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रक्षा मंत्री को ही जान से मार डाला, माली में हमले जारी, आखिर क्यों मचा है बवाल?


अफ्रीकी देश माली में जबरदस्त विद्रोह शुरू हो गया। विद्रोही गुटों को रविवार को जबरदस्त कामयाबी मिली जब एक सुनियोजित हमले में माली के रक्षा मंत्री नजरल सादियो कमारा को मार डाला गया। अब विद्रोहियों के हमले बढ़ते जा रहे हैं और उन्होंने कई शहरों और मिलिट्री स्टेशनों पर भी कब्जा कर लिया है। बेहद गरीब देशों में से एक माली लंबे समय से संघर्ष से जूझ रहा है और यहां की सेना भी विद्रोहियों के हमलों से परेशान हो रही है। कहा जा रहा है कि इस बार जिहादियों और विद्रोहियों ने पूरे देश में एकसाथ और जबरदस्त हमला किया है और उत्तरी माली पर विद्रोहियों ने कब्जा जमा लिया। इतना ही नहीं, अब वे राजधानी बमाको में घुसने की कोशिश कर रहे हैं और संघर्ष जारी है।

 

जुंटा के शासन वाले इस देश में हिंसा की ये ताजी ताजा घटनाएं हैं। माली लंबे समय से अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट से जुड़े आतंकवादियों के साथ-साथ उत्तर में अलगाववादी विद्रोह से जूझ रहा है। माली सरकार ने रक्षा मंत्रालय के फेसबुक पेज पर एक पोस्ट करके रक्षा मंत्री के मारे जाने की पुष्टि की और उनके परिवार के प्रति संवेदना जताई। शनिवार को माली की राजधानी बमाको और कई अन्य शहरों पर एक साथ हमला हुआ जो देश की सेना पर अब तक के सबसे बड़े हमलों में से एक था। इस हमले ने माली के सुरक्षा साझेदार रूस को भी चुनौती दी, जिसके सैनिक इस पश्चिम अफ्रीकी देश में तैनात हैं।

 

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सरकार ने शनिवार के हमलों में मारे गए लोगों की संख्या अभी तक नहीं बताई है। पहले केवल यह कहा गया था कि कम से कम 16 लोग घायल हुए हैं। सरकार ने इसे आतंकी हमला करार दिया है। सरकार की ओर से जारी बयान के अनुसार, शनिवार को रक्षामंत्री कमारा के आवास को एक आत्मघाती कार बम हमलावर और अन्य हमलावरों ने निशाना बनाया। बयान में कहा गया, ‘उन्होंने हमलावरों से लोहा लिया और उनमें से कुछ को मार गिराया लेकिन भीषण हमले में वह घायल हो गए और जब उन्हें अस्पताल ले जाया जा रहा था तो रास्ते में ही दम तोड़ दिया।’

किदाल पर विद्रोहियों का कब्जा

 

अलगाववादी तुआरेगों की अगुवाई वाले अजावाद लिबरेशन फ्रंट के एक प्रवक्ता ने बताया कि शनिवार के हमले के बाद रूसी अफ्रीका कोर के सैनिक और माली की सेना किदाल शहर से हट गई और यह वापसी शांतिपूर्ण निकासी के एक समझौते के तहत हुई। इसके प्रवक्ता मोहम्मद अल मौलूद रमजान ने एलान किया, ‘किदाल आजाद हो गया है।’ रविवार देर रात सरकारी टेलीविजन पर जारी एक बयान में सशस्त्र बलों के प्रमुख जनरल उमर डियारा ने माना कि माली की सेना शहर छोड़ चुकी है और अब उसके दस्ते किदाल से करीब 100 किलोमीटर दक्षिण में स्थित शहर अनेफिस में तैनात हो रहे हैं।

 

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बता दें कि अलगाववादी कई सालों से उत्तरी माली में एक स्वतंत्र राज्य बनाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। किदाल लंबे समय तक इस विद्रोह का गढ़ रहा था लेकिन 2023 में माली की सेना और रूसी के सैनिकों ने इसे अपने कब्जे में ले लिया था। उस वक्त यह जुंटा और उसके रूसी साझेदारों के लिए एक बड़ी और प्रतीकात्मक जीत मानी गई थी।

क्या है विवाद की वजह?

 

माली में साल 2012 से ही इस्लामिक उग्रवादी गुट जैसे कि अलकायदा और अन्य आतंकी समूह बेहद सक्रिय हैं। इनकी लगातार सक्रियता के चलते पूरा देश बेहद संवेदनशील रहा है। ये आतंकवादी सरकार से लड़ते रहे हैं। दूसरी तरफ उत्तरी माली के लोग एक अलग और आजाद देश बनाने के लिए संघर्ष करते रहे हैं। अज़ावाद लिबरेशन फ्रंट (FLA) इन्हीं अलगाववादियों की लड़ाई लड़ रहा है। 

 

2012 के मार्च महीने में जब विद्रोह ने तेजी पकड़ी थी तब फ्रांस की सेना की मदद से उन्हें रोका गया था। बाद में फ्रांस की सेना वहां से चली गई। संघर्ष चलता रहा और इसी का फायदा उठाकर सेना ने साल 2020 में पहली बार और फिर 2021 में फिर से तख्तापलट करते सरकार बना ली। मौजूदा वक्त में बाली में इसी मिलिट्री का ही शासन है। एक समय पर सेना के अधिकारी रहे आसिमी गोइता ही माली के राष्ट्रपति हैं।

 

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माली में हुए तख्तापलट के बाद से ही रूस का वैगनर ग्रुप इस्लामिक स्टेट के खिलाफ माली की सेना की मदद कर रहा था। हालांकि, जून 2025 में वैगनर ग्रुप भी माली छोड़कर चला गया। अभी भी रूस की सेना के जवान यहां मौजूद हैं। अब अफ्रीका कॉर्प्स भी यहां काम कर रहा है जो रूस के रक्षा मंत्रालय के अधीन आता है।

 

बता दें कि माली की सत्ता पर काबिज जुंटा ने सभी राजनीतिक दलों को खत्म कर दिया और अपने आलोचकों के खिलाफ क्रूरता से कार्रवाई की। जुंटा ने वादा भी किया था कि मार्च 2024 तक सत्ता जनता को सौंप दी जाएगी लेकिन बिना चुनाव कराए ही साल 2025 में गोइता ने खुद को फिर से अगले 5 साल तक के लिए घोषित कर दिया। साथ ही, यह भी नियम बना दिया कि वह जितनी बार चाहें उतनी बार बढ़ा सकते हैं।

