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‘हम होर्मुज के रक्षक, कीमत भी वसूलेंगे’ डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट पर ठोंका दावा


पश्चिम एशिया में एक बार फिर से स्थितियां खराब हो रही हैं। पिछले तीन-चार दिनों में ईरान के ऊपर हुए हमलों के बाद सोमवार को अमेरिका और ईरान ने दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट पर उनका नियंत्रण है। इस घटनाक्रम ने जंग खत्म करने के लिए जारी कूटनीतिक कोशिशों पर भी गंभीर संकट खड़ा कर दिया है।

 

इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बड़ा दावा किया। उन्होंने अपने ट्रुथ सोशल पर कहा है कि अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट में ईरान के खिलाफ नाकेबंदी बहाल कर रहा है और वह सुरक्षित आवाजाही के लिए जहाजों से फीस वसूलेगा।

 

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सोशल मीडिया पोस्ट में ट्रंप की घोषणा

ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका और ईरान के एक-दूसरे को निशाना बनाकर किए गए ताजा हमलों के बाद एक सोशल मीडिया पोस्ट में यह घोषणा की। फरवरी में युद्ध शुरू होने के बाद ईरान के होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण स्थापित करने से पहले वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा इस अहम मार्ग से होकर गुजरता था।

 

 

 

डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा?

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, ‘होर्मुज स्ट्रेट खुला है और ईरान के साथ या उसके बिना भी खुला रहेगा। हम ईरानी नाकाबंदी को फिर से लागू कर रहे हैं, जिसका नाम इसलिए रखा गया है क्योंकि यह सिर्फ ईरान के जहाजों या कस्टमर्स को अंदर आने या बाहर जाने से रोक रहा है। बाकी सभी देश होर्मुज स्ट्रेट का सही और खुला इस्तेमाल कर सकेंगे।’

 

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‘होर्मुज स्ट्रेट का रखवाला’

उन्होंने आगे कहा, ‘अमेरिका को अब से ‘होर्मुज स्ट्रेट का रखवाला’ के नाम से जाना जाएगा। लेकिन इस तरह और निष्पक्षता के तौर पर दुनिया के इस बहुत अस्थिर हिस्से को बचाव और सुरक्षा देने के काम के लिए जरूरी सभी खर्चों के लिए भेजे गए सभी कार्गो पर 20% की दर से प्रतिपूर्ति किया जाएगा। प्रोसेस और बनना तुरंत शुरू हो जाएगा।’

 

दरअसल, रविवार को तनाव उस समय और बढ़ गया जब ईरान ने ओमान के तट के पास होर्मुज स्ट्रेट में एक कंटेनर जहाज को निशाना बनाया। इस हमले ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि वैश्विक स्तर पर कभी कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के लगभग पांचवें हिस्से की आवाजाही वाले इस समुद्री मार्ग का मुद्दा ही दोनों देशों के बीच वार्ता का सबसे बड़ा विवाद बना हुआ है।

हाई कोर्ट ने 27 लोगों को बताया था विदेशी, सुप्रीम कोर्ट ने हटाया टैग


सुप्रीम कोर्ट ने असम के 27 लोगों पर लगा ‘विदेशी’ का टैग हटा दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को असम के 27 लोगों को विदेशी घोषित करने वाले गुवाहाटी हाईकोर्ट के फैसलों को रद्द कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नागरिकता का फैसला बहुत गंभीर मुद्दा है, इसलिए इसे पूरी तरह निष्पक्ष, कानूनी और उचित तरीके से तय की जानी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने इन सभी 27 मामलों को वापस असम के विदेशी ट्रिब्यूनल को भेज दिया है। अब इन ट्रिब्यूनलों में इन लोगों के केस दोबारा सुनवाई के साथ नए सिरे से तय किए जाएंगे।

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असम में क्यों बार-बार सामने आते हैं ऐसे मामले?

असम में कई लोगों की नागरिकता पर शक है कि वे भारतीय नागरिक हैं या नहीं। ऐसे मामलों की सुनवाई विदेशी ट्रिब्यूनल में होती है। अगर ट्रिब्यूनल किसी को विदेशी मान लेता है तो मामला पेचीदा हो जाता है।

जिस व्यक्ति पर ट्रिब्यूनल यह फैसला देता है, उसके पास हाई कोर्ट में अपील दायर करने का वक्त होता है। इन 27 लोगों के मामले में हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल के फैसले को सही माना था, जिससे वे विदेशी करार हो गए थे। 

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सुप्रीम कोर्ट ने क्यों हाई कोर्ट का फैसला पलटा?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रक्रिया सही तरीके से नहीं हुई, इसलिए दोबारा सुनवाई होनी चाहिए। कोर्ट ने साफ कहा कि किसी भी व्यक्ति की नागरिकता छीनने का फैसला हल्के में नहीं लिया जा सकता। यह संवैधानिक महत्व से जुड़ा है, इसलिए इसकी प्रक्रिया उचित होनी चाहिए। 

 

गर्भधारण से पहले क्यों जरूरी है गर्भाधान संस्कार? जानिए आयुर्वेद क्या कहता है


आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी, तनाव, खराब खान-पान और देर से परिवार शुरू करने की वजह से कई कपल्स को बच्चा पैदा करने में दिक्कतें आ रही हैं। साथ ही कुछ महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान भी तरह-तरह की परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। इसीलिए अब लोग सिर्फ इलाज पर निर्भर नहीं रह रहे हैं, बल्कि गर्भधारण से पहले ही अपनी सेहत को बेहतर बनाने पर जोर दे रहे हैं। इसी वजह से आयुर्वेद का ‘गर्भाधान संस्कार’ तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक जीवनशैली और तनाव का सबसे ज्यादा असर प्रेग्नेंसी पर पड़ रहा है।

इन समस्याओं को देखते हुए कई कपल्स अब गर्भधारण की योजना बनाने से पहले आयुर्वेद की मदद ले रहे हैं और ‘गर्भाधान संस्कार’ जैसे कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के लिए आगे आ रहे हैं।

 

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क्या है गर्भाधान संस्कार?

