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पहले इवांका, अब ट्रंप को मारने की कोशिश? व्हाइट हाउस के बाहर फायरिंग, हमलावर ढेर


अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मारने की कोशिश की गई है। शनिवार को व्हाइट हाउस के पास अचानक गोलीबारी की आवाजें सुनाई दीं। दर्जनों गोलियां चलीं, जिसके बाद अमेरिकी सीक्रेट सर्विस ने तुरंत इलाके को सील कर दिया।

घटना व्हाइट हाउस के ठीक बाहर 17 स्ट्रीट और पेंसिल्वेनिया एवेन्यू के कोने पर हुई। सीक्रेट सर्विस ने एक व्यक्ति पर गोली चलाई, जिसे संदिग्ध बताया जा रहा है। संदिग्ध की मौत हो गई है। गोली लगने के बाद वह जख्मी हो गया था, अस्पताल में भर्ती कराने के दौरान उसकी मौत हो गई।

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हमलावर ढेर, आम नागरिक घायल

सीक्रेस सर्विस की फायरिंग में एक आम आदमी भी घायल हुआ है। हमलावर की मौत हो गई है। फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) के डायरेक्टर काश पटेल ने बताया कि उनकी टीम सीक्रेट सर्विस की मदद कर रही है। 

काश पटेल, डायरेक्टर, FBI:-
व्हाइट हाउस के पास गोलीबारी की घटना में हम मौके पर हैं और जांच कर रहे हैं।

हमले के वक्त कहां थे डोनाल्ड ट्रंप?

हमले के वक्त अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व्हाइट हाउस में ही मौजूद थे। गोलीबारी की खबर लगते ही इलाके में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी पहुंचे। रिपोर्टर्स को व्हाइट हाउस के प्रेस ब्रीफिंग रूम में छिपने को कहा गया।

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कैसे ढेर हुआ हमलावर?

सीक्रेट सर्विस के जवान राइफल लेकर नॉर्थ लॉन पर घूमते दिखे। बाद में शाम करीब 6:45 बजे ईटी लॉकडाउन हटा लिया गया। यह घटना पिछले महीने व्हाइट हाउस कॉरेस्पॉन्डेंट्स डिनर में हुई गोलीबारी के एक महीने बाद हुई है। अभी तक इस गोलीबारी की वजह सामने आई है। 

हमलावर कौन था, क्या पता चला?

हमलावर का नाम नासिर बेस्ट है, उसकी उम्र 21 साल थी। अमेरिकी सीक्रेट सर्विस ने उसे मार गिराया। बेस्ट ने कथित तौर पर रिवॉल्वर से अचानक फायरिंग शुरू कर दी, जिससे इलाके में भगदड़ मच गई। गोलीबारी में एक आम नागरिक गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि सीक्रेट सर्विस के किसी कर्मी को चोट नहीं आई।

बेस्ट मानसिक रूप से परेशान था और वह खुद को जीसस क्राइस्ट मानता था। उसका व्हाइट हाउस परिसर के आसपास पहले भी कई बार घुसपैठ का प्रयास करने का इतिहास रहा है। जून 2025 में उसे ‘भगवान’ होने का दावा करते हुए गिरफ्तार किया गया था, मानसिक स्वास्थ्य जांच के लिए भर्ती कराया गया था। जुलाई में भी व्हाइट हाउस परिसर में घुसने की कोशिश करने पर उसे कोर्ट से दूर रहने का आदेश दिया गया था। 

ट्रेन के पास आत्मघाती हमला, 24 मरे, 82 घायल


पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में रविवार को रेलवे ट्रैक पर जोरदार विस्फोट हो गया। इस धमाके में कम से कम 82 लोग घायल हो गए। कम से कम 24 लोगों की मौत हुई है। धमाका क्वेटा के चमन फाटक रेलवे स्टेशन के पास हुआ। धमाके में कुछ लोगों के मौत की आशंका जताई जा रही है।

विस्फोट इतना तेज था कि ट्रेन के तीन डिब्बे पटरी से उतर गए, जिनमें इंजन भी शामिल था। दो डिब्बे पलट भी गए। ट्रेन को आंशिक नुकसान पहुंचा है। आसपास खड़ी 10 से ज्यादा गाड़ियों को नुकसान पहुंचा है। इमारतों के शीशे और खिड़कियां टूट गईं।

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जाफर एक्सप्रेस में धमाका, पेशावर जा रही थी ट्रेन

पाकिस्तानी रेलवे अधिकारियों का कहना है कि पेशावर जाने वाली जाफर एक्सप्रेस ट्रेन को सुरक्षा के लिहाज से क्वेटा रेलवे स्टेशन पर रोक दिया गया है। घायलों के इलाज के लिए क्वेटा के सरकारी अस्पतालों में इमरजेंसी घोषित कर दी गई है। डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को बुलाया गया है। 

पाकिस्तान सरकार ने क्या कहा?

