वैसे तो होमवर्क कराने की जिम्मेदारी हमेशा मां के पास ही होती है पर एक हालिया अध्ययन में यह खुलासा किया गया है कि होमवर्क कराने में यदि पिता मदद करे तो बच्चे ज्यादा पापा के होमवर्क करान से बच्चे होते हैं। खासतौर से बेटियों पर पिता के पढ़ाने का सबसे ज्यादा असर होता है। 
शोधकताओं का मानना है कि पिता के पढ़ाने का असर बेटे और बेटियों पर अलग-अलग होता है। गणित में कमजोर बेटियां जहां बेहतर हो जाती हैं, वहीं बेटों की भाषा सुधर जाती है। 
शोध में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यह बात हर पिता पर लागू होती है। चाहे वह कम पढ़ा-लिखा, कम अंग्रेजी जानने वाला हो या ज्यादा पढ़ा-लिखा और अंग्रेजी की अच्छी समझ रखने वाला।
शोधकर्ताओं के मुताबिक दरअसल, एक पिता जब अपनी बेटियों को पढ़ाता है तो उसमें सकारात्मकता बढ़ती है और खुद पर भरोसा भी मजबूत हो जाता है। इसका असर उनकी पढ़ाई की क्षमता पर दिखने लगता है। 
आत्मविश्वास बढ़ते ही उनके ग्रेड्स भी सुधरने लगते हैं। दूसरे विषयों में भी उनका प्रदर्शन सुधरने लगता है। वहीं, जो बेटे अपने पिता से पढ़ते हैं, उनकी भाषा और आत्मविश्ववास में बड़ा परिवर्तन देखा गया है। शोध के दौरान पिता से पढ़ने वाले बच्चों का आत्मविश्वास ऐसे बच्चों के मुकाबले ज्यादा पाया गया, जो अपने पिता से नहीं पढ़ते। 
शोध की रिपोर्ट में यह भी खुलासा किया गया है कि जो पिता अपने बच्चों के होमवर्क करने में मदद नहीं करते, उनके बच्चे बड़े होने पर उनसे खुलकर अपनी बात शेयर नहीं कर पाते।