गदर्शक – कबीर पंथ में गुरु का स्थान सर्वोच्च है। गुरु को ईश्वर तक पहुंचाने वाला मार्गदर्शक माना जाता है। इसी वजह से कबीरपंथी लोग गुरु के विचारों को अपने जीवन में अपनाते हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि नहीं की जाती है।
यूक्रेन चार साल से रूस जैसी सैन्य महाशक्ति के साथ युद्ध लड़ रहा है। इस युद्ध में रूस को काफी नुकसान उठाना पड़ा है। इस जंग को लड़ते हुए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को साफ पता है कि यूक्रेन की अमेरिका हर तरीके से मदद कर रहा है। इस मदद में गोला-बारूद, मिसाइल, ड्रोन आदि बहुत कुछ है। मगर, इसी बीच 28 फरवरी को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर हमला कर दिया।
इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गए। अमेरिका और इजरायल ने ईरान में बहुत मिसाइलें मारीं और ड्रोन से हमले किए, इसके जवाब में अब ईरान दोनों मिलिट्री पावर को मुहतोड़ जवाब दे रहे है। ईरान हथियारों के साथ ही साथ होमुर्ज स्ट्रेट को रणनीतिक हथियार बनाकर पूरी दुनिया को प्रभावित कर रहा है। मगर, इस युद्ध से रूस अब अमेरिका से बदला ले रहा है।
दरअसल, रूस हाई रेंज के ड्रोन की खेप ईरान को भेज रहा है। यह ड्रोन उसी ड्रोन के एडवांस वर्जन हैं जिनकी आपूर्ति ईरान ने पहले रूस को यूक्रेन पर हमले के दौरान की थी। यह जानकारी खुद अमेरिकी और यूरोप के बड़े अधिकारियों ने समाचार एजेंसी ‘एपी’ को यह जानकारी दी है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमले के बाद से तेहरान इजरायल, खाड़ी के पड़ोसी देशों और मध्य पूर्व में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर जबरदस्त ड्रोन से हमले कर रहा है।
दोनों देशों में हो रही है बातचीत
ईरान के पास स्वयं शाहेद ड्रोन का भंडार है, जबकि रूस ने यूक्रेन युद्ध के दौरान इनके डिजाइन में सुधार किए हैं। यूरोपीय खुफिया अधिकारी ने एपी को बताया कि रूसी और ईरानी अधिकारियों के बीच इस महीने रूस से ईरान को ड्रोन भेजने के संबंध में बातचीत हुई है। अमेरिकी रक्षा अधिकारी ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि यह खेप एक बार भेजी गई है या अपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा है।
ईरान को रूस मिलिट्री मदद कर रहा है, इस बात की जानाकरी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी है। ट्रंप ने 13 मार्च को एक टीवी चैनल से बातचीत करते हुए बताया कि ‘रूस शायद उनकी थोड़ी मदद कर रहा है।’ इसी के एक दिन बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ-साफ कहा कि ईरान के साथ रूस की मिलिट्री साझेदारी अच्छी चल रही है।
वहीं, इससे पहले मीडिया रिपोर्ट्स की पुष्टि हो चुकी है कि रूस ईरान को अमेरिका के वॉरशिप और एयरक्राफ्ट की लोकेशन की सैटेलाइट और इंटेलिजेंस डेटा दे रहा है। रूस यह जानकारी अपने जासूसी सैटेलाइट्स लियाना से ईरान को दे रहा है। इसके अलावा ईरान के स्पेस प्रोग्राम और उसके खास सैटेलाइट, खय्याम के विकास में भी रूस का अहम रोल रहा है।
रूस द्वारा ईरान की दी गई खुफिया जानकारी के बाद ही ईरान ने अमेरिका के अब्राहम लिंकन कैरियर पर कई क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया। इन्हीं सूचनाओं के आधार पर ईरान अमेरिका के लिए यह जंग लगातार मुश्किल करता जा रहा है।
ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) अमेंडमेंट बिल, 2026 संसद के दोनों सदनों से पारित हो गया है। अब इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा और उनके दस्तखत के बाद यह कानून बन जाएगा। नए विधेयक को लेकर विपक्ष के कई दलों ने ऐतराज जताया है। विपक्ष का कहना है कि बिना ट्रांसजेंडर समुदाय से बातचीत किए, सरकार विधेयक लेकर आई है जो उनके अधिकारों का स्पष्ट हनन है।
ट्रांसजेंडर तबके का कहना है कि सरकार ने ट्रांसजेंडर की परिभाषा जैविक और शारीरिक संकेतकों के आधार पर कर दी है, जबकि एक व्यक्ति, स्त्री, पुरुष या थर्ड जेंडर, क्या महसूस करता है, यह उसकी निजी राय है। केंद्र सरकार का पक्ष है कि इससे, ट्रांसजेंडर समुदाय में होने वाली जबरिया घुसपैठ रुकेगी, उन्हें ज्यादा अधिकार मिलेंगे।
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री वीरेन्द्र कुमार ने इस विधेयक की तारीफ की है। उन्होंने कहा है कि विधेयक का मकसद, समुदाय को सुरक्षा और लाभ देना है। लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचे, इसलिए सटीक परिभाषा तय करनी जरूरी है। ट्रांस समुदाय को ऐतराज है कि व्यक्तिगत, लैंगिक पहचान में सरकारी घुसपैठ क्यों की गई है।
प्रियंका गांधी, सांसद, कांग्रेस:- मुझे सच में लगता है कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि वे इसे स्टैंडिंग कमिटी के पास नहीं भेज रहे हैं। समुदाय को लगता है कि यह बिल उनकी पहचान को मिटा देगा। यह बहुत-बहुत जरूरी था कि उनसे सलाह ली जाती। यह बिल, उचित सलाह-मशविरे के बाद ही लाया या पास किया जाता। मुझे लगता है कि यह बहुत ही अनुचित है कि पूरे समुदाय को ऐसा महसूस हो रहा है कि उनसे कोई सलाह नहीं ली गई है। उनके संदर्भ में इतना बड़ा फैसला लिया जा रहा है। काश सरकार ने उनकी बात सुनी होती और इसे स्टैंडिंग कमिटी के पास भेजा होता।
लोकसभा में ट्रांसजेंडर बिल के समर्थन में वोट करते NDA सांसद। Photo Credit: Sansad TV
कांग्रेस, द्रविड़ मुनेत्र कझगम, नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (शरद पवार), शिवसेना (UBT), आरजेडी, समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस ने विधेयक का विरोध किया है। विपक्ष का कहना है कि यह विधेयक, ज्यादा क्रूर और दमनकारी है। सु्प्रीम कोर्ट ने NALSA जजमेंट 2014 में जो कहा था, उस फैसले का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट ने लैंगिक पहचान को ‘स्व निर्धारण’ का अधिकार दिया था। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का मतलब था कि आप तय करेंगे, आप ट्रांस, बाईसेक्सुअल, लेस्बियन, गे, क्वीर क्या अपने आपको को समझते हैं। किस लैंगिक खांचे में आप खुद को देखना चाहते हैं, यह अधिकार सिर्फ आपका होगा।’
आनंद भदौरिया, सांसद, समाजवादी पार्टी:- यह ट्रांसजेंडर समुदाय के साथ पूरी तरह से विश्वासघात है। वे इसका विरोध कर रहे थे। सदन के अंदर विपक्ष के सभी सदस्यों ने जोर देकर कहा कि इस बिल को स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजा जाए। यह बिल समाज के एक वर्ग के खिलाफ है। उनकी जो आशंकाएं हैं, वे आने वाले समय में कहीं न कहीं सच साबित होंगी। सरकार ने सदन में कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया, इसलिए पूरे विपक्ष ने वॉकआउट कर दिया।
कांग्रेस सांसद ज्योतिमणि ने आरोप लगाया कि बिल ट्रांसजेंडर समुदाय से बिना परामर्श के लाया गया है और इसमें मेडिकल बोर्ड के जरिए पहचान तय करना असंवैधानिक है।
विपक्ष क्या चाहता है?
विपक्ष ने मांग की है कि बिल को स्थायी समिति को भेजकर समुदाय से व्यापक परामर्श किया जाए। बिना ट्रांस समुदाय से बातचीत के इस विधेयक को पास करना, उन पर जबरन थोपने जैसा है। कानूनी तौर पर इसका दुरुपयोग और दोहन हो सकता है।
सरकार क्यों बचाव कर रही है?
