Home Blog

ट्रंप को US सुप्रीम कोर्ट से झटका! अमेरिका में जन्मे बच्चों की नागरिकता बरकरार


अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उनकी इमिग्रेशन नीति पर बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के उस कार्यकारी आदेश पर रोक लगा दी है, जिसके जरिए अमेरिका में जन्म लेने वाले कुछ बच्चों को अपने आप मिलने वाली नागरिकता (बर्थराइट सिटिजनशिप) पर रोक लगाने की कोशिश की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि फिलहाल अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को जन्म के आधार पर नागरिकता मिलती रहेगी।

 

डोनाल्ड ट्रंप ने जनवरी 2025 में दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद अपने पहले ही दिन इस आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। इस आदेश में कहा गया था कि अमेरिका में जन्म लेने वाले उन बच्चों को अपने आप अमेरिकी नागरिकता नहीं मिलेगी, जिनके माता-पिता अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे हैं या फिर स्टूडेंट वीजा, वर्क वीजा जैसे अस्थायी वीजा पर वहां मौजूद हैं। ट्रंप प्रशासन का कहना था कि जन्म से नागरिकता का अधिकार सिर्फ उन्हीं बच्चों को मिलना चाहिए, जिनके माता-पिता में से कम से कम एक अमेरिकी नागरिक या ग्रीन कार्ड होल्डर (स्थायी निवासी) हो।

 

यह भी पढ़ें: अयातुल्ला खामेनेई के जनाजे में शामिल होगा भारत, ईरान जाएंगे बिहार के राज्यपाल

14वें संशोधन की व्याख्या पर टिका था पूरा विवाद

यह मामला अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन की ‘सिटिजनशिप क्लॉज’ से जुड़ा था। इस प्रावधान के अनुसार, अमेरिका में जन्म लेने वाला और उसके अधिकार क्षेत्र में आने वाला लगभग हर व्यक्ति अमेरिकी नागरिक माना जाता है। पिछले 150 वर्षों से इसी आधार पर जन्म लेने वाले अधिकांश बच्चों को नागरिकता मिलती रही है। केवल कुछ विशेष मामलों, जैसे विदेशी राजनयिकों के बच्चों, को इससे बाहर रखा गया है।

 

सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि संविधान में लिखे ‘अमेरिका के अधिकार क्षेत्र’ की व्याख्या सीमित तरीके से की जानी चाहिए। प्रशासन ने यह भी दावा किया कि कुछ विदेशी नागरिक अपने बच्चों को अमेरिकी नागरिक बनवाने के लिए अमेरिका आते हैं, जिसे ‘बर्थ टूरिज्म’ कहा जाता है। हालांकि, सुनवाई के दौरान सरकार इस दावे के समर्थन में कोई ठोस आंकड़े पेश नहीं कर सकी।

 

यह भी पढ़ें: 10 डॉलर में पार्क बनाने के लिए दी थी जमीन, डेटा सेंटर के लिए 1 करोड़ में बेच दी

फैसले का लाखों परिवारों पर पड़ेगा असर

इस पूरे मामले की शुरुआत न्यू हैम्पशायर में रहने वाले कुछ परिवारों की याचिका से हुई थी। उनका कहना था कि अगर डोनाल्ड ट्रंप का यह आदेश लागू हो जाता तो उनके बच्चों की अमेरिकी नागरिकता पर असर पड़ता। ट्रंप के इस फैसले का असर हर साल अमेरिका में जन्म लेने वाले करीब ढाई लाख बच्चों पर पड़ सकता था। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को संविधान के तहत मिलने वाला जन्म से नागरिकता का अधिकार फिलहाल बरकरार रहेगा।

कभी साथ, कभी अलग, AAP और DMK ने CJI को लिखी INDIA गठबंधन की चिट्ठी पर किए दस्तखत


इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस’ (INDIA) गठबंधन की पिछली मीटिंग 23 जून को हुई थी। इस मीटिंग में कुल 21 पार्टियों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था। आम आदमी पार्टी (AAP) और द्रविड़ मुनेत्र कड़कम (DMK) ने इस मीटिंग से दूरी बनाई थी। अब एक बार फिर से ये दोनों दल INDIA गठबंधन के साथ दिख रहे हैं। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन ( SIR ) और चुनाव से जुड़े अन्य मुद्दों पर INDIA गठबंधन की ओर से भारत के चीफ जस्टिस (CJI) को एक चिट्ठी लिखी गई है। INDIA गठबंधन में शामिल कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि इस पर DMK और AAP ने भी दस्तखत किए हैं। यह दिखाता है कि AAP और DMK जैसे दल चाहकर भी INDIA गठबंधन से दूरी नहीं बना पा रहे हैं।