आयुर्वेद में गर्भाधान संस्कार को गर्भधारण की तैयारी का पहला कदम माना जाता है। इसका मतलब सिर्फ बच्चा पैदा करना नहीं बल्कि होने वाले माता-पिता को पहले से शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से तैयार करना है। माना जाता है कि अगर माता-पिता पहले से स्वस्थ होंगे तो प्रेग्नेंसी भी बेहतर होगी और बच्चे का विकास भी अच्छी तरह हो सकेगा।

इसमें क्या-क्या किया जाता है?

कर्नाटक के उडुपी स्थित एसडीएम आयुर्वेद महाविद्यालय एवं अस्पताल में कई सालों से यह सुविधा दी जा रही है। यहां आने वाले कपल्स को उनकी सेहत के हिसाब से सलाह दी जाती है। इसमें खान-पान में बदलाव, रोजमर्रा की अच्छी आदतें अपनाना, योग और मानसिक तनाव कम करने जैसे उपाय बताए जाते हैं। इसका मकसद शरीर को गर्भधारण के लिए तैयार करना होता है।

 

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आयुर्वेद क्या कहता है?

आयुर्वेद के अनुसार, स्वस्थ गर्भधारण के लिए चार चीजें सबसे जरूरी मानी गई हैं। इनमें सही समय, महिला का स्वस्थ रिप्रोडक्टिव सिस्टम, शरीर को पूरा पोषण मिलना और स्वस्थ ऐग और स्पर्म शामिल हैं। आयुर्वेद इसे खेती से जोड़कर समझाता है। जैसे अच्छी फसल के लिए उपजाऊ जमीन, सही मौसम, पर्याप्त पानी और अच्छे बीज की जरूरत होती है उसी तरह स्वस्थ बच्चे के लिए भी इन सभी बातों का ध्यान रखना जरूरी माना गया है।

डॉक्टर ने क्या कहा?

एसडीएम आयुर्वेद महाविद्यालय एवं अस्पताल की प्राचार्य और वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. ममता के. वी. का कहना है कि ‘गर्भ’ का मतलब भ्रूण और ‘आधान’ का मतलब उसकी स्थापना है। उनके अनुसार गर्भाधान संस्कार सिर्फ एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं बल्कि माता-पिता को शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक रूप से तैयार करने की प्रक्रिया है ताकि बच्चे को जीवन की बेहतर शुरुआत मिल सके।

मेष, मकर, मीन सावधान, सिंह के बदलेंगे दिन, कैसी रहेगी भाग्यदशा? पढ़ें राशिफल


12 जुलाई का दिन बेहद ऊर्जावान और सकारात्मक रहने वाला है। अंक ज्योतिष के अनुसार आज का मूलांक 3 है, जो देवगुरु बृहस्पति के प्रभाव को दर्शाता है। इससे आज ज्ञान, बुद्धि और सही निर्णय लेने की क्षमता में वृद्धि होगी। ग्रह-नक्षत्रों की गणना के अनुसार आज चंद्रमा वृषभ राशि में गोचर करेंगे, जिससे मानसिक शांति और स्थिरता का वातावरण बना रहेगा। सूर्य देव की कृपा से आज का दिन सभी राशियों के लिए आत्ममंथन करने और नए संकल्पों के साथ आगे बढ़ने के लिए बेहद अच्छा है।


आज की ऊर्जा कर्म और भाग्य के सुंदर संतुलन को दर्शाती है। रविवार का दिन होने के कारण प्रशासनिक कार्यों, सरकारी योजनाओं और नए निवेशों में रफ्तार मिलेगी। आज की आकाशीय ऊर्जा हमें धैर्य रखने और दूसरों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखने के लिए प्रेरित कर रही है। व्यापार के लिए आज का दिन नई रणनीतियों को आकार देने के लिए शानदार है, वहीं पारिवारिक मोर्चे पर यह अपनों के साथ आनंदमय समय बिताने का संकेत दे रहा है। आइए जानते हैं मेष से लेकर मीन तक सभी 12 राशियों के लिए आज का दिन कैसा रहने वाला है।

 

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राशिफल


मेष राशि


सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा। व्यापार में नए ऑर्डर मिलने से उत्साह बढ़ेगा। धन लाभ के योग हैं लेकिन अचानक होने वाले खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी है। जीवनसाथी के साथ संबंध अच्छे रहेंगे।
आज क्या करें: सूर्य देव को जल अर्पित करें।
आज क्या न करें: आज किसी को उधार देने से बचें।


वृषभ राशि


चंद्रमा आपकी ही राशि में हैं, जिससे मानसिक स्पष्टता रहेगी। व्यापार में बड़ा मुनाफा हो सकता है। आर्थिक पक्ष मजबूत रहेगा। अटका हुआ धन वापस मिलने की पूरी संभावना है। लव पार्टनर के साथ रोमांटिक समय बीतेगा।
आज क्या करें: गाय को हरी घास या रोटी खिलाएं।
आज क्या न करें: किसी भी काम में जल्दबाजी या हड़बड़ाहट न दिखाएं।


मिथुन राशि


नौकरीपेशा जातकों को आज काम का दबाव झेलना पड़ सकता है। व्यापार में सामान्य गति रहेगी। खर्चों की अधिकता रहेगी, इसलिए बजट बनाकर चलना आज के दिन बेहद जरूरी है।
आज क्या करें: पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करें।
आज क्या न करें: आज किसी अजनबी पर आंख मूंदकर भरोसा न करें।

 

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कर्क राशि


ऑफिस में आपके प्रदर्शन की सराहना होगी। धन कमाने के नए स्रोत बनेंगे। निवेश के लिए दिन काफी अच्छा और लाभदायक है। दोस्तों के साथ मेलजोल बढ़ेगा। जीवनसाथी से कोई सुंदर गिफ्ट मिल सकता है।
आज क्या करें: माता-पिता के पैर छूकर दिन की शुरुआत करें।
आज क्या न करें: आज किसी बहस में न उलझें।


