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होर्मुज स्ट्रेट में ही अमेरिका ने ईरानी जहाज पर कब्जा किया, अब क्या होगा?


होर्मुज स्ट्रेट पर अधिकार को लेकर ईरान और अमेरिका के दावों के बीच सोमवार को बड़ी घटना घटी। अमेरिकी नेवी ने ईरानी झंडे वाले कार्गो यानी एक मालवाहक जहाज को अपने कब्जे में लिया। यह एक तरह से ईरान के लिए नई चुनौती है। इस कार्गो जहाज ने होर्मुज के पास अमेरिकी नौसैनिक की नाकेबंदी को पार करने की कोशिश की थी।

 

इस बात की जानकारी खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दी है। उन्होंने ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट में दावा किया कि ईरान के झंडे लगे इस कार्गो का नाम TOUSKA है। इस जहाज को ओमान की खाड़ी में अमेरिकी नौसेना के विध्वंसक यूएसएस स्प्रूएंस ने इंटरसेप्ट किया गया।  यह जहाज नाकेबंदी को पार करने की कोशिश कर रहा था और यह ईरान लिए अच्छा नहीं रहा।

 

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ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी नेवी ने ईरानी जहाज को नाकेबंदी को पार ना करने की चेतावनी दी थी। इसके बाद ही जहाज पर हमला करके उसे कब्जे में लिया गया।

डोनाल्ड ट्रंप का पूरा बयान

उन्होंने कहा, ‘आज, TOUSKA नाम का एक ईरानी झंडे वाला कार्गो शिप, जो लगभग 900 फीट लंबा और लगभग एक एयरक्राफ्ट कैरियर जितना वजनी था। उसने हमारे नेवल ब्लॉकेड को पार करने की कोशिश की और यह उनके लिए ठीक नहीं रहा। अमेरिकी नेवी गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर USS SPRUANCE ने TOUSKA को ओमान की खाड़ी में रोक दिया और उन्हें रुकने की चेतावनी दी।’

 

 

 

अमेरिका के कब्जे में है ईरानी जहाज

राष्ट्रपति ने आगे कहा कि ईरानी क्रू ने अमेरिक चेतावनी को मानने से मना कर दिया इसलिए हमारे नेवी शिप ने इंजन रूम में छेद करके उन्हें वहीं रोक दिया।’ उन्होंने कहा, ‘अभी, ईरानी जहाज अभी यूएस मरीन के कब्जे में है। TOUSKA पर अमेरिकी ट्रेजरी के सैंक्शन हैं क्योंकि उनकी पहले की गैर-कानूनी गतिविधि का इतिहास है। जहाज की पूरी कस्टडी हमारे पास है और हम देख रहे हैं कि जहाज पर क्या है!’

 

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‘समुद्री डकैती’ का जल्द जवाब देंगे- ईरान

वहीं, अमेरिकी नेवी की इस कार्रवाई को लेकर ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरान ने इसे अमेरिका की ‘समुद्री डकैती’ करार दिया है और कहा कि इसका जल्द ही जवाब दिया जाएगा। ईरान ने इसमें आगे कहा है कि अमेरिकी नेवी ने उसके जहाज पर गोलीबारी कर युद्धविराम का उल्लंघन किया है। यह जहाज चीन से ईरान की ओर जा रहा था।

नासिक टीसीएस मामले में सामने आईं कई चौंकाने वाली बातें, हो रहे नए खुलासे


नासिक के टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) यूनिट में कथित यौन उत्पीड़न का मामला रोज नई उलझनें और गंभीर आरोपों के साथ और जटिल होता जा रहा है। एक पीड़िता ने पुलिस को बताया कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर उसके साथ जबरदस्ती की। आरोपी ने यह छुपाया कि वह पहले से शादीशुदा था। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी ने उसे इस्लाम धर्म अपनाने के लिए दबाव डाला। यह जानकारी पीटीआई ने दी है।


महिला ने जो एफआईआर दर्ज कराई है, उसके अनुसार वह चार साल पहले आरोपी से मिली और दोनों दोस्त बन गए। आरोपी ने उसे ग्रेजुएशन के बाद टीसीएस में नौकरी दिलाने का वादा किया। महिला के मुताबिक, 2022 में आरोपी ने जबरदस्ती उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और शादी का वादा किया। बाद में महिला नासिक टीसीएस ब्रांच में नौकरी पर लग गई, जहां आरोपी भी काम करता था। 2024 में आरोपी ने एक रिसॉर्ट में फिर से उसे यौन उत्पीड़न किया।

 

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आरोपी पहले से था शादीशुदा

महिला को तब पता चला कि आरोपी पहले से शादीशुदा है और उसके दो बच्चे भी हैं, जब आरोपी की पत्नी ने खुद उससे संपर्क किया। जब महिला ने आरोपी से पूछा तो उसने कहा कि उसका उससे शादी करने का कोई इरादा नहीं है।

 

महिला ने आरोप लगाया कि आरोपी ने अपने दो अन्य सहकर्मियों के साथ मिलकर उसे इस्लाम धर्म अपनाने के लिए मजबूर किया। एफआईआर में यह भी कहा गया है कि कुछ आरोपियों ने उसे यौन उत्पीड़न किया और ब्लैकमेल भी किया।