चुनाव से पहले बंगाल में मिले 79 देसी बम, अब NIA को सौंपी गई जांच


पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण के मतदान से पहले भारी मात्रा में देसी बम बरामद किए गए थे। दक्षिण 24 परगना जिले में जिस शख्स के घर से ये 79 देसी बम बरामद किए गए उसे तृणमूल कांग्रेस (TMC) का कार्यकर्ता बताया जा रहा है। अब केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस मामले की जांच नेशनल इंटेलिजेंस एजेंसी (NIA) को सौंप दी गई है। एनआईए के प्रवक्ता ने रविवार देर रात जारी बयान में बताया कि गृह मंत्रालय के आदेश का अनुपालन करते हुए एक केस दर्ज किया गया है जो मूल रूप से शनिवार को कोलकाता के भांगड़ संभाग के उत्तर काशी पुलिस थाना में दर्ज किया गया था और जांच शुरू कर दी है।

 

NIA के प्रवक्ता ने बताया है, ‘यह मामला कोलकाता पुलिस की ओर से बरामद किए गए 79 देसी बम और अन्य आपत्तिजनक सामग्रियों से संबंधित है, जिन्हें एक जगह पर छिपाकर रखा गया था और इनसे मानव जीवन और संपत्ति को खतरा था।’ एक अधिकारी ने बताया कि इससे पहले दिन में चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल पुलिस को देसी बम के अवैध निर्माण में संलिप्त लोगों को गिरफ्तार करने के लिए एक विशेष अभियान शुरू करने का निर्देश दिया था। 

 

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यह घटना 25 अप्रैल को हुई थी। NIA को यह जांच सौंपी गई है क्योंकि इसमें आतंकवादी एंगल होने की आशंका जताई जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, ये बम साउथ 24 परगना जिले के काशीपुर थाने क्षेत्र के माझेरहाट गांव में एक खाली पड़े घर से मिले हैं। 

आरोपी है TMC कार्यकर्ता!

एक अधिकारी ने बताया कि आयोग ने निर्देश दिया है कि इस तरह के किसी भी विस्फोटक के निर्माण से संबंधित मामलों की जांच एनआईए करेगा। चुनाव आयोग का यह निर्देश तब आया जब पुलिस ने दक्षिण 24 परगना जिले के भांगड़ में एक व्यक्ति के घर से बड़ी संख्या में देसी बम बरामद किए, जो बंगाल में सत्तारूढ़ TMC का कथित कार्यकर्ता है। यह घटना राज्य में विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण से कुछ दिन पहले हुई। अधिकारी ने बताया कि विशिष्ट सूचनाओं के आधार पर रफीकुल इस्लाम के आवास पर तलाशी के दौरान विस्फोटक बरामद किए गए।

 

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बता दें कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार का आज आखिरी दिन है। राज्य की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए दो चरण में मतदान कराए जा रहे हैं। पहले चरण में 152 सीट के लिए 23 अप्रैल को मतदान हो चुका है जबकि दूसरे चरण में 142 सीटों पर 29 अप्रैल को मतदान होना है। 

गर्मी में चेहरे पर बार-बार आ रहा है पसीना तो कैसे पाएं छुटकारा?


देशभर में दिल्ली समेत अन्य राज्यों में भीषण गर्मी पड़ रही है। गर्मी की वजह से लोग बेहाल है। इस मौसम में अधिक तापमान और उमस की वजह से पसीना अधिक आता है। कुछ लोगों को ऐसी में रहने के बावजूद भी पसीना आता है। 

 

पसीना आना एक सामान्य बात है। इस वजह से मेकअप भी खराब हो जाता है और आपका आत्मविश्वास भी कम हो जाता है। अगर आपको चेहरे पर अधिक पसीना आता है तो हम आपको कुछ टिप्स दे रहे हैं।

 

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ऑयल और पसीना को कैसे कम करें?

ब्लोटिंग पेपर

 

गर्मी में चेहरे पर ऑयल और पसीना आने की समस्या होना आम बात है। आप पसीने को साफ करने के लिए रूमाल और तौलिए का इस्तेमाल करने से बचें। आप ब्लोटिंग पेपर का इस्तेमाल करें। ये पेपर एक्सट्रा ऑयल को सोखने में मदद करता है। ये आपके मेकअप को खराब नहीं होने देता है।

 

सही स्किनकेयर करें

 

अगर आपकी त्वचा ऑयली है तो हैवी क्रीम लगाने से बचें। इस वजह से पसीना अधिक आता है। आप लाइटवेट क्लींजर का इस्तेमाल करें ताकि त्वचा की नेचुरल ऑयल को नुकसान न हो। आप  जेल बेस्ड या ऑयल फ्री मॉश्चराइजर का इस्तेमाल करें जो पोर्स को खुला रखता है।  त्वचा में लाइटवेट सनस्क्रीन लगाएं। सनस्क्रीन आपको सूरज की हानिकारक किरणों से बचता है। इसे लगाने से पसीना भी कम आता है।

 

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अच्छा प्राइमर लगाएं

 

प्राइमर लगाने से पसीना कम आता है। आप सिलिकॉन बेस्ड या मेट बेस्ड प्राइम लगाएं। सबसे ज्यादा पसीना नाक, होंठों के ऊपर और माथे पर आता है। ये आपकी त्वचा पर एक सुरक्षित लेयर बनाने का काम करता है।

 

पानी पीते रहें

 

शरीर को हाइड्रेटेड रखें। पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर स्वस्थ रहता है। साथ ही त्वचा भी ग्लोइंग रहती है। अगर आपको बहुत ज्यादा पसीना आता है तो कॉफी कम पिएं क्योंकि उसमें कैफीन पाया जाता है।

 

26 अप्रैल का राशिफल, ग्रहों की चाल और शनिदेव की नजर से किसका जीवन बदलेगा, जानिए


आज 26 अप्रैल 2026, दिन रविवार है। हिंदू पंचांग के अनुसार आज वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि है। ज्योतिषीय गणना के मुताबिक आज चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में रहेंगे, जहां उनका मिलन शुक्र के साथ होगा। इस विशेष योग से आज का दिन कलात्मकता, सुख-सुविधाओं और संबंधों के लिए अत्यंत शुभ रहने वाला है। आज का मूलांक 8 है, जिसके स्वामी शनिदेव हैं, जो धैर्य और अनुशासन के साथ कार्यों को पूर्ण करने की प्रेरणा देते हैं। रविवार का दिन होने के कारण सूर्य देव का प्रभाव भी प्रबल रहेगा, जो आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता में वृद्धि करेगा।

 