रेलवे मंत्री हनीफ अब्बासी ने इस घटना की निंदा की है। उन्होंने इसे आतंकवाद की कायराना हरकत करार दिया है। उन्होंने कहा कि दुश्मन ताकतें पाकिस्तान में अशांति फैलाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन देश आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेगा।

 

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सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर 

गृह मंत्री के प्रवक्ता बाबर यूसुफजई ने कहा कि सभी सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रख दिया गया है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे ब्लास्ट वाली जगह के पास न जमा हों, जिससे बचाव कार्य आसानी से चल सके। अभी तक किसी आतंकी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। 

रात को नींद नहीं आती? घबराहट और अनिद्रा होगी छू मंतर, बस करना होगा यह काम


आजकल बहुत से लोग रात में ठीक से सो नहीं पाते। कुछ लोगों को बिस्तर पर जाने के बाद भी लंबे समय तक नींद नहीं आती जबकि कुछ लोग रात में बार-बार जाग जाते हैं। कई बार लोग इसे सिर्फ तनाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन हर बार वजह एक जैसी नहीं होती। कई लोगों में ज्यादा चिंता और घबराहट की वजह से नींद खराब होती है जबकि कुछ लोग अनिद्रा की समस्या से परेशान होते हैं। दोनों का असर नींद पर पड़ता है लेकिन दोनों अलग चीजें हैं।

 

घबराहट में इंसान का दिमाग लगातार किसी ना किसी बात में उलझा रहता है। घबराहट होने पर कई लोगों को दिल की धड़कन तेज लगती है, बेचैनी महसूस होती है, अचानक डर लगता है या दिमाग में एक ही बात बार-बार घूमती रहती है। यही वजह है कि रात में नींद टूटती रहती है या देर से नींद आती है।

 

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अनिद्रा का मतलब है नींद से जुड़ी ऐसी परेशानी जिसमें इंसान चाहकर भी ठीक से सो नहीं पाता। कई लोगों को देर रात तक नींद नहीं आती कुछ लोगों की नींद थोड़ी देर में टूट जाती है और फिर दोबारा नींद नहीं आती।

घबराहट और अनिद्रा में फर्क क्या है?

घबराहट में असली समस्या ज्यादा चिंता और बेचैनी होती है जिसकी वजह से नींद खराब होती है। जबकि अनिद्रा में मुख्य परेशानी खुद नींद की होती है। यानी इंसान सोना चाहता है लेकिन फिर भी नींद नहीं आती या बार-बार टूट जाती है। कई बार दोनों समस्याएं साथ में भी हो सकती हैं। ज्यादा चिंता की वजह से अनिद्रा शुरू हो सकती है और लगातार खराब नींद की वजह से घबराहट और बढ़ सकती है।

नींद के आसान घरेलू उपाय

1.रोज एक तय समय पर सोने और उठने की आदत बनाने से नींद बेहतर हो सकती है। जब सोने का समय रोज बदलता रहता है तो शरीर की नींद की आदत बिगड़ सकती है।

 

2. रात में ज्यादा चाय, कॉफी या कैफीन वाली चीजें लेने से नींद आने में परेशानी हो सकती है। कोशिश करनी चाहिए कि शाम के बाद ऐसी चीजें कम ली जाएं।

 

3. सोने से पहले गुनगुना दूध पीना कई लोगों को आराम महसूस करा सकता है। दूध में ऐसे एलिमेंट पाए जाते हैं जो शरीर को शांत करने में मदद कर सकते हैं।

 

4. केला, बादाम और अखरोट जैसी चीजें भी नींद के लिए फायदेमंद मानी जाती हैं। इनमें ऐसे पोषक तत्व होते हैं जो शरीर को आराम देने में मदद कर सकते हैं।

 

5. सोने से पहले मोबाइल और लैपटॉप का ज्यादा इस्तेमाल करने से भी नींद खराब हो सकती है। स्क्रीन की तेज रोशनी दिमाग को जागे रहने का मैसेज देती है।

 

6. हल्का म्यूजिक सुनना, गहरी सांस लेना, ध्यान करना या थोड़ी देर शांत बैठना दिमाग को आराम देने में मदद कर सकता है।

 

7. सुबह की सैर, हल्की कसरत और धूप लेना भी नींद की आदत को बेहतर बनाने में मदद करता है।

 

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कब डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए?