सोशल मीडिया पर किया मैसेज

सोशल मीडिया पर स्टॉकिंग पुलिस जांच में पता चला कि आरोपियों ने पीड़िताओं को फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप पर अनचाहे मैसेज भेजे, स्टॉकिंग की और आपत्तिजनक वीडियो व कमेंट्स भी किए। पुलिस इन मैसेज और वीडियो की जांच कर रही है।

 

अब तक इस मामले में कुल आठ लोग आरोपी बनाए गए हैं। इनमें निदा खान का नाम भी शामिल है। निदा खान फरार बताई जा रही हैं और उन्होंने शनिवार को नासिक सेशंस कोर्ट में अग्रिम जमानत (anticipatory bail) के लिए अर्जी दी है। बाकी सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

अग्रिम जमानत की अर्जी

निदा खान की वकीलों राहुल कासलीवाल और बाबा सैय्यद ने कहा कि कोर्ट सोमवार को उनकी अग्रिम जमानत अर्जी पर सुनवाई करेगा। वकील कासलीवाल ने कहा, ‘उन्हें झूठा फंसाया गया है। उनके खिलाफ कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।’


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महिला आयोग का एक्शन राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने इस मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय फैक्ट-फाइंडिंग टीम बनाई है। टीम जल्द ही जांच शुरू करेगी। यह मामला लगातार नई खुलासों के साथ सामने आ रहा है और पुलिस जांच जारी है।

दिल टूटने से अभिनेत्री कल्कि को हुआ इंसोम्निया, यह कौन सी बला है, जान लीजिए


एक्ट्रेस कल्कि कोचलिन अपने बयान की वजह से सुर्खियां बटोर रही हैं, क्योंकि हाल ही में उन्होंने एक पॉडकास्ट में बताया कि दिल टूटने की वजह से उन्हें कई रातों तक नींद नहीं आती थी। नींद न आने की वजह से वह पूरे दिन खाली महसूस करती थीं और उनके लिए रोजमर्रा के कार्य करना मुश्किल हो जाता था। कल्कि के मुताबिक, उन्हें इंसोम्निया हो गया था। उनका मानना है कि किसी रिलेशनशिप के खत्म होने से न सिर्फ व्यक्ति पर भावनात्मक असर पड़ता है, बल्कि उसकी हेल्थ पर भी बुरा असर पड़ता है।

 

कल्कि नेसोहा अली खान के एक पॉडकास्ट में शेयर किया कि दिल टूटने के दर्द की वजह से वह महीनों तक ठीक से सो नहीं पाईं। वह अक्सर रात के 2 या 3 बजे अचानक जाग जाती थीं और फिर घंटों तक उन्हें नींद नहीं आती थी। अब सवाल उठता है कि इंसोम्निया बीमारी क्या है? सवाल यह भी है कि क्या इंसोम्निया ब्रेकअप से हो सकती है?

 

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क्या है इंसोम्निया?

इंसोम्निया एक ऐसी बीमारी है, जिसमें व्यक्ति को कई रातों तक नींद नहीं आती है। डॉक्टरों के मुताबिक, अगर किसी व्यक्ति को लगातार तीन महीने तक रात में कम नींद आती है या व्यक्ति जल्दी जाग जाता है तो उस स्थिति को इंसोम्निया माना जाता है।

क्या दिल टूटने की वजह से होता है इंसोम्निया ?

कुछ स्टडी रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल टूटने की वजह से लोगों को नींद न आने की बीमारी यानी इंसोम्निया हो सकती है। दरअसल, जब कोई व्यक्ति प्रेम में होता है, तब उसके शरीर में डोपामिन हार्मोन रिलीज होता है, जिससे व्यक्ति खुश रहता है। जबकि प्रेम में दरार आने या ब्रेकअप होने की वजह से शरीर में डोपामिन का लेवल कम हो जाता है, जिससे व्यक्ति को बेचैनी और नींद न आने की समस्या का सामना करना पड़ता है। अगर यही समस्या बेहद ज्यादा हो जाए तो व्यक्ति को इनसोमिया बीमारी हो सकती है।

 

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ब्रेकअप के अलावा कई कारण हैं, जिनकी वजह से लोगों को इंसोम्निया हो सकता है। जैसे प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं के हार्मोन में बदलाव होते हैं, जिसकी वजह से नींद नहीं आती है और आगे चलकर इनसोमिया हो सकता है।

इंसोम्निया से कैसे बचें?

