कोरोना के नए वेरिएंट ‘ओमिक्रॉन’ (Corona New Variant Omicron) के आने के बाद देश में तीसरी लहर आना लगभग तय माना जा रहा है. रविवार तक देश में ओमिक्रॉन के 21 मामले सामने आ चुके हैं और वैज्ञानिक आशंका जता रहे हैं कि जनवरी के आखिरी सप्ताह या फरवरी की शुरुआत में ओमिक्रॉन का पीक होगा. IIT के वरिष्ठ वैज्ञानिक पद्मश्री प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने नए अध्ययन में यह दावा किया है. आज ही संक्रमण का दायरा अचानक बढ़ गया जब महाराष्ट्र से 8, राजस्थान से 9 और राजधानी दिल्ली से ओमिक्रॉन के एक मामले की पुष्टि हुई है.

दिल्ली में मिला पहला केस

तंजानिया से दिल्ली आया 37 वर्षीय एक पुरुष ‘ओमीक्रोन’ से संक्रमित पाया गया है और यह राष्ट्रीय राजधानी में कोरोना वायरस के इस नए स्वरूप से जुड़ा पहला मामला और देश में पांचवां मामला है. लोक नायक जय प्रकाश (एलएनजेपी) अस्पताल के अधिकारियों ने बताया कि मरीज का इस समय अस्पताल में उपचार किया जा रहा है और उसे बीमारी के मामूली लक्षण हैं. दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा, ”अभी तक कोविड-19 के 17 मरीजों और उनके संपर्क में आए छह लोगों को लोक नायक अस्पताल में भर्ती कराया गया है. प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, अभी तक जीनोम अनुक्रमण के लिए भेजे गए 12 में से एक नमूने में ओमीक्रोन स्वरूप पाया गया है.

महाराष्ट्र में अब तक 8 संक्रमित

महाराष्ट्र में ओमिक्रॉन वेरिएंट के अब तक कुल कुल 8 केस सामने आ चुके हैं. शनिवार को मुंबई के पास पहला केस मिला. यहां के कल्याण डोंबिवली में एक शख्स दक्षिण अफ्रीका से दुबई और दिल्ली के रास्ते लौटा था. रविवार को पुणे में विदेश की यात्रा करके लौटे चार लोग और उनके करीबी संपर्क में आए तीन लोगों में ओमिक्रॉन मिला है.

राजस्थान में एक साथ 9 केस

राजस्थान में रविवार को 9 संक्रमितों की जीनोम सीक्वेंसिंग में कोरोना वायरस का ओमीक्रोन स्वरूप मिलने की पुष्टि हुई. राजधानी जयपुर में 9 मरीजों में नया वेरिएंट देखने को मिला है. हाल ही में दक्षिण अफ्रीका से आए चार संदिग्ध मरीजों और उनके संपर्क में आए अन्य पांच मरीजों के सैंपल जिनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजे गए थे. जयपुर के सवाई मान सिंह मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. सुधीर भंडारी ने 9 लोगों में कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वेरिएंट मिलने की पुष्टि की है. उन्होंने कहा कि हाल ही में दक्षिण अफ्रीका से जयपुर पहुंचे 4 मरीजों के सैंपल जिनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजे गए थे.

दरअसल ये चारों मरीज कोरोना संक्रमित थे. ऐसे में जब इन मरीजों कि कांटेक्ट ट्रेसिंग की गई तो अन्य 5 मरीज भी इनके संपर्क में आए, जिनकी जांच के बाद यह 5 मरीज भी संक्रमित भी पाए गए. ऐसे में इन 9 मरीजों के सैंपल जिनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजे गए. इनकी रिपोर्ट आने के बाद यह कंफर्म हुआ कि यह सभी मरीज कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन वैरिएंट से संक्रमित हैं.