अगर घरेलू उपाय करने के बाद भी कई हफ्तों तक नींद की समस्या बनी रहे या इसका असर रोज की जिंदगी पर दिखने लगे तो डॉक्टर या साइकेट्रिस्ट से सलाह जरूरी ले।

 

 

क्या लालच इंसान को अंधा बना देता है? ईसा मसीह के शिष्य यहूदा की कहानी से समझिए


लालच एक ऐसी भावना है, जो कई व्यक्तियों को कभी न कभी होती है। इसी लालच की वजह से व्यक्ति अपना ईश्वर, प्रेम, दोस्ती और रिश्ता भूल जाता है। इंसान लालच में अंधा हो जाता है। ईसाई धर्म की बाइबल के मुताबिक, ईसा मसीह के बारहवें शिष्य भी लालच के जाल में फंस गए थे, जो ईसा मसीह के प्रेम, शिक्षा और उपदेश को भूल चुके थे। उन्होंने लालच में आकर ईसा मसीह को ही धोखा दे दिया था। धार्मिक जानकारों के मुताबिक, व्यक्ति के मन में ही शैतान छिपा होता है। इसी शैतानी भावना की वजह से ईसा मसीह के 12 शिष्य यहूदा इस्करियोती फंस गए थे।

 

ईसाई धर्म की बाइबल के मुताबिक, ईसा मसीह के 12 शिष्य थे। उन्हीं के आखिरी शिष्य का नाम यहूदा इस्करियोती था। वह ईसा मसीह के बेहद प्रिय शिष्यों में से एक थे। हालांकि, यहूदा के विचार बाकी 11 शिष्यों से अलग थे। इसी ने लालच की वजह से ईसा मसीह के साथ छल किया था। यहूदा ने किस प्रकार लालच की वजह से ईसा मसीह को धोखा दिया था, आइए समझते हैं।

 

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बाइबल में लालच के बारे में क्या लिखा है?

बाइबल में बताया गया है कि जब किसी व्यक्ति को लालच हो जाता है, तो वह पहले छोटे-छोटे समझौतों से शुरुआत करता है। उसके बाद वह लोगों से बेईमानी करने लगता है। धीरे-धीरे इंसान की अंतरात्मा की भावना सुन्न होने लगती है, जिसके बाद उस व्यक्ति को पाप भी गलत नहीं लगता।

बाकी शिष्यों से क्यों अलग था यहूदा?

धार्मिक कहानियों के मुताबिक, यहूदा इस्करियोती यहूदिया के एक गांव में रहता था। वहीं ज्यादातर शिष्य गलील प्रांत के थे। उस दौरान ईसा मसीह के सभी शिष्यों से संबंधित पैसों की जिम्मेदारी यहूदा के हाथ में थी। वहीं भेंट में मिले पैसों का हिसाब-किताब रखता था। यहूदा लगातार 3 सालों तक ईसा मसीह के साथ रहा। इस दौरान उसने ईसा मसीह के प्रेम, दया, चमत्कार और उपदेश को महसूस किया।

लालच में सब भूल गया

कुछ समय बाद यहूदा को दान पेटी में मिले पैसों का लालच हो गया। वह धीरे-धीरे इस लालच में सब भूल गया। यहूदा बड़ी चालाकी से धन कोष के रुपयों को चुराने लगा। इसी चालाकी में वह ईसा मसीह के प्रेम, उपदेश और सीख सब भूल गया। यहूदा शुरुआत में थोड़े-बहुत पैसे चुराता था, उसके बाद वह पाप की चरम सीमा तक पहुंच गया। वह दिन में ईसा मसीह से धर्म से जुड़े उपदेश सुनता था, वहीं रात के समय पैसे चुराता था।


एक बार गांव की एक महिला ने 300 दीनार का इत्र ईसा मसीह के चरणों में समर्पित किया था। यह देख यहूदा ने विरोध जताते हुए कहा कि इतने पैसे गरीबों को भेंट दिए जा सकते थे। हालांकि, मन ही मन वह पैसे इसलिए चाहता था ताकि उन्हें चुरा सके।

 

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लालच की वजह से ईसा मसीह को दिया धोखा

कुछ समय बाद यहूदा खुद उन लोगों के पास गया, जिन्होंने ईसा मसीह को गिरफ्तार किया था। बाइबल के मुताबिक, 30 चांदी के सिक्कों के लालच में यहूदा ने पुजारियों को वादा किया। यानी यहूदा ने पैसों के लालच में अपने प्रभु को धोखा दे दिया। इसी लालच की वजह से उसने उस प्रभु को खो दिया, जो करोड़ों लोगों को जीना सिखाते थे।

 