  • काउंसलर – जिन लोगों को इंसोम्रिया की समस्या है, उन्हें मेंटल हेल्थ के लिए काउंसलर से बात करनी चाहिए।
  • रूटीन बदलें – लोगों को सही समय पर रात में सोने की कोशिश करनी चाहिए।
  • डॉक्टर से सलाह लें – जब नींद न आने की समस्या ज्यादा बढ़ जाए तो व्यक्ति को डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

अक्षय तृतीया पर्व के दिन विवाह का क्या महत्व है? वजह जान लीजिए


सनातन धर्म में अक्षय तृतीया की तिथि बेहद खास मानी जाती है क्योंकि इस दिन लोग जो भी कार्य करते हैं, उसका फल कई गुना ज्यादा बढ़ जाता है। धार्मिक जानकारों का मानना है कि अक्षय तृतीया के दिन विवाह करना बेहद शुभ होता है। इसी वजह से कई लोग अक्षय तृतीया के दिन ही विवाह करते हैं। कई लोगों का मानना है कि इस दिन विवाह करने से दंपति को जीवन भर साथ रहने का वरदान मिलता है।

 

इस साल 19 अप्रैल के दिन अक्षय तृतीया की अहम तिथि है। इसी वजह से आज के दिन देश में कई लोगों की शादी कराई जा रही है। अक्षय तृतीया के दिन सिर्फ विवाह ही नहीं बल्कि सोने-चांदी की खरीदारी, नए बिजनेस की शुरुआत और कई मांगलिक कार्यों के लिए भी साल का सबसे उत्तम दिन माना जाता है। आइए जानते हैं कि अक्षय तृतीया के दिन विवाह का महत्व क्या है।

 

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विवाह के लिए क्यों है खास?


1. अक्षय फल की प्राप्ति – धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, इस दिन किए गए विवाह से दंपति को अक्षय फल की प्राप्ति होती है, यानी उन्हें जीवन भर साथ रहने का वरदान मिलता है।


2. ग्रहों की स्थिति शुभ होती है – ज्योतिष शास्त्रों के मुताबिक अक्षय तृतीया के दिन सूर्य और चंद्रमा अपनी सबसे अच्छी स्थिति में होते हैं, जो दंपति के वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और प्रेम बनाए रखने में मदद करते हैं।


3. दोष का प्रभाव कम होना -धार्मिक जानकारों के मुताबिक, अगर वर या वधु की कुंडली नहीं मिल रही हो या उसमें कोई दोष हो, तो अक्षय तृतीया के दिन विवाह करना शुभ माना जाता है। इस दिन इन दोषों का प्रभाव कम हो जाता है।

 

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लाखों लोग करते हैं अक्षय तृतीया के दिन विवाह

 

भारत में हर साल कई लोग अक्षय तृतीया के दिन शादी करते हैं। इस दिन कई जगह सामूहिक विवाह कराए जाते हैं। हालांकि, कुछ इलाकों में पहले बाल विवाह भी कराए जाते थे, जो आज भी राजस्थान के कुछ गांवों में देखने को मिलते हैं लेकिन भारत में बाल विवाह पर कानूनी प्रतिबंध है, इसी वजह से आज राजस्थान के कई इलाकों में पुलिस की तैनाती की गई है ताकि बाल विवाह न हो सके।

 

डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि नहीं की जाती है।

 

कभी खुला, कभी बंद, कभी फायरिंग, होर्मुज पर ईरान चाहता क्या है?


भारतीय जहाजों पर हुए हमले को लेकर सरकार ने शनिवार को ईरान के राजदूत को विदेश मंत्रालय में तलब किया। दो भारतीय झंडे वाले टैंकरों पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास ईरानी नौसेना के गोली चलाने की घटना पर भारत ने गहरी चिंता जताई है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने ईरान के राजदूत डॉ. मोहम्मद फतहाली को शाम 6:30 बजे बैठक के लिए बुलाया। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने मोहम्मद फतहाली से कहा कि यह गंभीर चिंता की बात है। 


विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि व्यापारिक जहाजों और नाविकों की सुरक्षा भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। विदेश सचिव ने याद दिलाया कि पहले ईरान ने भारत जाने वाले कई जहाजों को सुरक्षित निकलने में मदद की थी। उन्होंने ईरानी राजदूत से कहा कि इस गंभीर घटना पर भारत की चिंता, ईरान की सरकार तक पहुंचाएं। भारत जाने वाले जहाजों को जल्द से जल्द सुरक्षित निकलने की प्रक्रिया फिर शुरू करें। ईरानी राजदूत मोहम्मद फतहाली ने कहा कि वह भारत की बात अपने देश की सरकार तक पहुंचा देंगे। 

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में क्या हुआ था?

जग अर्नव और सनमार हेराल्ड नाम के दो भारतीय हजाज, होर्मुज में हैं। ये जहाज इराक का तेल ले जा रहे थे। ईरानी गनबोट्स ने इन पर गोली चलाई। भारतीय नौसेना इस संबंध में पूरी जानकारी जुटा रही है। फिलहाल होर्मुज में भारतीय नौसेना का कोई जहाज नहीं है, लेकिन गल्फ ऑफ ओमान में भारत के कुछ युद्धपोत तैनात हैं।

कैसे पता चली हमले की बात?