 

फिलहाल, इस चिट्ठी के बारे में जानकारी नहीं दी गई है कि इसमें क्या लिखा गया है और CJI से इसमें क्या मांग की गई है। बस इतना बताया गया है कि यह SIR और चुनावी प्रक्रिया के बारे में है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बताया है कि CJI को चिट्ठी लिखने का फैसला 8 जून को हुई बैठक में ही लिया गया था। उस मीटिंग में 21 राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के अलावा एक निर्दलीय सदस्य भी शामिल हुए थे। अब इस संयुक्त पत्र पर कुल 23 दलों ने दस्तखत किए हैं और इसे CJI को आज भेजा जाएगा।

 

यह भी पढ़ें: इस्तीफा वापस लेकर लौटे IAS रिंकू सिंह ने BJP नेता को मारा थप्पड़? देखें VIDEO

साथ आई DMK और AAP

जयराम रमेश के इसी X पोस्ट को रीपोस्ट करते हुए TMC के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने लिखा है, ‘INDIA की ओर अच्छी शुरुआ हुई है और इस बार CJI को लिखी गई चिट्ठी पर AAP और डीएमके ने भी दस्तखत किए हैं।’ इसका मतलब है कि भले ही दोनों गठबंधन खुद को INDIA से अलग बता रहे हों लेकिन मुद्दों के आधार पर वे साथ ही हैं।

 

यह भी पढ़ें: आखिरी वक्त का बदलाव करा रहा नुकसान, पंजाब, UP में वही गलती दोहरा रही कांग्रेस?

 

इस बारे में DMK के प्रवक्ता सर्वनन अन्नादुराई ने कहा है, ‘DMK ने इस लेटर पर दस्तखत किए हैं क्योंकि SIR की प्रक्रिया एकतरफा है। यह प्रक्रिया लोकतंत्र विरोधी है। यह लोगों को वोटिंग की प्रक्रिया से बाहर करती है जबकि लोगों को इस प्रक्रिया से जोड़ना होता है। यूनिवर्सिसल अडल्ट फ्रैंचाइज के आधार पर ही लोकतंत्र काम करता है लेकिन यहां तो SIR के जरिए मतदाताओं को ही वोटर लिस्ट से बाहर किया जा रहा है। हमने इसके दुष्परिणाम बिहार, बंगाल और कई अन्य राज्यों में देखे भी हैं। इसलिए हमने इस पर दस्तखत किए हैं कि SIR जैसी प्रक्रिया नहीं होनी चाहिए।’

दरअसल, लोकसभा चुनाव 2024 के बाद ही आम आदमी पार्टी (AAP) ने एलान कर दिया था कि अब वह INDIA गठबंधन का हिस्सा नहीं है। वहीं, तमिलनाडु में चुनाव नतीजे आने के तुरंत बाद ही DMK और कांग्रेस का गठबंधन टूट गया। इसके बाद से DMK कांग्रेस से नाराज है और उसने लोकसभा में अपने सांसदों को कांग्रेस से अलग बैठाने का भी इंतजाम कर लिया है। इस बीच दोनों दलों का इस लेटर पर दस्तखत करने का मतलब है कि अभी भी थोड़ी बहुत उम्मीद बाकी है और आगे आने वाले समय में भी इन दलों के साथ रहने की गुंजाइश बची हुई है।

 

मोटापे और डायबटीज के जोखिम को बढ़ाता है रात में देर से खाने की आदत, आज ही छोड़ें


हमारे खानपान का सीधा असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है। यह बात हम सब जानते हैं। क्या आप यह जानते हैं कि रात को देर से खाने की आदत सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। कई लोगों के घर में रात में देर से खाना होता है। कुछ लोगों के ऑफिस से लेट होते हैं, कुछ के अपने निजी कारण होते हैं। भले ही हमें यह बात सामान्य लगती है। इसका कोई नुकसान नहीं दिखाई देता है लेकिन इसका प्रभाव आपके शरीर पर पड़ता है। हमारा शरीर बॉडी क्लॉक के हिसाब से चलता है। यही क्लॉक नींद, हार्मोन और मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करती है।

 

सोने से ठीक पहले भारी खाना खाने से शरीर की इंटरनल क्लॉक बिगड़ सकती है जो मेटाबॉलिज्म, हार्मोन और अंगों के कामकाज को कंट्रोल करती है। शोध में पता चला है कि रात को लेट खाने से ब्लड शुगर कंट्रोल खराब हो सकता है, इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ सकता है, मोटापा बढ़ सकता है और ब्लड प्रेशर भी बढ़ सकता है। ये परिस्थितियां क्रोनिक किडनी बीमारी के मुख्य जोखिम में से एक है।