ईसा मसीह शाम के समय एक जंगल में प्रार्थना कर रहे थे। उसी दौरान यहूदा ने ईसा मसीह को प्रेम दिखाते हुए चूमा। हालांकि, यह प्रेम का संदेश नहीं था, बल्कि एक चाल थी। दरअसल, यहूदा ने चूमकर पुजारियों को संकेत दिया कि ईसा मसीह कौन हैं, ताकि दूसरे लोग उन्हें गिरफ्तार कर सकें। इसके बाद ऐसा ही हुआ। उन लोगों ने ईसा मसीह को गिरफ्तार कर लिया। बदले में यहूदा को 30 चांदी के सिक्के मिले। हालांकि, जल्द ही यहूदा को अपने कर्मों का एहसास हुआ और वह पछताने लगा।

 

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सब खोने के बाद यहूदा को हुआ पछतावा

ईसा मसीह की गिरफ्तारी के बाद जब पुजारियों ने उन्हें मृत्युदंड सुनाया गया, तब जाकर यहूदा को होश आया। इसके बाद यहूदा दौड़कर पुजारियों के पास गया और ईसा मसीह के मृत्युदंड को रोकने लगा। उसने पुजारियों से मिले सारे सिक्के फेंक दिए और ईसा मसीह की रक्षा की गुहार लगाई। वह चिल्ला-चिल्लाकर कहने लगा, ‘मैंने बहुत बड़ा पाप किया है।’तब पुजारियों ने कहा, ‘अब बहुत देर हो चुकी है, तुम जाओ।’ इसके बाद यहूदा ने फांसी लगा ली। इस कहानी से साफ संदेश मिलता है कि लालच एक ऐसी भावना है, जो बड़े से बड़े विद्वान व्यक्ति को भी अंधा बना सकती है।

बांग्लादेश में बढ़ रहा पाकिस्तान का सैन्य दखल, चीन की भी दिलचस्पी; भारत अलर्ट


मोहम्मद युनूस की अंतरिम सरकार में बांग्लादेश ने पाकिस्तान के साथ रिश्तों को सबसे बेहतर किया। अब तारिक रहमान के शासन में भी दोनों देशों के बीच सैन्य गठबंधन बढ़ रहा है। यह भारत के लिए एक बड़ी चिंता बनकर उभरी है। हाल ही में पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री व विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा कि बांग्लादेश से पाकिस्तान के रिश्ते बेहतर हो रहे हैं। पाकिस्तान ने चीन, अजरबैजान और तुर्की के साथ बांग्लादेश को मित्र मुल्क के तौर पर जोड़ा है।  

 

बांग्लादेश अब पाकिस्तान से द्विपक्षीय व्यापार के अलावा सैन्य खरीद और रणनीतिक साझेदारी बढ़ा रहा है। हाल ही में इस्लामाबाद ने बांग्लादेश को दो जेएफ-17 फाइटर जेट सिमुलेटर सौंपे। माना जा रहा है कि आने वाले समय में बांग्लादेश चीन निर्मित जेएफ-17 थंडर फाइटर जेट खरीद सकता है। इन विमानों की तैनाती भारतीय सीमा के करीब होने की उम्मीद है।

 

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पाकिस्तान की तरफ बढ़ रहा झुकाव

1971 से 2024 तक बांग्लादेश के रिश्ते पाकिस्तान के साथ उतने बेहतर नहीं थे। मगर 05 अगस्त 2024 को शेख हसीना के अपदस्थ होने के बाद बांग्लादेश का झुकाव पाकिस्तान की तरफ बढ़ा है। मगर पाकिस्तान के साथ बढ़ती सैन्य रणनीति की नींव मोहम्मद युनूस की अंतरिम सरकार ने रखी। इसी साल जनवरी में कुछ मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि बांग्लादेश पाकिस्तान के साथ रक्षा समझौता करने पर विचार कर रहा है। दोनों देशों के बीच जेएफ-17 फाइटर जेट की बिक्री पर गहन मंथन जारी है। 

रक्षा सहयोग में पाकिस्तान दिखा रहा दिलचस्पी

मौजूदा समय में भी दोनों देशों की बीच रक्षा सहयोग बढ़ाने पर विचार विमर्श चल रहा है। पाकिस्तान अब बांग्लादेश को रक्षा उपकरण, उन्नत सिस्टम के अलावा प्रशिक्षण देने पर दिलचस्पी दिखा रहा है। पिछले एक वर्ष से पाकिस्तान दुनिया के अलग-अलग देशों को सैन्य उपकरण और विमान भेजने की जुगाड़ में है। सऊदी अरब के सहयोग से लीबिया को विमान भी बेचे हैं।

 