ग्रहों की चाल दिखाती है कि आज का दिन स्थिरता और भौतिक सुख देने वाला है। वृषभ राशि में चंद्रमा की उपस्थिति मानसिक शांति देगी, हालांकि मंगल और राहु की स्थितियों के कारण कुछ जातकों को निर्णय लेने में थोड़ी सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी। समग्र ऊर्जा की बात करें तो आज का दिन निवेश करने, पारिवारिक मेल-जोल बढ़ाने और अधूरे कामों को गति देने के लिए शुभ है। आइए जानते हैं कि आज सभी 12 राशियों के लिए सितारे क्या संकेत दे रहे हैं।

 

 

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राशिफल और उपाय

 

मेष राशिफल

 

आज का दिन आपके लिए आत्मविश्वास से भरा रहेगा। करियर में नए अवसर मिलेंगे और बिजनेस बढ़ाने की योजना सफल हो सकती है। आर्थिक रूप से दिन लाभकारी है, क्योंकि आज अटका हुआ धन वापस मिल सकता है। परिवार में सुख-शांति रहेगी और जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा लेकिन आंखों का ध्यान रखें।

आज क्या करें: उगते सूर्य को जल अर्पित करें।
आज क्या न करें: किसी से कर्ज न लें।

 

वृषभ राशिफल

 

आपकी राशि में चंद्रमा का प्रवेश होगा, जो आपको मानसिक सुकून देगा। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और आय के नए स्रोत खुलेंगे। प्रेम संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी और परिवार में किसी मांगलिक कार्य की चर्चा हो सकती है।
आज क्या करें: सफेद वस्त्र धारण करें या पास रखें।
आज क्या न करें: क्रोध और अहंकार से बचें।

 

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मिथुन राशिफल

 

आज खर्चों पर नियंत्रण रखने की आवश्यकता है। करियर में कुछ चुनौतियां आ सकती हैं लेकिन अपनी बुद्धि से आप उन्हें सुलझा लेंगे। विदेश व्यापार से जुड़े लोगों को लाभ मिल सकता है। पारिवारिक वातावरण थोड़ा तनावपूर्ण हो सकता है, इसलिए ज्यादा बोलने से बचें। थकान और अनिद्रा की समस्या हो सकती है।

आज क्या करें: गाय को हरा चारा खिलाएं।
आज क्या न करें: बिना सोचे-समझे निवेश न करें।

 

कर्क राशिफल

 

आज का दिन खुशियों भरा रहने वाला है। कार्यक्षेत्र में आपकी तारीफ होगी और पदोन्नति के योग बन रहे हैं। आर्थिक लाभ की प्रबल संभावनाएं हैं। संतान की ओर से शुभ समाचार मिल सकता है। प्रेम जीवन में मधुरता रहेगी। स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें, ठंडी चीजों के सेवन से बचें।

आज क्या करें: माता का आशीर्वाद लेकर दिन की शुरुआत करें।
आज क्या न करें: दूसरों के विवादों में न पड़ें।

 

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सिंह राशिफल

 

आज आप नई ऊर्जा का अनुभव करेंगे। सरकारी कार्यों में सफलता मिलेगी और व्यापार में लाभ होगा। आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी, लेकिन विलासिता पर खर्च बढ़ सकता है। पिता के साथ संबंधों में सुधार होगा। जीवनसाथी के साथ समय बिताने का मौका मिलेगा। पीठ दर्द की शिकायत हो सकती है।

आज क्या करें: आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें।
आज क्या न करें: आलस्य को हावी न होने दें।

 

कन्या राशिफल

 

किस्मत का पूरा साथ मिलेगा। धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी और लंबी दूरी की यात्रा के योग हैं। करियर में किए गए प्रयास अब फल देने लगेंगे। आर्थिक स्थिति स्थिर रहेगी। परिवार के साथ प्रेम बना रहेगा। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा, योग और प्राणायाम करना फायदेमंद होगा।

आज क्या करें: पक्षियों को दाना डालें।
आज क्या न करें: महत्वपूर्ण कागजों पर बिना पढ़े हस्ताक्षर न करें।

 

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तुला राशिफल

 

आज आपको थोड़ा संभलकर रहने की सलाह है। अचानक आने वाले खर्च मानसिक तनाव दे सकते हैं। कार्यक्षेत्र में गुप्त शत्रुओं से सावधान रहें। वाहन सावधानी से चलाएं। पारिवारिक सहयोग मिलेगा, जिससे हिम्मत बनी रहेगी। खान-पान का विशेष ध्यान रखें, पेट की समस्या हो सकती है।

आज क्या करें: मंदिर में घी का दीपक जलाएं।
आज क्या न करें: अजनबियों पर भरोसा न करें।

 

वृश्चिक राशिफल

 

साझेदारी के कामों में आज जबरदस्त सफलता मिलेगी। व्यापार में मुनाफे के संकेत हैं। आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। दांपत्य जीवन में खुशहाली रहेगी और पुराने मित्रों से मुलाकात संभव है। स्वास्थ्य ठीक रहेगा लेकिन मानसिक शांति के लिए ध्यान करें। सामाजिक मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी।

आज क्या करें: हनुमान चालीसा का पाठ करें।
आज क्या न करें: किसी का अपमान न करें।

 

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धनु राशिफल

 

आज आपको कड़ी मेहनत के बाद ही सफलता मिलेगी। कार्यक्षेत्र में काम का दबाव अधिक रहेगा। आर्थिक लेन-देन में सावधानी बरतें। पारिवारिक जीवन में मधुरता बनी रहेगी। मौसमी बीमारियों से बचाव करें। खर्चों की अधिकता परेशान कर सकती है।

आज क्या करें: विष्णु सहस्रनाम का जाप करें।
आज क्या न करें: उधार लेन-देन से बचें।

 

मकर राशिफल

 

विद्यार्थियों के लिए आज का दिन शिक्षा और प्रतियोगिता में सफलता दिलाने वाला है। रचनात्मक कार्यों में रुचि बढ़ेगी। व्यापार में नई योजनाओं पर काम शुरू कर सकते हैं। आर्थिक लाभ मध्यम रहेगा। प्रेम संबंधों में गहराई आएगी। स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह न रहें, व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करें।
आज क्या करें: जरूरतमंदों को दान दें।
आज क्या न करें: पुराने विवादों को न उखाड़ें।

 

कुंभ राशिफल

 

पारिवारिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि होगी। भूमि या वाहन खरीदने के योग बन रहे हैं। करियर में स्थिति सामान्य रहेगी, लेकिन मेहनत जारी रखें। आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी। माता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। घर का वातावरण शांतिपूर्ण रहेगा। हृदय रोगियों को सावधानी बरतनी चाहिए।