हेमांग जोशी, सांसद, BJP:- विपक्ष को हर बात का विरोध करने की बुरी आदत पड़ गई है, फिर चाहे मामला समाज के हित का ही क्यों न हो। यह एक ऐसा बिल था जिसका सभी को एकमत होकर समर्थन करना चाहिए था; विपक्ष ने अपनी बातें रखीं, लेकिन जब वोटिंग की बारी आई तो वे सदन से बाहर चले गए। आज यह बिल सर्वसम्मति से पास हो गया है।
सरकार और बीजेपी ने बिल का समर्थन करते हुए कहा कि स्व-निर्धारित पहचान से आरक्षण और अन्य लाभों का दुरुपयोग हो सकता है। विधेयक में कहा गया है कि यह कानून, अलग-अलग जेंडर पहचान, खुद से घोषित की गई लैंगिक पहचान को शामिल नहीं करता है। यह केवल, पांरपरिक रूप से भेदभाव का शिकार ट्रांस समुदाय के हितों की रक्षा कर रहा है। विधेयक में बच्चों पर होने वाले अपराधों के लिए गंभीरता के अनुसार दंड का प्रावधान भी किया गया है।
नए विधेयक को ट्रांसजेंडर समुदाय अपने हितों के खिलाफ मानता है। Photo Credit: PTI
ट्रांसजेंडर समुदाय को एतराज क्या है?
‘पहचान पर खतरा है विधेयक’
ट्रांस समुदाय का कहना है कि नए विधेयक में सरकार ने लोगों से अपना जेंडर खुद चुनने का अधिकार छीन लिया है। विधेयक में स्त्री या पुरुष या तीसरे लिंग के तौर पर अपनी पहचान खुद चुनने वाले प्रावधान को हटा दिया गया है। नया विधेयक, ‘सेल्फ-परसीव्ड जेंडर आइडेंटिटी’ को ही हटा रहा है, जो गलत है। इस विधेयक के आने के बाद देशभर में ट्रांसजेंडर समुदाय में गुस्सा है।
NALSA के फैसले को पलटने पर ऐतराज
सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट विशाल अरुण मिश्र ने कहा, ‘साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने NALSA फैसले में कहा था कि ट्रांसजेंडर व्यक्ति अपनी लैंगिक पहचान खुद तय कर सकते हैं। स्त्री, पुरुष या थर्ड जेंडर, खुद को जिस भी रूप में वे देखते हैं, उन्हें यह तय करने का अधिकार है कि उनकी लैंगिक पहचान क्या होगी। उन्हें पुरुष, महिला या थर्ड जेंडर में से कोई भी चुनने की आजादी है। इसके लिए कोई सर्जरी या मेडिकल टेस्ट जरूरी नहीं है। 2026 का नया संशोधन विधेयक इस फैसले के खिलाफ जाता दिख रहा है।’
विशाल अरुण मिश्रा, एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड, सुप्रीम कोर्ट:- ट्रांसजेंडर विधेयक में ट्रांसजेंडर व्यक्ति की परिभाषा बदल दी गई है। अब इसमें सिर्फ वे लोग शामिल होंगे जिनकी समस्या जन्मजात, सामाजिक और सांस्कृतिक कारणों से है। ट्रांसमेन, ट्रांसवुमेन और जेंडरक्वीर लोगों को बाहर कर दिया गया है।
जेंडरक्वीर कम्युनिटी क्या है?
जेंडरक्वीर उन लोगों को कहते हैं, जिनकी लैंगिक पहचान, पुरुष, महिला या किसी बाइनरी में फिट नहीं होती है। इस समुदाय के लोग, पुरुष, महिला, बाइसेक्सुअल, नॉन बाइनरी या जेंडर नॉन कन्फर्मिंग के तौर पर खुद को समझते हैं। समुदाय के लोग स्त्री, पुरुष, तीसरे लिंग से इतर अपनी पहचान मानते हैं।
‘अधिकारी तय करेंगे, आप स्त्री, पुरुष या ट्रांस हैं’
नए ट्रांसजेंडर विधेयक में साफ-साफ कहा गया है कि अलग-अलग लैंगिक रुझान वाले, स्वघोषित ट्रांसजेंडर को ट्रांसजेंडर नहीं माना जाएगा। साल 2019 के कानून में जहां ट्रांसजेंडर समुदाय को यह अधिकार था कि वह तय करे कि उसकी लैंगिक पहचान क्या होगी, वह उसी आधार पर अपना लिंग चुनकर जिला मजिस्ट्रेट से प्रमाणपत्र ले सकता था। नए विधेयक में यह अधिकार खत्म हो गया है। अब जिला मजिस्ट्रेट मेडिकल बोर्ड की सलाह पर फैसला करेगा कि आपकी लैंगिक पहचान क्या होगी। आपकी जेंडर आइडेंटिटी, अब डॉक्टर और अधिकारी तय करेंगे, आप खुद नहीं तय कर सकते हैं।
प्रदर्शन करते ट्रांसजेंडर समुदाय के लोग। Photo Credit: PTI
सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2025 में जेन कौशिक मामले में 2019 के कानून की आलोचना की थी। जेन कौशिक, पेशे से शिक्षक हैं। जब उन्होंने बताया कि वह ट्रांस समुदाय से हैं तो स्कूलो ने उन्हें नौकरी से निकाल दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि लैंगिक पहचान के आधार पर किसी को उसकी नौकरी से नहीं निकाला जा सकता है। कोर्ट ने जुर्माना भी लगाया था।
सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि यह कागजी कानून बनकर रह गया है, सरकारें और संस्थान दोनों इसे नहीं मान रहे हैं। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने कहा था कि केंद्र और राज्य सरकारें ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) एक्ट, 2019 और 2020 के नियमों को ठीक से लागू करने में नाकाम रहीं हैं।
ट्रांसजेंडर विधेयक में सरकार पर आरोप लग रहे हैं कि विधेयक में ट्रांसजेंडर समुदाय को पीड़ित बनाकर पेश कर रही है। ट्रांस समुदाय ने इस समुदाय का हिस्सा होने चुना है, उन्हें बराबरी का हक चाहिए, वे पीड़ित नहीं हैं। सरकार का कहना है कि इससे ट्रांसजेंडर समुदाय की सुरक्षा होगी। समुदाय का आरोप है कि विधेयक ट्रांसजेंडर लोगों को पीड़ित के रूप में पेश कर रहा है। इससे उनकी गरिमा और स्वतंत्रता दोनों पर असर पड़ेगा।
सरकार नया कानून क्यों लाई है?