 

यह भी पढ़ें: सुबह की भागदौड़ से बचना है? रात में ऐसे तैयार करें स्कूल बैग

किडनी को पहुंचता है नुकसान

किडनी में लाखों छोटी छोटी नसें होती हैं। हाई ब्लड शुगर और हाई ब्लड प्रेशर इन नाजुक फिल्टरों को नुकसान पहुंचाते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान कोई लक्षण नहीं दिखाई देता है। जब लक्षण दिखाई देते हैं तब तक नुकसान पहुंच चुका होता है। रात में 10. 30 या 11 बजे के बाद खाने से सिर्फ पाचन पर ही प्रभाव नहीं पड़ता है बल्कि ये लंबे समय में मेटाबॉलिज्म को भी प्रभावित करता है। इसक अलावा किडनी पर भी ज्यादा प्रेशर डालता है।

 

National Library of Medicine की जर्नल के मुताबिक रात के समय में पाचन की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। जब आप रात में भारी खाना खाते हैं तो शरीर को ज्यादा काम करना पड़ता है। इस दौरान ब्लड शुगर और ट्राइग्लिसराइड का लेवल बढ़ जाता है। इस वजह से मोटापा, टाइप 2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ जाता है। रात में हमारा शरीर काम करता है लेकिन उतने प्रभावी तरीके से नहीं करता है।

 

Pubmed की स्टडी के मुताबिक खराब मेटाबॉलिक हेल्थ और किडनी के बीच में सीधा संबंध है। जिन लोगों को डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर की बीमारी है उन्हें किडनी संबंधी बीमारियां का खतरा सबसे ज्यादा रहता है इसलिए डॉक्टर का कहना है अच्छा गट हेल्थ मतलब किडनी का स्वस्थ रहना।

 

यह भी पढ़ें: बारिश में छत टपकने से हैं परेशान? आज ही आजमाएं ये घरेलू उपाय, मिलेगी राहत

डिनर में किन चीजो को शामिल करें?

डिनर करने का कोई ऐसा एक समय नहीं है जो सबके लिए फिट बैठता हो। हालांकि डॉक्टर का कहना है कि जल्दी खाना शरीर के लिए ज्यादा फायदेमंद होता है। अपनी डाइट में साबूत आनाज, हरी सब्जियां, प्रोटीन और हेल्दी फैट को शामिल करें। 

 

इसके अलावा प्रोसेस्ड फूड, अधिक नमक, शुगर वाली ड्रिंक्स और रात को देर से खान की आदत को छोड़ दें।  ये चीजें आपके किडनी को एकदम से नुकसान नहीं पहुंचाएंगी। धीरे-धीरे ये चीजें बीमारियों का मुख्य कारण बनती है।

क्या है भगवान जगन्नाथ की महास्नान परंपरा? देव स्नान पूर्णिमा के बारे में जानिए


हिंदू पंचांग के अनुसार आज ज्येष्ठ महीने की पूर्णिमा है। इस दिन ओडिशा में बेहद अनोखे तरीके से ज्येष्ठ पूर्णिमा मनाई जाती है, जहां पुरी के जगन्नाथ मंदिर में भगवान के महास्नान यात्रा की परंपरा निभाई जाती है। इसे ओडिशा में देव स्नान पूर्णिमा कहा जाता है। पुरी का महास्नान देखने के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ओडिशा पहुंचे। लाखों लोग भगवान के दर्शन के लिए जगन्नाथ मंदिर पहुंचे। देव स्नान पूर्णिमा के दिन भगवान जगन्नाथ के अलावा उनके भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा का भी स्नान कराया जाता है। साथ ही आज के दिन कई भक्त यात्रा के दौरान ढोल-नगाड़े बजाकर देव स्नान का उत्सव मना रहे हैं।


इस साल स्नान यात्रा की शुरुआत सुबह 5 बजकर 15 मिनट से हुई थी। यह यात्रा देवी-देवताओं की पारंपरिक पाहंडी यानी शोभायात्रा के साथ शुरू हुई, जिसके बाद सुबह 8 बजे तक यात्रा संपन्न हो गई। यात्रा के दौरान धर्मेंद्र प्रधान भी मौजूद थे। स्कंद पुराण के मुताबिक देव स्नान की परंपरा 12वीं शताब्दी में राजा इंद्रद्युम्न ने शुरू की थी। तभी से हर साल ज्येष्ठ महीने में देव स्नान की परंपरा चली आ रही है।

 

यह भी पढ़ें: साप्ताहिक राशिफल: इस हफ्त किस राशि को मिलेगी सफलता, किसका होगा धन लाभ?

