लखीमपुर में हुई हिंसा के बाद आज यानी कि 18 अक्तूबर को देश भर में रेल रोको अभियान आयोजित करने का ऐलान किया गया था। इसी के चलते अब पुलिस प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है। दरअसल, कृषि कानूनों के विरोध के साथ गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा के इस्तीफे की मांग को लेकर किसानों ने देश भर की रेलों को रोकने की बात कही थी, जिसको देखते हुए यूपी में जगह जगह पर यूपी पुलिस की आरपीएफ जीआरपी समेत कई पुलिस विभागों को तैनात किया गया है, ताकि कहीं भी किसी तरह की कोई गड़बड़ी न होने पाए। सभी संवेदनशील रेलवे स्टेशनों पर भारी तादाद में पुलिस फोर्स तैनात की गई है। प्रशासन की तरफ से उपद्रवियों पर तत्काल रासुका लगाने के निर्देश दिए हैं।
 


आंदोलन को बेअसर बनाने की पूरी तैयारी
जानकारी के मुताबिक, इस आंदोलन को बेअसर बनाने के लिए सभी संवेदनशील और बड़े रेलवे स्टेशनों पर सतर्कता बढ़ाई गई है। इसके साथ ही लगातार किसान नेताओं और संगठनों के पदाधिकारियों से वार्ता की जा रही है। वहीं दूसरी तरफ किसी भी जगह कानून व्यवस्था खराब होने की स्थिति उत्पन्न न होने पाए, इसके लिए पुख्ता तैयारी की गई है। एक ओर 14 संवेदनशील जिलों में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की तैनाती की गई है। 
 


संवेदनशील जगहों पर पीएसी तैनात
वहीं किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पीएसी और अर्ध सैनिक बल की तैनाती की गई है। संवेदनशील जिलों में 44 कंपनी पीएसी और 4 कंपनी अर्ध सैनिक बलों की तैनाती की गई है। त्यौहारों के मौके पर दी गई सुरक्षा व्यवस्था को भी जिलों में रोक लिया गया है और उसे आंदोलन से निपटने के लिए इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए हैं। 
 


कहां किसको मिली तैनाती

बता दें कि लखीमपुर हिंसा के बाद यहां एडीजी जोन एसएन साबत, आईजी रेंज लक्ष्मी सिंह, डीआईजी उपेंद्र अग्रवाल और दो एसपी रैंक के अधिकारी अतिरिक्त रूप से तैनात किए गए हैं। इसके अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हर जिले में एक-एक अतिरिक्त अधिकारियों की तैनाती की गई है। कुल 22 आईपीएस, 14 अपर पुलिस अधीक्षकों की तैनाती संवेदनशील जिलों में की गई है, ताकि इस आंदोलन को बेअसर बनाया जा सके।