आज क्या करें: भगवान शिव का जलाभिषेक करें।
आज क्या न करें: घर में क्लेश न करें।

 

मीन राशिफल

 

आज आपके पराक्रम और साहस में वृद्धि होगी। छोटी दूरी की यात्रा लाभकारी रहेगी। कार्यक्षेत्र में सहकर्मियों का पूरा सहयोग मिलेगा। आर्थिक स्थिति में उन्नति होगी। भाई-बहनों के साथ संबंध मधुर होंगे। स्वास्थ्य के मामले में दिन अच्छा है। कोई नया कौशल सीखने का विचार कर सकते हैं।

आज क्या करें: मस्तक पर केसर का तिलक लगाएं।
आज क्या न करें: जल्दबाजी में कोई फैसला न लें।

 

नोट: यह राशिफल सामान्य ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। अपनी मेहनत पर भरोसा रखें और सकारात्मकता के साथ दिन का आनंद लें।

कोलंबिया में पुल से गुजर रही बस को उड़ाया, 13 लोगों की मौत, 38 घायल


दक्षिण अमेरिकी का एक देश है कोलंबिया। कोलंबिया में शनिवार को एक बस में भीषण विस्फोट हो गया, जिसमें 13 लोगों की मौत हो गई और 38 लोग घायल हो गए। विस्फोट दक्षिण-पश्चिमी कोलंबिया में हुआ। यह विस्फोट बस में सफर कर रहे लोगों को निशाना बनाकर किया गया है। देश के सेना प्रमुख ने इसे आतंकी हमला बताया है।

 

कोलंबिया सरकार ने बताया कि जहां बस में विस्फोट हुआ है, वह क्षेत्र में मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़ा हुआ है। इस क्षेत्र में लगातार हिंसा बढ़ रही है।

 

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हाईवे के ऊपर हुआ हादसा

 

काउका क्षेत्र के गवर्नर ऑक्टावियो गुजमान ने बताया कि यह विस्फोट काजिबियो नगर पालिका में पैन अमेरिकन हाईवे पर बस के गुजरने के दौरान किया गया। काउका की स्वास्थ्य सचिव कैरोलिना कामार्गो ने बताया कि घायलों में पांच बच्चे भी शामिल हैं।

 

वहीं, कोलंबिया सशस्त्र बलों के कमांडर जनरल ह्यूगो लोपेज ने एक जानकारी देते हुए कहा कि यह आतंकी कृत्य है। साथ ही इसके लिए इवान मोर्दिस्को नाम के कुख्यात अपराधी के गिरोह और जैमी मार्टिनेज गुट को जिम्मेदार ठहराया। 

 

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सेना का असंतुष्ट धड़े सक्रिय

 

दोनों गुट अब भंग हो चुके कोलंबिया के रिवॉल्यूशनरी आर्म्ड फोर्सेज के असंतुष्ट धड़े हैं। ये असंतुष्ट धड़े अब भी इस क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन गुटों ने 2016 में सरकार के साथ हुए शांति समझौते को नहीं माना था। कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने हमले की निंदा करते हुए कहा कि कई आदिवासी लोगों समेत निर्दोष नागरिकों को मारने वाले लोग आतंकवादी, फासीवादी और मादक पदार्थ के तस्कर हैं।

 

यह हाल के दिनों में सार्वजनिक ढांचे को निशाना बनाकर किए गए कई विस्फोटों की कड़ी में ताजा हमला है। पिछले दो दिनों में दक्षिण-पश्चिमी कोलंबिया में कम से कम 26 हिंसक घटनाएं हुई हैं।

AAP कार्यकर्ताओं ने बागी सांसदों के घर के बाहर लिख दिया ’गद्दार’, जलाया पुतला


लुधियाना में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने शनिवार को राज्यसभा सांसद राजिंदर गुप्ता के घर के बाहर प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने गुस्सा जताते हुए स्प्रे पेंट से दीवारों पर पंजाबी में नारे लिखे। उनमें ‘गद्दार’ जैसे शब्द भी लिखे गए। उन्होंने राजिंदर गुप्ता का पुतला भी जलाया।

 

यह सब इसलिए हुआ क्योंकि शुक्रवार को राजिंदर गुप्ता समेत राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी (आप) के दो-तिहाई राज्यसभा सांसदों ने बीजेपी में विलय कर लिया।

 

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राघव चड्ढा ने क्या कहा?

राघव चड्ढा ने पार्टी छोड़ते हुए कहा कि आप अपनी स्थापना के मूल सिद्धांतों से भटक गई है। उन्होंने कहा, ‘मैं उनकी गलतियों का हिस्सा नहीं बनना चाहता। मैं सही व्यक्ति गलत पार्टी में था।’

 

चड्ढा ने दावा किया कि आप के 10 राज्यसभा सांसदों में से 7 ने इस फैसले का समर्थन किया। उन्होंने संविधान के प्रावधानों के तहत बीजेपी के साथ विलय के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए।

विवाद की वजह क्या थी?

कुछ दिनों से आम आदमी पार्टी में तनाव बढ़ रहा था। राघव चड्ढा को पार्टी के डिप्टी लीडर पद से हटा दिया गया था। आप के वरिष्ठ नेताओं ने उन पर आरोप लगाया कि वह पार्टी लाइन से अलग चल रहे थे, बीजेपी पर सीधा हमला नहीं कर रहे थे और ‘सॉफ्ट पीआर’ कर रहे थे।

 

चड्ढा ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि संसद में उनका फोकस आम लोगों की समस्याओं पर था, जैसे एयरपोर्ट पर महंगा खाना, मिडिल क्लास पर टैक्स, डिलीवरी वर्कर्स की हालत और टेलीकॉम की कीमतें। इन्हीं मुद्दों से युवाओं के बीच उनकी अच्छी छवि बनी थी।

 

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आप के लिए बड़ा झटका

यह घटनाक्रम आम आदमी पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। राघव चड्ढा के नेतृत्व में हुए इस विभाजन ने पार्टी को काफी नुकसान पहुंचाया है। लुधियाना और जालंधर जैसे शहरों में आप कार्यकर्ताओं ने ऐसे ही प्रदर्शन किए। उन्होंने सांसदों को ‘पंजाब दे गद्दार’ कहकर नारेबाजी की।

 