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चीन का भी बढ़ रहा दखल

बांग्लादेश के साथ न केवल पाकिस्तान, बल्कि चीन भी सहयोग बढ़ा रहा है। मौजूदा समय में बांग्लादेश करीब 2.2 अरब डॉलर में 20 फाइटर जेट खरीने पर मंथन कर रहा है। माना जा रहा है कि बांग्लादेश पाकिस्तान और चीन की मदद से अपनी वायुसेना को आधुनिक बनाएगा। पुराने विमानों की जगह नए विमानों की तैनाती की जाएगी। बता दें कि बांग्लादेश फ्रिगेट, टैंक, मिसाइल और पनडुब्बी भी चीन से खरीद रहा है।

भारत हुआ अलर्ट

बांग्लादेश में पाकिस्तान और चीन के बढ़ते दखल से भारत चिंतित है। खासकर चिकन नेक पास पाकिस्तान सेना की बढ़ती गतिविधियों ने भारत को अलर्ट कर दिया है। कुछ मीडिया रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि बांग्लादेश और पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों के बीच रणनीतिक यात्राओं में भी इजाफा हुआ है। अगर बांग्लादेश में पाकिस्तान का प्रभाव बढ़ता है तो यह भारत के लिहाज से बेहद संवेदनशील है।

लगातार तीसरी बार बढ़े CNG के दाम, मई में कितनी मंहगी हुई? अपने शहर का रेट जानें


देशभर में पेट्रोल-डीजल के दामों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। आज एक बार फिर पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोतरी हुई है। इसके बाद अब CNG उपभोक्ताओं को भी महंगाई का बड़ा झटका लगा है। दिल्ली-NCR समेत कई शहरों में CNG के दाम भी फिर से बढ़ा दिए गए हैं। इस बार सीएनजी के दाम में एक रुपये की बढ़ोतरी की गई है। इससे पहले हाल के दिनों में सीएनजी की कीमतों में दो बार बढ़ोतरी हुई है। 

 

दिल्ली में सीएनजी की कीमत में एक रूपये प्रति किलो की बढ़ोतरी की है। पिछले 10 दिनों में यह तीसरी बार है जब सीएनजी के दाम बढ़ाए गए हैं। नई कीमतें लागू होने के बाद दिल्ली में सीएनजी का रेट 80 रुपये प्रति किलो के पार पहुंच गया है। 

 

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मई में लगातार बढ़ रहे दाम

 इससे पहले भी मई महीने में सीएनजी की कीमतों को बढ़ाया गया था। 17 मई को सीएनजी के दाम में 1 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की गई थी और उससे भी पहले, 15 मई को सीएनजी की कीमतों में 2 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की गई थी। मुंबई, नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम जैसे शहरों में भी दाम बढ़ने से टैक्सी, ऑटो और प्राइवेट गाड़ियों के चालकों की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है। 

किन लोगों पर पड़ेगा असर?

CNG की कीमत बढ़ने का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो रोजाना ऑटो, टैक्सी या CNG कारों का इस्तेमाल करते हैं। दिल्ली-NCR में लाखों वाहन CNG पर चलते हैं। ऐसे में किराया बढ़ने की संभावना भी बढ़ गई है। ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर लागत बढ़ने से सामान ढुलाई महंगी हो सकती है, जिसका असर आम लोगों की जेब पर भी दिखाई देगा। 

शहरों में क्या हैं नए रेट?

नई बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में CNG की कीमत 81.09 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है, जबकि मुंबई में रेट 84 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुके हैं। नोएडा, गुरुग्राम और गाजियाबाद में भी कीमतों में इजाफा हुआ है। अलग-अलग राज्यों में टैक्स और लोकल चार्ज के हिसाब से रेट अलग हैं। जानकारों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय हालात जल्द नहीं सुधरे तो आने वाले दिनों में सीएनजी के दामों में और बढ़ोतरी हो सकती है। इससे आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर भी दबाव बढ़ेगा।

 

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क्यों बढ़ रहे हैं सीएनजी के दाम?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी इसका बड़ा कारण है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और सप्लाई चेन पर असर की वजह से भारत में गैस कंपनियों की लागत बढ़ गई है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव का सीधा असर घरेलू सीएनजी कीमतों पर पड़ रहा है।

 

सरकारी तेल कंपनियों का कहना है कि लंबे समय तक कीमतें स्थिर रखने की वजह से उन पर भारी आर्थिक दबाव पड़ा। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने हाल ही में कहा था कि सरकारी कंपनियां रोजाना हजारों करोड़ रुपये का बोझ उठा रही थीं। इसी वजह से अब धीरे-धीरे ईंधन कीमतों को बढ़ाया जा रहा है। 

