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खाड़ी देशों की जेलों में हजारों भारतीय कैद, क्या हैं इनके अपराध?


सुनहरे भविष्य और बेहतर कमाई की तलाश में खाड़ी देशों का रुख करने वाले हजारों भारतीयों के लिए परदेस की राह आसान साबित नहीं हो रही है। विदेश मंत्रालय द्वारा संसद में पेश किए गए चौंकाने वाले आंकड़ों के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र के विभिन्न देशों में इस समय कुल 5,548 भारतीय सलाखों के पीछे हैं। इनमें विचाराधीन कैदी और सजा काट रहे अपराधी दोनों शामिल हैं। यह स्थिति उन युवाओं के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो बिना पूरी जानकारी और कानूनी समझ के विदेश चले जाते हैं।

 

दरअसल, यह आंकड़े तब सामने आए जब कैराना लोकसभा क्षेत्र से सांसद इकरा चौधरी ने विदेश मंत्रालय से उन युवाओं के बारे में सवाल पूछे जो उत्तर प्रदेश से खाड़ी देशों में काम करने गए थे। विशेष रूप से उन्होंने उत्तर प्रदेश के उन युवाओं के संबंध में सवाल उठाए जो इस समय खाड़ी देशों की जेलों में फंसे हुए हैं।

 

इन सवालों का जवाब 13 मार्च को दिया गया। हालांकि, अपने जवाब में मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश के कैदियों के बारे में विशेष रूप से जानकारी देने के बजाय भारतीय कैदियों के आंकड़े पेश किए।

 

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सऊदी अरब में सबसे ज्यादा भारतीय कैदी

सरकारी आंकड़ों के अनुसार खाड़ी देशों में भारतीय कैदियों की सबसे ज्यादा संख्या सऊदी अरब में दर्ज की गई है। यहां 2,478 भारतीय जेलों में बंद हैं। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात में 1,419, कतर में 870, कुवैत में 379, बहरीन में 303 और ओमान में 99 भारतीय कैदी दर्ज किए गए हैं। ये आंकड़े 31 दिसंबर 2025 तक के आधिकारिक रिकॉर्ड पर आधारित हैं।

क्या हैं इनके अपराध?

दस्तावेज में यह नहीं बताया गया कि ये कैदी किस-किस अपराध के कारण जेल में हैं। इसमें सिर्फ यह कहा गया है कि ये विचारणाधीन और दोषसिद्ध दोनों तरह के कैदी हैं। कुछ मामलों में भर्ती एजेंटों की धोखाधड़ी और मादक पदार्थ से जुड़े आरोप का जिक्र उदाहरण के तौर पर किया गया है। हालांकि, ऐसे कई अपराध हैं जिनके बारे में इन भारतीय कैदियों के संदर्भ में अक्सर सुनने को मिलता है।

 

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खाड़ी देशों में भारतीयों के जेल जाने के पीछे कई कारण सामने आते हैं। इनमें सबसे आम वजह वीजा और रेजिडेंसी नियमों का उल्लंघन है। कई लोग टूरिस्ट वीजा पर जाकर वहीं नौकरी तलाशने लगते हैं या वीजा खत्म होने के बाद भी देश में रह जाते हैं, जो वहां गंभीर अपराध माना जाता है।

 

इसके अलावा ड्रग्स और शराब से जुड़े अपराध भी बड़ी वजह हैं। खासकर सऊदी अरब में शराब का सेवन, निर्माण या बिक्री सख्त रूप से प्रतिबंधित है और नशीले पदार्थों के मामलों में बेहद कड़ी सजा का प्रावधान है।

 

इसके अलावा, कई लोग ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने, बिना परमिट के सामान बेचने या कर्ज न चुका पाने जैसे अपराधों के कारण जेल पहुंच जाते हैं। वहीं दूसरी ओर, कई भारतीय जो फर्जी एजेंटों की चाल में फंसकर विदेश जाते हैं, बाद में वे कानूनी पचड़ों में उलझ जाते हैं और अंततः उन्हें जेल की सजा काटनी पड़ती है।

रोजमेरी या टी ट्री ऑयल, बालों के लिए क्या है ज्यादा फायदेमंद?