सरकार का तर्क है कि पुराना कानून अस्पष्ट था। शादी, संपत्ति और परिवारिक कानून जैसे मुद्दों में अड़चनें आ रहीं थीं। आलोचकों का कहना है कि समस्या का जैसा हल निकाला गया है, वह ट्रांस समुदाय के हितों पर प्रहार है। लोकसभा में यह विधेयक 23 मार्च 2026 को पास हो गया है। अब राज्यसभा में जाने वाला है। ट्रांस समुदाय इस बिल कि विरोध में है। समुदाय के लोग इस बदलाव को अपनी पहचान पर हमला मान रहे हैं। उन्होंने इसका विरोध तेज कर दिया है। कई राज्यों में नए विधेयक को लेकर प्रदर्शन भी हुए है।
भारत में ट्रांसजेंडर मैरिज को वैध बनाने की मांग हो रही है। Photo Credit: PTI
एक नजर में पूरा विधेयक समझिए, जिस पर बवाल मचा
लोकसभा में 13 मार्च को ट्रांसजेंडर विधेयक पेश हुआ था। मंगलवार को इसे लोकसभा ने पास कर दिया। यह विधेयक, 2019 के ट्रांसजेंडर कानून में बदलाव लेकर आया है।
ट्रांसजेंडर की नई परिभाषा: ट्रांसजेंडर विधेयक में ट्रांसजेंडर की परिभाषा बदली गई है। ट्रांसमैन, ट्रांसवुमन और जेंडरक्वियर को ट्रांसजेंडर की परिभाषा से बाहर किया गया है। अब सिर्फ हिजड़ा, किन्नर, अरावानी, जोगता जैसी सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान वाले लोगों, जन्म से शारीरिक विशेषताओं वाले लोगों को ट्रांसजेंडर माना जाएगा।
शारीरिक आधार पर पहचान: जिन लोगों के जननांगों, हार्मोन और क्रोमोसोम की वजह से शारीरिक बदलाव दिख रहे हों, उन्हें इस समुदाय में रखा गया है। जिन लोगों को जबरन ट्रांसजेंडर बनाया गया है, प्राइवेट पार्ट काटा गया है, हार्मोन थेरेपी या सर्जरी की गई है, उन्हें ट्रांसजेंडर कहा जाएगा।
जेंडर के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट: यह विधेयक साफ कहता है कि सेक्सुअल ओरिएंटेशन या अपनी धारणा के आधार पर कोई व्यक्ति ट्रांसजेंडर नहीं माना जाएगा। पहचान प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकार अब सिर्फ जिला मजिस्ट्रेट के पास के पास नहीं रहेगा। पहले चीफ मेडिकल ऑफिसर की अध्यक्षता में मेडिकल बोर्ड की सिफारिश जरूरी होगी।
सर्जरी के लिए भी बदल गए नियम: बोर्ड जांच के बाद ही प्रमाणपत्र जारी होगा। इस प्रमाणपत्र के आधार पर जन्म प्रमाणपत्र और अन्य सरकारी दस्तावेजों में पहला नाम बदला जा सकेगा। अगर कोई व्यक्ति सर्जरी कर जेंडर बदलता है तो उसे नया प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य होगा। अस्पताल को सर्जरी की जानकारी जिला मजिस्ट्रेट को देनी होगी।
जबरन ट्रांसजेंडर बनाना अपराध: बिल में जबरन ट्रांसजेंडर बनाने के खिलाफ नई और कड़ी धाराएं जोड़ी गई हैं। जबरन ट्रांसजेंडर बनाने के लिए अपहरण करने या गंभीर चोट पहुंचाने पर गड़ी सजाएं तय की गईं हैं। अगर यह काम कोई वयस्क पीड़ित के साथ होता है तो दोषी को 10 साल से आजीवन कारावास और कम से कम 2 लाख जुर्माना देना होगा। अगर पीड़ित बच्चा तो है जबरन ट्रांस बनाने वाले समुदाय को आजीवन कारावास की सजा होगी, कम से कम 5 लाख जुर्माना लगेगा।
भीख मंगवाना, बंधुआ मजदूरी अपराध: अगर कोई जबरन भीख मंगवाता है या बंधुआ मजदूरी कराता है तो भी कड़ी सजा मिलेगी। अगर पीड़ित वयस्क है तो 5 से 10 साल की सजा, कम से कम 10 लाख का जुर्माना देना होगा। अगर पीड़ित बच्चा है तो 10 से 14 साल की सजा मिल सकती है, कम से कम 3 लाख रुपये का जुर्माना लग सकता है।
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LGBTQIA+ समुदाय है क्या?
लेस्बियन: महिला जब, महिलाओं के प्रति आकर्षित हो।
गे: पुरुष, जब पुरुष के प्रति आकर्षित हो।
बाइसेक्सुअल: महिला और पुरुष, दोनों में रुचि हो।
ट्रंसजेंडर: ऐसे लोग, जिनकी लैंगिक पहचान, जन्म के पहचान से अलग हो।
क्वीर: स्त्री, पुरुष, तीसरे लिंग की बाइनरी से अलग जो अपना अस्तित्व देखते हों।
इंटरसेक्स: शारीरिक वजहों से स्त्री और पुरुष किसी एक दायरे में फिट न होना।
एसेक्शुअल: ऐसे लोग, जिन्हें सेक्स में कोई दिलचस्पी नहीं होती है।
ट्रांसजेंडर शब्द का इतिहास क्या है?
जब से मानव सभ्यता है, तब से ट्रांसजेंडर अस्तित्व में हैं। भारतीय धर्म ग्रंथों में यह समुदाय, वैदिक काल से है। रामायण और महाभारत की कहानियों में इनका जिक्र आता है। इक्ष्वाकु, शाक्य, चंद्रवंशी, मौर्य वंश, गुप्त वंश, मुगल, चोल, चालु और मराठा जैसे साम्राज्यों के दौरान भी यह समुदाय रहा है। मिस्र जैसे देशों में 1200 ईसा पूर्व तक, इनका विवरण मिलता है।
किट हेयम अपनी किताब, ‘बिफोर वी वर ट्रांस: ए न्यू हिस्ट्री ऑफ जेंडर’ में लिखते हैं, ‘ट्रांस समुदाय, तब भी था, जब प्राचीन मेसोपोटामिया की सभ्यता अपने चरम पर थी। तब मेसोपोटामिया में गाला पुजारी होते थे, जो होते तो पुरुष थे लेकिन महिलाओं के वेष में रहते थे। बेबीलोनियन ग्रंथ बताते हैं कि देवता एन्की ने देवी इनन्ना के लिए गीत रचे थे। भारतीय महाद्वीप में हजारों साल से ‘किन्नर समुदाय’ रहता है। उत्तरी अमेरिका में लोग लोग इस समुदाय को ‘टू-स्पिरिट’ के नाम से जानते थे। हवाई में यह समुदाय माहू कहलाता था, प्राचीन ग्रीस में ‘हेर्माफ्रोडाइटस’ भी इसी समुदाय का हिस्सा थे।
किट हेयम, ट्रांस इतिहासकार:- जेंडर डायवर्सिटी मानव इतिहास का अभिन्न हिस्सा है। अफ्रीका के कुछ समुदायों में जेंडर फ्लुइडिटी सामान्य थी, लेकिन यूरोपीय उपनिवेशवाद ने इसे दबाया और अपराध बता दिया। ब्रिटिश कानूनों ने भारत में हिजड़ों को हाशिए पर धकेला। एक तरफ पश्चिमी बाइनरी थोपी गई लेकिन दूसरी तरफ डिजिटल प्लेटफॉर्म के उदय से पुरानी विविधताएं वापसी कर रहीं हैं।
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ट्रांस सर्जरी की शुरुआत कैसे हुई?
‘बिफोर वी वर ट्रांस: ए न्यू हिस्ट्री ऑफ जेंडर’ में किट हेयम लिखते हैं, ’19वीं से 20वीं सदी में पश्चिमी चिकित्सा ने ट्रांस पहचान को मानसिक रोग बताया था। जब दुनिया इस दकियानूसी सोच में जकड़ी थी, तब डॉ. मैग्नस हिर्शफेल्ड ने जर्मनी में और डॉ. हैरी बेंजामिन ने अमेरिका में हार्मोन थेरेपी और सर्जरी की राह खोली।
साल 2019 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जेंडर को लेकर होने वाली दुविधा को मानसिक बीमारी की सूची से हटाया था। ट्रांस पेंटर और आंदोलनकारी लिली एल्बे ने 1930 के दशक में, पहली बार जेंडर कन्फर्मेशन सर्जरी कराई थी। सर्जरी से पहले वह पुरुष थीं और उन्होंने गेर्डा गॉटलीब से शादी की थी।
डॉ. मैग्नस हिर्शफेल्ड पहले सर्जन बने, जिन्होंने यह कारनामा किया। वह वैजिनोप्लास्टी कराने वाली शुरुआती महिलाओं में से एक रहीं हैं। एल्बे पूरी तरह से महिला होना चाहती थीं, 1931 में उन्होंने अपनी चौथी गर्भाशय प्रत्यारोपण सर्जरी और वेजाइनल कैनाल बनवाने के लिए सर्जरी कराई। 13 सितंबर 1931 को जर्मनी के ड्रेसडेन में हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई। तब से लेकर अब तक, जेंडर चेंज के बाद पुरुषों के मां बनने से जुड़े शोध तो हो रहे हैं लेकिन सफलता नहीं मिली है।
ट्रांस कम्युनिटी। Photo Credit: PTI
कैसे ट्रांजेंडर समुदाय को मिली पहचान?