ब्रिटेन की नौसेना ने भी बताया कि ईरानी गनबोट्स ने होर्मुज स्ट्रेट पार करने की कोशिश कर रहे कुछ जहाजों पर फायरिंग की। कुछ जहाजों को ईरानी नौसेना से रेडियो मैसेज मिला कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फिर बंद कर दिया गया है। कोई जहाज पास नहीं हो सकता।

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पहले खोलने का एलान, फिर तत्काल बंद होर्मुज

ईरान ने शुक्रवार को स्ट्रेट को कुछ समय के लिए खोलने की घोषणा की थी, लेकिन शनिवार को फिर सख्ती कर दी। ईरान का कहना है कि अमेरिका अपनी बातों पर अमल नहीं कर रहा, इसलिए उन्होंने नियंत्रण कड़ा कर दिया है। होर्मुज तेल और गैस के लिए बेहद अहम रास्ता है। इस इलाके में तनाव बढ़ने से कई जहाज फंस गए हैं। भारत इस घटना पर ईरान से जवाब मांग रहा है। विदेश मंत्रालय ने जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बहाल करने की अपील की है।

ईरान ने ऐसा क्यों किया है?

ईरान ने हाल ही में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अस्थाई रूप से खोलने की घोषणा की थी। यह अमेरिका-ईरान के बीच एक नाजुक सीजफायर समझौते का हिस्सा था। अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी जारी रखी, जिसके जवाब में ईरान ने फिर होर्मुज ब्लॉक कर दिया। ईरानी सशस्त्र बलों ने रेडियो संदेशों के जरिए जहाजों को चेतावनी दी कि स्ट्रेट पूरी तरह बंद है और कोई भी जहाज गुजरने की कोशिश करे तो उसे दुश्मन के साथ सहयोग मानकर निशाना बनाया जाएगा। 

यूनाइटेड किंगडम नेवी ने भी रिपोर्ट की कि ईरानी गनबोट्स ने कुछ जहाजों पर फायरिंग की। इस नाकेबंदी की वजह से फारस की खाड़ी में सैकड़ों जहाज फंस गए हैं, जिससे वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है। अमेरिका की ओर से भी कड़ी प्रतिक्रिया आई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी कि वह अमेरिका को ब्लैकमेल नहीं कर सकता। 

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अब अमेरिका क्या करेगा?

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका ‘इकोनॉमिक फ्यूरी’ अभियान के तहत ईरान से संबंधित जहाजों को अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में बोर्डिंग और जब्त करने की तैयारी कर रहा है। इसका मकसद ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाना और होर्मुज को फिर से खुलवाना है। जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने कहा कि अमेरिका ईरान के क्षेत्रीय समुद्रों और अंतरराष्ट्रीय जल में नाकेबंदी लागू करेगा। 

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि नाकेबंदी तब तक जारी रहेगी, जब तक ईरान के साथ कोई शांतिपूर्ण समझौता नहीं हो जाता। भारत के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है क्योंकि हम ईरान से तेल आयात करते हैं। होर्मुज ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री स्तर पर हाल की बातचीत में दोनों देशों ने संबंधों को मजबूत बनाने पर जोर दिया था। 

दुनिया पर असर क्या?

इन हमलों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा गया है, जबकि शिपिंग कंपनियां अब जोखिम बढ़ने की वजह से वैकल्पिक राह तलाश रहीं हैं। देश की नौसेना इस घटना की जांच कर रही है। होर्मुज में कोई भारतीय युद्धपोत तैनात नहीं है। खाड़ी में भारत के पास कुछ डिस्ट्रॉयर और फ्रिगेट हैं। 

भारत ने यूएन शांति सैनिकों पर हमले की निंदा की, कर दी जांच की मांग


भारत ने शुक्रवार को लेबनान में संयुक्त राष्ट्र के शांति सैनिकों (UN Peacekeepers) पर हुए घातक हमले की कड़ी निंदा की है। इस हमले में फ्रांस के एक शांति सैनिक की मौत हो गई और तीन अन्य घायल हो गए।

 

विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा, ‘हम आज UNIFIL में तैनात फ्रांसीसी UN शांति सैनिकों पर हुए हमले की कड़ी निंदा करते हैं। हम शहीद हुए ब्लू हेलमेट को श्रद्धांजलि देते हैं और तीन अन्य घायल शांति सैनिकों के जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हैं।’

 

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कैसे हुआ था हमला?

यूनाइटेड नेशंस इंटरिम फोर्स इन लेबनान (UNIFIL) ने बताया कि शनिवार सुबह गंदुरिया गांव में एक सड़क पर विस्फोटक सामग्री साफ कर रहे UNIFIL के जवान अचानक छोटे हथियारों से गोलीबारी का शिकार हो गए। यह गोलीबारी गैर-राज्य तत्वों (नॉन-स्टेट एक्टर्स) ने की।

 

इस हमले में एक शांति सैनिक की मौत हो गई और तीन अन्य घायल हो गए, जिनमें से दो की हालत गंभीर बताई जा रही है। घायलों को अस्पताल में इलाज के लिए ले जाया गया है। UNIFIL ने कहा कि शुरुआती जांच में गोलीबारी हिजबुल्लाह जैसे गैर-राज्य समूहों की ओर से हुई प्रतीत होती है।

 

UNIFIL ने इस हमले की निंदा की और कहा कि विस्फोटक सामग्री हटाने का काम उनके मिशन के लिए बहुत जरूरी है, खासकर हाल की लड़ाई के बाद। उन्होंने लेबनान सरकार से अपील की है कि वह जल्द से जल्द जांच कर दोषियों को सजा दिलाए।