झालमुड़ी और माछ-भात ही नहीं, बंगाल की थाली में और भी बहुत कुछ है


देश के 4 राज्य और 1 केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव हो रहा है लेकिन पश्चिम बंगाल के माछभात और झालमुड़ी पर राष्ट्रीय मीडिया बहस कर रही है। कहीं झालमुड़ी खाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मीम बन रहे हैं, कहीं मछली खाते पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर की। भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी भी हाथों में मछली लेकर खूब घूम रहे हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का दावा है कि बीजेपी अगर बंगाल की सत्ता में आई तो बंगालियों का माछ-भात बंद हो जाएगा। बंगाल की छवि ऐसी इन दिनों बनी है कि जैसे बंगाल में झालमुड़ी और माछ-भात के अलावा, कोई और व्यंजन ही नहीं है। 

खान-पान का नाता भूगोल से है। दुनिया, यह बात समझने में अक्सर चूक जाती है। तभी तो अगर बिहार में नवरात्रि के दिनों में तेजस्वी यादव और मुकेश सहनी हेलीकॉप्टर में बैठकर मछली खा लेते हैं तो प्रधानमंत्री तक को यह बात खटक जाती है। दूसरी तरफ बंगाल में प्रत्याशी हाथ में मछली लेकर घूमते हैं, सार्वजनिक समारोहों में दिखा-दिखाकर खाते हैं, यह संदेश देने की कोशिश होती है कि भारतीय जनता पार्टी के लोग मांसाहार के विरोधी नहीं है। इन दिनों, ‘माछ-भात’ अखबारों से लेकर टीवी चैनलों तक में जगह घेर रहा है। 

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लोग यह साबित करने में जुट गए हैं कि वे कितने बड़े मांसाहारी हैं। ऐसा दिखाया जा रहा है कि कोलकाता आए और मछली नहीं खाए तो क्या खाए। अब अगर आप भी सोच रहे हैं कि बंगाल में सिर्फ नॉनवेज के डिश, मछली, पोर्क, बीफ ही है तो जनाब, आप ठीक-ठाक गलत हैं। बंगाल में इनके इतर, कई व्यंजन हैं जो लोगों को बेहद पसंद आते हैं-  

अनिमेष मुखर्जी, लेखक, इतिहास की थाली:-
बंगाल में मांसाहार को लेकर नजरिया, देश के दूसरे हिस्सों से बेहद अलग है। यहां मांसाहार को लेकर लोग सहज हैं। जैसे दूसरे राज्यों में नवरात्रि और सावन के दिनों में मांस की बिक्री थम जाती है, वहीं पश्चिम बंगाल में इन दिनों में खपत बढ़ जाती है। यहां एक ही होटल में शाकाहार और मांसाहार दोनों सहजता से परोसे जा सकते हैं, दूसरे राज्य में ऐसा कम देखने को मिलता है। 

बंगाल आएं तो क्या खाएं, आप खुद तय करें 

  • पुचका: खस्ता में, उत्तर बंगाल का सबसे फेमस व्यजन है पुचका। बंगाल का पुचका, पानी-पूरी या गोलगप्पा नहीं है। अनिमेष मुखर्जी बताते हैं, ‘यह यूपी या दिल्ली के गोलगप्पे या पानी पूरी से अलग है। इसका स्वाद जायकेदार है। मसालेदार आलू और खट्टा-मीठा पानी होता है। लोग मशीन से दिल्ली जैसी जगहों पर बनाते हैं, वहां हाथ से बनता है, उसका टेस्ट अलग होता है।’
  • कचौड़ी मटर: मटर की कचौड़ी भी कोलकाता में खूब बिकता है। मटर की कचौरी लोग खूब खाते हैं, कोलकाता का स्ट्रीट फूड है। ताजी मटर, अदरक, हरी मिर्च और मसालों की स्टफिंग के साथ मैदा या गेहूं के आटे से बन रही है। इसका टेस्ट अलग होता है। 

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अनिमेष मुखर्जी:-
बंगाल का खाना दो तरह का है। पूर्वी बंगाल का अलग, पश्चिमी बंगाल का अलग। कोलकाता में पश्चिमी संस्कृति है। यहां के खाने में जितनी जरूरी मछली है, वैसे ही आलू भी है है। आलू की खेती यहां अच्छी होती है। आलू के किसानों की स्थिति बेहतर है। अंग्रेज कॉलोनियां यहां थीं, पुर्तगाली यहां थे। यहां आलू की बेहतर समझ है। आलू के कई व्यंजन यहां कमाल के हैं।’

  • आलू-पोस्तो: अनिमेष बताते हैं आलू-पोस्तो, बंगाल के के व्यंजनों का खास हिस्सा है। लोग महीने में कई दिन इसे चाव से खाते हैं। पोस्तो का मतलब खसखस है। पोस्तो में अफीम का नशा नहीं होता है। रोज खाने से आदत लग सकती है। पोस्तो को उर्दू में खसखस भी कहते हैं। ये अफीम के पौधे के बीज होते हैं। इसकी सब्जी कई तरह से बनाई जाती है।
  • कलकत्ता बिरयानी: कोलकाता की बिरयानी में आलू भी पड़ता है। मांस के अलावा, आलू भी लोग खाना खूब पसंद करते हैं। इस तरह की बिरयानी उबले हुए आलू और नरम गोश्त के साथ तैयार की जाती है। यह भी कोलकाता के लोकप्रिय व्यंजनों में से एक है। 
  • सिंघाड़ा: कलकत्ता का सिंघाड़ा, दूसरे राज्यों के समोसे की तरह नहीं है। आकृति एक जैसी हो सकती है, लेकिन स्वाद काफी अलग है। दूसरी जगहों पर आलू को मसाले में मिक्स करके समोसे में ठूंसते हैं। सिंघाड़े में आलू को टुकड़ों में काटते हैं, जायकेदार मसालों से तैयार करते हैं। लोग वैसे तो मटर और पनीर जैसी चीजों को भी समोसे में डाल देते हैं, लेकिन सिंघाड़े में गोभी भी पड़ती है। 

‘समोसे की एक बात जो आपको जाननी चाहिए’

अनिमेष मुखर्जी, लेखक, इतिहास की थाली:-
समोसा, यायावरों का खाना था। जिन्हें ठंडे प्रदेशों से लंबी यात्राएं करनी होती थीं, उनके लिए यह आसान स्नैक्स था। पहले इसे कीमा डालकर तैयार किया जाता था। मंगोल लड़ाके भी समोसे के शौकीन थे। समोसे का ईरान और पश्चिम एशिया से भी रिश्ता है। आलू समोसे का हिस्सा, बहुत बाद में बना।

कब आया है समोसा?