क्रिस्टीन जोग्रेनसेन उन शुरुआती लोगों में से एक थीं, जिन्होंने ट्रांस समुदाय के हक के लिए आवाज उठाई। वह अमेरिका में सेक्स रीअसाइनमेंट सर्जरी के लिए जानी जाती हैं। 1944 तक, वह पुरुष थीं, जोर्गेनसेन, अमेरिकी सेना में शामिल थीं। पुरुष के तौर पर उन्होंने सेक्स चेंज सर्जरी पर शोध किया, वह 1950 के दशक में मशहूर हो गईं थीं। उनकी आत्मकथा, ‘क्रिस्टीन जोर्गेनसेन, अ पर्सनल ऑटोबायोग्राफी’ आज भी लोग पढ़ते हैं।
साल 1969 तक मार्शा पी जॉनसन और सिल्विया रिवेरा की अगुवाई में स्ट्रीट ट्रांसवेस्टाइट एक्शन रेवोल्यूशनरीज (STAR) की नींव पड़ी। धीरे-धीरे अमेरिका और यूरोप से निकलकर ट्रांस आंदोलन, पूरी दुनिया में फैल गया। अब यह समुदाय, अपने अधिकारों को लेकर मुखर हो रहा है।
साल 1969 में न्यूयॉर्क के स्टोनवाल पर पुलिस ने ट्रांस लोगों को पकड़ने के लिए छापेमारी की। लोग पुलिसिया उत्पीड़न पर भड़क गए और समाज के लोग आगे आए। 6 दिनों तक विरोध प्रदर्शन हुए, दंगे हुए। एक साल बाद, 28 जून 1970 को पहली प्राइड परेड, क्रिस्टोफर स्ट्रीट लिबरेशन डे मार्च निकाली गई। यह मार्च, LGBTQ समुदाय के अधिकारों और गर्व का प्रतीक है। जून को प्राइड मंथ कहा जाता है।
ट्रांस समुदाय, सरकार के नए कानूनों से नाराज है। Photo Credit: PTI
ट्रांस समुदाय को कैसे देखती रही है दुनिया?
ट्रांस समुदाय, समाजिक उपेक्षा का शिकार सैकड़ों साल तक रहा। किसी समाज में इन्हें अपराधी माना गया,कहीं इन्हें नगर के सबसे कोने में बसाया गया। समुदाय का एक बड़ा हिस्सा देह व्यापार और भिक्षावृत्ति में शामिल रहा। आज भी सामजिक तौर पर यह समुदाय हाशिए पर है।
सामाजिक भेदभाव, यौन उत्पीड़न की खबरें आती हैं, दब जाती हैं। इसे ऐसे आप समझ सकते हैं कि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो 2022-23 के आंकड़े बातते हैं कि ‘ट्रांसजेंडर पर्सन (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) एक्ट से जुड़ा सिर्फ एक केस दर्ज हुआ था। 2022 में हत्या के सिर्फ 9 केस दर्ज हुए, अपहरण के 1 केस दर्ज हुए हैं। अखबारों की हेडलाइन, अलग आंकड़े देते हैं।
क्या चाहता है ट्रांस समुदाय?
विवाह का अधिकार: साल 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने ‘सेम सेक्स मैरिज’ को कानूनी मान्यता देने से इनकार कर दिया था।
बच्चा गोद लेने का अधिकार: मौजूदा कानूनों के हिसाब से सेंट्रल एडॉप्टेशन रिसोर्स अथॉरिटी, ट्रांसजेंडर जोड़ों को कानूनी रूप से बच्चा गोद लेने का अधिकार नहीं देता है।
जेंडर तय करने का अधिकार: साल 2026 में जो विधेयक सरकार लेकर आई है, उसमें अब ट्रांस व्यक्ति, खुद को ट्रांस मान ही नहीं सकता है। इसके लिए उसे मेडिकल बोर्ड की मंजूरी लेनी होगी।
आरक्षण का अधिकार: NALSA फैसले में सुप्रीम कोर्ट के सुझाव के बावजूद, शिक्षा और सरकारी नौकरियों में अभी तक ट्रांसजेंडर समुदाय को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष आरक्षण नहीं मिलता है।
उत्पीड़न के विरुद्ध अधिकार: ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के खिलाफ होने वाले यौन अपराधों के लिए सजा अधिकतम 2 से 3 साल है। महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों की तुलना में यह बेहद कम है।
संपत्ति और विरासत का अधिकार: उत्तराधिकार कानूनों में ‘बेटा’ और ‘बेटी’ का संपत्ति पर अधिकार होता है। ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए अलग से कोई प्रावधान नहीं है। अगर उन्हें संपत्ति चाहिए तो बेटा या बेटी के तौर पर ही मिल सकता है, उनकी स्वतंत्र पहचान के आधार पर नहीं।
सेल्फ आइडेंटिफिकेशन पर सरकार के रुख से नाराज हैं ट्रांस समुदाय। Photo Credit: PTI
देश, जहां ट्रांसजेंडरों को मिला है उनका अधिकार
‘LGBT इक्वेलिटी इंडेक्स’ में आइसलैंड, नॉर्वे, उरुग्वे, स्पेन, डेनमार्क, माल्टा, चिली, जर्मनी, एंडोरा और क्यूबा जैसे देश, टॉप 10 उदार देशों में शुमार हैं, जहां ट्रांस सहजता से रहते हैं।
शादी का अधिकार किन देशों में है?
नीदरलैंड ने सबसे पहले समलैंगिक विवाहों को मंजूरी दी। स्पेन, बेल्जियम, नॉर्वे, स्वीडन, आइसलैंड, पुर्तगाल, डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, फिनलैंड, माल्टा, ऑस्ट्रिया, स्विट्जरलैंड, एस्टोनिया जैसे देशो में समलैंगिक विवाह को वैध माना जाता है। अमेरिका, कनाडा, संयुक्त राज्य अमेरिका, अर्जेंटीना, ब्राजील, उरुग्वे, कोलंबिया, इक्वाडोर, कोस्टा रिका, चिली, मैक्सिको और क्यूबा में भी समलैंगिक विवाह वैध माने जाते हैं। एशिया में थाइलैंड और ताइवान जैसे देशों में समलैंगिक विवाद वैध हैं। ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड का भी रुख उदार है।
भारत का हाल क्या है?
सुप्रीम कोर्ट की वकील रुपाली पंवार बताती हैं, ‘भारत में समलैंगिक या ट्रांसजेंडर शादियों को कानूनी इजाजत नहीं है। अवैध भी नहीं हैं। दो वयस्क लोग एक साथ रह सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने शादी की इजाजत से जुड़ी एक याचिका पर कहा था कि इससे विरासत और संपत्ति से जुड़े कई नियम उलझ जाएंगे। कोर्ट ने समलैंगिक विवाहों पर अंतिम निर्णय सरकार पर छोड़ दिया है। भारत में अभी सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर चलने वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार है। बीजेपी, नैतिक रूप से समलैंगिकता का विरोध करती है। फिलहाल भारत में ट्रांस अधिकारों के लिए बड़े बदलावों की जरूरत है।’
सर्दियों की शुरुआत होते ही हवा में नमी और तापमान में गिरावट के कारण बैक्टीरिया और वायरस अधिक ऐक्टिव हो जाते हैं। इस मौसम में हमारी शारीरिक गतिविधियां कम हो जाती हैं और खान-पान में बदलाव आता है, जिससे शरीर की संक्रमण से लड़ने की प्राकृतिक क्षमता प्रभावित हो सकती है। ऐसी स्थिति में विटामिन C एक ‘इम्यून बूस्टर’ के रूप में कार्य करता है और हमारी व्हाइट ब्लड सेल्स के उत्पादन को बढ़ाकर हमें बीमारियों से दूर रखता है।
इसके अलावा, सर्दियों की खुश्क हवा हमारे स्किन की नमी छीन लेती है, जिससे त्वचा रूखी और बेजान दिखने लगती है। विटामिन C शरीर में ‘कोलेजन’ को बनाने में मदद करता है, जो त्वचा को अंदर से रिपेयर करने के लिए अनिवार्य है। इसलिए, न केवल अंदरूनी स्वास्थ्य बल्कि बाहरी चमक के लिए भी इस मौसम में विटामिन C का सेवन बेहद जरूरी हो जाता है।
विटामिन C लिम्फोसाइट्स और फागोसाइट्स जैसे सेल्स के निर्माण में मदद करता है, जो इंफेक्शन के खिलाफ शरीर की पहली सुरक्षा लाइन हैं।
रिसर्च बताते हैं कि विटामिन C सर्दी-जुकाम को पूरी तरह खत्म तो नहीं करता लेकिन इसके लक्षणों की गंभीरता और बीमारी की अवधि को काफी कम कर सकता है।