सिंह राशि


आज का दिन आपके लिए उपलब्धियों से भरा रहेगा। नौकरी में नई जिम्मेदारी मिल सकती है। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। संपत्ति से जुड़े मामलों में सफलता मिलेगी। पिता का पूरा सहयोग मिलेगा।
आज क्या करें: सूर्य चालीसा का पाठ करें।
आज क्या न करें: अहंकार और अति-आत्मविश्वास से दूर रहें।


कन्या राशि


भाग्य का साथ मिलने से रुके हुए काम पूरे होंगे। व्यापारिक यात्राएं सुखद और फलदायी रहेंगी। भाग्यवश धन लाभ होगा। धार्मिक कार्यों में धन खर्च होने के योग हैं।
आज क्या करें: किसी जरूरतमंद व्यक्ति को पीले अनाज का दान करें।
आज क्या न करें: आज अपनी गुप्त बातें किसी से साझा न करें।

 

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तुला राशि


नौकरी में चुनौतियां आ सकती हैं। साझेदारी के बिजनेस में थोड़ा सतर्क रहने की आवश्यकता है। धन के लेनदेन में सावधानी बरतें। आज निवेश करने से बचना ही समझदारी होगी। जीवनसाथी की भावनाओं का सम्मान करें।
आज क्या करें: महामृत्युंजय मंत्र का 11 बार जप करें।
आज क्या न करें: आज के दिन कोई नया बड़ा सौदा फाइनल न करें।


वृश्चिक राशि


टीम वर्क से आज आपको बड़ी सफलता मिलेगी। नए व्यावसायिक संबंध स्थापित होंगे, जो भविष्य में लाभ देंगे। आमदनी अच्छी रहेगी। पुराने कर्ज को चुकाने में आज सफलता मिल सकती है।
आज क्या करें: हनुमान चालीसा का पाठ करें और बूंदी का प्रसाद बांटें।
आज क्या न करें: शाम के समय घर में अंधेरा न रखें।


धनु राशि


नौकरी में विरोधियों पर आप भारी पड़ेंगे। व्यापार में कड़ी मेहनत के बाद ही सकारात्मक परिणाम मिलेंगे। पैतृक संपत्ति से लाभ होने के योग हैं। वित्तीय प्रबंधन पर ध्यान देने की जरूरत है।
आज क्या करें: मंदिर में कपूर जलाएं और गुरुजनों का आशीर्वाद लें।
आज क्या न करें: आज के दिन किसी से कर्ज या लोन न लें।

 

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मकर राशि


विद्यार्थियों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए दिन बेहतरीन है। कार्यक्षेत्र में आपकी बुद्धिमानी की तारीफ होगी। आज धन लाभ के सुंदर योग बने हुए हैं। लॉटरी या शेयर बाजार से लाभ हो सकता है। प्रेम जीवन में नया मोड़ आएगा।
आज क्या करें: उगते सूर्य को अर्घ्य दें और गायत्री मंत्र का जप करें।
आज क्या न करें: अपनी योजनाओं को बीच में अधूरा न छोड़ें।


कुंभ राशि


नौकरीपेशा लोगों को आज काम पर अधिक ध्यान देना होगा। प्रॉपर्टी के बिजनेस से जुड़े लोगों को लाभ हो सकता है। सुख-सुविधाओं की चीजों पर धन खर्च होगा। बजट का संतुलन न बिगड़ने दें। माता के स्वास्थ्य की चिंता रह सकती है।
आज क्या करें: शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करें।
आज क्या न करें: किसी के बहकावे में आकर अपनी नौकरी से समझौता न करें।


मीन राशि


आपके साहस और पराक्रम में वृद्धि होगी। छोटे भाई-बहनों और सहकर्मियों के सहयोग से व्यापार में बड़ी सफलता मिलेगी। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। छोटी दूरी की यात्राओं से धन लाभ के मार्ग खुलेंगे।
आज क्या करें: विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें या सुनें।
आज क्या न करें: आलस को अपने ऊपर हावी न होने दें।

 

नोट: यह राशिफल ज्योतिषीय मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।

अमेरिका और ईरान के बीच भीषण बमबारी, 5 देशों पर हमला; 140 स्थानों पर तबाही


अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ चुका है। एक हफ्ते में अमेरिका ने ईरान पर हमलों की तीसरी लहर शुरू कर दी है। जवाब में ईरान ने ओमान, कुवैत और बहरीन पर हमला किया। आईआरजीसी ने अगले आदेश तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने का ऐलान किया है। कुछ जगहों ने ईरान के बजाय ओमान तट के करीब से गुजर रहे हैं। ईरान ने स्पष्ट कहा कि मार्ग बदलना स्वीकार्य नहीं है। उधर, अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सोशल मीडिया पर धमकी दी कि ईरान ने गलत विकल्प चुना। अब उसे इसकी कीमत चुकानी होगी।  

 

यूएस सेंट्रल कमांड ने कहा कि उसकी सेनाओं ने ईरान के खिलाफ तीसरे दौर के हमले शुरू कर दिए हैं। अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य से स्वतंत्र रूप से गुजरने वाले नाविकों और वाणिज्यिक जहाजों पर हमला करने की ईरान की क्षमता को लगातार कमजोर कर उसे भारी कीमत चुकाने पर मजबूर कर रहा है।

 

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होर्मुज पर जहाजों पर हमले के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पहुंच चुका है। ओमान तट के पास कंटेनर पर अटैक के बाद अमेरिका ने ईरान के बंदर अब्बास, सिरिक और चाबहार और केशम द्वीप पर हमले किए। जवाब में ईरान ने ओमान, कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। 

 

ओमान: ईरान ने बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, कतर और ओमान पर हमले की जिम्मेदारी ली है। ओमान के दुक्म बंदरगाह पर ईरान ने रसद सहायता केंद्र और ईंधन भरने वाले प्लेटफार्मों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया। ईरान का दावा है कि हमले में यह केंद्र नष्ट हो चुके हैं। 

 