समोसा, 12वीं से 14वीं शताब्दी के बीच भारत आया है। यह ईरान और पश्चिम एशिया से भारत आया है। मध्य एशिया के व्यापारी और मुस्लिम सुल्तान भारत लेकर आए थे। दिल्ली सल्तनत के दौरान यह शाही दरबारों का हिस्सा बना। भारत ने अपने हिसाब से समोसे का स्वाद बदल लिया। पहले जो कीमा और मेवा भरा जाता था, भारत में आकर आलू और चटपटे मसालों ने समोसे के भीतर जगह बना ली। 

  • मिठाई: बंगाल में छेने की मिठाइयां लोकप्रिय हैं। राजभोग, मलाई चमचम जैसी मिठाइयां लोग खूब खाते हैं। कोलकाता का संदेश भी काफी लोकप्रिय है। अनिमेष बताते हैं कि बंगाल में ही 25 से 30 तरह का संदेश यहां होता है। यहां एक मिठाई है ‘खीर कदम’, कमाल की मिठाई है। खोए और छेने से इसे तैयार किया जाता है।  
  • कलकत्ता का चाइनीज खाना: कोलकाता में चाइनीज मूल के लोग आज भी चाइना टाउन में रहते हैं। 1962 के बाद संख्या कम जरूर हुई है। अनिमेष बताते हैं कि हक्का नूडल, जिसे लोग चाव से खाते हैं, उसकी शुरुआत भी यहीं से हुई। चीन के लोग, 1800 के आसपास यहां स्थापित हो गए थे। मोमोज, तिब्बत से आया। कोलकाता में इंडो चाइनीज खाने का इतिहास 100 साल से भी पुराना है। चाइना टाउन से ही गार्लिक चिकन, चिली फिश और नूडल्स जैसे व्यंजन लोकप्रिय हुए। यहां के रेस्टोरेंट में गोल्डन जॉय, बिग बॉस, किम लिंग और बीजिंग भी खासे प्रसिद्ध हैं। हॉन्ग किचन भी चाइना टाउन में ही सबसे पहले आया था। यह टंगरा के पास मौजूद है। 

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‘जो खाना सहजता से मौजूद है, उसी की सामाजिक स्वीकार्यता है’

अब कोई अगर उम्मीद करे कि केन्या और तंजानिया में रहने वाली मसाई जनजाति, दाल-भात और साग खाकर जिंदा रहे तो यह कितनी अजीब बात है। मसाई, दसानेक, बुशमैन जैसी जनजातियों को सिर्फ शाकाहारी खाना वैसे ही चौंका सकता है, जैसे यहां के लोगों का बंदर, मगरमच्छ, लंगूर और सियार जैसे जानवरों को भुनकर खा जाना। जिसकी उपलब्धता, जहां सहजता से है, वही उसका भोजन है। जहां अनाज आसानी से मिलता है, वहां शाकाहारी लोग ज्यादा हैं, जहां तालाब, नदियां और सागर, वहां मांसाहारी। बंगाल में ही नहीं, मिथिला में भी लोग मांस खूब चाव से खाते हैं। कुछ जगहें इनका अपवाद भी सकती हैं। 

मांसाहार को लेकर जो सहजता बंगाल में है, वैसी दूसरी जगहों पर कम है

ज्यादातर होटल, शाकाहारी और मांसाहारी की बाइनरी में बंटे होते हैं। कई होटलों के नाम के आगे बड़े अक्षरों में लगा होता है कि शाकहारी होटल, वैष्णव होटल। पश्चिम बंगाल में ऐसे होटल थोड़े कम नजर आते हैं। अंजन दत्ता वैष्णव हैं लेकिन मांसाहार से उन्हें परहेज नहीं है। नवरात्रि के दिनों में वर्जित समझे वाली मछली, बंगाल में खूब बिकती है। सावन में लोग प्याज खाने से परहेज करते हैं, बंगाल में इसका भी खूब चलन देखने को मिलता है। धार्मिक स्थानों के आसपास उत्तर भारतीय राज्यों में मछली-मांस की दुकानें बद करने की बात होती है, पश्चिम बंगाल में ऐसा नहीं है। मछली और मांस संस्कृति का हिस्सा है। जन्मोत्सव, मुंडन से लेकर विवाह समारोहों तक, मछली खूब चाव से खाई और खिलाई जाती है, लेकिन यह भी सच है कि सिर्फ मछली और मांस ही पश्चिम बंगाल का खाना नहीं है। पश्चिम बंगाल, जायकेदार है। 

हिंदू धर्म में कुछ लोगों को जलाने की जगह दफनाया क्यों जाता है? जानिए कारण


सनातन धर्म के अनुसार मृत्यु के बाद शरीर को जलाया जाता है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक इंसान का शरीर पांच तत्वों जैसे अग्नि, जल, पृथ्वी, आकाश और वायु से मिलकर बना है।  माना जाता है कि मृत्यु के बाद शरीर को आत्मा से मुक्ति मिलनी चाहिए। इसके अलावा माना जाता है कि व्यक्ति के शव को जलाने से उसका शरीर पांचों तत्वों में मिल जाता है, जिससे वह फिर से प्रकृति का हिस्सा बन जाता है। इसी कारण मृत्यु के बाद लोगों का अग्नि संस्कार किया जाता है।हर व्यक्ति का अग्नि संस्कार कराना जरूरी नहीं है। कुछ विशेष परिस्थितियों में यह नियम बदल जाता है।

 

 हिंदू धर्म में भी कुछ लोगों का मृत्यु के बाद अग्नि संस्कार नहीं किया जाता। कई लोगों को लगता है कि हिंदू धर्म में केवल अग्नि संस्कार की ही मान्यता है, जबकि मुस्लिम धर्म में शव को दफनाया जाता है लेकिन हकीकत कुछ और है। शास्त्रों के अनुसार बच्चों, गर्भवती महिलाओं और साधु-संतों की मृत्यु के बाद शव को जलाने के बजाय दफनाया जाता है। इस नियम के पीछे का कारण क्या है, आइए जानते हैं।

 

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जलाने के बजाय दफनाने का रहस्य

 

सनातन धर्म में कुछ लोग जैसे बच्चे, साधु-संत और गर्भवती महिलाओं को दफनाया जाता है। इन सभी को दफनाने के कारण अलग-अलग हैं। आइए एक-एक करके समझते हैं।

 

बच्चों को दफनाने का कारण

 