गुजरात के जामनगर में जिम्बाब्वे से लौटे बुजुर्ग ओमिक्रॉन संक्रमित

कोरोना वायरस के बेहद खतरनाक माने जा रहे वेरिएंट ओमिक्रॉन का देश में तीसरा केस गुजरात में मिला. गुजरात के स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि संक्रमित शख्स जिम्बाब्वे से आया है. गुजरात के स्वास्थ्य विभाग की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, संक्रमित व्यक्ति की उम्र 72 वर्ष है। गुरुवार को इनकी कोविड-19 रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद सैंपल को जिनोम सिक्वेंसिंग के लिए भेजा गया था. गुजरात के हेल्थ कमिश्नर जय प्रकाश शिवहरे ने इस बात की पुष्टि की कि बुजुर्ग व्यक्ति कोरोना के ओमिक्रॉन वेरिएंट से संक्रमित हैं.

कर्नाटक में मिला देश का पहला केस

देश में कोरोना वायरस के खतरनाक वेरिएंट ओमिक्रॉन ने सबसे पहले कर्नाटक में दस्तक दी. दोनों ही संक्रमित मरीज दक्षिण अफ्रीका से आए थे. केंद्रीय संयुक्त स्वास्थ्य सचिव लव अग्रवाल ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा था कि संक्रमित पाए गए मरीजों में से एक की उम्र 64 साल है, जबकि एक शख्स की उम्र 46 साल है. कहा कि जिन दो लोगों में इस वेरिएंट की पुष्टि हुई उनमें से एक पहले ही दुबई लौट चुका है जबकि दूसरे को क्वारंटाइन रखा गया है.

कम घातक होगी तीसरी लहर

इंडिया टुडे की खबर के अनुसार प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने नए अध्ययन में दावा किया है कि तीसरी लहर, दूसरी लहर की तुलना में कम घातक होगी. प्रो. अग्रवाल ने अपने गणितीय मॉडल सूत्र के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला है. गौरतलब है कि इससे पहले प्रो. मणींद्र ने ही अपने गणितीय मॉडल के आधार पर ही दूसरी लहर के बाद नए म्यूटेंट के आने से तीसरी लहर की आशंका जताई थी. अब प्रो. अग्रवाल ने दक्षिण अफ्रीका से फैले ओमीक्रॉन वेरिएंट पर स्टडी शुरू कर ताजा निष्कर्ष जारी किए हैं.

हर रोज मिलेंगे एक से डेढ़ लाख मरीज

इन निष्कर्षों के मुताबिक अब तक जितनी भी केस स्टडी सामने आई हैं, उसमें संक्रमण तेजी से फैल रहा है लेकिन बहुत अधिक घातक नहीं मिला है. प्रो. अग्रवाल के मुताबिक दूसरी लहर के हल्के होने के बाद यानी सितंबर में तीसरी लहर को लेकर उन्होंने जो आंकलन किया था, वह सच साबित होता दिख रहा है. कई देशों में फैलने के बाद भारत में भी ओमीक्रॉन संक्रमण के मामले मिलने लगे हैं. उन्होंने बताया कि जब तीसरी लहर अपने चरम पर होगी, तब रोजाना एक से डेढ़ लाख के बीच संक्रमित मरीजों के मिलने की संभावना है.

बच्चों पर ऐसा रहेगा असर

प्रो. अग्रवाल के मुताबिक कोरोना की तीसरी लहर का असर बच्चों पर कम देखने को मिलेगा. उनमें लक्षण भी कम नजर आएंगे और वे जल्दी रिकवर हो जाएंगे. साथ ही उन्होंने बताया कि ओमिक्रॉन से संक्रमित मरीज जल्दी रिकवर होंगे. उन्हें सामान्य सर्दी-जुकाम जैसे लक्षण होंगे लेकिन दूसरी लहर की तरह अधिक परेशान नहीं होंगे. प्रो. अग्रवाल ने बताया कि यह वेरिएंट नेचुरल इम्युनिटी को ज्यादा बाईपास नहीं कर रहा है. नेचुरल इम्युनिटी का मतलब जो लोग एक बार कोरोना संक्रमित हो चुके हैं, उन्हें अधिक घबराने की जरूरत नहीं है. वे संक्रमण से नहीं बच पाएंगे लेकिन अधिक दिक्कत जैसी स्थिति नहीं होगी.