हमारे खराब लाइफस्टाइल और खानपान का असर हमारे बालों पर भी दिखता है। इस वजह से बाल रुखे और बेजान नजर आते हैं। बालों को स्वस्थ और फ्रीज फ्री रखने के लिए एसेंशियल ऑयल की मदद लें सकते हैं। एसेंशियल ऑयल से बालों को पोषण मिलता है। साथ ही ग्रोथ को बढ़ाने का काम करता है। आपने अक्सर सुना होगा कि बालों के लिए रोजमेरी ऑयल और टी ट्री ऑयल अच्छा होता है। ये दोनों तेल बालों की ग्रोथ और डैंड्रफ से छुटकारा पाने में मदद करते हैं। आइए जानते हैं इन दोनों तेलों में से कौन सा बालों के लिए ज्यादा फायदेमंद होता है।

 

बालों की ग्रोथ ब्लड फलो, हार्मोन, कैसा खानपान है और हमारे जीन्स कैसे हैं? इन सभी बातों पर निर्भर करता है। रोजमेरी या टी ट्री ऑयल आपके बालों को रातोंरात नहीं उगाता है। ये दोनों चीजें आपके स्कैल्प से जुड़ी समस्याओं को ठीक करती हैं ताकि बालों की ग्रोथ अच्छी हो सकें।

 

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रोजमेरी का तेल

रोजमेरी का तेल बालों के लिए बहुत अच्छा होता है। यह बालों के अच्छा होता है। यह तेल आपके स्कैल्प में ब्लड फ्लो को बढ़ाने का काम करता है ताकि ऑक्सीजन और पोषण जड़ों तक पहुंचता है। पतले बाल और बाल झड़ने की समस्या को कम करने में मदद करता है। कुछ अध्ययनों में कहा गया कि रोजमेरी मिनोक्सिडिल की तरह काम करता है। बालों की ग्रोथ बढ़ती है। बाल झड़ने और टूटने की समस्या को रोकता है। जो लोग पहले से गंजेपन की समस्या से गुजर रहे हैं। उनकी समस्या को ठीक नहीं हो सकती है।

टी ट्री ऑयल

टी ट्री ऑयल बैक्टीरिया और फंगस की समस्या को खत्म करने का काम करता है। यह डैंड्रफ और स्कैल्प में संक्रमण के खतरे को कम करता है। साफ स्कैल्प बालों को बेहतर तरीके से उगने में मदद करता है। इसके अलावा जिनको खुजली की समस्या रहती है उन्हें टी ट्री ऑयल का इस्तेमाल करना चाहिए।

रोजमेरी और टी ट्री में क्या अंतर है?

रोजमेरी ऑयल बालों की ग्रोथ में मदद करता है। वहीं, टी ट्री ऑयल बालों के स्कैल्प को साफ रखता है। दोनों के अपने-अपने काम है।
 
इन तेलों को इस्तेमाल कैसे करना है

 

आपको सीधा इन तेलों को बाल में नहीं लगाना है। आपको सबसे पहले 2 चम्मच नारियल तेल या बादाम का तेल लेना है। उसमें 4 से 5 बूंदें रोजेमरी और 3 से 4 बूंदे टी ट्री ऑयल के डालने है। अपने स्कैल्प में लगाकर मसाज करें। तेल लगाने के बाद एक या दो घंटे को छोड़ दें। इसके बाद शैंपू लगाकर बाल धो लें।

16 फरवरी को बना विशेष योग, आपकी राशि के लिए क्या लेकर आया सोमवार, पढ़ें राशिफल


ज्योतिषीय दृष्टि से आज का दिन यानी 16 फरवरी(सोमवार) काफी गहरा और प्रभावशाली है। फाल्गुन मास की चतुर्दशी तिथि के साथ चंद्रमा का मकर राशि में होना यह संकेत देता है कि आज का पूरा दिन अनुशासन, जिम्मेदारी और अपनी इच्छाओं को पूरा करने पर केंद्रित रहेगा। वहीं आज का मूलांक 7 है, जिसका स्वामी केतु को माना जाता है। 

 

केतु का प्रभाव व्यक्ति को गहराई से सोचने के लिए मजबूर करता है। ऐसे में आज उन लोगों को विशेष फायदा मिलेगा जो रिसर्च, योग या किसी भी तरह के मानसिक और आंतरिक विकास के कामों से जुड़े हैं। आइए जानते हैं आपकी राशि के सितारों का आज क्या हाल है- 

 

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जानें किस्मत का हाल

मेष

आज आप ऊर्जा से लबरेज रहेंगे। ऑफिस में नई जिम्मेदारी मिल सकती है। 

क्या करें: बस ध्यान रखें कि कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले घर के बड़ों की सलाह जरूर लें। 
क्या न करें: गुस्सा और जल्दबाजी में निवेश करने से बचें।

वृषभ

पैसों के मामले में आज दिन बढ़िया है। बिजनेस में कुछ अच्छे बदलाव देख सकते हैं। 

क्या करें: पुराने निवेश को एक बार चेक करें, फायदा मिल सकता है। 
क्या न करें: फालतू की बहस और खर्चों से दूरी बनाकर रखें।

मिथुन

अगर आप पढ़ाई या नौकरी के लिए कोशिश कर रहे हैं, तो आज अच्छी खबर मिल सकती है। 
क्या करें: अपनी स्किल्स बढ़ाने पर ध्यान दें। 
क्या न करें: गपशप में समय बर्बाद न करें और सफर के दौरान सतर्क रहें।