धार्मिक शास्त्रों के मुताबिक जिन बच्चों की 14 साल से कम उम्र में मृत्यु होती है, उनका अग्नि संस्कार नहीं करना चाहिए, बल्कि उन्हें दफनाया जाना चाहिए। दफनाने के पीछे की वजह यह बताई जाती है कि बच्चों का मन शुद्ध होता है। न उनका कोई बड़ा पाप होता है और न ही ज्यादा पुण्य। इस वजह से उनके अंतिम संस्कार में अग्नि की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि माना जाता है कि बच्चों की आत्मा मृत्यु के बाद सीधे स्वर्ग लोक चली जाती है, यानी उन्हें मोक्ष मिल जाता है।

 

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गर्भवती महिला को दफनाने की वजह

 

हिंदू धर्म में गर्भवती महिलाओं की मृत्यु के बाद उनके शव को जलाने के बजाय दफनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक इस दौरान महिला एक नए शिशु को जन्म देने वाली होती है, जो पूरी तरह पवित्र होता है।

 

 उसने न कोई बुरा कर्म किया होता है और न ही कोई अच्छा कर्म। इस वजह से माना जाता है कि इस अवस्था में महिलाएं बेहद पवित्र होती हैं। अगर उनकी इस अवस्था में मृत्यु हो जाती है, तो उनके शव को नहीं जलाना चाहिए। इसकी दूसरी वजह यह भी है कि शिशु के मरने के बाद उसे जलाया नहीं जाता, उसी प्रकार अजन्मे शिशु को अंतिम संस्कार में मां के साथ ही दफन किया जाता है।

 

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संतों को पहले ही मिलती है मुक्ति

 

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक साधु-संतों और संन्यासियों का दाह संस्कार नहीं करना चाहिए। धार्मिक जानकारों का मानना है कि साधु-संत और संन्यासी पहले से ही पवित्र होते हैं, क्योंकि वे अपने जीवनकाल में ही मोह-माया से मुक्ति पा चुके होते हैं। इसी वजह से उन्हें मिट्टी में समाधि दी जाती है।


डिस्क्लेमर- यह खबर मान्यताओं पर आधारित है, हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।

 

अमेरिका से सीधे बात नहीं करेगा ईरान, अराघची इस्लामाबाद में मौजूद


ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची शुक्रवार देर रात अमेरिका-ईरान युद्धविराम पर बातचीत के लिए पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व के साथ चर्चा करने के लिए इस्लामाबाद पहुंचे। पाकिस्तान ईरान और अमेरिका के बीच दूसरे दौर की बातचीत करवा रहा है। इस बीच विदेश मंत्री अब्बास अराघची के पाकिस्तान दौरे के दौरान अमेरिकी अधिकारियों के साथ किसी भी तरह के सीधे संपर्क से इनकार कर दिया है। जबकि एक दिन पहले तक अराघची व्यापक तौर पर अमेरिकी अधिकारियों से कुटनीतिक वार्ता करने वाले थे।

 

अब्बास अराघची के इस्लामाबाद पहुंचने के तुरंत बाद, ईरान ने अपनी स्थिति साफ कर दी थी। ईरान ने एक बयान में कहा था कि इस बार दौरे के दौरान अमेरिकी प्रतिनिधियों के साथ कोई आमने-सामने बातचीत नहीं होगी।

 

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मीटिंग होने की योजना नहीं- ईरान

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माएल बाकेई ने X पर कहा कि ईरान और अेमरिका के बीच कोई मीटिंग होने की योजना नहीं है। अमेरिका से सीधे संपर्क के बजाय, उन्होंने कहा कि पाकिस्तान एक बिचौलिए के तौर पर काम करेगा, जिससे दोनों पक्षों के बीच बातचीत आसान होगी।

 

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पाकिस्तान की तारीफ की

बाकई ने पाकिस्तानी सरकार को अमेरिका के थोपे गए हमले को खत्म करने के लिए चल रही मध्यस्थता और अच्छे कामों के लिए धन्यवाद दिया। दरअसल, शुक्रवार को व्हाइट हाउस ने शुक्रवार को पहले संकेत दिया था कि अराघची की यात्रा के दौरान अमेरिकी राजदूत उनसे मिलने वाले हैं।

 

इस बीच, अब्बास अराघची के इस्लामाबाद पहुंचने के बाद उनका पाकिस्तान के डिप्टी PM और विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार, चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ, फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने स्वागत किया। अराघची आज पाकिस्तान के सीनियर लीडरशिप के साथ बैठक करेंगे।

ट्रंप के घटिया बयान का वैसा जवाब मोदी सरकार क्यों नहीं देती, जैसा ईरान देता है?


डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल में भारत और अमेरिका के रिश्ते बेहद शानदार थे। उम्मीद थी कि दूसरा कार्यकाल भी ऐसा ही होगा। 10 मई 2025 की दोपहर तक सबकुछ ठीक चल रहा था। तभी डोनाल्ड ट्रंप ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम करवाने का दावा कर दिया। शाम को विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने प्रेसवार्ता की और ट्रंप के दावे को खारिज कर दिया। रात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित किया। उन्होंने भी कहा कि पाकिस्तान की गुहार पर युद्धविराम का फैसला लिया गया है। किसी तीसरे देश का कोई दखल नहीं था।

 

माना जाता है कि यही से ट्रंप ने भारत के खिलाफ बयानबाजी तेज की। पहले ऑपरेशन सिंदूर पर अनाप-शनाप बातें कहीं। 40 से अधिक बार युद्धविराम करवाने का दावा किया। कई बार अलग-अलग संख्या का जिक्र करके यह भी बताने की कोशिश की कि कितने फाइटर जेट गिरे थे। डोनाल्ड ट्रंप को भारत और पाकिस्तान के रिश्तों के बारे में बखूबी पता है। बावजूद इसके कई बार पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर की तारीफ करके भारत को असहज करने का कोई मौका नहीं छोड़ा।

ट्रंप ने भारत चीन को ‘नरक’ कहा

भारत के खिलाफ रुख अख्तियार करने में ट्रंप एक कदम और आगे निकल गए। उन्होंने अपने ट्रूथ सोशल पर ऐसी पोस्ट साझा की, जिसमें चीन और भारत को धरती पर ‘नरक’ कहा गया। यह टिप्पणी अमेरिका के रूढ़िवादी लेखक और रेडियो होस्ट माइकल सैवेज ने जन्मसिद्ध नागरिकता के मामले में की, जिसे बाद में ट्रंप ने शेयर किया तो दुनिया की नजर में उनकी घटिया सोच सामने आ गई।

विदेश मंत्रालय की ठंडी प्रतिक्रिया पर उठे सवाल

ट्रंप के बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी किया। अपनी साप्ताहिक प्रेसवार्ता में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘हमने कुछ रिपोर्टें देखी हैं…बस इतना ही कहना चाहूंगा।’ 

 

ट्रंप की घटिया बयानबाजी के सामने विदेश मंत्रालय के चार शब्दों को जवाब कहना भी उचित नहीं होगा। ट्रंप जहां एक ओर लगातार भारत की मर्यादा और गरिमा के खिलाफ बयान देने में जुटे हैं तो वहीं मोदी सरकार की प्रतिक्रिया बेहद ठंडी है। ऐसे में सवाल उठा रहा है कि क्या भारत की ठंडी प्रतिक्रिया के कारण ट्रंप मनबढ़ हो रहे हैं?