कतर: ईरान ने अल उदैद एयरबेस पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया। कतर के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि ईरान की तरफ से आने वाली मिसाइलों को रोक दिया गया। वहीं कतर के गृह मंत्रालय के मुताबिक एक बच्चे समेत तीन लोग घायल हैं। उधर, ईरान का दावा है कि उसके हमले में कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और लड़ाकू विमान का एक रखरखाव केंद्र तबाह हो गया।

 

जॉर्डन: ईरान ने जॉर्डन के प्रिंस हसन एयरबेस पर भी हमला किया। ईरान का कहना है कि उसके बैलेस्टिक मिसाइल हमले में एमक्यू-9 ड्रोन रखने वाले हैंकर को नुकसान पहुंचा है। एक कमांड एंड कंट्रोल सेंटर भी तबाह हुआ है। 

 

बहरीन: ईरान के हमले के बीच बहरीन में सायरन बजने की आवाज सुनी गई। ईरान के मुताबिक उसने बहरीन में अमेरिका के रडार साइट और संचार प्रणाली को निशाना बनाया है। 

 

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कुवैत: अमेरिका के सहयोगी कुवैत पर ईरान ने ड्रोन से हमला किया। यहां गोला-बारूद डिपो, रडार साइट और पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाकर हमलों को अंजाम दिया गया।

अमेरिका ने कितने स्थानों पर की बमबारी?

अमेरिका सेना ने अपनी तीसरी लहर में ईरान के भीतर 140 स्थानों पर भीषण बमबारी की। पहले चरण में 80 और दूसरे में 90 स्थानों पर बमबारी की गई थी। यूएस सेंट्रल कमांड ने बताया कि ताजा हमलों में ईरानी मिसाइल और ड्रोन साइट, नौसैनिक क्षमताएं, गोला-बारूद भंडारण सुविधाएं, संचार नेटवर्क और तटीय निगरानी स्थल को नष्ट किया गया है। अमेरिकी सेना के मुताबिक एक हफ्ते में 300 से अधिक लक्ष्यों पर हमलों को अंजाम दिया गया है।

वंदे मातरम और जन गण मन में ‘महान’ कौन, क्यों मचा है ऐसा शोर?


केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्रीय मंत्रालयों को एक बार फिर सख्त निर्देश दिया है कि सरकारी कार्यक्रमों में जब भी राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत दोनों बजाए या गाए जाएं तो पहले ‘वंदे मातरम’ बजाना या गाना होगा, उसके बाद ‘जन गण मन’ गाया या बजाया जाएगा। गृह मंत्रालय ने 9 जुलाई को सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और केंद्रीय मंत्रालयों के सचिवों को पत्र लिखकर कहा कि इस नियम का सख्ती से पालन किया जाए। 

केंद्र सरकार का निर्देश है कि ‘वंदे मातरम’ और ‘जन गण मन’ को सही शब्दों, सही उच्चारण और सही लय में ही गाया या बजाया जाए। फरवरी महीने में भी सरकार ने आदेश दिया था कि वंदे मातरम के सभी छह छंद पूरे गाए जाएं, जो करीब 3 मिनट 10 सेकंड का होता है। अब इस नियम को दोबारा याद दिलाया गया है।

‘वंदे मातरम’ की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। यह उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ का हिस्सा है। यह गीत, भारत माता की आराधना है। स्वतंत्रता आंदोलन के समय कांग्रेस ने इसके पहले दो छंदों को अपनाया था। बाद में इसे राष्ट्रगीत का दर्जा दिया गया। ‘जन गण मन’ की रचना रवींद्रनाथ टैगोर ने की थी।

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वंदे मातरम पर क्या कानून लाने जा रही है सरकार?

सरकार जल्द ही संसद के मानसून सत्र में एक बिल लाने जा रही है, जिसमें वंदे मातरम का अपमान करने या इसे गाने में बाधा डालने को दंडनीय अपराध बनाया जाएगा।  राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 की धारा 3 के तहत राष्ट्रगान, राष्ट्रध्वज और संविधान का अपमान करने पर तीन साल तक की सजा हो सकती है। सरकार चाहती है कि सभी संस्थाएं और संगठन इन निर्देशों का पूरी तरह पालन करें।

वंदे मातरम या जन गण मन महान कौन?

संवैधानिक मामलों की जानकार और सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता रुपाली पंवार बताती हैं, ‘वंदे मातरम और जन गण मन दोनों ही महान हैं, लेकिन अलग-अलग भूमिकाओं में। ये बहस राजनीतिक और भावनात्मक है, न कि संवैधानिक। जन गण मन पर किसी वर्ग को कोई आपत्ति नहीं है, वहीं वंदे मातरम को आलोचक सेक्युलर विचारधारा के खिलाफ मानते हैं। इसके सिर्फ दो छंद राष्ट्रगीत के तौर पर स्वीकृत हैं लेकिन जन गण मन में किसी खास धर्म या देवी का सीधा जिक्र नहीं है।’

कितनी पुरानी ये बहस है?

दीवान लॉ कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर निखिल गुप्ता बताते हैं, ’24 जनवरी 1950 को संविधान सभा में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने जन गण मन को राष्ट्रगान और वंदे मातरम को राष्ट्रगीत घोषित करते हुए कहा था कि दोनों को समान सम्मान मिलेगा। अब सरकार कह रही है कि यह मूल भावना थी, जिसे अब कानूनी रूप दिया गया है लेकिन सेक्युलर वर्ग को वंदे मातरम पर आपत्ति है। इस्लाम में ईश्वर के अतिरिक्त कोई पूजा के योग्य नहीं है, इसलिए ज्यादातर मुसलमानों को इस पर ऐतराज है।’

आलोचना क्या है?

असदुद्दीन ओवैसी और अबू आजमी जैसे मुस्लिम नेताओं का साफ कहना है कि वे वंदे मातरम का सम्मान करते हैं लेकिन वंदे मातरम नहीं कहेंगे। उनका धर्म, उन्हें ईश्वर के अलावा किसी की पूजा से रोकता है। यह उनका धार्मिक अधिकार है कि वे वंदे मातरम न कहें। असदुद्दीन ओवैसी तो यहां तक कह चुके हैं, ‘अगर आप मुझे किसी और की पूजा करने के लिए मजबूर करते हैं, तो मेरी धार्मिक आजादी कहां रही?’