गर्मी के दिनों में आपको भी ज्यादा नींद आती है? जानिए इसके पीछे का कारण


देशभर में हीटवेव का असर दिखाई दे रहा है। लोग गर्मी से बेहाल है। इस समय तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच गया है। इस मौसम में अगर आपको भी पूरी नींद लेने के बावजूद थकान और दिन भर भारी-भारी महसूस होती है तो आप अकेले नहीं है। अधिक तापमान और उमस की वजह से ऐसा होना आम बात है। बाहर का तापमान ज्यादा होने पर शरीर को अंदर का तापमान सामान्य रखने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इस प्रकिया को थर्मोरेगुलेशन कहा जाता है।

 

इस मौसम में शरीर में पानी की कमी, रात को पर्याप्त नींद नहीं लेने और खान-पान में गड़बड़ होने की वजह से व्यक्ति दिनभर थका हुआ महसूस करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक हीट स्ट्रेस का असर आपके फिजिकल और मेंटल स्वास्थ्य पर पड़ता है। डॉक्टर के मुताबिक गर्मी में पसीना अधिक आता है, इस वजह से दिल शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ा देता है। जब आपका शरीर ज्यादा काम करता है तो जल्दी थक जाता है। इस वजह से जब हम गर्मी में बाहर होते हैं तो ज्यादा थका हुआ महसूस करते हैं।

 

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दिन भर क्यों महसूस आती हैं नींद?

अधिक तापमान का नींद पर असर

 

अधिक तापमान की वजह से नींद की गुणवत्ता पर प्रभाव पड़ता है। इस बात की पुष्टि कई स्टडी में भी हुई है। Journal of the Neurological Sciences की रिपोर्ट के मुताबिक हीटवेव की वजह से आपकी नींद की अवधि कम हो जाती है। खासतौर से डीप स्लीप और आरईएम (रैपिड आई मूवमेंट स्लीप) कम होता है। यह नींद का वह समय होता है जिसमें सबसे ज्यादा सपने आते हैं। आरईएम का टाइम स्पैन ज्यादा होना चाहिए।

 

शरीर में पानी की कमी

 

गर्मी में डिहाइड्रेशन की समस्या सबसे आम है। खासतौर से दिन के समय में शरीर में पानी की कमी हो जाती है जिसकी वजह से सिरदर्द, चक्कर आने की समस्या होती है। 

 

खान-पान में गड़बड़ी

 

आपके खान-पान का प्रभाव भी नींद पर पड़ता है। गर्मी में तली-भूनी चीजों को खाने से थकान महसूस होती है। इसी वजह से डॉक्टर इस मौसम में हल्का खाना खाने की सलाह देते हैं।

 

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दिन में एनर्जी बनाएं रखने के लिए क्या करें?

  • दिन भर थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहना चाहिए।
  • दोपहर में धूप में निकलने से बचना चाहिए।
  • कमरे को हवादार रखें।
  • सोने से आधे घंटे पहले फोन बंद कर दें।
  • धूप में काम करते समय थोड़ी-थोड़ी देर पर ब्रेक लें।
  • दिन में हल्का खाना खाएं।
  • चाय-कॉफी का सेवन कम करें।

26 या 27 मई कब है बकरीद, इस दिन क्यों दी जाती है कुर्बानी? जानिए हर बात


इस्लाम धर्म में ईद-उल-अजहा यानी बकरीद बेहद खास त्योहारों में से एक है। यह त्योहार केवल खुशियां और उत्सव लेकर नहीं आता, बल्कि लोगों को खास सीख भी देता है। इस पर्व के जरिए लोग अल्लाह के प्रति अपना सब कुछ समर्पित करने के भाव को दर्शाते हैं। बकरीद का त्योहार इस्लामिक कैलेंडर के हिसाब से मनाया जाता है, जो साल के आखिरी महीने यानी जिलहिज्जा में पड़ता है। जिलहिज्जा महीना इस्लाम धर्म में सबसे पाक महीनों में माना जाता है। इसी महीने में लोग हज की यात्रा करते हैं।

 

इस्लामिक कैलेंडर चांद की दिशा पर आधारित होता है। इसी वजह से बकरीद त्योहार की सही तारीख चांद दिखने के मुताबिक तय की जाती है। अंग्रेजी कैलेंडर के मई महीने में ही इस्लामिक कैलेंडर का आखिरी महीना माना जाता है। हर साल की तरह इस साल भी कई लोगों को कन्फ्यूजन है कि आखिर बकरीद का त्योहार कब मनाया जाएगा। जहां एक तरफ कई जानकारों का मानना है कि बकरीद का त्योहार 27 मई के दिन मनाया जाएगा, वहीं दूसरी तरफ कई लोगों का मानना है कि 28 मई के दिन त्योहार मनाना चाहिए। ऐसे में सही तारीख क्या है, आइए जानते हैं।

 

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कब मनाई जाएगी बकरीद?

इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक, जिलहिज्जा महीने में जिस रात चांद दिखेगा, उसके बाद 10वें दिन बकरीद का त्योहार मनाया जाएगा। इस बार कई लोगों को उम्मीद थी कि 17 मई की रात को चांद नजर आएगा। जबकि 17 मई के बजाय 18 मई की रात को चांद नजर आया। इसी वजह से इस साल 28 मई के दिन बकरीद का त्योहार मनाया जाएगा। बकरीद के त्योहार में सबसे पहले बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक नमाज अदा करते हैं, उसके बाद बकरी या किसी अन्य जानवर की कुर्बानी दी जाती है।


बकरीद के दिन कुर्बानी परंपरा का रहस्य

इस्लामिक मान्यताओं के मुताबिक, एक बार पैगंबर हजरत इब्राहिम अल्लाह को अपनी सबसे प्यारी चीज कुर्बान करना चाहते थे। अल्लाह के हुक्म पर वह अपने बेटे की कुर्बानी देने के लिए तैयार हो गए थे। यह देखकर अल्लाह उनकी  समर्पण से खुश हुए और उनके बेटे की जान बचा ली। इसके बदले अल्लाह ने जानवर की कुर्बानी देने का आदेश दिया। तभी से बकरीद के दिन कुर्बानी देने की परंपरा शुरू हुई।

 

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बकरीद के त्योहार में बकरी की कुर्बानी केवल एक रस्म नहीं है, बल्कि इस परंपरा में कई गहरे अर्थ छिपे हुए हैं। कुर्बानी के जरिए लोग त्याग, समर्पण और जरूरतमंदों की मदद करना सीखते हैं। कुर्बानी के बाद मांस को तीन हिस्सों में बांटा जाता है। पहला हिस्सा परिवार के लिए रखा जाता है। दूसरा हिस्सा रिश्तेदारों और दोस्तों को दिया जाता है। वहीं तीसरा हिस्सा गरीब और जरूरतमंद लोगों में बांटा जाता है। इसी तरह यह त्योहार लोगों को मिल-बांटकर खुशियां मनाने की सीख देता है।

 

नोट- यह लेख धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। इसमें दी गई जानकारी की हम पुष्टि नहीं करते

दोनों पैर कट गए थे, सिर्फ हाथों के दम पर एवरेस्ट चढ़ गया रूस का यह शख्स


रूस के रहने वाले माउंटेनियर रुस्तम नबीयेव ने इतिहास बना दिया है। 11 साल पहले दोनों पैर कट जाने के बावजूद रुस्तम ने अपने हाथों के सहारे दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई पूरी की है। माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई 8,848.86 मीटर है। रुस्तम ने 20 मई 2026 को नेपाल के चढ़ाई सीजन के दौरान यह कामयाबी हासिल की है। साल 2015 में एक मिलिट्री बैरक के गिरने से उन्होंने अपने दोनों पैर खो दिए थे।

 

रुस्तम नबीयेव साल 2015 में उस हादसे का शिकार हुए थे जब वह सो रहे थे और अचानक बैरक की बिंल्डिंग गिर गई थी। उस घटना में कई सैनिकों की मौत हो गई थी। इस बड़े हादसे में पैर गंवाने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। एवरेस्ट बेस कैंप के फील्ड ऑफिस कोऑर्डिनेटर खिम लाल गौतम ने बताया कि रुस्तम सुरक्षित तरीके से शिखर तक पहुंच गए थे और उसके बाद वापस बेस कैंप की तरफ आ गए। चढ़ाई के वीडियो में वह खुम्बु आइसफॉल की खतरनाक सीढ़ियों को सिर्फ अपने हाथों के दम पर पार करते हुए नजर आए। उस आइसफॉल को पार करके 6,065 मीटर की ऊंचाई पर स्थित कैंप एक तक पहुंचने में उन्हें लगभग 15 घंटे का समय लगा था।

 