भारत ने की जांच की मांग

भारत ने मृतक शांति सैनिक के परिवार और फ्रांस सरकार को गहरी संवेदना व्यक्त की है। साथ ही घायल सैनिकों के जल्द ठीक होने की कामना की है। विदेश मंत्रालय ने लेबनान सरकार से आग्रह किया कि वह इस हमले की तुरंत जांच करे और अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाए। बयान में कहा गया, ‘भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2589 को आगे बढ़ाया था, जो शांति सैनिकों के खिलाफ अपराधों के लिए जवाबदेही तय करता है। हम लेबनान सरकार से अपील करते हैं कि वह इस हमले की जांच कर दोषियों को सजा दिलाए।’


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भारत दुनिया का सबसे बड़ा शांति सैनिक भेजने वाला देशों में से एक है और हमेशा ‘ब्लू हेलमेट’ की सुरक्षा और सम्मान के लिए आवाज उठाता रहा है। यह घटना UN शांति मिशनों पर बढ़ते खतरे को दिखाती है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस पर सख्त कार्रवाई की मांग करती है।

इंस्टाग्राम पर वायरल ट्रेंड्स को न करें फॉलो, खराब हो सकता है चेहरा


हम में से ज्यादातर लोग अपने खाली समय में इंस्टाग्राम पर रील देखते हैं। आज के समय में ब्यूटी कॉन्टेंट इन्फ्लुएंसर का खास ध्यान ग्लोइंग स्किन केयर रूटीन और ग्लोइंग लिप्स पर होता है। कैमरे पर इन सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की ग्लोइंग स्किन नजर आती हैं। लोग इन इन्फ्लुएंसर्स पर आंख बंद करके भरोसा करते हैं।

 

हम यह भूल जाते हैं कि हम किस तरह के वातावरण में रह रहे हैं। धूप, धूल और प्रदूषण वाली जगह में ग्लोइंग स्किन पाना मुश्किल है। लोग ग्लोइंग स्किन पाने के चक्कर में तरह-तरह के प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं। बिना ये सोचे-समझें कि इन चीजों का त्वचा पर क्या प्रभाव पड़ेगा। हम आपको उन वायरल ट्रेंड्स के बारे में बता रहे हैं जो सबसे ज्यादा वायरल होते हैं लेकिन इनमें सच्चाई नहीं होती है।

 

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स्किन केयर ट्रेंड जो होते हैं खूब वायरल

ग्लोइंग स्किन

 

कोरियन ब्यूटी स्किन केयर रूटीन का ट्रेंड छाया हुआ है। हर किसी को खूबसूरत और ग्लोइंग स्किन चाहिए। लोग त्वचा को ग्लोइंग रखने के लिए तरह-तरह के प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं। आप इस तरह की गलती न करें। हमारे यहां पर प्रदूषण, धूप और धूल की समस्या आम है। इस वजह से ऑयल प्रोडक्शन बढ़ जाता है जिसके कारण मुंहासे की समस्या हो सकती है। बहुत ज्यादा प्रोडक्ट्स लगाने से त्वचा की प्राकृतिक नमी खत्म हो जाती है।

 

घरेलू उपाय

 

सोशल मीडिया पर लोग बताते हैं कि मुंहासे हटाने के लिए चेहरे पर टूथपेस्ट, बेकिंग सोडा और नींबू के रस का इस्तेमाल करना चाहिए। आप इस तरह की गलती न करें। इन चीजों को लगाने से त्वचा का नेचुरअल पीएच खराब होता है जिससे जलन, खुजली आदि की समस्या बढ़ जाती है। आप त्वचा विशेषज्ञ से पूछने के बाद ही किसी प्रोडक्ट का इस्तेमाल करें।

 

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एकदम से ग्लो

 

ब्यूटी इन्फ्लुएंस का दावा है कि त्वचा को रोजाना एक्सफोलिएट करने से डर्ट और गंदगी निकल जाती है जिससे त्वचा निखरी और चमकदार नजर आती है। आप इस तरह की गलती न करें। रोजाना एक्सफोलिएशन करने से रेडनेस और सेंसिटिविटी की समस्या बढ़ जाती है। डॉक्टर्स के मुताबिक हफ्ते में दो बार त्वचा को एक्सफोलिएट करना चाहिए।

 

10 स्टेप स्किन केयर रूटीन

 

अपनी त्वचा पर रोजाना अलग-अलग तरह के सीरम और टोनर्स का इस्तेमाल करने से बचें। इन्हें इंडियन स्किन टोन के हिसाब से डिजाइन नहीं किया गया है। इतने सारे प्रोडक्ट्स लगाने की वजह से मुंहासों की समस्या हो सकती है। त्वचा पर कुछ भी लगाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
 