कर्क

आज घर-परिवार में खुशियों का माहौल रहेगा। सेहत में भी सुधार दिखेगा। 
क्या करें: खान-पान पर थोड़ा कंट्रोल रखें।
क्या न करें: भावनाओं में बहकर कोई निर्णय न लें।

सिंह

आपकी लीडरशिप क्वालिटी की आज तारीफ होगी। नए प्रोजेक्ट्स शुरू करने के लिए दिन अच्छा है। 
क्या करें: अपनी सेहत का नियमित चेकअप कराते रहें।
क्या न करें: अपने भीतर अहंकार न आने दें।  

कन्या

आज आपकी सोचने-समझने की क्षमता आपको बड़ा फायदा दिलाएगी। नौकरी में प्रमोशन की संभावना है। 
क्या करें: अपनी बचत और रूटीन को सुधारने पर काम करें।
क्या न करें: फिजूल की चिंता न करें। 

तुला

रिश्तों और व्यापार के लिए आज का दिन संतुलन भरा रहेगा। 
क्या करें: पार्टनरशिप में काम करना फायदेमंद होगा। 
क्या न करें: ज्यादा मीठा खाने से बचें और किसी भी काम को टालें नहीं।

वृश्चिक

आज आपको रिसर्च या गुप्त ज्ञान से लाभ मिल सकता है। 
क्या करें: निवेश के लिए समय अच्छा है। 
क्या न करें: मन में शक न पालें और जोखिम भरे कामों या खेलों से खुद को दूर रखें।

धनु

यात्रा के शौकीन लोगों के लिए आज प्रोग्रेस का दिन है। 

क्या करें: आपके सोचे हुए लक्ष्य पूरे होंगे। 

क्या न करें: अति-उत्साह में आकर कोई कानूनी गलती न करें, इसका ध्यान रखें।

 

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मकर

चंद्रमा की उपस्थिति आपकी ही राशि में है, जिससे मेहनत का फल जरूर मिलेगा। करियर में तरक्की के योग हैं।

क्या करें: थकान महसूस हो तो आराम करें। 

क्या न करें: नकारात्मकता को हावी न होने दें।

कुंभ

आज आपके पास नए और अनोखे आइडियाज होंगे। समाज में आपकी पहचान बढ़ेगी। 
क्या करें: सबके साथ मिलकर काम करेंगे तो ज्यादा सफल होंगे।
क्या न करें: लोगों से कटे-कटे न रहें। 

मीन

आज आपकी कल्पना शक्ति आपको सफलता दिलाएगी। मानसिक शांति के लिए थोड़ा समय ध्यान और प्रार्थना में बिताएं। 
क्या करें: पानी के आसपास सावधानी बरतें।
क्या न करें: हकीकत से दूर सपनों की दुनिया में न खोएं। 

डिस्क्लेमर: यह राशिफल सामान्य ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। व्यक्तिगत जानकारी के लिए ज्योतिषि से संपर्क करें।

क्या है नेतन्याहू के ‘सिक्स फिंगर’ का मामला जिससे उनकी मौत का किया जा रहा दावा?


सोशल मीडिया पर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को लेकर काफी चर्चा हो रही है। शनिवार को कई यूजर्स ने उनके 13 मार्च के एक वीडियो पर सवाल उठाए। इस वीडियो में ऐसा लग रहा था कि उनके दाहिने हाथ में छह उंगलियां हैं। लोगों ने कहा कि यह वीडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बनाया गया है।

 

नेतन्याहू ने अपने X अकाउंट पर शुक्रवार को यह वीडियो शेयर किया था। इसमें उन्होंने इजरायल और अमेरिका की ईरान के खिलाफ जंग के बारे में बात की। यह जंग पूरे मिडिल ईस्ट में फैल गई है और अब इसका 15वां दिन चल रहा है। संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी, जब ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत हमलों में हो गई थी।

 

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दाहिने में हाथ में 6 उंगली का दावा

वीडियो में यूजर्स ने दावा किया कि नेतन्याहू की दाहिनी हाथ की उंगलियां छह दिख रही हैं। कई पोस्ट्स पर लाखों व्यूज आए। कैप्शन में लिखा था – ‘क्लासिक AI फिंगर ग्लिच’ या ‘उनके हाथ को ध्यान से देखो’। कुछ यूजर्स, ज्यादातर अनवेरिफाइड अकाउंट्स से, कह रहे थे कि नेतन्याहू की मौत हो चुकी है।

एक यूजर ने हिब्रू में लिखा – ‘हे बिबी, क्या तुम इतने स्पेशल हो कि छह उंगलियां हैं, या तुम बहुत पहले हमसे चले गए हो?’ अमेरिकी कमेंटेटर कैंडेस ओवेंस ने भी सवाल उठाया। उन्होंने लिखा – ‘बिबी कहां हैं? उनका ऑफिस फेक AI वीडियो क्यों जारी और डिलीट कर रहा है? व्हाइट हाउस में इतना पैनिक क्यों है?’