 

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि जन-गण-मन को संविधान के तहत विशेष दर्जा प्राप्त है, जबकि वंदे मातरम की ऐतिहासिक अहमियत तो है पर दोनों को समान कानूनी स्तर पर रखना उचित नहीं होगा। 

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सरकार की सोच क्या है?

कानूनी और संवैधानिक रूप से आज भी जन गण मन ही भारत का राष्ट्रगान है और वंदे मातरम राष्ट्रगीत है। सरकार का दावा है कि नए नियम बस दोनों को बराबर सम्मान देने के लिए लाए जा रहे हैं। यह किसी को महान घोषित करने का मामला नहीं है। 

क्या कह रहा है पक्ष?

नेशनलिस्ट काग्रेंस पार्टी (शरद पवार) के राष्ट्रीय प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी कहते हैं, ‘मैंने पहले भी कई इंटरव्यू में कहा है, मुसलमान ‘वंदे मातरम’ नहीं गा सकते क्योंकि उनकी मान्यता के अनुसार, वे केवल एक ईश्वर की पूजा करते हैं और उनमें विश्वास रखते हैं। इसलिए, वे ईश्वर के अलावा किसी और के सामने या किसी और चीज के सामने अपना सिर नहीं झुका सकते।’

कुछ ऐसा ही तर्क कांग्रेस सांसद जेपी माथर ने कहा, ‘यह ठीक है, और निश्चित रूप से हम सभी को वंदे मातरम और राष्ट्रगान का सम्मान करना चाहिए। मैंने वह नोटिफिकेशन या निर्देश नहीं देखा है। जिस तरह से यह सरकार काम करती है, वह हमेशा इसमें कोई न कोई राजनीतिक एजेंडा शामिल करने या लोगों पर किसी तरह का दबाव डालने की कोशिश करती है।’

क्या कहते हैं सत्ता पक्ष के लोग?

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा, ‘वंदे मातरम भारत की आत्मा की आवाज है। देश की आजादी की लड़ाई वंदे मातरम के नारे के साथ लड़ी गई थी। इसलिए, वंदे मातरम गाना या बोलना हर भारतीय के लिए गर्व की बात है और हर नागरिक को ऐसा करना चाहिए।’
 
बीजेपी सांसद शशांक मणि ने कहा, ‘वंदे मातरम को कांग्रेस और पूर्ववर्ती सरकारों ने भुला दिया था। उन्होंने सिर्फ पहले दो छंद रखे थे और हमने देखा, पार्लियामेंट में जो डिबेट हुई तो उसमें ये निकल कर आया कि सभी छंद बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय जी ने 150 साल पहले लिखे थे और इसके उच्चारण से मां भारती का जयगान होता है। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को आगे बढ़ाया जा सकता है। इसी कारणवश हमारी सरकार ने ये लागू किया है कि वंदे मातरम का पूर्ण गान होना चाहिए और पहले होना चाहिए।’

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वंदे मातरम vs जन गण मन का शोर क्यों?

वंदे मातरम मूल रूप से 6 छंदों का है। पहली दो पंक्तियां मातृभूमि की स्तुति हैं। बाद की पंक्तियों में दुर्गा और हिंदू देवियों का रूपक लिया गया है। अल्पसंख्यकों को इस पर ऐतराज है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान वंदे मातरम को खूब गाया गया। क्रांतिकारियों ने इसे सुर बना लिया। यह रचना 7 नवंबर 1875 को लिखी गई थी। गीत के कुछ छंदों में देवी-पूजा और युद्धाभिलाषा जैसी पंक्तियां हैं। 1930 से 40 के दौर में रवीन्द्रनाथ टैगोर और सुभाष चंद्र बोस के बीच भी इस गीत को लेकर बहस हुई।

1937 तक जवाहर लाल नेहरू,  महात्मा गांधी और रवींद्र नाथ टैगोर की सलाह पर दो छंदों को स्वीकार किया। तब कुछ मुस्लिम नेताओं ने दुर्गा और लक्ष्मी के रूपक वाले बाद के छंदों और उपन्यास के संदर्भों पर आपत्ति जताई। यह पूरा गीत, राष्ट्रगान नहीं बन सका। एक पक्ष आज कहता है कि वंदे मातरम स्वाधीनता संग्राम का असली गान है, इसे पूरा गाने का अधिकार और अनिवार्यता से जुड़ा कानून बनना चाहिए। दूसरे पक्ष का तर्क है कि धर्मनिरपेक्ष भारत में यह हिंदू धर्म की ओर झुका है, इसे संवैधानिक मजबूरी नहीं बनानी चाहिएष जन गण मन इससे बेहतर विकल्प है।

बारिश और उमस के मौसम में कैसे भगाएं मच्छर? देसी नुस्खे हैं कारगर


गर्मी और बरसात के मौसम में मच्छरों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो जाती है, जिससे दिन-रात खुजली, जलन के साथ-साथ डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इस मौसम में मच्छरों के प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए घर के आसपास साफ-सफाई बनाए रखना और कुछ आसान घरेलू उपाय अपनाना बेहद प्रभावी साबित हो सकता है।

बाजार में उपलब्ध मच्छर मार कॉइल, स्प्रे और अन्य रासायनिक उत्पादों का अत्यधिक उपयोग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है, इसलिए आजकल लोग इनके विकल्प के रूप में पारंपरिक घरेलू उपायों को प्राथमिकता दे रहे हैं। स्वच्छता और प्राकृतिक नुस्खों के सहारे मच्छरों की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

 

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1. नीम की पत्तियां जलाएं

शाम के समय सूखी नीम की पत्तियां या नीम के तेल का इस्तेमाल करने से निकलने वाली गंध मच्छरों को दूर रखने में मदद कर सकती है। कई घरों में यह तरीका आज भी अपनाया जाता है।