न मिठाई, न फल, यहां देवी को चढ़ता है चाउमीन और मोमोज, वजह जानिए


पश्चिम बंगाल में कई ऐसे मंदिर हैं, जहां काली मां की पूजा-अर्चना की जाती है लेकिन बंगाल की राजधानी कोलकाता के टांगरा में स्थित चाइनीज काली मंदिर बेहद खास है। यहां मां काली की पूजा में दो अलग संस्कृतियों का संगम देखने को मिलता है। टांगरा काली मंदिर में न तो लड्डू चढ़ते हैं और न ही फल। यहां मां काली को चाउमीन, मोमोज और अन्य चाइनीज डिश का भोग लगाया जाता है, जो सुनने में जितना अजीब लगता है, उतना ही दिलचस्प भी है। इस अनोखी प्रसाद परंपरा के पीछे एक खास कहानी छिपी है।


टांगरा में स्थित यह चाइनीज काली मंदिर सिर्फ अपने अनोखे प्रसाद के कारण ही मशहूर नहीं है बल्कि मां काली की महिमा के कारण भी चर्चा में रहता है। कई लोगों का मानना है कि इस मंदिर में दर्शन करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और उनके दुख-दर्द दूर होते हैं। अब सवाल उठता है कि इस मंदिर की खासियत क्या है और यहां चाउमीन व नूडल्स का भोग क्यों लगाया जाता है? आइए जानते हैं।

 

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मंदिर में अनोखे प्रसाद चढ़ने की वजह


मंदिर में चाउमीन का भोग लगाने की परंपरा का संबंध चीन से है। दरअसल, साल 1930 के आसपास चीन में गृहयुद्ध चल रहा था। उस दौरान कई चीनी लोग भारत आकर बस गए थे। उन्हीं में से कुछ लोग बंगाल के टांगरा इलाके में रहने लगे। ये लोग धीरे-धीरे कोलकाता की संस्कृति को अपनाने लगे।


कुछ समय बाद वे टांगरा के इस मंदिर में पूजा-पाठ करने लगे लेकिन वे काली मां को भोग में मिठाई या फूल नहीं चढ़ाते थे। इसके बजाय वे अपनी पसंदीदा चाइनीज डिश जैसे चाउमीन और नूडल्स चढ़ाने लगे। यह देखकर स्थानीय भारतीय लोगों ने भी यही परंपरा अपनानी शुरू कर दी। इसी वजह से आज भी इस मंदिर में चाउमीन और नूडल्स का भोग लगाया जाता है।
यह मंदिर अब भारतीय और चीनी परंपराओं के संगम का प्रतीक बन चुका है। इसी कारण इसे चाइनीज काली मंदिर के नाम से जाना जाता है।

 

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यह इलाका कोलकाता का मशहूर चाइनाटाउन है, जहां लंबे समय से चीनी समुदाय के लोग रहते आए हैं। इसी सांस्कृतिक प्रभाव के चलते यहां की आस्था में भी स्थानीय खान-पान की झलक दिखाई देती है। लोगों का मानना है कि मां काली को अपने पसंदीदा भोजन का भोग लगाना ही सच्ची भक्ति है, और इसी सोच के साथ यह परंपरा सालों से चली आ रही है।


मंदिर स्थापना की अनोखी कहानी


कई धार्मिक जानकारों के अनुसार, बहुत साल पहले इस इलाके में एक परिवार रहता था, जिनका बेटा लंबे समय से बीमार था। डॉक्टरों ने उसके ठीक होने की उम्मीद छोड़ दी थी। इसके बाद बच्चे के माता-पिता एक स्थान पर गए, जहां उन्होंने एक पेड़ के पास दो पत्थर रखकर मां काली की श्रद्धा से पूजा शुरू की।


कुछ समय बाद उनका बेटा धीरे-धीरे ठीक होने लगा। इसे चमत्कार मानते हुए उस दंपति ने उसी स्थान पर मां काली का मंदिर बनवा दिया। तभी से यहां बड़ी संख्या में भक्त पूजा-अर्चना करने आते हैं, खासकर नवरात्र के दौरान यहां भारी भीड़ देखने को मिलती है।


कैसे पहुंचें चीनी मां काली मंदिर?


इस मंदिर के दर्शन के लिए सबसे पहले आपको बस, ट्रेन या हवाई जहाज से कोलकाता पहुंचना होगा। इसके बाद मेट्रो, कार या टैक्सी के जरिए फूलबागान जाना होगा। फूलबागान से चाइनीज काली मंदिर लगभग 2.7 किलोमीटर दूर है, जहां आप आसानी से रिक्शा या लोकल ट्रांसपोर्ट के जरिए पहुंच सकते हैं।

बड़ी जंग की तैयारी में अमेरिका, कंपनियों से कहा- कार नहीं… हथियार बनाओ


अमेरिका बड़ी जंग की तैयारी में जुटा है। यही कारण है कि पेंटागन ने 1.5 ट्रिलियन डॉलर का बजट मांगा है। ट्रंप के दूसरे कार्यकाल से पहले अमेरिका में रक्षा मंत्री होता था। मगर ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद इस पद का नाम बदलकर युद्ध मंत्री कर दिया गया। यह भी एक संकेत है कि अमेरिका बड़ी जंग की तैयारी में है। अमेरिका के युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ अगले सप्ताह कैपिटल हिल जाएंगे। यहां हाउस और सीनेट के शीर्ष सांसदों से मिलेंगे और 1.5 ट्रिलियन डॉलर के बजट पर चर्चा करेंगे।