यह शरीर की सेल्स को ‘फ्री रेडिकल्स’ से होने वाले नुकसान से बचाता है, जो ठंड में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस के कारण बढ़ सकते हैं।
सर्दियों में हम अक्सर हरी सब्जियां और साग ज्यादा खाते हैं। विटामिन C पौधों से मिलने वाले आयरन को सोखने में शरीर की मदद करता है, जिससे एनीमिया का खतरा टलता है।
ठंड के मौसम में ब्लड सेल्स थोड़ी सिकुड़ जाती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। विटामिन C नसों को स्वस्थ रखने में मदद करता है।
विटामिन C के नेचुरल सोर्स
आंवला को विटामिन C का सबसे शक्तिशाली और सस्ता स्रोत।
खट्टे फल जैसे संतरा, कीनू और नींबू।
अमरूद में संतरे से भी ज्यादा विटामिन C पाया जाता है।
सब्जियां जैसे ब्रोकली, शिमला मिर्च और पत्तेदार सब्जियां।
विटामिन C पानी में घुलनशील होता है, जिसका मतलब है कि हमारा शरीर इसे स्टोर नहीं कर सकता। इसलिए, सर्दियों में हर दिन इसे अपनी डाइट में शामिल करना अनिवार्य है।
27 मार्च 2026, शुक्रवार का दिन चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि के प्रभाव में रहेगा, जिसे ‘राम नवमी’ के पावन पर्व के रूप में मनाया जाएगा। आज का मूलांक 9 है, जिसके स्वामी मंगल देव हैं, जो अदम्य साहस, ऊर्जा और अनुशासन का प्रतीक माने जाते हैं। ग्रहों की चाल पर दृष्टि डालें तो चंद्रमा आज बुध की राशि मिथुन में गोचर करेंगे, जिससे बौद्धिक संवाद और तर्कशक्ति में प्रखरता आएगी। सूर्य और बुध का मीन राशि में होना और शुक्र का अपनी अनुकूल स्थिति में होना आज के दिन को भक्ति, प्रेम और आध्यात्मिक विजय की ऊर्जा से ओतप्रोत बना रहा है।
आज की समग्र ऊर्जा अत्यंत शुभ और संकल्पों को सिद्ध करने वाली है। शुक्रवार और मूलांक 9 का संयोग भौतिक सुखों के साथ-साथ कठिन कार्यों को पूरा करने का बल प्रदान करेगा। राम नवमी का अवसर होने के कारण आज मर्यादा और आदर्शों पर चलने की प्रेरणा मिलेगी, जो व्यक्तिगत संबंधों को सुधारने में सहायक होगी। मिथुन राशि का चंद्रमा आज नेटवर्किंग, लेखन और मीडिया से जुड़े जातकों के लिए सफलता के नए द्वार खोलेगा। यह दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए प्रगतिशील है जो समाज सेवा, राजनीति या रक्षा क्षेत्र से जुड़े हैं। आइए जानते हैं मेष से लेकर मीन तक सभी 12 राशियों के लिए आज का दिन कैसा रहने वाला है।
आज आप नई ऊर्जा और उत्साह का अनुभव करेंगे। कार्यक्षेत्र में आपकी योजनाओं को वरिष्ठों का समर्थन मिलेगा। व्यापार में नए अनुबंधों से भविष्य में लाभ होगा। धन लाभ के प्रबल योग हैं, निवेश के लिए दिन बहुत शुभ है। परिवार में मांगलिक उत्सव का माहौल रहेगा। जीवनसाथी के साथ संबंधों में मधुरता आएगी। सेहत अच्छी रहेगी, लेकिन जोश में आकर शारीरिक क्षमता से अधिक कार्य न करें। आज क्या करें: श्री राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करें। आज क्या न करें: किसी भी व्यक्ति पर अनावश्यक क्रोध न करें।
वृषभ
आज आपका ध्यान संचय और पारिवारिक सुखों पर केंद्रित रहेगा। व्यापार में स्थिरता बनी रहेगी। नौकरीपेशा लोगों को आज काम के सिलसिले में छोटी यात्रा करनी पड़ सकती है। धन का आगमन होगा लेकिन विलासिता की वस्तुओं पर खर्च बढ़ सकता है। रिश्तेदारों से कोई शुभ समाचार मिल सकता है। वाणी में कोमलता बनाए रखें। गले या दांतों से जुड़ी हल्की समस्या हो सकती है। आज क्या करें: कन्याओं को खीर का प्रसाद बांटें। आज क्या न करें: आज किसी को उधार देने से बचें।
चंद्रमा आपकी ही राशि में होने से आज आप काफी सक्रिय और प्रभावशाली रहेंगे। संचार कौशल से आप बड़े सौदे हासिल कर सकते हैं। कार्यस्थल पर आपकी रचनात्मकता की सराहना होगी। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा, नए निवेश के अवसर मिलेंगे। प्रेम संबंधों के लिए दिन अनुकूल है। मित्रों के साथ शाम सुखद बीतेगी। मानसिक शांति के लिए योग करें, त्वचा का ध्यान रखें। आज क्या करें: गणेश जी को दूर्वा अर्पित करें। आज क्या न करें: किसी के साथ झूठा वादा न करें।
कर्क
आज का दिन मिश्रित फलदायी रहने वाला है। कार्यक्षेत्र में काम का दबाव अधिक रहेगा। व्यापार में कोई भी निर्णय जल्दबाजी में न लें। खर्चों की अधिकता मन को चिंतित कर सकती है। बजट का पालन करना अनिवार्य है। परिवार के बड़ों की सलाह को नजरअंदाज न करें। पार्टनर के साथ गलतफहमी हो सकती है। आंखों में थकान या अनिद्रा की समस्या हो सकती है। आज क्या करें: शिवलिंग पर जल अर्पित करें। आज क्या न करें: देर रात तक जागने और ठंडे खान-पान से बचें।
आज आपकी इच्छाओं की पूर्ति का दिन है। कार्यक्षेत्र में आपकी नेतृत्व क्षमता चमकेगी। व्यापारियों को आज बड़ा मुनाफा होने की उम्मीद है। आर्थिक स्थिति: आय के नए स्रोत बनेंगे। पुराने अटके हुए पैसे वापस मिल सकते हैं। प्रेम और परिवार: सामाजिक दायरे में आपकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी। अविवाहितों के लिए विवाह के प्रस्ताव आ सकते हैं। स्वास्थ्य: आप खुद को ऊर्जावान और स्वस्थ महसूस करेंगे।
आज क्या करें: उगते सूर्य को जल चढ़ाएं और ‘राम’ नाम का जप करें।
आज क्या न करें: अहंकार में आकर किसी को सलाह न दें।
कन्या
आज आपका पूरा फोकस अपने करियर और सामाजिक छवि पर रहेगा। नौकरी में पदोन्नति या नई जिम्मेदारी मिल सकती है। व्यापार में तकनीकी बदलाव लाभकारी रहेंगे। धन की स्थिति मजबूत रहेगी। संपत्ति में निवेश की योजना बन सकती है। पिता के साथ संबंध बेहतर होंगे। दांपत्य जीवन में खुशहाली रहेगी। पैरों में दर्द या थकान महसूस हो सकती है, मालिश करवाएं। आज क्या करें: गाय को हरा चारा या गुड़ खिलाएं। आज क्या न करें: महत्वपूर्ण कार्यों में लापरवाही न बरतें।
आज भाग्य की मदद से आपके रुके हुए काम गति पकड़ेंगे। उच्च शिक्षा से जुड़े लोगों को सफलता मिलेगी। व्यापार में लंबी दूरी की यात्राएं लाभदायक रहेंगी। भाग्यवश धन लाभ होगा। धार्मिक कार्यों में धन खर्च हो सकता है। परिवार के साथ किसी तीर्थ यात्रा की योजना बन सकती है। रिश्तों में प्रगाढ़ता आएगी। सेहत अच्छी रहेगी, पुरानी किसी बीमारी से राहत मिल सकती है। आज क्या करें: मंदिर में पीले रंग की मिठाई का दान करें। आज क्या न करें: आज किसी की बुराई न करें।
वृश्चिक
आज का दिन थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है, धैर्य बनाए रखें। कार्यस्थल पर विरोधियों से सावधान रहें। व्यापारिक निर्णयों में किसी विशेषज्ञ की सलाह लें। धन के लेन-देन में सावधानी बरतें। अचानक कोई खर्च सामने आ सकता है। अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें, छोटे भाई-बहनों से अनबन हो सकती है। स्वास्थ्य: वाहन चलाते समय विशेष सतर्क रहें, चोट की आशंका है। आज क्या करें: हनुमान चालीसा का पाठ करें। आज क्या न करें: आज कोई नया काम शुरू न करें।