2. कपूर का इस्तेमाल करें

एक कटोरी में कपूर जलाकर 15-20 मिनट के लिए कमरे में रखें। इसकी तेज गंध से मच्छर दूर रह सकते हैं। ध्यान रखें कि कपूर जलाते समय कमरे में सावधानी बरतें।

3. नींबू और लौंग का नुस्खा

एक नींबू को बीच से काट लें और उसमें 8-10 लौंग लगा दें। इसे कमरे या खिड़की के पास रखने से इसकी खुशबू मच्छरों को दूर रखने में मदद कर सकती है।

 

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4. तुलसी का पौधा लगाएं

तुलसी का पौधा सिर्फ औषधीय गुणों के लिए ही नहीं बल्कि मच्छरों को दूर रखने के लिए भी जाना जाता है। इसे घर की बालकनी, आंगन या खिड़की के पास लगाया जा सकता है।

5. सरसों के तेल और अजवाइन का उपाय

एक छोटी कटोरी में सरसों का तेल लें और उसमें थोड़ी सी अजवाइन डाल दें। इसे कमरे के किसी कोने में रख दें। इसकी गंध मच्छरों को दूर रखने में मदद कर सकती है।

6. लहसुन का स्प्रे बनाएं

लहसुन की कुछ कलियों को पानी में उबालकर ठंडा कर लें। अब इस पानी को स्प्रे बोतल में भरकर घर के कोनों, खिड़कियों और दरवाजों के आसपास छिड़क सकते हैं। लहसुन की तेज गंध मच्छरों को दूर रखने में मदद कर सकती है।

7. पुदीना और लेमनग्रास का इस्तेमाल करें

पुदीना और लेमनग्रास की तेज खुशबू मच्छरों को पसंद नहीं होती। इनके पौधे घर में लगाने या इनके एसेंशियल ऑयल की कुछ बूंदे मच्छर भगाने वाली मशीन में डालने से फायदा मिल सकता है।

 

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8. नारियल तेल और नीम का तेल

एक चम्मच नारियल तेल में कुछ बूंदे नीम का तेल मिलाकर हाथ और पैरों पर लगाया जा सकता है। इससे बाहर जाने पर भी आपके पास से मच्छर दूर रहेंगे।

9. धूप या लोबान जलाएं

गांव के इलाकों में शाम के समय लोबान या देसी धूप जलाने की परंपरा रही है। इसका धुआं मच्छरों को दूर रखने में मदद कर सकता है। हालांकि आज भी कई घर ऐसे हैं जो इस पुरानी परंपरा को अपनाना पसंद करते हैं।

10. घर के आसपास सफाई रखें

कोई भी देसी नुस्खा तभी असरदार होगा जब घर के आसपास पानी जमा न हो। कूलर, गमले, बाल्टी और पुराने टायर में रुका हुआ पानी समय-समय पर खाली करते रहें क्योंकि यहीं मच्छर सबसे ज्यादा पनपते हैं।

‘द डिवाइन कॉमेडी’ इटली की इस कविता में गरुड़ पुराण जैसी लिखी गई है नरक यात्रा


इंसान अक्सर अपनी आंखें बंद करके मृत्यु के बारे में सोचता है, जहां वह नरक और स्वर्ग की कल्पना करता है। ऐसी कल्पना इटली के कवि दांते की थी, जिन्होंने नरक की कल्पना कर ‘द डिवाइन कॉमेडी’ नाम की कविता लिखी थी। सनातन धर्मग्रंथ गरुड़ पुराण में नरक के बारे में बताया गया है, जिसमें साफ तौर पर बताया गया है कि व्यक्ति को उसके कर्मों के आधार पर नरक में सजा मिलती है। इसी तरह दांते ने डिवाइन कॉमेडी कविता के जरिए नरक यात्रा बताई है।

 

दांते ने ‘द डिवाइन कॉमेडी’ 13वीं शताब्दी में लिखी थी। यह इटली में दुकानों पर बेची जाती थी। इसमें लिखी गई नरक की यात्रा को पढ़कर लोग प्रभावित होते थे। हिन्दू धर्मग्रंथ गरुड़ पुराण में व्यक्ति की मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा बताई गई है, जिसमें नरक और नरक में मिलने वाली यातनाओं के बारे में बताया गया है। इसी तरह डिवाइन कॉमेडी कविता में नरक और नरक में लोगों को मिलने वाली सजा के बारे में रोचक तरीके से लिखा गया है।

 

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डिवाइन कॉमेडी में नरक चक्र

 

डिवाइन कॉमेडी में 9 प्रकार के नरक बताए गए हैं। इन 9 प्रकार के नरकों में अलग-अलग कर्मों की सजा दी जाती है। जहां व्यक्ति की आत्मा को झूठ बोलने से लेकर लालच जैसे पाप करने की सजा दी जाती है। अब सवाल उठता है कि नौवें नरक में किस प्रकार की सजा दी जाती है।

 

1. लीम्बो – दांते ने पहले नरक का नाम लीम्बो रखा है, जो उन गैर-ईसाई लोगों के लिए है जो ईसा मसीह से पहले जन्मे थे। इस नरक में रहने वाली आत्माओं को सजा नहीं दी जाती है, सिर्फ यहां रहने वाले लोगों को स्वर्ग से दूर रखा जाता है।

 

2. वासना-इस नरक में उन लोगों को सजा दी जाती है, जो अपनी पूरी जिंदगी वासना और शारीरिक सुखों के लालच में रहते हैं। इस नरक में लगातार तेज हवा बहती है। तेज हवा लोगों को थप्पड़ के समान लगती है। दांते के मुताबिक यह सजा इसलिए दी जाती है क्योंकि वासना में लिप्त व्यक्ति का मन एक जगह नहीं ठहरता है।

 

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3. पेटूपन – इस चक्र में उन लोगों की आत्मा रहती है, जिन्होंने अपने जीवन में खाने को लेकर लालच किया था। यहां एक राक्षस लोगों को बर्फीली जमीन पर लिटाता है, साथ ही बर्फीली बारिश कराकर तड़पाता है। ज्यादा खाने वाले लोगों की आत्मा को इसलिए सजा दी जाती है क्योंकि वे हमेशा दूसरों की परवाह किए बिना खाना खाते थे।