एआई ने दावा बताया गलत

लेकिन X का AI चैटबॉट Grok ने इन दावों को गलत बताया। Grok ने कहा – ‘नहीं, नेतन्याहू के हर हाथ में पांच उंगलियां हैं, जैसे ज्यादातर लोगों के। यह उनका दाहिना हाथ है, जो पोडियम पर पॉइंटिंग जेस्चर में है। लाल सर्कल और एंगल से ऑप्टिकल इल्यूजन बन रहा है जो गलत लग रहा है। यह प्रेस कॉन्फ्रेंस वीडियो का एक स्टिल है।’

 

Grok ने मौत की अफवाहों पर भी कहा – ‘नेतन्याहू जिंदा हैं। ईरानी मीडिया और सोशल पोस्ट्स से मौत की अफवाहें फैलीं, लेकिन Snopes, Times of Israel जैसे सोर्स ने इन्हें फेक बताया है। हमेशा ऑफिशियल वेरिफाइड सोर्स पर भरोसा करें।’

 

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नेतन्याहू के बेटे ने भी किया था ट्वीट

एक पेज जिसका नाम Kremlin था (लेकिन रूसी प्रेसिडेंट ऑफिस से कोई कनेक्शन नहीं), ने कहा कि इजरायली ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट प्रेस कॉन्फ्रेंस से अचानक चले गए और थोड़ी देर बाद लौटे।

 

लोगों का ध्यान नेतन्याहू के बेटे यैर नेतन्याहू के सोशल मीडिया अकाउंट पर भी गया। यैर आमतौर पर X पर बहुत एक्टिव रहते हैं, लेकिन उनकी आखिरी पोस्ट 9 मार्च की थी।

ईरान युद्ध से भारत क्या सीख सकता, सस्ते ड्रोन से निपटने का इलाज क्या है?


दुनिया सैन्य तौर पर ईरान को बहुत एडवांस नहीं मानती थी। मगर 15 दिन के युद्ध ने यह भ्रम तोड़ दिया है। इजरायल से ओमान तक ईरानी मिसाइल और ड्रोन ने न केवल खाड़ी देशों बल्कि अमेरिका को भी परेशान कर रखा है। सऊदी अरब से इराक तक उसके दूतावास और ठिकानों पर ईरान की सेना ड्रोन बरसा रही है। कई एयर डिफेंस सिस्टम तबाह हो चुके हैं। 

 

दुबई, अबूधाबी, मनामा के अलावा कुवैत और कतर में ईरानी ड्रोनों से मची तबाही को सभी ने देखा है। हालत इस कदम तक बिगड़ चुके हैं कि खाड़ी देशों के पास मिसाइल और ड्रोन इंटरसेप्टरों की भारी कमी है। अपने सहयोगी अमेरिका से मांग की है। मगर वह भी इनकी पूर्ति करने में असमर्थ है। 

 

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ईरान की रणनीति: अमेरिका और इजरायल जैसे शक्तिशाली प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ ईरान ने सस्ते ड्रोन वाली रणनीति अपनाई। वह अपने पड़ोसी खाड़ी देशों पर इन ड्रोन से लगातार हमला कर रहा है। डर और दहशत के माहौल के इतर आर्थिक चोट भी दे रहा है। तेल ठिकानों पर हमले और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नाकाबंदी के बाद खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था चरमराने लगी है।  दुबई जैसे दुनिया के सबसे अहम आर्थिक केंद्र की इमेज को ईरान ने सिर्फ हजार डॉलर के ड्रोन से बदल कर रख दिया। 

 

अनुमान के मुताबिक ईरान के एक शाहेद-136 ड्रोन की कीमत 20,000 से 50,000 डॉलर है। अमेरिका एक ड्रोन को मारने में पैट्रियट एयर डिफेंस जैसा डिफेंस सिस्टम इस्तेमाल करता है। इसकी एक मिसाइल की कीमत ही 30 लाख डॉलर (27.6 करोड़ रुपये) से अधिक है, जबकि शाहेद-136 ड्रोन भारतीय रुपये में सिर्फ 41.5 लाख रुपये का है। 

 

ईरान एक साथ इन सस्ते ड्रोन को बड़ी संख्या में दाग सकता है। मगर पैट्रियट एयर डिफेंस इतनी बड़ी संख्या में इन्हें रोक नहीं सकता है। अगर हर ड्रोन पर 27 करोड़ की मिसाइल दागी गई तो यह आर्थिक तौर पर भी बहुत महंगा है। वहीं पैट्रियट जैसी मिसाइलों का उत्पादन करना बेहद जटिल और समय लगने वाली प्रक्रिया है। अगर युद्ध अधिक तीनों तक चला तो मिसाइलों की कमी आ सकती है। बाद में ईरान इन्हीं सस्ते ड्रोनों से और तबाही मचा सकती है। अब सवाल यह है कि इसका विकल्प क्या है?