108 कलशों से कराया जाता है स्नान

ज्येष्ठ पूर्णिमा पर 108 कलशों में जल भरकर भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा का स्नान कराया जाता है। इसमें 35 कलशों के जल से भगवान जगन्नाथ का स्नान कराया जाता है, जबकि 33 कलशों के जल से भगवान बलभद्र का स्नान कराया जाता है। इसके अलावा देवी सुभद्रा को 22 कलशों के जल से स्नान कराया जाता है। इसके बाद बचे हुए 18 कलशों के जल से सुदर्शन चक्र का स्नान कराया जाता है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक जो भक्त महास्नान यात्रा में शामिल होता है, वह रोग और दुख से मुक्ति पाता है।


महास्नान के बाद देवी-देवताओं का एक खास प्रकार का श्रृंगार किया जाता है। इस दिन भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा को गज वेश में सजाया जाता है। इसके बाद भक्त देवी-देवताओं की पूजा करते हैं। महास्नान के बाद जगन्नाथ मंदिर का गर्भगृह बंद कर दिया जाता है, जिस दौरान कोई भी भक्त भगवान के दर्शन नहीं कर सकता।

 

यह भी पढ़ें: 29 जून का राशिफल: पूर्णिमा के दिन किन राशियों के लोगों को मिलेगी सफलता?

महास्नान के बाद क्यों बंद होता है गर्भगृह?

सनातन धार्मिक मान्यता के मुताबिक महास्नान के बाद भगवान जगन्नाथ की तबीयत खराब हो जाती है। इसलिए भगवान को आराम कराने के लिए गर्भगृह बंद कर दिया जाता है। इस दौरान कोई भी भक्त भगवान के दर्शन नहीं कर सकता। करीब दो सप्ताह बाद गर्भगृह के द्वार दोबारा खोले जाते हैं।

अयातुल्ला खामेनेई के जनाजे में शामिल होगा भारत, ईरान जाएंगे बिहार के राज्यपाल


ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार और दफन समारोह में भारत भी शामिल होगा। भारत की ओर से बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा शामिल होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी ईरान सरकार की ओर से निमंत्रण भेजा गया था लेकिन पहले से तय विदेश दौरे के कारण वह इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाएंगे।

 

प्रधानमंत्री मोदी जुलाई की शुरुआत में इंडोनेशिया, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया की यात्रा पर रहेंगे। ऐसे में भारत सरकार ने आधिकारिक प्रतिनिधित्व के लिए बिहार के राज्यपाल और विदेश राज्य मंत्री को ईरान भेजने का फैसला किया है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री मोदी को अंतिम संस्कार में शामिल होने का निमंत्रण दिया था।

 

यह भी पढ़ें: अफगानिस्तान बॉर्डर पर पाकिस्तान का जोरदार हमला, कम से कम 29 की मौत

4 जुलाई से शुरू होंगे अंतिम संस्कार के कार्यक्रम

ईरान में अयातुल्ला खामेनेई के अंतिम संस्कार की शुरुआत 4 जुलाई से होगी। तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला परिसर में उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद राजधानी तेहरान और धार्मिक शहर कोम में सार्वजनिक शोक यात्राएं निकाली जाएंगी। वहीं, इराक के पवित्र शहर नजफ और कर्बला में भी विशेष प्रार्थना सभाओं का आयोजन किया जाएगा। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पूरे कार्यक्रम को कई चरणों में आयोजित किया जा रहा है।

 

अंतिम दफन समारोह 9 जुलाई को ईरान के मशहद स्थित इमाम रजा दरगाह में होगा। मशहद अयातुल्ला खामेनेई का पैतृक शहर भी है। इससे पहले यह समारोह मार्च में आयोजित होना था लेकिन क्षेत्रीय संघर्ष और सुरक्षा कारणों के चलते इसे स्थगित कर दिया गया था। अब अंतिम संस्कार के कार्यक्रम कई दिनों तक अलग-अलग शहरों में आयोजित किए जाएंगे।

 

यह भी पढ़ें: भारत में झेल ले रहे लोग, फ्रांस में 41 डिग्री तापमान से कैसे मर गए हजारों लोग?

भारत की ओर से दो वरिष्ठ नेता करेंगे प्रतिनिधित्व

प्रधानमंत्री मोदी की अनुपस्थिति में बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा भारत सरकार का आधिकारिक प्रतिनिधित्व करेंगे। दोनों नेता अंतिम संस्कार और दफन समारोह में शामिल होकर भारत की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इसे भारत और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे राजनयिक संबंधों और आपसी सम्मान का प्रतीक माना जा रहा है।

11 के बदले 2 ही नंबर दिए! अब CBSE से क्यों भिड़े वेदांत श्रीवास्तव?