साझेदारी और वैवाहिक जीवन के लिए आज का दिन श्रेष्ठ है। नए बिजनेस पार्टनर मिल सकते हैं। टीम वर्क से कठिन कार्य भी आसानी से पूरे होंगे। आय स्थिर रहेगी, भविष्य की बचत के लिए निवेश कर सकते हैं।जीवनसाथी के साथ भावनात्मक जुड़ाव बढ़ेगा। घर का माहौल सुखद रहेगा। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा, लेकिन जोड़ों के दर्द का ध्यान रखें। आज क्या करें: श्री राम दरबार की आरती करें। आज क्या न करें: पार्टनर पर शक करने से बचें।
मकर
आज आप अपनी मेहनत और अनुशासन से सफलता प्राप्त करेंगे। कार्यस्थल पर काम की अधिकता रहेगी, लेकिन आप उसे समय पर पूरा कर लेंगे। कानूनी मामलों में पक्ष मजबूत होगा। धन की स्थिति सामान्य रहेगी। अनावश्यक खरीदारी से बचें। ननिहाल पक्ष से कोई शुभ समाचार मिल सकता है। बच्चों की प्रगति से प्रसन्नता होगी। पाचन तंत्र का ख्याल रखें, बाहर का खाना न खाएं। आज क्या करें: असहाय लोगों को भोजन कराएं। आज क्या न करें: आलस्य को अपने ऊपर हावी न होने दें।
कुंभ
आज का दिन आपकी रचनात्मकता और बुद्धिमत्ता को प्रदर्शित करने का है। नए प्रोजेक्ट्स शुरू करने के लिए दिन अच्छा है। शेयर मार्केट और सट्टेबाजी से बचें। आर्थिक लाभ के अवसर मिलेंगे। नया वाहन खरीदने का मन बना सकते हैं। प्रेम संबंधों में नयापन आएगा। मित्रों का पूरा सहयोग प्राप्त होगा। मानसिक रूप से फ्रेश रहने के लिए भरपूर पानी पिएं। आज क्या करें: शनि चालीसा का पाठ करें। आज क्या न करें: घर के बड़ों की सलाह को अनसुना न करें।
आज आप घरेलू सुख-शांति और माता-पिता की सेवा में समय बिताएंगे। कार्यस्थल पर किसी से बहस न करें। व्यापार में कागजी कार्रवाई को लेकर सतर्क रहें। सुख-सुविधाओं पर धन खर्च होगा। निवेश के लिए विशेषज्ञ की राय लें। घर में शांति बनी रहेगी। पुरानी यादें ताजा हो सकती हैं। छाती में जकड़न या सर्दी-जुकाम की संभावना है, सावधानी बरतें। आज क्या करें: ‘ॐ राम रामाय नमः’ का जप करें। आज क्या न करें: भ्रम की स्थिति में कोई बड़ा निवेश न करें।
डिस्क्लेमर: यह राशिफल सामान्य ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। व्यक्तिगत जानकारी के लिए ज्योतिषी से संपर्क करें।
अमेरिका में इस साल वह होने जा रहा है जो अब तक के इतिहास में नहीं हुआ है। इस साल के आखिर तक अमेरिकी डॉलर पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सिग्नेचर होंगे। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने इसकी आधिकारिक घोषणा कर दी है। यह अमेरिकी इतिहास में पहली बार होगा जब किसी मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति का सिग्नेचर डॉलर नोटों पर होगा। ट्रंप के सिग्नेचर वाले नोट अमेरिका की 250वीं वीं वर्षगांठ के मौके पर जारी किया जाएगा।
डॉलर के नोट 1861 में शुरू हउए थे और तब से अब तक किसी भी नोट पर मौजूदा राष्ट्रपति के सिग्नेचर नहीं पाए गए हैं। नोटों पर आमतौर पर अमेरिका के कोषाध्यक्ष और ट्रेजरी सचिव के सिग्नेचर होते हैं लेकिन आने वाले नए नोटों पर डोनाल्ड ट्रंप और ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट के सिग्नेचर होंगे। इस फैसले की चर्चा अब पूरी दुनिया में है।
इस फैसले की जानकारी देते हुए ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका आर्थिक विकास, डॉलर के लंबे समय तक इंटरनेशनल दबदबे और मजबूत वित्तीय स्थित की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने आगे कहा, ‘हमारे महान देश और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ऐतिहासिक उपलब्धियों को पहचान देने का इससे ज्यादा शक्तिशाली तरीका कोई नहीं है कि अमेरिकी डॉलर के नोटों पर उनका नाम हो और यह बिल्कुल उचित है कि यह ऐतिहासिक करेंसी देश की 250वीं वर्षगांठ के मौके पर जारी की जाएं।’
सिक्के पर ट्रंप की तस्वीर
अमेरिकी डॉलर पर अब तक किसी मौजूदा राष्ट्रपति के सिग्नेचर नहीं हुए हैं लेकिन अब ट्रंप इस परंपरा को तोड़ने वाले हैं। ट्रंप हर जगह अपनी छाप छोड़ने की कोशिश में लगे हुए हैं। इससे पहले पिछले सप्ताह भी उन्होंने कुछ इसी तरह का फैसला लिया था। उनके ही एक सलाहकार आयोग ने सोने के सिक्के के डिजाइन को मंजूरी दी, जिस पर डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीर होगी। यह सिक्का भी 4 जुलाई को जारी होगा। 4 जुलाई 1776 को अमेरिका की स्थापना हुई थी और अमेरिका की 250वीं सालगिराह पर ट्रंप की तस्वीर वाला यह सिक्का जारी होगा।
सिक्के के जिस डिजाइन को मंजूरी दी गई है उसकी एक तरफ डोनाल्ड ट्रंप खड़े हुए दिखाया गया है, जबकि दूसरी तरफ पंख फैलाकर बैठे हुए एक ईगल को दिखाया गया है। वह किसी घंटी जैसी चीज पर बैठा हुआ है। इस सिक्के की कोई करेंसी वैल्यू नहीं है और ना ही इसकी कीमत अभी जारी की गई हैष। हालांकि, माना जा रहा है कि इस सिक्के की कीमत 1,000 डॉलर से ज्यादा हो सकती है।
विरोधी कर रहे आलोचना
ट्रंप के इन फैसलों की उनके विरोधी आलोचना कर रहे हैं। ट्रंप के विरोधी इसे गैरकानूनी कह रहे हैं। उनका तर्क है कि ट्रंप के यह फैसले संघीय कानून के खिलाफ जाते हैं जिसमें कहा गया है कि कोई भी जीवित राष्ट्रपति अमेरिकी करेंसी पर नहीं दिखाया जा सकता। हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने सिक्के के बाद अब डॉलर नोट पर भी ट्रंप के सिग्नेचर होने की घोषणा कर दी है।
सीएनएन की एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप का यह फैसला अमेरिकी कानून के कारण सवालों के घेरे में है। अमेरिकी कानून के अनुसार, मौजूदा राष्ट्रपति की तस्वीर नहीं हो सकती है। इसके अलावा पूर्व राष्ट्रपति की तस्वीर भी करेंसी पर नहीं हो सकती है। हालांकि, कानून में यह प्रावधान है कि राष्ट्रपति की मौत के बाद उनकी तस्वीर करेंसी पर लगाई जा सकती है लेकिन उसके लिए भी मौत को कम से कम दो साल का समय पूरा होना चाहिए। अमेरिका के 30वें राष्ट्रपति के बाद से ऐसा किसी भी राष्ट्रपति के लिए नहीं किया गया है।
सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने देशभर के होटल और रेस्टोरेंट्स को सख्त चेतावनी दी है। अब खाने के बिल में ‘LPG चार्ज’, ‘गैस सरचार्ज’ या ‘फ्यूल कॉस्ट रिकवरी’ जैसे पैसे जोड़ना पूरी तरह गैर-कानूनी घोषित कर दिया गया है। अथॉरिटी ने साफ किया है कि ऐसा करना ग्राहकों के साथ धोखा है और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर अब भारी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