 

सस्ते ड्रोन का इलाज क्या: दुनियाभर को लेजर के रूप में सस्ते ड्रोन का विकल्प दिख रहा है। मिसाइल की तुलना में इसका खर्च बेहद कम होगा। अगर एक ड्रोन को मिसाइल से मार गिराया गया तो उसकी लागत 27.6 करोड़ रुपये होगी। वहीं लेजर से यही ड्रोन महज 3.50 डॉलर यानी 325 रुपये में गिराया जा सकता है। यही कारण है कि दुनियाभर के देश लेजर तकनीक पर निवेश करने में जुटे हैं। अगर डोनाल्ड ट्रंप की माने तों अमेरिका भी जल्द अपना लेजर हथियार उतारने वाला है। दशकों से कई देश लेजर तकनीक को विकसित करने में जुटे हैं। मगर इसके रास्ते में अभी तक कई बाधाए हैं। 

 

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लेजर हथियार के साथ समस्या क्या?

बचपन में आपने कभी न कभी आवर्धक लेंस का इस्तेमाल कागज को जलाने में किया होगा। लेजर हथियार भी इसी तरह से काम करता है। वह प्रकाश की एक बेहद शक्तिशाली किरण को एक जगह फोकस करके ड्रोन को निष्क्रिय कर देता है। सबसे जरूरी यह है कि प्रकाश की किरण का कई सेकंड तक लक्ष्य पर एक ही जगह में टिका होना जरूरी है।


अगर आसमान साफ नहीं है। बादल छाए हुए हैं तो एक ड्रोन को मार गिराने में लेजर को अधिक समय लग सकता है। कोहरा और मौसम में अधिक नमी होने पर भी यही समस्या का सामना करना पड़ेगा। धूल भरी आंधी से भी नुकसान पहुंच सकता है।

दुनिया के कुछ चुनिंदा लेजर हथियार

  • इजराइल: राफेल एडवांस्ड डिफेंस – आयरन बीम
  • ऑस्ट्रेलिया: इलेक्ट्रो ऑप्टिक सिस्टम्स- हाई एनर्जी लेजर वेपन।
  • यूक्रेन: सनरे कॉम्पैक्ट लेजर सिस्टम।
  • चीन: LY-1 सिस्टम।
  • भारत: सहस्त्र शक्ति- 30 किलो वाट।

भारत क्या सीख सकता है?

सस्ते ड्रोन दुनिया की हर बड़ी जंग में सबसे अहम भूमिका निभाएंगे। ड्रोन को रोकना मिसाइलों से ज्यादा जटिल होगा। छोटे ड्रोन बड़ी तबाही मचा सकते हैं। यह हम यूक्रेन और अब ईरान युद्ध में देख चुके हैं। भारत को न केवल सस्ते ड्रोन बनाने होंगे, बल्कि इन ड्रोन से कैसे निपटा जाए, इस पर भी फोकस करना होगा। सस्ते ड्रोन से हम दुश्मन को बड़ी चोट पहुंचा सकते हैं, लेकिन अगर दुश्मन भी ऐसे ही ड्रोन इस्तेमाल करने लगे तो उनसे निपटने की तकनीक भी हमारे पास होनी चाहिए।  

 

 

हर बार एसिडिटी में गोली? न्यूट्रीशन पर पड़ सकता असर


आजकल सीने में हल्की जलन या भारीपन होते ही हम तुरंत गैस की दवा खा लेते हैं। यह दवा उस समय तो आराम दे देती है लेकिन लंबे समय तक इसका ज्यादा उपयोग सही नहीं है। हमारे पेट में एक जरूरी एसिड बनता है, जो खाने को पचाने में मदद करता है। बार-बार दवा लेने से यह जरूरी एसिड कम हो सकता है और पाचन पर असर पड़ सकता है। अगर बिना डॉक्टर की सलाह के इन दवाओं को लंबे समय तक लिया जाए, तो शरीर को अंदर से नुकसान हो सकता है। हाल ही में ब्राजील की फेडरल यूनिवर्सिटी ऑफ साओ पाउलो के वैज्ञानिकों की एक स्टडी में भी बताया गया है कि इन दवाओं का लगातार इस्तेमाल शरीर में जरूरी पोषक तत्वों का संतुलन बिगाड़ सकता है।


अगर आपको सामान्य भाषा में समझना तो यह जान लीजिए कि जब आप रोजाना इन दवाओं का सेवन करते हैं तो पेट का pH लेवल बदल जाता है। रिसर्च बताते हैं कि पेट में एसिड की कमी होने से भोजन से मिलने वाले माइक्रोन्यूट्रिएंट्स खून में सही तरह से नहीं मिल पाते। इसका सीधा असर आपकी हड्डियों की मजबूती, मेंटल हेल्थ और एनर्जी के स्तर पर पड़ता है। 

 

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एसिड कम होना क्यों है चिंता की बात?