CBSE 12वीं के छात्र वेदांत श्रीवास्तव ने अपनी कॉपियों को दोबारा चेक करवाने के बाद मिले नंबरों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। वेदांत का कहना है कि 11 सवालों को दोबारा चेक करवाने पर उन्हें सिर्फ 2 नंबर मिले हैं। CBSE बोर्ड ने इसे झूठ बताते हुए कहा है कि छात्र के फिजिक्स के पेपर में पहले ही 9 नंबर बढ़ाए जा चुके हैं। वेदांत श्रीवास्तव ने एक वीडियो में बताया कि उन्होंने 11 सवालों के लिए री-इवैल्यूएशन यानी दोबारा कॉपी चेक करवाने का आवेदन किया था। उनका कहना है कि इस पूरे प्रोसेस के बाद उनके रिजल्ट में सिर्फ 2 नंबर ही बढ़कर आए हैं। इसमें से 1 नंबर गणित के पेपर में और 1 नंबर कंप्यूटर साइंस के पेपर में बढ़ा है।

 

CBSE ने वेदांत के दावों को गलत और झूठ बताया है। बोर्ड के मुताबिक, वेदांत के फिजिक्स के पेपर में 9 नंबर बढ़ाए गए हैं। बोर्ड ने यह भी बताया है कि 12वीं के री-इवैल्यूएशन के लिए आए 99.7 प्रतिशत आवेदनों पर काम पूरा हो चुका है। बाकी बची हुई कॉपियों की जांच भी जल्द खत्म हो जाएगी।

 

यह भी पढ़ें: UP TET 2026 परीक्षा के लिए कैसे डाउनलोड करें एग्जाम स्लिप? तरीका जानिए

 

CBSE के जवाब के बाद वेदांत ने फिर से अपनी बात रखी। उन्होंने साफ किया कि फिजिक्स में जो 9 नंबर बढ़े हैं वह री-इवैल्यूएशन से नहीं मिले हैं। वेदांत के मुताबिक, ये 9 नंबर उनके असली नंबर थे जो बोर्ड ने पहले उन्हें नहीं दिए थे क्योंकि उनकी फिजिक्स की असली कॉपी ही बदल दी गई थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि दोबारा कॉपी चेक करवाने की जो सरकारी प्रोसेस होती है, उसमें उन्हें सिर्फ वही 2 नंबर मिले हैं जिनका उन्होंने पहले जिक्र किया था।

मामला शुरू कैसे हुआ?

यह सब 13 मई को 12वीं का रिजल्ट आने के बाद शुरू हुआ। 19 मई को वेदांत ने देखा कि उन्हें फिजिक्स में उनकी उम्मीद से बहुत कम नंबर मिले हैं। जब उन्होंने अपनी कॉपी की फोटोकॉपी निकलवाई, तो उन्हें पता चला कि वह कॉपी उनकी थी ही नहीं। इसके बाद 23 मई को वेदांत ने इंटरनेट पर ‘एक्स’ यानी ट्विटर पर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि उन्होंने पूरे साल पढ़ाई में बहुत मेहनत की थी, नींद छोड़ दी थी लेकिन अब उन्हें यह भी नहीं पता कि क्या उनकी असली कॉपी चेक हुई थी या नहीं।

 

यह भी पढ़ें: ‘समय बचता और कुछ जिंदगी भी…’, NEET की परीक्षा देने आए छात्र क्या कह रहे हैं?

 

जब वेदांत ने यह बात इंटरनेट पर शेयर की तो उन्हें बहुत ज्यादा ट्रोल किया गया। इस मामले में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी भी शामिल हुए। राहुल गांधी ने वेदांत का साथ देते हुए कहा कि एक 17 साल का लड़का जब न्याय मांग रहा था तो उसे मदद मिलने के बजाय इंटरनेट पर ट्रोल किया गया और बीजेपी की आईटी सेल ने उन्हें गलत नाम दिए जैसे ‘राष्ट्र-विरोधी’ या ‘पाकिस्तानी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करके।

सुबह की भागदौड़ से बचना है? रात में ऐसे तैयार करें स्कूल बैग


सुबह के समय बच्चों को स्कूल के लिए तैयार करना हर घर में एक बड़ी चुनौती बन जाता है। जल्दबाजी में बच्चे अपनी किताबें, नोटबुक या जरूरी सामान घर पर भूल जाते हैं। ऐसे में स्कूल बैग को रात में ही तैयार कर लेना एक बेहतरीन उपाय है। माता-पिता को सिर्फ 10 मिनट का समय निकालकर बच्चे का बैग सुकून से व्यवस्थित करना चाहिए। इससे सुबह का काम आसान हो जाता है और बच्चा बिना किसी परेशानी के समय पर स्कूल पहुंच पाता है। 