 

ट्रंप प्रशासन ने 2026 की तुलना में 455 बिलियन डॉलर यानी करीब 40 फीसद अधिक रक्षा बजट मांगा है। बजट के अलावा 200 बिलियन डॉलर का आपातकालीन फंड भी मांगा गया है। यह रकम ईरान के खिलाफ युद्ध में खर्च होगी। डोनाल्ड ट्रंप का तर्क है कि यह भारी भरकम रक्षा बजट अमेरिका के हित में होगा और ड्रीम मिलिट्री बनाने का सपना साकार करेगा। दस्तावेजों में बताया गया कि रक्षा बजट में इजाफा ताकत के माध्यम से शांति स्थापित करने के ट्रंप की नीति को आगे बढ़ाएगा। मतलब साफ है कि ट्रंप ताकत और धमकी के बल पर दुनिया को चलाने की मंशा रखते हैं।

 

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कार नहीं… हथियार बनाओ

अमेरिकी रक्षा विभाग ने कार कंपनियों से हथियार बनाने का अनुरोध किया है। ट्रंप ने ऑटोमोबाइल कंपनियों से हथियार निर्माण में अहम भूमिका निभाने को कहा है। वॉल स्ट्रीट जर्नल  की रिपोर्ट के मुताबिक विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने जनरल मोटर्स समेत कई कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात की। बैठक में हथियार और अन्य सैन्य सामग्री के उत्पादन पर चर्चा हुई। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद पहली बार है जब अमेरिका कार कंपनियों से हथियार निर्माण करने का अनुरोध कर रहा है।

आठ देशों पर हमला… कहां रुकेंगे ट्रंप? 

ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल में अब तक आठ देशों पर हमला कर चुके हैं। तीन देश ऐसे हैं, जिन पर अमेरिकी सेना ने पहली बार हमला किया। यमन में हूती विद्रोहियों पर हमले का आदेश दिया। वेनेजुएला के जहाजों पर बमबारी करवाई। बाद में वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अगवा भी कर लिया। इक्वाडोर में आतंकी संगठनों के खिलाफ अमेरिका ने सैन्य अभियान चलाया। 28 फरवरी को इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर इतिहास का सबसे भीषण हमला किया। पिछले साल 22 जून को भी अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर अटैक किया था। 

 

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क्यूबा पर ट्रंप की निगाह

ईरान के बाद ट्रंप प्रशासन की निगाह क्यूबा पर टिकी है। अमेरिकी नौसेना ने पहले ही तेल नाकाबंदी कर रखी है। डोनाल्ड ट्रंप बार-बार कह चुके हैं कि अगला नंबर क्यूबा है। इसके बाद क्यूबा की सेना युद्धाभ्यास में जुट गई है। ट्रंप प्रशासन क्यूबा में छह दशक पुराने कम्युनिस्ट शासन को खत्म करने का प्लान बना रहा है। उधर, क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कैनेल ने कहा कि उनका देश अमेरिकी हमले के लिए तैयार है।

मलक्का पर ट्रंप की नजर क्यों?

ईरान युद्ध के बीच अमेरिका और चीन में भी तनाव बढ़ता जा रहा है। हाल ही में ट्रंप प्रशासन ने धमकी दी कि अगर चीन ईरान को हथियार देगा तो उस पर 50 फीसद टैरिफ लगाया जाएगा। हाल ही में ईरान से तेल खरीदने पर भी रोक लगा दी। इस बीच अमेरिका ने इंडोनेशिया के साथ रक्षा सहयोग साझेदारी समझौता किया है। माना जा रहा है कि चीन को काउंटर करने के उद्देश्य से ही यह समझौता किया गया है।

 

समझौते के मुताबिक इंडोनेशिया अपने एयरस्पेस से अमेरिकी फाइटर जेट को उड़ान भरने की छूट देगा। इसका अमेरिका को फायदा यह होगा कि वह स्ट्रेट ऑफ मलक्का पर कड़ी निगाह रख सकता है। भविष्य में नाकेबंदी भी कर सकता है।

 

बता दें कि मलक्का स्ट्रेट मलय प्रायद्वीप और इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप के बीच एक संकरा जलमार्ग है। ग्लोबल ट्रेड का लगभग एक चौथाई हिस्सा यही से गुजरता है। वहीं 33 फीसद तेल का परिवहन भी मलक्का के रास्ते होता है। यह चीन का प्रमुख व्यापारिक मार्ग है। अगर अमेरिका मलक्का की घेराबंदी करता है तो चीन के साथ टकराव की संभवाना बढ़ जाएगी। 

लोकसभा में पास नहीं हुआ 131वां संविधान संशोधन बिल, विपक्ष में 230 वोट पड़े


विपक्ष के विरोध के बाद लोकसभा में संविधान (131वां) संशोधन विधेयक धराशायी हो गया। शुक्रवार को कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संविधान (131वां संशोधन) विधेयक- 2026 लोकसभा में पेश किया। संविधान संशोधन विधेयक के तहत 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिला आरक्षण लागू करना था। वहीं लोकसभा में सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव था।