ये दवाएं पेट में एसिड बनाने वाले एंजाइम को रोक देती हैं। वैसे तो एसिड जलन पैदा करता है लेकिन यही एसिड हमारे खाने से आयरन और जिंक जैसे न्यूट्रिएंट्स को सोखने में शरीर की मदद भी करता है। जब पेट में एसिड बहुत कम हो जाता है तो शरीर खाने से जरूरी पोषण नहीं ले पाता।

 

रिसर्च के अनुसार, मिनरल्स में कमी का सीधा असर हमारी इम्यून सिस्टम पर पड़ता है। शरीर की कोशिकाएं कमजोर होने लगती हैं जिससे बीमारियों से लड़ने की ताकत घट सकती है।

 

पेट का एसिड भोजन से B12 को अलग करने में मदद करता है। एसिड कम होने से इसकी कमी हो जाती है, जिससे थकान और नसों में कमजोरी महसूस हो सकती है। अगर आपके शरीर में कैल्शियम को पूरी तरह से काम करना है तो इसके लिए एसिडिक जरिए की जरूरत होती है। 

 

लंबे समय तक एसिड की दवा लेने से ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है। खून में मैग्नीशियम की कमी से मांसपेशियों में ऐंठन और रेगुलर हर्ट रेट में समस्याएं हो सकती हैं।

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बचाव के तरीके

  • लाइफस्टाइल में बदलाव: एक साथ पूरा खाना खाने के बजाय छोटे-छोटे ब्रेक लेकर खाएं।
  • प्रोबायोटिक्स: दही और छाछ जैसे चीजों को शामिल करें जो नेचुरल तरीके से डाइजेशन को ठीक करते हैं।
  • सोने का समय: रात के खाने और सोने के बीच कम से कम 3 घंटे का अंतर रखें।
  • एसिडिटी की दवाओं को बिना डॉक्टर की सलाह के न लें।

पाकिस्तान का कटास राज मंदिर, सतघरा मंदिरों का इतिहास जानिए


भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में भारतीय सभ्यता के प्रमाण मिलते हैं। खासकर पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में कई प्राचीन हिंदू मंदिर आज भी मौजूद हैं। ये मंदिर हजारों साल पुराने हैं और लोगों की आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र बने हुए हैं। ऐसा ही एक प्रसिद्ध मंदिर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित कटास राज मंदिर है। यह मंदिर अपनी प्राचीन वास्तुकला और धार्मिक महत्व के कारण पूरी दुनिया में जाना जाता है। इस मंदिर परिसर में कई अन्य प्राचीन मंदिर भी शामिल हैं, जो हजारों साल पुराने बताए जाते हैं।

 

कटास राज मंदिर पाकिस्तान के चकवाल जिले में स्थित है। लगभग 2000 साल पुराने इस मंदिर समूह को किला कटास भी कहा जाता है। माना जाता है कि इसका निर्माण हिंदू शाही काल में हुआ था। इसकी बनावट, गुंबद और स्थापत्य शैली आज भी उस समय की भव्यता और ऐतिहासिक महत्व को दर्शाते हैं।

 

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कटास राज मंदिर और मान्यता

इस्लामाबाद से दो घंटे की दूरी पर है पोथोहर पठार, जहां कटास राज मंदिर की स्थापना की गई। यहां की सबसे खास बात यहां मौजूद पवित्र तालाब (कुंड) है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान शिव अपनी पत्नी सती के वियोग में विलाप कर रहे थे, तब उनके आंसुओं से दो तालाब बने थे, जिनमें से एक यहां कटास राज में स्थित है। 

 

वहीं, एक अन्य मान्यता यह भी है कि महाभारत काल में पांडवों ने अपने वनवास के 12 साल यहीं बिताए थे और ‘सतघरा’ मंदिरों का निर्माण किया था। साथ ही यह भी कहा जाता है कि यहीं युधिष्ठिर ने यक्ष के कठिन सवालों के उत्तर दिए थे।मंदिर जिसे किला कटास के नाम से भी जाना जाता है, कई हिंदू मंदिरों का एक कॉम्प्लेक्स है जो एक-दूसरे से वॉकवे से जुड़े हुए हैं।


पंजाब क्षेत्र में ज्वालामुखी के बाद इसे हिंदुओं का दूसरा सबसे पवित्र स्थान माना जाता है। यहां की ऐतिहासिक बनावट और धार्मिक जुड़ाव को देखते हुए पाकिस्तान सरकार ने साल 2006 और 2017 में इसके मरम्मत का काम भी करवाया था। आज भी महाशिवरात्रि जैसे बड़े त्योहारों पर भारत से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

 

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इतिहास और संरक्षण की चुनौतियां