 

4. लालच – नरक के इस चक्र में लोगों की आत्माओं को दो अलग-अलग हिस्सों में सजा दी जाती है। पहले हिस्से में उन लोगों को सजा दी जाती है जो अपने जीवन में नशे की लत में डूबे थे। वहीं दूसरे हिस्से में उन लोगों को रखा जाता है जो धन-संपत्ति के लालच में रहते थे।

 

5. अहंकार – इस नरक में वे लोग रहते हैं, जिन्होंने अपने जीवन में दूसरों पर गुस्सा किया था।

 

6. अधर्मी – डिवाइन कॉमेडी कविता में नरक के छठे चक्र को लेकर बताया गया है कि इस चक्र में उन लोगों की आत्माएं सजा काटती हैं, जिन्होंने अपने पूरे जीवन ईश्वर पर भरोसा नहीं किया।

7. हिंसा – नरक के सातवें हिस्से को तीन भागों में बांटा गया है। जहां एक तरफ हत्यारे लोगों की आत्माएं रखी गई हैं, वहीं दूसरी तरफ हिंसा करने वाले लोगों की आत्माओं को सजा दी जाती है, जबकि तीसरी तरफ आत्महत्या करने वाले लोगों को सजा दी जाती है।

 

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8. धोखा – नरक के आठवें चक्र में उन लोगों की आत्माओं को रखा गया है, जिन्होंने अपने जीवन में दूसरों को धोखा दिया।

 

9. विश्वासघात – इस नरक में लूसिफर नाम का शैतान उन लोगों की आत्माओं को सजा देता है, जिन्होंने अपने परिवार, लव पार्टनर और दोस्तों को धोखा दिया।

 

गरुड़ पुराण से समानता

दांते की नरक की परिकल्पना में 9 चक्र हैं, जहां हर चक्र एक पाप के लिए है। व्यक्ति की आत्मा को सजा मिलती है। उसी प्रकार गरुड़ पुराण में भी अलग-अलग नरकों जैसे रौरव, महारौरव और कुम्भीपाक नरक का जिक्र किया गया है, जहां हर नरक में अलग-अलग पापों की अलग-अलग सजा दी जाती है।

 

कर्म के आधार पर दंड मिलता है। जैसा दांते में वासना के लिए सजा का जिक्र किया गया है, वैसा ही गरुड़ पुराण में दंड के बारे में बताया गया है। जहां चोरी करने वाले को कांटों पर घसीटा जाना जैसा दंड बताए गए हैं। डिवाइन कॉमेडी में लोगों के कर्मों का लेखा-जोखा रखने वाले एक व्यक्ति का जिक्र किया गया है। वैसा ही गरुड़ पुराण में यमराज न्यायाधीश हैं और चित्रगुप्त कर्मों का लेखा-जोखा रखते हैं।

 

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डिवाइन कॉमेडी और गरुड़ पुराण दोनों में मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा, पाप-पुण्य और कर्मों के अनुसार मिलने वाले दंड का उल्लेख मिलता है। इसी वजह से दोनों की अक्सर तुलना की जाती है। हालांकि, दोनों ग्रंथ अलग-अलग मान्यताओं पर आधारित हैं। गरुड़ पुराण में नरक का दंड अस्थायी माना गया है, जबकि डिवाइन कॉमेडी में नरक को शाश्वत दंड के रूप में दिखाया गया है।

क्या है हाका डांस? जिससे न्यूजीलैंड में PM मोदी का हुआ स्वागत, इतिहास जान लीजिए


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 से 11 जुलाई तक 2026 तक तीन देशों (इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड) के दौरे पर थे। आज PM मोदी अपनी तीन देशों की यात्रा के अंतिम चरण में न्यूजीलैंड के ऑकलैंड पहुंचे थे। गवर्नमेंट हाउस पहुंचने पर वहां की पारंपरिक माओरी जनजाति के ‘हाका’ नृत्य के साथ PM मोदी का भव्य स्वागत किया गया। PM मोदी को गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। 

 

हाका नृत्य के बारे में बात करें तो यह न्यूज़ीलैंड की मूल निवासी माओरी जनजाति का एक पारंपरिक और बेहद जोशीला नृत्य है। यह कोई सामान्य नृत्य नहीं है, बल्कि इसमें पैर थपथपाना, सीने पर हाथ मारना, तेजी से सांस छोड़ना और जोरदार हुंकार भरना शामिल है।

 

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आपको याद होगा कि पिछले दिनों एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था। इसमें न्यूजीलैंड की संसद में युवा महिला सांसद हाना-रावहिती करैरिकी माईपी-क्लार्क सरकार के एक बिल के विरोध में पारंपरिक ‘हाका’ नृत्य किया था। सोशल मीडिया पर उनकी यह क्लिप आज भी खूब वायरल होती है।

क्या है हाका नृत्य? 

हाका न्यूजीलैंड के स्वदेशी माओरी (Maori) समुदाय का पारंपरिक नृत्य है, जिसे ‘वॉर डांस’ भी कहा जाता है। दरअसल, यह नृत्य  ऐतिहासिक रूप से योद्धाओं द्वारा युद्ध के मैदान में जाने से पहले अपने दुश्मनों को डराने और अपनी ताकत के प्रदर्शन के तौर पर किया जाता था। लेकिन इसका महत्व इससे कहीं ज्यादा है। मौजूदा समय में हाका नृत्य खास मेहमानों के स्वागत, शादी, अंतिम संस्कार, जीत के जश्न, राष्ट्रीय समारोह और अहम अवसरों पर किया जाने लगा। 

 

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हाका नृत्य में होता क्या है?