CCPA ने नया आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि गैस, बिजली या दुकान चलाने का कोई भी दूसरा खर्च होटल के अपने बिजनेस का हिस्सा होता है। रेस्टोरेंट्स को इन निजी खर्चों को अलग से बिल में जोड़ने का कोई कानूनी हक नहीं है। नियम के अनुसार, मेन्यू कार्ड पर जो कीमत लिखी है, ग्राहक को सिर्फ वही और उस पर लगने वाला सरकारी टैक्स (GST) ही देना होगा। इसके अलावा किसी भी तरह का गुप्त चार्ज वसूलना अब मुमकिन नहीं होगा।
जांच में यह बात सामने आई है कि जब से सर्विस चार्ज वसूलने पर पाबंदी लगी है, कई रेस्टोरेंट्स ने ग्राहकों की जेब काटने के लिए ‘LPG चार्ज’ जैसे नए नाम खोज लिए थे। नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन पर ऐसी शिकायतों की बाढ़ आ गई थी कि लोग खाने के दाम के अलावा भी कई तरह के अतिरिक्त चार्ज दे रहे हैं। CCPA ने इसे ‘अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस’ माना है और कहा है कि ग्राहकों को गुमराह करना अब बंद करना होगा।
अथॉरिटी ने साफ कर दिया है कि इन नियमों को नजरअंदाज करने वाले संस्थानों पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत कड़ा एक्शन लिया जाएगा। अगर कोई रेस्टोरेंट बिल में जबरदस्ती अतिरिक्त चार्ज जोड़ता है, तो ग्राहक तुरंत उसे हटाने की मांग कर सकते हैं। इसके बाद भी अगर रेस्टोरेंट मालिक नहीं मानता है तो आप हेल्पलाइन नंबर 1915 पर कॉल करके या ‘ई-जाग्रति’ पोर्टल के जरिए अपनी शिकायत ऑनलाइन दर्ज करा सकते हैं।
आजकल जब कमजोरी और थकान जैसे लक्षण महसूस होते हैं तो लोग तुरंत दवाइयों और सप्लीमेंट्स की ओर भागते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके शरीर के लिए जरूरी कई पोषक तत्व आपकी रोज की थाली में ही मौजूद होते हैं। ऐसा ही एक महत्वपूर्ण विटामिन है विटामिन बी6, जिसकी कमी को पूरा करने के लिए सिर्फ दवा नहीं बल्कि सही आहार ही काफी है।
विटामिन बी6 शरीर के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यह न केवल भोजन को ऊर्जा में बदलता है बल्कि दिमाग को स्वस्थ रखने, मूड बेहतर करने और इम्यूनिटी मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभाता है। इसके बावजूद लोग अक्सर इसकी कमी पूरी करने के लिए सीधे सप्लीमेंट्स का सहारा लेते हैं, जो हर बार जरूरी नहीं होता है।
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की रिपोर्ट के मुताबिक, विटामिन बी6 शरीर में 100 से अधिक एंजाइमिक प्रतिक्रियाओं के लिए अहम है, जिसमें अमीनो एसिड और हीमोग्लोबिन का निर्माण शामिल है। इसलिए शरीर की कमजोरी, डिप्रेशन और लो हीमोग्लोबिन से लड़ने के लिए विटामिन बी6 बेहद जरूरी है।
अब सवाल उठता है कि विटामिन बी6 किस प्रकार के भोजन से मिल सकता है। हमारे रोजमर्रा के भोजन जैसे चना, चिकन, केले, आलू और टमाटर का सूप खाने से शरीर को विटामिन बी6 मिलता है। अब सवाल उठता है कि इन फलों और सब्जियों को हर दिन कितनी मात्रा में खाना चाहिए ताकि हम संतुलित मात्रा में विटामिन की पूर्ति कर सकें।
केला- एक सामान्य आकार का केला रोज एक बार खाने से करीब 0.4 मिलीग्राम विटामिन बी6 मिलता है। इसके अलावा केला खाने से शरीर को विटामिन C और पोटेशियम भी मिलता है। केले को नाश्ते से 2 घंटे पहले खाना सही माना जाता है।
आलू- लगभग एक कप उबले हुए आलू खाने से करीब 0.4 मिलीग्राम विटामिन बी6 मिलता है। आलू से पोटैशियम, विटामिन C और फाइबर भी मिलता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आलू के छिलकों में भी विटामिन और फाइबर होता है। इसलिए आलू को अच्छी तरह धोकर उबालना चाहिए। उबले हुए आलू खाने से ही विटामिन मिलता है क्योंकि तले हुए आलू में विटामिन नष्ट हो जाते हैं।
चिकन- 85 ग्राम चिकन ब्रेस्ट खाने से करीब 0.5 मिलीग्राम विटामिन बी6 मिलता है। चिकन पकाते समय ध्यान रखें कि इसे उबालकर या भाप में पकाया जाए ताकि इसके पोषक तत्व बरकरार रहें।
टमाटर- एक कप टमाटर का सूप पीने से लगभग 0.4 मिलीग्राम विटामिन बी6 मिलता है। इसके अलावा इसमें विटामिन A, विटामिन C और पोटैशियम भी होता है, जो दिल और त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है।
चना – दिनभर में आधा कप चना खाने से करीब 0.55 मिलीग्राम विटामिन बी6 मिलता है। चना खाने से शरीर को पोटैशियम भी मिलता है। विटामिन बी6 की कमी से जूझ रहे लोगों को ऐसे आहार जरूर खाने चाहिए।
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के शोध के मुताबिक हर व्यक्ति को अपनी उम्र के हिसाब से विटामिन बी6 युक्त आहार लेना चाहिए। 19 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को रोजाना 1.3 मिलीग्राम विटामिन बी6 का सेवन करना चाहिए।
विटामिन युक्त आहार खाना हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है।
हीमोग्लोबिन बनना- विटामिन बी6 हमारे शरीर में हीमोग्लोबिन बनाने में मदद करता है, जिससे व्यक्तियों को एनीमिया का खतरा कम हो जाता है।
स्वस्थ हृदय– यह शरीर के खून में पाए जाने वाले अमीनो एसिड यानी होमोसिस्टीन की मात्रा कम करता है, जिससे हृदय संबंधी रोगों का खतरा कम हो जाता है।
स्वस्थ त्वचा – विटामिन बी6 युक्त आहार खाने से त्वचा स्वस्थ रहती है।
स्वस्थ मानसिक स्वास्थ्य – विटामिन बी6 शरीर में न्यूरोट्रांसमीटर ( chemical messenger) बनाने में अहम भूमिका निभाता है। न्यूरोट्रांसमीटर से दिमाग तेजी से काम करता है।
विटामिन बी6 की कमी के लक्षण
जिन लोगों के शरीर में विटामिन बी6 की कमी होती है उनमें कई लक्षण दिखाई देते हैं।
मानसिक तनाव -डिप्रेशन, चिंता और चिड़चिड़ापन विटामिन की कमी के कारण हो सकते हैं।
खराब स्किन -विटामिन बी6 त्वचा की चमक बनाए रखने में मदद करता है, इसकी कमी से स्किन प्रॉब्लम हो सकती है।
कमजोरी – इसकी कमी से शरीर में थकावट और कमजोरी महसूस होती है।
होठ फटना -विटामिन की कमी से होंठ फटना और टैनिंग जैसी समस्या हो सकती है।
विटामिन बी6 की कमी से होने वाली बीमारियां
विटामिन बी6 की कमी कई बीमारियों का कारण बन सकती है, जैसे हीमोग्लोबिन की कमी और एनीमिया। हीमोग्लोबिन की कमी – विटामिन बी6 की कमी से हीमोग्लोबिन कम हो जाता है, जिससे थकान और कमजोरी होती है। डिप्रेशन – इसकी कमी से मानसिक स्थिति प्रभावित होती है और डिप्रेशन की समस्या हो सकती है।
भारतीय पुराणों में वर्णित शुक्राचार्य से जुड़ी कथा हमेशा चर्चा में रहती है, जिसमें बताया गया है कि किस तरह भगवान विष्णु के वामन अवतार के दौरान असुर गुरु शुक्राचार्य की एक आंख नष्ट हो गई थी। यह प्रसंग न केवल देव–असुर संघर्ष से जुड़ा है, बल्कि गुरु-शिष्य परंपरा, दान की मर्यादा और धर्म-अधर्म के टकराव को भी उजागर करता है। राजा बलि के यज्ञ, तीन पग भूमि के वरदान और भगवान की लीला से जुड़ी यह कथा आज भी लोगों को यह संदेश देती है कि अहंकार और पक्षपात जब विवेक पर हावी हो जाते हैं, तो सबसे बड़े ज्ञानी को भी परिणाम भुगतने पड़ते हैं।