इतिहासकारों के लिए इस परिसर का सही समय बताना मुश्किल रहा है लेकिन अनुमान है कि ये मंदिर 7वीं शताब्दी के आसपास के हो सकते हैं। बंटवारे के बाद इस ऐतिहासिक धरोहर ने काफी उपेक्षा झेली। औद्योगिक गतिविधियों और सीमेंट फैक्ट्रियों की वजह से यहां की पवित्र झील सूखने लगी थी। 

 

हालांकि, 2017 में पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय ने इस पर कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट ने न केवल फैक्ट्रियों पर जुर्माना लगाया बल्कि झील को दोबारा भरने और मंदिर के मरम्मत के सख्त निर्देश भी दिए।

 

राजनयिक उतार-चढ़ाव के बावजूद, पाकिस्तान अब भारतीय तीर्थयात्रियों को यहां आने की अनुमति दे रहा है। साल 2024 में भी महाशिवरात्रि के लिए 112 भारतीय नागरिकों को वीजा जारी किया गया था जो पिछले साल की तुलना में दोगुनी थी।

नोट: इस खबर में लिखी गई बातें धार्मिक और स्थानीय मान्यताओं पर आधारित हैं। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।

‘उम्मीद है चीन, जापान और फ्रांस भेजेंगे जहाज,’ ईरान के आगे बेबस हुए ट्रंप


स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरानी हमलों से अमेरिका बेहद परेशान हैं। खाड़ी के कई देशों ने तेल उत्पादन रोक दिया है। वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही न होने से दुनियाभर में ऊर्जा संकट खड़ा गया है। कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति डॉलर के ऊपर पहुंच चुकी है। अमेरिका अब ईरान पर हर तरह का दबाव डाल रहा है, ताकि स्ट्रेट को खुलवाया जा सके। 

 

वहीं ईरान इसे बंद करके अमेरिका पर युद्ध रोकने का दबाव बना रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अब चीन, जापान और ब्रिटेन जैसे देशों से उम्मीद है। उनका मानना है कि यह देश अपने जहाजों को भेजेंगे, ताकि स्ट्रेट को खुला रखा जा सके। 

 

डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को अपने ट्रुथ सोशल पर लिखा, ‘कई वह देश जो ईरान के होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने करने के प्रयास से प्रभावित हैं, वह अमेरिका के साथ स्ट्रेट को खुला और सुरक्षित रखने के लिए युद्धपोत भेजेंगे।’

 

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ट्रंप ने बताई ईरान की सबसे बड़ी ताकत

ट्रंप ने आगे दावा किया, ‘हमने ईरान की 100 फीसद सैन्य क्षमता को पहले ही नष्ट कर दिया है। मगर एक-दो ड्रोन भेजना, कोई माइन गिराना या इस जलमार्ग के आस-पास और इसके अंदर कहीं भी कम दूरी की मिसाइल दागना आसान उनके लिए आसान हैं, भले ही वे कितनी भी बुरी तरह हार चुके हों।’ ट्रंप का यह बयान साबित करता है कि होर्मुज स्ट्रेट में ईरान अब भी बड़ी ताकत है। वह चाहे तो स्ट्रेट के यातायात को प्रभावित कर सकता है।

 

 

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को आजाद करवा लेंगे: ट्रंप

ट्रंप ने अपनी पोस्ट में उम्मीद जताई कि चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, यूनाइटेड किंगडम समेत अन्य देश इस इलाके में अपने जहाज भेजेंगे, ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य अब उस देश का कोई खतरा न रहे, जिसकी सैन्य शक्ति पूरी तरह से खत्म हो चुकी है। ट्रंप ने आगे धमकी दी अमेरिका ईरान के तट पर बमबारी करता रहेगा। ईरानी नावों और जहाजों को पानी में तबाह किया जाएगा। किसी भी तरह हम जल्द ही होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला, सुरक्षित और आजाद करवा लेंगे।

दिल्ली में कबतक ठंडा रहेगा मौसम? IMD ने 21 मार्च तक का बताया हाल


दिल्ली-एनसीआर सहित उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान में 15 मार्च को अचानक मौसम बदल गया, जिससे अधिकतम और न्यूनतम दोनों तापमान में भारी गिरावट देखने को मिली। जहां लोग मान चुके थे कि गर्मियां आ चुकी हैं और सूरज अपनी गर्मी का अहसास भी करवाने लगा था, ऐसे में रविवार को हुई बारिश ने मौसम में एक बार फिर से ठंडक ला दी।

 

उत्तर प्रदेश में रविवार सुबह नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, अयोध्या समेत 15 शहरों में तेज हवाओं के साथ हल्की बारिश हुई। लखनऊ में बूंदाबांदी के साथ धूलभरी आंधी चली। आसमान में काले बादल छा गए। यही सिलसिला सोमवार को भी जारी रहा और कई शहरों और जिलों में तेज हवाएं चल रही हैं। 

 