रात में बैग पैक करने से माता-पिता को भी सुबह की भागदौड़ में राहत मिलती है।यह छोटी सी आदत न सिर्फ समय बचाती है बल्कि बच्चों को जिम्मेदारी सिखाती भी है। विशेषज्ञों के अनुसार, रात में बैग तैयार करने की आदत बच्चों में अनुशासन विकसित करती है। 

लगभग हर घर में सुबह की बिजी लाइफ में यही समस्या देखी जाती है।अगर आप भी सुबह की हड़बड़ी से परेशान हैं तो रात में बैग तैयार करने की आदत डाल लें। इससे न केवल आपका समय बचेगा बल्कि बच्चे भी खुशी-खुशी स्कूल जा सकेंगे। यह छोटा बदलाव पूरे दिन की शुरुआत अच्छी कर सकता है।

 

यह भी पढ़ें: दिनभर समय नहीं मिलता? सिर्फ 10 मिनट का योग भी आपको रख सकता है फिट

10 मिनट में कैसे करें बैग तैयार?

  • टाइम-टेबल जरूर देखें

बैग तैयार करने से पहले स्कूल का टाइम-टेबल एक बार ध्यान से देख लें। इससे आपको पता चल जाएगा कि अगले दिन किन कौन सी किताब और कॉपियां रखनी है। टाइम-टेबल देखकर बैग तैयार करने से बैग का वजन भी कम रहता है और जरूरी सामान भी नहीं छूटता।

  • होमवर्क और असाइनमेंट पहले ही रख लें

अगर बच्चे को अगले दिन कोई होमवर्क, प्रोजेक्ट, चार्ट या असाइनमेंट जमा करना है तो उसे रात में ही बैग में रख दें। सुबह की जल्दी में अक्सर बच्चे इन जरूरी चीजों को रखना भूल जाते हैं जिससे स्कूल में परेशानी हो सकती है। 

  • पेंसिल बॉक्स चैक करें

कई बार बच्चे स्कूल पहुंचने के बाद देखते हैं कि पेंसिल, पेन या रबर खत्म हो गया है। इसलिए रात में ही पेंसिल बॉक्स चेक कर लें। उसमें पेन, पेंसिल, रबर, शार्पनर, स्केल और अन्य जरूरी स्टेशनरी पूरी होनी चाहिए। इससे बच्चे को स्कूल में किसी से सामान मांगने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

  • बैग की सभी पॉकेट्स व्यवस्थित करें

स्कूल बैग में अलग-अलग पॉकेट्स का सही इस्तेमाल करें। किताबें एक जगह, स्टेशनरी दूसरी जगह और टिफिन या पानी की बोतल के लिए अलग स्थान रखें। जब सामान व्यवस्थित रहता है तो बच्चे को स्कूल में भी कोई चीज ढूंढ़ने में परेशानी नहीं होती और बैग साफ-सुथरा बना रहता है।

 

यह भी पढ़ें: घर और गार्डन में नहीं पैदा होगा एक भी मच्छर, अपनाएं ये तरीके

  • यूनिफॉर्म और जरूरी सामान भी तैयार रखें

सिर्फ बैग ही नहीं, बल्कि स्कूल यूनिफॉर्म, जूते, मोजे, बेल्ट और आईडी कार्ड भी रात में ही एक जगह निकालकर रख दें। इससे सुबह बच्चे को किसी चीज की तलाश नहीं करनी पड़ेगी और वह समय पर स्कूल के लिए तैयार हो सकेगा।

  • बैग को एक बार अंतिम रूप से चेक करें

बैग तैयार होने के बाद उसे एक बार फिर से खोलकर देख लें। यह कंफर्म करें कि सभी किताबें, कॉपियां, होमवर्क और स्टेशनरी मौजूद हैं। यह छोटी सी आदत सुबह होने वाली कई परेशानियों से बचा सकती है और बच्चे का दिन बेहतर तरीके से शुरू हो सकता है।

गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु आने से पहले दिखते हैं ये 7 रहस्यमयी संकेत


गरुड़ पुराण हिन्दू धर्म का ऐसा ग्रंथ है, जिसमें व्यक्ति के जीवन और मृत्यु की यात्रा के बारे में बताया गया है। गरुड़ पुराण सनातन धर्म के 18 महापुराणों में से एक है। गरुड़ पुराण में बताया गया है कि व्यक्ति को अपने कर्मों का फल न केवल इस जीवन में मिलता है, बल्कि मृत्यु के बाद भी उन्हीं कर्मों के आधार पर स्वर्ग या नर्क की प्राप्ति होती है। साथ ही, इस जन्म के कर्मों का फल अगले जन्म में भी मिलता है। गरुड़ पुराण के अनुसार, व्यक्ति को मृत्यु आने से पहले कुछ ऐसे संकेत मिलते हैं, जिनके कुछ समय बाद उसका निधन हो जाता है।