हाका नृत्य के दौरान एक साथ ऊंची आवाज में पारंपरिक शब्द बोले जाते हैं। कलाकार जोरदार कदमताल करते हुए छाती और जांघों पर हाथ मारते हैं। आंखें बड़ी करते हैं और जीभ बाहर निकालते हैं। यह नृत्य ताकत, साहस, एकजुटता और सम्मान का संदेश देता है। इसका उद्देश्य केवल सामने वाले को चुनौती देना ही नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति और सामूहिक भावना को भी दर्शाना होता है। न्यूजीलैंड की अंतरराष्ट्रीय रग्बी टीम (ऑल ब्लैक्स) अंतरराष्ट्रीय मैचों से पहले हाका नृत्य करती है। यहां से इसे दुनियाभर में खूब प्रसिद्धि मिली।  

बताया जाता है कि माओरी जनजाति न्यूजीलैंड के मूल निवासी हैं, जो 13वीं या 14वीं शताब्दी के आसपास प्रशांत महासागर के द्वीपों से नावों के जरिये न्यूजीलैंड पहुंचे थे। माओरी जनजाति अपनी समृद्ध संस्कृति, अपनी भाषा (ते रेओ माओरी), और युद्ध के पारंपरिक नृत्य ‘हाका’ के लिए दुनिया भर में जानी जाती है। हाका नृत्य के अलावा माओरी संस्कृति में टैटू का भी बहुत महत्व है। वे अपने चेहरे और शरीर पर खास टैटू भी बनवाते हैं। यह उनके परिवार और सामाजिक स्थिति को दर्शाता है।  

माओरी संस्कृति के सबसे खास और पवित्र अनुष्ठान ‘पोविरी’ से आज PM मोदी का स्वागत किया गया। माओरी स्वागत समारोह ‘पोविरी’ चार चरणों में पूरा होता है। पहला- करंगा, जिसमें माओरी महिलाएं विशेष स्वर में मेहमानों का स्वागत करती हैं। दूसरा चरण- वाइकेरो, जिसमें एक योद्धा मेहमान के सामने प्रतीकात्मक वस्तु रखता है। उसे उठाना शांति और सद्भाव का संकेत माना जाता है। तीसरा- हाका, जिसमें पुरुष और महिलाएं ऊर्जा से भरपूर पारंपरिक हाका नृत्य प्रस्तुत करते हैं। आखिरी चरण- हौंगी का होता है। इसमें मेजबान और मेहमान नाक व माथा मिलाते हैं। माओरी संस्कृति में इसे आपसी सम्मान और आत्मिक जुड़ाव का प्रतीक माना जाता है। 

अगले 48 घंटे में तेज बारिश, IMD का राज्यों के लिए अलर्ट, जानिए अपने शहर का हाल


देश के कई राज्यों में उमस बढ़ गई है। अब इन राज्यों में गरज-तड़क के साथ तेज बारिश होने की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अनुमान जाया है कि मध्य उत्तर प्रदेश के उत्तरी हिस्से में बने कम दबाव वाले क्षेत्र के असर की वजह से हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में कई जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। 

बीते 24 घंटों में उत्तराखंड, हिमाचल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बहुत ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। IMD के मुताबिक अगले 6-7 दिनों में मध्य भारत और दक्षिणी भारत में बारिश की गतिविधियां कम रहने वाली हैं। उत्तर-पश्चिमी राज्यों में अगले कई दिनों तक बारिश जारी रहने की उम्मीद है। 

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पिछले 24 घंटों में कहां बारिश हुई है?

उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 21 सेंटीमीटर या उससे ज्यादा बारिश दर्ज की गई। पूर्वी मध्य प्रदेश, पूर्वी उत्तर प्रदेश, मेघालय, बिहार और हरियाणा में 12-20 सेंटीमीटर तक बहुत भारी बारिश हुई। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, पूर्वी राजस्थान और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में गुरुवार को 7-11 सेंटीमीटर तक भारी बारिश दर्ज की गई।

कैसे रहेगा आज का मौसम?

10 से 12 जुलाई तक जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और 10 से 16 जुलाई तक हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आज और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 10-13 जुलाई तक भारी बारिश की संभावना है। हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, हिमाचल, उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कहीं-कहीं बहुत बारिश भी हो सकती है।

मध्य भारत में कैसा रहेगा मौसम?

पश्चिमी मध्य प्रदेश में 11 से 16 जुलाई तक, पूर्वी मध्य प्रदेश में 11 से 14 जुलाई और विदर्भ में 11 से 13 जुलाई तक कुछ जगहों पर बारिश रहेगी। पूर्वी मध्य प्रदेश 15-16 जुलाई को फिर से अच्छी बारिश हो सकती है। इन इलाकों में आंधी-तूफान, बिजली गिरने और 40-60 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज हवाएं चलने की भी चेतावनी है।

पूर्वोत्तर में कैसा रहेगा हाल?

अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 10 से 16 जुलाई तक पूरे क्षेत्र में बारिश होने की संभावना है। 10 से 11 जुलाई को इन राज्यों में कहीं-कहीं बहुत भारी बारिश हो सकती है। पश्चिम बंगाल, सिक्किम, बिहार, झारखंड और ओडिशा में भी अगले कई दिनों तक बारिश और आंधी-बिजली की गतिविधियां रहेंगी।

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पश्चिमी और दक्षिणी भारत में कैसा रहेगा मौसम?

कोंकण और गोवा में 10-16 जुलाई तक अच्छी बारिश जारी रहने की उम्मीद है। गुजरात, महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में छिटपुट बारिश होगी। दक्षिण भारत में तटीय कर्नाटक, केरल और तटीय आंध्र प्रदेश में अगले दिनों व्यापक बारिश हो सकती है। तमिलनाडु, तेलंगाना और रायलसीमा में कुछ जगहों पर बारिश के साथ आंधी-तूफान की संभावना है। दिल्ली-NCR का 

मौसम कैसे रहेगा?

दिल्ली में अगले कुछ दिनों तक आसमान में बादल छाए रहेंगे। दिल्ली में 11 से 13 जुलाई तक तापमान थोड़ा बढ़ सकता है, लेकिन बादल और हल्की बारिश जारी रहने की उम्मीद है।

कहां ज्यादा है खतरा?

IMD ने अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों में मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी है। 11 से 15 जुलाई तक अरब सागर के कई क्षेत्रों और 11-15 जुलाई तक बंगाल की खाड़ी में खतरनाक स्थिति रह सकती है।