जो जवाब सरकार को देना था, वह ईरान दे रहा

ट्रंप की आपत्तिजनक टिप्पणी पर दुनिया ने जो उम्मीद भारत से लगा रखी थी, उस पर ईरान खरा उतरा। हैदराबाद स्थित ईरानी कॉन्सुलेट ने अपनी एक पोस्ट में भारत का समर्थन किया और लिखा, ‘चीन और भारत सभ्यता के प्रमुख उद्गम स्थल रहे हैं। दरअसल नरक तो वो जगह है, जहां उसका युद्ध-अपराधी राष्ट्रपति ईरान की सभ्यता को मिटा देने की धमकी देता है।’

 

उधर, विपक्षी दलों ने भी मोदी सरकार की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाया। कांग्रेस ने कहा कि मोदी सरकार की तरफ से पूरा सन्नाटा है। शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने भी विदेश मंत्रालय के बयान को खामोशी भरा बताया और मुंबई स्थित ईरानी कॉन्सुलेट के जवाब की जमकर तारीफ की।

ट्रंप दोस्त या दुश्मन… सबसे बड़ा सवाल

टैरिफ मामले में भी ट्रंप ने भारत के साथ दोस्त कम, दुश्मन वाला रवैया ज्यादा अपनाया। दुनिया में सबसे अधिक टैरिफ भारत (50%) पर लगाया। बाद में रूसी तेल न खरीदने का दबाव बनाया। भारत ने काफी तक मॉस्को से तेल खरीदना कम भी किया। पिछले कार्यकाल में भारत ने 2019 से ईरान से तेल खरीदना बंद कर दिया था। अबकी बार युद्ध के बीच 30 दिनों की छूट मिली। मगर इसे बढ़ाने से अमेरिका ने मना कर दिया।

ट्रंप की वजह से चाबहार भी छोड़ना पड़ा

चाबहार बंदरगाह मामले में भारत को मिली छूट को भी ट्रंप प्रशासन ने आगे नहीं बढ़ाया। नतीजा यह हुआ कि भारत को अपने कदम पीछे खींचने पड़े। पिछले साल ही ट्रंप ने भारत के खिलाफ एक बड़ा बयान दिया और कहा कि उसकी अर्थव्यवस्था मरी हुई है। उन्होंने एच-1बी वीजा पर फीस बढ़ा दी। इसका असर सबसे अधिक भारतीयों पर पड़ा, क्योंकि करीब 70 फीसद एच-1बी वीजा धारक भारतीय हैं।

पाकिस्तान को अधिक महत्व

चुनाव से पहले तक भारत के लोग ट्रंप के प्रति बेहद आशावान थे। लोगों को भारत-अमेरिका संबंध में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद थी। यूरोपियन काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशन के एक सर्वे के मुताबिक भारत की 75 प्रतिशत जनता ट्रंप समर्थक थी। पहले कार्यकाल में ट्रंप और पाकिस्तान के रिश्ते अच्छे नहीं थे, लेकिन दूसरे कार्यकाल में ट्रंप ने भारत की तुलना में पाकिस्तान को अधिक महत्व दिया और संबंधों में लगातार सुधार किया। जहां जरूरी था वहां भी और जहां जरूरी नहीं था… वहां भी, असीम मुनीर का न केवल जिक्र किया, बल्कि तारीफ भी की।

रूस के खिलाफ भारत पर बढ़ाया दवाब

ट्रंप प्रशासन ने रूस के खिलाफ दबाव के तौर पर भारत का हथियार के रूप में इस्तेमाल किया। नई दिल्ली पर भारी दबाव डाला। ट्रंप और उनके मंत्रियों ने टीवी चैनलों और सार्वजनिक मंचों पर भारत पर युद्ध को फंडिंग करने और युद्ध मशीन का समर्थन करने का आरोप लगाया। ट्रंप के कदम और रवैए से संकेत मिलते हैं कि उन्हें नई दिल्ली की भावनाओं की कोई परवाह नहीं। उनके मनमाने व्यवहार के बावजूद मोदी सरकार ने बेहद संयमित और साधा रुख अपनाया। अनाप-शनाप दावों और बयान पर भी नई दिल्ली ने कोई तीखी प्रतिक्रिया नहीं दी। मगर सवाल उठ रहा है कि ऐसा क्यों? 

भारत के आगे क्या चुनौती?

भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि ट्रंप के व्यवहार का अनुमान नहीं लगाया जा सकता है। वह आगे क्या बोलेंगे और क्या करेंगे… यह किसी को नहीं पता है। अभी तक ट्रंप के तमाम आपत्तिजनक बयान पर भारत ने कोई कड़ा रुख नहीं अपनाया। मगर सबसे बड़ी परीक्षा यह है कि भारत कब तक संयम बरतेगा। ट्रंप के व्यवहार से साफ है कि वाशिंगटन पर हद से ज्यादा विश्वास नहीं किया जा सकता है। 

इस वजह से नरम रुख अपना रहा भारत? 

भारत की निगाह 2048 पर टिकी है। मोदी सरकार ने अगले 22 साल में देश को विकसित भारत बनाने का लक्ष्य तय किया है। एक अनुमान के मुताबिक 2050 तक भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होगा। सरकार को उम्मीद है कि अगर सबकुछ सही चलता रहा तो दो दशक के भीतर भारत आर्थिक और सैन्य महाशक्ति होगा। यही कारण है कि भारत सरकार अभी संयम का परिचय दे रही है, ताकि आर्थिक विकास पर कोई बाधा न बन सके, क्योंकि भारत की प्रगति के पथ पर अमेरिका और चीन जैसी महाशक्तियां हैं। वह आसानी से नई दिल्ली को आगे निकलने नहीं देंगी। इसी साल मार्च में नई दिल्ली में आयोजित रायसीना डायलॉग में अमेरिका के उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडौ ने कहा था कि अमेरिका भारत के मामले में वैसी गलती नहीं करेगा जैसा कि 20 साल पहले उसने चीन के साथ की थी।