 

गरुड़ पुराण के मुताबिक, हर इंसान को मृत्यु से लगभग 6 महीने पहले कुछ खास संकेत मिलते हैं, जिससे उसे आभास हो जाता है कि उसका निधन होने वाला है। कई धार्मिक जानकारों के अनुसार, व्यक्ति के निधन के बाद उसके परिवार को गरुड़ पुराण की कथा सुननी चाहिए, जिससे मृत व्यक्ति की आत्मा को शांति मिलती है। अब सवाल उठता है कि मृत्यु से पहले व्यक्ति को क्या संकेत मिलते हैं? आइए जानते हैं।

 

यह भी पढ़ें: पूर्णिमा से अमावस्या तक, चांद कैसे करता है मन और भाग्य को प्रभावित?

 

मृत्यु से पहले मिलने वाले 7 संकेत

 

1. अपनी नाक न दिखना- जब किसी व्यक्ति को अपनी नाक का आगे वाला हिस्सा यानी नोज टिप दिखाई नहीं देता, तो इसे पहला संकेत माना गया है कि व्यक्ति का निधन जल्द हो सकता है।

 

2. हाथ की रेखाएं हल्की होना- गरुड़ पुराण के मुताबिक, जब व्यक्ति के दोनों हाथों की रेखाएं हल्की पड़ने लगती हैं, तो माना जाता है कि लगभग 6 महीने बाद उसका निधन हो सकता है।

 

3. खुशबू महसूस न होना- पूजा के दौरान घी का दीपक जलाया जाता है। दीपक बुझने के बाद जो सुगंध आती है, यदि वह किसी व्यक्ति को महसूस न हो, तो गरुड़ पुराण के अनुसार यह भी एक संकेत माना गया है कि उसकी आत्मा जल्द ही शरीर छोड़ सकती है।

 

यह भी पढ़ें: रविवार को कैसा रहेगा आपका दिन? पढ़ें राशिफल

 

4. परछाई न दिखना- जब व्यक्ति को अपनी छाया या परछाई दिखाई नहीं देती, तो इसे भी मृत्यु के निकट होने का संकेत माना गया है।

 

5. जीवन के खास पल याद आना- गरुड़ पुराण के अनुसार, निधन से ठीक पहले व्यक्ति को अपने जीवन के कुछ खास पल याद आने लगते हैं। इनमें उसके अच्छे और बुरे दोनों प्रकार के कर्म शामिल होते हैं।

 

6. पूर्वज दिखाई देना- यदि किसी व्यक्ति को सपने में बार-बार अपने पूर्वज, रिश्तेदार या कोई पुराना दिवंगत मित्र दिखाई देने लगे, तो इसे भी मृत्यु का संकेत माना गया है।

 

7. नकारात्मक ऊर्जा – मृत्यु से पहले व्यक्ति को रात के समय डर लगने लगता है। साथ ही, उसे नकारात्मक ऊर्जा, अजीब-सी बेचैनी महसूस होती है और ऐसा आभास होता है कि उसे कोई लेने आया है।

 

नोट- यह लेख धार्मिक ग्रंथों और मान्यताओं पर आधारित है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।

सेशेल्स ने PM मोदी को दिया सर्वोच्च नागरिक सम्मान, जानिए किन-किन देशों ने नवाजा


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सेशेल्स ने पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के क्षेत्र में उनके अहम योगदान के लिए देश के सबसे बड़े राष्ट्रपति सम्मान ‘गार्डियन ऑफ द ब्लू होराइजन’ से सम्मानित किया है। हिंद महासागर में बसे इस खूबसूरत द्वीपीय देश की यात्रा के दौरान उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान दिया गया। इसके साथ ही पीएम मोदी उन चुनिंदा वैश्विक नेताओं में शामिल हो गए हैं, जिन्हें दुनिया के कई देशों ने अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा है।

 

सम्मान मिलने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने इसे जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे सभी देशों को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण की रक्षा केवल आज की जरूरत नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी है। उन्होंने सेशेल्स की सरकार और वहां की जनता का आभार जताते हुए कहा कि भारत हरित और टिकाऊ विकास के लिए लगातार काम कर रहा है।

 

यह भी पढ़ें: समुद्री डाकुओं का अड्डा, एक भी मूल निवासी नहीं, सेशेल्स के बनने की कहानी क्या?