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एवरेस्ट पर जीत

पैर खोने के बाद रुस्तम ने सबसे पहले रूस और यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रस को चढ़ा था। इसके बाद 2021 में उन्होंने नेपाल में दुनिया की आठवीं सबसे ऊंची चोटी माउंट मनास्लू पर भी चढ़ाई की थी। इस साल उनका एवरेस्ट का बड़ा लक्ष्य भी पूरा हो गया। चोटी पर पहुंचने के बाद उन्होंने इंस्टाग्राम पर अपनी बात कही। उन्होंने लिखा कि 20 मई को सुबह 8 बजकर 16 मिनट पर नेपाल के समय के हिसाब से उन्होंने माउंटेनियर के इतिहास में पहली बार बिना पैरों के सिर्फ अपने हाथों का इस्तेमाल करके एवरेस्ट की चोटी को छू लिया है। उन्होंने यह जीत उन सभी के नाम की जो उन्हें देख रहे थे। उन्होंने कहा कि जब तक आपके अंदर जान है तब तक लड़ते रहिए और आखिर तक लड़िए। 

 

 

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लोगों ने की तारीफ

जब रुस्तम के चढ़ाई वाले वीडियो और फोटो इंटरनेट पर आए तो लोगों ने उनकी हिम्मत और ताकत की बहुत तारीफ की। एक यूजर ने कमेंट किया कि जो लोग रुस्तम को विकलांग समझते हैं, असल में वह बहुत से लोगों से ज्यादा काबिल और मजबूत हैं।

10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव का एलान, 18 जून को होगी वोटिंग


भारत के चुनाव आयोग ने 10 राज्यों की कुल 24 राज्यसभा सीटों के चुनाव का एलान कर दिया है। इन सभी सीटों के लिए अगर जरूरी हुआ तो 18 जून को मतदान होगा। इन 24 में कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और गुजरात की चार-चार सीटें शामिल हैं। जिन सांसदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है उनमें कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा, कांग्रेस के दिग्विजय सिंह, केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और शक्ति सिंह गोहिल का नाम प्रमुख है।

 

चुनाव आयोग ने बताया है कि अधिसूचना 1 जून को जारी की जाएगी और नामांकन की आखिरी तारीख 8 जून को होगी। 9 तारीख को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 11 जून तक नाम वापस ले लिए जाएंगे। अगर कहीं पर चुनाव यानी मतदान की जरूरत पड़ती है तो 18 जून को सुबह 9 बजे से शाम के 4 बजे तक वोट डाले जाएंगे। उसी दिन शाम के 5 बजे से वोटों की गिनती पूरी होगी और यह पूरी चुनावी प्रक्रिया 20 जून को पूरी हो जाएगी।

 

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कहां-कहां होंगे चुनाव?

कुल 10 राज्यों की 24 सीटों के चुनाव होने हैं। इसमें से शिबू सोरेन के निधन के बाद खाली हुई सीट अगस्त 205 से खाली है। बाकी के 22 सदस्यों का कार्यकाल जून 2026 में और एक सांसद का कार्यकाल जुलाई में खत्म होना है। 24 में से 4-4 सीटें गुजरात, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में खाली हो रही हैं। इसके अलावा, मध्य प्रदेश और राजस्थान की भी तीन-तीन सीटें खाली हो रही हैं। झारखंड की दो और मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम की एक-एक सीट खाली हो रही है जिस पर चुनाव होने हैं।

 

इसमें गुजरात, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, मणिपुर, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में  भारतीय जनता पार्टी (BJP) की या उसके सहयोयिगों की सरकार है। कर्नाटक और झारखंड में कांग्रेस का उसके सहयोगियों की सरकार है। वहीं, मिजोरम में जोराम पीपल्स मूवमेंट के लाल्दुहोमा की सरकार है जो NDA या INDIA गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं।

 

2 सीटों के लिए उपचुनाव

महाराष्ट्र की एक सीट सुनेत्रा पवार के इस्तीफे के चलते खाली हो गई है। वह महाराष्ट्र की डिप्टी सीएम बनने के बाद बारामती विधानसभा सीट से विधायक चुनी गई हैं और अब राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया है। इसी तरह तमिलनाडु में ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) के नेता सी वी षणमुगम तमिलनाडु में विधायक चुने गए हैं और अब उन्होंने भी राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया है। सुनेत्रा पवार का कार्यकाल 3 जून 2028 तक तो सी वी षणमुगम का कार्यकाल 29 जून 2028 तक चलना था। इन दोनों सीटों पर भी 18 जून को ही वोटिंग होगी।

 

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रिटायर हो रहे सांसदों में बीजेपी के 12, कांग्रेस के 4, YSR कांग्रेस के तीन, तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) के 1, नेशनल पीपल्स पार्टी के 1, जनता दल (सेक्युलर) के 1 और मिजो नेशनल फ्रंट के एक सांसद शामिल हैं। एक सीट शिबू सोरेन के निधन के बाद खाली हुई है। राज्यों की विधानसभाओं की स्थिति देखें तो गुजरात, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश में बीजेपी का मजबूत होना तय है। वहीं, कर्नाटक में कांग्रेस मजबूत हो सकती है।