शुक्राचार्य को असुरों का गुरु (गुरु शुक्र) कहा जाता है। वह महर्षि भृगु के पुत्र थे और महान तपस्वी, ज्योतिषाचार्य और विद्वान माने जाते थे। शुक्राचार्य को संजीवनी विद्या का ज्ञान था, जिससे वह मरे हुए असुरों को दोबारा जीवित कर सकते थे। इसी वजह से देवताओं और असुरों के युद्ध में असुर बार-बार हारने के बाद भी फिर शक्तिशाली हो जाते थे।
यह प्रसंग वामन अवतार से जुड़ा हुआ है। असुर राजा बलि बहुत शक्तिशाली हो गए थे और तीनों लोकों पर अधिकार करना चाहते थे। देवताओं की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने वामन ब्राह्मण का रूप धारण किया और बलि के यज्ञ में पहुंचे।
वामन ने बलि से केवल तीन पग भूमि दान में मांगी। राजा बलि तुरंत दान देने को तैयार हो गए लेकिन शुक्राचार्य ने अपनी दिव्य दृष्टि से पहचान लिया कि यह कोई साधारण ब्राह्मण नहीं बल्कि स्वयं भगवान विष्णु हैं। उन्होंने बलि को दान देने से रोकने का प्रयास किया।
जब बलि ने गुरु की बात नहीं मानी, तो शुक्राचार्य ने यज्ञ के कमंडलु (जल पात्र) की टोंटी में अपना रूप छोटा कर प्रवेश कर लिया, जिससे जलधारा रुक जाए और दान पूरा न हो सके। वामन रूप में भगवान विष्णु ने यह जान लिया और पास रखी कुशा (घास) या दर्भ से कमंडलु की टोंटी को साफ किया।
इसी दौरान कुशा शुक्राचार्य की एक आंख में चुभ गई और उनकी एक आंख नष्ट हो गई। तभी से उन्हें एकाक्षी शुक्राचार्य कहा जाने लगा।
आंख फूटने का आध्यात्मिक अर्थ
यह घटना केवल शारीरिक चोट नहीं बल्कि एक गहरे प्रतीक को दर्शाती है। शुक्राचार्य असुरों के हित की वजह से धर्म से हटकर सोच रहे थे। उनकी एक आंख का नष्ट होना यह दर्शाता है कि जब बुद्धि पर अहंकार और पक्षपात हावी हो जाता है, तो विवेक की दृष्टि कमजोर हो जाती है।
शुक्राचार्य की महानता
आंख खोने के बावजूद शुक्राचार्य की विद्या, तप और ज्ञान कम नहीं हुआ। वह नवग्रहों में शुक्र ग्रह के अधिष्ठाता बने और आज भी वैदिक ज्योतिष में उन्हें वैभव, सुख, ऐश्वर्य और कला का कारक माना जाता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तानाशाह जैसा व्यवहार करने में जुटे हैं। अगर कोई नेता उनसे असहमत होता है तो उसे वह खुलेआम धमकी देते हैं। उस देश को नतीजे भुगतने की बात कहते हैं। दुनिया के अधिकांश नेता ट्रंप से बहस की जगह बायपास करने की नीति अपनाने में जुटे हैं। मगर तमाम धमकियों के बावजूद कुछ ऐसे नेता भी हैं, जो ट्रंप के सामने झुकाने को तैयार नहीं हैं। उनके साथ क्या होगा, यह भविष्य ही बताएगा, लेकिन दो बड़े नेताओं के साथ अमेरिका ने क्या किया है, इसे दुनिया देख चुकी है। आइये जानते हैं उन नेताओं के बारे में, जो पिछले एक साल में ट्रंप से भिड़ चुके हैं।
अली खामेनेई: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को 28 फरवरी की सुबह अमेरिका और इजरायल ने मार डाला। अमेरिका ने ईरान को 10 दिन का समय दिया था। दो मार्च को यह समय सीमा खत्म हो रही थी। मगर दो दिन पहले ही एयर स्ट्राइक में अली खामेनेई की जान ले ली गई। अमेरिका उन पर नरसंहार, दमन और आतंक फैलाने का आरोप लगाता है। सबसे बड़ा आरोप परमाणु बम बनाने का है। ईरान कई बार इसका खंडन कर चुका है। तेहरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांति और नागरिक उद्देश्यों के लिए है। अली खामेनेई के सामने अमेरिका से समझौता करने का विकल्प था। मगर उन्होंने दूसरा रास्ता चुना।
निकोलस मादुरो: पिछले कार्यकाल से ही वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और ट्रंप के बीच तनातनी चल रही थी। दूसरे कार्यकाल में यह चरम पर पहुंच गई। अमेरिका की निगाह वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार पर है। उसने मादुरो पर चुनाव में धांधली और विरोधियों के दमन का आरोप लगाया। अमेरिका ने कई बार समझौता करने का दबाव बनाया, लेकिन मादुरो झुके नहीं। गिरफ्तारी से पहले उन्होंने ट्रंप को पकड़ने की धमकी भी दी थी। इसी साल 3 जनवरी की तड़के अमेरिकी सेना ने एक ऑपरेशन में मादुरो को उनकी पत्नी के साथ अगवा करके अमेरिका उठा ले गई।
सिरिल रामफोसा: डोनाल्ड ट्रंप और सिरिल रामफोसा के झगड़े को भी दुनिया जानती हैं। पिछले साल रामफोसा अमेरिका गए थे। ओवल ऑफिस में ट्रंप से मुलाकात की थी। मगर यह मुलाकात झगड़े में बदल गई थी। ट्रंप ने अफ्रीकी सरकार पर फर्जी तरीके से श्वेत लोगों के नरसंहार का आरोप लगाया। जवाब में रामफोसा ने कहा था कि मेरे पास आपको देने के लिए जहाज नहीं है। दरअसल, कुछ दिन पहले ही कतर ने एक लग्जरी जहाज ट्रंप को गिफ्ट किया था। रामफोसा का इशारा इसी तरफ था। दोनों के बीच विवाद जी-20 सम्मेलन के दौरान और बढ़ गया। ट्रंप ने दक्षिण अफ्रीका में आयोजित जी20 सम्मेलन का बहिष्कार किया और इस साल अमेरिका में आयोजित समिट से प्रतिबंधित कर दिया।
गुस्तावो पेट्रो: कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो कई मौकों पर ट्रंप से सीधे भिड़ चुके हैं। पिछले साल गुस्तावो पेट्रो ने ट्रंप की आव्रजन नीति का खुलकर विरोध किया था। लोगों को हथकड़ी के साथ अमेरिका से निकालने की खबरों के बाद पेट्रो ने अमेरिकी जहाजों को कोलंबिया के एयरस्पेस में घुसने से मना कर दिया था। ट्रंप ने 30 फीसद टैरिफ की धमकी दी। मगर अमल अभी तक नहीं किया। जब निकोलस मादुरो को अगवा किया गया तो भी पेट्रो ने खुलकर ट्रंप का विरोध किया। उन्होंने गिरफ्तार करने की चुनौती तक दे डाली। जवाब में ट्रंप ने कोलंबिया पर ड्रग्स रॉकेट चलाने का आरोप लगाया। पिछले साल कोलंबियाई राष्ट्रपति ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर हजारों फिलिस्तीन समर्थक की रैली को संबोधित किया। बाद में अमेरिका ने उनका वीजा भी रद्द कर दिया था।
पेड्रो सांचेज: ट्रंप से साथ ताजा विवाद स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज का हुआ। सांचेज ने ईरान के खिलाफ अपने रोटा और मोरोन एयरबेस के इस्तेमाल की अनुमति अमेरिका को नहीं दी। स्पेन की सरकार ने गाजा, वेनेजुएला, यूक्रेन और ईरान मामले में अमेरिका के खिलाफ रुख अपनाया है। मगर ताजा मामले ने ट्रंप को नाराज कर दिया। बेस पर पाबंदी लगाने की जानकारी मिलने के बाद ट्रंप ने स्पेन के साथ सभी तरह के व्यापार बंद करने की धमकी दी और कहा कि स्पेन का रवैया बेहद खराब है। ट्रंप ने यह भी धमकी दी कि हम चाहें तो अड्डे का इस्तेमाल कर सकते हैं। हमें कोई रोक नहीं सकता है।