पर्यावरण के लिए पहले भी मिल चुके हैं कई बड़े सम्मान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह सम्मान पर्यावरण संरक्षण और सस्टेनेबल डेवलपमेंट (सतत विकास) के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए मिला है। इससे पहले भी उन्हें कई बड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सम्मानित किया जा चुका है।

 

यह भी पढ़ें: एक धमाका, 30 मिनट की जंग, भीषण तबाही, कराची खौफ के साए में क्यों है?

  • एग्रिकोला मेडल (मई 2026): संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने उन्हें खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने और आधुनिक खेती को बढ़ावा देने में योगदान के लिए यह सम्मान दिया था।
  • सियोल शांति पुरस्कार (2018): अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने और समावेशी आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभाने के लिए उन्हें यह प्रतिष्ठित पुरस्कार मिला था।
  • चैंपियंस ऑफ द अर्थ अवॉर्ड (2018): जलवायु परिवर्तन से निपटने और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए संयुक्त राष्ट्र (UN) ने उन्हें अपना सर्वोच्च पर्यावरण सम्मान प्रदान किया था।

30 से ज्यादा देशों ने किया सम्मानित

सेशेल्स से मिला यह सम्मान दिखाता है कि दुनिया में भारत की साख लगातार बढ़ रही है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसकी पकड़ पहले से ज्यादा मजबूत हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अब तक दुनिया के 30 से ज्यादा प्रभावशाली देशों ने अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया है। इनमें रूस का ‘ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू’, फ्रांस का ‘लीजन ऑफ ऑनर’, अमेरिका का ‘लीजन ऑफ मेरिट’, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का ‘ऑर्डर ऑफ जायद’ और सऊदी अरब का ‘ऑर्डर ऑफ किंग अब्दुलअजीज’ जैसे बड़े सम्मान शामिल हैं। इसके अलावा, हाल के वर्षों में स्वीडन, नॉर्वे, स्लोवाकिया, ब्राजील और इजराइल जैसे देशों ने भी प्रधानमंत्री मोदी को अपने सर्वोच्च सम्मानों से नवाजा है।

जेवर से लखनऊ सिर्फ 100 मिनट में, पूरे प्लान की ABCD


नई दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदलने वाला है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह हाई-स्पीड ट्रेन चलने के बाद उत्तर प्रदेश में यात्रा का समय बहुत कम हो जाएगा। रेल मंत्री ने शनिवार को जेवर में एक कार्यक्रम में बताया कि जेवर से लखनऊ की दूरी बुलेट ट्रेन से सिर्फ एक घंटा 40 मिनट में तय हो जाएगी। 

दिल्ली से लखनऊ का पूरा सफर करीब दो घंटा 10 मिनट में पूरा हो जाएगा। दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर 813 किलोमीटर लंबा होगा। यह 2026-27 के केंद्रीय बजट में घोषित सात नए बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट्स में से एक है। इस बुलेट प्रोजेक्ट का इंतजार अब लोग कर रहे हैं। अगर यह प्रोजेक्ट चालू हुआ तो दिल्ली-NCR के साथ पूर्वी उत्तर प्रदेश का सीधा कनेक्ट होगा। 

यह भी पढ़ें: भारत की पहली बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में नौकरी का मौका, 224 पदों पर निकली भर्ती

किस रूट पर चलेगी ट्रेन?

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस रूट पर दिल्ली, नोएडा, जेवर एयरपोर्ट, मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद, इटावा, कन्नौज, रायबरेली, प्रयागराज, लखनऊ और वाराणसी जैसे महत्वपूर्ण स्टेशन बनाए जाएंगे। खास बात यह है कि इससे पर्यटन उद्योग में क्रांति आ सकती है। दिल्ली से उत्तर प्रदेश के अंतिम कोने तक लोग आसानी से पहुंच सकेंगे। 

अश्विनी वैष्णव, केंद्रीय रेल मंत्री:-
जैसे गंगा बहती है, वैसे ही बुलेट ट्रेन भी चलेगी।

यह भी पढ़ें: भारत की बुलेट ट्रेन का पहला लुक जारी, सूरत-बिलिमोरा रूट पर ट्रायल जल्द

बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट से क्या होगा?

बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट से उत्तर प्रदेश में औद्योगिक और आर्थिक विकास को बड़ा बढ़ावा मिल सकता है। जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट अब शुरू हो चुका है। इस बुलेट ट्रेन से एयरपोर्ट और लखनऊ-वाराणसी जैसी जगहों के बीच कनेक्टिविटी बहुत बेहतर हो जाएगी। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन पर काम पहले से चल रहा है, जबकि ये नई लाइनें आने वाले समय में देश की रेल यात्रा को पूरी तरह बदल सकती हैं।