 

मोदी सरकार ने संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र में तीन विधेयकों पर करीब 21 घंटे तक चर्चा की। मगर महिला आरक्षण से जुड़े विधेयक विपक्ष के विरोध के आगे टिक नहीं सके। सबसे पहले संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026 पर मतदान हुआ। विधेयक के पक्ष में 298 और 230 वोट विपक्ष में पड़े। लोकसभा के कुल 528 सदस्यों ने वोटिंग की। अगर यह विधेयक पास हो जाता तो लोकसभा में सीटों की संख्या 543 से बढ़कर 850 हो जाती। 

 

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विधेयक को पास करने के लिए सरकार को 352 वोट की जरूरत थी। मगर 54 वोट से बिल लोकसभा में गिर गया। संविधान संशोधन विधेयक के गिरने के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि सरकार बाकी दो विधेयकों को आगे नहीं बढ़ाएगी।

इन विधेयकों पर हुई चर्चा

  • संविधान (131वां संशोधन) विधेयक- 2026 
  • केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक- 2026
  • परिसीमन विधेयक- 2026 

संविधान संशोधन विधेयक पारित होने का प्रावधान क्या है?

संविधान संशोधन विधेयक तभी पारित माना जाता है, जब उसे सदन में उपस्थिति वोट देने वाले सदस्यों का दो तिहाई समर्थन हासिल हो। संविधान के अनुच्छेद 368(2) के मुताबिक सूचीबद्ध अहम मुद्दों को प्रभावित करने वाले संविधान संशोधन विधेयकों को संसद से पास होने के बाद कम से कम आधे राज्यों की विधानसभाओं से भी अनुमोदन की जरूरत पड़ती है।

कांग्रेस का चाल, चरित्र और चेहरा बेनकाब: शेखावत

केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि जिस तरह आज महिलाओं के आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक गिरा है। जिस तरह कांग्रेस ने एक बार फिर देश को बांटने के अपने एजेंडे को पूरी तरह से सामने रखा, उससे कांग्रेस की चाल, चरित्र और चेहरा बेनकाब हो गया है। 

महिला आरक्षण, जनगणना और परिसीमन कैसे आपस में जुड़े?

केंद्र सरकार ने 2023 में 106वें संविधान संशोधन अधिनियम के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फीसद आरक्षण दिया। इसमें कहा गया था कि आरक्षण 2023 में अधिनियम के लागू होने के बाद पहली जनगणना के आधार पर प्रभावी होगा। अगली जनगणना 2027 में प्रस्तावित है। जनगणना के दो साल बाद यानी 2029 में लोकसभा चुनाव होने हैं। सरकार को इस बात की संभावना बेहद कम थी कि 2027 की जनगणना के आधार पर अगले लोकसभा चुनाव से पहले परिसीमन पूरा हो पाएगा। परिसीमन के आधार पर ही महिलाओं को आरक्षण देना था। इन बाधाओं को खत्म करने की खातिर मोदी सरकार 131वां संविधान संशोधन लाई।

 

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यह संविधान संशोधन सरकार को 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करने और बाद में उसी परिसीमन के आधार पर महिला आरक्षण को लागू करने की ताकत देता। वहीं इन्हीं प्रावधानों को केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक के माध्यम से केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जाता। परिसीमन विधेयक- 2026 अगर पास हो जाता तो केंद्र सरकार को परिसीमन आयोग गठित करने का अधिकार मिल जाता।

क्या है 131वां संविधान संशोधन?

131वां संविधान संशोधन के तहत लोकसभा सीटों की संख्या 850 करना था। वहीं नए परिसीमन को लागू करना और महिला को 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले 33 फीसद आरक्षण देना था। विधेयक के मुताबिक 815 सीटें राज्यों और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों से प्रस्तावित थीं।

कहां फंस गया पेच

मगर इस पूरी प्रक्रिया में एक पेच फंस रहा था। दरअसल, 1976 में 42वां संविधान संशोधन किया गया। इसमें 1971 की जनगणना के आधार पर लोकसभा में हर राज्य की कुल सीटों की संख्या और राज्य विधानसभाओं में कुल सीटों की संख्या को साल 2000 तक स्थिर कर दिया गया। साल 2001 में 84वां संविधान संशोधन करके सीटों की संख्या को 2026 के बाद पहली जनगणना के प्रकाशन तक स्थिर किया गया। इस लिहाज से केंद्र सरकार लोकसभा में सीटों की संख्या बिना संविधान संशोधन के नहीं बढ़ा सकती थी।

 

परिसीमन भी 2027 की जनगणना के बाद होता। जब परिसीमन 2027 के बाद होता तो महिला आरक्षण भी बाद में लागू होता। हालांकि सरकार ने इसकी एक काट निकाली। वह 131वां संविधान संशोधन लाई, ताकि 2011 की जनगणना को परिसीमन और महिला आरक्षण का आधार बनाया जा सके। हालांकि विपक्ष के विरोध के कारण सरकार की उम्मीदों पानी फिर गया।