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दिल्ली-एनसीआर का सुहावना मौसम

दिल्ली-एनसीआर में पश्चिमी विक्षोभ की वजह से आज भी सुबह से ही मौसम सुहावना है। सौमवार को भी 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने बताया है कि दिल्ली-एनसीआर में 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चली हैं।  यही नहीं बारिश की वजह से अधिकतम तापमान में 6 डिग्री सेल्सियस गिरावट दर्ज की गई है, जबकि न्यूनतम तापमान में भी 3-4 डिग्री सेल्सियस गिरावट हुई है।

 

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21 मार्च तक के मौसम का पूर्वानुमान

मौसम विभाग ने 21 मार्च तक के मौसम का पूर्वानुमान जारी किया है, जिसमें मौसम में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। इसमें बताया गया है कि 21 मार्च तक दिल्ली-एनसीआर में ठंडक बनी रहेगी और लोगों को अभी फिलहाल गर्मी से राहत मिलेगी। 

 

मौसम विभाग ने सोमवार को अपने ताजा बुलेटिन में जानकारी देते हुए बताया कि पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, सिक्किम, असम और मेघालय, त्रिपुरा में रात का न्यूनतम तामपान 14-18 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। इसका साफ मलतब है कि इन राज्यों में रात का मौसम सुहावना हो रहा है। गर्मी को अभी थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा। 

 

गीजर की अनदेखी से बढ़ सकती हैं स्किन परेशानियां


सर्दियों के मौसम में गर्म पानी से नहाना बहुत सुकून देता है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपके गीजर के अंदर क्या चल रहा है? लंबे समय तक सफाई न होने के कारण गीजर के टैंक में कैल्शियम, मैग्नीशियम और जंग की एक मोटी परत जमा हो जाती है। यह जमा हुआ पानी गीजर की क्वालिटी को खराब कर देता है जिससे नहाते समय आपकी स्किन सीधे हानिकारक तत्वों के संपर्क में आती है।

 

जब गीजर के अंदर का पानी महीनों तक जमा रहता है और टैंक की सफाई नहीं होती तो इस वजह से वह बैक्टीरिया जैसे लेजियोनेला के पनपने का ठिकाना बन जाता है। गीजर का गंदा पानी स्किन के नेचुरल ऑयल को सोख लेता है जिससे स्किन बैरियर कमजोर हो जाता है। नतीजा यह होता है कि नहाने के बाद आपको स्किन में खिंचाव, सूखापन और रैशेज महसूस होने लगते हैं। 

 

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स्किन की प्रॉब्लम

लगातार खुजली और सूखापन: टैंक में जमा हार्ड वॉटर मिनरल्स स्किन को रूखा बना देते हैं। इससे नहाने के तुरंत बाद खुजली शुरू हो जाती है। 

एक्जिमा और सोरायसिस का बढ़ना: यदि आपको पहले से कोई स्किन क प्रॉब्लम है तो गंदा गर्म पानी उसे और अधिक गंभीर बना सकता है। 

मुंहासे और ब्रेकआउट्स: गंदे पानी के बैक्टीरिया स्किन के छेद को बंद कर सकते हैं, जिससे शरीर पर दाने या मुंहासे हो सकते हैं।

सांस संबंधी बिमारियां

लीशियोनेयर्स रोग: यह फेफड़ों का इंफेक्शन है। इसके लक्षणों में तेज बुखार, खांसी और मांसपेशियों में दर्द शामिल है। 

पोंटियाक बुखार: यह एक हल्का फ्लू जैसा इंफेक्शन है जो गंदे पानी के बैक्टीरिया के कारण होता है।

अन्य समस्याएं

बालों का झड़ना: सिर्फ स्किन ही नहीं, गीजर का भारी और गंदा पानी बालों को बेजान बनाकर उनके झड़ने की रफ्तार बढ़ा देता है।

एलर्जिक डर्मेटाइटिस: पानी में मौजूद जंग और मेटल के कण स्किन पर लाल चकत्ते और जलन पैदा कर सकते हैं।

गंदे पानी के संपर्क में आने से आंखों में जलन, लालिमा और खुजली हो सकती है।

 

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बचाव के उपाय

  • हर सीजन की शुरुआत में प्रोफेशनल मैकेनिक से गीजर के टैंक की सफाई जरूर करवाएं।
  • मैग्नीशियम एनोड रॉड बदलें: यह रॉड टैंक को जंग से बचाती है। इसे हर 1-2 साल में बदलना चाहिए।
  • तापमान पर नियंत्रण: पानी को बहुत ज्यादा गर्म न करें, क्योंकि इससे स्केलिंग तेजी से होती है। गीजर का तापमान कम से कम 60°C पर सेट करें ताकि बैक्टीरिया पनपे ना। 
  • यदि पानी का रंग पीला या मटमैला दिख रहा हो, तो तुरंत सफाई करवाएं।